YOGA VYM

YOGA VYM YOGA CLASS AT YOUR HOME.... When, I heard the word tension/stress from a third class student, I was surprised and thought. Which is with in our self.

What type of tension is having this boy. After some time, I came to the conclusion why today’s children are using the word tension. Because, we, as a member of society, are giving countless pressure on small brain so, they, are also started taking, giving and living with tension (in stress). Here , I would like to say my students. Stress is the demand of this competitive era, because without stress we can not do any thing in this competitive era but you should think what is your need ? living in stress or to deal stress with an understanding in calm way. And achieve what you want in materialistic or spiritual world. But, now the need of the time is we should take a step to stop this enemy(stress). Now the question is how we can control or manage this (stress) ? We Indians have a great system to fight with enemy’s , which is in our self. It is, Yoga system. Yoga is an ancient art and science of wisdom, which provides us a complete blue print of solution of maximum problems. We, have completely surrender ourselves to the technology and forgotten our own abilities ,as we, have got into a series problems which has affected our body . Lifestyle is one of the biggest problem in the present world ,many have improper eating habits ,sleep and other activities which in turn affects our brain. Our great masters taught us the right science of living through yoga . Yogic concepts can be used for many problems. This book will give you techniques on how to build and enhance concentration , memory & solve the problems of students life.

15/12/2025

चार बच्चे पैदा करने के २७ सबसे बड़े लाभ :--
१-- पारिवारिक रिश्ते चाचा, ताऊ, मौसी, जेठी,बुआ आदि बने रहेंगे।
२-- घर में आए दिन कोई ना कोई उत्सव होते रहेंगे।
३-- घर में जब भी कोई बड़ा काम होगा तो घर में उसे करने के लिए पर्याप्त लोग होंगे।
४-- कोई एक बच्चा यदि गलत काम करेगा तो बाकी तीन बच्चों की उस पर नजर रहेगी।
५-- बुढ़ापे में मां बाप को किसी काम के लिए इधर उधर नहीं भागना पडेगा।
६-- ४ बच्चे होंगे तो कोई भी उनसे लड़ने से पहले ४ बार सोचेगा।
७-- ४ बच्चे होंगे तो मां बाप की ज़िम्मेदारी बढ़ जाएगी और वे फालतू का खर्च नहीं करेंगे।
८-- ४ बच्चे होने से सरकारी स्कूलों की अहमियत बढ़ेगी और प्राईवेट संस्थाओं की लूट बंद होगी।
९-- ४ बच्चे होने से मां बाप चारों बच्चों के लिए भविष्य में घर बनाने के लिए चार जगह चार भूमि के टुकड़े खोजेंगे और समय पर घर बनाएंगे।
१०-- चार बच्चे होने से पैतृक संपत्ति बची रहेगी।
११-- चार बच्चे होने से यदि दो बच्चों की मृत्यु २४ साल से पहले आकस्मिक हो जाती है, तो दो बच्चे बचें रहेंगे।
१२-- चार बच्चे होंगे तो बूढ़े मां-बाप को कंधे पर उठाकर श्मशान घाट तक ले जाने के लिए चार कंधे होंगे।
१३-- चार बच्चे होने से कोई भी आपके घर की महिलाओं पर कु दृष्टि नहीं रखेगा।
१४-- चार बच्चे होंगे तो आपके गांव में आप सभी की अच्छी खासी जनसंख्या रहेगी और आप संगठित होकर लड़ सकते हैं।
१५-- इकलौते बच्चे के बिगड़ने के चांस ८०% होते हैं और चार बच्चे होने पर यह संभावनाएं केवल १०% रह जाती है, क्योंकि चारों बच्चे आपस में एक दूसरे की कमियां गिनाते रहते हैं।
१६-- चार बच्चों में यदि चारों राम - लक्ष्मण - शत्रुघ्न और भरत की तरह निकल गये तो रावण की लंका जलनी तय है।
१७-- यदि नौ लड़कियां नव दुर्गा की तरह हो गयी तो महिषासुर और अधर्मी राक्षसों का अन्त तय है।
१८-- लड़कियां भी दो तीन रहेंगी तो मां को आराम मिलेगा और परिवार में साफ सफाई और शांति रहेगी।
१९-- बिना लड़की के परिवार में रौनक नहीं होती।
२०-- बच्चे खूब होंगे तो हर दो तीन वर्ष बाद घर में कोई ना कोई विवाह और शुभ कार्य होते रहेंगे और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
२१-- चारों बच्चे संगठित रहेंगे तो वंश‌ वृद्धि भी होगी और समाज भी संगठित बना रहेगा।
२२-- एक बच्चा यदि गलत करेगा तो बाकी के तीन उसे थप्पड़ मारकर सही दिशा में लाएंगे।
२३-- अधिक बच्चे होने पर बड़े बच्चे को अपनी जिम्मेदारी का अनुभव होगा।
२४-- अधिक बच्चे होने पर महिलाएं जल्दी बीमार नहीं होगी और उन्हें ना ही गर्भ का कैंसर और ना ही स्तन कैंसर होगा।
२५-- अधिक बच्चे होने पर नवरात्रि में कन्या जिमाते समय पूरी नौ कन्याएं उपलब्ध होंगी और माता की कृपा भी बनी रहेगी।
२६-- चार बच्चे होंगे तो एक बच्चा यदि मानसिक रूप से अपंग होगा तो तीन बच्चों में बारी बारी से जिम्मेदारी बंट जाएगी।
२७-- चार बच्चे पैदा करने पर ही दो मंजिला कोठी और आठ कमरे बनाने का लाभ है अन्यथा इकलौता बच्चा पैदा करने पर आलीशान कोठी यदि आप बनाते हैं, तो आप धरती के सबसे बड़े मूर्ख हैं।
बाकी आपकी इच्छा बाकी यह संदेश हर सनातनी तक पहुंचे --
वेद कहतें हैं, कि हे देवताओं हमारी संतानों की वृद्धि हो और सनातन कुल परम्परा बनी रहे , और हम सभी ऋषि शक्ति सम्पन्न और बलिष्ठ सैकड़ों संतानों की वृद्धि करें।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Please forward in all

