Aman Ayurved

Aman Ayurved मैं “वैद्य अमन चीमा” पुराने, जटिल रोग और गुप्त रोगों का इलाज आयुर्वेदिक पद्धति से करता हुं।

29/01/2026

शीघ्रपतन, Premature Ej*******on
~ वीर्य बंधक योग ~

मेरा अनूभूत , एक अनुपम अतिउत्तम श्रेठ योग

जो कि बंधेज में बहुत लाभकारी है । जो लाभकारी है कई रोगों में । पूरी जानकारी के लिए आप पूरी पोस्ट को पढ़े ।

आयुर्वेद के आठ प्रधान अंगों मे से एक अतिउत्तम अंग बाजीकरण को माना जाता है । आचार्य चरक जी ने कहा है कि बाजीकरण के अधीन ही धर्म ,अर्थ ,काम, यश तथा श्रेष्ठ पुत्र की प्राप्ति होती है । बाजीकरण से बल एवं कांति प्राप्त होती है । आयुर्वेद में अनेक बाजीकरण योग बताएं गए है उनमें से एक है - यह वीर्य बंधक योग

इसमें स्वर्ण भस्म, मोती , रजत आदि जैसे बहुमूल्य रस रसायन होते हैं जिसके कारण यह महंगा तो बनता ही है। इसी कारण इसका असर ज्यादा , लंबे समय तक रहता है।

इसे आप स्वयं निम्नलिखित विधि से तैयार कर लाभ प्राप्त कर सकते है ।

सामग्री -
( 1 ) रस रसायन

रस सिन्दूर षडगुण 5 ग्राम ,
अभ्रक भस्म सहस्त्र - 6 ग्राम ,
लौह भस्म सतपुट बाजीकरण 6 ग्राम ,
बंग भस्म 5 ग्राम
मकरध्वज सिद्ध 5 ग्राम
रजत और मोती भस्म 2-2ग्राम
स्वर्ण भस्म 600 मिलीग्राम

( 2 ) जड़ी-बूटियां

सैंधव लवण ,
जटामासी ,
आँवला,
छोटीइलाची,
सौंठ ,
पीपल,
मिर्च,
तेजपत्र ,
लौंग,
जायफल ,
जावित्री,
श्वेत जीरा,
काला जीरा,
मुलठी ,
वचा,
कुठ,
भारंगी,
शुद्घ टंकण ,
नागकेशर,
मुन्नका,
धनिया,
विदारी कंद,
शतावरी प्रत्येक 10 ग्राम ।
कौंच ,
गौखरू बीज,
भांग बीज 10-10 ग्राम

विधि:- प्रथम भस्मों ( रस रसायन )को मिलाकर उनको शतावरी क्वाथ के रस में घोटकर सुखा दीजिए । फिर समस्त चूर्ण में दूध डालकर पाक कीजिए। फिर कौंच और गोखरू चूर्ण डालकर गाढ़ा कीजिएं । फिर नागकेशर तेजपत्र आदि शेष बचे को डालकर अंत में घी और मधु डालें । या मिश्री डाल लें। यथा आवश्यक 100 ग्राम ।

ठंडा होने पर 2-2 ग्राम के लड्डू बना लें । या पाउडर ही रखें। हम पाउडर ही रखते हैं। खाने में बहुत ही स्वादिष्ट लगता है।

लेने की विधि :- एक लड्डू या एक चम्मच रोज रात्रि गोघृत और गोदुग्ध से लें । इस योग को दो माह से तीन माह तक लेने से शरीर में बल शक्ति एवं कामशक्ति में वृद्धि होती है ।यह एक श्रेष्ठ बाजीकर योग है ।

इसका एक महीने का खर्च 7999/- रु है।
दो माह का 15499/-रु है।

जिसे जरुरत हो कोरियर से मंगवा सकते हैं।

सदैव आपका अपना शुभचिंतक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
अमन आयुर्वेद,144205, पंजाब
Call & WhatsApp 09915136138

23/01/2026

★ताकत जौश जवानी पैदा करने वाला ★

“मालकंगणी रसायन” स्वर्ण युक्त
गोली , कैप्सूल और Drops

“कायाकल्प का एक छुपा हुआ राज” जो आज बताने जा रहा हुँ.....
जो जड़ से बाल काले करें, दुबारा जवान बना दें।

कौन कहता है जवानी वापिस नही आती । आती है बस ,जो इस रसायन मालकंगनी_रसायन_स्वर्ण_युक्त को विधी पूर्वक बना लें। इस रसायन के सेवन से आएं हुए प्रभाव आप खुद तो महसूस करेंगें ही , लोग भी आपसे पूछेंगे कि आपने ऐसा क्या खाया है?

