Bajrangi Health Care

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 #मानसिक_रोग_और_ज्योतिषवात पित्त और कफ के विकार से उत्पन्न अथवा इनमे से कोई दो के आपस मे मिलने से ..या ऊपर नीचे होने से ...
01/10/2023

#मानसिक_रोग_और_ज्योतिष

वात पित्त और कफ के विकार से उत्पन्न अथवा इनमे से कोई दो के आपस मे मिलने से ..या ऊपर नीचे होने से बनने वाले रोगों को शारीरिक रोग कहा जाता है
(त्रिदोष imbalance)

जातक पारिजात के अनुसार ग्रहों की भी मानसिक स्तिथिया होती है

ये 10 तरह की होती है

1- दीप्त
2- प्रमुदित
3-स्वस्थ
4-शांत
5- शक्त
6-प्रपीडित
7-दीन
8-खल
9-विकल
10-भीत

महर्षि पतंजलि ने भी चित्त के क्लेशो के पांच कारण बताए है
1- अविधा - यथार्थ का उचित ज्ञान ना होना

2- अस्मिता- अहंकार के अनुचित प्रयोग को अस्मिता कहते है

3-राग- किसी चीज़ से अत्यधिक आसक्ति को राग कहते है

4- द्वेष - अपने को दैनिय स्तिथि में देखने से दूसरों के प्रति ईर्ष्या की भावना

5- अभिनिवेश- हमेशा म्रत्यु के भय का आभास होना ,

6-आलस- चित्त और शरीर मे भारीपन हो जाना आलस्य है

मानस दुःखज- इस तरह का उन्माद Enemies के डर से ,बहुत ज्यादा अभिलाषाओं के पूरा ना होने से पैदा होता है

आदि कारण मानसिक रोगों के या मानसिक कमजोरी के कारण बनते है

मानसिक रोगों के बारे में कहा गया है कि क्रोध, हर्ष, और शोक आदि आवेगों से उतपन्न रोग मानसिक रोग कहलाते है

जड़ता

चंद्रमा+शनि+गुलिक केंद्र में हो तो व्यक्ति जड़बुध्दि होता है

5वे भाव मे शनि+राहु हो तो भी व्यक्ति जड़ बुध्दि होता है

देखा ये भी गया है कि चर लग्न हो 6th लॉर्ड और राहु देखते हो मंगल 11वे भाव मे हो तो अभिचार यानी (मंत्रादि प्रयोग) से व्यक्ति के शत्रु उसे पागल करने की कोशिश करते है l

कम्जोर चंद्रमा शनि के साथ 12वे भाव मे हो.

कम्जोर चंद्रमा शनि के साथ हो और मंगल उसे देखता हो.

चन्द्र +शनि की युति हो और राहू उसे देखता हो.

मंगल चौथे भाव मे हो और शनि उसे देखता हो.

6ठे भाव का स्वामी व शनि दोनो एक साथ लगन मे हो.

मंगल+बुध 6ठे या 8वे भाव मे हो.

मंगल 3रे भाव मे हो और पापी ग्र्हो से प्रभावित हो.

कन्या लगन मे शनि और राहू एक साथ होने पर.

चंद्रमा और बुध एक साथ केंद्र मे हो और पाप ग्रहो से द्रस्त हो

इंसान स्वस्थ मन और बुध्दि से ही जीवन की यात्रा सम्पन्न कर सकता है और अगर ये ही डिस्टर्ब हो जाये तो जिंदगी अधूरी सी रह जाती है ।

"सेंधा नमक" भारत से कैसे गायब कर दिया गया...आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते है कि...
04/06/2023

