अमरीश कुमार यादव

अमरीश कुमार यादव तुम्हारा_तुम

04/02/2026

72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती 2011 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 658 अभ्यार्थियों को दिए गए याची लाभ से प्रदेश में लूट का एक इतना मजबूत तंत्र विकसित हुआ कि उससे राज्य अभी तक उभर नहीं पाया।
658 के सापेक्ष प्रदेश भर में कितने याची बनाए गए यह बात किसी से छुपी नहीं है। देख रहा हूँ फिर से याची लाभ की संभावना बताई जा रही है और इसी संभावना के सहारे फिर से ख़ूब खेला चल रहा है। ऐसा नहीं है कि याची लाभ का विषाणु सिर्फ इसी भर्ती के अभ्यार्थियों को अपनी जद में लिया हो, अपितु इस प्रकरण के बाद आई भर्तियों के तमाम अभ्यर्थियों को इस विषाणु ने बीमार किया।
पूर्णतः इनकार नहीं किया जा सकता इस संभावना से की 10 बरस की आर्थिक उगाही के सापेक्ष फिर से कुछ लोगों को याची लाभ मिल जाए और फिर से लाखों अभ्यर्थी उसी आग में झोंक दिए जाएं जिससे पिछले दशक में झुलसे थे।

@बाकी इस प्रकरण में जब ‘न्याय’ आया तो मैं लघुशंका मिटाने चला गया था जिसके कारण देख नई पाया।

27/01/2026

पिछले एक दशक में सब कितना मेहनत करके एक संकल्पना का सामान्यीकरण किया कि सरकार द्वारा लाई किसी भी नीति का विरोध धर्म का विरोध है, राष्ट्र का विरोध है। एक ‘महामानव’ को धर्म और राष्ट्र के समानांतर खड़ा कर दिया। परन्तु ‘यूजीसी बिल’ लाकर इस संकल्पना पर रात दिन मेहनत करने वाले अगड़े बुद्धिजीवियों को ही छेड़ दिया गया है।
खैर, ‘यूजीसी बिल’ का क्या हश्र होगा यह तो विरोध की अवधि और आक्रामकता तय करेगी परन्तु यदि इस पूरे घटनाक्रम को देश नंगी आँखों से देख पाया तो पुनः जान पाएगा कि सरकार की किसी भी नीति पर अपना विरोध दर्ज कराना एक लोकतांत्रिक गतिविधि है, न कि धर्म और देश विरोधी गतिविधि।

@हम तो बिहार वाले ‘झटका मीट एंबेसडर’ के बयान का इंतजार कर रहे हैं, ‘जिसको दिक्कत हो पाकिस्तान चला जाय।’ 😊

कवर फोटो में सनातन को परिभाषित करती छवियाँ, प्रोफाइल फोटो में स्त्रीत्व की कोमलता , पेज नेम में बनारसी इश्क, कितना एंटीव...
25/01/2026

कवर फोटो में सनातन को परिभाषित करती छवियाँ, प्रोफाइल फोटो में स्त्रीत्व की कोमलता , पेज नेम में बनारसी इश्क, कितना एंटीवेनम चाहिए किसी के आत्मा में चढ़े जहर को उतारने के लिए!

आरक्षण के लिए तय मानक अगले दो कॉलम में दर्ज किए गए हैं। जिन पिछले दो कॉलम को दिखाकर आरक्षण की कुरूपता दिखाई जा रही है, द...
15/01/2026

आरक्षण के लिए तय मानक अगले दो कॉलम में दर्ज किए गए हैं। जिन पिछले दो कॉलम को दिखाकर आरक्षण की कुरूपता दिखाई जा रही है, दरहसल वो दोनों कॉलम प्रत्यक्ष तौर पर SC/ST/OBC अभ्यर्थियों से संबंधित जरूर दिखाई देते हैं लेकिन अप्रत्यक्ष तौर पर उन रसूखदार शिक्षा व्यवसायियों से संबंधित हैं जिनके मेडिकल कॉलेजों की सीटें खाली जा रही हैं।
सिर्फ रसूखदार शिक्षा व्यवसायियों के कॉलेजों की सीटें भरने के लिए यदि कटऑफ स्कोर –40 कर दिया गया हो फिर उसको आरक्षण की कुरूपता दिखाना ठीक नहीं है।
बाकी अगस्त 2025 में 235 स्कोर पर एडमिशन लेने वाला जिसको इंजेक्शन लगा देता वह मर ही जाता, लेकिन उसी परीक्षा से जनवरी 2026 में 103 स्कोर पर एडमिशन लेने वाला इंजेक्शन लगाकर सबको अमर कर देगा।