यह जो नुस्खा लिख रहा हुं , इसे बनाना मुश्किल नही , बस थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी, कोई भस्म बनाने का झंझट नही । दवा तैयार करके रख लेनी है । बस निकाल कर डिब्बे में से सेवन कर लेनी है। थोड़ी मेहनत खाना बनाने & आटा गूथने की भी तो लगती है। लेकिन जवान होने के लिए कोई महाआलसी ही होगा ,जो यह नुस्खा न बनाना चाहे। यह जो नुस्खा है यह मेरे दिल का छुपा हुआ राज है। जोकि मैं यहां आप से सांझा किए बगैर नही रहूंगा। मैंने अपने फेसबुक के सफर में आज तक सैकड़ों नुस्खे जो मैंने सैकडों रोगियों पर आजमाएं ,100% सफल नुस्खे दिल खोलकर आपको बताएं, लेकिन यह नुस्खा मेरे दिल में छुपा का छुपा ही रह जाता , कारण : जब तक भगवान की इच्छा न हो ,जुबान,कलम,हाथ सब रुक जाते हैं। दोस्तों मैं औरों की तरह अपने दिल के राज साथ में लेकर नही मरना चाहता। आज तक जितने नुस्खे मैंने पोस्ट किए, बहुत लोगों ने इस्तेमाल किए, कई लोगों ने बनाकर साथी रोगियों को यह मालकांगनी रसायन स्वर्ण युक्त मेरे द्वारा मंगवाकर लाभान्वित भी किया ।

आज मैं बुद्धि/जवानी/ दुबारा काले बाल करने वाला नुस्खा भी आपके सामने शेयर कर रहा हूं। कृप्या अपनी डायरी में नोट कर लेना। आप की पीड़ियों तक काम आने वाला राज बता रहा हुँ।

मालकंगनी रसायन बनाने की विधि:-
मालकंगनी के मगज , मगज यानि बीज । छिलका उतार कर साफ कर लें। या हाथ से मसल कर छिलका उतार लें। फिर किसी खुले मुंह वाली शीशी में डाल लेवें । उसके बाद आप भृंगराज के स्वरस में पूरा डूबो दें। शाम को रस डालें। सुबह फेंक दें । अगले दिन फिर भृंगराज का ताजा रस निकालें और पूरे बीज रस में डूबो दें। अगले दिन पुराना रस निकाल फेंक दें। तीसरे दिन फिर वही विधी अपनाएं। ऐसे तीन बार रस डालने के बाद मगज मालकंगनी निकाल कर धूप में सुखाकर कांच की शीशी में डाल लें।

नोट:- मालकांगनी का “पाताल यंत्र विधि” ( यह “पाताल यंत्र विधि”आयुर्वेदिक पद्धति में तैल बीजों से तैल निकालने की खास विधि है) से तैल भी निकाला जा सकता है। मैं‌ तैल भी इस्तेमाल करता हुं।‌ कंपनी का इस्तेमाल न करें , उसमें मिलावट होती है। वो सिर्फ लगाने के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है , तिला और जोड़ दर्दों, पट्ठों के लिए

तैल वाला नुस्खा :- तैल 10ml , बादाम रोगन 85ml , स्वर्ण भस्म या वर्क 2ग्राम , केसर 3ग्राम

इस्तेमाल करने का तरीका :- सुबह दिनचर्या ( दंत मंजन, पेट सफाई ,नहाधोकर ) सुबह खाली , रात को सोते समय 10-10 बूंद चाटकर दूध पी सकते है।

गोली का नुस्खा:- मालकांगनी रसायन 45ग्राम , शिलाजीत सूर्यतापी 5ग्राम , केसर 5 ग्राम, मोती पिष्टी 3ग्राम , स्वर्ण भस्म 1ग्राम, हीरा भस्म 1ग्राम , गोलियां या कैप्शूल भर कर रख लें।

सुबह शाम दूध से इस्तेमाल करें।

सावधानी/अपथ्य:- दूध घी का अधिक प्रयोग करें।

दवा शुरू करने से पहले कोई हल्का जुलाब लेकर पेट की शुद्धि कर लेना अति जरुरी है। जुलाब में एरण्ड तैल जो कि कैस्टर ऑयल के नाम से आसानी से मिल जाता है। या डाबर/वैद्यनाथ/व्यास कंपनी का इच्छा भेदी रस , पंचसकार चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, स्वादिष्ट विरेचन चूर्ण आदि ले सकते है। सेवन विधि लेवल के ऊपर लिखी रहती है।

इसके प्रयोग काल में तेज मिर्च,चाय ,काफी ,शराब, तंबाकू आदि किसी भी प्रकार का नशा वर्जित है।

पथ्य :- जो लोग मांसाहारी है वह तीतर,बटेरे,देशी मुर्गा खा सकते है। बेसन,गेहुं की रोटी ,मूंग ,चने/मोठ की दाल का सेवन करें। शाकाहारी लोग जलेबी,घी का हल्वा खा सकते है। घी देशी का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।

लाभ :-इसके सेवन के 2 माह सेवन करने से सफेद बाल दुबारा काले होना शुरू हो जाते है, शरीर में ताकत /बल वीर्य अधिक बढ़ जाता है। स्मरण शक्ति बहुत बढ़ने लग जाती है। किताबें याद होने लग जाती है। पुरानी भूली बातें याद आ जाती है। चेहरे पर तेज बहुत आ जाता है। आँखों में चमक नूर बढ़ जाता है। रंग लाल सुर्ख हो जाता है। विद्यार्थी अव्ल आने लगते है।

नोट :- इस वर्ष में मैंने इसका तैल यानि liquid तैयार करके देना शुरू किया है , इसे आप शहद और दूध से आसानी से ले सकते है ।

कीमत भी कोई ज्यादा नही है। एक महीने का खर्च सिर्फ 8000 रु है। कम से कम दो महीने जरूर खाएं। गोली कैप्सूल या drops आप कोई भी मंगवा सकते हैं। तीनों में से कोई एक ही इस्तेमाल करनी है।

कामशक्ति बढ़ाने, स्टेमिना , ताकत , बल , वीर्य वृद्धि के लिए रोगियों को बहुत ही अच्छे लाभ मिल रहे है।आपको एक बार जरूर इस्तेमाल करना चाहिए ।

लेखक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
अमन आयुर्वेद, 144205, पंजाब
Whatsapp & Call 9915136138

जै आयुर्वेद जै धन्वंतरि

★अतुल शक्ति महायोग★यह योग सिर्फ वैद्य भाईयों को समर्पित है। जो वैद्य आयुर्वेद का प्रसिद्ध योग अतुल शक्ति दाता योग बनाने ...
17/01/2026

★अतुल शक्ति महायोग★

यह योग सिर्फ वैद्य भाईयों को समर्पित है।

जो वैद्य आयुर्वेद का प्रसिद्ध योग अतुल शक्ति दाता योग बनाने में असमर्थ हैं। उनके लिए मेरी तरफ से बेशकीमती तोहफा है। इसे इस्तेमाल करें। जब तक जिंदगी भर practice करेंगे, मुझे याद करेंगे।

कंपनी कोई भी हो , इतनी मेहनत न तो करती है , न ही ग्रंथ अनुसार, रिजल्ट ही देती है , कंपनी का लोहा भस्म ही होता है बस। जो वैद्य खुद मेहनत करने में सक्षम है , वो तो अतुल शक्ति दाता बनाते ही है , हम 2003 से बनाते आ रहे हैं। लाभ भी हु-ब-हु ग्रंथ अनुसार ही आता है। लेकिन कंपनी 2-4 पुट लौह भस्म को संखिया के लगाकर पैक कर देती है।

वैद्यों और खरीदने वालों की आंखों में मिट्टी नहीं लाल मिर्च डालने जैसा ही है कंपनियों की तरफ से। रिजल्ट के इंतजार में अकुशल वैद्य और बेचारे मरीज दोनों परेशान हो जाते हैं।

अतुल शक्ति दाता के झंझट का हल मैंने इस नुस्खे को निकाल कर किया। यह महंगा तो बेशक है, लेकिन रिजल्ट ग्रंथ अनुसार बताये अतुल शक्ति दाता से भी बढ़कर मिलते हैं । आज आपके सामने दिल का छुपा हुआ राज बताया है।

तो आपकी परेशानी का हल इस “अतुल शक्ति महायोग” में है।

घटक:-
15 ग्राम लौह भस्म 1000 पुट्टी,
जौहर संखिया -1.5 ग्राम,
कत्था - 10ग्राम
केसर कश्मीरी -2 ग्राम,
स्वर्ण भस्म - 2 ग्राम,
मोती पिष्टी -2 ग्राम
शिलाजीत सूर्यतापी 15ग्राम
रजत भस्म,
अभ्रक भस्म सहस्त्र पुटी,
जवाहर मोहरा ,
पन्ना पिष्टी,
आदि सब मिलाकर दवा तैयार करते हैं।

बनाने का विधि:- सभी को गुलाब के फूलों के रस में तीन दिन खूब खरल करें। गोली बनाने योग होने पर आप गोली बना लें।

लाभ:- liver weakness, खून की कमी , बल , जोश की कमी , श्वास चढ़ना, पट्ठे कमजोर होना यह दवा बहुत लाभदायक है। साधारण कमजोरी, मर्दाना कमजोरी में यह दवा अतिअंत लाभकारी है।

जिम वाले लड़के, खिलाड़ी इस दवा का आर्डर एक महीना पहले ही दें देते हैं।

नोट:- साधारण लोग इसे खुद न बनाकर अपने वैद्य की सलाह अनुसार ही उनसे बनवाकर इस्तेमाल करें। वैद्य की सलाह अति जरुरी समझें। एक कुशल वैद्य ही आपकी तासीर, शरीर के दोष आदि देखकर ऐसी दवा का इस्तेमाल करवा सकता है।

सेवन विधि:- सुबह- शाम एक गोली दूध से।
घी, मक्खन, मलाई, दूध को देखकर ही नाक चढ़ाने वाले इस दवा से दो किलोमीटर दूर रहें और इस दवा का सेवन करने के लिए अगले जन्म में भी न सोचें।
।यह दवा खुराक मांगती है।

विशेष बात नुस्खे के बारे में:-
पहली गोली ही शरीर में करंट पैदा कर देती है।
बस यह कहूंगा हर शादीशुदा को इसका इस्तेमाल करना ही चाहिए, चाहे शौंक से ही खा लें। जीवन साथी को भी कुछ दिन खिला दिया करें, जो आपकी ताकत से तंग है तो वह भी आपकी खुशी में आपका जरुरत अनुसार साथ देने लग जाएगी।

अतुल शक्ति दाता योग और अतुल शक्ति महायोग दोनों अलग-अलग नुस्खे हैं ।

यह दवा अतुल शक्ति महायोग मैं गोली/कैप्सूल/पाउडर में तैयार रखता हूं। जिसको जरूरत हो मुझे call या WhatsApp पर अपनी समस्या या जरुरत अनुसार सलाह करके कोरियर द्वारा देश विदेश में मंगवा सकते हैं। जितनी जल्दी हो सके अपना आर्डर कर दें। बाद में दवा तैयार होने तक इंतजार भी करना पड़ सकता है।

सदैव आपका अपना शुभचिंतक 🙏
✍️ वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
🏥 अमन आयुर्वेदा ™, 144205, पंजाब
📦📞 Call & WhatsApp
+91-99151-36138

13/01/2026

*लकवा ,फालिज -पक्षाघात Paralysis कष्टकारी रोग*

लकवा को फालिज या पक्षाघात Paralysis कहते है।
बहुत लोग इस रोग से प्रेशान है । इस रोग से रोगी अपने घर वालों के लिए बोझ बनकर रह जाता है । अपने काम खुद करने की बहुत दिक्कत हो जाती है ।जिनके बच्चे छोटे , कमाई का कोई साधन नही , उनके लिए तो दु:खों का पहाड़ टूट पढ़ता है । यह पोस्ट आपके लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होने वाली है । इस पोस्ट में मैं कुछ घरेलु उपाय और मेरी अनुभूत आयुर्वेदिक चिकित्सा लिखूंगा ।

ध्यान से पढ़े ।

मस्तिष्क की धमनी में किसी रुकावट के कारण उसके जिस भाग को खून नहीं मिल पाता है मस्तिष्क का वह भाग निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मस्तिष्क का वह भाग शरीर के जिन अंगों को अपना आदेश नहीं भेज पाता वे अंग हिलडुल नहीं सकते और मस्तिष्क (दिमाग) का बायां भाग शरीर के दाएं अंगों पर तथा मस्तिष्क का दायां भाग शरीर के बाएं अंगों पर नियंत्रण रखता है। यह स्नायुविक रोग है तथा इसका संबध रीढ़ की हड्डी से भी है।लकवा रोग से पीड़ित रोगी के शरीर का एक या अनेकों अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं। लकवा बांये अंग में ज्यादा खतरनाक है ।

लकवा आलसी जीवन जीने से ही नहीं, बल्कि इसके विपरीत अति भागदौड़, क्षमता से ज्यादा परिश्रम या व्यायाम, अति आहार ,ज्यादातर प्रौढ़ आयु में ,युवावस्था में की गई गलतियाँ-भोग-विलास में अति करना, मादक द्रव्यों का सेवन करना, आलसी रहना आदि कारणों से शरीर का स्नायविक संस्थान धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, इस रोग के आक्रमण की आशंका भी बढ़ती जाती है।

पक्षाघात तब होता है , जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे रक्त आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास की जगह में खून भर जाता है। जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम हो जाता है या मस्तिष्क में अचानक रक्तस्राव होने लगता है तो कहा जाता है कि आदमी को मस्तिष्क का दौरा पड़ गया है।

*लकवा के पाँच प्रकार है ,जो निम्नलिखित अनुसार है।*

अर्दित,एकांगवात,सर्वागवात,अर्धांगवात,बाल पक्षाघात

१)अर्दित - सिर्फ चेहरे पर लकवे का असर होने को अर्दित (फेशियल पेरेलिसिस) कहते हैं। अर्थात सिर, नाक, होठ, ढोड़ी, माथा तथा नेत्र सन्धियों में कुपित वायु स्थिर होकर मुख को पीड़ित कर अर्दित रोग पैदा करती है।

२)एकांगघात - इसे एकांगवात भी कहते हैं। इस रोग में मस्तिष्क के बाह्यभाग में विकृति होने से एक हाथ या एक पैर कड़ा हो जाता है और उसमें लकवा हो जाता है। यह विकृति सुषुम्ना नाड़ी में भी हो सकती है। इस रोग को एकांगघात (मोनोप्लेजिया) कहते हैं।

३)सर्वांगवात - इसे सर्वांगवात रोग भी कहते हैं। इस रोग में लकवे का असर शरीर के दोनों भागों पर यानी दोनों हाथ व पैरों, चेहरे और पूरे शरीर पर होता है, इसलिए इसे सर्वांगघात (डायप्लेजिया) कहते हैं।

४)अर्धांगवात - इस रोग में कमर से नीचे का भाग यानी दोनों पैर लकवाग्रस्त हो जाते हैं। यह रोग सुषुम्ना नाड़ी में विकृति आ जाने से होता है। यदि यह विकृति सुषुम्ना के ग्रीवा खंड में होती है, तो दोनों हाथों को भी लकवा हो सकता है। जब लकवा 'अपर मोटर न्यूरॉन' प्रकार का होता है, तब शरीर के दोनों भाग में लकवा होता है।

५)बाल पक्षाघात - बच्चे को होने वाला पक्षाघात एक तीव्र संक्रामक रोग है। जब एक प्रकार का विशेष कृमि सुषुम्ना नाड़ी में प्रविष्ट होकर वहाँ खाने लगता है, तब सूक्ष्म नाड़ियाँ और माँसपेशियां आघात पाती हैं, जिसके कारण उनके अधीनस्थ शाखा क्रियाहीन हो जाती है। इस रोग का आक्रमण अचानक होता है और प्रायः 6-7 माह की आयु से ले कर 3-4 वर्ष की आयु के बीच बच्चों को होता है।

* पक्षाघात की घरेलु चिकित्सा*

•लहसुन की कली 8-10 लेकर पीसकर ,शहद से चाटें ।

•लहसुन का आचार या चटनी भी ले सकते है ।

•आक के पत्तों का आचार बनाकर भी प्रयोग कर सकते है । इसकी मैंने पहले स्पैशल पोस्ट भी की थी ।

•सरसों के तैल 100ml में लहसुन 20gmऔर अजवायन 20gm को जला कर छानकर , मालिश के लिए प्रयोग करें ।

•एरण्ड पत्र, धतूरा पत्र, मदार पत्र, नागफनी का रस 50-50ml निकालकर कपड़े से निचोड़ लें । फिर 200ml सरसों के तैल में डालकर धीमी आग पर चढ़ाकर जब तक तैल मात्र न रह जाएं , तब तक पकाएं । फिर ठंडा होने पर छानकर प्रयोग में लें । इस तैल की सुबह-शाम मालिश करें । यह जोड़ो का दर्द , लकवा में बहुत उपयोगी है । आँखों से बचाएं ।

*पक्षाघात पर मेरी अनुभूत आयुर्वेदिक चिकित्सा*

*पक्षाघात नाशक मेरा सिद्ध योग*

PARALYSIS GO -WITH GOLD

वृहत वात चिंतामणि रस -3ग्राम
योगेंद्र रस - 3ग्राम
खंजनकारी रस -15गोली
एकांगवीर रस-6ग्राम
प्रवाल पंचामृत रस-6ग्राम
मुक्ता पिष्टी-6ग्राम
ब्राह्मी वटी- 6ग्राम
बच - 6ग्राम
अकरकरा ईरानी-6ग्राम
स्वर्ण भस्म -500mg

•दवा बनाने का तरीका•
सब दवा वैद्यनाथ,डाबर,या धूतपापेश्वर कंपनी की ही लें ।
सबसे पहले आप वृहत वात चिंतामणि रस,योगेंद्र रस को पीसे , फिर खंजनकारी रस, एकांगवीर रस,प्रवाल पंचामृत रस को पीस लें । फिर ब्राह्मी वटी को पीसकर मिला लें । उसके बाद मुक्ता पिष्टी मिला लें। फिर बच और अकरकरा का महीन पिसा चूर्ण मिला कर ।

90 पुड़िया बराबर मात्रा में मिला लें । बस आपकी लकवा की दवा तैयार है । यह मेरी अनुभूत दवा है ।

असमर्थ लोग स्वर्ण भस्म न डालें, इससे योग बहुत महंगा बनता है, लेकिन रिजल्ट साधारण योग से बहुत ज्यादा आते हैं।

```लेखक```
~सदैव आपका अपना शुभचिन्तक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा
अमन आयुर्वेद,पंजाब
Call & WhatsApp 9915136138~

• विशेष•
यह मेरा अनुभूत नुस्खा है । जो कि किसी भी तरह के लकवा में बहुत ही प्रभावकारी सिद्ध हुई है । महंगी तो जरूर है । रोगी को सारी उम्र के लिए नकारा ,बेसहारा , बोझ जैसी जिंदगी के जीना न पड़े , उस हिसाब से तो बहुत सस्ती है । रिजल्ट देखकर पैसे भूल जाते है । अगर आप इसे बनाने में असमर्थ है तो मेरे से अडवांस बैंक पेमैंट करके भी कोरियर द्वारा मंगवा सकते है ।

•खाने की विधि•
सुबह-दोपहर-शाम एक-एक पुडियाँ
महारास्नादि काढा,बलारिष्ट,अशवगंधारिष्ट 15-15ml लेकर जल में मिलाकर खाने के बाद लें ।

*परहेज*
खट्टी तली चीजें,नमकीन,मेदा,बेसन,केला,अरबी,घी,तैल,मीट,शराब न लें ।
जो मांसाहारी है वह कबूतर सेवन किसी भी रूप में कर सकते है । जो शाकाहारी है वे मूंग की दाल लें । हल्का सुपाचय भोजन ही लें। पेट साफ होना जरूरी है । कब्ज न रहने दें ।

05/01/2026

•ताकत के लिए - लहसुन का पाक •

शीतकाल में पोष्टिक आहार के रूप में बाजीकारक योग का सेवन करना , विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी होता है l उनमें से एक पाक लहसुन पाक भी है l

बनाने की विधि :-
लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ को , इनका छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें l एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डालकर , ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें l उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें l एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं l जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें l अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें l

भुनी हुई लुगदी और जावित्री 10 ग्राम , लौंग 10 ग्राम ,जायफल 5 ग्राम ,दालचीनी 20 ग्राम , और सौंठ 10 ग्राम --इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें, यही लहसुन पाक है l

लाभ और प्रयोग विधि :-
यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में , मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ सेवन करना चाहिए l

इसके सेवन से जोड़ो का दर्द ,
(सन्धिवात ),सायटिका , हिचकी , श्वास , सिर दर्द,अपस्मार , गुल्म , उदर रोग ,प्लीहा , कृमि , शोथ , अग्निमान्ध , पक्षाघात , खांसी, शूल , आदि अनेक रोगों को दूर कर रोगी को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी व शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है l ऐसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।
कफ वात रोगियों के लिए वरदान ।

Note:- गर्मी/पित्त के शिकार,पैपटिक अल्सर,हाईपर एसिडिटी के रोगी चिकित्सक की देख-रेख में ही प्रयोग करें।

★Disclaimer 👇🏻
👉🏾 आपसे एक जरुरी बात :- नशा किसी भी तरह का हो , चाहे सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू,गांजा,अफीम,शराब, स्मैक, हीरोइन आदि। जिन्होंने भूतकाल में सेवन किया हो , या दवा के साथ सेवन कर रहा हो , छोड़ न रहा हो , तो चाहे लाखों की दवा खा लें। कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

आयुर्वेद क्या !! हर पैथी की दवा के साथ डाक्टर/वैद्य के बताए अनुसार , अगर रोगी पथ्य-अपथ्य का पालन करता है।‌या ( खासकर गुप्त रोग, पुरुष स्त्री रोगों में ) दवा के सेवन में कम से कम 40 दिन सं+भो+ग से दूरी बनाकर रखता है। ऐसे मरीज पर दवा जादू की तरह काम करती है।

जो रोगी आहार -विहार, पथ्य-परहेज नहीं करता। कृपा करके वो दवा न ही खाएं तो बेहतर होगा। अपना मेहनत से कमाया गया पैसा और समय बर्बाद न करें। जब नशे और बदपरहेजियों से मन भर जाएं तो फिर हमारी दवा का सेवन करें और आयुर्वेद का चमत्कार देखें। नहीं तो वैद्य और आयुर्वेद को कोसने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा हर रोग , हर मरीज के ऊपर लागू होता है।

हम जो नुस्खे लिखते है , कृपया किसी कुशल आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही इस्तेमाल करें। या हमसे आप परामर्श करके इस्तेमाल कर सकते हैं। परामर्श के लिए कृपया WhatsApp पर ही text message या Audio recording भेजें। जो आपके पास रिपोर्ट, test है। भेजें। जीभ , नाखुन, चेहरा की फोटो जरुर भेजें। अपनी दिनचर्या साथ में लिखें। धन्यवाद

मिलते हैं ऐसी है नयी जानकारी के साथ, रब्ब राखा 🙏🏻

👉🏾जटिल, पुराने रोगों के लिए संपर्क करें।
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★सदैव आपका अपना शुभचिंतक ★
•वैद्य अमनदीप सिंह चीमा ,
•अमनदीप आयुर्वेद,144205, पंजाब
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30/12/2025

सर्दियों की सोगात
पुरुषों और महिलाओं के लिए
गर्म तासीर वाले दूध/छाछ/दही जरुर लें

काम शक्ति वर्धक “प्याज छुहारा पाक”

दोस्तों आज बहुत आसान नुस्खा बताने जा रहा हुं , जो कि औरत मर्द दोनों खा सकते है।

सफेद प्याज आप अपनी जरूरत अनुसार लें । जितने प्याज हो उतने ही छुहारे लें । प्याज का छिलका उतारकर उनमें आप छेद करें या चाकू से छोटे-2 कट लगा दें। ऐसे ही छुहारों को चीरा देकर बीज निकाल दें। फिर आप इन प्याजों और छुहारों को कांच के मर्तबान में डालकर , ऊपर से छोटी मक्खी का शहद इतना डालें कि यह प्याज और छुहारों से दो अंगुल ऊपर रहे। फिर मर्तबान को आप गेहूं के बीच चालिस दिन के लिए दबा दें । चालिस दिन के बाद आप इसे निकाल कर खाने के लिए एक प्याज , एक छुहारा रोज निकाल कर खाएं ।
आधे घंटे बाद आप अच्छा केसर डालकर उबाला हुआ मिश्री या देशी खांड युक्त दूध पी सकते हैं ।

यह पाक आपके अंदर बल , वीर्य , कामशक्ति की वृद्धि करेगा ।

ज्यादा लाभ के लिए आप मेरे द्वारा निर्मित “तूफानी ताकत महायोग” , “जीवन जौश महायोग” , बादशाही महायोग, “महाराजा महायोग” , “हनीमून कोर्स”, का जरूरत अनुसार मंगवाकर इस्तेमाल कर सकते हैं । यह सब महायोग मेरे पास तैयार रहते हैं । आप बे-झिझक मेरे से संपर्क करके अपनी समस्या बताकर मंगवा सकते है ।‌