12/12/2025

भारत के प्रसिद्ध ग्यारह संत और उनके चमत्कार
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बचपन से आप सुनते आये होंगे कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ा, तब-तब भगवान ने किसी ना किसी रूप में जन्म लिया और बुराइयों का अंत किया।

ठीक इसी तरह कई संत महात्माओं ने भी समय-समय पर जन्म लिया और अपने चमत्कार से समाज को सही मार्ग दिखाया है. फिर चाहे वह संत एकनाथ रहे हों, या फिर संत तुकाराम. तो आइये चर्चा करते हैं कुछ ऐसे ही संतों की, जिन्होंने अपने चमत्कारों और उससे ज्यादा अपने ज्ञान और परमारथ से लोगों का कल्याण किया।

संत एकनाथ
〰️〰️〰️〰️महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संतो में से एक माने जाते हैं. महाराष्ट्र में इनके भक्तों की संख्या बहुत अधिक है. भक्तों में नामदेव के बाद एकनाथ का ही नाम लिया जाता है. ब्राह्मण जाति के होने के बावजूद इन्होंने जाति प्रथा के खिलाफ अपनी आवाज तेज की. समाज के लिए उनकी सक्रियता ने उन्हें उस वक्त के सन्यासियों का आदर्श बना दिया था. दूर-दूर से लोग उनसे लोग मिलने आया करते थे. उनसे जुड़े एक चमत्कार की बात करें तो…

एक बार एकनाथ जी को मानने वाले एक सन्यासी को रास्ते में एक मरा हुआ गथा मिलता है, जिसे देखकर वह उसे दण्डवत् प्रणाम करते हैं और कहते हैं ‘तू परमात्मा है’. उनके इतना कहने से वह गधा जीवित हो जाता है।

इस घटना की खबर जब लोगों में फैलती है, तो वह उस संत को चमत्कारी समझकर परेशान करने लगते हैं. ऐसे में सन्यासी संत एक नाथ जी के पास पहुंचता है और सारी बात बताता है. इस पर संत एकनाथ उत्तर देते हुए कहते हैं, जब आप परमात्मा में लीन हो जाते है तब ऐसा ही कुछ होता है. माना जाता है कि इस चमत्कार के पीछे संत एकनाथ ही थे।

