Cybocare Homeopathic Clinic

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Cybocare Homeopathic Clinic Ideal cure by HOMEOPATHIC . Totality of symptoms are giving the best result. A fully computerized HO

18/01/2025

*** असाध्य गंभीर रोगों का कारण और निवारण***

शरीर की 95% इम्युनिटी आपका स्वस्थ पाचन तंत्र और हाईड्रेटिड और एल्कलाइन शरीर है

जीवन के मुख्य अंगो की कार्यप्रणाली को विष और बाधा से मुक्त रखो बड़े से बड़ा और असाध्य रोग ठीक हो जाएगा

कब्ज कोई बीमारी नहीं हमारे पाचन तंत्र को ओवरलोड कर क्षीण करने की अवस्था है जो देर रात खाने, खूब चबाकर न खाने, अधिक तलाभुना खाने, गरिष्ठ भोजन से, तथा अधिक चीनी वाले मीठे और मैदे के भोजन करने से जाम हो गई आंतों की वजह से होता है।

खाने में खूब सलाद लें जो अच्छे से चबा चबाकर खाना है।

जब तक लीवर आंतों पेट को आराम नहीं दोगे ये पाचन तंत्र खुद को कभी रिपेयर नहीं कर पाएगा
रंगे सियार तुम्हें दवा दे देकर कैंसर का भावी मरीज बना देंगे सुधर जाओ

उपचार - भूख से आधा खाओ लेकिन बहुत चबा चबाकर क्योंकि जिसने दांतों का काम आंतों से लिया उसका पाचनतंत्र विनाश तय है,
खाने के साथ दूध या पानी बिलकुल मत पियो इससे पाचक रस घुलकर कमजोर हो जाते हैं और खाना लेट पचेगा,
रात्रि भोजन न के बराबर करें,
कब्ज रोगी आधा चम्मच त्रिफला लीजिए,
सुबह थोड़ा व्यायाम अवश्य करें, गुनगुना पानी पिएं

शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन यानी बॉडी का पी एच लेवल जो शरीर को स्वस्थ रहने के लिए संतुलन बनाए रखने होते हैं जैसे ब्लड प्रेशर, ऑस्मॉसिस, पानी, और मिनरल्स का संतुलन।

एक और महत्त्व संतुलन है एसिड और बेस अल्कली का संतुलन। एसिड-अल्कली का संतुलन शरीर में बेहद ज़रूरी है।

हमारे शरीर का सामान्य पीएच 7 से थोड़ा अधिक होना चाहिए अर्थात् थोड़े से अल्कलाइन वातावरण में हमारे सेल्स स्वस्थ रहकर अपना काम सही ढंग से करते हैं।
लेकिन आजकल हम सभी के शरीर में एसिड बढ़ता जा रहा है। एसिड की बढ़ी हुई इस अवस्था को मेटाबॉलिक एसिडोसिस कहते हैं।

कोशिकाओं के आसपास बढ़ते इस एसिड के कारण वह कैंसर सेल्स में बदल सकती हैं। यानी जो कोशिकाएं एसिडिटी के माहौल में जीना सीख जाती हैं वो कैंसर सेल्स में बदलने लगती हैं

ब्लड में जब एसिड की मात्रा बढ़ती है तो ये कई तरह के ब्लॉकेज उत्पन्न करता है जो कि लकवा,वेरीकोस वेन्स और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं उत्पन्न करते है।

बढ़े हुए एसिड को नियंत्रित करके इन समस्याओं से बचा जा सकता
वातावरण में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर बढ़ना क्योंकि सांस लेने पर यह बढ़ी हुई कार्बन डाइ ऑक्साइड रक्त के पीएच को कम कर देती है।

शरीर से एसिड के उत्सर्जन का कार्य मुख्य रूप से फेफड़ों और किडनी का है, यदि यह दो अंग ठीक से काम नहीं करते हैं तो भी शरीर में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। अत: मेटाबॉलिक एसिडोसिस के उपचार के समय इन दोनो अंगों का खास ख्याल रखना चाहिए।

