Dr Brajesh Mourya

Dr Brajesh Mourya Official page of Dr Brajesh Mourya, MD-General Medicine, DM-Nephrology (AIIMS New Delhi)
Consultant Nephrologist, Kailash Hospital, Dehradun

आजकल एक खबर वायरल है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से एचआईवी फैल गया, और लोग इसे लापरवाही बता रहे हैं। तो चलिए, एक इंटरव्यू के ज़...
18/12/2025

आजकल एक खबर वायरल है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से एचआईवी फैल गया, और लोग इसे लापरवाही बता रहे हैं। तो चलिए, एक इंटरव्यू के ज़रिए समझते हैं।

1️⃣ पत्रकार: ये तो सीधा-सीधा लापरवाही का मामला है।

डॉक्टर: नहीं। यह मेडिकल साइंस की लिमिटेशन का मामला है।

2️⃣ पत्रकार: एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति का ब्लड चढ़ा दिया गया, तो लापरवाही हुई ना?

डॉक्टर: नहीं। जो ब्लड चढ़ाया गया, उसमें एचआईवी का टेस्ट नेगेटिव आया था।

3️⃣ पत्रकार: एचआईवी संक्रमित व्यक्ति में टेस्ट नेगेटिव आया, तो ये लापरवाही ही हुई ना?

डॉक्टर: नहीं। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति यदि विंडो पीरियड में हो, तो उसका टेस्ट नेगेटिव आ सकता है।

4️⃣ पत्रकार: ये विंडो पीरियड क्या होता है?

डॉक्टर: किसी व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण होने के बाद,शरीर को वायरस को पहचानने योग्य एंटीबॉडी या एंटीजन बनाने में कुछ समय लगता है। यह समय लगभग 15 से 45 दिन ( कभी-कभी 90 दिन तक) हो सकता है! इसी अवधि को “विंडो पीरियड” कहा जाता है। इस दौरान अगर व्यक्ति एचआईवी टेस्ट करवाए, तो रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है, लेकिन वास्तव में वह व्यक्ति संक्रमित होता है और दूसरों को संक्रमण फैलाने में सक्षम हो सकता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति विंडो पीरियड में ब्लड डोनेट करता है, तो उसका ब्लड टेस्ट नेगेटिव आने के बावजूद एचआईवी संक्रमण फैला सकता है।

5️⃣ पत्रकार: इसका मतलब, अगर किसी व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण 15 दिन पहले हुआ हो, तो वह टेस्ट में नेगेटिव आ सकता है?

डॉक्टर: हाँ जी, अब बिल्कुल सही समझा आपने।

6️⃣ पत्रकार: तो क्या यह मरीज को नहीं बताया जाना चाहिए कि एचआईवी नेगेटिव ब्लड से भी एचआईवी फैलने की संभावना बनी रहती है?

डॉक्टर: बिल्कुल। इसीलिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले कंसेंट लिया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन से इन्फेक्शन फैलने का जोखिम हमेशा बना रहता है, जिसमें एचआईवी, एचबीवी, एचसीवी या कोई अन्य संक्रमण फैल सकता है।

7️⃣ पत्रकार: इसका मतलब ब्लड ट्रांसफ्यूजन करना ही नहीं चाहिए?

डॉक्टर: नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन जान बचाने वाली प्रक्रिया हैं और ज़रूरत पड़ने पर इसे करना ही पड़ता है। जैसे थैलेसीमिया के मरीज । हाँ, हर संभव स्क्रीनिंग, टेस्टिंग और सेफ्टी प्रोटोकॉल के बावजूद ज़ीरो रिस्क की गारंटी चिकित्सा विज्ञान में नहीं होती। इसीलिए ब्लड स्क्रीनिंग की जाती है और कंसेंट लिया जाता है, ताकि लाभ और जोखिम दोनों को समझकर इलाज किया जा सके।

8️⃣ पत्रकार: तो डॉक्टर के लिए कंसेंट लेना ज़रूरी है, और मरीज के लिए ट्रांसफ्यूजन के जोखिम और फ़ायदे समझना ज़रूरी है!

