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अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी को ख़ुशहाल बनाए ।
12/11/2020

अपनी शादी शुदा ज़िन्दगी को ख़ुशहाल बनाए ।

पुरुषो में ताकत तथा सेक्सुअल स्टेमना की कमी को दूर कर पुरुषो में होने वाली विभिन्न यौन रोगो को करे जड़ से खत्म करने के ल...
11/11/2020

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बवासीर (पाइल्स) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज और परहेज :बवासीर को Piles या Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी बीमारी...
11/11/2020

बवासीर (पाइल्स) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज और परहेज :

बवासीर को Piles या Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक ऐसी बीमारी है, जो बेहद तकलीफदेह होती है। इसमें गुदा (A**s) के अंदर और बाहर तथा मलाशय (Re**um) के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज (Piles Treatment) कराना बेहद ज़रूरी होता है। समय पर बवासीर का उपचार नहीं कराया गया तो तकलीफ काफी बढ़ जाती है।

यह एक अनुवांशिक समस्या भी है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो इससे दूसरे व्यक्ति को होने की आशंका रहती है। बहुत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है जिसे फिस्टुला (Fistula) भी कहते हैं। इसमें असहाय जलन एवं पीड़ा होती है।

बवासीर के प्रकार (Piles (Hemorrhoids) Types)
बवासीर दो प्रकार की होती हैं, जो ये हैंः-

खूनी बवासीर
खूनी बवासीर में किसी प्रकार की पीड़ा नहीं होती है। इसमें मलत्याग करते समय खून आता है। इसमें गुदा के अन्दर मस्से हो जाते हैं। मलत्याग के समय खून मल के साथ थोड़ा-थोड़ा टपकता है, या पिचकारी के रूप में आने लगता है।

मल त्यागने के बाद मस्से अपने से ही अन्दर चले जाते हैं। गंभीर अवस्था में यह हाथ से दबाने पर भी अन्दर नहीं जाते। इस तरह के बवासीर का तुरंत उपचार कराएं।

बादी बवासीर
बादी बवासीर में पेट की समस्या अधिक रहती है। कब्ज एवं गैस की समस्या बनी ही रहती है। इसके मस्सों में रक्तस्राव नहीं होता। यह मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं। इनमें बार-बार खुजली एवं जलन होती है। शुरुआती अवस्था में यह तकलीफ नहीं देते, लेकिन लगातार अस्वस्थ खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। इनमें खून जमा हो जाता है, और सूजन हो जाती है।

इसमें भी असहनीय पीड़ा होती है, और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। मलत्याग करते समय, और उसके बाद भी रोगी को दर्द बना रहता है। वह स्वस्थ तरह से चल-फिर नहीं पाता, और बैठने में भी तकलीफ महसूस करता है। इलाज कराने से यह समस्या ठीक हो जाती है।

बवासीर होने के लक्षण (Piles or Hemorrhoids Symptoms)
कई बार बवासीर यदि गंभीर अवस्था में ना पहुंचा हो तो यह 4-5 दिनों में अपने आप ही ठीक हो जाता है, लेकिन रोग बढ़ने पर ये लक्षण देखे जा सकते हैंः-

गुदा के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
शौच के बाद भी पेट साफ ना हेने का आभास होना।
शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
गुदा के आस-पास खुजली, एवं लालीपन, व सूजन रहना।
शौच के वक्त म्यूकस का आना।
बार-बार मल त्यागने की इच्छा होना, लेकिन त्यागते समय मल न निकलना।
इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरंदाज ना करें। जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाकर पाइल्स का इलाज कराएं।

बवासीर होने के कारण (Piles or Hemorrhoids Causes)
आयुर्वेद में बवासीर को ‘अर्श’ कहा गया है। यह वात, पित्त एवं कफ तीनों दोषों के दूषित होने से होता है। इसलिए इसे त्रिदोषज रोग कहा गया है। जिस बवासीर में वात या कफ की प्रधानता होती है, वे अर्श शुष्क होते हैं। इसलिए मांसांकुरों में से स्राव नहीं होता है। जिस अर्श में रक्त या पित्त या रक्तपित्त की प्रधानता होती है, वे आर्द्र अर्श होते है। इसमें रक्तस्राव होता है। शुष्क अर्श में पीड़ा अधिक होती है।

कुछ लोगों में यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी देखा जाता है, लेकिन कुछ में अन्य कारणों से भी होता है, जो ये हैंः-

कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है, जैसे- बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस इत्यादि। इसके साथ ही जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है। इन लोगों को बवासीर से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है।
कब्ज भी बवासीर का एक प्रमुख कारण है। कब्ज में मल सूखा एवं कठोर होता है, जिसकी वजह से व्यक्ति को मलत्याग करने में कठिनाई होती है। काफी देर तक उकड़ू बैठे रहना पड़ता है। इस कारण से वहां की रक्तवाहिनियों पर जोर पड़ता है, और वह फूलकर लटक जाती है, जिन्हें मस्सा कहा जाता है।
अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
शौच ठीक से ना होना।
फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना।
महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
आलस्य या शारीरिक गतिविधि कम करना।
धूम्रपान और शराब का सेवन।
अवसाद

बालों को झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Hair Fall)बालों का झड़ना (Hair Fall problem) एक आम समस्या बन गई ...
11/11/2020

बालों को झड़ने से रोकने के घरेलू उपाय (Home Remedies for Hair Fall)

बालों का झड़ना (Hair Fall problem) एक आम समस्या बन गई है। इसका जल्द से जल्द इलाज करना बहुत जरूरी होता है। आजकल लोगों की जीवनशैली और खान-पान इतनी बुरी हो गई है कि इसका सीधा असर बालों पर पड़ता है। ऊपर से प्रदूषण और हेयर प्रोडक्ट के केमिकल के कारण भी बालों पर असर पड़ता है, जो बाद में बालों के झड़ने का कारण बन जाता है। आप लोग बालों से झड़ने से संबंधित समस्या के लिए घरेलू नुस्ख़ों (home remedies for hair fall) को आजमा सकते हैं।

बाल अगर आम कारणों से झड़ रहा है तो घरेलू नुस्ख़े बहुत काम आते हैं। आप बालों को झड़ने से रोकने के उपाय या इलाज करने में जितनी देरी करेंगे, उतनी ही तेजी से बाल झड़ती जाएगी। असल में बालों के गिरने की समस्या को लोग पहले नजरअंदाज करते हैं, इसलिए सही समय पर इसका इलाज नहीं हो पाता है। बाल झड़ने से रोकने के उपायों बाल झड़ने के उपाय (baal jhadne ke upay) को जल्द जल्द से अपनाने की जरूरत होती है। असमय बाल झड़ने से लोग अपनी उम्र से ज्यादा उम्र के नजर आने लगते हैं, इसलिए लोग बहुत ज्यादा स्ट्रेस में भी आ जाते हैं।

इसलिए बाल झड़ने की दवा या घरेलू इलाज करने के पहले बाल झड़ने के कारणों के बारे का पता लगाना जरूरी होता है। जब आपको बालों झड़ने के कारण का पता चल जाएगा तो आप बालों को झड़ने से रोकने (hair fall control) के सही उपाय कर सकेंगे।

बालों का झड़ना क्या है? (What is Hairfall?)
आजकल बालों का झड़ना एक आम समस्या हो गई है। हर दूसरा व्यक्ति इस परेशानी से जूझ रहा है। कई लोगों के बाल समय से पहले इतने झड़ जाते है कि उन्हें हेयर ट्रांसप्लांट करवाकर इलाज (balo ka ilaj) करना पड़ता है। बालों का झड़ना जब थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ने लगता है तो गंजेपन की नौबत आ जाती है। सामान्यत 50 से 100 बाल लगभग हर दिन टूटते-झड़ते है यदि इससे ज्यादा बाल झड़ते है तो ये गंजापन का विषय है। गंजेपन की अवस्था आने से पहले बालों का झड़ना रोकने के लिए घरेलू नुस्ख़ों का आजमाने से सही परिणाम मिलता है।

लेकिन क्या आपको पता है कि बालों का झड़ना या गंजापन दो तरह के होते हैं। ‍वैसे तो बाल गिरने की समस्या आम तौर पर 30 साल के बाद से शुरू हो जाती है। पुरुषों में इस समस्या को मेल पैटर्न बॉल्डनेस (male pattern baldness) कहते है।

महिलाओं में (Androgenetic Alopecia) को (female pattern baldness) कहते है इस समस्या से पीड़ित महिलाओं में पूरे सिर के बाल कम हो जाते है पर हेयरलाइन पीछे नहीं हटती। महिलाओं में इसके कारण शायद ही कभी पूरी तरह गंजेपन की समस्या होती है।



बाल झड़ने के कारण (Causes of Hairfall in Hindi)
बाल झड़ने के आम कारण ये हैंः-असंतुलित आहार योजना, गलत जीवनशैली, आनुवांशिकता यानि हेरीडियेटरी, दवाओं के दुष्प्रभाव आदि आदि। चलिये ऐसे और कारणों के बारे में जानते हैं-