भोजन में सब्ज़ियों, फ्रूट्स और मेवों की कमी और इसकी जगह नॉनवेज, शुगर, अल्कोहल, रिफाइंड तेल और आटे का ज्यादा प्रयोग यह सभी मिलकर शरीर में एसिड की बढ़ोतरी करते हैं और इसी वजह कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

एसिड अधिक होने से अल्कलाइन मेटल्स जैसे पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर खून में कम होना ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है।

एसिडिक वातावरण किडनी में स्टोन का निर्माण करता है, क्योंकि बढ़े हुए एसिड को कम करने के लिए उसे हड्डियों से कैल्शियम निकालना पड़ता है और यह कैल्शियम किडनी में जाकर जमा हो जाता है और पथरी या स्टोन्स बनाता है।

हड्डियों से कैल्शियम के निकलने से वे कमज़ोर हो जाती हैं और यह ऑस्टियोपोरोसिस नामक रोग उत्पन्न करती हैं।

एसिड बढ़ने से सेल्स जल्दी-जल्दी मरने लगते हैं, इसलिए बुढ़ापा शीघ्र आ जाता है।
बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं, झुर्रियां आने लगती हैं, इम्युनिटी कम होने लगती है और थकान भी जल्दी होने लगती है।

एसिड दांत , मसूड़ों की तकलीफ भी बढ़ाते हैं, जिससे वे जल्दी खराब होने लगते हैं।

दिमाग की क्रियाविधि प्रभावित होना
एसिड बढ़ने से आरबीसीएस की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता में कमी आ जाती है।
कम ऑक्सीजन मिलने से दिमाग अपने कार्यों को करने में दिन प्रतिदिन कमजोर होता चला जाता है।

ये उपाय अचानक हृदयाघात, कैंसर , असाध्य चर्मरोग या गंभीर रोगों से बचाव का ब्रह्मास्त्र है

फैसला आपका

एक मुट्ठी हरा पत्ता :- पालक या बथुआ या चौलाई या मोरिंगा (सहजन) गेहूं ज्वारा या जिसका भी हरा साग बनाते हैं

एक मीठा फल :- सेब या अनार, या आम या अमरूद या मीठे अच्छे से धोएं एक मुट्ठी अंगूर या दो चीकू या नाशपाती या बबूगोसा

आधा मुठ्ठी भर धनिया आधा मुठ्ठीभर पुदीना
आधा मुठ्ठी भर कढ़ी पत्ता
एक टुकड़ा चुकंदर दो आंवले
एक टुकड़ा अदरक या कच्ची हल्दी
एक टमाटर एक खीरा

इन सबको थोड़ा पानी डालकर मिक्सर ग्राइंडर में अच्छे से पीस लीजिए
स्मूदी तैयार
समस्त जीवन अंगों :-
आंतों किडनी लीवर हृदय मस्तिष्क फेफड़ों के लिए जीवनदायिनी

हर रोग दोष विष स्वास्थ्य परेशानी में हर एक कोशिका को पोषण और आक्सीजन देने में इससे उत्तम उपाय न है दूसरा
एक नींबू निचोड़ सकते हैं चाहें तो
सुबह निराहार पिएं फिर एक घंटा कुछ भी खाना पीना नहीं।।

