प्राचीन शिवसंतोषी मंदिर शम्भूनाथ महादेव

  • Home
  • India
  • Azamgarh
  • प्राचीन शिवसंतोषी मंदिर शम्भूनाथ महादेव

प्राचीन शिवसंतोषी मंदिर शम्भूनाथ महादेव Business Promotions Advertising Social Networking Educational Counseling Media Reporter Health Care Insurance Advisor
vivek.upadhyay86@gmail.com

आप सभी को आजमगढ़ के पुराने मंदिर के संशोधन के लिए तत्पर होने की अपील की जाती है। यह प्राचीन मंदिर हमारी संस्कृति और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे समय के साथ अस्तित्व संकट से गुजरना पड़ रहा है। हमें आपके सहयोग की जरूरत है ताकि हम इस पुराने मंदिर को नयी जीवन दे सकें।

मंदिर की मरम्मत और संशोधन के लिए आवश्यक धनसंचय के लिए हम आप सभी से एक छोटे से योगदान का अनुरोध कर रहे हैं। यदि आप इस महत्वपूर्ण कार्य में योगदान करना चाहेंगे, तो कृपया नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें और अपनी योगदान दर्ज करें।

[दान करें लिंक]
7007591069896@paytm
7007591069 google pay
Indian Bank account no 50380664715
IFSE Code IDIB000A688

आपका छोटा सा योगदान भी हमारे संकटमय परिस्थितियों को सुधारने में मदद करेगा और हमें पुराने मंदिर को नवीनतम और आकर्षक बनाने की संभावना प्रदान करेगा। यह आपकी धार्मिक आस्था के प्रतीक के रूप में आपकी सहायता का एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।

आपके सहयोग के लिए हम आपका ह्रदय से आभारी हैं। इस उद्यम में सफलता की कामना करते हुए हम सभी का एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे।

धन्यवाद।

धर्म अडिग है। मज़हब बह गया। हर हर महादेव। पंचवक्त्र मंदिर मण्डी हिमाचल। पिछले 36 घंटों में 9 बार बादल फटने और 13 बार लैं...
15/07/2023

धर्म अडिग है। मज़हब बह गया। हर हर महादेव। पंचवक्त्र मंदिर मण्डी हिमाचल। पिछले 36 घंटों में 9 बार बादल फटने और 13 बार लैंडस्लाइड होने के बावजूद हिमाचल के मंडी ज़िले का ये मंदिर 300 साल लगभग पहले जिसका जीर्णोद्धार राजा सिद्धसेन ने 1684-1727 में करवाया था लेकिन इस के बनने का समय अज्ञात है। पंचवक्त्र शिव मंदिर जस का तस खड़ा है।

ये शिव जी का चमत्कार है या नहीं ये तो शिव जी ही जानें, लेकिन एक बात ये समझ में आई कि जब से दुनिया में प्रॉपर सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू हुई और इमारतें आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग के अनुसार बनाई जाने लगीं तबसे कोई इमारत 100 साल से ज़्यादा नहीं टिकती, ज़्यादातर इमारतों सौ साल के पहले ही जर्जर और ध्वस्त हो जाती हैं, लेकिन हमारे पूर्वज जो आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग का सी नहीं जानते थे उनकी बनाई इमारतें बड़ी से बड़ी आपदा में भी खड़ी हैं, जबकि आधुनिक इमारतें तास के पत्तों की तरह बह रही हैं।जबकि मन्दिर का लकड़ी का दरवाज़ा भी सही सलामत है।

आधुनिक इंजीनियरिंग से बने पुल, बांध, फोरलेन सब टुटकर व्यास मे समा गए परंतु यह मंदिर लगभग कई सालों से सैकड़ों बार व्यास के प्रचंड वेग को सहता हुआ आज भी शान से खड़ा है..........

