Dr.indu kumari

Dr.indu kumari m,i poems and poetry writer


सूरत जैसी भी हो,,,, समझ बेहतरीन होनी चाहिए

  afternoon my friends 🌹
29/03/2026

afternoon my friends 🌹

29/03/2026

#मनुष्य अपने विचारों को रखने में है सक्षम #यही विचार उनका बनता है विलक्षण

29/03/2026

morning 🌹🙏🏿🌹✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️👈🏿

 #जिंदगी एक एक किताब है ,लिखो बेहिसाब है।लिखो वही जिनका तुम्हें कुछ जवाब है। जिसे कहते हो तुम सवाब है वहीं से जिंदगी होत...
28/03/2026

#जिंदगी एक एक किताब है ,लिखो बेहिसाब है।
लिखो वही जिनका तुम्हें कुछ जवाब है।
जिसे कहते हो तुम सवाब है
वहीं से जिंदगी होती खराब है।

 #नन्हे मुन्ने प्यारे बच्चे, होते हैं यह दिल के सच्चे। #थोड़ी सहानुभूति पाकर, एक अलग इतिहास है रचते। #डॉ. इन्दु कुमारी
28/03/2026

#नन्हे मुन्ने प्यारे बच्चे,
होते हैं यह दिल के सच्चे।
#थोड़ी सहानुभूति पाकर,
एक अलग इतिहास है रचते।
#डॉ. इन्दु कुमारी

With Kamlesh Shrivastava – I'm on a streak! I've been a top fan for 11 months in a row. 🎉
28/03/2026

With Kamlesh Shrivastava – I'm on a streak! I've been a top fan for 11 months in a row. 🎉

  #व्यथा कुछ है मेरे मन में👈 #व्यथा कुछ है मेरे मन में, बोल जरा तू किसे सुनाऊं।जिसे कहूं वह दूर बहुत है, कैसे मन की बात ...
28/03/2026


#व्यथा कुछ है मेरे मन में👈

#व्यथा कुछ है मेरे मन में,
बोल जरा तू किसे सुनाऊं।
जिसे कहूं वह दूर बहुत है,
कैसे मन की बात सुनाऊं।

कभी-कभी ही सही, कभी
हमारी सुधि ले लो।
क्यों सोए हो मेरे अलबेले,
चाहे तो शुभ बुद्धि ले लो।

नोक-झोंक चलती रहती है,
बोल प्रिय कैसे मनाऊं।
व्यथा कुछ है मेरे मन में,
बोल जरा तू किसे सुनाऊं।

जीवन डोर बंधी है तुमसे,
जनम जनम का नाता है।
नहीं तू है तो खाली जीवन,
कोई नहीं मुझे भाता है।

सावन बसंत तुमसे सुहाना,
फिर कोई कैसे गीत मैं गाऊँ।
व्यथा कुछ है मेरे मन में,
बोल जरा तू किसे सुनाऊं।

चार दिन की जिंदगी है,
ऐसे ना तुम हमें सताओ।
कहां छुपे बैठे हो साजन,
जरा सामने तो आ जाओ।

बहुत हो गया अब तो छोड़ो,
खुशियों की सौगात लाऊं।
व्यथा कुछ है मेरे मन में,
बोल जरा तू किसे सुनाऊं।
डॉ इन्दु कुमारी म
धेपुरा बिहार

 #घुटन 👈🏿सारिका एक कामकाजी महिला थी। उनके दो बच्चे हुए। उनके सपनों को पंख लग गए। अब वह दिन रात मेहनत करके बच्चों को पढ़ा...
28/03/2026

#घुटन 👈🏿

सारिका एक कामकाजी महिला थी। उनके दो बच्चे हुए।
उनके सपनों को पंख लग गए। अब वह दिन रात मेहनत करके बच्चों को पढ़ाने लिखाने लगी।
पति महोदय किसान थे, लेकिन सपने बहुत बड़े थे।
खेती के पैसे खेती में ही चले जाते थे। जितना खर्च होता उससे पैसे कम थे इसीलिए वह सारिका को ताना दिया करते थे। हमेशा लड़ने की जुगाड़ लगा लेते।
सारिका 5:00 बजे सुबह उठकर घर का सारा काम करके विद्यालय चली जाती थी। जब शाम को वापस आती , खेतों की तरफ भी चली जाती जो कुछ काम होता है उसे भी कर लाती... फिर भी पति खुश नहीं थे। कहते जब से तुम आई हो... इस घर का सत्यानाश हो गया किस जन्म का पाप मेरे माथे मढ़ गया। उनका नौटंकी चालू रहता.. हमेशा कभी-कभी तंग आकर सारिका अलग रहने की सोची.. लोक लाज का लिहाज कर रहने लगी।
एक रोज तो हद हो गई हल्की बारिश होने की संभावना दिख रही थी..सारिका ने अपने पति से बोली... देखो पानी बरसने के बाद झोपड़ी में पानी घुस जाता है, इसलिए मिट्टी को इकट्ठा करके बांध बना दो ताकि पानी घर के अंदर ना जा पाए। तब तक में पानी जोर-जोर से बरसने लगा और झोपड़ी के अंदर जाने लगा गुस्से में सारिका बोली क्या तुम अपाहिज हो.. इतना भी नहीं कर सकते.. इतना सुनते ही पति आग बबूला हो गए उनके बाल पकड़ कर घुटने तक पानी जमा हो गया था उसमें धकेल दिया.. सारिका जोर-जोर से रोने लगी पूरा बदन पानी में भीगा हुआ था.. सासू मां आई नजारा देखकर मुस्कुराई और चली गई अब सारिका हिम्मत बांधकर उठी और मिट्टी से पानी को रोकने का प्रयास करने लगी.. इतना पानी जमा हो गया था की मिट्टी को भी धाराओं में बहाकर लिए चला जाता। दोनों बच्चे सुबक रहे थे।
मां की ममता जाग उठी और बच्चों को चुप करते हुए ..मैं हूं ना तुम्हें परेशान होने की कोई जरूरत नहीं। लोग तमाशा देखेंगे सही बात बोलने वाला कोई नहीं है ..लोगों का घर बिगड़ता है, तो लोगों को खुशी होती है।
इसी घुटन के साथ कितनी महिलाएं दफन हो चुकी हैं।
मेरे बच्चे अब तुम ही मेरे जीवन के आधार बन चुके हो।
यह समाज औरत को जीने कहां देते हैं अगर किसी तरह हार नहीं सकते तो बदचलन का आरोप जरूर लगा देते हैं।
#डॉ. इन्दु कुमारी

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27/03/2026

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27/03/2026

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