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01/10/2023
सबसे अच्छा उपयोग वन तुलसी के पंचांग या इसके पत्तों को तोड़कर छाया में सुखाकर चाय में इस्तेमाल करने से यह इम्यूनिटी पावर ...
14/08/2023

सबसे अच्छा उपयोग वन तुलसी के पंचांग या इसके पत्तों को तोड़कर छाया में सुखाकर चाय में इस्तेमाल करने से यह इम्यूनिटी पावर बढ़ाती है साथ ही सर्दी जुखाम खांसी से बचाव रखती है।
5-10 मिली वन तुलसी के पत्ते के रस में शहद मिलाकर चाटें। इससे कण्ठ विकार तथा कुक्कुर कास ठीक होते हैं।
मलेरिया को दूर रखने में तुलसी बहुत उपयोगी है। यह दो तरीके से काम करती है, एक तो ये मच्छरों को दूर भागती है दूसरा इसमें मौजूद एंटी मलेरियल गुण, मलेरिया के लक्षणों को कम करते हैं। इसलिए मच्छरों को दूर रखने के लिए अपने घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं।
त्वचा संबंधी रोगो में तुलसी का उपयोग लाभदायक है। तुलसी में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी के साथ-साथ एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीफंगल गुण होता है जो त्वचा रोगों में फायदा पहुंचाता है।
जंगली तुलसी में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही यह दिल की कार्यक्षमता भी बढ़ाती है. इसलिए दिल के मरीजों को तुलसी के सेवन की सलाह दी जाती है।
तुलसी बर्बरी 60-90 सेमी ऊंचा, सीधा और अनेक शाखाओं वाला होता है। इसके तने बैंगनी रंग के होते हैं, जो हमेशा रहते हैंं। इसके पत्ते सीधे, विपरीत, 2.5-5 सेमी लम्बे होते हैं। इसके फूल सुगन्धित, सफेद-गुलाबी अथवा बैंगनी होते हैं। इसके फल 2 मिमी लम्बे, थोड़े नुकीले, श्यामले रंग के, चिकने अथवा लगभग झुर्रीदार होते हैं। इसके बीज श्यामले रंग वर्ण के, अंडाकार तथा आयताकार होते हैं। तुलसी बर्बरी के पौधे में फूल और फल सालों भर होते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, तुलसी बर्बरी के फायदे वात-पित्त-कफ विकार दोषों को दूर करने, भूख को बढ़ाने और ह्रदय को स्वस्थ बनाने में मिलते हैं। आप खुजली, रक्तविकार, कुष्ठ रोग, विसर्प और मूत्र संबंधित बीमारियों में भी तुलसी बर्बरी से लाभ ले सकते हैं।
तुलसी बर्बरी का वानस्पतिक नाम Ocimum basilicum Linn. (ओसीमम बेसिलीकम) Syn-Ocimum caryophyllatum Roxb. है, और यह Lamiaceae (लेमिएसी) कुल की है।
तुलसी का कोई भी चिकित्सिकीय प्रयोग केवल चिकित्सक से परामर्श करके ही करें।
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गीता में कृष्ण और अर्जुन से जुड़ा एक श्लोक है- 'युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति द...
26/07/2023