।। हर हर महादेव ।।
🚩🚩🚩🚩🚩🚩

प्राचीन शिव संतोषी मंदिरआप सभी को आजमगढ़ के पुराने मंदिर के संशोधन के लिए तत्पर होने की अपील की जाती है। यह प्राचीन मंदि...
03/07/2023

प्राचीन शिव संतोषी मंदिर
आप सभी को आजमगढ़ के पुराने मंदिर के संशोधन के लिए तत्पर होने की अपील की जाती है। यह प्राचीन मंदिर हमारी संस्कृति और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे समय के साथ अस्तित्व संकट से गुजरना पड़ रहा है। हमें आपके सहयोग की जरूरत है ताकि हम इस पुराने मंदिर को नयी जीवन दे सकें।

मंदिर की मरम्मत और संशोधन के लिए आवश्यक धनसंचय के लिए हम आप सभी से एक छोटे से योगदान का अनुरोध कर रहे हैं। यदि आप इस महत्वपूर्ण कार्य में योगदान करना चाहेंगे, तो कृपया नीचे दिए गए लिंक का उपयोग करें और अपनी योगदान दर्ज करें।

[दान करें लिंक]
7007591069896@paytm
7007591069 google pay
Indian Bank account no 50380664715
IFSE Code IDIB000A688

आपका छोटा सा योगदान भी हमारे संकटमय परिस्थितियों को सुधारने में मदद करेगा और हमें पुराने मंदिर को नवीनतम और आकर्षक बनाने की संभावना प्रदान करेगा। यह आपकी धार्मिक आस्था के प्रतीक के रूप में आपकी सहायता का एक महत्वपूर्ण योगदान होगा।

आपके सहयोग के लिए हम आपका ह्रदय से आभारी हैं। इस उद्यम में सफलता की कामना करते हुए हम सभी का एक साथ मिलकर प्रयास करेंगे।

धन्यवाद।

would love your feedback. Post a review to our profile. https://g.page/r/CWTOApxFkAeeEBE/review

हार्ट अटैक -: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम...
29/05/2023

