MERAJ Medical HALL

MERAJ Medical HALL A retail shop which provides prescription drugs, among other products..

15/09/2024

एक कहानी के माध्यम से मुफ्त की चीज़े क्यू नही लेना चाहिए _

एक गरीब लड़का था। इतनी बड़ी दुनिया में उसका कहीं कोई नहीं था। न माता-पिता, न भाई-बहन। पर वह लड़का बड़ा परिश्रमी था। एक बार उसकी मेहनत से प्रसन्‍न होकर एक किसान ने उसे एक बैल दे दिया। लड़के ने सोचा, बैल से किसी बंजर ज़मीन को जोतूंगा और उस पर कोई फसल उगाने की कोशिश करूंगा। वह बैल लेकर चल पड़ा।

गर्मी के दिन थे। लड़के के बदन पर न कपड़े थे और न पैरों में जूते। फिर भी वह अपनी धुन में बैल हांकता चला जा रहा था। अचानक उसे लगा, जैसे कोई उसे पुकार रहा है। उसने मुड़कर देखा तो तीन व्यक्ति शरारत से मुस्कराते खड़े थे। लड़के ने उनसे पूछा-“आपने मुझे पुकारा था? क्या कोई काम है?”
उनमें से एक व्यक्ति ने कहा-“तुम यह बकरा कहां लिए जा रहे हो?”
लड़का चौंक उठा-“बकरा! यह बकरा नहीं, बैल है।”

वह व्यक्ति ठठाकर हंस पड़ा और अपने साथियों से बोला-“देखा इस पागल को! यह बकरे को बैल बता रहा है। ज़रूर इसने कोई नशा कर रखा है।”

उसकी बात सुनकर दूसरे व्यक्ति ने कहा–“और बकरा भी कैसा, बिलकुल मरियल। कोई कौड़ी को भी न पूछे ।”

तीसरा व्यक्ति बोला-“पर हमें इस बेचारे की सहायता करनी चाहिए। चार-पांच रुपयों में यह बकरा खरीद लेना चाहिए ।”

यह सुनते ही पहले व्यक्ति ने टेंट से पांच रुपए निकाले और लड़के के हाथ में थमाते हुए बैल की रस्सी छीन ली। वह लड़का बेचारा कुछ समझ भी नहीं पाया कि क्या करे, क्‍या कहे! वह अकेला था और वे थे तीन। वह यह भी समझ गया था कि वे तीनों मिलकर उसे बेवकूफ बना रहे हैं। वह यह भी जान गया था कि ज्यादा चूं-चपड़ करने पर वे तीनों उसे पीटने लगेंगे और मुफ्त में ही बैल लेकर चल देंगे। सो उसने उस समय चुपचाप रहना ही उचित समझा।

वे तीनों व्यक्ति बैल लेकर चल पड़े। वे अभी थोड़ी ही दूर पहुंचे होंगे कि वह लड़का भागता-भागता उनके पास आया। उसने कहा-“आप लोग बहुत दयालु हैं। मेरे मरियल बकरे को सचमुच कोई न पूछता, पर आपने उसके पांच रुपए दे दिए। आपसे बढ़कर सज्जन मुझे कहां मिलेंगे। मेरा दुनिया में कोई नहीं है। यदि आप लोग मुझे नौकर रख लें तो मेरे कुछ दिन सुख से कट जाएंगे।”

तीनों व्यक्तियों ने सोचा, यहां तो मुफ्त में ही नौकर मिल रहा है। उन्होंने उसे अपने साथ ले लिया।

लड़का बड़ा मेहनती था। कुछ ही दिनों में उसने तीनों का विश्वास जीत लिया। वह उनके सारे काम करता। घर-खर्च और पैसों का भी पाई-पाई हिसाब रखता। तीनों उससे बड़े खुश थे।

एक दिन वह लड़का एक विचित्र-सी टोपी लगाए घर लौटा। उसकी तीन नोकों वाली टोपी देखकर तीनों व्यक्ति हंस पड़े। वे बोले-“यह जोकरों की टोपी कहां से ले आया है?”

