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वर्तमान युग को यदि राजनीतिक युग कहा जाए तो शायद गलत न होगा क्योंकि इस समय समस्त संसार और उनका भविष्य पूर्ण रूप से राजनीत...
01/11/2022

वर्तमान युग को यदि राजनीतिक युग कहा जाए तो शायद गलत न होगा क्योंकि इस समय समस्त संसार और उनका भविष्य पूर्ण रूप से राजनीतिज्ञों के हाथ में है। वह जिन व्यक्ति विशेष या पार्टी को चाहे तो सफलता एवं यश के आकाश पर चमका दें और चाहें तो उसे असफलता, अपयश के पाताल की गहराइयों में दफन कर दें। आज सब कुछ राजनेताओं के हाथ में ही तो है। लेकिन राजनेता बनना भी हर किसी के भाग्य में नहीं होता। विरले लोग ही होते हैं जो राजनीति के आकाश में ऊंचाइयों को छूते हैं। प्राय: प्रतिदिन ही संसार के किसी न किसी भाग में किसी न किसी प्रकार के चुनाव होते ही रहते हैं जिसमें अनेक लोग भाग लेते हैं किन्तु उनमें सफल होने वाले भाग्यशाली लोग थोड़े ही होते हैं। ऐसा योग होता होगा जो उन्हें सफलता देकर अन्य लोगों से विशिष्ट बनाता है।

ोग
यह योग तब बनता है जब समस्त शुभ एवं अशुभ ग्रह केवल केंद्र भावों में ही हों अर्थात समस्त ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में हों तो यह कमल योग कहलाता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक यशस्वी, विजयी और धनी होता है। वह अपने जीवन में मंत्री या राज्यपाल बनता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक शासनाधिकारी अवश्य बनता है वह सभी पर शासन करता है एवं बड़े-बड़े लोग उससे सलाह लेने आते हैं।

#यूप_योग
जन्म लग्र से लगातार चार स्थानों में सभी ग्रह हों तो यूप योग होता है। इसके प्रभाव से वह ग्राम पंचायत एवं नगरपालिका के चुनावों में विजय प्राप्त करता है। वह ग्राम पंचायत का सदस्य या मुखिया होता है। उसे दूसरों के आपसी विवाद निपटाने में विशेष रुचि और दक्षता प्राप्त होती है।

#मुसल_योग
जन्म कुंडली में समस्त ग्रह वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि में हो तो मुसल योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला जातक राजमान्य, प्रसिद्ध, ज्ञानी, धनी, बहुत पुत्र वाला, एम.एल.ए. या शासनाधिकारी होता है।

ोग
जन्म कुंडली में समस्त ग्रह द्विस्वभाव राशियों में हो तो यह योग होता है। इस योग में जन्मा जातक अति चतुर, धन संग्रहकारी, राजनीति में दक्ष और हर प्रकार के चुनावों में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।

#माला_योग
बुध, गुरु और शुक्र चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में हों तो माला योग होता है। इस योग वाला जातक धनी, वस्त्राभूषण युक्त, भोजनादि से सुख, अधिक स्त्रियों से प्रेम करने वाला एवं एम.पी. होता है। पंचायत के निर्वाचन में भी उसे पूर्ण सफलता मिलती है।

#छत्र_योग
जन्म कुंडली में सप्तम भाव से आगे के 7 स्थानों में समस्त ग्रह हो तो छत्र योग होता है अर्थात समस्त शुभ एवं अशुभ ग्रह कुंडली के अष्टम भाव से दूसरे भाव तक हों तो यह छत्र योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति धनी, परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करने वाला होता है। यह जातक बहुत लोकप्रिय, राज कर्मचारी एवं उच्च पदाधिकारी और अपने कार्य में ईमानदार होता है।

#चक्र_योग
लग्न से आरंभ कर एकांतर से छह स्थानों में अर्थात एक-एक भाव छोड़ कर जैसे प्रथम, तृतीय, पंचम, सप्तम, नवम और एकादश भाव में सभी ग्रह हों तो चक्र योग होता है। इस योग वाला जातक देश का राष्ट्रपति या राज्यपाल होता है। यह योग राजयोग भी गिना जाता है

#दाम_योग
यदि जन्म कुंडली में समस्त ग्रह किन्हीं भी छह राशियों में हों तो यह दाम योग कहलाता है। इस योग वाला जातक परोपकारी, परम ऐश्वर्यवान प्रसिद्ध व्यक्ति होता है। इसकी राजनीति में रुचि तो होती है किन्तु उसे सफलता कम मिलती है।

ेसरी_योग
लग्न अथवा चंद्रमा से यदि गुरु प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में हो और केवल शुभग्रहों से दुष्ट या युत हो तथा गुरु अस्त, नीच और शत्रु राशि में न हो तो गज केसरी योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति राजनीति में दक्ष होता है और यह मुख्यमंत्री बनता है।
वीणा योग
समस्त शुभ, अशुभ ग्रह किन्हीं भी सात राशियों में हों तो यह योग होता है। इस योग वाला जातक गीत, नृत्य, वाद्य से स्नेह तो करता ही है किन्तु इसके साथ-साथ वह राजनीति में सफल संचालक होता है। वह काफी धनी और नेता होता है।

#पर्वत_योग
यदि सप्तम और अष्टम भाव में कोई ग्रह नहीं हो और यदि कोई हो भी तो वह ग्रह शुभ ग्रह अवश्य होगा और सब शुभ ग्रह केंद्र में हों तो यह पर्वत नाम का योग होता है। इस योग वाले व्यक्ति भाग्यवान, वक्ता, शास्त्रज्ञ, प्राध्यापक, हास्य व्यंग्य, लेखक, यशस्वी, तेजस्वी होते हैं। मुख्यमंत्री भी इसी योग से बनते हैं।

#काहल_योग
लग्रेश बली हो, सुखेश और बृहस्पति परस्पर केंद्रगत हों अथवा सुखेश और दशमेश एक साथ उच्च या स्वराशि में हों तो काहल योग होता है। इस योग में उत्पन्न व्यक्ति बली, साहसी, धूर्त, चतुर और राजदूत होता है। काहल योग राजनीतिक अभ्युदय का भी सूचक है।

#चामर_योग
लग्नेश अपने उच्च में होकर केंद्र में हो और उस पर गुरु की दृष्टि हो अथवा शुभ ग्रह लग्न, नवम, दशम और सप्तम भाव में हो तो चामर योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला राजमान्य, मंत्री, दीर्घायु पंडित वक्ता और समस्त कलाओं का ज्ञाता होता है।

#शंख_योग
लग्रेश बली हो और पंचमेश तथा षष्ठेश परस्पर केंद्र में हो अथवा भाग्येश बली हो तथा लग्नेश और दशमेश चर राशि में हो तो शंख योग होता है। इस योग में उत्पन्न व्यक्ति दयालु, पुण्यात्मा, बुद्धिमान, सुकर्मा और चिरंजीवी होता है। मंत्री के पद भी इसे प्राप्त होते हैं।

#श्रीनाथ_योग
सप्तमेश दशम भाव में सर्वोच्च हो और दशमेश नवमेश से युक्त हो तो श्रीनाथ योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति एम.एल.ए., एम.पी. तथा मंत्री बनता है।

#कूर्म_योग
शुभ ग्रह 5, 6, 7वें स्थान में अपने-अपने उच्च में हों तो कूर्म योग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति राज्यपाल, मंत्री और धर्मात्मा, मुखिया, गुणी, यशस्वी, उपकारी, सुखी और नेता होता है।

#लक्ष्मी_योग
लग्नेश बलवान हो और भाग्येश अपने मूल त्रिकोण उच्च या स्वराशि में स्थित होकर केंद्रस्थ हो तो लक्ष्मी योग होता है। इस योग वाला जातक पराक्रमी, धनी, यशस्वी, मंत्री, राज्यपाल एवं गुणी होता है।

#कुसुम_योग
स्थिर राशि लग्न में दो, शुक्र केंद्र में दो और चंद्रमा त्रिकोण में शुभग्रहों से युक्त हो तथा शनि दशम स्थान में हो तो कुसुम योग होता है। इस योग में उत्पन्न व्यक्ति सुखी, योगी, विद्वान, प्रभावशाली, मंत्री, एम.पी., एम.एल.ए. आदि होता है।

#लग्राधि_योग
लग्र से 7, 8 वें स्थान में शुभ ग्रह हो और उन पर पाप ग्रह की दृष्टि या योग न हो तो लग्राधि नामक योग होता है। इस योग वाला व्यक्ति महान विद्वान, महात्मा सुखी और धन सम्पत्ति से युक्त होता है। राजनीति में भी यह व्यक्ति अद्भुत सफलता प्राप्त करता है। लग्राधि योग के होने पर जातक को सांसारिक सभी प्रकार के सुख और ऐेश्वर्य प्राप्त होते हैं।

#अधि_योग
चंद्रमा से 6, 7, 8वें भाव में समस्त शुभ ग्रह हों तो अधियोग होता है। इस योग में जन्म लेने वाला मंत्री, सेनाध्यक्ष, राज्यपाल आदि पदों को प्राप्त करता है। अधियोग के होने से व्यक्ति अध्ययनशील होता है और वह अपनी बुद्धि तथा तेज के प्रभाव से समस्त व्यक्तियों को आकृष्ट करता है।

#महाराज_योग
लग्नेश पंचम में पंचमेश लग्र में हो, आत्मकारक और पुत्रकारक दोनों लग्र या पंचम में हों, अपने उच्च, राशि या नवांश में तथा शुभग्रह में दृष्ट हो तो महाराज योग होता है। इस योग से जन्म लेने वाला व्यक्ति निश्चयत: राज्यपाल या मुख्यमंत्री होता है।

राजनीति में सफलता प्राप्ति के और भी अनेक योग हैं जिस जातक की कुंडली में इनमें से कोई भी योग होगा। उस जातक की राजनीति में रुचि अवश्य होगी और वह देर-सवेर राजनीति के क्षेत्र में अवश्य उतरता है जिस कुंडली में इनमें से जितने योग अधिक होंगे उसकी रुचि राजनीति में उतनी ही अधिक होगी और राजनीतिक क्षेत्र में उसे उतनी ही सफलता मिलेगी।

31/10/2022

कुंडली में ये 5 योग हो तो भगवान श्रीकृष्ण जितना भाग्यशाली होता है इंसान

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इंसान की कुंडली में पांच ऐसे ग्रह योग होते हैं जो बेहद शुभ और प्रबल माने जाते हैं. इन योगों को पंच महापुरुष योग कहते हैं. अगर इनमें से कोई एक भी योग जातक की कुंडली में हो तो उन्हें जीवन में कभी संघर्ष नहीं करना पड़ता. पंच महापुरुष योग गुरु, मंगल, बुध, शुक्र और शनि से मिलकर बनता है. इन पांच ग्रहों में से जब कोई भी मूल त्रिकोण या केंद्र में बैठता है तो इंसान की किस्मत चमकती है.

पंच महापुरुष योग तब सार्थक होता है जब ये ग्रह केंद्र में होते हैं. भगवान राम और श्रीकृष्ण की कुंडली में भी यही पंच महापुरुष योग विराजमान थे. ऊपर बताए गए ग्रहों से संबंधित पांच महायोगों के नाम इस तरह हैं-

1. मंगल का रूचक योग
2. बुध का भद्र योग
3. गुरु का हंस योग
4. शुक्र का मालव्य योग
5. और शनि का शश योग

मंगल का रूचक योग
यदि आपकी कुंडली में मंगल लग्न से या चंद्रमा से केंद्र के घरों में स्थित हो अर्थात यदि मंगल कुंडली में लग्न या चंद्रमा से 1, 4 7 या 10वें घर में मेष, वृश्चिक या मकर राशि में बैठा हो तो आपकी कुंडली में रूचक योग बनता है. इस योग के लोग साहसी और पराक्रमी होते हैं. इनमें शारीरिक बल भी भरपूर होता है. मानसिक रूप से ये लोग बहुत मजबूत होते हैं. ऐसे लोग बड़ी तेजी से निर्णय लेने में माहिर होते हैं. इन्हें कारोबार और प्रशासनिक मामलों में बड़ी सफलता मिलती है.
बुध का भद्र योग
यह योग बुध ग्रह से संबंधित है. यदि आपकी कुंडली में बुध लग्न से अथवा चंद्र कुंडली से केंद्र के घरों में स्थित है यानी बुध यदि केंद्र में चंद्रमा से 1, 4, 7 अथवा 10वें घर में मिथुन और कन्या राशि में स्थिति हैं तो आपकी कुंडली में भद्र योग बनेगा. इस कुंडली का जातक बुद्धि, चतुराई और वाणी का धनी होता है. ऐसा जातक लेखन, गणित, कारोबार और सलाहकार के क्षेत्र में बहुत सफल होते हैं. इन लोगों में विश्लेषण की गजब की क्षमता होती है.