डॉक्टर: जी हाँ, धन्यवाद, समझने के लिए।

अचानक कार्डियक अरेस्ट: अचानक बढ़ते मामलों के पीछे क्या सच है?पिछले कुछ वर्षों में हमारी जीवनशैली में काफ़ी बदलाव हुए हैं...
31/08/2025

अचानक कार्डियक अरेस्ट: अचानक बढ़ते मामलों के पीछे क्या सच है?

पिछले कुछ वर्षों में हमारी जीवनशैली में काफ़ी बदलाव हुए हैं। सबसे बड़ा बदलाव खाने-पीने की आदतों में आया है।
पहले लोग घर का बना खाना खाते थे! दाल, चावल, सब्ज़ी, रोटी और मौसमी फल-सब्ज़ियाँ। तेल, घी और चीनी का इस्तेमाल भी सीमित मात्रा में होता था।

आजकल इसके बजाय लोग ज़्यादातर जंक फूड, पिज्जा बर्गर और बाहर का तला-भुना फास्ट फूड ज़्यादा खाने लगे हैं।

कोल्ड ड्रिंक ने पानी और छाछ की जगह ले ली है। पैकेज्ड स्नैक्स और इंस्टेंट नूडल्स बच्चों और युवाओं की रोज़मर्रा का हिस्सा बन गए हैं। तेल और नमक की अधिक मात्रा BP और हार्ट पर सीधा असर डाल रही है। प्रोटीन और फाइबर की कमी, और कार्बोहाइड्रेट व फैट की अधिकता से मोटापा और डायबिटीज़ बहुत बढ़ गए हैं।

दूसरा बड़ा बदलाव है शारीरिक गतिविधि में कमी।
ज़्यादातर काम मशीनों से होने लगे हैं। ऑफिस में काम करने से चलना-फिरना भी बहुत कम हो गया है, और इसका नतीजा है कि कम उम्र में ही मोटापा, डायबिटीज़ और हाई BP बढ़ रहे हैं।

बच्चों का खेलना-कूदना भी बहुत कम हो गया है।
अब बच्चे ज़्यादातर समय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स में बिताते हैं। जो बच्चे खेलना चाहते है उनके पास ग्राउंड नहीं है या बाहर नहीं निकलते हैं। इसकी वजह से मोटापा बचपन से ही शुरू हो रहा है, और भविष्य में डायबिटीज़ व हार्ट प्रॉब्लम्स का खतरा और बढ़ जाता है।

प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है।आज हर व्यक्ति बिना स्मोकिंग किए ही उतना रिस्क उठा रहा है जितना स्मोकिंग करने वाला व्यक्ति। ऊपर से, यंग जनरेशन “जेंटलमैन” दिखने के लिए सिगरेट पीना शुरू कर देती है।

गाँव के लोग भी अब तेजी से शहरों की तरफ़ शिफ्ट हो रहे हैं। गाँव में पहले लोग खेतों और काम में बहुत शारीरिक मेहनत करते थे। लेकिन अब वहाँ भी ज़्यादातर काम मशीनों से होने लगे हैं, जिससे उनकी एक्टिविटी भी कम हो गई है।
गाँव में भी डायबिटीज काफ़ी कॉमन है यहाँ तक कि हाउसवाइफ में भी मोटापा और डायबिटीज़ बहुत बढ़ गई है। घर के काम भी अब ज़्यादातर मशीनों से होने लगे हैं।

आज भारत में हर 4 में से 1 आदमी को हाई ब्लड प्रेशर है। हर 10 में से 1 आदमी को शुगर है।

आज TB और ऐसी कई बीमारियों का समय पर इलाज उपलब्ध है, इसलिए लोग लंबे समय तक जीवित रहते हैं। लेकिन लंबे जीवन के साथ-साथ हार्ट, किडनी, डायबिटीज़ जैसी chronic बीमारियाँ बढ़ गई हैं, जिससे कार्डियक अरेस्ट का खतरा और ज़्यादा हो गया है।