10/01/2026
29/09/2025

माननीय सुप्रीम कोर्ट में 2016 से 2025 तक की मैराथन दौड़। जगजाहिर है कि ख़ूब धन खर्च हुआ।
जिन बुद्धिजीवियों ने इस लड़ाई के महत्व को जानते हुए धन खर्च किया उन्होंने अपने धन खर्च की प्रक्रिया को ‘सहयोग’ से संबोधित किया।
जिन जाहिलों ने इस लड़ाई के महत्व को हमेशा खारिज करते हुए तगड़ा विरोध किया उन्होंने हमारे द्वारा स्वीकार किए गए सहयोग की प्रक्रिया को अक्सर ‘वसूली’ नाम दिया।
असफलता लगी होती हाथ तो स्वीकार कर लेता वसूली शब्द भी। लेकिन जिन सफलताओं के साथ आज हम खड़े हैं उसके साथ वसूली शब्द कतई स्वीकार्य नहीं है।
बाकी नतमस्तक हूँ सहयोग करने वाले सभी विशेष शिक्षक साथियों के प्रति जिनके सहयोग से पूरे विशेष शिक्षा क्षेत्र की दिशा और दशा दोनों में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहा है।

@सहयोग लेने और वसूली करने में नैतिक अंतर है। मैंने इस लड़ाई में हमेशा लोगों से सहयोग की अपील की है, सूची में सबसे अधिक सहयोग वाले अपने नाम के साथ। वसूली नहीं की है कभी। इसलिए हमारी पोस्ट पर जब भी आए नैतिकता का ज्यादा नहीं तनिक ख़्याल जरूर रखा करें।

धन्यवाद!

28/09/2025

उत्तर प्रदेश के जो भी विशेष शिक्षक साथी टेट पास नहीं है, उनसे कहना बस इत्ता भर है कि अब आपके लिए STET एकमात्र सच है जिसकी तैयारी में आप जुट जाइए। STET आपके लिए रखा गया सरलतम अंतिम विकल्प है।
लिख इसलिए रहा हूँ कि सुन रहा हूँ कि कोई पुराने असफलतम नेता टेट से छूट दिलाने के लिए लोगों को लामबंद कर रहे हैं। वो भी ऐसे वक्त में जबकि 1995 का लगा शिक्षक भी टेट की तैयारी कर रहा है।
सच का रास्ता तनिक लंबा हो जाय इसका ए मतलब कदापि नहीं कि झूठ की गोद में बैठकर आप मंजिल पा लेंगे।

@सिर्फ तैयारी में लग जाइए।

कित्ते आश्चर्य की बात कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई और कड़े आदेशों के बाद भी किसी भी राज्य का कोई भी शैक्षिक ...
27/09/2025

कित्ते आश्चर्य की बात कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के नियमित सुनवाई और कड़े आदेशों के बाद भी किसी भी राज्य का कोई भी शैक्षिक पटल दिव्यांग बच्चों की शिक्षा के संदर्भ में 21सितंबर2022 को आरटीई एक्ट में हुए संशोधन को पूरा पढ़ने को तैयार नहीं है। जिसमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर क्रमशः 1:10/1:15 अनुपात के साथ टिप्पणी1 में उल्लिखित है कि “एक स्कूल और एक (न्यूनतम) विशेष शिक्षा शिक्षक मानदंड यथावत है।
इसमें विचारणीय बात यह है कि उपरोक्त शर्त के आधार पर क्या किसी राज्य में वर्तमान में आवश्यक विशेष शिक्षकों की तुलना में कार्यरत विशेष शिक्षकों की संख्या अधिक हो सकती है?
ऐसे में सवाल है राजस्थान में विशेष शिक्षा संगठनों पर जो जरूरी पटलों पर बैठे जिम्मेदारों को आरटीई एक्ट में अंकित पंक्तियों को समझाने में नाकाम रहा है, वरन जिस राज्य ने विशेष शिक्षकों की सर्वप्रथम सर्वाधिक रिक्तियाँ निकली हों वहां आज आज के पत्रों में कुछ और बेहतर आने के बजाय कार्यरत के आधिक्य की बात हो रही है।
राजस्थान के विशेष शिक्षक संगठनों के नीद की अवधि यदि लंबी रही तो इसका नुकसान सभी को सहना होगा।

धन्यवाद!

जलमहल/डीग
27/09/2025

जलमहल/डीग

2017/सितम्बर/सीतापुर/सम्मान
27/09/2025

2017/सितम्बर/सीतापुर/सम्मान

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