01/04/2026
वसुधारा दर्शन की लीला
एक अशक्त महिला पहुँची वसुधारा— तीर्थयात्रियों का दल वसुधारा (गौमुख) जा रहा था। एक माता इस कदर अस्वस्थ हो गई कि उनका वहाँ जाना संभव नहीं हो सका। दल के अन्य सदस्य चले गए और माता अपने भाग्य को कोसती हुई वहीं रह गई। थोड़ी देर बाद महाराजजी वहाँ प्रकट हुए और बोले, “माँ, आप वसुधारा देखना चाहती हैं?”
“हाँ, बेटा।” माँ ने कहा।
“आप बसाती तक चली चलें।” महाराजजी ने उनके हाथ का स्पर्श किया और माता बसाती तक चली आई।
वसुधारा का सुरम्य स्थल माता की आँखों के सामने था। वह हर्षातिरेक से विह्वल हो गई। उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा। उधर जो दल माता को छोड़कर आगे बढ़ गया था वह पहाड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो जाने के कारण वसुधारा पहुँच ही नहीं पाया था। जब वे लोग लौट कर आए तो माता ने बताया कि वह तो वसुधारा का दर्शन कर आई। उनकी बात पर किसी को विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब माता ने वसुधारा का आँखों देखा वर्णन किया तो लोग अवाक् में पड़ गए। वहाँ एक वृद्ध गाइड भी था जो यात्रियों के साथ कई बार वसुधारा हो आया था। उसने कहा कि माताजी जो कुछ कह रही हैं, वह बिल्कुल सही है।
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