बाबा श्री नीब करौरी जी के चमत्कार

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बाबा श्री नीब करौरी जी के चमत्कार Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from बाबा श्री नीब करौरी जी के चमत्कार, Astrologist & Psychic, Neeb karori village, Farrukhabad.

बाबा जी के चमत्कार लीलाये अनुभव कोई भी शेयर कर सकता है या आप को यहाँ पड़ने को मिले गे । श्री महाराजजी से संबंधित सामिग्री जैसे सुंदर तस्वीरे वीडियो भी मिलेगे इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा सेयर करे ताकि लोगो तक पहुँच सके ।

01/04/2026

वसुधारा दर्शन की लीला

एक अशक्त महिला पहुँची वसुधारा— तीर्थयात्रियों का दल वसुधारा (गौमुख) जा रहा था। एक माता इस कदर अस्वस्थ हो गई कि उनका वहाँ जाना संभव नहीं हो सका। दल के अन्य सदस्य चले गए और माता अपने भाग्य को कोसती हुई वहीं रह गई। थोड़ी देर बाद महाराजजी वहाँ प्रकट हुए और बोले, “माँ, आप वसुधारा देखना चाहती हैं?”

“हाँ, बेटा।” माँ ने कहा।

“आप बसाती तक चली चलें।” महाराजजी ने उनके हाथ का स्पर्श किया और माता बसाती तक चली आई।

वसुधारा का सुरम्य स्थल माता की आँखों के सामने था। वह हर्षातिरेक से विह्वल हो गई। उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा। उधर जो दल माता को छोड़कर आगे बढ़ गया था वह पहाड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो जाने के कारण वसुधारा पहुँच ही नहीं पाया था। जब वे लोग लौट कर आए तो माता ने बताया कि वह तो वसुधारा का दर्शन कर आई। उनकी बात पर किसी को विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब माता ने वसुधारा का आँखों देखा वर्णन किया तो लोग अवाक् में पड़ गए। वहाँ एक वृद्ध गाइड भी था जो यात्रियों के साथ कई बार वसुधारा हो आया था। उसने कहा कि माताजी जो कुछ कह रही हैं, वह बिल्कुल सही है।

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वसुधारा दर्शन की लीलाएक अशक्त महिला पहुँची वसुधारा— तीर्थयात्रियों का दल वसुधारा (गौमुख) जा रहा था। एक माता इस कदर अस्वस...
01/04/2026

वसुधारा दर्शन की लीला

एक अशक्त महिला पहुँची वसुधारा— तीर्थयात्रियों का दल वसुधारा (गौमुख) जा रहा था। एक माता इस कदर अस्वस्थ हो गई कि उनका वहाँ जाना संभव नहीं हो सका। दल के अन्य सदस्य चले गए और माता अपने भाग्य को कोसती हुई वहीं रह गई। थोड़ी देर बाद महाराजजी वहाँ प्रकट हुए और बोले, “माँ, आप वसुधारा देखना चाहती हैं?”

“हाँ, बेटा।” माँ ने कहा।

“आप बसाती तक चली चलें।” महाराजजी ने उनके हाथ का स्पर्श किया और माता बसाती तक चली आई।

वसुधारा का सुरम्य स्थल माता की आँखों के सामने था। वह हर्षातिरेक से विह्वल हो गई। उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा। उधर जो दल माता को छोड़कर आगे बढ़ गया था वह पहाड़ गिरने से मार्ग अवरुद्ध हो जाने के कारण वसुधारा पहुँच ही नहीं पाया था। जब वे लोग लौट कर आए तो माता ने बताया कि वह तो वसुधारा का दर्शन कर आई। उनकी बात पर किसी को विश्वास नहीं हुआ। लेकिन जब माता ने वसुधारा का आँखों देखा वर्णन किया तो लोग अवाक् में पड़ गए। वहाँ एक वृद्ध गाइड भी था जो यात्रियों के साथ कई बार वसुधारा हो आया था। उसने कहा कि माताजी जो कुछ कह रही हैं, वह बिल्कुल सही है।

