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Tg Cash This page is on Panchang made by Pt. Baijnath Sharma Prachya Vidya Shodh Sansthan. Which is based on Pt.

Baijnath Sharma was a great Astrologer from Hathras, India. He was more intended towards Indian Astrology's Siddhant and Ganit branches. His son Dr. Ashok Sharma who also from the same lineage and carrying out his able father's tradition going on founded an Institute i.e. The Panchang is one of the gem from the Institute, which is based on Surya Siddhant theories.

08/08/2023

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== संवत् 2079 होलिका दहन निर्णय ==पं. बैजनाथ पञ्चाङ्ग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 7 मार्च 2023 को प्रातः 5:15 के बाद और...
02/03/2023

== संवत् 2079 होलिका दहन निर्णय ==

पं. बैजनाथ पञ्चाङ्ग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 7 मार्च 2023 को प्रातः 5:15 के बाद और सूर्योदय, अर्थात 6:38 के मध्य में किया जाना प्रशस्त और सर्वोत्तम है ।

ज्योतिषीय गणनानुसार समय : (हाथरस स्थानिक, पं. बैजनाथ पञ्चाङ्ग के अनुसार)
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 6-मार्च, सायं 4:15 PM
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 7-मार्च, सायं 6:08 PM

6-मार्च सूर्योदय - प्रातः 6:38 AM, सूर्यास्त - सायं 6:20 PM
7-मार्च सूर्योदय - प्रातः 6:37 AM, सूर्यास्त - सायं 6:21 PM

भद्रा करण :
भद्रा वक्ष - 6 मार्च 4:15 PM से 8:23 PM तक
भद्रा नाभि - 6 मार्च 8:23 PM से 10:07 PM तक
भद्रा कटि - 6 मार्च 10:07 PM से 7-मार्च 00:43 AM तक
भद्रा पुच्छ - 7 मार्च 00:43 AM से 02:01 AM तक
भद्रा मुख - 7 मार्च 02:01 AM से 04:11 AM तक
भद्रा ग्रीवा - 7 मार्च 04:11 AM से 04:36 AM तक
भद्रा वक्ष - 7 मार्च 04:36 AM से 05:14 AM तक

होलिका दहन निर्णय :
1. पूर्वदिन प्रदोष में पूर्णिमा है और परदिन में सूर्यास्त से पहले ही समाप्त हो जा रही है । इस दिन पूर्णिमा सूर्योदय से 3.5 प्रहर (10:30 घंटा) से अधिक है । परन्तु इस दिन प्रतिपदा ह्रास में है वृद्धिगामिनी नहीं अतः प्रतिपदा में दहन के लिए सभी तर्क पूरे नहीं हो रहे हैं । अतः त्याज्य है ।
हमसे पूर्व दिशा के क्षेत्रों में, जैसे बनारस, प्रयाग, उड़ीसा इत्यादि में 7-मार्च को पूर्णिमा सूर्यास्त के समय रहेगी अतः स्पष्टतः वहां 7-मार्च को प्रदोष में होलिका दहन होगा । परन्तु जहां पूर्णिमा सूर्यास्त या उसके पश्चात नहीं है वहां 7 को होलिका दहन नहीं होना चाहिए ।
देखें सन्दर्भ : #1

इसके अनुसार परदिन 7-मार्च को प्रदोष में (सायं 6:21 PM से 8:45 PM के मध्य) होलिका दहन होना चाहिए ।

2. प्रतिपदा के ह्रास (पूर्णिमा से कम तिथिकाल) में भद्रा करण की समाप्ति #निशीथ (रात्रि 00:04 से 00:52 AM) के पश्चात है। अतः होलिका दहन 6-मार्च-23 को भद्रा में ही करना चाहिए, परन्तु भद्रा मुख को बचाया जाये ।
प्रदोष के समय पर भद्रा का मुख नहीं है, अतः 6-मार्च-23 को प्रदोष के समय (सायं 6:21 PM से 8:45 PM के मध्य) में होलिका दहन होना चाहिए ।
देखें सन्दर्भ : #2