संत तुकाराम
〰️〰️〰️〰️ भगवान की भक्ति में लीन रहने वाले संत तुकाराम का जीवन कठिनाइयों भरा रहा. माना जाता है कि उच्च वर्ग के लोगों ने हमेशा उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की. एक बार एक ब्राहाण ने उनको उनकी सभी पोथियों को नदी में बहाने के लिए कहा तो उन्होंंने बिना सोचे सारी पोथियां नदी में डाल दी थी. बाद में उन्हें अपनी इस करनी पर पश्चाताप हुआ तो वह विट्ठल मंदिर के पास जाकर रोने लगे।

वह लगातार तेरह दिन बिना कुछ खाये पिये वहीं पड़े रहे. उनके इस तप को देखकर चौदहवें दिन भगवान को खुद प्रकट होना पड़ा. भगवान ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए उनकी पोथियां उन्हें सौपी।आगे चलकर यही तुकाराम संत तुकाराम से प्रसिद्ध हुए और समाज के कल्याण में लग गये।

संत ज्ञानेश्वर
〰️〰️〰️〰️ कि गिनती महाराष्ट्र के उन धार्मिक संतो में होती हैं, जिन्होंने समस्त मानव जाति को ईर्ष्या द्वेष और प्रतिरोध से दूर रहने का शिक्षा दी थी. संत ज्ञानेश्वर ने 15 वर्ष की छोटी सी आयु में ही गीता की मराठी में ज्ञानेश्वरी नामक भाष्य की रचना कर दी थी. इन्होंने पूरे महाराष्ट्र में घूम घूम कर लोगों को भक्ति का ज्ञान दिया था।

उनके बारे में कहा जाता है कि उनका इस धरती पर जन्म लेना किसी चमत्कार से कम नहीं था. उनके पिता उनकी मां रुक्मिणी को छोड़कर सन्यासी बन गए थे. ऐसे में एक दिन रामानन्द नाम के सन्त उनके आलंदी गांव आये और उन्होंने रुक्मिणी को पुत्रवती भव का आशीर्वाद दे दिया।

जिसके बाद ही इनके पिता ने गुरु के कहने पर गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया और संत ज्ञानेश्वर का जन्म हुआ। संत नामदेव एक प्रसिद्ध संत थे. उन्होंने मराठी के साथ हिन्दी में भी अनेक रचनाएं की. उन्होंने लोगों के बीच ईश्वर भक्ति का ज्ञान बांटा. उनका एक किस्सा बहुत चर्चित है।

एक बार वह संत ज्ञानेश्वर के साथ तीर्थयात्रा पर नागनाथ पहुंचे थे, जहां उन्होंने भजन-कीर्तन का मन बनाया तो उनके विरोधियों ने उन्हेंं कीर्तन करने से रोक दिया. विरोधियों ने नामदेव से कहा अगर तुम्हें भजन-कीर्तन करना है तो मंदिर के पीछे जाकर करो।

इस पर नामदेव मंदिर के पीछे चले गये. माना जाता है कि उनके कीर्तनों की आवाज सुनकर भगवान शिव शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन देने आ गये थे. इसके बाद से नामदेव के चमत्कारी संत के रुप में ख्याति मिली।

समर्थ स्वामी
〰️〰️〰️〰️ जी का जन्म गोदातट के निकट जालना जिले के ग्राम जांब में हुआ था. अल्पायु में ही उनके पिता गुजर गए और तब से उनके दिमाग में वैऱाग्य घूमने लगा था. हालांकि, मां की जिद के कारण उन्हें शादी के लिए तैयार होना पड़ा था. पर, मौके पर वह मंडप तक नहीं पहुंचे और वैराग्य ले लिया।

समर्थ स्वामी के बारे में कहा जाता है कि एक शव यात्रा के दौरान जब एक विधवा रोती-रोती उनके चरणो में गिर गई थी, तो उन्होंंने ध्यान मग्न होने के कारण उसे पुत्रवती भव का आशीर्वाद दे दिया था. इतना सुनकर विधवा और फूट-फूट कर रोने लगी।

