25/12/2025
अरावली को बचाइए: हमारी प्राचीन पारिस्थितिक ढाल की रक्षा करें
क्या हो रहा है?
हाल ही में आए एक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में अरावली पहाड़ियों की एक नई परिभाषा को स्वीकार किया गया है, जिसके अनुसार केवल वही भू-आकृतियाँ अरावली मानी जाएँगी जो अपने आसपास की भूमि से 100 मीटर या उससे अधिक ऊँची हों। यह बात भले ही तकनीकी लगे, लेकिन इसका असर बहुत गहरा है — क्योंकि अरावली का लगभग 90% हिस्सा इस ऊँचाई से कम है, और इससे उसका बड़ा भाग पर्यावरणीय संरक्षण से बाहर हो सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और दिल्ली-एनसीआर तथा आसपास के क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा की तरह है। इसकी छोटी पहाड़ियाँ और ढलान भी अत्यंत महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाती हैं:
ये भूजल recharge करती हैं और मरुस्थलीकरण को रोकती हैं
ये दिल्ली-एनसीआर शाहिद पूरे उत्तर भारत के लिए प्राकृतिक वायु शुद्धिकरण और तापमान संतुलन का काम करती हैं
ये वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण गलियारे प्रदान करती हैं
ये गाँवों और कृषि भूमि को धूल भरी आँधियों और भूमि क्षरण से बचाती हैं
यदि इन क्षेत्रों से संरक्षण हटा दिया गया, तो बड़े पैमाने पर खनन और निर्माण कार्य कानूनी रूप से संभव हो सकता है, जिससे पर्यावरण और लाखों लोगों के जीवन पर अपूरणीय प्रभाव पड़ेगा।
आपको इस याचिका पर हस्ताक्षर क्यों करने चाहिए?
अरावली की ऐसी वैज्ञानिक और पर्यावरण-सम्मत परिभाषा की माँग करने के लिए, जो केवल ऊँची चोटियों ही नहीं बल्कि सभी महत्वपूर्ण पहाड़ियों और ढलानों को संरक्षित करे
पर्यावरण के लिए संवेदनशील क्षेत्रों को खनन और व्यावसायिक दोहन के लिए खोलने वाले कानूनी रास्तों को रोकने के लिए
दिल्ली-एनसीआर की हवा, पानी, भूजल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए
आपका एक हस्ताक्षर नीति-निर्माताओं को इस निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि अरावली आने वाली पीढ़ियों तक हमारे क्षेत्र की रक्षा करती रहे।
Sign the petition
https://www.savearavali.org/petitions/defend-aravalli-hills?thank-you
Dr Amit Angiras (Yoga is the realization of your real ultimate self)