13/06/2020
*टाइफाइड/आंत्र ज्वर (Typhoid) का सबसे सुरक्षित और सरलतम घरेलू उपचार:–*
अपने कभी सोचा है कि एलोपैथी के अंध वर्चस्व वाले इस युग में खांसी/जुकाम तक में डॉक्टर्स या कैमिस्ट के चक्कर काटने और अँग्रेज़ी दवाइयों पर निर्भर व्यक्ति अक्सर पूर्ण स्वस्थ होने की बजाय कुछ समय में ही सदा के लिए रोगी, शिथिल और असमर्थ क्यों होता चला जाता है ? क्या कारण है कि एलोपैथी औषधि में खरबों रुपये कमाने वाला पश्चिमी जगत पिछले कई वर्षों से भारत के वृक्ष आयुर्विज्ञान, प्रकृति अनुकूल जीवन शैली और दादी नानी के नुस्खों में सम्पूर्ण स्वास्थ्य और औषधि मूल तलाश रहा है ? क्यों कोरोना और केंसर जैसे घातक रोग उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति से दूर रहते हैं ? क्यों ग्रामीण व्यक्ति चोट अंग्रेज़ी दवा पर पूर्ण निर्भर शहरियों की अपेक्षा बहुत जल्दी ठीक होती है ?
इन प्रश्नों का उत्तर बहुत छोटा सा है लेकिन आपके संपूर्ण चिंतन और जीवन को प्रभावित करने वाला है–
अंग्रेज़ी दवा हानिकारक रसायनों से निर्मित होने के कारण किसी रोगाणु के साथ साथ आपके शरीर के प्राकृतिक संतुलन और रोग प्रतिरोधी क्षमता को भी मार देती है। जो प्राकृतिक संतुलन और रोग प्रतिरोधी क्षमता बनाये रख कर आप बचे और मुक्त रह सकते हैं, अंग्रेज़ी दवा के माध्यम से, आप उसी संतुलन और क्षमता को मार डालते हैं। ऐसा कर आप केवल तात्कालिक रोग व पीड़ा निवारण तो कर लेते हैं लेकिन आपके शरीर का सम्पूर्ण नाड़ी/ऊर्जा चक्र तंत्र एवम कोई न कोई अंग कमज़ोर होकर तमाम तरह के संक्रमण और रोगों का द्वार/घर बनता चला जाता है। निष्कर्ष यह कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य एवं औषधि चिकित्सा क्षेत्र में एलोपैथी चिकित्सा नहीं बल्कि विष रोपण का विज्ञान है। रोग से नहीं बल्कि ज़्यादातर मामलों में रोग के लक्षणों को छुपाने/दबाने की घातक मूर्ख विधियों को औषधि मानने का अंध विज्ञान है आधुनिक विज्ञान को अंधों की तरह लादे हुए समाज के लिए।
एकदम यही किस्सा टाइफाइड का भी है। आंतों को बुरी तरह घायल करने वाले इस ज्वर में जब आप एलोपैथी दवा (एंटीबायोटिक/antibiotic आदि) का सेवन करते हैं और परहेज रहित सामान्य या गरिष्ठ भोजन भी करते हैं तो शर्तिया अपने पाचन तंत्र (लिवर, पेट और आंतें) को सदा के लिए कमज़ोर कर स्थायी रोगी बना रहे होते हैं। इसीलिए टाइफाइड अक्सर लौटता भी रहता है।
तो इस सबसे निज़ात पाने के लिए नीचे लिखा और सदियों से 100% सुरक्षित, हानिरहित टाइफाइड निदान करने वाला यह छोटा सा नुस्खा आजमाइए और 3 से 5 दिन में पूर्ण स्वस्थ होइए।
सामान्य वयस्क व्यक्ति के हिसाब से पदार्थों की मात्रा लेकर नुस्खा है–
*मुनक्का 8 नग*
*अंजीर 3 से 5 नग*
*ख़ूबकला 1 से 2 ग्राम*
इन सबको इसी मात्रा में उबाल कर काढ़ा बना कर पी लें अन्यथा पत्थर की सिल पर पीस कर चटनी बना कर खाली पेट खा लें।
*विशेष* यदि रोग पुराना हो गया है तो उपरोक्त के अलावा गुनगुने पानी से 1 ग्राम *मोती पिष्टी भस्म* (आयुर्वेदिक) सुबह शाम ले लें।
*भोजन* बहुत हल्का, उबला हुआ और सुपाच्य भोजन ही लें।
5 दिन तक भोजन में केवल पानी निथारा हुआ ताजा दही के साथ पतली खिचड़ी या दलिया या मूंग की पतली दाल के साथ 1 से 2 रोटी का पतला छिलका खाना है। उपरोक्त नुस्खे एवम भोजन परहेज़ से 3 से 5 दिन में पहले से भी अधिक स्वस्थ हो जाएंगे, रोग वापिस नहीं आएगा और पाचन या नाड़ी तंत्र को भी कोई नुकसान नहीं होगा। एलोपैथी दवा के अति हानिकारक प्रभाव और रोग की बार बार पुनरावृत्ति से बचिए। आयुर्वेद में सदियों से आजमाया 100% प्रभावी घरेलू नुस्खे से अधिकांश रोगों का त्वरित, सरल और हानिरहित घरेलू उपचार करिये। याद रखिये कि प्राकृतिक चिकित्सा ही स्वास्थ्य का सर्वोत्तम मार्ग है।
*अति महत्वपूर्ण*
यदि कोई व्यक्ति भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी/Physiotherapy) एवम तंन्त्रिका/नाड़ी तंत्र (न्यूरोपैथी/Neuropathy) संबंधी पीड़ा, विकलांगता या अन्य असाध्य विकार से ग्रस्त है। सभी चिकित्सा पद्धतियों में उपलब्ध मंहगी दवाएं भी बेअसर हैं और कमरतोड़ू खर्चीले ऑपरेशन के विकल्प भी सुरक्षित नहीं तो अपने परिचय एवम रोग वर्णन के साथ लिखे। अधिकांश मामलों में तो मेरे द्वारा 43 अमृत गुण युक्त जड़ी बूटियों से निर्मित तेल की मालिश और भोजन एवम जीवन शैली में बदलाव से मात्र कुछ दिनों में ही दवा और विकार, दोनों से ही, मुक्ति मिल जाएगी। तेल की पुनर्जीवन शक्ति से सामान्य व्यक्ति के बल और स्फूर्ति में भी दिनोंदिन निखार आता चला जायेगा।
*विशेषज्ञ चिकित्सा*
नाड़ी परीक्षण, स्पर्श, अंग मर्दन एवम तेल चिकित्सा द्वारा अति त्वरित पीड़ा एवम विकार निदान के लिए समय लेकर बात करें।
अनन्त आर्य भटनागर
सम्पूर्ण स्वास्थ्य, नाड़ी शोधन एवम प्रकृति विज्ञानी
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