लंबी बीमारी या किसी बड़ी शल्य क्रिया या सर्जरी, गंभीर संक्रमण या इंफेक्शन और शारीरिक तनाव से दो या तीन महीने के बाद बालों का झड़ना एक सामान्य प्रक्रिया है।
हार्मोन स्तर में आकस्मिक बदलाव के बाद भी ये हो सकता है, विशेषकर स्त्रियों में शिशु को जन्म देने के बाद यह होता है।
दवाइयों के दुष्प्रभाव के कारण।
किसी बीमारी के लक्षण के रूप में भी बालों का झड़ना हो सकता है जैसे कि थायरॉयड, सेक्स हार्मोन में असंतुलन या गंभीर पोषाहार समस्या विशेषकर प्रोटीन, जिंक, बायोटीन की कमी। यह कमी खान-पान में परहेज करने वाले और महिलाओं में मासिक धर्म में बहुत ज्यादा रक्तस्राव होने पर होता है।
सिर की त्वचा में फफूंद से संक्रमण हो जाता है तो बीच-बीच में बाल झड़ते है।
वंशानुगत गंजापन या वंश में कोई गंजा है तो वह आनुवांशिकता के तौर पर मिल सकता है।


आयुर्वेद के अनुसार बाल झड़ने के और भी बहुत सारे कारण होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार वात के साथ मिला पित्त रोमकूपों में जाकर बालों को गिरा देता है तथा इसके अनन्तर रक्त के साथ मिला हुआ कफ रोमकूपों को बन्द कर देता है जिससे उस स्थान में दूसरे बाल पैदा नहीं होते है। इसके साथ बाल गिरने का एक कारण नहीं बल्कि कई कारण है,जैसे- नमक का अधिक सेवन करने से गंजापन आ जाता है। और तनाव, संक्रमण, हार्मोन असंतुलन, अपर्याप्त पोषण, विटामिन और पोषक पदार्थो की कमी, दवाओं के दुष्प्रभाव, लापरवाही बरतना या बालें की सही देखभाल न होना, गलत प्रकार के शैम्पू का प्रयोग भी होता है।

यहां तक कि विरुद्ध आहार-विहार, पित्त वर्धक आहार-विहार, आहार पर हीन, मिथ्या और अतियोग, निद्रा, ब्रह्मचर्य, प्रदूषित जल होता है। बाल झड़ने के कोई भी कारण हो, हर कारण में अगर सही घरेलू नुस्ख़े को आजमाया गया तो नए बालों का विकास (baal jhadne se rokne ke upay) हो सकता है।

इसके अलावा आधुनिक विज्ञान के अनुसार बाल झड़ने के ये भी कारण हो सकते हैं-

फंगल इंफेक्शन
विटामिन ए का ओवरडोस
थॉयरायड
मनोवैज्ञानिक तनाव
रेडियोथेरेपी या केमोथ्रेपी
स्टेरॉयड का नियमित सेवन
लेकिन अगर समय रहते सचेत हो जाये और सही इलाज करने के साथ घरेलू नुस्ख़ो को आजमाया जाये तो बाल का झड़ना कम कर सकते हैं।



बालों को झड़ने से रोकने के उपाय (Baalo ko Jhadne se Rokne ke Upay)
अभी तक हमने बात की कि बाल क्यों झड़ते है लेकिन उनको झड़ने से रोका कैसे जाये (hair fall control), इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। जैसे-जंक फूड का सेवन न करके फल एवं सब्जियों का अधिक सेवन करें। बाल झड़ने की समस्या से बचने के लिए खान-पान के साथ एक अच्छी जीवन शैली को अपनाना भी जरुरी है।

तनाव कम कर, उचित आहार लेकर, बाल संवारने की उचित तकनीक अपनाकर और यदि संभव हो तो बालों को झड़ने से रोकने वाली दवाइयों का उपयोग कर बालों के झड़ने की समस्या को रोका (hair fall control) जा सकता है। दवाइयों की सहायता से वंशानुगत गंजेपन के कुछ मामलों को रोका जा सकता है।

