Sethi Rasayan Shala

Sethi Rasayan Shala Herbal Ayurvedic & Patent Medicine We are Manufacturers, Suppliers and Exporters of a qualitative range of Ayurvedic Medicines.

Our range is well-received in the market. Sethi Rasayan Shala established in the year 1980, is a leading manufacturer of Ayurvedic herbal products and pharmaceutical bulk drugs.The factory is established in Indore.

जब दिनचर्या सुधरती है, तब रोग स्वतः घटने लगते हैंनियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, उचित निद्रा और सही आयुर्वेदिक औषधियाँ शर...
29/01/2026

जब दिनचर्या सुधरती है, तब रोग स्वतः घटने लगते हैं
नियमित दिनचर्या, संतुलित आहार, उचित निद्रा और सही आयुर्वेदिक औषधियाँ शरीर की प्राकृतिक शक्ति को जागृत करती हैं। आयुर्वेद केवल रोग दबाने का नहीं, बल्कि जीवन शैली को सुधारकर स्वास्थ्य बनाए रखने का विज्ञान है ।
स्वस्थ जीवन का आधार है, समय पर उठना, समय पर भोजन,तनाव से दूरी और प्रकृति के अनुरूप जीवन ।
विश्वसनीय आयुर्वेदिक औषधियों के साथ सही दिनचर्या अपनाएँ और स्वस्थ, ऊर्जावान जीवन की ओर कदम बढ़ाएँ ।
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अम्लपित्त (एसिडिटी) : आधुनिक जीवनशैली की आम समस्या आयुर्वेदिक दृष्टिकोणआज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, अनियमित खान-पान और बढ़...
28/01/2026

अम्लपित्त (एसिडिटी) : आधुनिक जीवनशैली की आम समस्या आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, अनियमित खान-पान और बढ़ता मानसिक तनाव एसिडिटी को एक आम समस्या बना चुके हैं । आयुर्वेद में इसे अम्लपित्त कहा जाता है । यह केवल पेट की जलन नहीं, बल्कि पित्त दोष के असंतुलन और पाचन अग्नि के विकार का संकेत है। समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह अल्सर, सिरदर्द, त्वचा रोग और कमजोरी जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है ।

अम्लपित्त के आहार संबंधी कारण :* अधिक मिर्च-मसालेदार, तला-भुना भोजन, जंक फूड, अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन और विरुद्ध आहार जैसे दूध के साथ नमक या खट्टा लेना ।
जीवनशैली से जुड़े कारण :* रात में देर तक जागना, नींद की कमी, भोजन का निश्चित समय न होना और लगातार बैठे रहकर काम करना ।
मानसिक कारण :* अत्यधिक क्रोध, चिंता, तनाव और चिड़चिड़ापन पित्त दोष को और बढ़ा देते हैं । अम्लपित्त के प्रमुख लक्षण सीने और गले में तेज़ जलन,खट्टी या कड़वी डकारें पेट में भारीपन, गैस और भूख न लगना, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होना सिरदर्द, चक्कर या त्वचा पर खुजली

आयुर्वेदिक उपचार व औषधियाँ
खानदानी आयुर्वेदिक चिकित्सक वैद्य डॉ. नरेंद्र सेठी के अनुसार अम्लपित्त केवल पेट की बीमारी नहीं है, यह गलत आहार-विहार और तनावपूर्ण जीवनशैली का परिणाम है । जब तक भोजन सादा, समय पर और मन शांत नहीं होगा, तब तक स्थायी राहत संभव नहीं है । अम्लपित के लिए ली जानी वाली प्रमुख औषधियां वैद्य की सलाह से
अविपत्तिकर चूर्ण :* जलन, गैस और कब्ज में लाभकारी
कामदुधा रस :* (मुक्तायुक्त) – पित्त की तीव्रता और हार्टबर्न में उपयोगी
मुलेठी चूर्ण :* पेट की अंदरूनी परत को शीतलता देता है
गिलोय सत्व :* पित्त शमन कर पाचन शक्ति बढ़ाता है ।
अम्ल पित्त हर काढ़ा :* पित्त की तीव्रता में उपयोगी

सरल घरेलू उपाय और आहार :* नारियल पानी, आंवले का मुरब्बा या ठंडे दूध में मिश्री मिलाकर सेवन करें, भोजन के बाद सौंफ और छोटी इलायची चबाएँ
लौकी, परवल, कद्दू, तोरई और मूंग की दाल को भोजन में शामिल करें । शीतली प्राणायाम और भोजन के बाद वज्रासन का नियमित अभ्यास करें।