रोते हुए वह बोली- मैं विधवा हो गई हूं और मेरे पति की अर्थी जा रही है. स्वामी इस पर कुछ नहीं बोले और कुछ देर बाद जैसे ही उसके पति की लाश को आगे लाया गया, उसमें जान आ गई. यह देख सबकी आंखे खुली की खुली रह गई. सभी इसे समर्थ स्वामी का चमत्कार बता रहे थे।

देवरहा बाबा
〰️〰️〰️〰️ उत्तर भारत के एक प्रसिद्ध संत थे. कहा जाता है कि हिमालय में कई वर्षों तक वे अज्ञात रूप में रहकर साधना किया करते थे. हिमालय से आने के बाद वे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सरयू नदी के किनारे एक मचान पर अपना डेरा डाल कर धर्म-कर्म करने लगे, जिस कारण उनका नाम देवरहा बाबा पड़ गया. उनका जन्म अज्ञात माना जाता है. कहा जाता है कि-

एक बार महावीर प्रसाद ‘बाबा’ के दर्शन करके वापस लौट रहे थे, तभी उनके साले के बेटे को सांप ने डंस लिया. चूंकि सांप जहरीला था, इसलिए देखते ही देखते विष पूरे शरीर में फ़ैल गया।

किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें, इसलिए वह उसे उठाकर देवरहा बाबा के पास ले आये. बाबा ने बालक को कांटने वाले सांप को पुकारते हुए कहा तुमने क्यों काटा इसको, तो सांप ने उत्तर देते हुए कहा इसने मेरे शरीर पर पैर रखा था. बाबा ने इस पर उसे तुरंत ही कड़े स्वर में आदेश दिया कि विष खींच ले और आश्चर्यजनक रूप से सांप ने विष खींच लिया. बाबा के इस चमत्कार की चर्चा चारों ओर फैल गई।

संत जलाराम
〰️〰️〰️〰️ बापा के नाम से प्रसिद्ध जलाराम गुजरात के प्रसिद्ध संतो में से एक थे. उनका जन्म गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गांव में हुआ था। जलाराम की मां एक धार्मिक महिला थीं, जो भगवान की भक्ति के साथ साथ साधु संतो का बड़ा आदर करती थी. उनके इस कार्य से प्रसन्न संत रघुदास जी उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनका दूसरा पुत्र ईश्वर भक्ति और सेवा के लिए ही जाना जायेगा. आगे चलकर जलाराम बापा गुजरात के बहुत प्रसिद्ध संत हुए।

एक दिन बापा के भक्त काया रैयानी के पुत्र मृत्यु हो गई. पूरा परिवार शोक में डूबा था. इस बीच बापा भी वहां पहुंच गये, उनको देखकर काया रैयानी उनके पैरों में गिर गया और रोने लगा. बापा ने उसके सर पर हाथ रखते हुए कहा तुम शांत हो जाओ. तुम्हारे बेटे को कुछ नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा चेहरे पर से कपड़ा हटा दो. जैसे ही कपड़ा हटाया गया बापा ने कहा बेटा तुम गुमसुम सोये हुए हो, जरा आंख खोल कर मेरी ओर देखो. इसके बाद चमत्कार हो गया. क्षण भर में मृत पड़ा लड़का आंख मलते हुए उठ कर इस तरह बैठ गया, मानो गहरी नींद से जागा हो।

रामकृष्ण परमहंस
〰️〰️〰️〰️〰️ भारत के महान संत थे. राम कृष्ण परमहंस ने हमेशा से सभी धर्मों कि एकता पर जोर दिया था. बचपन से ही उन्हें भगवान के प्रति बड़ी श्रद्धा थी. उन्हें विश्वास था कि भगवान उन्हें एक दिन जरूर दर्शन देंगे. ईश्वर को प्राप्त करने के लिए उन्होंने कठिन साधना और भक्ति का जीवन बिताया था. जिसके फलस्वररूप माता काली ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया था।