गीता में कृष्ण और अर्जुन से जुड़ा एक श्लोक है- 'युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नाव बोधस्य योगो भवति दु:ख।। कालांतर में इसमें से 'युक्ताहारविहारस्य पद्धति को आयुर्वेद में अपनाया गया। यानी युक्त आहार और विहार से शरीर के सभी प्रकार के रोग दूर हो सकते हैं फिर चाहे वे मानसिक हों या शारीरिक।
युक्त आहार -
यह संतुलित भोजन से जुड़ा है। ऐसी बैलेंस डाइट जिसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, मिनरल्स, विटामिन और पानी जैसे छह तत्व होते हैं। हालांकि खानपान में इन पोषक तत्वों को शामिल करना या नहीं करना व मात्रा व्यक्ति विशेष के किसी रोग से पीड़ित होने पर निर्भर करती है। यदि किसी को डायबिटीज है तो उसे कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें चीनी, आलू आदि खाने से मना किया जाता है और अगर यूरिक एसिड ज्यादा है तो प्रोटीन डाइट जैसे पनीर, दूध आदि से परहेज करना होता है।
युक्त विहार -
इसका तात्पर्य संतुलित व्यायाम से है। इसके अनुसार व्यक्ति को सुबह खाली पेट 40 मिनट और रात के भोजन के बाद 20 मिनट टहलना चाहिए। साथ ही विशेषज्ञ की सलाहानुसार योगासन और प्राणायाम करना चाहिए।
विरूद्ध आहार से बचें -
दूध के साथ खट्टे पदार्थ जैसे नींबू पानी, दही, इमली आदि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इससे त्वचा संबंधी एलर्जी जैसे सोरायसिस, वर्टिलिगो या एग्जिमा हो सकती है।
गरिष्ठ चीजों को कभी एकसाथ न खाएं जैसे पनीर की सब्जी व राजमा। इससे पाचनतंत्र गड़बड़ा जाता है।
फल खाने के बाद पानी पीने से पाचन प्रक्रिया धीमी होकर अपच हो सकती है।
खीर और रायता एकसाथ न खाएं। इससे अपच व त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं।
भोजन के बाद ठंडा पानी पीने से बचें। यह शरीर में जाकर पाचन प्रक्रिया को भी धीमा करता है।
सामान्य युक्त आहार -
मोटे आटे की रोटी, उबली हुई सब्जियां (जिसमें नमक, मिर्च-मसाले बेहद कम मात्रा में हों), अंकुरित अनाज, सलाद, छाछ या दही। लेकिन इस आहार के साथ चिकनाई, खटाई मैदे से बनी चीजें, ठंडी चीजें, अधिक मात्रा में मसालों के प्रयोग से परहेज करें।
पानी : प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना कम से कम सवा तीन लीटर (८-10 गिलास) पानी जरूर पीना चाहिए।
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सिन्दुरी प्राकृतिक सिंदूर जिस पौधे से प्राप्त किया जाता हैआयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभावसिन्दुरिया कटु,तिक्त,कषाय, शीत,ल...
27/11/2022

सिन्दुरी प्राकृतिक सिंदूर जिस पौधे से प्राप्त किया जाता है
आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव
सिन्दुरिया कटु,तिक्त,कषाय, शीत,लघु तथा कफवातशामक होता है।
यह विष,तृष्णा,शिरोरोग, रक्तदोष, छर्दि,पित्तविकार, वातरक्त तथा भूतबाधानाशक होता है।
इसकी फल मज्जा प्रवाहिकारोधी,रक्तस्तम्भक, मूत्रल,विरेचक,ज्वरघ्न तथा पाचक होती है।
इसके बीज स्तम्भक तथा ज्वरघ्न होते हैं।
इसके पत्र ज्वरघ्न तथा अर्बुदरोधी होते हैं।
इसकी मूल नियतकालिक अवस्थारोधी होती है।
इसकी मूलत्वक् ज्वररोधी तथा नियतकालिक अवस्थारोधी होती है।
इसे बिक्सा ओरेलाना(Bixa orellana)कहते हैं।यह फेमिली बिक्सेसी (Bixaceae) का सदस्य है और इसका उत्पत्ति स्थान दक्षिणी अमेरिका, मैक्सिको या कैरेबियन देशों को माना जाता है।इसे लिपस्टिक ट्री (Lipstick Tree)भी कहते हैं।

परिचय-भारत के समस्त उष्ण, उष्णकटिबंधीय भागों में मुख्यत दक्षिण बंगाल आसाम तथा मैसूर में इसकी खेती की जाती है। इसके फलों के बाह्य भाग पर सिन्दुर जैसा रजावरण होता है, इसलिए इसे सिन्दुरिया कहते हैं। इसके बीज से प्राप्त लाल रंग का प्रयोग खाद्य पदार्थों को रंगने में किया जाता है।यह 2-6 मी तक ऊँचा,सुंदर,शाखा-प्रशाखायुक्त, बृहत् क्षुप अथवा छोटा सदाहरित वृक्ष होता है।इसके पुष्प श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा सुंगधित होते हैं।इसके फल रक्ताभ-भूरे वर्ण के तथा रक्त वर्ण के गूदे से आवरित होते हैं।

वानस्पतिक नाम:Bixa orellana Linn.(बिक्सा ओरलेना)

Syn-Bixa americana Poir.