"सेंधा नमक"
भारत से कैसे गायब कर दिया गया...
आप सोच रहे होंगे की ये सेंधा नमक बनता कैसे है ?? आइये आज हम आपको बताते है कि नमक मुख्यत: कितने प्रकार का होता है।
एक होता है समुद्री नमक, दूसरा होता है सेंधा नमक "rock salt"सेंधा नमक बनता नहीं है पहले से ही बना बनाया है। पूरे उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में खनिज पत्थर के नमक को ‘सेंधा नमक’ या ‘सैन्धव नमक’, लाहोरी नमक आदि आदि नाम से जाना जाता है जिसका मतलब है ‘सिंध या सिन्धु के इलाक़े से आया हुआ’। वहाँ नमक के बड़े बड़े पहाड़ है सुरंगे है । वहाँ से ये नमक आता है। मोटे मोटे टुकड़ो मे होता है आजकल पीसा हुआ भी आने लगा है यह ह्रदय के लिये उत्तम, दीपन और पाचन मे मदद रूप, त्रिदोष शामक, शीतवीर्य अर्थात ठंडी तासीर वाला, पचने मे हल्का है । इससे पाचक रस बढ़ते हैं। अतः: आप ये समुद्री नमक के चक्कर से बाहर निकले। काला नमक ,सेंधा नमक प्रयोग करे, क्यूंकि ये प्रकृति का बनाया है, भारत मे 1930 से पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था विदेशी कंपनीयां भारत में नमक के व्यापार मे आज़ादी के पहले से उतरी हुई है , उनके कहने पर ही भारत के अँग्रेजी प्रशासन द्वारा भारत की भोली भाली जनता को आयोडिन मिलाकर समुद्री नमक खिलाया जा रहा है, हुआ ये कि जब ग्लोबलाईसेशन के बाद बहुत सी विदेशी कंपनियों अन्नपूर्णा,कैप्टन कुक ने नमक बेचना शुरू किया तब ये सारा खेल शुरू हुआ ! अब समझिए खेल क्या था ?? खेल ये था कि विदेशी कंपनियो को नमक बेचना है और बहुत मोटा लाभ कमाना है और लूट मचानी है तो पूरे भारत में एक नई बात फैलाई गई कि आयोडीन युक्त नामक खाओ , आयोडीन युक्त नमक खाओ ! आप सबको आयोडीन की कमी हो गई है। ये सेहत के लिए बहुत अच्छा है आदि आदि बातें पूरे देश में प्रायोजित ढंग से फैलाई गई । और जो नमक किसी जमाने में 2 से 3 रूपये किलो में बिकता था । उसकी जगह आयोडीन नमक के नाम पर सीधा भाव पहुँच गया 8 रूपये प्रति किलो और आज तो 20 रूपये को भी पार कर गया है।
दुनिया के 56 देशों ने अतिरिक्त आयोडीन युक्त नमक 40 साल पहले बैन कर दिया अमेरिका में नहीं है जर्मनी मे नहीं है फ्रांस में नहीं ,डेन्मार्क में नहीं , डेन्मार्क की सरकार ने 1956 में आयोडीन युक्त नमक बैन कर दिया क्यों ?? उनकी सरकार ने कहा हमने आयोडीन युक्त नमक खिलाया !(1940 से 1956 तक ) अधिकांश लोग नपुंसक हो गए ! जनसंख्या इतनी कम हो गई कि देश के खत्म होने का खतरा हो गया ! उनके वैज्ञानिकों ने कहा कि आयोडीन युक्त नमक बंद करवाओ तो उन्होने बैन लगाया। और शुरू के दिनों में जब हमारे देश में ये आयोडीन का खेल शुरू हुआ इस देश के बेशर्म नेताओं ने कानून बना दिया कि बिना आयोडीन युक्त नमक भारत में बिक नहीं सकता । वो कुछ समय पूर्व किसी ने कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया और ये बैन हटाया गया।
आज से कुछ वर्ष पहले कोई भी समुद्री नमक नहीं खाता था सब सेंधा नमक ही खाते थे ।
सेंधा नमक के फ़ायदे:- सेंधा नमक के उपयोग से रक्तचाप और बहुत ही गंभीर बीमारियों पर नियन्त्रण रहता है क्योंकि ये अम्लीय नहीं ये क्षारीय है (alkaline) क्षारीय चीज जब अमल मे मिलती है तो वो न्यूटल हो जाता है और रक्त अमलता खत्म होते ही शरीर के 48 रोग ठीक हो जाते हैं, ये नमक शरीर मे पूरी तरह से घुलनशील है । और सेंधा नमक की शुद्धता के कारण आप एक और बात से पहचान सकते हैं कि उपवास ,व्रत में सब सेंधा नमक ही खाते है। तो आप सोचिए जो समुद्री नमक आपके उपवास को अपवित्र कर सकता है वो आपके शरीर के लिए कैसे लाभकारी हो सकता है ??