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बंद दरवाज़े से बाहर निकलने की लीलाकहीं नहीं है। घर के दरवाजे और खिड़कियाँ भी बंद हैं, फिर महाराजजी कैसे निकलेंगे। उसने द...
01/04/2026

बंद दरवाज़े से बाहर निकलने की लीला

कहीं नहीं है। घर के दरवाजे और खिड़कियाँ भी बंद हैं, फिर महाराजजी कैसे निकलेंगे। उसने दूसरे कमरे में भी खोजा लेकिन महाराजजी कहीं नहीं दिखाई दिए। बाद में मालूम हुआ कि महाराजजी उसी मकान में चले गए हैं जहाँ से आए थे। जब उसने महाराजजी से पूछा कि आप कैसे गए, जब घर की खिड़कियाँ और दरवाजे सभी बंद थे तो महाराजजी ने हँसते हुए कहा, “आपको परेशान करना नहीं चाहता था।” यह घटना १९४० की है।

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31/03/2026

बंद दरवाज़े से बाहर निकलने की लीला

कहीं नहीं है। घर के दरवाजे और खिड़कियाँ भी बंद हैं, फिर महाराजजी कैसे निकलेंगे। उसने दूसरे कमरे में भी खोजा लेकिन महाराजजी कहीं नहीं दिखाई दिए। बाद में मालूम हुआ कि महाराजजी उसी मकान में चले गए हैं जहाँ से आए थे। जब उसने महाराजजी से पूछा कि आप कैसे गए, जब घर की खिड़कियाँ और दरवाजे सभी बंद थे तो महाराजजी ने हँसते हुए कहा, “आपको परेशान करना नहीं चाहता था।” यह घटना १९४० की है।

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30/03/2026

गंगा में डुबाने की साजिश

महाराजजी को डुबा देने की कोशिश हुई— एक बार महाराजजी गंगा में नाव से सैर कर रहे थे। उनके साथ कुछ भक्त भी थे। एक भक्त ने महाराजजी से कहा कि वे गंगा में स्नान कर लें। महाराजजी इस आग्रह को टाल रहे थे। लेकिन जब सभी लोग एकसाथ अनुरोध करने लगे तो महाराजजी को उनकी बात माननी ही पड़ी। महाराजजी नाव से गंगा में कूद गए। पहले तो महाराजजी ने इस प्रकार का नाटक किया जैसे वे गंगा में डूब रहे हों। फिर उन्होंने नाव के चारों ओर तैरना शुरू किया। कुछ देर तैरने के बाद वे नाव में बैठ गए। बाद में कुछ भक्तों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन लोगों ने उन्हें डुबा देने की साजिश की थी।

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मन पढ़ लेने की लीला🧠 “बाबा को सब पता था…”एक भक्त पहली बार बाबा के पास आया। मन में कई सवाल थे, लेकिन कुछ कह नहीं पाया।जैस...
29/03/2026

मन पढ़ लेने की लीला

🧠 “बाबा को सब पता था…”

एक भक्त पहली बार बाबा के पास आया। मन में कई सवाल थे, लेकिन कुछ कह नहीं पाया।
जैसे ही वह बाबा के सामने बैठा, बाबा मुस्कुराए और बोले —
“जिस चिंता में तुम आए हो, उसका समाधान हो जाएगा… डर मत।”

भक्त हैरान रह गया… क्योंकि उसने अपनी समस्या बताई ही नहीं थी।

यही बाबा की दिव्य शक्ति थी — वे मन की बात बिना बोले जान लेते थे।

🙏 संदेश: सच्चे गुरु के सामने कुछ छुपता नहीं। Baba miracle, mind reading saint, divine power, guru kripa, hanuman bhakt

बच्चे को गोद में ले लिया— एक दिन बाबा कैंची धाम में भक्तों के बीच बैठे थे। उन्होंने अपना हाथ सहसा इस तरह फैलाया जैसे किस...
28/03/2026

