04/08/2022
# # # रक्षाबंधन 2079 निर्णय
इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा पर भद्रा करण के रात्रिकाल तक रहने और परदिन पूर्णिमा अल्पकाल रहने से रक्षाबंधन और श्रावणी पर्व पर द्विविधा और संशय है । ऐसे में शास्त्रानुवाद से पं. बैजनाथ पंचांग के अनुसार निर्णय -
1. हाथरस के समयानुसार सूर्योदय प्रातः 5:45 पर और सूर्यास्त सायं 7:00 पर है ।
2. पूर्णिमा तिथि गुरुवार, दिनांक 11 को अपराह्न 10:39 से शुक्रवार, दिनांक 12 प्रातः 7:06 तक है ।
3. भद्रा (विष्टि) करण गुरुवार दिनांक 11 को अपराह्न 10:39 से रात्रि 8:50 तक है ।
उपरोक्त गणितीय सूचना के बाद अब धर्मशास्त्र की ओर मुख करते हैं ।
धर्मसिंधु बताती है - “कर्मणो यस्य यः कालस्तत्कालव्यापिनी तिथिर्ग्राह्या” अर्थात् जिस कर्म का जो विहित समय है उसे उसी समय करना चाहिए जब उस समय पर वह विहित तिथि हो । ऐसा ही विष्णुधर्मोत्तर पुराण कहता है “कर्मणो यस्य यः कालस्तत्कालव्यापिनी तिथि: । तथा कर्माणि कुर्वीत ह्रासवृद्धि न कारणम् ॥”
अब आते हैं रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म पर शास्त्र का मत, जोकि श्रावण पूर्णिमा को करणीय हैं । इसके सम्बन्ध में धर्मसिंधु कहता है - “पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूर्ताधिकोदयव्यापिन्यामपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम् । उदये त्रिमुहूर्तन्यूनत्वे पूर्वेद्युर्भद्रारहिते प्रदोषादिकाले कार्यम् ।” अर्थात् भद्रारहित सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त (6 घटी = 144 मिनट) से अधिक रहने वाली पूर्णिमा को अपराह्न में या प्रदोष में कार्य (रक्षाबंधन) करना चाहिए । उदय के बाद 3 मुहूर्त से कम पूर्णिमा रहने पर पूर्वदिन भद्रा रहित पूर्णिमा होने पर प्रदोष आदि काल में करना चाहिए ।
अब उपरोक्त गणितीय सूचना और धार्मिक निर्देश को देख कर अब निर्णय करते हैं -
शुक्रवार, दिनांक 12 को पूर्णिमा प्रातः 7:05 पर समाप्त हो जा रही है, जो की सूर्योदय (5:50 AM) से 3 मुहूर्त से कम है । सूर्योदय से 3 मुहूर्त 8:14 AM तक होते हैं, परंतु पूर्णिमा इस से 1 घंटे पहले ही समाप्त हो जायेगी अतः धर्मसिंधु के अनुसार ऐसे में परदिन (शुक्रवार, दिनांक 12) को रक्षाबंधन नहीं होना चाहिए ।
धर्मसिंधु के ही उपरोक्त वाक्य के अनुसार गुरुवार दिनांक, 11 को भद्रा समाप्ति (8:50 PM) ke उपरान्त प्रदोष काल (9:20 PM तक) में रक्षाबंधन करना उचित है । अतः गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:50 से 9:20 तक रक्षाबंधन का आचरण करना चाहिए ।
अब कुछ स्थान पर चर्चा है कि रात्रि में कैसे होगा, ये तो दिन में होता है, टोनस्के लिए भी शास्त्रीय वचन दृष्टव्य है - “तत्सत्वे रात्रावपि तदन्ते कुर्यादिति निर्णयामृते । इदं प्रतिपद्युतायां न कार्यम्” (निर्णयसिन्धु) अर्थात् इसे रात्रि में भी कर लेना चाहिए ऐसा निर्णयामृत में कहा है, इसे प्रतिपदा में नहीं करना चाहिए । अतः रक्षाबंधन को सायं या रात्रि में करने में कोई प्रतिबंध नहीं है ।
अब आते हैं लोकाचार पर कि हमने तो कभी नहीं देखा, रात तक कैसे रुकेंगे, कैसे बांधेंगे, कैसे बहिन भूखी रहेगी आदि इत्यादि । तो यह बताना शास्त्र का कार्य नहीं, शास्त्र निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार कर्मकांडों की व्यवस्था ही देता है । कैसे करेंगे, कैसे न करेंगे, कैसे निभाएंगे इत्यादि सोचना आपका कार्य है ।
अंत में कुछ पञ्चाङ्गों पर भी दृष्टि डाल लेते हैं, कि किस पंचांग में रक्षाबंधन के लिए क्या दिनांक और क्या समय बताया गया है ।
1. दृकपञ्चाङ्ग online - गुरुवार , दिनांक 11 को सायं 8:51 से 9:07 तक ।
2. हृशीकेश पंचांग, काशी - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:25 के बाद ।
3. निर्णयसागर पंचांग (चंडू), नीमच - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:52 के बाद ।
4. सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग, जयपुर - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:26 के बाद ।
5. विश्व पंचांग, BHU काशी - शुक्रवार, दिनांक 12 को प्रातः 7:16 से पहले । ये सीधे कहते हैं “उदयव्यापिन्यां पूर्णिमायां रक्षाबन्धनं युक्तम्।” अर्थात् उदय व्यापिनी पूर्णिमासी में रक्षाबंधन करना उचित है। यहां निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु या किसी अन्य शास्त्र पुस्तक का कोई उल्लेख नहीं है कि क्यों 12 को उचित है और क्यों 11 को उचित नहीं है ।
6. ब्रजभूमि पंचांग, दिल्ली - शुक्रवार, दिनांक 12 को प्रातः 7:05 से पहले । ये भी सभी शास्त्रोचित बातें बता कर अन्त में निर्णय लोकाचार से देते हैं और कहते हैं कि इसीलिए लोकापवाद ना बना कर 12 की प्रातः में रक्षाबंधन का आचरण उचित है ।
सुधीजनवृंद को परामर्शस्वरूप यह चिन्तन यहां लिखा जिससे कि स्वयं समझा जा सके कि उचित क्या है और अनुचित क्या ।
अतः गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:50 से 9:20 तक रक्षाबंधन का आचरण करना चाहिए ।
इत्यलम् !
पं. बैजनाथ पंचांग (पं. अशोकशर्मात्मज आचार्य अलङ्कार)