23/03/2026
ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर शक्ति साधना पर्व कार्यक्रम आयोजित
सृष्टि की आधारशिला है, नारी शक्ति - आदर्श दीदी
ग्वालियर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के महिला विंग (आर ई आर एफ) के द्वारा माधवगंज स्थित प्रभु उपहार भवन में नवरात्रि के पावन अवसर पर शक्ति साधना पर्व का आयोजन "वंदेमातरम- स्वर्णिम भारत" थींम के अंतर्गत आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देवी माँ की चैतन्य झांकी भी सजाई गई थी। जिसका सभी श्रद्धालुओं ने दर्शन लाभ लिया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रह्माकुमारीज़ केन्द्र प्रमुख बीके आदर्श दीदी, शासकीय व्याख्याता एवं निशुल्क विधिक सेवा केंद्र प्रभारी केआरजी कॉलेज डॉ मौला तिवारी, राष्ट्रीय स्तर की कुकरी प्रतियोगिता विजेता एवं रेसिपी क्रिएटर वंदना जग्गी, अधिवक्ता आभा मिश्रा उपभोक्ता फोरम की पूर्व सदस्य एवं पूर्व सरकारी अधिवक्ता, शिक्षिका आभा राठौर, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय स्वास्थ्य संघ की अध्यक्ष श्रीमती आशा सिंह, समाजसेवी कविता पमनानी आदि उपस्थित थीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीके आदर्श दीदी ने कहा कि आज हम सब एक ऐसे दिव्य विषय पर एकत्रित हुए हैं, जो केवल एक विचार नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि की आधारशिला है - नारी शक्ति। नारी केवल एक शरीर नहीं, बल्कि वह चेतना है, वह ऊर्जा है, जो सृजन, पालन और परिवर्तन का आधार है। जिस प्रकार बिना ऊर्जा के कोई भी कार्य संभव नहीं, उसी प्रकार नारी के बिना इस संसार की कल्पना भी अधूरी है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है। वह केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की आत्मा है। नारी में करुणा है, ममता है, सहनशीलता है, और सबसे महत्वपूर्ण अटूट आत्मबल है। शक्ति साधना पर्व हमें यह सिखाता है कि हमें अपने भीतर की शक्ति को पहचानने और जागृत करने की आवश्यकता है। जब एक नारी अपनी आत्मशक्ति को पहचान लेती है, तब वह न केवल अपने जीवन को, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी दिशा दे सकती है। आज आवश्यकता है कि हम नारी को सम्मान देने के साथ साथ उसे उसके वास्तविक शक्ति स्वरूप में स्वीकार करें। तो आइए, इस शक्ति साधना पर्व पर हम संकल्प लें - उसे सम्मान देंगे, उसे आगे बढ़ने का अवसर देंगे।
कार्यक्रम में डॉ मौला तिवारी ने कहा कि आज मैं अंतर्मन से अत्यंत प्रफुल्लित हूँ कि मुझे इतने प्रतिष्ठित संस्थान के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला। यह मेरे लिए गर्व का विषय है। आज अपनी खुशी व्यक्त करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। “वंदे मातरम्” और “स्वर्णिम भारत” जैसी प्रेरणादायक भावनाएँ हमारी इस टीम में अद्भुत ऊर्जा भरती हैं। जितनी बार हम इन्हें बोलते और सुनते हैं, उतनी ही बार अपने भीतर एक नई सशक्तता का अनुभव करते हैं। आज यहाँ खड़े होकर यह पूर्ण विश्वास के साथ कह सकती हूँ कि हम नारियाँ किसी भी रूप में, किसी भी क्षेत्र में, किसी से भी कम नहीं हैं। हमारे भीतर अपार शक्ति, आत्मविश्वास और क्षमता विद्यमान है।
कार्यक्रम में आभा राठौर ने कहा कि हमें किसी भी व्यक्ति या परिस्थिति से विचलित नहीं होना है। हमें केवल अपने कर्तव्य और अपने कार्य पर पूर्ण निष्ठा के साथ ध्यान केंद्रित करना है। जब हमारा मन अपने लक्ष्य और जिम्मेदारियों में पूरी तरह लगा होता है, तब कोई भी बाधा हमें डिगा नहीं सकती।
कार्यक्रम में वंदना जग्गी ने कहा कि वन्दे मातरम् - यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारे अंदर की शक्ति को जगाने वाली भावना है। यह हमें विश्वास दिलाता है कि नारी किसी से कम नहीं है। ज्ञान एक ऐसा शस्त्र है, जिसके आधार पर हम अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्य और कानूनी ज्ञान भी जरूरी है, ताकि हम अपने अधिकारों को समझ सकें और सही निर्णय ले सकें।
कार्यक्रम में आभा मिश्रा ने कहा कि हमें अपनी नई पीढ़ी को केवल अच्छी शिक्षा ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार भी देने होंगे। आज के समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी दिया जाए, ताकि वे केवल बुद्धिमान ही नहीं, बल्कि संस्कारी, संवेदनशील और चरित्रवान भी बनें।
कार्यक्रम में आभा राठौर ने भी अपनी शुभकामनाएं रखीं।
कार्यक्रम में मंचासीन सभी अतिथियों को संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मंच का कुशल संचालन आशा सिंह ने किया और कहा कि नारी शक्ति को सीमाओं में बाँधने की नहीं, बल्कि उसकी क्षमताओं को उभारने की जरूरत है। उसकी शिक्षा, उसका आत्मविश्वास और उसकी स्वतंत्रता ही समाज के विकास की सच्ची नींव है।
कार्यक्रम के अंत मे सभी का आभार बीके रोशनी बहन ने किया।
इस अवसर पर संस्कार मंजरी की संस्थापिका श्रीमती नीलम गुप्ता, अखिल भारतीय सामाजिक स्वास्थ्य संघ की सचिव उमा चौहान सहित अनेकानेक समाजसेवी बहनें तथा ब्रह्माकुमारीज केंद्र से जुड़ी हुई अनेकानेक बहनें और भाई उपस्थित थे।