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ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ,झंझारपुरऔर मुम्बई - परामर्श शुल्क 1100 है-आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636+9358885616 https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी -ज्योतिषी झा मेरठ 1 -कुण्डली मिलान का शुल्क 2200 सौ रूपये हैं | 2-- हमसे बातचीत [परामर्श ] शुल्क है पांच सौ रूपये है

ं | 3 -जन्म कुण्डली की जानकारी मौखिक और लिखित लेना चाहते हैं -तो शुल्क एग्ग्यारह सौ रूपये हैं | 4 -सम्पूर्ण जीवन का फलादेश लिखित चाहते हैं तो यह आपके घर तक पंहुचेगा शुल्क 11000 हैं | 5 -विदेशों में रहने वाले व्यक्ति ज्योतिष की किसी भी प्रकार की जानकारी करना चाहेगें तो शुल्क-2200 सौ हैं |, --6--- आजीवन सदसयता शुल्क -एक लाख रूपये | -- नाम -के एल झा ,स्टेट बैंक मेरठ, आई एफ एस सी कोड-SBIN0002321,A/c- -2000 5973259 पर हमें प्राप्त हो सकता है । आप हमें गूगल पे, पे फ़ोन ,भीम पे,पेटीएम पर भी धन भेज सकते हैं - 9897701636 इस नंबर पर |-- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें -https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खगोलशास्त्री झा मेरठ-------ॐ श्रीसंवत -2083 ,शाके -1948 वैशाख शुक्लपक्ष ...
18/04/2026

18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खगोलशास्त्री झा मेरठ
-------ॐ श्रीसंवत -2083 ,शाके -1948 वैशाख शुक्लपक्ष ---तदनुसार दिनांक -18 /04 /2026 से 01 /05 /2026 तक भविष्यवाणी की बात करें प्रमाण देखें ---सूर्यदेव के पीछे मंगल ग्रह का प्रभाव ----आदित्या गच्छति ह्यग्रे पृष्ठे भवति भुसुतः प्रजा कष्ट जो पायेगी ,न मिल हैं उपचार ---अर्थात --प्रस्तुत प्रमाण के अनुसार मंगल के आगे सूर्यदेव के होने से नेतागण भष्टाचार में लिपतायमान रहेंगें | किसी बड़े नेता की जेल यात्रा का संयोग भी बन सकता है | जनता की आवाज राजा लोग अनसुनी करेंगें | फसलों का उचित मूल्य न मिलने से किसानों की दुर्दशा बढ़ती जायेगी | किसी राज्य में किसान आंदोलन से जनता दुःखी रहेगी | कल कारखानों में श्रमिक तथा मालिक के बीच संघर्ष संभव है | युवावर्ग का असन्तोष बढ़ता जायेगा | मंगल शनि के योग में दुश्मन देश अशान्ति फैलाने का प्रयास करेगा | ,जिससे पड़ौसी देशों के साथ सीधा संघर्ष बढ़ सकता है | सरकारी प्रतिष्ठान में सेंधमारी का मामला पकड़ में आयेगा | -----तेजी मंदी की बात करें तो ---रोजमर्रा की वस्तु ,बिल्डिंग मैटीरियल। लोहा ,सीमेन्ट आदि के साथ सोना ,चांदी के दामों में बढ़ोत्तरी होगी | एक और प्रमाण देखें - पन्द्रह से पैतालीस जाय | रतन भाव में अन्न बिकाय || ----इस प्रमाण के अनुसार सभी खाद्य वस्तुएं ,खाद्यतेल ,सुपारी ,कत्था ,चूना आदि की जमाखोरी से कमी महसूस होगी | सरकार व्यापारियों पर कठोर कार्यवाही करने पर मजबूर हो जाएगी | -----आकाश लक्षण की बात करें तो ---स्वर्ग तथा पाताल नाड़ी में ग्रहों से प्रभाव से विपरीत मौसम का सामना करना पड़ेगा | राजस्थान ,मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,दिल्ली ,हरियाणा ,पंजाब में वर्षा न के बराबर होगी | कहीं अकाल जैसी विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा | पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार जोर देगी |
---आपका पसंदीदा पेज --ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ संपर्कसूत्र 09897701636 --93588885616