हार्ट अटैक -: भारत में 3000 साल पहले एक बहुत बड़े ऋषि हुये थे। नाम था महाऋषि वागवट जी उन्होंने एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम है, अष्टांग हृदयम Astang hrudayam इस पुस्तक में उन्होंने बीमारियों को ठीक करने के लिए 7000 सूत्र लिखें थे। यह उनमें से ही एक सूत्र है। वागवट जी लिखते हैं कि कभी भी हृदय को घात हो रहा है मतलब दिल की नलियों मे blockage होना शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि रक्त blood में acidity अम्लता बढ़ी हुई है अम्लता आप समझते हैं, जिसको अँग्रेजी में कहते हैं acidity अम्लता दो तरह की होती है एक होती है पेट की अम्लता और एक होती है रक्त blood की अम्लता आपके पेट में अम्लता जब बढ़ती है तो आप कहेंगे पेट में जलन सी हो रही है, खट्टी खट्टी डकार आ रही हैं , मुंह से पानी निकल रहा है और अगर ये अम्लता acidity और बढ़ जाये तो hyperacidity होगी और यही पेट की अम्लता बढ़ते-बढ़ते जब रक्त में आती है तो रक्त अम्लता blood acidity होती है और जब blood में acidity बढ़ती है तो ये अम्लीय रक्त blood दिल की नलियों में से निकल नहीं पाती और नलियों में blockage कर देता है तभी heart attack होता है इसके बिना heart attack नहीं होता और ये आयुर्वेद का सबसे बढ़ा सच है जिसको कोई डाक्टर आपको बताता नहीं क्योंकि इसका इलाज सबसे सरल है ! इलाज क्या है ? वागवट जी लिखते हैं कि जब रक्त (blood) में अम्लता (acidity) बढ़ गई है तो आप ऐसी चीजों का उपयोग करो जो क्षारीय हैं आप जानते हैं दो तरह की चीजें होती हैं अम्लीय और क्षारीय ! acidic and alkaline अब अम्ल और क्षार को मिला दो तो क्या होता है ? acid and alkaline को मिला दो तो क्या होता है ? neutral होता है सब जानते हैं तो वागवट जी लिखते हैं कि रक्त की अम्लता बढ़ी हुई है तो क्षारीय (alkaline) चीजें खाओ ! तो रक्त की अम्लता (acidity) neutral हो जाएगी ! और रक्त में अम्लता neutral हो गई ! तो heart attack की जिंदगी मे कभी संभावना ही नहीं ! ये है सारी कहानी ! अब आप पूछेंगे कि ऐसी कौन सी चीजें हैं जो क्षारीय हैं और हम खायें ? आपके रसोई घर में ऐसी बहुत सी चीजें है जो क्षारीय हैं जिन्हें आप खायें तो कभी heart attack न आए और अगर आ गया है तो दुबारा न आए यह हम सब जानते हैं कि सबसे ज्यादा क्षारीय चीज क्या हैं और सब घर मे आसानी से उपलब्ध रहती हैं, तो वह है लौकी जिसे दुधी भी कहते हैं English में इसे कहते हैं bottle gourd जिसे आप सब्जी के रूप में खाते हैं ! इससे ज्यादा कोई क्षारीय चीज ही नहीं है ! तो आप रोज लौकी का रस निकाल-निकाल कर पियो या कच्ची लौकी खायो वागवट जी कहते हैं रक्त की अम्लता कम करने की सबसे ज्यादा ताकत लौकी में ही है तो आप लौकी के रस का सेवन करें, कितना सेवन करें ? रोज 200 से 300 मिलीग्राम पियो कब पिये ? सुबह खाली पेट (toilet जाने के बाद ) पी सकते हैं या नाश्ते के आधे घंटे के बाद पी सकते हैं इस लौकी के रस को आप और ज्यादा क्षारीय बना सकते हैं इसमें 7 से 10 पत्ते तुलसी के डाल लो तुलसी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप पुदीने के 7 से 10 पत्ते मिला सकते हैं पुदीना भी बहुत क्षारीय है इसके साथ आप काला नमक या सेंधा नमक जरूर डाले ये भी बहुत क्षारीय है लेकिन याद रखें नमक काला या सेंधा ही डाले वो दूसरा आयोडीन युक्त नमक कभी न डाले ये आओडीन युक्त नमक अम्लीय है तो आप इस लौकी के जूस का सेवन जरूर करें 2 से 3 महीने की अवधि में आपकी सारी heart की blockage को ठीक कर देगा 21 वें दिन ही आपको बहुत ज्यादा असर दिखना शुरू हो जाएगा कोई आपरेशन की आपको जरूरत नहीं पड़ेगी घर में ही हमारे भारत के आयुर्वेद से इसका इलाज हो जाएगा और आपका अनमोल शरीर और लाखों रुपए आपरेशन के बच जाएँगे आपने पूरी पोस्ट पढ़ी , आपका बहुत बहुत धन्यवाद। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है🙏❤

02/07/2022
18/04/2021

क्रांति 1857 के अमर बलिदानी तात्या टोपे जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन l माँ भारती की स्वतंत्रता के लिए आपके द्वारा दिया गया प्राणों का सर्वोच्च बलिदान ये राष्ट्र सदैव स्मरण करता रहेगा l #तात्या_टोपे
तात्या टोपे जी के बारे में👇

वास्तविक नाम ● रामचंद्र पांडुरंग
जन्म● 1814जन्म
स्थान ● महाराष्ट्र
पिता ● पांडुरंग राव
माता● रुकमा बाई
भाई● गंगाधर
धर्म ● हिन्दू
जाति● देश्ष्ठ ब्राह्मिण

#तात्या_टोपे

Address

Azamgarh
276001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when प्राचीन शिवसंतोषी मंदिर शम्भूनाथ महादेव posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to प्राचीन शिवसंतोषी मंदिर शम्भूनाथ महादेव:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram