Jarrah & herbal skin clinic

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डॉ. अब्दुल अज़ीज़बॉडी बनाने का शौक युवाओं को बीमार कर रह.....साइड इफेक्ट से यूरिन में आने लगा ब्लड....बॉडी बनाने का शौक ...
28/10/2022

डॉ. अब्दुल अज़ीज़
बॉडी बनाने का शौक युवाओं को बीमार कर रह.....
साइड इफेक्ट से यूरिन में आने लगा ब्लड....
बॉडी बनाने का शौक युवाओं को बीमार कर रहा है। जल्दी मसल्स ग्रो करने के चक्कर में प्रोटीन पाउडर और फूड सप्लीमेंट खतरनाक साबित हो रहे हैं। प्रोटीन पाउडर और फूड सप्लीमेंट्स लेने की वजह से बॉडी और मसल्स तो डेवलप हो जाते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में साइड इफेक्ट्स भी सामने आने लगते हैं। ...
हर्बल स्किन क्लिनिक
9460061615
draziz1972@yahoo.in ..

1:38

Dr Abdul Aziz खाने के बाद 2 मिनट की स्लो वॉक भी डायबिटीज का खतरा घटाती हैHearbal skin clinic ✨️ खाने के बाद टहलना अच्छी ...
22/10/2022

Dr Abdul Aziz
खाने के बाद 2 मिनट की स्लो वॉक भी डायबिटीज का खतरा घटाती है
Hearbal skin clinic ✨️
खाने के बाद टहलना अच्छी आदत है यह सबको पता है। लेकिन कितने मिनट टहलना फायदेमंद होता है इस पर बहस है। एक रिसर्च के मुताबिक खाना खाने के बाद 15 मिनट टहलना ब्लड शुगर लेवल कम करने में मददगार होता है। इससे टाइप-2 डाइबिटीज होने का खतरा भी कम होता है। लेकिन अब नए रिसर्च में सामने आया है कि यह फायदे सिर्फ 2 मिनट के वॉक में भी होते हैं। हाल ही में स्पोट्र्स मेडिसीन जर्नल में पब्लिश एक एनालिसिस के मुताबिक खाने के बाद 2 मिनट के हल्के वॉक से भी ब्लड शुगर लेवल पर बड़ा प्रभाव पड़ा। इसमें भी अगर खाने के 2 से 3 घंटे के बाद में 2 मिनट वॉक लिया जाए तो ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे विशेष रूप से ब्लड शुगर लेवल को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। ये छोटे वॉक वर्क फ्रॉम होम या ऑफिस में काम कर करने के दौरान करना भी आसान है। लंच के बाद अपने आस-पास थोड़ी देर चल लेना ऑफिस या घर दोनों ही स्पेस में मुमकिन है।
Jarrah & herbal skin clinic
draziz1972@yahoo.in

Painful acute cysts in the natal cleft or lower back, known as pilonidal sinus disease, are a severe burden to many youn...
13/12/2021

Painful acute cysts in the natal cleft or lower back, known as pilonidal sinus disease, are a severe burden to many younger patients. Although surgical intervention is the preferred first line treatment, postsurgical wound healing disturbances are frequently reported due to infection or other complications. Different treatment options of pilonidal cysts have been discussed in the literature, however, no standardised guideline for the postsurgical wound treatment is available. After surgery, a common recommended treatment to patients is rinsing the wound with clean water and dressing with a sterile compress.

It took 45 days for this wound to heal......
12/12/2021

It took 45 days for this wound to heal......

12/12/2021
डॉ अब्दुल अजीज साहेब (हर्बल स्किन क्लिनिक) की अपील...!!**🏥~~~~~~~~~~~~~~~🚑*तेज़ बुख़ार,खांसी,शदीद जिस्म दर्द,मुहं का कड़वा ...
20/03/2021

डॉ अब्दुल अजीज साहेब (हर्बल स्किन क्लिनिक) की अपील...!!*
*🏥~~~~~~~~~~~~~~~🚑*
तेज़ बुख़ार,खांसी,शदीद जिस्म दर्द,मुहं का कड़वा पन और सूंघने,ज़ायके की हिस् ख़त्म होने जैसी अलामात तक़रीबन पूरे हिन्दुस्थान में फैल चुकी हैं.. //

