Brahma Kumaris Gwalior

Brahma Kumaris Gwalior RAJYOG MEDITATION CENTER

"Self-worth begins with self-respect.When you value yourself, life reflects the same."
26/03/2026

"Self-worth begins with self-respect.
When you value yourself, life reflects the same."

ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर शक्ति साधना पर्व कार्यक्रम आयोजित सृष्टि की आधारशिला है, नारी शक्ति - आदर्श दीदीग्वालियर। प्रजा...
23/03/2026

ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर शक्ति साधना पर्व कार्यक्रम आयोजित

सृष्टि की आधारशिला है, नारी शक्ति - आदर्श दीदी

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला विंग (आर ई आर एफ) के द्वारा माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में नवरात्रि के पावन अवसर पर शक्ति साधना पर्व का आयोजन "वंदेमातरम- स्वर्णिम भारत" थींम के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देवी माँ की चैतन्य झांकी भी सजाई गई थी। जिसका सभी श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज़ केन्द्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, शासकीय व्याख्याता एवं निशुल्क विधिक सेवा केंद्र प्रभारी केआरजी कॉलेज डॉ मौला तिवारी, राष्ट्रीय स्तर की कुकरी प्रतियोगिता विजेता एवं रेसिपी क्रिएटर वंदना जग्गी, अधिवक्ता आभा मिश्रा उपभोक्ता फोरम की पूर्व सदस्य एवं पूर्व सरकारी अधिवक्ता, शिक्षिका आभा राठौर, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय स्वास्थ्य संघ की अध्यक्ष श्रीमती आशा सिंह, समाजसेवी कविता पमनानी आदि उपस्थित थीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके आदर्श दीदी ने कहा कि आज हम सब एक ऐसे दिव्य विषय पर एकत्रित हुए हैं, जो केवल एक विचार नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की आधारशिला है - नारी शक्ति। नारी केवल एक शरीर नहीं, बल्कि वह चेतना है, वह ऊर्जा है, जो सृजन, पालन और परिवर्तन का आधार है। जिस प्रकार बिना ऊर्जा के कोई भी कार्य संभव नहीं, उसी प्रकार नारी के बिना इस संसार की कल्पना भी अधूरी है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। वह केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की आत्मा है। नारी में करुणा है, ममता है, सहनशीलता है, और सबसे महत्वपूर्ण अटूट आत्मबल है। शक्ति साधना पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और जागृत करने की आवश्यकता है। जब एक नारी अपनी आत्मशक्ति को पहचान लेती है, तब वह न केवल अपने जीवन को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी दिशा दे सकती है। आज आवश्यकता है कि हम नारी को सम्मान देने के साथ साथ उसे उसके वास्तविक शक्ति स्वरूप में स्वीकार करें। तो आइए, इस शक्ति साधना पर्व पर हम संकल्प लें - उसे सम्मान देंगे, उसे आगे बढ़ने का अवसर देंगे।
कार्यक्रम में डॉ मौला तिवारी ने कहा कि आज मैं अंतर्मन से अत्यंत प्रफुल्लित हूँ कि मुझे इतने प्रतिष्ठित संस्थान के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला। यह मेरे लिए गर्व का विषय है। आज अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। “वंदे मातरम्” और “स्वर्णिम भारत” जैसी प्रेरणादायक भावनाएँ हमारी इस टीम में अद्भुत ऊर्जा भरती हैं। जितनी बार हम इन्हें बोलते और सुनते हैं, उतनी ही बार अपने भीतर एक नई सशक्तता का अनुभव करते हैं। आज यहाँ खड़े होकर यह पूर्ण विश्वास के साथ कह सकती हूँ कि हम नारियाँ किसी भी रूप में, किसी भी क्षेत्र में, किसी से भी कम नहीं हैं। हमारे भीतर अपार शक्ति, आत्मविश्वास और क्षमता विद्यमान है।
कार्यक्रम में आभा राठौर ने कहा कि हमें किसी भी व्यक्ति या परिस्थिति से विचलित नहीं होना है। हमें केवल अपने कर्तव्य और अपने कार्य पर पूर्ण निष्ठा के साथ ध्यान केंद्रित करना है। जब हमारा मन अपने लक्ष्य और जिम्मेदारियों में पूरी तरह लगा होता है, तब कोई भी बाधा हमें डिगा नहीं सकती।
कार्यक्रम में वंदना जग्गी ने कहा कि वन्दे मातरम् - यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारे अंदर की शक्ति को जगाने वाली भावना है। यह हमें विश्वास दिलाता है कि नारी किसी से कम नहीं है। ज्ञान एक ऐसा शस्त्र है, जिसके आधार पर हम अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्य और कानूनी ज्ञान भी जरूरी है, ताकि हम अपने अधिकारों को समझ सकें और सही निर्णय ले सकें।
कार्यक्रम में आभा मिश्रा ने कहा कि हमें अपनी नई पीढ़ी को केवल अच्छी शिक्षा ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार भी देने होंगे। आज के समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी दिया जाए, ताकि वे केवल बुद्धिमान ही नहीं, बल्कि संस्कारी, संवेदनशील और चरित्रवान भी बनें।
कार्यक्रम में आभा राठौर ने भी अपनी शुभकामनाएं रखीं।
कार्यक्रम में मंचासीन सभी अतिथियों को संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मंच का कुशल संचालन आशा सिंह ने किया और कहा कि नारी शक्ति को सीमाओं में बाँधने की नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं को उभारने की जरूरत है। उसकी शिक्षा, उसका आत्मविश्वास और उसकी स्वतंत्रता ही समाज के विकास की सच्ची नींव है।
कार्यक्रम के अंत मे सभी का आभार बीके रोशनी बहन ने किया।
इस अवसर पर संस्कार मंजरी की संस्थापिका श्रीमती नीलम गुप्ता, अखिल भारतीय सामाजिक स्वास्थ्य संघ की सचिव उमा चौहान सहित अनेकानेक समाजसेवी बहनें तथा ब्रह्माकुमारीज केंद्र से जुड़ी हुई अनेकानेक बहनें और भाई उपस्थित थे।