अत्यधिक तनाव के कारण एक प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण बाल झड़ते है। रात में जगना, अत्यधिक श्रम करना तथा रासायनिक उत्पादों से युक्त शैम्पू से बालों को धोने के लिए प्रयोग करना ये सब बाल झड़ने में कारक है। इसके लिए प्राणायाम एवं योगासनों को अपनी जीवनशैली में शामिल करें। योगासन एवं प्राणायाम करने से तनाव का स्तर कम होता है तथा बाल झड़ने कम हो जाते है। खाने में मौसमी फल का अधिक से अधिक प्रयोग करना, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अंकुरित धान्य तथा सूखे मेंवों का सेवन करें। संतुलित आहार लेने से पोषक तत्वों की कमी नहीं आती जो कि बाल झड़ने के मुख्य कारणों में आता है।

स्त्रियों में गर्भावस्था के दौरान अथवा मेनोपॉज के बाद बाल झड़ने की समस्या देखी जाती है इसके लिए भी संतुलित आहार एवं तनावरहित जीवन शैली बाल झड़ने के उपाय (baal jhadne ke upay) की आवश्यकता है। जीवनशैली में बदलाव लाने पर बालों का झड़ना कुछ हद तक रोका जा सकता है।

इसके अलावा कई ऐसे घरेलू उपाय हैं जिनसे आप डायबिटीज को कंट्रोल करके एक सामान्य जीवन जी सकते हैं.1. तुलसी की पत्त‍ियों के ...
11/11/2020

इसके अलावा कई ऐसे घरेलू उपाय हैं जिनसे आप डायबिटीज को कंट्रोल करके एक सामान्य जीवन जी सकते हैं.

1. तुलसी की पत्त‍ियों के इस्तेमाल से कंट्रोल करें डायबिटीज तुलसी की पत्त‍ियों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. इसके अलावा इसमें कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं. ये सेल्स इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाती हैं. सुबह उठकर खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं. आप चाहें तो तुलसी का रस भी पी सकते हैं. इससे ब्लड शुगर लेवल कम होता है.

2. दालचीनी का पाउडर लेना भी है बहुत फायदेमंद दालचीनी भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला है. दालचीनी के प्रयोग से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है. ये ब्लड में शुगर के लेवल को कम करने और नियंत्रित करने में मददगार है. इसके नियमित सेवन से मोटापा भी कम किया जा सकता है. दालचीनी को महीन पीसकर पाउडर बना लें और उसे गुनगुने पानी के साथ लें. मात्रा का विशेष ध्यान दें. बहुत अधिक मात्रा में ये पाउडर लेना खतरनाक हो सकता है.

3. ग्रीन टी पीना भी है फायदेमंद ग्रीन टी में उच्च मात्रा में पॉलीफिनॉल पाया जाता है. ये एक सक्रिय एंटी-ऑक्सीडेंट है. जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मददगार है. प्रतिदिन सुबह और शाम ग्रीन टी पीने से फायदा होगा.

4. सहजन की पत्त‍ियों का रस भी है फायदेमंद सहजन की पत्त‍ियों का रस भी डायबिटीज कंट्रोल करने में बहुत कारगर है. ड्रमस्ट‍िक की पत्त‍ियों को पीसकर उसे निचोड़ ले और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें. इससे शुगर लेवल बढ़ेगा नहीं.

5. जामुन के बीजों के सेवन से जामुन के बीज भी डायबिटीज कंट्रोल करने में फायदेमंद हैं. जामुन के बीजों को अच्छी तरह सुखा लें. सूखने के बाद इन्हें पीसकर एक चूर्ण बना लें. सुबह खाली पेट जामुन के बीजों को गुनगुने पानी के साथ लें. इससे डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.

जोड़ों का दर्द होगा छूमंतर बस अपनाएं बबूल का ये घरेलू नुस्खा!जोड़ों के दर्द से करहाते होते देखा ही होगा। यह दर्द सर्दियो...
11/11/2020

जोड़ों का दर्द होगा छूमंतर बस अपनाएं बबूल का ये घरेलू नुस्खा!

जोड़ों के दर्द से करहाते होते देखा ही होगा। यह दर्द सर्दियों के दौरान और भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक तापमान में उतार चढ़ाव होने पर जोड़ों के आसपास की नसों में सूजन हो जाती है जिससे दर्द बढ़ता है। अगर आप भी जोड़ों के दर्द से परेशान रहती हैं तो इस जादुई नुस्खे के बारे में आप भी जान लें।

यह समस्या एक उम्र के बाद जोड़ों में लुब्रिकेशन और कैल्शियम की कमी के कारण होती है। लेकिन आजकल की खराब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना और खान-पान की गलत आदतों के कारण यह समस्या कम उम्र की महिलाओं को भी परेशान कर रही है।

