POOJA counseling psychologist

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17/12/2025

आज कल भाग दौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर समस्या मन पर कंट्रोल न कर पाने के कारण होती है, मानसिक समस्याओं के पीछे भी यही कारण है इसलिए मन पर नियंत्रण करने के लिए आपको सात काम करने हैं-

1. सबसे पहले तो आपको अपनी समस्त लालसायें, वासनाये और तृष्णायें त्यागनी होंगी।

2. आप अपने मनोवेगों पर नियंत्रण रखें। आप अपने ऊपर काबू रखें जिससे आप क्रोध और अधैर्य का शिकार न बनें।

3. आप अपने विचारों को नियंत्रित करें जिससे वे शान्त और कोलाहल रहित हो जायें।

4. अपने मन के द्वारा अपनी तंत्रिकाओं पर काबू करें ताकि कम-से-कम विचलित हों।

5. अभिमान को विल्कुल त्याग दें। अभिमान मन को बल प्रगदान करता है। यही तो मन की जड़ है। जब आप निराभिमानी हो जायेंगे तो आलोचना, तानेबाजी तथा निन्दा आपको कैसे प्रभावित करेंगे।
6. आप समस्त आसक्तियों को निर्दयतापूर्वक त्याग दें।

7. आप समस्त आशाओं और पक्षपातों का परित्याग कर दें।

निम्नांकित उपाय निस्संदेह रूप से आपको मानसिक शान्ति प्रदान करेंगे-

1. बुरे लोगों की संगति त्याग दें।

2. अकेले वास करें।

3. अपनी आवश्यकतायें कम करें।

4. बहस में न पड़े। बहस से शत्रुता बढ़ती है और केवल शक्ति का अपव्यय होता है।

5. आप अपनी तुलना दूसरों के साथ न करें।

6. लोकप्रिय आलोचनाओं पर ध्यान न दें।

7. नाम और यश के चक्कर में न पड़ें।

आप अपने उच्च सात्विक मन से ही उस मन को काबू में करें जो विभिन्न वस्तुओं के पीछे दौड़ लगाता है, तथा ऊपर उठते जायें। हृदय में कोई विषाद नहीं। उस परम पद की प्राप्ति के लिए तपस्या का धन अर्जित करें। जैसे कोई सम्राट अन्य समस्त राजाओं पर शासन करता है उसी प्रकार अचंचल मन चंचल मन को पूर्ण नियंत्रित करे और फिर अचंचल मन अपनी सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर ले।

CBT मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के सबसे असरदार, रिसर्च-बेस्ड तरीकों में से एक है। बेकार विचारों को पहचानकर और उन्हें बदलक...
16/12/2025

CBT मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के सबसे असरदार, रिसर्च-बेस्ड तरीकों में से एक है। बेकार विचारों को पहचानकर और उन्हें बदलकर, हम भावनाओं और व्यवहार में अच्छे बदलाव ला सकते हैं।

यहाँ कुछ ज़रूरी CBT स्ट्रेटेजी दी गई हैं:

🧠 कॉग्निटिव रीस्ट्रक्चरिंग – नेगेटिव सोच को चुनौती दें और उसे बैलेंस्ड नज़रिए से बदलें
😊 बिहेवियरल एक्टिवेशन – अपने मूड को अच्छा करने के लिए अच्छे या मज़ेदार एक्टिविटीज़ जोड़ें
🚶 एक्सपोज़र थेरेपी – एक सुरक्षित, स्ट्रक्चर्ड प्रोसेस में धीरे-धीरे डर का सामना करें
✍️ जर्नलिंग – विचारों, भावनाओं और पैटर्न को ट्रैक करें
🧩 प्रॉब्लम-सॉल्विंग – समस्याओं को मैनेजेबल स्टेप्स में तोड़ें
🌿 रिलैक्सेशन टेक्नीक – गहरी साँस लेना, मसल्स को आराम देना, और गाइडेड इमेजरी

अपने विचार बदलें → अपनी भावनाएँ बदलें → अपने काम बदलें।

तनाव: क्यों है आपके तन-मन का सबसे बड़ा दुश्मन?      सर्द हवा, तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियाँ—आज का इ...
15/12/2025

तनाव: क्यों है आपके तन-मन का सबसे बड़ा दुश्मन?