बच्चे को गोद में ले लिया— एक दिन बाबा कैंची धाम में भक्तों के बीच बैठे थे। उन्होंने अपना हाथ सहसा इस तरह फैलाया जैसे किसी चीज को लोक रहे हैं। हाथ फैलाए हुए ही बोले, "लो बच गया।" महाराजजी की इस मुद्रा पर भक्तगण हँसने लगे। बाबा भी हँसने लगे। लोगों की समझ में नहीं आया कि बाबा ने ऐसी मुद्रा क्यों बनाई।
इस घटना के तीसरे दिन एक महिला कानपुर से आई। उसने महाराजजी का चरणस्पर्श किया। फिर कृतज्ञ भाव से बोली, "महाराज, मेरा पाँच वर्ष का बच्चा छत से गिर गया था। मैं चीख उठी थी, 'महाराज...!' और तभी मकान के बीच से गुजरते हुए एक आदमी ने ऐसे हाथ फैला कर मेरे बच्चे को गोद में ले लिया और आपकी कृपा से मेरा बच्चा बच गया, वरना...।" महिला ने अपने दोनों हाथ फैला कर बताया कि उस आदमी ने अपने हाथ इसी तरह फैलाए थे।
भक्तगण तब जान पाए कि महाराजजी ने उस दिन उनसे बात करते हुए अचानक क्यों अपने दोनों हाथ फैला दिये थे और कहा था, "लो, बच gaya//

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28/03/2026

भक्त को अन्तिम दर्शन दिया— इस घटना के विपरीत एक दूसरी घटना भी है। श्री सुशीतल बनर्जी, जो भारत के प्रधानमंत्री के सचिव हुआ करते थे, ने इससे भक्तगणों को अवगत कराया। उन्होंने कहा—
मेरे पिताजी बाबा के अनन्य भक्त थे। एक दिन बाबा हमारे नैनीताल स्थित घर पधारे थे। अचानक वे जोर-जोर से रोने लगे। उन्होंने अपना मुँह कम्बल से छिपा लिया। काफी देर तक रोने के बाद एकाएक उठे और जाने लगे। पिताजी ने रोकना चाहा पर नहीं माने। मैं भी बाबा के साथ लग लिया। बाबा मेरे घर से सीधे कैलाखान होते हुए पैदल ही सेनेटोरियम पहुँचे। वह तेजी से एक कमरे में घुस गए। वहाँ एक मरीज अन्तिम साँसें गिन रहा था। बाबाजी को देखते ही वह काफी प्रसन्न हुआ और बोला,

महाराज, मैं बड़ी देर से आपको ही याद कर रहा था दर्शनों के लिए। आप आ गए, मैं धन्य हुआ।" उखड़ती साँसों से इतना कहने के बाद ही उसने प्राण त्याग दिए।
उक्त भक्त की पुकार में जो आर्तता थी उसने बाबा के आसन को हिला दिया। बाबाजी के इस दया-निधान स्वरूप को देखकर मेरा अन्तर भर आया।
ऐसी ही आर्त पुकार सुन कर महाराजजी ने लखनऊ में अपने दो भक्तों श्री संघ तथा श्री हब्बा को अन्तिम क्षणों में दर्शन देकर कृतार्थ किया था। श्री संघ अन्तिम दिनों तक नैनीताल स्थित बिड़ला मन्दिर के प्राचार्य थे।

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28/03/2026

मन पढ़ लेने की लीला

🧠 “बाबा को सब पता था…”

एक भक्त पहली बार बाबा के पास आया। मन में कई सवाल थे, लेकिन कुछ कह नहीं पाया।
जैसे ही वह बाबा के सामने बैठा, बाबा मुस्कुराए और बोले —
“जिस चिंता में तुम आए हो, उसका समाधान हो जाएगा… डर मत।”

भक्त हैरान रह गया… क्योंकि उसने अपनी समस्या बताई ही नहीं थी।

यही बाबा की दिव्य शक्ति थी — वे मन की बात बिना बोले जान लेते थे।

🙏 संदेश: सच्चे गुरु के सामने कुछ छुपता नहीं। Baba miracle, mind reading saint, divine power, guru kripa, hanuman bhakt