बबूल को भारत में कीकर के नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ की मुलायम टहनियों को घरों में दातुन बना कर भी प्रयोग किया जाता है। बबूल को महिलाएं दांतों के लिए अच्छा मानती हैं। बबूल से ना केवल दांत ही हेल्दी रहते हैं बल्कि कई तरह की बीमारियों में भी यह फायदेमंद होती है।

बबूल कफ-पित्त नाशक होता है। इसकी फलियां कच्ची और लाभकारी होती हैं। इस हर्ब की भौतिक गुणों में संभावित एंटी-माइक्रोबिल और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो दर्द से राहत देते हैं।

बबूल का कैसे करें इस्तेमाल?
बबूल के पेड़ की फली को लेकर उसे अच्छी तरह से सूखा लें।
सूखने के बाद इसका पाउडर बना लें। फिर इसमें उतनी ही मात्रा में मेथी दाने का पाउडर बना लें।
अब दोनों चीजों को आपस में अच्छी तरह मिला लें।
इस पाउडर को सुबह- शाम लगभग 1 चम्मच गुनगुने पानी खाएं। 2-3 महीने लगातार लेने से आपका जोड़ों के र्द दूर सकते हैं।
इस हर्ब के कोई ज्ञात साइड इफेक्ट नहीं हैं लेकिन कब्ज के दौरान इस हर्ब को खाने से बचना अच्छा रहता है।

घरेलू नुस्खे, जिनकी मदद से आप बहुत ही आसानी से वजन घटा सकते हैं!1.शहद और नींबूनींबू और शहद को एक साथ मिलाकर पीने से वजन ...
11/11/2020

घरेलू नुस्खे, जिनकी मदद से आप बहुत ही आसानी से वजन घटा सकते हैं!

1.शहद और नींबू
नींबू और शहद को एक साथ मिलाकर पीने से वजन कम होता है। एक गिलास हल्के गर्म पानी में शहद, नींबू का रस और काली मिर्च पाउडर डालकर अच्छे से मिलाएं। इस मिश्रण को हर सुबह खाली पेट लें। इससे वजन कम करने में मदद मिलेगी।
2. ग्रीन टी
ग्रीन टी एक बहुत ही अच्छा एंटीऑक्सीडेंट जिससे फैट कम होता है। अगर आप हर रोज इसे लेते हैं तो आपके वजन में कमी जरूर देखी जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में माना की ग्रीन टी में विशेष प्रकार के पोलीफेनॉल्स पाए जाते हैं जिससे शरीर में फैट्स को बर्न करने में मदद मिलती है।
3. लौकी
लौकी में पानी और रेशे पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। आप इसकी सब्जी या जूस में किसी भी तरह से ले सकते हैं। 100 ग्राम लौकी के जूस में केवल 12 कैलोरी ही होती है। इसे अपने सुबह के नाश्‍ते में शामिल करने से वजन तो कम होगा ही साथ में आपकी स्‍किन भी ग्‍लो करेगी।
4. सेब का सिरका
सेब के सिरके की मदद से वजन आसानी से कम कर सकते हैं। इसे पानी के साथ मिलाकर हर रोज सुबह लें। सिरके से रक्त शर्करा के नियन्त्रित होने के कारण यह वजन कम करने में सहायक है क्योंकि इन्सुलिन मुक्त शर्करा को वसा के रूप में संचित नहीं कर पायेगी।
5. अजमोद
अजमोद किडनी की सफाई के लिए जाना जाता है। किडनी में मौजूद व्यर्थ पदार्थों को बाहर निकाल कर यह आपको स्वस्थ रखता है। साथ ही पेट से जुड़ी समस्याओं से भी पाहत दिलाता है और देर तक भूख का एहसास नहीं होने देता है जिससे वजन बढ़ने की समस्या नहीं होती है
6. करौंदा
करौंदा विटामिन सी का बहुत अच्छा स्रोत है साथ ही यह एक अच्छा एंटीऑक्सीडेंट भी है। करौंदे का जूस भी वजन घटाने में बहुत फायदेमंद है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म ठीक रहता है और फैट्स कम करने में आसानी होती है।
7. खूब पानी पिएं
दिन में आठ से नौ ग्लास पानी पीने से भी वेट कम करने में मदद मिलती है। कई शोधों में माना गया है कि दिन में आठ से नौ ग्लास पानी से 200 से 250 कैलोरी आप बर्न कर सकते हैं।

अपनी शादी शुदा ज़िंदगी को ख़ुशाल बनाए ।
11/11/2020

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