सर्द हवा, तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी और लगातार बढ़ती जिम्मेदारियाँ—आज का इंसान हर ओर से दबाव में है। तनाव या Stress अब उम्र नहीं देखता। आयुर्वेद में इसे मानसिक दोषों की विकृति कहा गया है, जबकि आधुनिक विज्ञान इसे हॉर्मोनल असंतुलन और न्यूरो-केमिकल बदलाओं से जोड़ता है। लेकिन दोनों का निष्कर्ष एक ही है—तनाव यदि लम्बे समय तक बना रहे तो यह शरीर के हर सिस्टम को नुकसान पहुँचाता है।

🧠 तनाव आखिर होता क्या है? (Ayurveda + Science)
आयुर्वेद के अनुसार:

तनाव तब उत्पन्न होता है जब रजस और तमस गुण बढ़ जाते हैं और मन में चिंता, भय, असंतुलन पैदा करते हैं। यह मन को अशांत करता है और शरीर में वात दोष बढ़ाता है, जिससे तंत्रिका तंत्र अस्थिर हो जाता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

जब हमारा दिमाग खतरा या दबाव महसूस करता है, तो शरीर Cortisol और Adrenaline जैसे तनाव-हॉर्मोन रिलीज़ करता है।
लम्बे समय तक इनका ऊँचा स्तर—

दिल की धड़कन बढ़ाता है

पाचन कमजोर करता है

नींद बिगाड़ता है

याददाश्त कम करता है

रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है

⚠️ तनाव से होने वाले गंभीर नुकसान (Complications)

📌 High BP और हृदय रोग
📌 पेट की जलन, IBS, भूख कम/ज्यादा
📌 बाल झड़ना, त्वचा dull
📌 अनिद्रा
📌 Diabetes नियंत्रण में कठिनाई
📌 कमज़ोरी, चिड़चिड़ापन, decision-making में कमी
📌 शरीर में chronic inflammation
📌 महिलाओं में PCOS/period disturbances

🌿 तनाव से राहत के सबसे प्रभावी, वैज्ञानिक + पारंपरिक प्रमाणित उपाय
1️⃣ ब्रह्मी घृत / ब्रह्मी रस—शांत मन की सर्वोत्तम औषधि

दिमाग में ऑक्सीजन सप्लाई और न्यूरॉन कम्युनिकेशन सुधारती है

Cortisol स्तर कम करने के प्रमाण
कैसे लें:
1 चम्मच गुनगुने दूध के साथ रात में।

2️⃣ अश्वगंधा—Natural Anti-Stress Shield

वैज्ञानिक शोधों में सिद्ध:
✓ Cortisol 30–40% तक कम
✓ नींद, मूड, ऊर्जा सुधार
कैसे लें:
300 mg extract या 1 चम्मच चूर्ण रात को।

3️⃣ जटामांसी—बेचैनी और घबराहट की ताकतवर औषधि

Nervous system को शांत करती है

अनिद्रा में चमत्कारिक
कैसे लें:
¼ चम्मच गर्म पानी के साथ रात में।

4️⃣ शंखपुष्पी—दिमाग के ओवरलोड को शांत करने वाला टॉनिक

Mental fatigue कम

Concentration और clarity बढ़ाए
कैसे लें:
1 चम्मच सिरप या ½ चम्मच चूर्ण।

5️⃣ दूध + जायफल—परंपरागत रात का Instant Calming Drink

दिमाग की over-firing रोकता है

गहरी नींद में बड़ा लाभ
कैसे बनाएं:
दूध में चुटकी भर जायफल पाउडर मिलाकर 30 मिनट पहले पिएँ।

6️⃣ तिल का तेल सिर पर—Vata Pacifying अभ्यंग

आयुर्वेद में इसे शिरो-तैल उपचार कहा गया है।
✔ तनाव, सिरदर्द, बेचैनी
✔ नींद में सुधार
कैसे करें:
गुनगुने तिल के तेल से 5–7 मिनट मालिश करें।

7️⃣ गरम पानी + शहद—Stress Detox

शरीर के toxin load को घटाता है

हल्का, ऊर्जा देने वाला, mood stabilizer
कैसे लें:
सुबह खाली पेट 1 गिलास।

8️⃣ तुलसी + दालचीनी की चाय

Nervous system adaptogenic

चिंता और सर्दियों के तनाव का श्रेष्ठ उपाय
कैसे बनाएं:
4 तुलसी पत्ते + 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी उबालकर।

9️⃣ 4-7-8 Breathing—Instant Relief Technique (वैज्ञानिक प्रमाण)

✔ दिल की धड़कन शांत
✔ मस्तिष्क के stress receptors धीमे
तकनीक:
4 सेकंड साँस लें → 7 सेकंड रोकें → 8 सेकंड छोड़ें
2 मिनट करें।