सावधानी :* मिर्च-मसाले, खट्टी चीजें, फास्ट फूड और देर रात जागने से परहेज करें अम्लपित्त को हल्के में न लें । सही आहार, संतुलित दिनचर्या और आयुर्वेदिक मार्गदर्शन से इसे जड़ से नियंत्रित किया जा सकता है। स्वस्थ रहें, प्राकृतिक तरीके से ।
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#आयुर्वेद #एसिडिटी #स्वस्थजीवन

दिन में श्रम और रात में विश्राम  स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है । यह आयुर्वेद सिखाता है । दिन में सक्रिय रहना शरीर की अग्नि...
28/01/2026

दिन में श्रम और रात में विश्राम
स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है । यह आयुर्वेद सिखाता है । दिन में सक्रिय रहना शरीर की अग्नि को प्रबल करता है, रक्तसंचार को सुचारु रखता है और दोषों का संतुलन बनाए रखता है। वहीं रात का शांत और गहरा विश्राम शरीर को स्वयं को ठीक करने का अवसर देता है ।
आयुर्वेद के अनुसार जब व्यक्ति प्रकृति के नियमों के अनुरूप दिनचर्या अपनाता है समय पर श्रम, समय पर भोजन और समय पर विश्राम तो वात, पित्त और कफ संतुलित रहते हैं । यही संतुलन रोगों से रक्षा करता है और जीवन में ऊर्जा, प्रसन्नता व दीर्घायु प्रदान करता है । स्वस्थ जीवन का सच्चा सूत्र यही है, दिन में कर्म, रात में विश्राम ।






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सर्वाइकल~ जिन लोगों को सर्वाइकल की समस्या रहती है, उन्हें प्रतिदिन भुजंगासन अवश्य करना चाहिए । यह आसन गर्दन, कंधों और री...
27/01/2026

सर्वाइकल~ जिन लोगों को सर्वाइकल की समस्या रहती है, उन्हें प्रतिदिन भुजंगासन अवश्य करना चाहिए । यह आसन गर्दन, कंधों और रीढ़ की जकड़न को धीरे-धीरे कम करता है तथा रक्तसंचार को बेहतर बनाता है। नियमित अभ्यास से कुछ ही दिनों में दर्द, अकड़न और भारीपन में स्पष्ट फर्क महसूस होने लगता है । इसके साथ-साथ अपने वैद्य द्वारा बताई गई आयुर्वेदिक दवाओं का नियमित सेवन भी आवश्यक है, क्योंकि योग और आयुर्वेद मिलकर समस्या को जड़ से सुधारने में सहायक होते हैं । सही आसन, संयमित दिनचर्या और आयुर्वेदिक उपचार से सर्वाइकल की परेशानी को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है ।

स्वास्थ्य धन से बड़ा है : यही आयुर्वेद सिखाता हैआयुर्वेद का मूल सिद्धांत है कि सच्चा सुख और समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य में ...
27/01/2026

स्वास्थ्य धन से बड़ा है : यही आयुर्वेद सिखाता है
आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है कि सच्चा सुख और समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य में निहित है ।
जब शरीर स्वस्थ और मन संतुलित होता है, तभी जीवन में वास्तविक आनंद और सफलता आती है ।
प्राकृतिक जड़ी बूटियों और आयुर्वेदिक औषधियों से स्वास्थ्य की रक्षा ही जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है ।
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आयुर्वेद को ऐतिहासिक मान्यता : अब OPD पर भी मिलेगा बीमा कवरेजयह समाचार केवल एक नीति परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन...
26/01/2026