27/03/2026

आधुनिक द्रौपदी की रक्षा की— बात १९५० के ग्रीष्मकाल की है। महाराजजी अचानक नैनीताल से चल पड़े। कुछ भक्तगण भी उनके साथ लग लिए। हल्द्वानी से लखनऊ वाली ट्रेन में हम सब बैठ गए। ट्रेन किच्छा स्टेशन रुकी तो बाबा के साथ हमलोग भी उतर गए। उस समय रात के नौ बज रहे थे। उस समय किच्छा में कुछ ही लोग रहते थे। रोशनी नहीं थी। अँधेरे में ही हमसब एक चाय की दुकान के सामने एक पेड़ के नीचे बैठ गए। महाराजजी ने किच्छा के थानेदार को बुला लाने को कहा था। करीब एक किलोमीटर दूर एक सुनसान जगह में था। एक तो घोर अंधकार, दूसरे घना जंगल। वह भक्त मुश्किल से एक किलोमीटर चल पाया था कि महाराजजी ट्रक द्वारा अन्य भक्तों के साथ स्वयं आ पहुँचे। वह भक्त भी ट्रक में बैठ गया। ट्रक थाने के सामने रुकी। सभी लोग ट्रक से उतर कर थाने के सामने ही एक वृक्ष के नीचे बैठ गए। उस समय रात के ग्यारह बजे थे। पेड़ के नीचे कई अनजान लोगों को बैठे देखकर थाने पर पहरा दे रहा संतरी पास पहुँचा और परिचय जानना चाहा तो महाराजजी बोले, "हम डाकू हैं।" पहरेदार डर गया। एक भक्त ने उससे कहा कि थानेदार को बुला लाए। पर वहाँ थानेदार था ही नहीं तो कैसे आता। संतरी ने भी थानेदार की अनुपस्थिति के बारे में कुछ नहीं बताया किन्तु थाने में जाकर थानेदार की पत्नी से पूरी बात बताई। यह भी बताया कि बाहर डाकू आए हैं। थानेदार की स्त्री ने जिज्ञासावश चारदीवारी की आड़ से देखा। जब महाराजजी पर उसकी नजर पड़ी तो वह चीख पड़ी, "महाराज...!" और इसके साथ ही दौड़ती हुई आई तथा महाराजजी के चरणों पर लोट गई। संतरी हक्का-बक्का रह गया। उस महिला ने महाराजजी से घर चलने का आग्रह किया तो महाराजजी अपने भक्तों के साथ आकर थानेदार के क्वार्टर के बरामदे में बैठ गए। उन्होंने कहा, "तेरा पति घर में नहीं है, इसलिए हम अन्दर नहीं आएँगे।" बरामदे में ही चाय आई। भोग लगाया गया। उसके बाद महाराजजी ने महिला से कहा कि वह घर में जाए और किवाड़ अन्दर से बंद कर सो जाए।
पहले भक्तों ने देखा था कि एक पुलिसकर्मी महिला से बहुत घुलमिल कर बातें कर रहा है जैसे वह परिवार का सदस्य ही हो। पहाड़ की रहनेवाली वह महिला सिपाही के स्वभाव को समझ नहीं पाई थी। उसके भीतर के खोट को पहचान नहीं पाई थी। उसके भीतर पर्वतीय निश्छलता थी। सिपाही इसका लाभ उठाना चाहता था।

सर्किल इंस्पेक्टर डाकुओं को पकड़ने के बहाने थानेदार को पहले ही वहाँ से हटा चुका था। थानेदार की खूबसूरत पत्नी के प्रति सर्किल इंस्पेक्टर के मन में नीचता का भाव भर गया था। उसका इरादा कलुषित हो गया था। इस योजना को कार्यरूप देने में थानेदार के मातहत और वह सिपाही भी शामिल था जो थानेदार की पत्नी को पटाने की कोशिश में लगा हुआ था। परन्तु महाराजजी के आने और वहीं जम जाने से सबके सपने चूर-चूर हो गए थे।
भोर में चार बजे बाबा वहाँ से उठकर चल दिए। रास्ते में थानेदार बादाम सिंह भी दिखाई दे गया। वह मोटर से आ रहा था। उसे रोक कर महाराजजी ने दुष्ट पुलिसकर्मियों के षड़यंत्र के बारे में सबकुछ बता दिया कि किस तरह उसकी पत्नी का अपहरण होने वाला था। थानेदार को महाराजजी ने आदेश दिया कि बिना किसी से कुछ कहे-सुने वह अपनी पत्नी को घर भेज दे। उसका घर नैनीताल में था।
इसके बाद महाराजजी अपने भक्तगणों के साथ हल्द्वानी लौट आए।