कुल:Bixaceae(बिक्सेसी)

अंग्रेज़ी में नाम:Annatto
(अन्नाटो)
संस्कृत-सिन्दुरी,रक्तबीजा, रक्तपुष्पा,सुकोमला; हिन्दी-सिन्दुरिया,लटकन,सदा सुहागन;
असमिया-जरट; उड़िया-गुलबस ;कोंकणी-केसरी; कन्नड़-कप्पूमानकाला,रंगमाले; गुजराती-सिंधूरी,लटकन दाना; तमिल-कूंरुगू–मनजल,जाफर, सपिरा;तेलुगु-जापहर;बंगाली-लटकन; मराठी-केसरी,शेन्द्रा; मलयालम-कूप्पामन्नल।

अंग्रेजी-लिपिस्टिक ट्री(Lipistic tree),अन्नाटो प्लान्ट(Annatto plant)।

त्वक्-विकार-सिन्दुरिया मूल-त्वक् तथा बीजों को पीसकर लेप करने से कुष्ठ तथा पामा में लाभ होता है।
दग्ध-सिन्दुरिया फल मज्जा को पीसकर दग्ध स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
कुष्ठ-सिन्दुरिया बीज तैल को कुष्ठ प्रभावित स्थान पर लगाने से कुष्ठ में लाभ होता है।
व्रण-सिन्दुरिया पत्र को पीसकर व्रण पर लगाने से व्रण का शीघ्र रोपण होता है।

सिंदूरी का कोई भी चिकित्सीय प्रयोग केवल चिकित्सक की देख-रेख व सलाह पर ही करें।

रूमी मस्तगी का परिचय –इसे मस्तगी या मस्तकी आदि नामों से जाना जाता है |अंग्रेजी में Mastic एवं लेटिन में Pistacia lentisc...
26/11/2022

रूमी मस्तगी का परिचय –इसे मस्तगी या मस्तकी आदि नामों से जाना जाता है |
अंग्रेजी में Mastic एवं लेटिन में Pistacia lentiscus Linn. नाम से जाना जाता है |
रूमी मस्तगी के औषधीय गुण धर्म
रस – मधुर एवं कषाय |

गुण – लघु एवं रुक्ष |

विपाक – मधुर

वीर्य – उष्ण |

यह दोष्कर्म में वात एवं पित दोष को दूर करने वाली है | इसके साथ ही मूत्रल (पेशाब लगाने वाली), वृष्य (शक्तिदायक) एवं ग्राही है |
रूमी मस्तगी के फायदे या लाभ
आयुर्वेद के अनुसार इसे विशिष्ट वात नाशक और यौन शक्ति वर्द्धक औषधि माना जाता है | यह यौन दुर्बलता को दूर करने में उत्तम सिद्ध होती है | रूमी मस्तगी के साथ, विदारीकन्द, अकरकरा, लौंग, दालचीनी, सालमपंजा, अश्वगंधा एवं जायफल आदि मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की यौन कमजोरी में फायदा मिलता है ।

इसका 15 फीट तक ऊँचा पेड़ होता है |

मस्तगी के पते सीधे पक्षवत होते है | फल 4 से 8 मिमी व्यास के होते है, आकार में गोल एवं रंग में काले होते है | रूमी मस्तगी के पोधे के तने एवं शाखाओं से गाढ़ा जम्मा हुआ गोंद प्राप्त होता है | इसी गोंद को बाजार में रूमी मस्तगी के नाम से जाना जाता है |
रूमी मस्तगी की पहचान – मस्तकी के पौधे से प्राप्त होने वाले गोंद को ही रूमी मस्तगी के नाम से जाना जाता है | इसकी पहचान के लिए सबसे आसान तरीका है कि यह रंग में कुछ पिताभ श्वेत अर्थात पीलापन लिए हुए सफ़ेद होता है | यह छोटा गोल एवं लम्बा दोनों प्रकार से बाजार में बेचा जाता है |