आयुर्वेद को ऐतिहासिक मान्यता : अब OPD पर भी मिलेगा बीमा कवरेज
यह समाचार केवल एक नीति परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा आयुर्वेद की ऐतिहासिक विजय है।
अब तक स्वास्थ्य बीमा को केवल एलोपैथी तक सीमित रखा गया था, लेकिन अब आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (AYUSH) पद्धतियों को भी OPD स्तर पर बीमा कवरेज दिए जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है।
इस निर्णय से स्पष्ट है कि आयुर्वेद केवल वैकल्पिक चिकित्सा नहीं, बल्कि विश्वसनीय, वैज्ञानिक और जन-कल्याणकारी चिकित्सा पद्धति है ।
✨ आयुर्वेद का महत्व क्यों बढ़ा ?
🔹 आयुर्वेद रोग को दबाने नहीं, जड़ से ठीक करने पर बल देता है
🔹 प्राकृतिक औषधियाँ, न्यूनतम दुष्प्रभाव
🔹 जोड़ों के दर्द, पुरानी बीमारियाँ, पाचन, त्वचा, तनाव जैसी समस्याओं में प्रभावी
🔹 आम जनता के लिए किफायती और दीर्घकालिक समाधान
अब बीमा कवरेज मिलने से
✔️ डॉक्टर की फीस
✔️ आयुर्वेदिक दवाइयाँ
✔️ OPD उपचार
का खर्च बीमा के अंतर्गत आएगा, जिससे आम आदमी को आर्थिक राहत मिलेगी और आयुर्वेद को अपनाने का विश्वास और बढ़ेगा । यह निर्णय न केवल मरीजों के हित में है, बल्कि
👉 आयुर्वेदिक चिकित्सकों को मुख्यधारा में सम्मान
👉 प्राचीन भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक पहचान
👉 स्वास्थ्य के क्षेत्र में संतुलित और समग्र दृष्टिकोण
को भी सशक्त करेगा। आज जब लोग एलोपैथी के दुष्प्रभावों से परेशान हैं, तब आयुर्वेद पर बढ़ता भरोसा यह सिद्ध करता है कि भारत का भविष्य, अपनी जड़ों से जुड़कर ही स्वस्थ बन सकता है । आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, जीवन जीने की कला है ।
#आयुर्वेद_का_महत्व



#भारतीय_चिकित्सा_विरासत


26/01/2026

महर्षि सुश्रुत : विश्व शल्य चिकित्सा के जनक और भारत की अमर आयुर्वेदिक वैज्ञानिक परंपरा
आज जिस आधुनिक शल्य चिकित्सा (Modern Surgery) पर संसार गर्व करता है, उसकी जड़ें हजारों वर्ष पूर्व भारत की पावन भूमि में स्थापित की जा चुकी थीं। उस महान परंपरा के अग्रदूत थे महर्षि सुश्रुत, जिन्हें संपूर्ण विश्व “Father of Surgery” के रूप में सम्मान देता है।
जब विश्व के अनेक सभ्य समाजों में चिकित्सा अभी प्रारंभिक अवस्था में थी, उस काल में महर्षि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा को केवल अनुभव-आधारित नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, व्यवस्थित और नैतिक अनुशासन के रूप में विकसित किया। उनकी अमर कृति सुश्रुत संहिता न केवल आयुर्वेद का, बल्कि संपूर्ण चिकित्सा इतिहास का एक अद्वितीय ग्रंथ है।
सुश्रुत संहिता में
🔹 300 से अधिक शल्य क्रियाओं का सूक्ष्म एवं क्रमबद्ध वर्णन
🔹 120 से अधिक शल्य उपकरणों की बनावट, उपयोग और देखभाल
🔹 नाक पुनर्निर्माण (Rhinoplasty), कान व होंठ शल्य चिकित्सा
🔹 मोतियाबिंद, अस्थि चिकित्सा, घाव उपचार और रक्तस्राव नियंत्रण
🔹 ऑपरेशन से पहले की तैयारी, पश्चात् देखभाल, स्वच्छता व रोगी-सुरक्षा
🔹 शल्य चिकित्सक के आचरण, संयम और नैतिक मूल्यों पर विशेष बल
जैसे विषयों का अत्यंत वैज्ञानिक विवरण मिलता है । महर्षि सुश्रुत ने यह भी स्पष्ट किया कि सफल शल्य चिकित्सा केवल उपकरणों से नहीं, बल्कि ज्ञान, अभ्यास, करुणा और अनुशासन से होती है। उन्होंने शल्य प्रशिक्षण हेतु शिष्य को पहले फल, सब्ज़ी, चमड़े और मिट्टी पर अभ्यास कराने की पद्धति विकसित की, जो आज के सिमुलेशन ट्रेनिंग का प्राचीन स्वरूप मानी जाती है ।
यह भारत की प्राचीन वैज्ञानिक चेतना का ही प्रमाण है कि ऑस्ट्रेलिया के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में महर्षि सुश्रुत की प्रतिमा स्थापित है, जहाँ उन्हें आधुनिक सर्जरी का मूल प्रेरणास्रोत माना जाता है । यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतीय आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है।
महर्षि सुश्रुत का जीवन और कार्य हमें यह संदेश देता है कि
भारत केवल आस्था की भूमि नहीं, बल्कि तर्क, अनुसंधान और मानव-कल्याण की प्रयोगशाला रहा है ।
आयुर्वेद कोई प्राचीन कथा नहीं, बल्कि समय की कसौटी पर खरा उतरा हुआ जीवन-विज्ञान है ।
हमारे पूर्वज सचमुच महान थे । आज आवश्यकता है कि हम अपने ऐसे महान पुरुषों को केवल स्मरण न करें, बल्कि उनके ज्ञान को समझें, अपनाएँ और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ । यही सच्ची श्रद्धांजलि है ।
#महर्षि_सुश्रुत
#विश्व_शल्य_चिकित्सा_के_जनक