03/07/2024

*🔥पनीर आधुनिक युग में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण🔥*
🔥🌈🩷🏵️💐🚩💐🏵️🩷🌈🔥
जब गहराई से इसकी पड़ताल की तो पता चला कि
*आयुर्वेद में पनीर को निकृष्टतम भोजन के रूप में बताया गया है।*,
बोले तो कचरा और कचरा भी ऐसा वैसा नहीं,
*ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है*।
दूध को फाड़ कर या दूध का रूप विकृत करके पनीर बनता है,
जैसे कोई सब्जी सड़ जाए तो क्या उसे खाएंगे ?
*पनीर भी सड़ा हुआ दूध है,*
*भारतीय इतिहास में कहीं भी पनीर का उल्लेख नहीं है*
और *न ही ये भारतीय व्यंजन है।*,
क्योंकि *भारत में प्राचीन काल से ही दूध को विकृत करने की मनाही रही है*।
आज भी ग्रामीण समाज में घर की महिलाएं अपने हाथ से कभी दूध नहीं फाड़ती!
*पनीर खाने के नुकसान*,
आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि *विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है*, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि
पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव आता है। जिससे पाचन संबंधित रोग होते हैं।
*पनीर में पाया जाने वाले प्रोटीन पचाने की क्षमता जानवरों में भी नहीं होती है*
फिर मनुष्य उसे कैसे पचा सकता है !
*नतीजा होता है खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर शुगर,*
*कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर और यही पनीर पेट की खतरनाक बीमारी IBS को भी पैदा करता है।*
ज़्यादा पनीर खाने से खून में थक्के जमने की शिकायत होती है, जो ब्रेन हैमरेज और हार्ट फेलियर का कारण बनता है।
वहीं ये पनीर हार्मोनल डिसबैलेंस का कारण बनता है, जिससे हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म पनपता है,
*महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता कम होती है।*
कुल मिला कर यदि देखा जाए तो *ये पनीर लाभ तो केवल जीभ को देता है, लेकिन हानि पूरे शरीर की करता है,*
*पर कढ़ाई पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, चिली पनीर और भी न जाने क्या क्या पनीर....*
समोसे में पनीर, पकौड़ी में पनीर, पिज्जा में पनीर, बर्गर में पनीर,
*मतलब जहां देखो वहां पनीर, पनीर पनीर*।
भारत में शायद जितना दूध पैदा नहीं होता उससे ज़्यादा पनीर बनता होगा। भारतीय लोग तो पनीर के इतने दीवाने हो चुके हैं कि इन्हें जहां पनीर मिल जाता है बहुत ही मजे से चाप लेते हैं,
होटल में गए तो बिना पनीर खाये इनके गले से निवाला नहीं निगलता।
*चिकित्सा विज्ञान में सबसे प्राचीन विधा आयुर्वेद में*
*दूध, दही, घी का जिक्र हर जगह है*
*किन्तु इस नामुराद पनीर का जिक्र कहीं नहीं मिलता, आखिर क्यों ?*

अतः ज्यादा कुछ नहीं तो कम से कम बाजार के पनीर से बचें और घर बनाएँ। मिलावट से तो बचेंगे।
*यदि पनीर इतना ही अच्छा है तो इसके बारे में किसी ऋषि ने कुछ लिखा क्यों नहीं ?*
*इसलिए अगली बार पनीर खाने से पहले सोचिएगा अवश्य ।
और इस तरह की बकवास कोई भी कर सकता है अभिब्यक्ति की आज़ादी है मैंने भी फेसबुक पर से कापी पेस्ट कर लिया है । ।इतना देर पोस्ट को झेलने के लिए आपका धन्यवाद
😍🤑😭🤣😍😭🤣🤑😍🤣😭😍🤣😭😍
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21/06/2024

अजीनोमोटो
को हम इसके रासायनिक नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट के नाम से भी जानते है !
इसको संक्षिप्त में हम एमएसजी नाम से भी जानते है. ..
अजीनोमोटो की कंपनी का मुख्य कार्यालय चोओ,
टोक्यो में स्थित है !
यह 26 देशों में काम करता है.
इसका इस्तेमाल ज्यादातर चीन की खाद्य पदार्थो में
खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. ..

पहले हम अधिकांशतः घर पर बने खाने को खाते थे,
लेकिन अब लोग चिप्स, पिज्ज़ा और मैगी जैसे खाने को ज्यादा पसंद करने लगे हैं !
जिनमे अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है.
इसका इस्तेमाल कई डिब्बाबंद फ़ास्ट फ़ूड सोया सॉस, टोमेटो सॉस, संरक्षित मछली जैसे सभी संरक्षित खाद्य उत्पादों में किया जाता है.

अजीनोमोटो
को पहली बार 1909 में जापानी जैव रसायनज्ञ किकुनाए इकेडा के द्वारा खोजा गया था.
उन्होने इसके स्वाद को मामी के रूप में पहचाना जिसका अर्थ होता है
सुखद स्वाद.
कई जापानी सूप में इसका इस्तेमाल होता है.
इसका स्वाद थोडा नमक के जैसा होता है. देखने में यह चमकीले छोटे क्रिस्टल के जैसा होता है.
इसमें प्राकृतिक रूप से एमिनो एसिड पाया जाता है. ..