गुरु का हंस योग
अगर आपकी कुंडली में धनु राशि में लग्न में या मीन राशि में कहीं भी गुरु बैठे हों तो यह योग बनता है. जब-जब बृहस्पति ऊंचा या मूल त्रिकोण में खुद के घर में या केंद्र में स्थित होंगे तब विशेष परिस्थिति में इस योग का निर्माण होगा. बृहस्पति यदि किसी कुंडली में लग्न अथवा चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें घर में कर्क, धनु अथवा मीन राशि में स्थित हो तो कुंडली में हंस योग बनता है. इस योग से जातक को सुख, समृद्धि, अध्यात्मक शक्ति के धनी होते हैं. ये लोग अपने तार्किक शक्ति से दुनिया को झुकाने का दम रखते हैं.
शुक्र का मालव्य योग
जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र लग्न से या चंद्रमा से केंद्र के घरों में स्थित है अर्थात शुक्र यदि कुंडली में लग्न या चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें घर में वृष, तुला या मीन राशि में स्थित हो तो कुंडली में मालव्य योग बनता है. इस योग के जातक सौंदर्य और कला के प्रेमी होते हैं. काव्य, गीत, संगीत या कला के किसी भी क्षेत्र में वह सफलता हासिल करते हैं. इनमें साहस, पराक्रम, शारीरिक बल की गजब क्षमता होती है.

शनि का शश योग
यदि आपकी कुंडली में शनि चंद्र से या लग्न से केंद्र के घरों में स्थित है अर्थात शनि यदि कुंडली में लग्न अथवा चंद्रमा से 1, 4, 7 या 10वें घर में तुला राशि अथवा कुंभ राशि में स्थित है तो शश योग बनता है. शश योग के जातक न्यायप्रिय, लंबी आयु और कूटनीति के धनी होते हैं. ये जातक लंबे समय तक प्रयास करने की क्षमता रखते हैं. यह किसी क्षेत्र में हार नहीं मानते हैं. सहनशीलता इनका विशेष गुण है, लेकिन शत्रु का इनसे बच पाना मुश्किल होता है.

 #तक्षशिला_विश्वविद्यालय  तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 2700 साल पहले की गई थी.. इस विश्विद्यालय में लगभग 10500...
30/10/2022

#तक्षशिला_विश्वविद्यालय

तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 2700 साल पहले की गई थी.. इस विश्विद्यालय में लगभग 10500 विद्यार्थी पढ़ाई करते थे.. इनमें से कई विद्यार्थी अलग-अलग देशों से ताल्लुुक रखते थे.. वहां का अनुशासन बहुत कठोर था.. राजाओं के लड़के भी यदि कोई गलती करते तो पीटे जा सकते थे.. तक्षशिला राजनीति और शस्त्रविद्या की शिक्षा का विश्वस्तरीय केंद्र था .. वहां के एक शस्त्रविद्यालय में विभिन्न राज्यों के 103 राजकुमार पढ़ते थे...!!

आयुर्वेद और विधिशास्त्र के इसमे विशेष विद्यालय थे.. कोसलराज प्रसेनजित, मल्ल सरदार बंधुल, लिच्छवि महालि, शल्यक जीवक और लुटेरे अंगुलिमाल के अलावा चाणक्य और पाणिनि जैसे लोग इसी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी थे.. कुछ इतिहासकारों ने बताया है.. कि तक्षशिला विश्विद्यालय नालंदा विश्वविद्यालय की तरह भव्य नहीं था.. इसमें अलग-अलग छोटे-छोटे गुरुकुल होते थे.. इन गुरुकुलों में व्यक्तिगत रूप से विभिन्न विषयों के आचार्य विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करते थे...!!

29/10/2022

Guru Chandal Yog
अनिष्ट की आशंका पैदा करता है गुरु चांडाल योग
एक विश्लेषण
By Pt. Gajendra Sharma

वैदिक ज्योतिष में कई तरह के शुभ-अशुभ योगों का जिक्र मिलता है। इनमें सबसे अधिक चर्चा होती है गुरु चांडाल योग की। जैसा कि नाम से ही जाहिर है इस योग के कुंडली में होने से व्यक्ति के जीवन में कई तरह की अनिष्टकारी घटनाएं होती रहती हैं। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसका जीवन कभी स्थिर नहीं रहता। गुरु ज्ञान एवं बुद्धि के दाता हैं, वहीं राहु छाया ग्रह है। यह ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठता है उसका बुरा फल मिलता है। जन्म कुंडली में जब गुरु के साथ राहु एक ही स्थान में बैठ जाए तो इस युति को गुरु चांडाल योग कहते हैं। जब दोनों ग्रह कुंडली के अलग-अलग भाव में बैठकर एक-दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखते हों तब भी गुरु चांडाल योग बनता है।