कहा जाता है कि- उनकी ईश्वर भक्ति से उनके विरोधी हमेशा जलते थे. उन्हें नीचा दिखाने कि हमेशा सोचते थे. एक बार कुछ विरोधियों ने 10 -15 वेश्याओं के साथ रामकृष्ण को एक कमरे में बंद कर दिया था।

रामकृष्ण उन सभी को मां आनंदमयी की जय कहकर समाधि लगाकर बैठ गए. चमत्कार ऐसे हुआ कि वे सभी वेश्याएं भक्ति भाव से प्रेरित होकर अपने इस कार्य से बहुत शर्मशार हो गई और राम कृष्ण से माफी मांगी।

इसके अतिरिक्त, रामकृष्ण परमहंस की कृपा से माँ काली और स्वामी विवेकानंद का साक्षात्कार होना समूचे विश्व को पता ही है।

गुरु नानक देव
〰️〰️〰️〰️〰️ सिक्खों के आदि गुरु थे. इनके अनुयायी इन्हें गुरुनानक, बाबा नानक और नानक शाह के नामों से बुलाते हैं. कहा जाता है कि बचपन से ही वे विचित्र थे. नेत्र बंद करके आत्म चिंतन में मग्न हो जाते थे. उनके इस हाव भाव को देखकर उनके पिता बड़े चिंतित रहते थे. आगे चलकर गुरु नानक देव बहुत प्रसिद्ध संत हुए।

एक बार गुरु नानक देव जी मक्का गए थे. काफी थक जाने के बाद वह मक्का में मुस्लिमों का प्रसिद्ध पूज्य स्थान काबा में रुक गए. रात को सोते समय उनका पैर काबा के तरफ था।

यह देख वहां का एक मौलवी गुरु नानक के ऊपर गुस्सा हो गया. उसने उनके पैर को घसीट कर दूसरी तरफ कर दिये. इसके बाद जो हुआ वह हैरान कर देने वाला था. हुआ यह था कि अब जिस तरफ गुरु नानक के पैर होते, काबा उसी तरफ नजर आने लगता. इसे चमत्कार माना गया और लोग गुरु नानक जी के चरणों पर गिर पड़े।

रामदेव
〰️〰️〰️ का जन्म पश्चिमी राजस्थान के पोकरण नाम के प्रसिद्ध नगर के पास रुणिचा नामक स्थान में हुआ था. इन्होंने समाज में फैले अत्याचार भेदभाव और छुआ छूत का विरोध किया था. बाबा राम देव को हिन्दू मुस्लिम एकता का भी प्रतीक माना जाता है. आज राजस्थान में इन्हें लोग भगवान से कम नहीं मानते हैं. इनसे जुड़ा हुआ एक किस्सा कुछ ऐसा है।

मेवाड़ के एक गांव में एक महाजन रहता था. उसकी कोई संतान नहीं थी. वह राम देव की पूजा करने लगा और उसने मन्नत मांगी कि पुत्र होने पर मैं मंदिर बनवाऊंगा. कुछ दिन के बाद उसको पुत्र की प्राप्ति हुई।

जब वह बाबा के दर्शन करने जाने लगा तो रास्ते में उसे लुटेरे मिले और उसका सब कुछ लूट लिया. यहां तक कि सेठ की गर्दन भी काट दी. घटना की जानकारी पाकर सेठानी रोते हुए रामदेव को पुकारने लगी, इतने में वहां रामदेव जी प्रकट हो गए और उस महाजन का सर जोड़ दिए. उनका चमत्कार देख कर दोनों उनके चरणों में गिर पड़े।

संत रैदास
〰️〰️〰️〰️का जन्म एक चर्मकार परिवार में हुआ था. बचपन से ही रैदास का मन ईश्वर की भक्ति को ओर हो गया था. उनका जीवन बड़ा ही संघर्षो से बीता था, पर उन्होंने ईश्वर की भक्ति को कभी नहीं छोड़ा. एक बार रैदास जी ने एक ब्रह्मण को एक ‘सुपारी’ गंगा मैया को चढ़ाने के लिए दी थी. ब्राह्मण ने अनचाहे मन से उस सुपारी को गंगा में उछाल दिया।