एक और वजह है। आजकल किसी भी घटना की खबर तुरंत टीवी चैनल, अख़बार, और सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। पहले ऐसे मामलों की जानकारी सिर्फ परिवार या मोहल्ले तक सीमित रहती थी, लेकिन अब हर घटना देशभर में चर्चा का विषय बन जाती है।

आप चाहें तो कोविड या वैक्सीन को दोष दें, लेकिन सच यही हैं कि आज लोग जितना मॉर्निंग वॉक में चलते हैं, उतना तो पहले सिर्फ़ सुबह पेट साफ़ करने जाते हुए ही चल लेते थे।

हिमालय की गोद में बसा सोलुखुम्बु, नेपाल! यहीं से निकली एक कहानी, जिसने पूरी दुनिया को प्रेरणा दी। यह कहानी है पेम्बा शेर...
29/08/2025

हिमालय की गोद में बसा सोलुखुम्बु, नेपाल! यहीं से निकली एक कहानी, जिसने पूरी दुनिया को प्रेरणा दी।

यह कहानी है पेम्बा शेरपा (37 वर्ष) की, जो कभी डायलिसिस मशीन से बँधे जीवन की ओर देख रहे थे, और आज दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर खड़े होकर पूरी मानवता के लिए आशा का संदेश दे रहे हैं।

जापान में छह साल काम करने के बाद 2020 में जब पेम्बा नेपाल लौटे, तो उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका जीवन अचानक बदल जाएगा। उन्हें पता चला कि वे एंड-स्टेज किडनी फेल्योर से पीड़ित हैं। दोनों किडनियाँ तेज़ी से खराब हुईं और उन्हें हर हफ्ते 2-3 दिन डायलिसिस कराना पड़ता था। एक पहाड़ों में पला-बढ़ा ऊर्जावान युवक अचानक मशीन पर निर्भर हो गया। यह उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था।

उस कठिन दौर में उनके पिता आंग ग्यालजेन शेरपा आगे आए। 2022 में उन्होंने अपनी एक किडनी दान कर बेटे की जान बचाई। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं था। यह पिता की ममता और त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण था। पिता ने जीवन दिया और बेटे ने उस जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया।

30 महीने की लंबी रिकवरी के बाद पेम्बा ने बीमारी को अपनी पहचान मानने से इंकार कर दिया। 2024 में उन्होंने लोबुचे पीक पर चढ़ाई की। यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट था। पहाड़ पर बिताए हर पल ने उन्हें सिखाया कि शरीर की सीमाएँ होती हैं, लेकिन मन की शक्ति अनंत है। इसी से उनमें एवरेस्ट फतह करने का सपना जन्मा।

महीनों की तैयारी, कठिन प्रशिक्षण और मानसिक दृढ़ता के साथ पेम्बा ने 2025 में अपना सफ़र शुरू किया। अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों और IFMGA-प्रमाणित गाइड्स के साथ कदम-दर-कदम बढ़ते हुए 14 मई 2025 को सुबह 9:30 बजे वे एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचे। उस पल उनकी आँखों में आँसू थे! थकान के नहीं, बल्कि उस वादे को निभाने के, जो उन्होंने खुद से और अपने पिता से किया था।

उनकी इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी। वे दुनिया के पहले इंसान बने जिन्होंने किडनी ट्रांसप्लांट के बाद एवरेस्ट फतह किया।

पेम्बा शेरपा की कहानी सिर्फ एक पर्वतारोही की जीत नहीं है। यह संदेश है कि बीमारी अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकती है। अंगदान किसी के लिए नई ज़िंदगी और नई ऊँचाइयों का कारण बन सकता है।

आज पेम्बा शेरपा सिर्फ एवरेस्ट विजेता नहीं हैं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं जो किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी कहानी हमें याद दिलाती है कि जीवन में सबसे ऊँचे शिखर वही छूते हैं, जो हार मानने से इनकार कर देते हैं।

27/06/2025
Human Metapneumovirus (HMPV) is not a new virus, either globally or in India. • The first case of HMPV was identified in...
06/01/2025

Human Metapneumovirus (HMPV) is not a new virus, either globally or in India.