14/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{22}- ज्योतिषी झा मेरठ
1999 -में जो हमने यज्ञ किया वो न तो हम तांत्रिक थे ,न ही दिव्य पुरुष थे ,हमें केवल मार्ग की जानकारी थी कि इस विधि से यह जाना जा सकता है -उस विधि का प्रयोग किया और माँ आदिशक्ति की कृपा हुई -उनको पुत्री मिली साथ ही मुझको मन्दिर और निवास मिला पत्ता -कृष्णपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ | हम आज तक यहाँ विराजमान हैं | --अस्तु --राहु की महादशा समाप्त हुई | अब 16 वर्षों के लिए गुरु की दशा आयी -मेरी कुण्डली गुरु तृतीय भाव में हैं --तो निश्चित ही भार्या सुख और भाग्योदय होना था साथ ही प्रचुर आय भी होनी थी | यह मेरा सौभाग्य रहा -दौराला -मेरठमें शिव की प्रतिष्ठा हेतु हम आचार्य नियुक्त हुए ,शिव चौक बागपत गेट मेरठ यहाँ भी प्रतिष्ठा का दायित्व मिला ,कबाड़ी बाजार एवं जुनेजा मार्किट शहर की प्राण प्रतिष्ठा में आचार्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला | सब्जी मण्डी मेरठ में पीपली -पीपल का विवाह हेतु आचार्य बनें जो मेरठ नगर एवं समस्त मीडिया जगत के लिए कौतुहल का विषय था | --जो हम दूसरे पर आधारित थे आज परमात्मा एवं गुरुदेव की कृपा से स्वतंत्र कार्य किये ,साथ ही आज हम इस योग्य बने किअब हम दूसरे को कार्य देने लगे | --एकदिन एक छात्र नाम हीरा ठाकुर ये संगीत सीखने मेरठ के प्रसिद्ध बैण्ड -जय हिन्द बैण्ड के संचालक श्री जगदीश धानक के पास जाते थे ,कौतुहल बस मैं भी देखने गया -जब गया तो हमने पूछा क्या सीखते हो उसने बताया सरगम -हमने कहा यह ऐसे बजाते हैं वो तो फिर कभी सीखने नहीं गया पर हम नित्य सीखने लगे -अब हम -31 वर्ष के हो चुके थे -ये हारमोनियम बजाना तो नहीं जानते थे पर सुरों की उत्तम जानकारी थी और स्वभाव के बड़े ही सनेही थे | कुछ दिनों तक सीखने के बाद मुझको लगा यहाँ हम कामयाब नहीं हो सकते क्योंकि संगीत के लिए उत्तम गुरु और संगति की जरुरत होती है जो मुझको यहाँ नहीं मिलेगी | अतः हमने हारमोनियम ख़रीदा और अपने बाल्य काल के संगीत गुरु का ध्यान किया साथ में टेपरिकार्ड से गाना -गाना सीखने लगा | इतनी उम्र में लोग बच्चों को पढ़ाते हैं किन्तु हम फिर से पढ़ने लगे --ॐ - आपका - ज्योतिषी झा
मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

ज्योतिष कक्षा पाठ -18 -तिथियां क्यों -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ"ज्योतिषशास्त्र "में चन्द्रमा की एक कला को तिथि...
10/04/2026

ज्योतिष कक्षा पाठ -18 -तिथियां क्यों -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
"ज्योतिषशास्त्र "में चन्द्रमा की एक कला को तिथि माना जाता है | तिथियों की गणना -शुक्लपक्ष -से आरम्भ होती है | -अमावस्या -के बाद की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां --शुक्लपक्ष -की तथा पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा से आरम्भ करके अमावस्या तक की तिथियां -कृष्णपक्ष -की होती हैं | --इस प्रकार एक माह में दो पक्ष होते हैं --{1 }--शुक्लपक्ष ,----{2 }---कृष्णपक्ष ---|
--------------------------------------तिथि अंक तालिका -----------------------------------------------------