पर लड़का गंभीर बना रहा। उसने कहा-“यह टोपी जोकरों की नहीं है। यह एक करामाती ताज है। इसे पहनकर बाज़ार में हर चीज़ मुफ्त ली जा सकती है। इसी के कारण तो मैं आपसे अपने खर्च के लिए कुछ लेता नहीं ।”

तीनों व्यक्तियों को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ है, यह देखकर लड़के ने कहा-“आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है। कल बाज़ार में चलिएगा और इस ताज की करामात स्वयं देखिएगा।”
तीनों व्यक्तियों ने हामी भर दी और अपने काम-धंधे पर निकल गए।

उधर वह लड़का वही टोपी पहनकर बाज़ार चला गया। उसने तीन बड़ी दुकानें चुनीं। फिर उनके मालिकों को बड़ी-बड़ी रकमें देकर बोला-“कल मैं अपने तीन मेहमानों के साथ आऊंगा। पहचान के लिए यही टोपी पहने रहूंगा। वे जो-जो खाएं-पिएं, जो मांगें, देना, पर एक पैसा भी नहीं मांगना। यह पेशगी रकम लो। बाद में मैं हिसाब कर लूंगा ।”

दुकानदारों को इसमें क्या आपत्ति होती! लड़के का भी इसमें कोई नुकसान नहीं था। उसने वह रकम उन तीनों व्यक्तियों की एक गुप्त-गुल्लक में से निकालकर दी थी।

दूसरे दिन सुबह वह तीनों व्यक्तियों को लेकर बाज़ार में पहुंचा। तब तक बाज़ार में उसके पेशगी रकम देने की बात फैल चुकी थी। सबने उसे कोई सिर-फिरा रईस समझ लिया था। इसलिए जिस दुकान के सामने से वह निकल जाता, उसका मालिक सिर झुकाकर अदब से खड़ा हो जाता। सारे बाज़ार का चक्कर लगाने के बाद वह लड़का उन्हें एक बड़ी दुकान में ले गया। यहां खाने-पीने की बड़ी स्वादिष्ट चीज़ें रखी थीं। चारों ने छककर भोजन किया। भोजन करने के बाद लड़का उठा। उसके साथ तीनों व्यक्ति भी उठ खड़े हुए। जब वे बाहर जाने लगे तो दुकान का मालिक हाथ जोड़कर उठ खड़ा हुआ। वह बोला-“फिर कभी ज़रूर पधारिएगा। दुकान आपकी ही है।”

लड़का मुस्कराकर रह गया। दुकान के आइने में उसने अपनी विचित्र टोपी कुछ ठीक की और फिर दुकान के बाहर हो गया। तीनों व्यक्तियों की तो आंखें फटी रह गईं। उन्होंने सपने में भी टोपी के चमत्कारी होने की बात नहीं सोची थी। वे अभी सोच-विचार में डूबे ही थे कि लड़के ने कहा-“आइए, अब और कहीं चलें।”

तीनों व्यक्ति चुपधाप उसके पीछे हो लिए। वह लड़का दिनभर उन्हें बाज़ार में घुमाता रहा। दोपहर में वह उन्हें एक और होटल में खाना खिलाने ले गया। शाम को भी उसने उनकी इसी तरह खातिरदारी की। तीनों व्यक्तियों को तो जैसे सब-कुछ सपना-सा लग रहा था। जहां भी वह लड़का टोपी पहने जाता, वहीं उसकी बड़ी आवभगत होती।

रात को वे घर लौटने लगे। राह में उन तीनों व्यक्तियों ने वह चमत्कारी टोपी खरीदने का निश्चय किया और घर पहुंचते ही वह उस लड़के से टोपी खरीदने की बात चलाने लगे। लड़के ने टोपी बेचने से इनकार कर दिया। वह बोला-“मेरे पास यही तो एक पैतृक संपत्ति है। मैं इसे किसी भी कीमत पर नहीं बेचूंगा ।”

उधर तीनों व्यक्तियों ने किसी भी तरह वह टोपी हथियाने का निर्णय कर लिया था। उन्होंने हाथ जोड़कर उसकी चिरौरी की, अपना सब-कुछ देकर भी टोपी खरीदने की उतावली दिखाई तो लड़के ने कहा-“आप लोग मुझे इतना लज्जित न करें। मैं आपको यह टोपी दे दूंगा।”

उसी रात तीनों व्यक्तियों ने अपनी सारी संपत्ति लड़के को थमाकर उससे टोपी ले ली। लड़का उनका सारा माल-असबाब अपने उसी बैल पर लादकर चल पड़ा और रातों-रात बहुत दूर निकल गया।

सुबह हुई और तीनों व्यक्ति टोपी की बदौलत बाज़ार-का-बाज़ार खरीदने के लिए चल पड़े बाज़ार पहुंचने पर वे पहले उसी दुकान में गए, जहां एक दिन पहले उस लड़के ने उन्हें छककर भोजन कराया था। टोपी के कारण दुकान का मालिक उन्हें फौरन पहचान गया। उसने उठकर उनकी आवभगत की और स्वयं खाने-पीने की चीज़ें ला-लाकर उनके सामने रखता गया। तीनों व्यक्तियों ने सोचा, टोपी अपना कमाल दिखा रही है। उन्होंने खूब छककर खाना खाया, फिर डकार लेते हुए उठ खड़े हुए। जब वे बिना पैसे दिए बाहर जाने लगे तो दुकानदार ने कहा-“जनाब, पैसे तो देते जाइए ।”

