27/11/2022
सिन्दुरी प्राकृतिक सिंदूर जिस पौधे से प्राप्त किया जाता है
आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव
सिन्दुरिया कटु,तिक्त,कषाय, शीत,लघु तथा कफवातशामक होता है।
यह विष,तृष्णा,शिरोरोग, रक्तदोष, छर्दि,पित्तविकार, वातरक्त तथा भूतबाधानाशक होता है।
इसकी फल मज्जा प्रवाहिकारोधी,रक्तस्तम्भक, मूत्रल,विरेचक,ज्वरघ्न तथा पाचक होती है।
इसके बीज स्तम्भक तथा ज्वरघ्न होते हैं।
इसके पत्र ज्वरघ्न तथा अर्बुदरोधी होते हैं।
इसकी मूल नियतकालिक अवस्थारोधी होती है।
इसकी मूलत्वक् ज्वररोधी तथा नियतकालिक अवस्थारोधी होती है।
इसे बिक्सा ओरेलाना(Bixa orellana)कहते हैं।यह फेमिली बिक्सेसी (Bixaceae) का सदस्य है और इसका उत्पत्ति स्थान दक्षिणी अमेरिका, मैक्सिको या कैरेबियन देशों को माना जाता है।इसे लिपस्टिक ट्री (Lipstick Tree)भी कहते हैं।
परिचय-भारत के समस्त उष्ण, उष्णकटिबंधीय भागों में मुख्यत दक्षिण बंगाल आसाम तथा मैसूर में इसकी खेती की जाती है। इसके फलों के बाह्य भाग पर सिन्दुर जैसा रजावरण होता है, इसलिए इसे सिन्दुरिया कहते हैं। इसके बीज से प्राप्त लाल रंग का प्रयोग खाद्य पदार्थों को रंगने में किया जाता है।यह 2-6 मी तक ऊँचा,सुंदर,शाखा-प्रशाखायुक्त, बृहत् क्षुप अथवा छोटा सदाहरित वृक्ष होता है।इसके पुष्प श्वेत अथवा गुलाबी वर्ण के तथा सुंगधित होते हैं।इसके फल रक्ताभ-भूरे वर्ण के तथा रक्त वर्ण के गूदे से आवरित होते हैं।
वानस्पतिक नाम:Bixa orellana Linn.(बिक्सा ओरलेना)
Syn-Bixa americana Poir.
कुल:Bixaceae(बिक्सेसी)
अंग्रेज़ी में नाम:Annatto
(अन्नाटो)
संस्कृत-सिन्दुरी,रक्तबीजा, रक्तपुष्पा,सुकोमला; हिन्दी-सिन्दुरिया,लटकन,सदा सुहागन;
असमिया-जरट; उड़िया-गुलबस ;कोंकणी-केसरी; कन्नड़-कप्पूमानकाला,रंगमाले; गुजराती-सिंधूरी,लटकन दाना; तमिल-कूंरुगू–मनजल,जाफर, सपिरा;तेलुगु-जापहर;बंगाली-लटकन; मराठी-केसरी,शेन्द्रा; मलयालम-कूप्पामन्नल।
अंग्रेजी-लिपिस्टिक ट्री(Lipistic tree),अन्नाटो प्लान्ट(Annatto plant)।
त्वक्-विकार-सिन्दुरिया मूल-त्वक् तथा बीजों को पीसकर लेप करने से कुष्ठ तथा पामा में लाभ होता है।
दग्ध-सिन्दुरिया फल मज्जा को पीसकर दग्ध स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
कुष्ठ-सिन्दुरिया बीज तैल को कुष्ठ प्रभावित स्थान पर लगाने से कुष्ठ में लाभ होता है।
व्रण-सिन्दुरिया पत्र को पीसकर व्रण पर लगाने से व्रण का शीघ्र रोपण होता है।
सिंदूरी का कोई भी चिकित्सीय प्रयोग केवल चिकित्सक की देख-रेख व सलाह पर ही करें।