तिथियों के अंक ----- कृष्णपक्ष --- तिथियों के अंक - शुक्लपक्ष

-------1 - -------- --- प्रतिपदा ---- -- -1 ----- प्रतिपदा

--1 - ------------- द्वितीय -2 ------ द्वितीय

--3 --- ------------ तृतीया --- ---3 ---- तृतीया

--4 -- ------------- चतुर्थी ---4 ----- चतुर्थी

--5 ---- --------------- पंचमी ----5 ------ पंचमी

---6 ------------------------- षष्ठी -----6 -------- --- षष्ठी

---7 ----------------------- सप्तमी -----7 ----------- सप्तमी

---8 ----- ------------------ अष्टमी -----8 ---------- अष्टमी

----9 ------ --------------------- नवमी ---9 ----------- नवमी

---10 ---------------------------- दशमी ----10 --------- दशमी

----11 ---- ------------------------ एकादशी ------11 --------- एकादशी

----12 ------------------------------ द्वादशी -----12 --------- द्वादशी

----13 ---- -------------------------- त्रयोदशी ----13 ------- त्रयोदशी

----14 ----- ---------------------------- चतुर्दशी ------14 ---------- --- चतुर्दशी

--15------------------------------- ------ पूर्णिमा ----15 ---------- पूर्णिमा

--उक्त दोनों पक्षों की पूर्णिमा और अमावस्या के अतिरिक्त अन्य तिथियों के नाम एक जैसे होते हैं | ये निम्नलिखित हैं --प्रतिपदा ,द्वितीया ,तृतीया ,चतुर्थी ,पंचमी ,षष्ठी ,सप्तमी ,अष्टमी ,नवमी ,दशमी ,एकादशी ,द्वादशी ,त्रयोदशी ,चतुर्दशी ----चतुर्दशी के बाद शुक्लपक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पूर्णिमा तथा कृष्णपक्ष की तीसवीं तिथि को अमावस्या कहा जाता है | तिथियों की 1 ,2 ,3 ,4 आदि अंकों के रूप में लिखा जाता है | पूर्णिमा तक यह क्रम 15 तक की संख्या तक चलता है ,--किन्तु उसके बाद पुनः 1 ,2 ,3 और 4 लिखा जाता है | --जिस दिन अमावस्या होती है ,उस दिन अमावस्या तिथि को 30 अंक के रूप में लिखा जाता है | उपरोक्त तालिका में दोनों पक्षों के अंक के अंक निर्धारित किये गये हैं |
----हमारे पाठकगण -तिथियों की विशेष जानकारी अगले भाग में लिखने का प्रयास करेंगें ---- -- भवदीय निवेदक -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --ज्योतिष सीखनी है तो ब्लॉकपोस्ट पर पधारें तमाम आलेखों को पढ़ने हेतु -khagolshastri.blogspot.com