3. भद्रा की समाप्ति 7 मार्च को प्रातः 5:14 पर हो रही है और सूर्योदय में डेढ़ घंटा बचा रहता है, वह होलिका दहन के लिए पर्याप्त है । बहुधा ग्रंथों में चतुर्दशी, भद्रा, प्रतिपदा और दिन में होलिका दहन के लिए निषेध किया गया है । अतः रात्रि रहते यदि भद्रा समाप्त हो रही हो (प्राक् सूर्योदय) तो उस समय होलिका दहन से इस निषेध का निवारण हो जाता है परंतु ऐसा कहीं कहीं ही कथन है (सन्दर्भ देखें) । अतः सभी निषेधों से बचते हुए भद्रा समाप्ति और सूर्योदय के मध्य होलिका दहन प्रशस्त है और यही सर्वोत्तम भी है ।

अतः होलिका दहन 7-मार्च को प्रातः 5:14 AM से सूर्योदय 6:37 AM के मध्य करना ही सर्वोत्तम है ।
देखें सन्दर्भ : #3

इत्यलम् !
- आचार्य अलङ्कार शर्मा

**********************************

सन्दर्भ : #1
धर्मसिंधुकार कहते हैं - परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने प्रदोषे भद्रासत्त्वे यदि पूर्णिमा परदिने सार्धत्रियामा ततोधिका वा तत्परदिने च प्रतिपद्वृद्धिगामिनी तदा परदिने प्रतिपदि प्रदोषव्यापिन्यां होलिका (दहनम्) ।

अर्थात् दूसरे दिन यदि पूर्णिमा प्रदोष का स्पर्श न कर रही हो और पहले दिन प्रदोष में भद्रा होने पर, यदि पूर्णिमा दूसरे दिन 3:30 प्रहर (10:30 घंटे) या इससे अधिक हो और दूसरे दिन प्रतिपदा बढ़ती हो तो दूसरे दिन ही प्रदोष व्यापिनी प्रतिपदा में होलिका दहन करना चाहिए ।

सन्दर्भ : #2
#धर्मसिन्धु से -
परदिने प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिने यदि निशीथात्प्राग्भद्रासमाप्तिस्तदा भद्रावासनोत्तरमेव होलिकादीपनम् । निशिथोत्तरं भद्रासमाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव । प्रदोषे भद्रामुखव्याप्ते भद्रोत्तरं प्रदोषोत्तरं वा ।
अर्थात् ऐसे में यदि प्रतिपदा का ह्रास हो (अगले दिन प्रतिपदा कम हो) और पूर्वदिन ही प्रदोष समय में पूर्णिमा हो और उस समय भद्रा करण हो तो -
a. यदि भद्रा निशीथ समय से पहले समाप्त हो रही हो तो भद्रा समाप्ति और निशीथ के मध्य किसी समय होलिका दहन करें।
b. यदि भद्रा निशीथ के बाद समाप्त हो रही हो तो ऐसे में भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा में ही पूर्वादिन प्रदोष या रात्रि में होलिका दहन करें ।

सन्दर्भ : #3
A. दिनार्धात् परतो या स्यात् फाल्गुनी पूर्णिमा यदि ।
रात्रौ भद्रावसाने तु होलिकां तत्र पूजयेत् ॥ - भविष्योत्तरपुराण
अर्थात् यदि पहले दिन प्रदोष के समय बदला हो और दूसरे दिन सूर्यास्त से पहले पूर्णिमा समाप्त हो जाए तो भद्रा के समाप्त होने की प्रतीक्षा करके सूर्योदय से पूर्व रात्रि में होलिका दहन करें ।
B. यदा तु प्रदोषे पूर्वदिने भद्रा भवति परदिने चास्तात्पूर्वमेव पञ्चदशी समाप्यते तदा सूर्योदयत्पूर्वं भद्रान्तं प्रतीक्ष्य होलिका दीपनीया । - श्री जयसिंह कल्पद्रुम
अर्थात् यदि पूर्वदिन में भद्रा हो और परदिन में सूर्यास्त से पहले ही पूर्णिमा समाप्त होती हो तो सूर्योदय से पूर्व भद्रा के अंत की प्रतीक्षा कर के होलिका दहन करना चाहिए ।
C. भद्रायां द्वे न कर्त्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा । अर्थात् भद्रा में दो नहीं करनी चाहिए श्रावणी (रक्षाबंधन) और फाल्गुनी (होलिका) ।
D. नन्दायां नरकं घोरं भाद्रायां देशनाशनम् ।
दुर्भिक्षं च चतुर्दश्यां करोत्येव हुताशनः ॥ - विद्याविनोद
अर्थात् नंदा तिथि अर्थात प्रतिपदा को होलिका दहन से घोर नरक, भद्रा में दहन से देश का नाश, चतुर्दशी में दहन से अकाल/ दुर्भिक्ष होता है ।
E. प्रतिपद्भूतभद्रासु यार्चिता होलिका दिवा ।
संवत्सरं तु तद्राष्ट्रं पुरं दहति साद्भुतम् ॥ - चन्द्रप्रकाश
अर्थात् प्रतिपदा में, चतुर्दशी में, भद्रा में या दिन के समय में यदि होली अर्चना होती है तो 1 वर्ष में वह उस राष्ट्र या नगर का दहन कर देती है ।
F. भाद्रायां दीपिता होली राष्ट्रभङ्गं करोति वै । - पुराणसमुच्चय
अर्थात् भद्रा में दहन की गई होली राष्ट्रभंग करती है ।

प्रमुख पञ्चांग
04/02/2023

प्रमुख पञ्चांग

भारत के प्रमुख पञ्चाङ्ग एवं उनके रचयिता - इतिहास ? Popula Panchangs in India, History ExplainedHi this is Yugendra Sharma, Welcome to our Channel Ashok Jyoti...

संस्कृत, संस्कृति एवं षोडश संस्कार में क्या संबंध है? *आज के समय में, लोगों को प्राचीन विज्ञान, ग्रंथों की प्रमाणिकता क्...
30/01/2023

संस्कृत, संस्कृति एवं षोडश संस्कार में क्या संबंध है? *आज के समय में, लोगों को प्राचीन विज्ञान, ग्रंथों की प्रमाणिकता क्यों नहीं पता?*

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सामान्य उदाहरणों से समाज को एक सन्देश ! How an Indian must do daily.

06/08/2022

अग्रजों और विद्वत्वर्यों को प्रणाम करते हुए मात्र एक प्रश्न रखना चाहूंगा सुविधा या शास्त्र ?

यदि सुविधा ही देखनी है तो व्रतोपवास, तप, दैनिक धर्मों के आचरण इत्यादि कैसे होंगे, सभी के सभी न्यूनाधिक असुविधा देते ही हैं ।

11 की सायं में रक्षाबंधन लोक के विरुद्ध कैसे है ? क्या दीपावली, होली, जन्माष्टमी, शिवरात्रि का आचरण सायं और रात्रि में नहीं किया जाता है ? क्या तब ठाकुर जी शयन नहीं करते हैं ? क्या ठाकुर जी के साथ रक्षासूत्र रखा नहीं जा सकता ?

जब स्पष्ट शास्त्र वचन है कि रक्षाबंधन कार्यविशेष अपराह्न या सायं में हो सकता है और 3 मुहूर्त से कम होने पर पूर्व दिन में ही होना चाहिए । तब भी हम यही कहेंगे कि 12 को ही करना चाहिए ?

अतः वास्तव में शास्त्र की बात मानते हुए और उसी का आचरण करते हुए समाज को भी मनमानी और मात्र सुविधा न देखते हुए, शास्त्रानुसार सही परामर्श ही देना चाहिए, यही हमारा कर्तव्य है ।

अतः रक्षाबंधन का आचरण गुरुवार दिनांक 11 को सायं 8:50 से 9:20 के मध्य करना चाहिए शुक्रवार, दिनांक 12 को नहीं।

- अशोकाशात्मज आचार्य अलङ्कार

 # # # रक्षाबंधन 2079 निर्णयइस वर्ष श्रावण पूर्णिमा पर भद्रा करण के रात्रिकाल तक रहने और परदिन पूर्णिमा अल्पकाल रहने से ...
04/08/2022

# # # रक्षाबंधन 2079 निर्णय

इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा पर भद्रा करण के रात्रिकाल तक रहने और परदिन पूर्णिमा अल्पकाल रहने से रक्षाबंधन और श्रावणी पर्व पर द्विविधा और संशय है । ऐसे में शास्त्रानुवाद से पं. बैजनाथ पंचांग के अनुसार निर्णय -