तीनों व्यक्ति तमक उठे-“पैसे, पैसे किस बात के ?” और यह कहते हुए उनमें से एक ने टोपी दुकानदार की आंखों के सामने नचा दी। दुकानदार काफी मोटा-तगड़ा था। वह अकेला ही तीनों के लिए काफी था। उसने लपककर टोपी वाले व्यक्ति की गर्दन पकड़ ली और बोला-“अब बताऊं तुझे पैसे किस बात के?”

तीनों व्यक्ति बड़े सकपकाए। उनमें से एक ने जल्दी-जल्दी पैसे देकर अपना पिंड छुड़ाया और दुकान से बाहर हो गए।

बाहर आकर वे आपस में झगड़ने लगे। टोपी पर उन्हें अभी भी विश्वास था। दो व्यक्तियों ने अपने तीसरे साथी से कहा-“’तुमने टोपी हाथ में ले रखी थी, इसी कारण उसका असर नहीं हुआ। तुम इसे सिर पर पहनो।”

तीसरे व्यक्ति को इस बात में सच्चाई लगी। उसने टोपी सिर पर रख ली। उसे बड़ी शर्म मालूम पड़ रही थी, पर क्या करता! अब वे तीनों फिर एक दुकान में गए। वहां भी उन्होंने मनचाही चीज़ें खरीदीं। जब वे उनकी गठरी बांधकर चलने लगे तो दुकानदार ने उनसे चीज़ों के दाम मांगे। तीनों व्यक्तियों को कुछ सूझ न पड़ा। घबराहट में टोपी पहना व्यक्ति दूकानदार के सामने आकर अपना सिर हिलाने लगा ताकि दुकानदार टोपी से प्रभावित हो जाए। पर इसका उल्टा असर हुआ। दुकानदार ने उसे जो थप्पड़ मारा तो टोपी उड़कर भट्ठी में जा गिरी और क्षणभर में जलकर राख हो गई।टोपी को इस तरह भस्म होते देखकर तीनों व्यक्ति चीख-चीखकर विलाप करने लगे।

28/08/2024

تمہارا خدا تمہارا خوف ھے. وہ تمھارے خوف کا ھی ایک روپ ھے۔ جب تم خوفزدہ ہوتے ہو تو تب تم یاد کرتے ہو اور جب خوف نہیں رہتا تو تم بھول جاتے ہو.
جب تم سُکھی ھوتے ھو اس کی یاد ہی نہیں آتی. جب دکھ گھیر لیتے ہیں تو ایک دم " خدا, خدا" رٹنے لگتے ھو ۔
نہیں تم خدا کو نہیں مانتے !!!
تمہارا ماننا تمہاری ہوشیاری ھے ، تمہاری چالاکی ھے ، تمہارا ماننا تمہارے دل کی آواز نہیں تمہاری ضرورت اور خواہش ہی کی گونج ھے ۔
جب تمہیں ضرورت پڑتی ہے تم ماننے والے بن جاتے ھو ۔
جب ضرورت پوری ہو جاتی ھے ، تو تمہارے ایمان کا پول کھُل جاتا ھے ۔

گرو رجنیش ( اوشو )