* अपनी हिफ़ाज़त करें - - ->*

1-】ठंडे पानी से परहेज़ करें.. //
2-】बर्फ़ का इस्तेमाल मुक्कमल तौर पर बंद कर दें.. //
3-】जोशांदा पियें.. // 【काढ़ा】
4-】साधा गरम पानी की भाप लें.. //
5-】अंडे खायें.. //
6-】अन्जीर खायें.. //
7-】बादाम खायें.. //
8-】लौंग,इलायची,दाल चीनी का कहवा पियें.. //
9-】मटन सुप पियें..काली मिर्च,अद्रक,हल्दी डालकर.. //
10-】देसी मुर्गी का सुप पियें,काली मिर्च,अद्रक, हल्दी डाल कर.. //
11-】केलशियम किसी भी सूरत में लाज़मी लें.. //
12-】पानी का इस्तेमाल ज़्यादा करें. मास्क लगाएं एक दूसरे से 2गज की दूरी रखें।draziz

16/03/2021
जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिकलू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने ...
02/06/2019

जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिक
लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?
हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?

👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।

👉 पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।

👉 पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )

👉 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।

👉 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता
है ।

👉 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते
हैं ।
जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिक

👉 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर low हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।

👉 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।

👉गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर ध्यान देना चाहिए ।

Equinox phenomenon: इक्विनॉक्स प्रभाव आने वाले दिनों में भारत को प्रभावित करेगा ।
जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिक
कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।

तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।

यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।

(ये प्रभाव भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर सूर्य चमकने के कारण पैदा होता है) ।

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।

किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।
जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिक
जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।

ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम
करें ।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।

हीट वेव कोई मजाक नही है ।

एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।
जर्राह और हर्बल स्किन क्लीनिक

फंगल इंफेक्‍शन से बचने के घरेलू उपाय     जर्राह & हर्बल स्किन क्लीनिक1फंगल इंफेक्‍शन से बचने के उपायफंगल इंफेक्‍शन आमतौर...
18/04/2019

फंगल इंफेक्‍शन से बचने के घरेलू उपाय
जर्राह & हर्बल स्किन क्लीनिक
1
फंगल इंफेक्‍शन से बचने के उपाय
फंगल इंफेक्‍शन आमतौर पर कवक से होनी वाली समस्‍या है। इसमें त्वचा की ऊपरी सतह पर पपड़ी, पैरों में खुजली, पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा होना, त्वचा पर लाल चकत्ते बनना और उनके चारों ओर खुजली होना, पसीने वाले हिस्सों में ज्यादा खुजली होना, जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं जो एक संक्रामक रोग है। फंगल संक्रमण के कुछ सामान्य प्रकार एथलीट फुट, जॉक खुजली, दाद, रिंगवार्म, कैंडिडिआसिस आदि शामिल है। फंगल संक्रमण की गंभीरता व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकती हैं। फंगल संक्रमण कई कारणों जैसे एंटीबॉ‍योटिक दवाओं के साइड इफेक्‍ट, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, डायबिटीज, स्‍वच्‍छता की कमी, गर्म वातावरण में रहना, ब्‍ल्‍ड सर्कुलेशन की कमी आदि से होता है। आजकल की सक्रिय जीवनशैली के कारण फंगल इंफेक्‍शन किसी को भी प्रभावित करना बहुत आम है। लेकिन कुछ आसान हर्बल उपचारों की मदद से संक्रमण के कारण कवक को नष्‍ट करने और लक्षणों की तीव्रता को कम करने में मदद करते हैं।

फंगल इंफेक्‍शन से बचने के उपाय जर्राह & हर्बल स्किन क्लीनिक
2
संक्रमण का आम इलाज है एप्पल साइडर सिरका
एप्पल साइडर सिरका किसी भी प्रकार के फंगल इंफेक्‍शन के लिए बहुत आम इलाज है। एंटीमाइक्रोबील गुणों की उपस्थिति के कारण सेब साइडर सिरका, संक्रमण पैदा करने वाले कवक को मारने में मदद करता है। इसके अलावा, इसकी हल्‍‍की एसिडिक प्रकृति संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद करता है और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ को बढ़ावा देता है। समस्‍या होने पर एक कप गर्म पानी में दो बड़े चम्‍मच सेब साइडर सिरका मिलाकर पीयें।