TradingView नीम करोली बाबा, कैंची धाम, कानपुर चमत्कार, प्राण रक्षा, अलौकिक शक्ति, भक्त की पुकार, जादुई हाथ, महाराजजी की गोद, अटूट विश्वास, बाबा की लीला।
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तुम बन्द कमरे में कैसे घुस आए— कनाडा की एक महिला थी। नाम था सुनन्दा मार्क्स। बाबा की अनन्य भक्त थी वह। वैसे तो उसका पूरा...
27/03/2026

तुम बन्द कमरे में कैसे घुस आए— कनाडा की एक महिला थी। नाम था सुनन्दा मार्क्स। बाबा की अनन्य भक्त थी वह। वैसे तो उसका पूरा परिवार ही बाबा का भक्त है लेकिन सुनन्दा का महाराजजी से विशेष लगाव रहा। सुनन्दा की माँ अमेरिकी थी। वह एक भारतीय साधु के प्रति सुनन्दा की आसक्ति से बहुत चिढ़ती थी। बाबा को कोसती थी कि मेरी लड़की पर न जाने कैसा जादू कर दिया है इस बाबा ने कि उसकी दीवानी हो गई है। कभी-कभी वह बाबा को भी गालियाँ दे देती। त्रिकालदर्शी बाबा उसकी बचकानी हरकतों पर सिर्फ मुस्करा देते। कहते, "याद तो करती है मेरी। गाली देकर ही सही, कुछ कर ही सही।"
एक बार सुनन्दा की माँ विदेश-यात्रा पर निकली। अन्य स्थानों पर घूमते-घूमते वह डेनमार्क पहुँची। उसके पैसे भी जवाब देने लगे थे। अर्थाभाव में वह बीमार भी रहने लगी थी। एक दिन अपने होटल के कमरे में वह इतनी अशक्त हो गई कि होटल मैनेजर के पास जाकर सहायता की याचना भी नहीं कर सकती थी। कालबेल बजाकर बेयरे को नहीं बुला सकती थी। एक तरह से अचेतावस्था में पहुँच गई थी। उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगी। प्रलाप करने लगी, "सुनन्दा के बाबा! कहाँ हो तुम? मेरी सहायता क्यों नहीं करते? आदि आदि।" कुछ देर बाद बंद दरवाजे से डॉक्टर के वेश में एक हब्शी आ पहुँचा। उसने उसे इंजेक्शन लगाया। दवा दी। इससे उसे आराम हुआ और वह सो गई। उस महिला को उस समय इतना भी होश नहीं था कि वह डॉक्टर के बारे में कुछ पूछ सके, जान सके कि वह कहाँ से आया है? उसे किसने भेजा है? और यह कि वह बंद दरवाजे से भीतर कैसे घुसा? आदि। बाबा तो ऐसी लीलाएँ करते समय भक्त के मन-बुद्धि को अपने पास कैद कर लेते थे। सुबह सूर्योदय के पूर्व ही वह डॉक्टर पुनः आ गया और बोला, "मेरी कार बाहर खड़ी है, आप चलिए, आपको हवाई अड्डे तक छोड़ दूँ। आपका जहाज कुछ देर बाद न्यूयॉर्क को रवाना हो जाएगा। आपका टिकट बन चुका है।" फिर उसने इस महिला का सामान पैक किया और गाड़ी में बैठ कर हवाई अड्डे की तरफ चल पड़ा। वह महिला वास्तव में इतनी सम्मोहित थी कि वह फिर पूछना भूल गई कि आपको कैसे पता कि मैं न्यूयॉर्क ही जाना चाहती हूँ? होटल का हिसाब किसने चुकाया? आदि।
हवाई अड्डे पर पहुँच कर उस व्यक्ति ने महिला को विमान का टिकट पकड़ाया। फिर जाकर अपनी कार में बैठा और चला गया। उसने हॉलैंड से न्यूयॉर्क तक के इतने लम्बे सफर तक के किराए के बारे में कोई बात भी नहीं की।
अपनी माँ के बारे में बाबा की इस लीला को सुनन्दा ने कैंची धाम में भक्तों को खुद सुनाया। नीम करोली बाबा, सुनन्दा मार्क्स, डेनमार्क चमत्कार, अलौकिक लीला, कैंची धाम, बिना शर्त कृपा, त्रिकालदर्शी बाबा, भक्त और भगवान, अदृश्य सहायता, आध्यात्मिक शक्ति।
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27/03/2026