06/03/2024

Although the natural order of things is to breathe through the nose, many children—especially those with asthma or nasal congestion—habitually breathe through the mouth. Children who regularly breathe through their mouth tend to develop negative alterations to their face, jaws, and the alignment of their teeth. Mouth breathing affects the shape of the face in two ways. First, there is a tendency for the face to grow long and narrow. Secondly, the jaws do not fully develop and are set back from their ideal position, thus reducing airway size. If the jaws are not positioned forward enough on the face, they will encroach on the airways. See for yourself: Close your mouth, jut out your chin, and take a breath in and out through your nose, noting the way air travels down behind the jaws. Now do the same but pull your chin inward as far as you can—you will probably feel as if your throat is closed up as you try to breathe. This is exactly the effect poorly developed facial structure has on your airway size. It is no wonder that those with restricted airways tend to favor mouth breathing.
The forces exerted by the lips and the tongue primarily influence the growth of a child’s face. The lips and cheeks exert an inward pressure on the face, with the tongue providing a counteracting force. When the mouth is closed, the tongue rests against the roof of the mouth, exerting light forces that shape the top jaw. Because the tongue is wide and U-shaped, it follows that the shape of the top jaw should be wide and U-shaped also. In other words, the shape of the top jaw reflects the shape of the tongue. A wide U-shaped top jaw is optimal for housing all our teeth.
However, during mouth breathing, it is very unlikely that the tongue will rest in the roof of the mouth. Try it for yourself: Open your mouth and place your tongue on your upper palate. Now try to breathe through your mouth. While it is possible to draw a wisp of air into the lungs, it will not feel right. It follows therefore that the tongue of a mouth breather will tend to rest on the floor of the mouth or suspended midway. Since the top jaw is not then shaped by the normal pressures of the tongue, the end result is the development of a narrow V-shaped top jaw. Aesthetically, this contributes to a narrowing of the facial structure, crooked teeth, and orthodontic problems. It has been well documented that mouth-breathing children grow longer faces.
The second way facial structure is affected by the way we breathe during childhood is the position of the jaws. The way the jaws develop has a direct influence on the width of the upper airways. Our upper airways comprise the nose, nasal cavity, sinuses, and throat. Strong athletic performance requires large upper airways that enable air to flow freely to and from the lungs.
The normal growth of the face is forward. Since a mouth-breathing child does not rest his or her tongue in the roof of the mouth, the jaws are unable to be properly shaped by the tongue, and the natural forward growth of the jaws is impeded. This results in jaws that are set back from their ideal position, compromising airflow. For the correct development of the lower half of the face and airways, it is imperative that a child habitually breathes through his or her nose. Breathing through the nose with the tongue resting in the roof of the mouth helps to establish the ideal conditions for the normal development of the face.
In the correct resting position, three-quarters of the tongue should press gently against the roof of the mouth with the tip of the tongue placed just behind the top front teeth—the same place we put the tongue to make the N sound “nuh.”
A 2012 study investigating the long-term changes to facial structure caused by mouth breathing noted that this seemingly “benign” habit “has in fact immediate and/or deferred cascading effects on multiple physiological and behavioral functions.” Infants and children who breathe through their mouths due to nasal obstruction are likely to develop crooked teeth and a longer, narrower face, permanently affecting their appearance. Mouth breathing also has a significant impact on the health of the child, including restriction of the lower airways, poor quality of sleep, high stress levels, and a lower quality of life. Research has suggested that habitual mouth breathing may even be connected to sudden infant death syndrome.

This excerpt is taken from
The Oxygen Advantage
By McKeown Patrick

21/02/2024
Every minute someone leaves this world behind.We're all in "the queue" without knowing it.We will never know how many pe...
01/11/2023

Every minute someone leaves this world behind.
We're all in "the queue" without knowing it.
We will never know how many people are ahead of us.
We can't move to the bottom of the row.
We can't get out of line.
We can't avoid the queue.
So while we wait in line.
Make the moments count!
Make priorities.
Make the time.
Let your qualities be known.
Make people feel important.
Make your voice heard.
Make big things out of small things.
Make someone smile.
Make the change.
Make love.
Make Peace.
Get it together.
Make sure you tell your people you love them.
Make sure you have no regrets.
Make sure you're ready.
Very true.
Live life and let live, enjoy, be grateful,
don't waste time arguing,
fighting in doing bad things life is short,
live it,
be humble,
love yourself and be happy with what you have.

Early Biological History of Women:205 Million Years Ago: mammal Morganucodon sweated beads of milk filled with water, su...
20/10/2023

Early Biological History of Women:

205 Million Years Ago: mammal Morganucodon sweated beads of milk filled with water, sugars, and lipids from her skin for her offspring to slurp.

190 Million Years Ago: A Ni**le was born

65 Million Years Ago: A Womb was born

62-63 Million Year Ago: explosion of placental diversity

Women evolved to hear higher pitches of children than men, and have superior olfactory abilities.