🍎 तनाव में किन खाद्यों का सेवन करें

✓ केले (natural serotonin booster)
✓ अखरोट और बादाम (omega-3)
✓ गुड़ (natural mineral recharger)
✓ गुनगुना दूध
✓ सूप, खिचड़ी, दलिया

🚫 किन चीज़ों से बचें

✘ चाय-कॉफी का अधिक सेवन
✘ देर रात जागना
✘ बहुत तला-भुना
✘ मोबाइल/स्क्रीन late hours

⭐ अंतिम संदेश

तनाव कोई छोटी समस्या नहीं—यह धीरे-धीरे शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करता है। लेकिन समय पर सही आयुर्वेदिक औषधियाँ, भोजन, मानसिक तकनीकें और lifestyle बदलाव आपको संतुलित, शांत और ऊर्जावान बना सकते हैं।

तनाव कम करें… जीवन का स्वाद फिर से महसूस करें।

😳👇If you use your phone while sitting on the toilet seat, beware! As soon as you flush, f***l particles (E. coli) fly an...
14/12/2025

😳👇If you use your phone while sitting on the toilet seat, beware! As soon as you flush, f***l particles (E. coli) fly and stick to your phone screen. Later, you put the same phone to your ears and mouth. You're touching a disease, not a mobile phone.

किसी भी विवाद या पारिवारिक तनाव का असर सीधे दिमाग और शरीर पर पड़ता है। एटा में एक आरोपी द्वारा हवालात में हुडी का फीता क...
13/12/2025

किसी भी विवाद या पारिवारिक तनाव का असर सीधे दिमाग और शरीर पर पड़ता है। एटा में एक आरोपी द्वारा हवालात में हुडी का फीता कसकर जान देने की कोशिश ने फिर साबित किया है कि मानसिक दबाव जब हद पार कर जाता है, तो इंसान अपना ही नुकसान करने लगता है।

कहानी में आरोप–प्रत्यारोप, पारिवारिक कलह, और लगातार बढ़ते तनाव ने स्थिति को इतना बिगाड़ दिया कि बात अस्पताल तक पहुंच गई। ऐसे मामलों में लोग थकान, ओवरथिंकिंग, नींद न आना, चिड़चिड़ापन, घबराहट, और निराशा जैसे लक्षणों को पहचान नहीं पाते — और धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य टूटने लगता है।

अगर किसी भी तनावपूर्ण स्थिति में आप या कोई और लगातार भावनात्मक दबाव महसूस कर रहा है, तो मदद लेने से हिचकें नहीं।
किसी विश्वसनीय व्यक्ति से बात करें, परिवार को साथ लें, या ज़रूरत पड़े तो काउंसलर से संपर्क करें — मानसिक सेहत भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी शारीरिक।

निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) वाले बच्चों के लिए स्क्रीन समय सीमित करना ज़रूरी है, क्योंकि ज़्यादा स्क्रीन टाइम इसे बढ़ाता ...
11/12/2025

निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) वाले बच्चों के लिए स्क्रीन समय सीमित करना ज़रूरी है, क्योंकि ज़्यादा स्क्रीन टाइम इसे बढ़ाता है; उन्हें हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लेकर 20 फीट दूर देखना चाहिए (20-20-20 नियम), दिन में ज़्यादा देर बाहर धूप में बिताना चाहिए, और स्क्रीन दूरी बनाए रखनी चाहिए (लगभग 16-24 इंच) ताकि आँखों का तनाव कम हो और निकट दृष्टि दोष की प्रगति धीमी हो सके.
मुख्य सुझाव:
20-20-20 नियम का पालन करें: हर 20 मिनट बाद, 20 सेकंड के लिए 20 फीट (लगभग 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को देखें.
बाहरी गतिविधियों को बढ़ावा दें: बच्चों को बाहर ज़्यादा समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें, क्योंकि धूप और खुली हवा आँखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है और मायोपिया को रोकती है.
स्क्रीन की दूरी बनाए रखें: स्क्रीन को बहुत पास रखने से बचें; हाथ से पकड़े जाने वाले उपकरणों के लिए 16-24 इंच (लगभग 40-60 सेमी) की दूरी रखें.
स्क्रीन समय सीमित करें: कुल स्क्रीन समय को कम करें और शैक्षिक सामग्री को प्राथमिकता दें, साथ ही समय-समय पर ब्रेक लेते रहें.
स्क्रीन के उपयोग की निगरानी करें: सामग्री और समय दोनों पर ध्यान दें और सोने से पहले स्क्रीन से दूर रहने की कोशिश करें.
क्यों ज़रूरी है?
आँखों की लंबाई बढ़ना: लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आँखें लंबी हो सकती हैं, जिससे निकट दृष्टि दोष बढ़ता है (प्रोग्रेसिव मायोपिया).
आँखों का तनाव: अत्यधिक स्क्रीन टाइम से आँखों में खिंचाव (आई स्ट्रेन) और सूखापन हो सकता है.
माता-पिता क्या कर सकते हैं:
बच्चों के लिए स्क्रीन-फ्री समय और स्थान (जैसे भोजन के समय या बेडरूम में) निर्धारित करें.
खुद अच्छे रोल मॉडल बनें और अपना स्क्रीन टाइम भी नियंत्रित करेंl