• The first case of HMPV was identified in 2001 in the Netherlands. Not in china

• HMPV is third most common cause of acute respiratory infections (ARI) in children

• Mostly seen in winter season

Indian Studies on HMPV:

Year 2007: Study from AIIMS New Delhi(Banerjee et al.) found
HMPV was cause of
• 12% of ARI cases in children.
• 13% of hospitalized children with ARI.
• Most cases in winter season.

Year 2011: Study from Kolkata (Anurodh P et al.,)
• HMPV was identified as the cause of 5% of ARI cases in west Bengal

Year 2015 : Study from AIIMS New Delhi, (Banerjee et al.) reported
• 3% of ARI cases in India due to HMPV

Year 2022: Study from Manipal institute of virology (Preetiparna et al.): A multicenter study identified common symptoms of HMPV, which included:
• Cough (97.5%)
• Coryza (runny nose) (82.5%)
• Chills (73.3%)
• Myalgia (muscle pain) (64.5%)
• Vomiting (32%)
• Neck stiffness (27.2%)
• Breathlessness (17.5%)
• Diarrhea (4.4%)

In Healthy Individuals:
HMPV infection is generally self-limiting, resembling the common cold and is unlikely to lead to severe complications.

In High-Risk Groups: Infants, the elderly, and those with weakened immune systems may be at higher risk for developing more severe complications. These individuals should be monitored more closely.



Refrences
1. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC7119306/

2. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/17085070/

3. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC3045894/

4. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4412166/

5. https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC9889522/

🌍 आज विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) है ।HIV/AIDS के बारे में जानें |HIV क्या है?HIV (Human Immunodeficiency Virus) शरी...
01/12/2024

🌍 आज विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) है ।

HIV/AIDS के बारे में जानें |

HIV क्या है?
HIV (Human Immunodeficiency Virus) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है, जिससे व्यक्ति संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो सकता है।

AIDS क्या है?
AIDS (Acquired Immunodeficiency Syndrome) HIV संक्रमण का गंभीर चरण है, जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमजोर हो जाती है।

🌟 विश्व स्तर पर स्थिति:

• 🌍 39 मिलियन लोग HIV के साथ जी रहे हैं।
• 🇮🇳 भारत में 23 लाख लोग HIV संक्रमित हैं।
• 💊 90% से अधिक भारतीय HIV संक्रमित लोग ART (Antiretroviral Therapy) का लाभ उठा रहे हैं।

🔍 HIV संक्रमण के कारण:

1️⃣ असुरक्षित यौन संबंध।
2️⃣ संक्रमित रक्त या सुई का उपयोग।
3️⃣ HIV संक्रमित माँ से बच्चे में संक्रमण (गर्भावस्था, प्रसव, या स्तनपान)।

🩺 HIV/AIDS के लक्षण:

• बुखार, थकान, और रात में पसीना आना।
• वजन घटना और लगातार दस्त।
• बार-बार संक्रमण होना।
• ओपर्चुनिस्टिक संक्रमण (जैसे टीबी, निमोनिया)।

🛡 बचाव के उपाय:

✅ कंडोम का सही उपयोग करें।
✅ स्वच्छ और नई सुई का उपयोग करें।
✅ प्रमाणित ब्लड बैंक से ही रक्त लें।
✅ गर्भवती HIV पॉजिटिव माँ का इलाज करें।
✅ जोखिमपूर्ण व्यवहार करने पर नियमित HIV जाँच कराएँ।

💊 इलाज संभव है:

• ART (Antiretroviral Therapy) HIV को नियंत्रित करता है और AIDS से बचाता है।
• भारत में नि:शुल्क और गोपनीय इलाज उपलब्ध है।