जब इसे तोड़ा जाता है तब यह रंग विहीन होता है लेकिन स्पर्श मात्र से सफ़ेद चूर्णव्रत मालूम होता है | इसमें हल्की गंध एवं स्वाद में कुछ मीठापन (मधुर) होता है | इसे तोड़ने पर यह कणों में टूटती है एवं बाद में चिपचिपी हो जाती है |

रूमी मस्तगी महंगा होना की वजह से मार्केट में नकली बेचा जाता है इसलिए जांच परख करके ही ले।

रूमी मस्तगी का कोई भी प्रयोग केवल चिकित्सक की सलाह व देख रेख में ही करें |gautam_rishi

रोगी की मूत्र परीक्षा जरूर करनी चाहिए इससे रोग की पहचान करने व रोगी चिकित्सा करने में मदद मिलती है।मूत्रपरीक्षावातेन पाण...
14/11/2022

रोगी की मूत्र परीक्षा जरूर करनी चाहिए इससे रोग की पहचान करने व रोगी चिकित्सा करने में मदद मिलती है।
मूत्रपरीक्षा

वातेन पाण्डुरं मूत्रं पीतं नीलं च पित्तत:
रक्तमेव भवेद्रक्तात् धवलं फेनिलं कफात्

अर्थात्- वायु के प्रकोप में मूत्र का रंग पीला
पित्त के प्रकोप में अत्यंत पीला एवं नीला
रक्तविकार में लाल, और
कफ ‌के प्रकोप में सफेद एवं फेनयुक्त होता है
मूत्र के रंग के आधार पर, दोष समन के लिए
औषधि व्यवस्था करनी चाहिए
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भावप्रकाशसंहिता/पूर्वखण्डः/द्वितीयः भागः/प्रकरणम् ७gautam_rishi

मेवों में संतृप्त वसा कम होती है तथा असंतृप्त वसा अधिक होती है। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नगण्य रहती है किन्तु फाइबर  होते ह...
06/11/2022

मेवों में संतृप्त वसा कम होती है तथा असंतृप्त वसा अधिक होती है। कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नगण्य रहती है किन्तु फाइबर होते हैं। प्रोटीन समृद्ध होने के कारण ये माँसाहारी भोजन का अच्छा विकल्प हैं क्योंकि मेवों में मेवों में अमीनो अम्ल, जैसे आर्जीनिन पाए जाते हैं। ताजे फलों की ही भांति, सूखे मेवा भी विटामिन (विटामिन ए, विटामिन बी१, विटामिन बी२, विटामिन बी३, विटामिन बी६ तथा फॉलिक एसिड), पैंटोथेनिक अम्ल और खाद्य खनिज (कैल्शियम, लौह, मैग्नेशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, सोडियम, ताम्र, मैंगनीज़, सेलेनियम) आदि से परिपूर्ण हो सकते हैं।निर्जलीकरण के कारण इनमें से ७/८ भाग जल-अभाव हो सकता है। इस कारण इनके ताजे फलों के मुकाबले इनका तेज स्वाद भी हो सकता है। निर्जलीकरण के कारण इनका अधिकांश विटामिन सी नष्ट हो चुका होता है। बादाम,अखरोट, काजू, पिस्ता में असंतृप्त वसा पाई जाती है जबकि नारियल तथा खजूर में संतृप्त वसा पाई जाती है। लेकिन नारियल या खजूर को जब कुछ पारंपरिक व्यंजनों में मिलाकर बनाया जाता है तो ये उतने नुकसानदेह नहीं होते।
👉शारीरिक श्रम न करने वाले आराम पसंद लोगों द्वारा मेवे का अधिक मात्रा में सेवन मोटापा बढ़ाता है और अतिरिक्त चर्बी चढ़ने से उन्हें कई प्रकार के रोग लग जाते हैं। अधिकतर मेवे की प्रकृति गरम होती है और ठंडे मौसम में इनका सेवन लाभप्रद होता है। इसके अलावा ज्यादा मेवा खाने से पाचन क्रिया भी बिगड़ सकती है।
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‘न अनौषधं जगति किंचित द्रव्यम् उपलभ्यते ।’ (चरकसंहिता, सूत्रस्थान, अध्याय २६, श्‍लोक १२) का अर्थ जगत में ऐसा कोई द्रव्य ...
21/10/2022