09/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--"भाग -{21}-ज्योतिषी झा मेरठ
1999 -अब हम मेरठ में अपने आप को स्थापित कर रहे थे | परमात्मा और सद्गुरु की सच्ची कृपा तभी होती है जब आप सच्ची निष्ठा से जुड़ते हैं | अभी हमारे अंदर एक कमी थी -मेरठ में मेरा अनुज मुझसे आठ वर्ष छोटा मुझसे सफल था किन्तु ज्ञान का आभाव था | मेरठ जैसे शहर में मंदिर में ज्ञानी पुरुष की जरुरत कम सेवक की ज्यादा होती है | अतः यह अनुज केवल आठवीं पास था पर केवल धन की जिज्ञासा थी तो उसे मंदिर और निवास मिला था | अनुज ने प्रस्ताव दिया मेरे पास रहो ,हम एक अनुज को पहले ही खो चुके थे अतः अपनी संतान जैसा ही चाहते थे और इसे किसी प्रकार का कष्ट न हो यह सोचकर इसके पास स्थान --शिव चौक बागपत गेट मेरठ-में रहने लगा और इसे पढ़ाने भी लगा | एक दिन 1999 में पिता के साथ बच्चे मेरठ आ गए ,पिता छोड़कर चले गए -उनके जाते ही मेरी नन्ही -नहीं सी बच्चियों को ताना मारने लगा -इस बात जानकारी मुझको मिली -मैंने कुछ नहीं कहा ,इसके बाद गर्मी का समय था हम बच्चों के साथ छत पर सो रहे थे तो अनुज ने कमरे में ताला लगा दिया ,मेरी छोटी सी डेढ़ साल की बच्ची दूध के लिए रोने लगी ,जब दूध लेने पतनी कमरे जाने लगी तो ताला लगा देखा -अनुज का अता -पत्ता नहीं चला ,मुझसे बच्ची की दशा देखी नहीं गयी तो हमेंने दरवाजे में धक्का दिया ताला सहित दरवाजा खुल गया | इसके बाद मेरे अनुज ने मकान मालिक से कहा ताला तोड़कर यह मेरे पैसे चुराया है और आपका दरवाजा भी तोड़ दिया | यह शब्द मानो मरने जैसा था | हमने मालिक से अनुरोध किया 15 दिन का समय दें हम घर चले जायेंगें, तत्काल बच्चों को लेकर कहाँ और कैसे जायें | उन्होंने कहा अभी खाली करो मकान --अब हमने चन्द्रलोक मलियाना फाटक मेरठ के पास मेरे एक मित्र थे उनसे अनुरोध किया -उन्होंने मुझे पनाह दी -फिर किराये का मकान दिलाया -इस मित्र ने अपनों से बढ़कर सम्मान दिया | अब मेरा कोई न तो मददगार परिजन न ही ससुराल पक्ष में कोई आसरा देने वाला --अब क्या करें कैसे आगे बढ़ें यही सोचने लगा -- --अब हम सच्ची निष्ठा से परमात्मा के सहारे हो गए फिर क्या था ----पत्रं पुष्पं फलं तोयं मामेकं शरणं व्रज " परमात्मा ने दोनों हाथों से मुझको उठाया -कैसे -जानिए -एक व्यक्ति नाम सुरेश निवासी -धौलपुर राजस्थान मेरठ में रहते थे वो मुझको जानते थे उनकी लड़की खो गयी थी मुम्बई में -हमसे पूछा महराज कैसे मिलेगी ,हमने कहा मिल जाएगी -पर खर्च बहुत होगा -बोले कोई बात नहीं | हमने कहा -मिल जाएगी तब तुम 11००० हजार दक्षिणा देना -पर मैं जो साधना करूँगा उसमें तुम्हें मेरे बच्चों की देखभाल करनी होगी ---हम एक मास बोलेंगें नहीं ,केवल साधना करेंगें ,और इस बीच हमारा राशन पानी सारी जिम्मेदारी तुम्हारी -बोले ठीक है -आप यज्ञ करो --ये व्यक्ति ऐसे थे मानो स्वयं मेरे पिता मेरी रक्षा करने हेतु पधारे हों | इन्होने इतना राशन लाया जिसे हम छे महीने ग्रहण किये ,बिस्तर ,चौकी ,मेरे बच्चों ने पहली बार पिता के साम्राज्य में उत्तम वस्त्र पहनें | अब हमें कोई चिंता नहीं थी तो चिंतन उत्तम होना लाजमी था ---- -आगे की चर्चा आगे करेंगें --ॐ |--ज्योतिष और कर्मकाण्ड की अनन्त बातों को जानने हेतु इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut. खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ज्योतिष कक्षा पाठ-17 -अंग्रेजी मास और उनकी उत्पत्ति-पढ़ें ज्योतिषी झा मेरठरोमन तथा आंग्ल भाषा साहित्य में ही नहीं ,संप्रद...
08/04/2026