22/03/2026

ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर भारतीय नववर्ष पर स्नेह मिलन एवं सीपीआर अवेयरनेस ट्रैनिंग का हुआ आयोजन ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्...
21/03/2026

ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर भारतीय नववर्ष पर स्नेह मिलन एवं सीपीआर अवेयरनेस ट्रैनिंग का हुआ आयोजन

ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में भारतीय नववर्ष, नवसंवत्सर, गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि, विक्रम संवत 2083 के अवसर पर स्नेह मिलन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में श्रद्धालुयों ने भाग लिया कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, आईएमए ग्वा. की पूर्व सेक्रेटरी और प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ स्नेह लता दुबे, वरिष्ठ राजयोग ध्यान प्रशिक्षक बीके प्रहलाद भाई उपस्थित थे।
कार्यक्रम में केंद्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी ने गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि और हिन्दू नववर्ष नवसंवत्सर की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत कि सनातन संस्कृति समृद्ध संस्कृति है। हिन्दू नव वर्ष हमें हमारी भारतीय संस्कृति से जोड़ता है। वर्ष परिवर्तन के साथ साथ हमें अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को शुद्ध करना है। हर क्षण एक नया अवसर है। अतीत को पकड़कर रखने से हम आगे नहीं बढ़ सकते। जब हम अपने भीतर नई सोच, नए विचार, प्रेम, स्नेह शांति और संतुलन को स्थान देते हैं तो हमारे जीवन में खुशियां आतीं है और हम आगे बढ़ते है। आज का यह पवित्र दिन हम सभी को नई ऊर्जा, शक्ति और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम में सीपीआर अवेयरनेस ट्रैनिंग के तहत डॉ स्नेह लता दुबे ने कहा कि अचानक हृदय गति रुकने से होने वाली मौतों को सीपीआर द्वारा रोका जा सकता है। कार्डियक अरेस्ट का पता चलते ही 10 सेकंड के भीतर सीपीआर शुरू कर देना चाहिए। छाती के बीच में हाथ की हथेली से लगातार 2 मिनट तक 200 से 240 बार, 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई तक दबाव देना चाहिए। इसके बाद 5 से 10 सेकंड के अंतराल के बाद फिर से 2 मिनट तक दबाव देना चाहिए। यह प्रक्रिया तब तक जारी रखनी चाहिए जब तक एम्बुलेंस या डॉक्टर के रूप में सहायता न पहुँच जाए। अचानक हृदय गति रुकने के लगभग 85 प्रतिशत मामले घरों या सार्वजनिक स्थलों पर होते हैं, जिनमें से लगभग 95 प्रतिशत व्यक्तियों की मृत्यु समय पर सीपीआर न मिलने के कारण हो जाती है। इसलिए सीपीआर सीखना और सिखाना सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ब्रह्मकुमारीज, IMA तथा GOGS के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
कार्यक्रम का कुशल संचालन बीके प्रहलाद भाई ने करते हुए कहा कि चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ की उपासना और आराधना के साथ साथ अपने अंदर की कमियों को छोड़ने और अच्छाइयों को धारण करने का संकल्प भी लेना चाहिए। तो वह अवश्य ही पूरा होता है। उन्होंने आगे कहा कि आज जो यहाँ सीपीआर से संबंधित प्रशिक्षण मिला उसका निश्चित ही सभी को लाभ मिलेगा इसके लिए डॉ स्नेहलता दुबे का आभार भी व्यक्त किया।
स्नेहमिलन कार्यक्रम में उपस्थित सभी ने एक दूसरे को नववर्ष और नवरात्रि की बधाई और शुभकामनायें दीं।

21/03/2026
20/03/2026

20/03/2026

सभी को भारतीय नव वर्ष एवं चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें।

वन्देमातरम् - स्वर्णिम भारत थींम के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर कार्यक्रम आयोजित  विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट यो...
11/03/2026

वन्देमातरम् - स्वर्णिम भारत थींम के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर कार्यक्रम आयोजित