Taqat Jawani Nuskha only 5999/- one month.
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सदैव आपका अपना
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
अमन आयुर्वेदा, 144205 , पंजाब
Whatsapp & Calling 9915136138

21/12/2025

एक बेवफा के ज़ख्म पर मरहम लगाने हम गए, मरहम की कसम , मरहम न मिला, मरहम की जगह , मर हम गए

ठीक ऐसी ही स्थिति आजकल के युवकों की है। जवानी की दहलीज पर पैर रखते ही , गलत संगत में पड़कर, गलतियां करने लग जाते हैं। जौश में होश खो देते हैं। नतीजा क्या होता है - मर्दाना कमजोरी, टेढापन, मानसिक नामर्दी, शारिरिक नामर्दी, हस्तमैथुन के कारण वीर्य रोकने की क्षमता कम हो जाती है। जिसका परिणाम शीघ्रपतन होता है।
शादी से घबराहट , संभोग से डर लगना , शादी के नाम से जी घबराना -यह लक्षण पैदा हो जाते हैं।

चेहरा निस्तेज, मुंह पर हमेशा बारह बजे रहते हैं। अगर आप ऐसी स्थिति के शिकार हो चुके हैं तो आप घबराएं नहीं । आपके लिए हमने तैयार किया है।

-कामदेव अप्सरा योग - स्वर्ण योग नुस्खा -

जिसमें शामिल किया गया है -

बसंत कुसुमाकर रस,
शुक्रवल्लभ रस ,
काम चूड़ामणि रस ,
मकरध्वज वटी गोल्ड,
रसराज रस ,
पुष्प धन्वा रस ,
अश्वगंधा,
शिलाजीत,
केसर ,
अंबर ,
स्वर्ण भस्म,
चांदी भस्म

उपरोक्त सभी को मिलाकर अर्क अंबर , पान के पत्तों के रस में गोलियां बना कर तैयार रखते हैं।

शीघ्रपतन, मर्दाना कमजोरी, टेढापन, मानसिक नामर्दी , घबराहट , नामर्दी के लिए बेहद ख़ास है।‌

यह कोर्स करके आपके चेहरे का नूर देखकर अप्सराएं भी आपकी और आकर्षित हो जाएगी । चेहरे पर कामुकता दूर से झलकेगी, कामदेव भी सोचेगा , क्या खाया होगा यह ।

ज्यादा तारीफ न करता हुआ , बात यहां खत्म करता हुं।

स्वर्ण युक्त योग होने के कारण महंगा है।‌यह हमनें दो तरह का तैयार किया है।‌

कामदेव अप्सरा योग नं 1,
कामदेव अप्सरा योग नं 2

ज्यादा जानकारी के लिए आप नीचे दिए नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

वैद्य अमनदीप सिंह चीमा,
अमनदीप आयुर्वेदा,
Call & WhatsApp number
099151 36138

17/12/2025

•ताकत के लिए - लहसुन का पाक •

शीतकाल में पोष्टिक आहार के रूप में बाजीकारक योग का सेवन करना , विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी होता है l उनमें से एक पाक लहसुन पाक भी है l

बनाने की विधि :-
लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ को , इनका छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें l एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डालकर , ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें l उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें l एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं l जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें l अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें l

भुनी हुई लुगदी और जावित्री 10 ग्राम , लौंग 10 ग्राम ,जायफल 5 ग्राम ,दालचीनी 20 ग्राम , और सौंठ 10 ग्राम --इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें, यही लहसुन पाक है l

लाभ और प्रयोग विधि :-
यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में , मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ सेवन करना चाहिए l

इसके सेवन से जोड़ो का दर्द ,
(सन्धिवात ),सायटिका , हिचकी , श्वास , सिर दर्द,अपस्मार , गुल्म , उदर रोग ,प्लीहा , कृमि , शोथ , अग्निमान्ध , पक्षाघात , खांसी, शूल , आदि अनेक रोगों को दूर कर रोगी को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी व शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है l ऐसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।
कफ वात रोगियों के लिए वरदान ।

Note:- गर्मी/पित्त के शिकार,पैपटिक अल्सर,हाईपर एसिडिटी के रोगी चिकित्सक की देख-रेख में ही प्रयोग करें।

★Disclaimer 👇🏻
👉🏾 आपसे एक जरुरी बात :- नशा किसी भी तरह का हो , चाहे सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकू,गांजा,अफीम,शराब, स्मैक, हीरोइन आदि। जिन्होंने भूतकाल में सेवन किया हो , या दवा के साथ सेवन कर रहा हो , छोड़ न रहा हो , तो चाहे लाखों की दवा खा लें। कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

आयुर्वेद क्या !! हर पैथी की दवा के साथ डाक्टर/वैद्य के बताए अनुसार , अगर रोगी पथ्य-अपथ्य का पालन करता है।‌या ( खासकर गुप्त रोग, पुरुष स्त्री रोगों में ) दवा के सेवन में कम से कम 40 दिन सं+भो+ग से दूरी बनाकर रखता है। ऐसे मरीज पर दवा जादू की तरह काम करती है।

जो रोगी आहार -विहार, पथ्य-परहेज नहीं करता। कृपा करके वो दवा न ही खाएं तो बेहतर होगा। अपना मेहनत से कमाया गया पैसा और समय बर्बाद न करें। जब नशे और बदपरहेजियों से मन भर जाएं तो फिर हमारी दवा का सेवन करें और आयुर्वेद का चमत्कार देखें। नहीं तो वैद्य और आयुर्वेद को कोसने का कोई मतलब नहीं है। ऐसा हर रोग , हर मरीज के ऊपर लागू होता है।

हम जो नुस्खे लिखते है , कृपया किसी कुशल आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से ही इस्तेमाल करें। या हमसे आप परामर्श करके इस्तेमाल कर सकते हैं। परामर्श के लिए कृपया WhatsApp पर ही text message या Audio recording भेजें। जो आपके पास रिपोर्ट, test है। भेजें। जीभ , नाखुन, चेहरा की फोटो जरुर भेजें। अपनी दिनचर्या साथ में लिखें। धन्यवाद

मिलते हैं ऐसी है नयी जानकारी के साथ, रब्ब राखा 🙏🏻

👉🏾जटिल, पुराने रोगों के लिए संपर्क करें।
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★सदैव आपका अपना शुभचिंतक ★
•वैद्य अमनदीप सिंह चीमा ,
•अमनदीप आयुर्वेद,144205, पंजाब
•Call & WhatsApp 099151 36138

© मेरे लेख Copy न करें।

*पार्किन्सन रोग (Parkinson's disease or PD)*~~~कंपवात का रोग ,शरीर के अंगों का कांपना~~~ यह तंत्रिका तंत्र का एक रोग है ...
14/12/2025

*पार्किन्सन रोग (Parkinson's disease or PD)*
~~~कंपवात का रोग ,शरीर के अंगों का कांपना~~~