जीवन में हमेशा अस्थिरता बनी रहती है

चांडाल योग के कारण जातक के जीवन में हमेशा अस्थिरता बनी रहती है। उसका चरित्र भ्रष्ट हो जाता है और ऐसा व्यक्ति अनैतिक अथवा अवैध कार्यों में संलग्न हो जाता है। इस दोष के निर्माण में बृहस्पति को गुरु कहा गया है तथा राहु को चांडाल माना गया है। किसी कुंडली में राहु का गुरु के साथ संबंध जातक को बहुत अधिक भौतिकवादी बना देता है जिसके चलते वह जातक अपनी हर इच्छा को पूरा करने के लिए गलत कार्यों से धन अर्जित करने में भी परहेज नहीं करता। हालांकि ऐसे योग में यदि गुरु प्रबल हो तो जातक की किस्मत पलट भी सकती है। वह धनवान जरूर बनता है।

जन्म कुंडली के अलग-अलग भावों में इस ग्रह का अलग-अलग प्रभाव होता है। आइए जानते हैं किस भाव में गुरु चांडाल योग का क्या प्रभाव होता है:

गुरु चांडाल योग

• जन्म कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न में गुरु और राहु एक साथ बैठकर गुरु चांडाल योग बना रहे हों तो व्यक्ति संदिग्ध चरित्र वाला होता है। ऐसा व्यक्ति न केवल अनैतिक संबंधों में रुचि लेता है बल्कि हर सच्चे-झूठे कार्य करके धन अर्जित करता है। ऐसा व्यक्ति धर्म को ज्यादा महत्व नहीं देता।

• द्वितीय भाव धन स्थान में गुरु चांडाल योग बन रहा हो और गुरु बलवान हो तो व्यक्ति धनवान तो होता है, लेकिन यह पैसों का बुरी तरह अपव्यय करता है। यदि गुरु कमजोर हो तो जातक नशे का आदी होता है। ऐसे व्यक्ति की अपने परिवार से नहीं बनती है।

• तृतीय भाव में गुरु व राहु के होने से जातक साहसी व पराक्रमी होता है। गुरु के बलवान होने पर जातक लेखन कार्य में प्रसिद्ध पाता है और राहु के बलवान होने पर व्यक्ति गलत कार्यों में कुख्यात हो जाता है। वह जुएं जैसे कार्यों में धन गंवाता है।

• कुंडली के चौथे भाव में गुरु चांडाल योग बनने से व्यक्ति बुद्धिमान व समझदार होता है। लेकिन यदि गुरु कमजोर हो तो व्यक्ति पारिवारिक कार्यों में रुचि नहीं लेता। सुख शांति अभाव होता है और व्यक्ति मानसिक रूप से विचलित रहता है।
संतान को कष्ट

• यदि पंचम भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा हो और बृहस्पति नीच का है तो संतान को कष्ट होता है। ऐसे व्यक्ति की संतानें पथभ्रष्ट होकर अनैतिक कार्यों में संलग्न हो जाती है। उनकी शिक्षा में रूकावटें आती हैं। राहु यदि गुरु से अधिक बलवान है तो व्यक्ति अस्थिर विचारों वाला होता है।

• षष्ठम भाव में यह योग बन रहा हो और गुरु प्रबल हो तो व्यक्ति उत्तम स्वास्थ्य का मालिक होता है। छठा भाव स्वास्थ्य का स्थान होता है। यदि राहु बलवान है तो व्यक्ति कई तरह की शारीरिक परेशानियों से जूझता रहता है। उसे कमर के नीचे के रोग परेशान करते हैं।

• सातवां भाव दांपत्य सुख का स्थान होता है। यदि इस भाव में गुरु चांडाल योग बना हुआ है और गुरु पर अन्य शत्रु ग्रहों की दृष्टि है तो व्यक्ति का वैवाहिक जीवन कष्टकर होता है। यदि इस योग में राहु बलवान है तो जीवनसाथी से तालमेल का अभाव रहता है।
• यदि अष्टम भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा हो और गुरु कमजोर है तो जीवनभर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। बार-बार चोट लगती है और इलाज में खर्च अधिक होता है। राहु अत्यंत प्रबल हो तो ऐसा व्यक्ति आत्महत्या तक का कदम उठा सकता है।
व्यक्ति नास्तिक किस्म का होता है

• यदि नवम भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा हो और गुरु कमजोर हो तो व्यक्ति नास्तिक किस्म का होता है। अपने माता-पिता से इसका विवाद बना रहता है। ऐसे व्यक्ति को सामाजिक जीवन में अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