ज्योतिष कक्षा पाठ-17 -अंग्रेजी मास और उनकी उत्पत्ति-पढ़ें ज्योतिषी झा मेरठ

रोमन तथा आंग्ल भाषा साहित्य में ही नहीं ,संप्रदाय में भी उग्र संक्रांतियां हुई हैं | देवार्चन -को वहां भी महत्व और प्रधानता दी गई है | उसी के आधारभूत देवताओं पर उनके मास प्रस्तुत हैं --
{1 }--जनवरी -जेनस नामक एक रोमन देवता के नाम पर वर्ष के प्रथम मास का नाम जनवरी रखा गया | इस देवता के सम्बन्ध में यह प्रसिद्धि है कि इसके दो मुख थे | एक सामने की ओर तथा दूसरा पीछे की ओर --इस तथ्य में यह औचित्य है कि जब हम बीते हुए वर्ष की सफलताओं और असफलताओं पर विचार करते हैं --तो हमें आगे आने वाले नववर्ष की नूतन योजनाओं का भी विवेचन करना पड़ेगा | भाव यह है कि जेनस आदि और अंत का देवता समझा जाता है |

---{2 }--फरवरी --प्राचीन रोमन जगत में फेबुआ नामक एक बहुत बड़ा भोज हुआ करता था ,जो अति पवित्र तथा पुण्यतम माना जाता था --इसी के नाम पर वर्ष के दूसरे मास को फेबुरी कहा गया |

---{3 }--मार्च ---रोमन के एक देवता का नाम मार्स था | वो देवता युद्ध का प्रतीक माना जाता था | उसी के गुणों के आधार पर तीसरे मास का नाम मार्च रखा गया |

----{4 }---अप्रैल ---रोमन भाषा में दो शब्द हैं --अमोनिया और एपारि जिनका अर्थ है --सब कुछ खोल देना | उसी पर वर्ष के चौथे मास का नाम अप्रैल पड़ा और यह भी कितना सार्थक नाम है --क्योंकि अप्रैल के मास में ही यूरोप की धरती पल्ल्वित होती है | यह अप्रैल ही है --जो धरती पर से बर्फ और कुहासा का आवरण उठा देता है और प्रकृति को सर्व सुन्दर रूप प्रदान करता है |

---{5 }---मई --इस मास का यह नाम एटलस की कन्या "मइया " से उपलब्ध हुआ है | मइया अपनी सातो बहनों से अति सुन्दर थी और वर्ष के बारहो महीनों में भी मई का महीना प्रकृति को सर्व सुन्दर रूप प्रदान करता है |

----{6 }--जून --यह शब्द जुपिटर की पत्नी जूनों से प्राप्त हुआ है | यह अपरिमित सुंदर और सुकोमल थी | इसके रथ के वाहक घोड़े नहीं बल्कि मयूर थे |

---{7 }--जुलाई ---इसका नाम रोमन के महान शासक जूलियस सीजर से मिला | वो यशस्वी और लोकप्रिय शासक थे |

---{8 }---अगस्त --आक्टेवियस का ही एक रूप अगस्त है | यह नाम जूलियस के पोते का था | वो साहित्य और कला के लिए प्रख्यात था इसी के नाम पर अगस्त नाम रखा गया |

----{9 }--सितंबर --सेप्टेम्बर -"सेप्टेम "यह शब्द लेटिन भाषा का शब्द है --जिसका अर्थ सातवां है | वर्ष का आरम्भ जब मार्च से हुआ करता था --तब यह सातवां था | किन्तु जूलियस सीजर के जनवरी को वर्ष का प्रथम मास का स्थान देने के कारण इसका क्रम नवां हुआ |

----{10 }---अक्टूबर -यह भी लेटिन भाषा का शब्द है --जिसका अर्थ आठ है ,किन्तु जनवरी मास को प्रथम स्थान देने से इसका क्रम दसवां हो गया |

---{11 }----नवंबर ---नोवेम भी लेटिन शब्द है | इस मास को रक्त मास नाम से पुकारते हैं ,---क्योंकि इसी मास में मुख्यतः पशु संहार किया जाता था | इस कारण इसका नाम नवंबर रखा गया |

---{12 }---दिसंबर ---लैटिन भाषा के इस शब्द का अर्थ दसवां है | जूलियस ने मासक्रम में इसका स्थान बारहवां रखा है | ईसामसीह का जन्म इसी मास में हुआ था |

