akhileshwari dantchikitsalay

akhileshwari dantchikitsalay अखिलेश्वरी दंत चिकित्सालय एंड आई केयर

आयुष्मान भारत योजना से चयनित अस्पताल। पटना के जाने माने सर्जन द्वारा आंखों की इलाज एवं सर्जरी।गोल्डन कार्ड पर मोतियाबिंद एवं नाखूनों का ऑपरेशन बिल्कुल निशुल्क। मुंह एवं दांत संबंधी रोगों के लिए अत्याधुनिक मशीन से कम खर्च में इलाज।

09/11/2025

Celebrating my 10th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

आज मतदान एक महापर्व है। आप अपना बहुमूल्य वोट  देकर एक सुयोग्य ,कर्मठ  जो  समाज  की सर्वांगिक विकास हेतु एक सुयोग्य उम्मी...
06/11/2025

आज मतदान एक महापर्व है।
आप अपना बहुमूल्य वोट देकर एक सुयोग्य ,कर्मठ जो समाज की सर्वांगिक विकास हेतु एक सुयोग्य उम्मीदवार का चुनाव करें।
आप भी अपना मतदान करें।

Happy Diwali to all my dear friends...
20/10/2025

Happy Diwali to all my dear friends...

Today's in Danik Jagaran paper
06/09/2025

Today's in Danik Jagaran paper

06/08/2025

अखिलेश्वरी दंत चिकित्सालय एंड आई हॉस्पिटल मरहौरा में आयुष्मान कार्ड पर निशुल्क मोतियाबिंद की सर्जरी हुए रोगियों को आयुष्मान कार्ड वितरण करते माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे जी।

PM-JAY
16/05/2025

PM-JAY

Jai chhati maiya....
07/11/2024

Jai chhati maiya....

भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत...
30/09/2024

भगत सिंह की बैरक की साफ-सफाई करने वाले भंगी का नाम बोघा था। भगत सिंह उसको बेबे (मां) कहकर बुलाते थे। जब कोई पूछता कि भगत सिंह ये भंगी बोघा तेरी बेबे कैसे हुआ? तब भगत सिंह कहता, मेरा मल-मूत्र या तो मेरी बेबे ने उठाया, या इस भले पुरूष बोघे ने। बोघे में मैं अपनी बेबे (मां) देखता हूं। ये मेरी बेबे ही है।
यह कहकर भगत सिंह बोघे को अपनी बाहों में भर लेता।
भगत सिंह जी अक्सर बोघा से कहते, "बेबे मैं तेरे हाथों की रोटी खाना चाहता हूँ।" पर बोघा अपनी जाति को याद करके झिझक जाता और कहता, "भगत सिंह तू ऊँची जात का सरदार, और मैं एक अदना सा भंगी, भगतां तू रहने दे, ज़िद न कर।"
सरदार भगत सिंह भी अपनी ज़िद के पक्के थे, फांसी से कुछ दिन पहले जिद करके उन्होंने बोघे को कहा," बेबे अब तो हम चंद दिन के मेहमान हैं, अब तो इच्छा पूरी कर दे!"
बोघे की आँखों में आंसू बह चले। रोते-रोते उसने खुद अपने हाथों से उस वीर शहीद ए आज़म के लिए रोटियां बनाई, और अपने हाथों से ही खिलाई। भगत सिह के मुंह में रोटी का गराई डालते ही बोघे की रुलाई फूट पड़ी। "ओए भगतां, ओए मेरे शेरा, धन्य है तेरी मां, जिसने तुझे जन्म दिया।" भगत सिंह ने बोघे को अपनी बाहों में भर लिया।
ऐसी सोच के मालिक थे अपने वीर सरदार भगत सिंह जी...। परन्तु आजादी के 76 साल बाद भी हम समाज में व्याप्त ऊँच-नीच के भेद-भाव की भावना को दूर करने के लिये वो न कर पाए जो 88 साल पहले भगत सिंह ने किया।
महान शहीदे आज़म को इस देश का सलाम।
Dr.Chandan Lal Gupta

Today's newspaper....
24/09/2024

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