यह तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जिसमें रोगी के शरीर के अंग कंपन करते रहते हैं। रोगी लगातार कंपन करता है ।
पार्किन्‍सोनिज्‍म का आरम्भ धीरे-२ होता है। पता भी नहीं पड़ता कि कब लक्षण शुरू हुए। अनेक सप्ताहों व महीनों के बाद जब लक्षणों की तीव्रता बढ़ जाती है। फिर आदमी को लगता है कि समस्या है , डाँ को दिखाना चाहिए ।

लेखक
सदैव आपका अपना शुभचिन्तक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा
अमन आयुर्वेद ®
Since 2003
144205,पंजाब
Call & WhatsApp 9915136138

इस रोग के कारण नींद में कम हो जाती है, वजन में कमी, कब्जियत बने रहना, जल्दी सांस भर आना, पेशाब करने में रुकावट, चक्कर आना, खडे़ होने पर आँखों के आगे अंधेरा आना, सेक्स में कमजोरी,चिड़चिडापन, स्मृति कमजोर हो जाती है । खाना ठीक से न खा पाना , अपने बाल सही ढंग से सैट नही कर सकता, पानी पीने , नहाने , कपड़े पहनने में दिक्कत होती है ।

*पार्किन्सन/कंपवात रोग पर मेरी अनुभूत चिकित्सा*
*नुस्खा इस प्रकार है*

खंजनकारी रस -3gm
स्मृतिसागर रस - 3gm
वृहत वात चिंतामणि रस - 3gm
ब्राह्मी वटी वृहत- 3gm
एकांगवीर रस -3gm
सारस्वत चूर्ण- 30gm
अशवगंधा चूर्ण-9gm
ईरानी अकरकरा चूर्ण - 6gm

यह सब दवा अच्छी कंपनी की खरीदकर , सबको कसकर घुटाई करके एकजान करलें,फिर “रोगन मांलकंगनी” में घोटकर सुखा लें, फिर “ब्राह्मी के ताजा रस” में घोटकर सुखा लें,उसके बाद “अशवगंधा के जड़ के ताजा रस” या काढ़े में घोटकर सुखा कर पुड़िया बना लें ।

सुबह-शाम 1-1 पुडियाँ शहद से चाटकर , ऊपर के दूध पीएं । मास्यादि क्वाथ 2-2चम्मच पानी में मिलाकर पी लें ।

खाने के बाद - अशवगंधारिष्ट -10ml
सारसत्वारिष्ट -10ml
मास्यादि क्वाथ -10ml

बराबर गर्म पानी में मिलाकर खाने के बाद लें ।रोगी की सेहत बहुत अच्छी हो जाएगी । यह मेरी अनुभूत चिकित्सा है । बहुत रोगियो पर आजमाई हुई है । बहुत ही लाभकारी है । आजकल के जमाने में कोई अपना तजुर्बा फ्री में नही देता । कोई कुछ न कुछ छुपा ही लेता है । पूरी चीज नही बताता । आप मेरी बताई चिकित्सा जरूर प्रयोग करें ,आपको अवशय लाभ मिलेगा , आप को फ्री में सब दे रहा हुँ,कुछ छुपाता नही । अवशय परयोग करें , लोगों का भी भला करें । दुआओ में याद रखना । चलता हुँ .....

लेखक
सदैव आपका अपना शुभचिन्तक
वैद्य अमनदीप सिंह चीमा
अमन आयुर्वेद ®
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