‘न अनौषधं जगति किंचित द्रव्यम् उपलभ्यते ।’ (चरकसंहिता, सूत्रस्थान, अध्याय २६, श्‍लोक १२) का अर्थ जगत में ऐसा कोई द्रव्य नहीं है, जिसका औषधि के रूप में उपयोग किया न जा सकता हो । आयुर्वेद ने वनस्पतियों के गुणों का वर्णन उसके मनुष्य शरीरपर होने वाले परिणामों के आधार पर किया है, उदा. पिप्पली गर्म है, तो आवंला ठंडा है । इसका अर्थ पिप्पली का तापमान अधिक और आंवला का अल्प है, ऐसा नहीं है । वो स्पर्श में गर्म अथवा ठंडे नहीं हैं । गर्म द्रव्य कोशिका में चयापचय की क्रिया को अल्प बढाते हैं, तो शीत द्रव्य चयापचय की क्रिया अल्प बनाते हैं । गर्म द्रव्यों के कारण शरीर की नलिकाएं चौडी होती हैं, तो शीत द्रव्यों से सिकुडती हैं ।आयुर्वेद ने मधुर,खट्टे, नमकीन, तीखे, कटू और कसैले स्वाद वाले अन्न का एवं द्रव्यों के दोष का धातू एवं मलपर कैसे परिणाम होता है, इसका बडा अच्छा वर्णन किया है । आयुर्वेद में बताई गई कई वनस्पतियां गांव में भी मिलती हैं, इसलिए सदैव मिलने वाली वनस्पतियों का रोग निवारण हेतु तथा स्वास्थ्यमय जीवन जीने के लिए कैसे उपयोग करना चाहिए, इसकी जानकारी आयुर्वेद में मिलेगी ।
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केसर,Saffron🌸Hindi name- KesarEnglish name- SaffronArabic name- JafranBengali name- Jafran, KumkumLatin name- Crocus sat...
05/08/2022

केसर,Saffron🌸
Hindi name- Kesar
English name- Saffron
Arabic name- Jafran
Bengali name- Jafran, Kumkum
Latin name- Crocus sativus Linn.
Family- Iridaceae.
Medicinal properties of keshar.
Rasa (Taste) – Katu, Tikta
Guna (Qualities) – Snigdha (Slimy)
Vipaka – Katu (Undergoes pungent taste after digestion)
Veerya (Potency) – Ushna (Hot)
Karma (Actions) Tridoshahara (reduces all the vitiated doshas )
Part used- Stigma/ Stamen
Dosage-
Powder- 0.5 to 1 gm
Uses as per Ayurveda:
Varnya – Improves skin tone and complexion
Kantida – improves skin tone and complexion
Vrana Shodhana – cleanses and disifnects wounds
Doshatrayahara – Balances all the three Doshas

Indicated in –
Hikka – hiccups
Shiroroga – diseases of head, headache
Vami – vomiting
Krumi – worm infestation
Drushtiroga – vision disorders, eye diseases
Visha – Toxic conditions, poisoning
Vyanga – Freckles, melasma
Kasa – Cough, disorders of throat
Varnya – Improves complexion
Deepana – Stimulates digestive fire.

''ऊं नमो भगवते महा सुदर्शनाया वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृत कलश हस्ताय सर्व भय विनाशाय सर्व रोग निवारणाय त्रैलोक्य पतये त्रै...
05/08/2022

''ऊं नमो भगवते महा सुदर्शनाया वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृत कलश हस्ताय सर्व भय विनाशाय सर्व रोग निवारणाय त्रैलोक्य पतये त्रैलोक्य निधये श्री महा विष्णु स्वरुप श्री धन्वंतरि स्वरुप श्री श्री श्री औषध चक्र नारायणाय स्वाहा।''
HAPPY DHANWANTRI DAY 🙏🌱gautam_rishi

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Bhangarh Village,Rajasthan

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