1. हाथरस के समयानुसार सूर्योदय प्रातः 5:45 पर और सूर्यास्त सायं 7:00 पर है ।
2. पूर्णिमा तिथि गुरुवार, दिनांक 11 को अपराह्न 10:39 से शुक्रवार, दिनांक 12 प्रातः 7:06 तक है ।
3. भद्रा (विष्टि) करण गुरुवार दिनांक 11 को अपराह्न 10:39 से रात्रि 8:50 तक है ।

उपरोक्त गणितीय सूचना के बाद अब धर्मशास्त्र की ओर मुख करते हैं ।

धर्मसिंधु बताती है - “कर्मणो यस्य यः कालस्तत्कालव्यापिनी तिथिर्ग्राह्या” अर्थात् जिस कर्म का जो विहित समय है उसे उसी समय करना चाहिए जब उस समय पर वह विहित तिथि हो । ऐसा ही विष्णुधर्मोत्तर पुराण कहता है “कर्मणो यस्य यः कालस्तत्कालव्यापिनी तिथि: । तथा कर्माणि कुर्वीत ह्रासवृद्धि न कारणम् ॥”

अब आते हैं रक्षाबंधन और श्रावणी उपाकर्म पर शास्त्र का मत, जोकि श्रावण पूर्णिमा को करणीय हैं । इसके सम्बन्ध में धर्मसिंधु कहता है - “पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूर्ताधिकोदयव्यापिन्यामपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम् । उदये त्रिमुहूर्तन्यूनत्वे पूर्वेद्युर्भद्रारहिते प्रदोषादिकाले कार्यम् ।” अर्थात् भद्रारहित सूर्योदय के बाद 3 मुहूर्त (6 घटी = 144 मिनट) से अधिक रहने वाली पूर्णिमा को अपराह्न में या प्रदोष में कार्य (रक्षाबंधन) करना चाहिए । उदय के बाद 3 मुहूर्त से कम पूर्णिमा रहने पर पूर्वदिन भद्रा रहित पूर्णिमा होने पर प्रदोष आदि काल में करना चाहिए ।

अब उपरोक्त गणितीय सूचना और धार्मिक निर्देश को देख कर अब निर्णय करते हैं -

शुक्रवार, दिनांक 12 को पूर्णिमा प्रातः 7:05 पर समाप्त हो जा रही है, जो की सूर्योदय (5:50 AM) से 3 मुहूर्त से कम है । सूर्योदय से 3 मुहूर्त 8:14 AM तक होते हैं, परंतु पूर्णिमा इस से 1 घंटे पहले ही समाप्त हो जायेगी अतः धर्मसिंधु के अनुसार ऐसे में परदिन (शुक्रवार, दिनांक 12) को रक्षाबंधन नहीं होना चाहिए ।

धर्मसिंधु के ही उपरोक्त वाक्य के अनुसार गुरुवार दिनांक, 11 को भद्रा समाप्ति (8:50 PM) ke उपरान्त प्रदोष काल (9:20 PM तक) में रक्षाबंधन करना उचित है । अतः गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:50 से 9:20 तक रक्षाबंधन का आचरण करना चाहिए ।

अब कुछ स्थान पर चर्चा है कि रात्रि में कैसे होगा, ये तो दिन में होता है, टोनस्के लिए भी शास्त्रीय वचन दृष्टव्य है - “तत्सत्वे रात्रावपि तदन्ते कुर्यादिति निर्णयामृते । इदं प्रतिपद्युतायां न कार्यम्” (निर्णयसिन्धु) अर्थात् इसे रात्रि में भी कर लेना चाहिए ऐसा निर्णयामृत में कहा है, इसे प्रतिपदा में नहीं करना चाहिए । अतः रक्षाबंधन को सायं या रात्रि में करने में कोई प्रतिबंध नहीं है ।

अब आते हैं लोकाचार पर कि हमने तो कभी नहीं देखा, रात तक कैसे रुकेंगे, कैसे बांधेंगे, कैसे बहिन भूखी रहेगी आदि इत्यादि । तो यह बताना शास्त्र का कार्य नहीं, शास्त्र निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार कर्मकांडों की व्यवस्था ही देता है । कैसे करेंगे, कैसे न करेंगे, कैसे निभाएंगे इत्यादि सोचना आपका कार्य है ।