नींद का समय उतना ही ज़रूरी है जितना कि नींद की अवधि, और नई रिसर्च से पता चलता है कि सुबह एक बजे के बाद सोने से दिमाग इस ...
07/12/2025

नींद का समय उतना ही ज़रूरी है जितना कि नींद की अवधि, और नई रिसर्च से पता चलता है कि सुबह एक बजे के बाद सोने से दिमाग इस तरह से डिस्टर्ब हो सकता है जिससे मानसिक और इमोशनल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। दिमाग एक नेचुरल अंदरूनी घड़ी को फॉलो करता है जो हार्मोन, मूड, फोकस और स्ट्रेस रिस्पॉन्स को रेगुलेट करती है। जब सोने का समय बहुत देर हो जाता है, तो यह रिदम बिगड़ जाता है, जिससे उन सिस्टम पर दबाव पड़ता है जो मानसिक स्वास्थ्य को सपोर्ट करते हैं।

मेलाटोनिन, वह हार्मोन जो शरीर को आराम करने का संकेत देता है, रात में जल्दी सबसे ज़्यादा बढ़ता है। नींद में देरी से इसकी असर कम हो जाती है और रात में कोर्टिसोल बढ़ जाता है, जो एक स्ट्रेस हार्मोन है जो एंग्जायटी और इमोशनल अस्थिरता से जुड़ा है। यह बदलाव सेरोटोनिन और डोपामाइन को भी प्रभावित करता है, जो मूड बैलेंस और मोटिवेशन के लिए ज़िम्मेदार केमिकल हैं। समय के साथ, ये रुकावटें दिमाग को डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल के प्रति ज़्यादा कमज़ोर बना सकती हैं।

देर रात तक जागने से दिमाग आर्टिफिशियल लाइट के संपर्क में भी रहता है, जो गहरी नींद के साइकिल में रुकावट डालती है। पर्याप्त गहरी और REM नींद के बिना, दिमाग भावनाओं को प्रोसेस करने, न्यूरल पाथवे की मरम्मत करने और मेटाबॉलिक कचरे को साफ करने में संघर्ष करता है। ये बदलाव धीरे-धीरे जमा होते हैं, अक्सर सबसे पहले थकान, मूडीनेस या स्ट्रेस सेंसिटिविटी के रूप में दिखाई देते हैं।

अच्छी खबर यह है कि नींद की आदतों को एडजस्ट करने से ध्यान देने लायक फायदे होते हैं। सोने का एक तय समय तय करना, शाम को लाइट कम करना, स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना और सोने से पहले एक शांत रूटीन बनाना अंदरूनी घड़ी को रीसेट करने में मदद कर सकता है। जल्दी सोने की दिशा में छोटे-छोटे बदलाव भी मूड की स्थिरता, फोकस और कुल मिलाकर मानसिक स्पष्टता में सुधार कर सकते हैं।

आपका दिमाग तब सबसे अच्छा काम करता है जब आप उसे वह रिदम देते हैं जिसके लिए उसे डिज़ाइन किया गया है।

21 साल का अभिरूप… इकलौता बेटा… और एक सपना देखने वाला छात्र। लेकिन पढ़ाई के दबाव, अधूरी तैयारी और लगातार बढ़ते स्ट्रेस के...
05/12/2025

21 साल का अभिरूप… इकलौता बेटा… और एक सपना देखने वाला छात्र। लेकिन पढ़ाई के दबाव, अधूरी तैयारी और लगातार बढ़ते स्ट्रेस के बीच वह अपनी ही लड़ाई हार गया। परिवार को कोई अंदाज़ा नहीं था कि उसके ‘मैं ठीक हूँ’ के पीछे इतनी गहरी घबराहट छिपी थी।

