01/11/2018
*मौसमी बीमारियों के इलाज में होमियोपैथी का जबाब नही;....डा. आर.पी.आर्य*
मौसम बदल रहा है , गर्मी और बारिश के मौसम से सर्दी में हम प्रवेश करने जा रहे हैं। ऐसे मौसम में सर्दी, जुकाम, बुखार आना, गले का इन्फेक्शन आदि सामान्य बीमारियों का प्रभाव बढ़ जाता है। सामान्यतया पाई जाने वाली बीमारियों में मुख्य रूप से वायरल फीवर, डेंगू फीवर, फ्लू , एलर्जी एवम हे फीवर आदि हैं।
*डेंगू फीवर;*
साधारणतया सितम्बर-अक्टूबर के महीने में होने वाली बीमारी है। जिसके मुख्य लक्षण बुखार ,सिरदर्द , उल्टी, मांसपेशी व जोड़ों में दर्द आने के साथ साथ त्वचा पर विशेष प्रकार के दाने उभर आना हैं। एडीस मच्छर इसे फैलाने में सहायक होता है। ब्लीडिंग होने के साथ शॉक में चले जाना इसका सबसे खतरनाक लक्षण होता है परंतु बहुत कम देखने को मिलता है।
*वायरल फीवर;*
वाइरल फीवर के भी लक्षण बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, के साथ सर्दी जुकाम आदि होते हैं। लगभग 1 हप्ते में स्वयं ही यह बीमारी चली जाती है। अगर सही से इलाज किया जाए तो 2-3 दिन में भी ठीक हो जाता है।
*फ्लू (इन्फ्लुएंजा);*
फ्लू का वायरस अपने रूप बदलने में माहिर होता है,जिसे जेनेटिक ड्रिफ्ट कहते हैं। इसी वजह से हर बार एक नए रूप और नए लक्षण के साथ मिलता है। जैसे साधारण फ्लू, बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू आदि। स्वाइन फ्लू सबसे आधुनिकतम स्वरूप है जो H1N1 वायरस की वजह से होता है, जिसके मुख्य लक्षण सर्दी, ठंडी के साथ बुखार, सिरदर्द, खाँसी, बदनदर्द, गले का इन्फेक्शन, थकावट हो जाना आदि है।
*एलर्जी एवं हे फीवर;*
पिछले लेख में हम इसके बारे में विस्तृत रूप से बात कर चुके हैं।....लिंक http://sikanderpurlive.com/?p=6227
*क्या करें ;*
● स्वयं की एवं अपने आस पास की सफाई पर अवस्य ध्यान दें। खासकर बच्चों के मामले में।
● डेंगू एवं मलेरिया से बचने के लिए खासकर, अगल बगल बारिश या नाले का पानी इकट्ठा न होने दें। मच्छरदानी का प्रयोग करें।
● किसी रोगग्रस्त व्यक्ति से कम से कम 1 मीटर की दूरी, स्वाइन फ्लू को रोकने में मददगार होती है।
● बीमारियों से डरें नही , *शिक्षित एवं योग्य चिकित्सक* की सलाह से उसका सामना करें।
● *बीमारी के दौरान पूरी तरह आराम करें।* किसी तरह का वर्जिश एवं शारीरिक श्रम, बीमारी को ठीक होने में अवरोध पैदा करता है, क्योकि बीमारी से लड़ने के लिए हमारे प्रतिरोधी तंत्र को अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। जिसकी आपूर्ति हमारे शरीर द्वारा ही किया जाता है।
● अपने बारे में चिकित्सक से खुलकर बात चीत करें, खासकर बीमारी की शुरुवात के बारे में। चिकित्सक का सहयोग करें तभी वह आपका इलाज कर सकता है।
*क्या न करें;*
★ साधारण ज्वर, खासकर फ्लू, एलर्जी, वायरल फीवर में तुरंत एवं अनावश्यक रूप से एंटीबायोटिक एवं अन्य दवाओं के प्रयोग से बचना चाहिए। क्योंकि उल्टा ये तमाम दूसरी बीमारियों को जन्म देता है।
★ घर के सदस्य आपसी कलह एवं विद्वेष से बचें खासकर बच्चों के सामने, क्योकि इसका सीधा सीधा असर उनपर पड़ता है।क्योंकि इन बीमारियों का सीधा संबंध हमारे इमोशन से होते हैं। (जैसे गुस्से का संबंध डेंगू से, चिड़चिड़ाहट का संबंध एलर्जी से, डर का संबंध फ्लू एवं फेफड़े की बीमारियों से होता है।)
★ बीमारी के दौरान बहुत गरिष्ठ , तेल मासाले वाले भोजन की बजाय, साधारण भोजन का उपयोग करें।
*होम्योपैथिक चिकित्सा;*
जैसा कि हम पहले भी बात कर चुकेे हैं कि होम्योपैथिक इलाज के लिए लक्षणों का मिलना अति आवश्यक है। होम्योपैथी में कोई एक दवा सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नही होती, लक्षणों के आधार पर हर मरीज के लिए अलग दवा का चुनाव चिकित्सक द्वारा किया जाता है। दरअसल ये केवल बीमारी के लक्षण नही बल्कि हमारे शरीर की भाषा होती है जिसे अंदर चल रही गड़बड़ियों को पहचानने एवं दवा के चुनाव में मदद मिलती है। इसलिए स्वयं या किसी झोलाछाप डॉक्टर की दवाएं खाकर पहले ही रोग के लक्षण को नष्ट न करें। योग्य चिकित्सक द्वारा इन लक्षणों को मिलाकर दवाएं देने से रोग बहुत ही आसानी से चला जाता है, और रोगी बिल्कुल पहले की तरह स्वस्थ हो जाता है।
*होम्योपैथी एक पूरी तरह प्राकृतिक नियमों पर आधारित चिकित्सा प्रणाली है, जिसे अपनाने से मात्र बीमारियां ही दूर नही होती बल्कि आपको प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन सुचारू रूप से जीनें में भी मदद मिलती है।*
*जनहित में जारी*
*डा. आर. पी. आर्य*
बी एच एम एस(लखनऊ), एम डी(होम्यो), एस सी पी एच (मुम्बई)
डिवाइन होम्यो क्लिनिक एवं रिसर्च सेंटर, सिकंदरपुर, बलिया
सिकन्दरपुर। नगर के बालुपुर रोड स्थित डिवाईन होम्यो क्लीनिक एवं रिसर्च सेन्टर के संस्थापक व होम्योपैथिक पद्धति स....