अंत में कुछ पञ्चाङ्गों पर भी दृष्टि डाल लेते हैं, कि किस पंचांग में रक्षाबंधन के लिए क्या दिनांक और क्या समय बताया गया है ।

1. दृकपञ्चाङ्ग online - गुरुवार , दिनांक 11 को सायं 8:51 से 9:07 तक ।
2. हृशीकेश पंचांग, काशी - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:25 के बाद ।
3. निर्णयसागर पंचांग (चंडू), नीमच - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:52 के बाद ।
4. सर्वेश्वर जयादित्य पंचांग, जयपुर - गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:26 के बाद ।
5. विश्व पंचांग, BHU काशी - शुक्रवार, दिनांक 12 को प्रातः 7:16 से पहले । ये सीधे कहते हैं “उदयव्यापिन्यां पूर्णिमायां रक्षाबन्धनं युक्तम्।” अर्थात् उदय व्यापिनी पूर्णिमासी में रक्षाबंधन करना उचित है। यहां निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु या किसी अन्य शास्त्र पुस्तक का कोई उल्लेख नहीं है कि क्यों 12 को उचित है और क्यों 11 को उचित नहीं है ।
6. ब्रजभूमि पंचांग, दिल्ली - शुक्रवार, दिनांक 12 को प्रातः 7:05 से पहले । ये भी सभी शास्त्रोचित बातें बता कर अन्त में निर्णय लोकाचार से देते हैं और कहते हैं कि इसीलिए लोकापवाद ना बना कर 12 की प्रातः में रक्षाबंधन का आचरण उचित है ।

सुधीजनवृंद को परामर्शस्वरूप यह चिन्तन यहां लिखा जिससे कि स्वयं समझा जा सके कि उचित क्या है और अनुचित क्या ।
अतः गुरुवार, दिनांक 11 को सायं 8:50 से 9:20 तक रक्षाबंधन का आचरण करना चाहिए ।

इत्यलम् !

पं. बैजनाथ पंचांग (पं. अशोकशर्मात्मज आचार्य अलङ्कार)

संवत २०७७ होलिका दहन निर्णय !
15/02/2022

संवत २०७७ होलिका दहन निर्णय !

! होलिका दहन निर्णय सम्वत २०७८ !

यदि एक ही दिन प्रदोष समय में पूर्णिमा हो और उस समय भद्रा करण हो तो -
१. यदि भद्रा निशीथ समय से पहले समाप्त हो रही हो तो भद्रा समाप्ति और निशीथ के मध्य किसी समय होलिका दहन करें।
२. यदि भद्रा निशीथ के बाद समाप्त हो रही हो तो ऐसे में भद्रा मुख को छोड़कर भद्रा में ही #होलिकादहन करें।

इस वर्ष स्थिति, बिन्दु-२ के अनुसार है और भद्रा करण की समाप्ति #निशीथ (१२:०४ से १२:५२ रात्रि) के पश्चात है। अतः होलिका दहन १७-मार्च-२२ को भद्रा में ही करना पड़ेगा, परन्तु मुख को बचाया जायेगा। ऐसे में भद्रा #पुच्छ में ही होलिका दहन करना है, ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता अपितु भद्रमुख में #होलिका दहन न करने का ही मिलता है ।

#धर्मसिन्धु से -
निशिथोत्तरं भद्रासमाप्तौ भद्रामुखं त्यक्त्वा भद्रायामेव।
प्रदोषे भद्रामुखव्याप्ते भद्रोत्तरं प्रदोषोत्तरं वा।
दिनद्वयेपि पूर्णिमायाः प्रदोषस्पर्शाभावे पूर्वदिन एव भद्रापुच्छे तदलाभे भद्रायामेव
प्रदोषोत्तरमेव च।

अतः होलिका दहन १७-मार्च-२२ को सूर्यास्त (सायं ६:३०) से #भद्रा मुख (रात्रि १०:१६) तक किया जा सकता है।

- अलङ्कारालोकौ
(आचार्य अलङ्कारः पञ्चाङ्गकर्ता आलोकः च) Alankar Sharma, Alok Sharma

Address

B-507, City Apartment, Aditya World City
Ghaziabad

Opening Hours

Monday 10am - 6pm

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