महत्वपूर्ण तथ्य:
• HIV छूने, हाथ मिलाने, या साथ खाना खाने से नहीं फैलता।
• सही समय पर इलाज से HIV संक्रमित व्यक्ति एक स्वस्थ और लंबा जीवन जी सकता है।

“सुरक्षित रहें, सतर्क रहें, और जागरूक बनें।”

पूर्व क्रिकेटर, अभिनेता, और नेता नवजोत सिद्धू ने भ्रामक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अपनी पत्नी के ...
24/11/2024

पूर्व क्रिकेटर, अभिनेता, और नेता नवजोत सिद्धू ने भ्रामक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया कि अपनी पत्नी के कैंसर का इलाज “डाइट” से किया है। यह दावा कुछ साल पहले एक साध्वी द्वारा गाय के मूत्र सेवन से स्तन कैंसर का इलाज करने की तरह पूरी तरह से भ्रामक हैं।

जबकि सच यह है कि सिद्धू की पत्नी का इलाज आधुनिक चिकित्सा से किया गया था, जिसमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी शामिल थीं। यह इलाज कैंसर विशेषज्ञों (ऑंकोलॉजिस्ट) की निगरानी में किया गया था। आम जनता को इस भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए कि कैंसर का इलाज सिर्फ “डाइट” से किया जा सकता है।

कैंसर के बारे में जानकारी:

कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें शरीर की कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। सामान्य रूप से, कोशिकाएँ शरीर की ज़रूरत के अनुसार विभाजित और विकसित होती हैं, लेकिन कैंसर में ये कोशिकाएँ बिना नियंत्रण के बढ़ती रहती हैं और एक गांठ या ट्यूमर बना सकती हैं।

कैंसर शरीर के विभिन्न हिस्सों में फैल सकता है और स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है, जिससे अंगों और शरीर की सामान्य क्रियाओं में बाधा उत्पन्न होती है।

कैंसर कई प्रकार का हो सकता है, जैसे स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, रक्त कैंसर (ल्यूकेमिया) इत्यादि। इसके लक्षण और उपचार कैंसर के प्रकार और अवस्था पर निर्भर करते हैं।

कैंसर का पता लगाने के लिए कई तरह के परीक्षण किए जाते हैं। इसमें सबसे पहले डॉक्टर शारीरिक जांच करते हैं, जैसे शरीर में गांठ या सूजन देखना। इसके बाद खून और मूत्र की जांच की जाती है ताकि शरीर में किसी असामान्यता का पता चल सके। एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई, PET स्कैन जैसी इमेजिंग तकनीकों से शरीर के अंदर की स्थिति का पता लगाया जाता है। कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी सबसे सटीक तरीका है, जिसमें संदिग्ध हिस्से से टिश्यू का नमूना लेकर जांच की जाती है।

आशा और संभावना:

कैंसर का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस प्रकार का है, उसकी अवस्था क्या है, और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है।

शुरुआती चरण (Early stages): कैंसर के शुरुआती चरण में, इलाज की संभावना बहुत अधिक होती है। अधिकतर मामलों में, सर्जरी या अन्य उपचारों के बाद कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकता है, क्योंकि यह उस समय तक शरीर के अन्य भागों में नहीं फैला होता है।

देर के चरण (Late stages): कैंसर के देर के चरण में, इलाज की सफलता की संभावना कम हो जाती है क्योंकि कैंसर अक्सर अन्य अंगों में फैल चुका होता है। पहले इसमें उपचार का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना, दर्द को कम करना और जीवन की गुणवत्ता को सुधारना था। लेकिन आधुनिक चिकित्सा ने Late stage के इलाज में कई नए दरवाजे खोले हैं। जहाँ पहले स्टेज 4 कैंसर को अंतिम चरण माना जाता था, वहीं अब कई रोगियों में, आधुनिक उपचार से “कम्प्लीट रेमिशन” (Complete Remission) भी देखा गया है, जहाँ कैंसर के सभी लक्षण गायब हो जाते हैं और बाद में कैंसर फ़्री कर दिया जाता है।