8-4 Million Years Ago: Ardipithecus ramidus Bipedal women roamed in Africa

2.4 Million Years Ago: Homo habilis Women started using tools

1.75 Million Years Ago: Homo Erectus Women started to leave Africa.
~ courtesy Raza Rizvi

20/10/2023

Let's begin with a question
What is happiness?
Mostly we say I am happy because I purchased my dream car or I am happy because I gonna marry my favourite person. We link happiness with situations like "I am happy" is an emotion caused by "new car". It means new car is ultimate happiness so what happens when BMW launches new model why we run towards new model instead of having second latest model? And why we find other people attractive after having marry?
It means happiness is not marry or car even not the linked objects. Happiness is a subjective feeling rather than object one. Most of us mix happiness with situations but happiness does not depend objective situations but it is because of our psyche. Basic concept is our happiness is control by unconscious mind. Wait what is unconscious mind? If we cut brain as well body and research, zoom with microscopes in cells we would have no mind. There is alo no mind in the brain so what mind is? Mind does not exist because it is an ancient Greek concept that soul is mind or mind is soul. Today we have biologically and neurological proved that mind doesn't exist. We made unconscious mind concept because some things or unconscious behaviours were unable to understand by Freud. So he maintained that unconscious mind is controlling our happiness and anger and all complex behaviours.
The question remains what is happiness? Mind and unconscious mind does not exist so how we get happiness and lose it suddenly. Brain which controls all the functions also control happiness. We need a stimulation for being happy. For example footballer who goaled suddenly jump with luaghs because he is happy. In this example footballer goaled, in his brain different hormones release like serotonin and dopamine in high amount, heart beat faster, blood runs fast, body starts release heat, energy level up because of high level of glucose is releasing and footballer jumps. This is the anatomy of happiness. Happiness is not cause by our actions and we are not free to being happy but it is formed by natural selection. For example our ancestors survived by doing different actions and those different actions satisfied them and make them happy like eating, it is enjoying to eat food after eating food we are sure we have done and nkw we are enough energetic and safe from starvation. The same scenario is with intercourses, we feel joy while ej*******ng whole of the pain or fear is for feeling joy of ej*******on if there were no joy while ej*******on human probably never done intercourses.
So, the happiness is based on chemicals not mind and actions we can control it and of course control it. The ultimate happiness is called prosperity. We usually fimd prosperity. Prosperity is well defined by Buddha. Buddha says after practice practice practice there is a level of happiness which does not need any stimulate. He says real happiness is without any stimulation.
Now happiness is based on chemicals not situation the basic idea is. Look footballer's fundamental brain structures or neurons does not know what is goal but they are activated as the find stimulation and release hormones to feel a person happy. For example opposing team members would get sad because of goal same thing is here they brain basic structure does not know about goal but situational hormones make it sad.

16/10/2023

The trust between a patient and a doctor is sacrosanct. Doctors who abuse that trust and prescribe medicines that are either not needed or are potentially harmful with a view to favour pharmaceutical companies that buy them lavish gifts and send them on holiday locations in the guise of medical conferences are the worst criminals.

“Pain Killer”, on Netflix, is a gripping series that tells the true story of a pharmaceutical company that sold a painkiller called OxyContin, which contained a heavy dose of heroine, that killed nearly 300,000 people.

No movie I have watched has portrayed so convincingly the horrendous consequences of drug abuse – family breakups, deaths due to overdosing, traffic accidents due to driving while high, addicts looting pharmacies or selling precious possessions at throw-away prices to buy drugs, etc.

I'm not a film critic and I do not know how to review a film without being a spoiler.

If you are a lover of good movies, don’t miss it.

Anthelmintic or anti-worm medicines are drugs that are used to treat infections by parasitic worms. These drugs work by ...
02/09/2023

Anthelmintic or anti-worm medicines are drugs that are used to treat infections by parasitic worms. These drugs work by either killing the worms or preventing them from growing and multiplying. There are a variety of anthelmintic drugs available, and they can be used to treat infections caused by different types of worms.

Mebendazole and albendazole are two of the most common anthelmintic drugs. These drugs are classified as vermicide drugs, which means that they kill the worms. Mebendazole and albendazole work by poisoning the worms.

Mebendazole is a broad-spectrum anthelmintic drug that is effective against a wide range of parasitic worms. Mebendazole is available as a tablet, chewable tablet, suspension, and suppository. Mebendazole is usually taken two or three times a day for three to seven days.

Albendazole is another common anthelmintic drug. Albendazole is available as a tablet, suspension, and chewable tablet. Albendazole is usually taken once a day for three to seven days.


https://www.refillonlinepharmacy.com/antihelminthic-antiworm-medication

Blood test and their normal values
30/08/2023

Blood test and their normal values

Posting this just as much as a reminder to myself as to anyone else.Our devices are good servants but bad masters.Let’s ...
04/08/2023

Posting this just as much as a reminder to myself as to anyone else.
Our devices are good servants but bad masters.
Let’s be conscious with their use - especially in the presence of our children's ❤️

Address

Jhumri Telaiya
825409

Opening Hours

Monday 9am - 6pm
Tuesday 9am - 6pm
Wednesday 9am - 6pm
Thursday 9am - 6pm
Friday 9am - 6pm
Saturday 10am - 2pm

Telephone

+917717732115

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when MERAJ Medical HALL posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to MERAJ Medical HALL:

Share