तभी गंगा मैया प्रकट हुई और सुपारी अपने हाथ में ले ली और उसे एक सोने का कंगन देते हुए कहा- इसे ले जाकर रविदास को दे देना. ब्राह्मण ने जब यह बात बताई तो लोगों ने उपहास उड़ाया।

लोगों ने यहां तक कहा कि रविदास अगर सच्चे भक्त हैं तो दूसरा कंगन लाकर दिखाएं. इस पर रविदास द्वारा बर्तन में रखे हुए जल से गंगा मैया प्रकट हुई और दूसरा कंगन रविदास जी को भेंट किया।

इन संतों ने संसार में यह सन्देश दिया है कि जाति और धर्म से बड़ा मानवता का धर्म है. सच्चे मन से की गई सेवा ही जीवन को सफल बनाती है. इस संसार में भगवान किसी भी जाति का नहीं है. वह संसार के हर प्राणी के दिल में रहता है, इसलिए हमें बुराई द्वेष आदि को छोड़कर एक सच्चा इंसान बनाना चाहिए।
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05/12/2025
26/11/2025
बथुआ साग नहीं एक औषधि है 🌿🍀🥬सागों का सरदार है बथुआ, सबसे अच्छा आहार है बथुआ।बथुआ अंग्रेजी में (Lamb's Quarters.)वैज्ञानि...
24/11/2025

बथुआ साग नहीं एक औषधि है 🌿🍀🥬
सागों का सरदार है बथुआ, सबसे अच्छा आहार है बथुआ।
बथुआ अंग्रेजी में (Lamb's Quarters.)
वैज्ञानिक नाम( Chenopodium album.)
साग और रायता बना कर बथुआ अनादि काल से खाया जाता रहा है।
लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक।
शिल्प शास्त्र में लिखा है कि।
हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए।
पलस्तर में बथुआ मिलाते थे।
हमारी बुजुर्ग महिलायें सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए।
बथुए के पानी से बाल धोया करती थीं।
बथुआ गुणों की खान है और भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं।
तभी तो हमारा भारत महान है।
बथुए में क्या-क्या है ??
मतलब कौन-कौन से विटामिन और मिनरल्स हैं ??
तो सुने, बथुए में क्या नहीं है??

बथुआ विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और C से भरपूर है।
तथा बथुए में कैल्शियम, लोहा।
मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस।
पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं।
100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट।
4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं।
कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।

जब बथुआ शीत (मट्ठा, लस्सी) या दही में मिला दिया जाता है।तो यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला।
व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है।

साथ में बाजरे या मक्का की रोटी, मक्खन व गुड़ की डळी हो तो।इसे खाने के लिए देवता भी तरसते हैं।
जब हम बीमार होते हैं तो।
आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली खाने की सलाह देते हैं।
गर्भवती महिला को खासतौर पर।
विटामिन बी, सी व लोहे की गोली बताई जाती है।
बथुए में वो सब कुछ है।
कहने का मतलब है कि बथुआ पहलवानों से लेकर।
गर्भवती महिलाओं तक,बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है।
यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती।बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है।
बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो।
निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है।
बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें।
नमक न मिलाएँ तो अच्छा है।यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो,काला नमक मिलाएँ और देशी गाय के घी से छौंक लगाएँ।
बथुए का उबला हुआ पानी अच्छा लगता है।
तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है।
किसी भी तरह बथुआ नित्य सेवन करें।
बथुए में जिंक होता है जो कि शुक्राणु वर्धक होता है।मतलब किसी को जिस्मानी कमजोरी हो तो उसको भी दूर कर देता है बथुआ।
बथुआ कब्ज दूर करता है और अगर पेट साफ रहेगा
तो कोई भी बीमारी शरीर में लगेगी ही नहीं, ताकत और स्फूर्ति बनी रहेगी।
कहने का मतलब है कि जब तक इस मौसम में बथुये का साग मिलता रहे।