इलाज/थेरेपी:

कैंसर के इलाज में अक्सर Combination therapy का उपयोग किया जाता है, जिसमें दो या अधिक उपचार विधियों का संयोजन किया जाता है। यहां कुछ मुख्य उपचार विधियाँ दी गई हैं।
1. सर्जरी (Surgery): शुरुआती चरण में, कैंसर अक्सर सीमित क्षेत्र में होता है, इसलिए सर्जरी द्वारा पूरे ट्यूमर को हटा दिया जाता है।
2. रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उच्च-ऊर्जा किरणों का उपयोग। यह ट्यूमर को छोटा करने या पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रभावी हो सकती है।
3. कीमोथेरेपी (Chemotherapy): ट्यूमर के आकार को कम करने के लिए सर्जरी से पहले या बाकी बची कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए सर्जरी के बाद दी जा सकती है।
4. इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह उपचार शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचान सके और उन पर हमला कर सके। इसका फायदा यह है कि यह शरीर की सामान्य कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाए बिना सिर्फ कैंसर कोशिकाओं पर केंद्रित रहता है।
5. टार्गेटेड थेरेपी (Targeted Therapy): कुछ मामलों में, विशेष दवाओं का उपयोग किया जाता है जो केवल कैंसर की कोशिकाओं पर असर डालती हैं, जिससे साइड इफेक्ट कम होते हैं।
6. हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy): हार्मोन-संवेदनशील कैंसर, जैसे स्तन और प्रोस्टेट कैंसर में, हार्मोन थेरेपी का उपयोग करके ट्यूमर की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है।
7. CAR-T सेल थेरेपी (CAR-T Cell Therapy): यह एक नवीनतम तकनीक है जिसमें मरीज की टी कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित करके कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए सक्षम किया जाता है।

फंडिंग और सहायता:

कैंसर के उपचार में पैसे का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, कैंसर के इलाज की लागत इस पर निर्भर करती है कि किस प्रकार का उपचार किया जा रहा है, किस प्रकार का कैंसर है, और यह किस स्टेज में है। कैंसर के इलाज में आर्थिक सहायता के लिए भी कई योजनाएँ हैं।
1. सरकारी योजनाएँ भी कैंसर मरीजों के इलाज में मदद कर सकती हैं, जिनमें केंद्र के स्तर पर राष्ट्रीय आरोग्य निधि (RAN), पीएम नेशनल रिलीफ फंड (PMNRF) और आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) प्रमुख हैं। कुछ राज्य सरकारें भी कैंसर के इलाज में मदद करती हैं।
2. कुछ अस्पतालों में वित्तीय सहायता कार्यक्रम भी होते हैं, जिनके माध्यम से योग्य मरीजों को रियायत या मुफ्त इलाज की सुविधा मिल सकती है।
3. कई संगठन और एनजीओ (NGOs) हैं जो कैंसर के इलाज के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं।
4. स्वास्थ्य बीमा कवर से कैंसर के इलाज की लागत में बड़ी सहायता मिल सकती है। हालांकि, हर प्रकार के बीमा में हर प्रकार के कैंसर उपचार शामिल नहीं होते। इसलिए, बीमा कवर का चयन करते समय ध्यान देना आवश्यक है कि इसमें कैंसर उपचार की किन विधियों को शामिल किया गया है।

निष्कर्ष यही है कि कैंसर के इलाज के लिए विशेषज्ञ की सलाह और उचित उपचार आवश्यक है। अफ़वाहों और भ्रामक दावों से बचे।

- डॉ. ब्रजेश मौर्य
नेफ़्रोलॉजिस्ट और ट्रांस्प्लांट फ़िज़िशियन
डीएम नेफ्रोलॉजी (एम्स, न्यू दिल्ली)

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