• दशम भाव कर्म स्थान होता है। यदि इस भाव में गुरु चांडाल योग बन रहा हो तो व्यक्ति में नैतिक साहस की कमी होती है और इसे पद, प्रतिष्ठा पाने में बाधाएं आती हैं। बिजनेस और जॉब में बार-बार बदलाव होता है। गुरु बलवान होने पर परेशानियों से कुछ हद तक राहत मिल जाती है।

• एकादश भाव में गुरु चांडाल योग बने और राहु बलवान हो तो व्यक्ति गलत तरीके से धन अर्जित करता है। धन पाने के लिए ऐसा व्यक्ति कुछ भी करने के लिए तैयार रहता है। ऐसे व्यक्ति के मित्रों की संगत अच्छी नहीं रहती और खुद भी गलत कार्य करने लगता है।

• द्वादश भाव में बनने वाला गुरु चांडाल योग व्यक्ति को धोखेबाज बनाता है। ऐसा व्यक्ति धर्म की आड़ में लोगों को धोखा देता है। खर्च करने की प्रवृत्ति अधिक रहती है। गुरु के बलवान होने पर व्यक्ति अति कंजूस प्रकृति का होता है।
क्या उपाय करें

गुरु चांडाल योग में राहु के कारण गुरु अपना शुभ प्रभाव नहीं दिखा पाता है। यदि चांडाल योग गुरु या इसके मित्र ग्रह की राशि में बन रहा हो तो राहु को शांत करने के उपाय करना होते हैं ताकि राहु का बुरा प्रभाव कम हो और गुरु का शुभ प्रभाव बढ़े। इसके लिए राहु के वैदिक मंत्रों का जाप करवाया जाता है। इसके बाद कुल मंत्र संख्या का दशांश हवन करवाना होता है। यदि यह दोष गुरु की शत्रु राशि में बन रहा हो तो राहु और गुरु दोनों की शांति के उपाय किए जाते हैं। इसके लिए नियमित रूप से गाय को चारा खिलाना और हनुमान आराधना जैसे उपाय भी किए जाते हैं।

28/10/2022

#इंद्र_योग

विश्लेषण पं हितेंद्र शर्मा

मनुष्य की कुंडली में निर्मित शुभ-अशुभ योग जातक को राजा और रंक दोनों ही बनाने में सक्षम हो सकते हैं. यहां हम शुभ योग के विषय में चर्चा कर रहे हैं. इनमें से एक है इंद्र योग. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता और व्यक्ति के रुके हुए काम भी इस योग में पूरे होते हैं.

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के अलग-अलग प्रभावों से बनने वाले योग काफी महत्वपूर्ण होते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन योगों में जन्म लेने वाला व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़े बदलाव आते हैं और यह बदलाव इनके लिए शुभ साबित होते हैं. ज्योतिष शास्त्र में 27 तरह के अलग-अलग योग के बारे में बताया गया है.

आज की इस कड़ी में हम जानेंगे इंद्र योग के बारे में. ये योग कुंडली में कैसे बनता है और इसके क्या फायदे हैं.

क्या है इंद्र योग?

ज्योतिष शास्त्र में बताए गए 27 योगों में से इंद्र योग एक शुभ योग है. इस योग का किसी व्यक्ति की कुंडली में बनना बहुत शुभ होता है. यह व्यक्ति के रुके हुए कार्य पूरे करता है. साथ ही करियर में भी तरक्की के रास्ते खोलता है. इसी वजह से ज्योतिष शास्त्र में इंद्र योग का विशेष महत्व माना जाता है.

कैसे बनता है इंद्र योग

इंद्र योग को शुभ योग माना जाता है. यह तब बनता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा से तीसरे स्थान पर मंगल हो और सातवें भाव पर शनि विराजमान हो. वहीं शनि से सातवें भाव में शुक्र मौजूद हो और शुक्र से सातवें भाव में गुरु हो.
इंद्र योग के फायदे
यदि किसी व्यक्ति की तुला लग्न हो और साथ में इंद्र योग हो तो व्यक्ति को मान सम्मान और ऐश्वर्य प्राप्त होता है. ऐसे लोग हमेशा न्याय और धर्म के मार्ग पर चलते हैं. यह योग जिसकी कुंडली में बनता है उसे धन लाभ भी होता है. इस योग के कुंडली में बनने से व्यक्ति चतुर और बुद्धिमान बनता है.

इस योग का फल
जिस व्यक्ति की कुंडली में इंद्र योग बनता है वह व्यक्ति राजनीतिज्ञ होता है. इनका बुद्धि स्तर बहुत ऊपर होता है. इसके कारण व्यक्ति को धन की कमी नहीं होती. इस योग के व्यक्तियों को अपने जीवन में अत्यधिक धन प्राप्त होता है. इंद्र योग वाला व्यक्ति समाज में मान सम्मान प्राप्त करता है और प्रसिद्धि पाता है.