किन्तु
आज दुनिया के हर कुक खाने में स्वाद को बढ़ाने के लिए इसका इस्तेमाल करते है.
एमएसजी का इस्तेमाल सुरक्षित माना गया है,
इसका
इस्तेमाल पहले चीन की रसोई में होता था,
लेकिन अब ये धीरे धीरे हमारे भी घरों की रसोई में अपना पैठ बना चुका है.
अपने
समय को बचाने के लिए जो हम 2 मिनट में नुडल्स को तैयार कर ग्रहण करते है इस तरह के अधिकांशतः खाद्य पदार्थो में यह पाया जाता है जो धीरे धीरे हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है. ..

यह
एक प्रकार से
नशे की लत जैसा होता है अगर आप एक बार अजीनोमोटो युक्त भोजन को ग्रहण कर लेते है,

तो
आप उस भोजन को नियमित खाने की इच्छा रखने लगेंगे. ..

इसके
सेवन से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ जाती है. ..

जब
आप एमएसजी मिले पदार्थो का सेवन करते है, तो रक्त में ग्लूटामेट का स्तर बढ़ जाता है.

जिस की
वजह से इसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है.

एमएसजी
को एक धीमा हत्यारा🔥 भी कहा जा सकता है !!

यह
आँखों की रेटिना को नुकसान पहुंचाता है साथ ही यह थायराईड और कैंसर जैसे रोगों के लक्षण पैदा कर सकता है.

अजीनोमोटो
से युक्त खाद्य पदार्थो का अगर नियमित सेवन किया जाये तो यह माइग्रेन पैदा कर सकता है जिसको हम अधकपाली भी कहते है.
इस बीमारी में आधे सिर में हल्का हल्का दर्द होते रहता है.

एमएसजी
के अधिक सेवन से मोटापे के बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है हमारे शरीर में मौजूद लेप्टिन हॉर्मोन,
हमे भोजन के अधिक सेवन को रोकने के लिए हमारे मस्तिष्क को संकेत देते है.

अजीनोमोटो के सेवन से ये प्रभावित हो सकता है जिस वजह से हम ज्यादा भोजन कर जल्द ही मोटापे से ग्रस्त हो सकते है. ..

खैर
फास्ट फूड के तो सभी दीवाने हैं ही !!

बकिया जो है वो तो हइये है . ..

10/04/2024
क्या कभी आपको सोते सोते लगा है की आप जग रहे है परंतु आप अपने हाथ पैर कुछ भी हिला पाने में सक्षम नही है। जैसे की कोई अदृश...
04/09/2023

क्या कभी आपको सोते सोते लगा है की आप जग रहे है परंतु आप अपने हाथ पैर कुछ भी हिला पाने में सक्षम नही है। जैसे की कोई अदृश्य शक्ति आप पर काबू पाना चाहती है। आप बोलना तो चाहते है पर आपकी आवाज भी निकल पा रही हो। ऐसा लगता है मानो कोई छाती पे चढ़ गया हो । मैंने बचपन में जब इस स्थिति का सामना किया था तो काफी डर गया था । लोग इसे आज भी भूत प्रेत से जोड़ते है। आप जितना डरेंगे ये उतना ज्यादा आपके साथ हो सकता है। इस स्थिति को वैज्ञानिक टर्म में स्लीप पैरालिसिस कहते है। ये एक निद्रा विकार माना जाता है। स्लीप पैरालिसिस एक तंत्रिका स्थिति है जिसमें व्यक्ति जाग्रत होते समय या नींद में आते समय अपने शरीर को नहीं हिला सकता है जिसके कारण वे अकेले अपने विचारों और सपनों के बीच फँस जाता हैं। यह असुरक्षित महसूस करने की भावना पैदा कर सकता है। यह आमतौर पर नींद परिणामित होने वाले रीम स्लीप संचार के दौरान होता है, जब शरीर की गतिविधियाँ निष्क्रिय होती हैं लेकिन मस्तिष्क जाग्रत रहता है। अतः अगर कभी भी आपको इस स्थिति का सामना करना पड़े तो आप डर नही। और इसके बारे में ज्यादा मत सोचे।

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