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 21 महिलाओं का हुआ सम्मान

ग्वालियर । प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज़ ईश्वरीय विश्व विद्यालय की महिला विंग (आर.ई.आर.एफ.) द्वारा माधौगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में “वन्दे मातरम् – स्वर्णिम भारत” थीम के अंतर्गत “राजयोग, संस्कार और सतयुगी मूल्यों से राष्ट्र निर्माण” विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 21 महिलाओं को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्वयं सिद्धा समूह स्व सहायता समूह की निदेशिका श्रीमती डॉ महिमा तारे, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाति जोशी, वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराधा शर्मा, नारायणा ई-टेक्नो स्कूल की प्रिंसिपल निधि कुलकर्णी, नगर निगम से समग्र अधिकारी पूर्वी अग्रवाल, समाजसेविका पूर्णिमा अग्रवाल, समाजसेविका श्रीमती आशा सिंह, ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान से बीके महिमा बहन, बीके डॉ. गुरचरण सिंह एवं बीके प्रहलाद भाई मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके डॉ. गुरचरण सिंह ने ब्रह्माकुमारीज़ महिला विंग द्वारा देशभर में महिलाओं के सशक्तिकरण, नैतिक मूल्यों के जागरण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए किए जा रहे विविध कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ राजयोग के माध्यम से आत्मिक शक्तियों को जागृत कर सतयुगी मूल्यों को जीवन में धारण करती हैं, तब परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण में उनकी भूमिका और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भी अपने प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए महिलाओं की शक्ति, संस्कार और समाज में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की तथा महिला सशक्तिकरण को राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताया।
श्रीमती महिमा तारे ने कहा कि जब महिलाएँ आत्मविश्वास, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ती हैं, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः आने लगता है।
डॉ. स्वाति जोशी ने कहा कि नारी में सेवा, करुणा और सहनशीलता के गुण स्वाभाविक रूप से विद्यमान होते हैं। यदि इन गुणों के साथ आध्यात्मिकता का समन्वय हो जाए तो वह समाज को स्वस्थ और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ब्रह्माकुमारीज़ के द्वारा किया जा रह कार्य सराहनीय है।
डॉ. अनुराधा शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल अधिकार प्राप्त करने का नाम नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्तियों और मूल्यों को पहचान कर उन्हें समाज के हित में उपयोग करने का नाम है।
निधि कुलकर्णी ने कहा कि बच्चों के संस्कारों की पहली पाठशाला परिवार होता है और इसमें माँ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि महिलाएँ सकारात्मक सोच को अपने जीवन में अपनाएँगी, तो आने वाली पीढ़ी भी संस्कारित और श्रेष्ठ बनेगी। उन्होंने आगे कहा कि सबल रहें प्रेम से रहें और एक दूसरे का साथ देते रहें।
पूर्वी अग्रवाल ने कहा कि आज आवश्यकता है कि महिलाएँ सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी आगे बढ़कर नेतृत्व करें और अपने मूल्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा दें।
पूर्णिमा अग्रवाल एवं श्रीमती आशा सिंह ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्था द्वारा महिलाओं में आध्यात्मिक जागरूकता और संस्कारों का जो कार्य किया जा रहा है, वह समाज में शांति, सद्भावना और सकारात्मक परिवर्तन लाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान बीके महिमा बहन ने सभी को राजयोग ध्यान की सुंदर अनुभूति कराते हुए आंतरिक शांति और आत्मिक शक्तियों के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का कुशल संचालन करते हुए बीके प्रहलाद भाई नें कहा कि मातृ शक्ति के अनेक रूप है और हर रूप में अपार शक्ति है कभी ममता कि शीतल गंगा बन जाती है तो कभी साहस कि तेज धार भी बन जाती है। उन्होंने आगे कहा कि मातृ शक्ति को त्याग, तपस्या तथा प्रेम की मूरत के साथ साथ धैर्य की पहचान से भी जाना जाता है।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की ओर से मंचासीन अतिथियों के साथ-साथ समाज में उत्कृष्ट सेवाएँ दे रही कई बहनों को स्मृति चिन्ह, श्रीफल एवं अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली प्रमुख बहनों में नेत्र आरोग्य एवं ऑक्यूलोप्लास्टी विशेषज्ञ डॉ. अनन्या अभ्यंकर जोशी, स्वयं सिद्धा समूह से मेघा चांदोरकर, प्रीती खोत, आयुषी मोघे, मंजीरी मोघे, अल्पा अग्रवाल, अनुश्री मोघे, अन्य क्षेत्र से सुमन खैमरिया, माधवी गुप्ता, छाया, आरती आयलानी, सविता तिवारी, मिथलेश तिवारी, कंचन तलरेजा सहित अन्य बहनें शामिल रहीं।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और सम्मानित महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा समाज में संस्कार, आध्यात्मिकता और सकारात्मक मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनायें।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏मातृ शक्ति के सम्मान में आज शाम 4 बजे से "वन्देमा...
08/03/2026

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की सभी को हार्दिक शुभकामनायें।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
मातृ शक्ति के सम्मान में आज शाम 4 बजे से
"वन्देमातरम - स्वर्णिम भारत"
कार्यक्रम मे आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

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