हमारे देश में एग्ज़ाम स्ट्रेस, परफॉर्मेंस प्रेशर और ओवरथिंकिंग युवाओं की मानसिक सेहत को अंदर ही अंदर खा रही है। हर साल हज़ारों छात्र इसी दबाव के कारण बेहद कठिन फैसले ले लेते हैं। लेकिन सच्चाई यह है—अंक आपकी कीमत नहीं तय करते, और एक खराब पेपर आपकी ज़िंदगी का अंत नहीं होता।

अगर आपका बच्चा, भाई, दोस्त या स्टूडेंट अचानक चुप हो जाए… बात बदलने लगे… खुद को कमरे में बंद रखने लगे—तो यह सिर्फ “पढ़ाई का तनाव” नहीं, help की पुकार भी हो सकती है।
कृपया सुनिए, देखिए, और ज़रूरत पड़े तो उन्हें पेशेवर मदद तक ले जाइए। एक बातचीत… एक समझ… एक छोटा सा कदम… कई ज़िंदगियां बचा सकता है।

_इमोशनल रेगुलेशन एक्सरसाइज:_1. माइंडफुलनेस मेडिटेशन: अभी के पल, सांस या शरीर के एहसास पर फोकस करें।2. गहरी सांस लेने की ...
27/11/2025

_इमोशनल रेगुलेशन एक्सरसाइज:_

1. माइंडफुलनेस मेडिटेशन: अभी के पल, सांस या शरीर के एहसास पर फोकस करें।

2. गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज: धीमी, गहरी सांसों से नर्वस सिस्टम को शांत करें।

3. ग्राउंडिंग टेक्नीक: खुद को अभी में रखने के लिए सेंस (जैसे, देखना, आवाज़, छूना) का इस्तेमाल करें।

4. जर्नलिंग: दुख को समझने के लिए भावनाओं और विचारों को बताएं।

_शोक से जुड़ी खास एक्सरसाइज:_

1. मेमोरी बुक: गुज़र चुके व्यक्ति के साथ खुशनुमा यादों की एक बुक बनाएं।

2. शुक्रगुजार होने की प्रैक्टिस: उन चीज़ों के बारे में सोचें जिनके लिए आप शुक्रगुजार हैं।

3. सेल्फ-केयर रूटीन: एक आरामदायक डेली रूटीन बनाएं।

4. क्रिएटिव एक्सप्रेशन: भावनाओं को बताने के लिए आर्ट, म्यूज़िक या लिखने में शामिल हों।

_और टिप्स:_

1. भावनाओं को सही ठहराएं: भावनाओं को पहचानें और अपनाएं।

2. सोशल सपोर्ट को बढ़ावा दें: अपनों या सपोर्ट ग्रुप से जुड़ें। 3. खुद के प्रति दया दिखाएं: दूसरों के प्रति दया और समझ दिखाएं ।

पिछले कुछ दिनों से एक शब्द चर्चा में है AI Psychosis (साइकॉसिस)। इसका मतलब है कि कुछ लोग आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉ...
16/11/2025

पिछले कुछ दिनों से एक शब्द चर्चा में है AI Psychosis (साइकॉसिस)। इसका मतलब है कि कुछ लोग आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स से बातचीत के दौरान मानसिक भ्रम और खतरनाक सोच जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। वे वास्तविकता और कल्पना में फर्क नहीं कर पा रहे और भ्रमित हो रहे हैं। यह समस्या खासकर उन लोगों में ज्यादा देखी गई है, जिन्हें पहले से मानसिक स्वास्थ्य में परेशानी होती है।​ स्टडी में पता चला कि लोग काउंसलिंग, सपोर्ट या स्यूसाइड प्रिवेंशन जैसे मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए ChatGPT, Gemini, Grok जैसे AI चैटबॉट से मदद ले रहे हैं। AI साइकॉसिस के लिए एक्सपर्ट इसी मदद को जिम्मेदार मान रहे हैं। कुछ मामलों में तो ऐसा हुआ कि मानसिक रूप से कमजोर लोग इन चैटबॉट्स से बातचीत करके मनोवैज्ञानिक रोगों जैसे आत्महत्या के विचार और मानसिक भटकाव की अवस्था में चले गए।

ध्यान देने योग्य बातें:

1.किसी भी गंभीर मानसिक समस्या के लिए आधिकारिक प्रफेशनल से संपर्क जरूर करें ।
2. AI से मिले सुझावों को अंतिम इलाज न मानें, बल्कि इसे इंसानी थेरपी का पूरक समझें।
3. AI चैटबॉटस या ChatGPT से बातचीत के बाद कोई अजीब विचार या भ्रम हो तो तुरंत काउंसलर और साइकॉलजिस्ट से संपर्क करें।​

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