02/04/2026
(6 वर्ष पूर्व कोविड के दौरान लिखा गया लेख)
*सबसे बेहतर व सुरक्षित भारतीय परम्परा*
भारतीय परम्परा पूरी दुनिया में सर्वश्रेष्ठ है । खुद को व पूरे परिवार को हाइजिन रखने के अनेक उपाय बाल्य काल से ही सिखाए जाते हैं । ऐसे उपाय अपनाए जाते हैं जिससे बिमारियों से पूरे परिवार को सहजता के साथ सुरक्षित रखा जा सकता है ।
दिन की शुरुआत ही कुछ इस तरह से होती है । प्रात काल जाग कर खुद को साफ सुथरा करना, बैगेर नहाए रसोई घर में प्रवेश न करने की पाबंदी , माहवारी में रसोई घर में महिलाओं का प्रवेश निषेध जैसी अनेक ऐसी पाबंदियां हैं जिन्हे धार्मिक मान्यता दी है ताकि हाइजिन वातावरण बना रहे । घर में प्रवेश से पूर्व हाथ पैर धोना, भोजन के पूर्व हाथ पैर धोना , एक साथ परिवार के सदस्यों का भोजन इत्यादि । ये सब जो परम्पराएं हैं वे सभी को पालन करना आवश्यक है परंतु आज के आधुनिक दौर में कोई भी इन्हे मानने को तैयार नहीं है जिन घरों में आज भी इनका पालन घर के वरिष्ठ जन करवा रहे हैं वे समाजिक, सुरक्षित संस्कार विरोपित कर रहे हैं ।
भारतीय परम्परा में दोनो हाथ जोड़कर नमस्कार करने की व्यवस्था आज पूरा विश्व मान रहा है । बस हम अपनी ही मूल अवधारणा से दूर हो चले हैं । आज के दौर में अव वक्त हो चला है पुरातन रिवायतों की ओर लौटने का । अब भी कुछ बिगडा नहीं है । अभी के लॉक डाउन की वजह से अस्पताल खाली पडे हैं । छोटी बडी बीमारियां सर्दी बुखार, व अन्य परेशानियां जिसमे मेडिक्लेम होने की वजह से अस्पताल में दाखिल होने की इच्छा व आवश्यकता कम हो गई है । अस्पताल पर हमारा ध्यान कम जा रहा है जो इस बात का प्रतिक है कि मानसिक व शारीरिक रूप से यदि हम तय करें तो अस्पताल की जरुरत ही न पडे । चिकित्सा अब व्यवसाय में परिवर्तित हो चुकी है । ये क्षेत्र कभी सेवा का क्षेत्र कहा जाता था मगर अब ऐसा नहीं है । यहां अब व्यक्तिगत लाभ ही उददेश्य रह गया है ।