---पाठकगण --आधुनिक समय में कोई भी देश हो सबको आंग्लभाषा के साथ -साथ चलना पड़ता है | जबकि सभी देशों में अपने -अपने अनुसार पंचांग हैं किन्तु --सभी ने आंग्लभाषा में समाहित किया है --अतः ज्योतिष की दुनिया में यह ज्ञान हमें अवश्य होना चाहिए --अगले भाग में तिथियों पर चर्चा करेंगें ----- भवदीय निवेदक -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --ज्योतिष सीखनी है तो ब्लॉकपोस्ट पर पधारें तमाम आलेखों को पढ़ने हेतु -khagolshastri.blogspot.com

07/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?---"भाग -{19}-- ज्योतिषी झा मेरठ
1996 -अब हम 26 वर्ष के हो चुके थे | राहु में शुक्र का अंतर समाप्ति की ओर था | आज हमने पहलीबार अपनी कुण्डली का मंथन किया | आप लोगों में से बहुत से लोग ऐसे होंगें -जो बात मैंने पहले कही कि मेरी आत्मा से आवाज आयी और मानो मेरे साक्षात आराध्य गुरु सरकार मुझको समझा रहे थे -इस बात को सही नहीं मानते होंगें -इसका मैं एक प्रत्यक्ष प्रमाण देता हूँ | जब मैंने आत्मा की बात सुनी उसके बाद हमने अपनी नजरों से दुनिया को झांकने की कोशिश की ,हम मन ही मन सोचने लगे -95 प्रतिशत लोग आचार्य नहीं है फिर भी मन्दिरों में रहते हैं ,2 प्रतिशत लोग हैं जो सक्षम आचार्य हैं वो किसी की चाकरी नहीं करते हैं ,8 प्रतिशत लोग हैं जो किसी के सान्निध्य में रहकर कर्मकाण्ड करते हैं सभी अपना -अपना जीवन व्यतीत करते हैं --फिर तुम कर्मकाण्ड क्यों नहीं करना चाहते हो ,शास्त्र कहते हैं -हर व्यक्ति को दान लेना चाहिए और दान करना भी चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -पढ़ना चाहिए और पढ़ाना चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -यज्ञ करना चाहिए और कराना चाहिए -तभी यह सृष्टि चलती है | अपनी कमाई का दस प्रतिशत दान करने से धन शुद्ध हो जाता है -तो तुम भी ऐसा करो | यह सोचते -सोचते रात बीती ,अगले दिन एक व्यक्ति मुझको मिला जो यह जनता था कि यह विद्वान है और मेरे जैसे व्यक्ति की जरुरत थी | वजह थी चैत्र नवरात्रि का समय था किसी यजमान को शप्तशती के लोम -विलोम पाठ कराने थे -उसे इस पाठ की जानकारी नहीं थी अतः वो व्यक्ति मुझको भेजा, जब मैं पंहुचा तो मैंने देखा -पूछने वाले व्यक्ति के वदन पर ढंग के वस्त्र नहीं हैं, बीड़ी पीता है और मुझको पूछता है -तुम लोम -विलोम सप्तशती के पाठ करना जानते हो -पहले तो शकल देखकर क्रोध आया -फिर धन की जरुरत थी तो शान्त हो गया और मैंने कहा -गुरूजी बिना पुस्तक देखे आपको मैं पूरी पुस्तक सुना सकता हूँ | उन्होंने जो पूछा सभी का जबाब दिया | बोले धन तुम्हारे हिसाव से काम मेरे हिसाव से -मैंने कहा जी गुरुदेव | मेरे पाठ करने से यजमान और गुरु दोनों खुश हुए | एक दिन मुझको अपने पास बुलाया गुरु ने -जब मैं उनके पास गया तो बोले हम तुमसे खुश है ,तुम्हें जो चाहिए बोलो ----अब मुझको ऐसा लगा स्वभाव से तो अच्छे हैं पर इनका रहन -सहन मेरे योग्य नहीं है फिर भी मैंने कहा मैं पढ़ना चाहता था ,हमारी पढ़ाई रुक गयी --बोले क्या पढ़ना चाहते हो -मैना कहा बीएड करना चाहता हूँ, दिल्ली से, बोले कितना पैसा चाहिए मैंने कहा 15000 हजार बोले ये चैक लो, साथ में 51 रूपये भोजन हेतु भी लो ,इतना ही नहीं उन्होंने एक माणिक की अंगूठी स्वर्ण की दी ---आपलोग जो मेरे हाथ की अनामिका अंगुली में अंगूठी देखते हैं उन्होंने दी | अब मुझको पूर्ण विस्वास हो गया कि मेरी आत्मा की आवाज नहीं मेरे आराध्य गुरु ये हैं | ध्यान दें जब संसार परित्याग कर देता है तो सद्गुरु अपनी गोद में उठाते हैं तब परमात्मा से साक्षात्कार होता है | ----आगे की परिचर्चा कल करेंगें |--ॐ |---- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