द्वारा: ज्योतिषी एवं पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा, भोपाल

28/10/2022

🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜

☀ 28 - Oct - 2022
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि तृतीया 10:35 AM
🔅 नक्षत्र अनुराधा 10:43 AM
🔅 करण :
गर 10:35 AM
वणिज 10:35 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग शोभन +01:28 AM
🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:33 AM
🔅 चन्द्रोदय 09:26 AM
🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक
🔅 सूर्यास्त 05:47 PM
🔅 चन्द्रास्त 08:00 PM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:13 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:48:04 - 12:32:59
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:48 AM - 09:33 AM
🔅 कंटक 01:17 PM - 02:02 PM
🔅 यमघण्ट 04:17 PM - 05:02 PM
🔅 राहु काल 10:46 AM - 12:10 PM
🔅 कुलिक 08:48 AM - 09:33 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:47 PM - 03:32 PM
🔅 यमगण्ड 02:58 PM - 04:23 PM
🔅 गुलिक काल 07:57 AM - 09:22 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

27/10/2022

🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜

☀ 27 - Oct - 2022
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि द्वितीया 12:47 PM
🔅 नक्षत्र विशाखा 12:11 PM
🔅 करण :
कौलव 12:47 PM
तैतिल 12:47 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग :
आयुष्मान 07:26 AM
सौभाग्य 07:26 AM
🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:33 AM
🔅 चन्द्रोदय 08:18 AM
🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक
🔅 सूर्यास्त 05:48 PM
🔅 चन्द्रास्त 07:11 PM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:15 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:48:07 - 12:33:07
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:18 AM - 11:03 AM
🔅 कंटक 02:48 PM - 03:33 PM
🔅 यमघण्ट 07:18 AM - 08:03 AM
🔅 राहु काल 01:35 PM - 02:59 PM
🔅 कुलिक 10:18 AM - 11:03 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 04:18 PM - 05:03 PM
🔅 यमगण्ड 06:33 AM - 07:57 AM
🔅 गुलिक काल 09:21 AM - 10:46 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ

25/10/2022

🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜

☀ 26 - Oct - 2022
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि प्रतिपदा 02:44 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति 01:25 PM
🔅 करण :
बव 02:44 PM
बालव 02:44 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग प्रीति 10:07 AM
🔅 वार बुधवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:32 AM
🔅 चन्द्रोदय 07:13 AM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 सूर्यास्त 05:48 PM
🔅 चन्द्रास्त 06:27 PM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:16 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित कोई नहीं
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 11:48 AM - 12:33 PM
🔅 कंटक 04:18 PM - 05:03 PM
🔅 यमघण्ट 08:47 AM - 09:32 AM
🔅 राहु काल 12:10 PM - 01:35 PM
🔅 कुलिक 11:48 AM - 12:33 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 07:17 AM - 08:02 AM
🔅 यमगण्ड 07:57 AM - 09:21 AM
🔅 गुलिक काल 10:46 AM - 12:10 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

25/10/2022

🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜

☀ 25 - Oct - 2022
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या 04:20 PM
🔅 नक्षत्र चित्रा 02:17 PM
🔅 करण :
नाग 04:20 PM
किन्स्तुघ्ना 04:20 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग विश्कुम्भ 12:31 PM
🔅 वार मंगलवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:31 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 सूर्यास्त 05:49 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:51 PM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:18 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:48:13 - 12:33:26
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:47 AM - 09:32 AM
🔅 कंटक 07:17 AM - 08:02 AM
🔅 यमघण्ट 10:17 AM - 11:03 AM
🔅 राहु काल 03:00 PM - 04:25 PM
🔅 कुलिक 01:18 PM - 02:03 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:47 AM - 09:32 AM
🔅 यमगण्ड 09:21 AM - 10:46 AM
🔅 गुलिक काल 12:10 PM - 01:35 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

22/10/2022

🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 दैनिक पंचांग 📜

☀ 22 - Oct - 2022
☀ Jaipur, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि द्वादशी 06:05 PM
🔅 नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी 01:51 PM
🔅 करण :
तैतिल 06:05 PM
गर 06:05 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग ब्रह्म 05:11 PM
🔅 वार शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:30 AM
🔅 चन्द्रोदय +04:14 AM
🔅 चन्द्र राशि सिंह
🔅 सूर्यास्त 05:52 PM
🔅 चन्द्रास्त 04:14 PM
🔅 ऋतु शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:22 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:48:29 - 12:33:58
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:30 AM - 07:15 AM
🔅 कंटक 11:48 AM - 12:33 PM
🔅 यमघण्ट 02:50 PM - 03:35 PM
🔅 राहु काल 09:20 AM - 10:45 AM
🔅 कुलिक 07:15 AM - 08:01 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:19 PM - 02:04 PM
🔅 यमगण्ड 01:36 PM - 03:01 PM
🔅 गुलिक काल 06:30 AM - 07:55 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