तुम बन्द कमरे में कैसे घुस आए— कनाडा की एक महिला थी। नाम था सुनन्दा मार्क्स। बाबा की अनन्य भक्त थी वह। वैसे तो उसका पूरा परिवार ही बाबा का भक्त है लेकिन सुनन्दा का महाराजजी से विशेष लगाव रहा। सुनन्दा की माँ अमेरिकी थी। वह एक भारतीय साधु के प्रति सुनन्दा की आसक्ति से बहुत चिढ़ती थी। बाबा को कोसती थी कि मेरी लड़की पर न जाने कैसा जादू कर दिया है इस बाबा ने कि उसकी दीवानी हो गई है। कभी-कभी वह बाबा को भी गालियाँ दे देती। त्रिकालदर्शी बाबा उसकी बचकानी हरकतों पर सिर्फ मुस्करा देते। कहते, "याद तो करती है मेरी। गाली देकर ही सही, कुछ कर ही सही।"
एक बार सुनन्दा की माँ विदेश-यात्रा पर निकली। अन्य स्थानों पर घूमते-घूमते वह डेनमार्क पहुँची। उसके पैसे भी जवाब देने लगे थे। अर्थाभाव में वह बीमार भी रहने लगी थी। एक दिन अपने होटल के कमरे में वह इतनी अशक्त हो गई कि होटल मैनेजर के पास जाकर सहायता की याचना भी नहीं कर सकती थी। कालबेल बजाकर बेयरे को नहीं बुला सकती थी। एक तरह से अचेतावस्था में पहुँच गई थी। उसे लगा कि अब वह नहीं बचेगी। प्रलाप करने लगी, "सुनन्दा के बाबा! कहाँ हो तुम? मेरी सहायता क्यों नहीं करते? आदि आदि।" कुछ देर बाद बंद दरवाजे से डॉक्टर के वेश में एक हब्शी आ पहुँचा। उसने उसे इंजेक्शन लगाया। दवा दी। इससे उसे आराम हुआ और वह सो गई। उस महिला को उस समय इतना भी होश नहीं था कि वह डॉक्टर के बारे में कुछ पूछ सके, जान सके कि वह कहाँ से आया है? उसे किसने भेजा है? और यह कि वह बंद दरवाजे से भीतर कैसे घुसा? आदि। बाबा तो ऐसी लीलाएँ करते समय भक्त के मन-बुद्धि को अपने पास कैद कर लेते थे। सुबह सूर्योदय के पूर्व ही वह डॉक्टर पुनः आ गया और बोला, "मेरी कार बाहर खड़ी है, आप चलिए, आपको हवाई अड्डे तक छोड़ दूँ। आपका जहाज कुछ देर बाद न्यूयॉर्क को रवाना हो जाएगा। आपका टिकट बन चुका है।" फिर उसने इस महिला का सामान पैक किया और गाड़ी में बैठ कर हवाई अड्डे की तरफ चल पड़ा। वह महिला वास्तव में इतनी सम्मोहित थी कि वह फिर पूछना भूल गई कि आपको कैसे पता कि मैं न्यूयॉर्क ही जाना चाहती हूँ? होटल का हिसाब किसने चुकाया? आदि।
हवाई अड्डे पर पहुँच कर उस व्यक्ति ने महिला को विमान का टिकट पकड़ाया। फिर जाकर अपनी कार में बैठा और चला गया। उसने हॉलैंड से न्यूयॉर्क तक के इतने लम्बे सफर तक के किराए के बारे में कोई बात भी नहीं की।
अपनी माँ के बारे में बाबा की इस लीला को सुनन्दा ने कैंची धाम में भक्तों को खुद सुनाया।

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