#सुश्रुत_संहिता
#आयुर्वेद_वैज्ञानिक_विरासत


शुद्ध भोजन, शांत मन : दीर्घायु का सूत्रआयुर्वेद कहता है कि जैसा हमारा भोजन होता है, वैसा ही हमारा मन और स्वास्थ्य बनता ह...
26/01/2026

शुद्ध भोजन, शांत मन : दीर्घायु का सूत्र
आयुर्वेद कहता है कि जैसा हमारा भोजन होता है, वैसा ही हमारा मन और स्वास्थ्य बनता है ।
शुद्ध, सात्त्विक और संतुलित आहार न केवल रोगों से बचाता है, बल्कि मन को भी शांत और जीवन को दीर्घ बनाता है।
स्वस्थ जीवन की शुरुआत सही भोजन और सही सोच से होती है । Please like and follow for more information
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🇮🇳  गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ  🇮🇳संविधान के आदर्शों पर चलने, कर्तव्यों के साथ अधिकारों को निभाने और राष्ट्र की ...
26/01/2026

🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳
संविधान के आदर्शों पर चलने, कर्तव्यों के साथ अधिकारों को निभाने और राष्ट्र की एकता, अखंडता को सशक्त बनाने का यह पावन दिवस हम सभी को सच्चे नागरिक बनने की प्रेरणा देता है ।
आइए, 26 जनवरी के इस गौरवमयी अवसर पर देश की सेवा, संस्कृति और स्वाभिमान को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लें। जय हिंद ! वंदे मातरम् ! 🇮🇳✨

जहाँ सर्जरी अंतिम विकल्प थी, वहाँ आयुर्वेद बना जीवनदायी समाधानअल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी में जब आधुनिक चिकित्स...
25/01/2026

जहाँ सर्जरी अंतिम विकल्प थी, वहाँ आयुर्वेद बना जीवनदायी समाधान
अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी में जब आधुनिक चिकित्सा ने ऑपरेशन की सलाह दी, तब आयुर्वेदिक उपचार, आहार-विहार और संयम ने बिना सर्जरी पूर्ण स्वास्थ्य लौटाया।
यह केवल एक केस नहीं, बल्कि आयुर्वेद की वैज्ञानिक, प्राकृतिक और समग्र चिकित्सा शक्ति का प्रमाण है।
इलाज नहीं, जीवनशैली बदलती है आयुर्वेद।
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प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ : शरीर की सच्ची मित्रआयुर्वेद में कहा गया है कि प्रकृति से प्राप्त जड़ी-बूटियाँ शरीर के साथ संघर्...
25/01/2026

प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ : शरीर की सच्ची मित्र
आयुर्वेद में कहा गया है कि प्रकृति से प्राप्त जड़ी-बूटियाँ शरीर के साथ संघर्ष नहीं करतीं, बल्कि सहयोग करती हैं । ये दोषों का संतुलन बनाकर शरीर की स्वाभाविक रोग-प्रतिरोधक शक्ति को जागृत करती हैं।
प्राकृतिक औषधियाँ धीरे धीरे, सुरक्षित और जड़ से प्रभाव करती हैं । इसीलिए आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों को शरीर की मित्र माना गया है, जो उपचार के साथ-साथ संरक्षण भी देती हैं ।
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#जड़ीबूटी #प्राकृतिक_चिकित्सा

मन की शांति ही सच्चा स्वास्थ्य हैआयुर्वेद मानता है कि जब मन शांत होता है, तभी शरीर स्वस्थ और रोगमुक्त रहता है । आज की भा...
23/01/2026

मन की शांति ही सच्चा स्वास्थ्य है
आयुर्वेद मानता है कि जब मन शांत होता है, तभी शरीर स्वस्थ और रोगमुक्त रहता है । आज की भागदौड़ भरी जीवन शैली में तनाव, चिंता और असंतुलन अनेक रोगों की जड़ बनते जा रहे हैं । आयुर्वेद केवल औषधि नहीं देता, बल्कि मन-शरीर-आत्मा के संतुलन पर कार्य करता है ।
शुद्ध आहार, संतुलित दिनचर्या और प्राकृतिक आयुर्वेदिक औषधियाँ यही सच्ची चिकित्सा का आधार हैं । विश्वसनीय आयुर्वेदिक औषधियां स्वास्थ्य की जड़ तक पहुँचने वाला आयुर्वेद Please like and follow for more information Sethi Rasayan Shala

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