18/10/2022

दिवाली की सफाई में इन चीजों को जरूर घर से निकाले, वर्ना मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज

Things Removed in Cleaning

दिवाली आने वाली है और आप तो जानते हैं कि दिवाली से पहले घर की सफाई की जाती है.जिससे घर में मां लक्ष्मी का प्रवेश हो सके.हालांकि कई बार लोग घर की सफाई तो करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी चीजें छोड़ देते हैं जो बहुत ही अशुभ होती हैं और इसी के चलते घर में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसलिए हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बताते हैं.जिनको आपको दिवाली की सफाई के दौरान घर से तुरंत हटा देना चाहिए.
छत की सफाई करें
यह बात आप बचपन से ही समझते हैं कि घर में मां लक्ष्मी का वास हो इसलिए दिवाली से पहले घर की सफाई की जाती है. हालांकि कई लोग घर की सफाई तो करते हैं ,लेकिन छत की नहीं. ऐसा माना जाता है कि यह सही नहीं है. इसलिए आपको घर की छत की सफाई जरूर करनी चाहिए. इससे आप पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहेगी.

कबूतर का घोंसला

दिवाली में आपको अपने घर में बने कबूतर के घोंसले को तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता है. बता दें कि वास्तु के अनुसार पक्षियों का घर में प्रवेश शुभ होता है, लेकिन अगर वो घर में घोंसला बनाते हैं तो यह अच्छा नहीं है.

टूटी हुई घड़ी
वास्तु में यह बात हमेशा कही जाती है कि अगर घर में टूटी हुई घड़ी हो तो उसे जल्द से जल्द हटा दें क्योंकि यह बहुत ही अशुभ होती है और घर में लड़ाई-झगड़े का कारण बनती है. इसलिए दिवाली की सफाई करते हुए आप टूटी हुई घड़ी को हटा दीजिए.

टूटा हुआ शीशा
टूटा हुआ शीशा कितना अशुभ होता है, ये आपको बताने की जरूरत नहीं है,ये चीज तो आप अच्छी तरह से समझते हैं. इसलिए दीपावली की सफाई करते समय अपने घर से टूटा हुआ शीशा हटा देना चाहिए.माना जाता है कि इसके कारण घर में बुरा प्रभाव पड़ता है. जिसके चलते घर में तनाव की स्थिति बनी रहती है.साथ ही इसका असर आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है.

खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान
कुछ लोगों को अपने घर में पुराने खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने की आदत होती है और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं होती है.यह कितना अशुभ होता है और यह घर की प्रगति में बाधक होते हैं.अगर आप अपने खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे माइक्रोवेव,फ्रिज, पंखा, ग्राइंडर, टीवी को ठीक नहीं कराना चाहते हैं तो आप दिवाली की सफाई के समय इन्हें घर से हटा दीजिए.

क्षतिग्रस्त मूर्तियां
आप यह चीज तो अच्छी तरह समझते हैं कि हिंदू धर्म मान्यता है कि अगर किसी भगवान की मूर्ति टूट जाती है तो उसको फेंका नहीं जाता.बल्कि नदी में विसर्जित किया जाता है.हालांकि कुछ लोग अपने आलस्य के चलते लंबे समय तक अपने घर में मूर्तियां रखे रहते हैं और यह बिल्कुल सही नहीं होता है. इसलिए अगर आप घर में भगवान की क्षतिग्रस्त मूर्तियां रखें हैं तो दिवाली की सफाई के समय उनको आप जल्द से जल्द नदी में प्रवाहित कर दीजिए और घर में नई मूर्तियां ले आइए.

ज्योतिष डॉ राजेंद्र शर्मा को सम्मानित किया राज्यपाल अनुसूया उईके ने
18/10/2022

ज्योतिष डॉ राजेंद्र शर्मा को सम्मानित किया राज्यपाल अनुसूया उईके ने

बिलासपुर संभाग के होटल आनंदा एम्पोरियम में उच्चशिक्षा समस्या और समाधान कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल सुश्.....

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