ज्योतिष कक्षा पाठ -16 - हिजरी  सन और पारसी मास   -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ ज्योतिष जगत में सूर्यदेव को सम्राट...
24/03/2026

ज्योतिष कक्षा पाठ -16 - हिजरी सन और पारसी मास -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ज्योतिष जगत में सूर्यदेव को सम्राट और चंद्रदेव को मन्त्री आचार्यों ने कहा है | सनातन संस्कृति में सूर्यदेव +चंद्रदेव दोनों को भगवान की उपाधि दी है --मुस्लिम जगत या पारसी जगत दोनों ने भी चंद्रदेव मानते हैं |---अस्तु --
----मुहम्मद पैगम्बर ईस्वी सन -622 तारीख -15 के दिन मक्के से मदीना आ गये थे ---उसी दिन से हिजरी सन की शुरुआत हुई | इसका प्रारम्भ मौहर्रम मास की पहली तारीख से होता है | इनका वर्ष चंद्रमास का माना जाता है | अमावस्या के बाद जिस दिन प्रथम चन्द्रदर्शन होता है -उस दिन को मास का पहला दिन माना जाता है | -

चूकि चन्द्रदर्शन रात को होता है --अतः वार का आरम्भ भी रात को होता है | अर्थात हमारी सोमवार की रात्रि उनकी भौमवार -मंगलवार -की रात्रि मानी जाती है | दिन का व्यवहार प्रथम चंद्र ,द्वितीय चन्द्र --इत्यादि रूप से अथवा तारीख के नाम से किया जाता है | इनका वर्ष 354 दिन का होता है | यह वर्ष चंद्र दिन का होने के कारण हरेक तीसरे वर्ष इनका मौहर्रम हमारे मास से एक दिन पहले होता है | इस तरह 32 व 33 वर्ष पर इनके सन का एक अंक बढ़ता जाता है |

------पारसी सन को एजदी जर्द कहते हैं ---का प्रारम्भ ईस्वी सन 630 के अनन्तर आरम्भ हुआ | इनके मास 30 सावन दिन के रहते हैं | अतः सौर वर्ष -से सम्बन्ध रखने के लिए प्रतिवर्ष के अंत में 5 दिन अधिक मानते हैं |

---पाठकगण --विश्व का कोई भी वर्ष हो --सभी में कुछ न कुछ अन्तर है --आज विश्व को अंग्रेजी वर्ष के साथ -साथ ही चलना होता है --कोई भी भाषा हो या कोई भी देश हो --सबकी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है --आधुनिक समय में भारतीय पंचांग --संवत ,शाके ,हिजरी ,सन और एजदी जर्द के साथ --कदम से कदम मिलाकर चलता है --जिसकी झलक पंचांग में देखने को मिलता है | ---अगले भाग में मासों का फलादेश समझाने का प्रयास करेंगें ----- भवदीय निवेदक -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --ज्योतिष सीखनी है तो ब्लॉकपोस्ट पर पधारें तमाम आलेखों को पढ़ने हेतु -khagolshastri.blogspot.com

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