संक्रमण का आम इलाज है एप्पल साइडर सिरका
3
सादे दही में मौजूद होता है प्रोबायोटिक्‍स
फंगल इंफेक्‍शन के इलाज के लिए आप सादे दही का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सादा दही में मौजूद प्रोबायोटिक्‍स लैक्टिक एसिड का निर्माण कर कवक के विकास को जांच में रखता है। समस्‍या होने पर सादा दही कॉटन पर लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से धो लें। इस उपाय को संक्रमण के साफ होने तक एक दिन में दो बार लगाये।

सादे दही में मौजूद होता है प्रोबायोटिक्‍स
4
एंटीफंगल गुणों से भरपूर लहसुन
लहसुन में मौजूद उपयोगी एंटीफंगल गुणों के कारण यह किसी भी प्रकार के संक्रमण का बहुत ही प्रभावी उपाय है। इसके अलावा इसमें एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीबायोटिक गुण भी मौजूद होते हैं जो रिकवरी की प्रक्रिया के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समस्‍या होने पर दो लहसुन की कली को अच्‍छे से कुचलकर, उसमें जैतून के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर बारीक पेस्‍ट बना लें। फिर इस पेस्‍ट को संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गुनगुने पानी से त्‍वचा के उस हिस्‍से को धो लें।

एंटीफंगल गुणों से भरपूर लहसुन
5
प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है हल्दी
हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुणों के रूप में जाना जाता है। साथ ही, इसकी हीलिंग गुण उपचार को जल्‍द ठीक करने और संक्रमण को दोबारा होने से रोकता है। त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर कच्ची हल्दी के जड़ के रस को लगाये। दो से तीन घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, और फिर गुनगुने पानी से धो लें। संक्रमण के दूर होने तक इस उपाय को दिन में दो बार करें।

प्राकृतिक एंटीसेप्टिक है हल्दी
6
संक्रमण को दूर करें टी ट्री ऑयल
टी ट्री ऑयल में मौजूद प्राकृतिक एंटीफंगल गुण फंगल संक्रमण का कारण बनने वाले कवक को दूर करने में मदद करता है। साथ ही इसके एंटीसेप्टिक गुण शरीर के अन्‍य भाग में संक्रमण के प्रसार को रोकते हैं। ट्री टी ऑयल में ऑलिव ऑयल और बादाम के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिलाये। फिर इस मिश्रण को संक्रमित त्‍वचा पर लगाये।
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संक्रमण को दूर करें टी ट्री ऑयल
7
फैटी एसिड से भरपूर नारियल का तेल
नारियल तेल में मीडियम चेन फैटी एसिड की उपस्थिति के कारण यह किसी भी प्रकार के कवक संक्रमण को दूर करने का एक कारगर उपाय है। यह फैटी एसिड संक्रमण के लिए जिम्‍मेदार कवक को मारने में मदद करता है। नारियल के तेल को संक्रमित त्‍वचा पर लगाकर, थोड़ी देर के लिए छोड़ दें। संक्रमण साफ होने तक इस उपाय को दिन में दो से तीन बार दोहराये। नारियल तेल और दालचीनी के तेल को बराबर मात्रा में मिलाकर भी लगा सकते हैं।

फैटी एसिड से भरपूर नारियल का तेल
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जैतून के पत्ते में मौजूद होते हैं एंटीफंगल गुण
जैतून की पत्‍तों में मौजूद एंटीफंगल के साथ-साथ एंटीमाइक्रोबीयल गुणों के कारण यह कवक को दूर करने में मदद करते है। इसके अलावा यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं जिससे संक्रमण को तेजी से ठीक होने में मदद मिलती है। जैतून के पत्‍तों को पीसकर पेस्‍ट बना लें। फिर इसे संक्रमित त्‍वचा पर सीधा लगा लें। 30 मिनट लगा रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से साफ कर लें।

जैतून के पत्ते में मौजूद होते हैं एंटीफंगल गुण
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