नित्य इसकी सब्जी खाएँ।

बथुये का रस, उबाला हुआ पानी पीयें तो यह खराब लीवर को भी ठीक कर देता है।पथरी हो तो एक गिलास कच्चे बथुए के रस में शकर मिलाकर नित्य पिएँ।तो पथरी टूटकर बाहर निकल आएगी।
मासिक धर्म रुका हुआ हो तो,दो चम्मच बथुए के बीज एक गिलास पानी में उबालेंआधा रहने पर छानकर पी जाएँ।
मासिक धर्म खुलकर साफ आएगा।
आँखों में सूजन, लाली हो तो प्रतिदिन बथुए की सब्जी खाएँ।

पेशाब के रोगी :*
बथुआ आधा किलो, पानी तीन गिलास, दोनों को उबालें और फिर पानी छान लें बथुए को निचोड़कर पानी निकाल कर यह भी छाने हुए पानी में मिला लें।स्वाद के लिए नींबू जीरा, जरा सी काली मिर्च और काला नमक लें और पी जाएँ।
आप ने अपने दादा-दादी से ये कहते जरूर सुना होगा कि
हमने तो सारी उम्र अंग्रेजी दवा की एक गोली भी नहीं ली।
उनके स्वास्थ्य व ताकत का राज यही बथुआ ही है।
मकान को रंगने से लेकर खाने व दवाई तक बथुआ काम आता है।

हाँ अगर सिर के बाल धोते हैं, क्या करेंगे शेम्पू इसके आगे।

लेकिन अफसोस!
हम ये बातें भूलते जा रहे हैं और इस दिव्य पौधे को नष्ट करने के लिए अपने-अपने खेतों में जहर डालते हैं,तथा कथित कृषि वैज्ञानिकों (अंग्रेज व काळे अंग्रेज) ने बथुए को भी।

कोंधरा, चौळाई, सांठी, भाँखड़ी आदि सैकड़ों आयुर्वेदिक औषधियों को।

खरपतवार की श्रेणी में डाल दिया और हम भारतीय चूं भी ना कर ske

भारत में "सत्यानाशी" का पौधा हर जगह पैदा होता हैं।  यह एक कांटेदार पौधा हैं। इसके किसी भी भाग को तोड़ने से उसमें से स्वर...
21/11/2025

भारत में "सत्यानाशी" का पौधा हर जगह पैदा होता हैं। यह एक कांटेदार पौधा हैं। इसके किसी भी भाग को तोड़ने से उसमें से स्वर्ण सदृश, पीतवर्ण (पीले रंग) का दूध निकलता हैं, इसलिए इसे स्वर्णक्षीरी भी कहते हैं। सत्यानाशी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।इसके फूल, पत्तियों और जड़ों में गजब के गुण पाए जाते हैं ।इस पौधे का उपयोग आयुर्वेद में सदियों से किया जा रहा है।

■ सत्यानाशी के पौधे का औषधीय उपयोग :-

• त्वचा रोगों में – इसके दूधिया रस का उपयोग खुजली, फोड़े-फुंसी और अन्य त्वचा रोगों के इलाज के लिए किया जाता हैं।

• जोड़ों के दर्द में – इसके तेल और अर्क को जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभकारी माना जाता हैं।

• कफ और अस्थमा में – इसके अर्क का उपयोग श्वसन संबंधी समस्याओं में किया जाता हैं।

• कुष्ठ रोग में – आयुर्वेद में तथा भारतीय समाज में इसका प्रयोग कुष्ठ रोगों में भी किया जाता रहा हैं।

• घाव भरने में – यह इतना गुणी पौधा हैं कि कितना भी पुराना घाव हो उसे चुटकियों में ठीक कर देता हैं। यह बांझपन में भी उपयोगी हैं।

• यकृत विकारों में – पारंपरिक आयुर्वेद में इसे लीवर रोगों के इलाज के लिए उपयोग किया जाता हैं।

■ नियंत्रण और सावधानियाँ :-
सत्यानाशी का पौधा विषाक्त होने के कारण खेती के लिए उपयुक्त भूमि से हटा दिया जाता है, और इसके औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह len

04/09/2025
04/09/2025
04/09/2025

राहुल गांधी देशद्रोही है और चुनाव आयोग को अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए

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