सेंधा नमक शरीर में 97 पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है ! इन पोषक तत्वों की कमी ना पूरी होने के कारण ही लकवे (paralysis) का अटैक आने का सबसे बडा जोखिम होता है सेंधा नमक के बारे में आयुर्वेद में बोला गया है कि यह आपको इसलिये खाना चाहिए क्योंकि सेंधा नमक वात, पित्त और कफ को दूर करता है।
यह पाचन में सहायक होता है और साथ ही इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है जो हृदय के लिए लाभकारी होता है। यही नहीं आयुर्वेदिक औषधियों में जैसे लवण भास्कर, पाचन चूर्ण आदि में भी प्रयोग किया जाता है।
समुद्री नमक के भयंकर नुकसान :- ये जो समुद्री नमक है आयुर्वेद के अनुसार ये तो अपने आप में ही बहुत खतरनाक है! क्योंकि कंपनियाँ इसमें अतिरिक्त आयोडीन डाल रही है। अब आयोडीन भी दो तरह का होता है एक तो भगवान का बनाया हुआ जो पहले से नमक में होता है । दूसरा होता है “industrial iodine” ये बहुत ही खतरनाक है। तो समुद्री नमक जो पहले से ही खतरनाक है उसमे कंपनिया अतिरिक्त industrial iodine डाल को पूरे देश को बेच रही है। जिससे बहुत सी गंभीर बीमरियां हम लोगों को आ रही है । ये नमक मानव द्वारा फ़ैक्टरियों में निर्मित है।
आम तौर से उपयोग मे लाये जाने वाले समुद्री नमक से उच्च रक्तचाप (high BP ) ,डाइबिटीज़, आदि गंभीर बीमारियो का भी कारण बनता है । इसका एक कारण ये है कि ये नमक अम्लीय (acidic) होता है । जिससे रक्त अम्लता बढ़ती है और रक्त अमलता बढ्ने से ये सब 48 रोग आते है । ये नमक पानी कभी पूरी तरह नहीं घुलता हीरे (diamond ) की तरह चमकता रहता है इसी प्रकार शरीर के अंदर जाकर भी नहीं घुलता और अंत इसी प्रकार किडनी से भी नहीं निकल पाता और पथरी का भी कारण बनता है ।
रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम क्लोराइड ही है शरीर इसे विजातीय पदार्थ के रुप में रखता है। यह शरीर में घुलता नही है। इस नमक में आयोडीन को बनाये रखने के लिए Tricalcium Phosphate, Magnesium Carbonate, Sodium Alumino Silicate जैसे रसायन मिलाये जाते हैं जो सीमेंट बनाने में भी इस्तेमाल होते है। विज्ञान के अनुसार यह रसायन शरीर में रक्त वाहिनियों को कड़ा बनाते हैं, जिससे ब्लाक्स बनने की संभावना और आक्सीजन जाने में परेशानी होती है। जोड़ो का दर्द और गठिया, प्रोस्टेट आदि होती है। आयोडीन नमक से पानी की जरुरत ज्यादा होती है, एक ग्राम नमक अपने से 23 गुना अधिक पानी खींचता है। यह पानी कोशिकाओं के पानी को कम करता है, इसी कारण हमें प्यास ज्यादा लगती है।
आप इस अतिरिक्त आयोडीन युक्त समुद्री नमक खाना छोड़िए और उसकी जगह सेंधा नमक खाइये !! सिर्फ आयोडीन के चक्कर में समुद्री नमक खाना समझदारी नहीं है, क्योंकि जैसा हमने ऊपर बताया आयोडीन हर नमक में होता है सेंधा नमक में भी आयोडीन होता है बस फर्क इतना है इस सेंधा नमक में प्रकृति के द्वारा बनाया आयोडीन होता है इसके इलावा आयोडीन हमें आलू, अरवी के साथ-साथ हरी सब्जियों से भी मिल जाता है..

28/04/2023

धन का अर्थ रूपया पैसा ज़मीन जायदाद मोटर कार बंगला और बैंक बैलेंस होता है, ऐसा सभी लोग समझते हैं
पर असली धन आपका अपना स्वास्थ्य है, स्वास्थ्य के बिना ये सब चीजें आपके कोई काम नहीं आ सकती
हां स्वास्थ्य के लिए ये सब चीजें गंवाकर भी स्वास्थ्य नहीं मिल सकता
अतः स्वस्थ रहना और स्वस्थ रहने की कला सिखो/जानो, यही ही असली धन है..!

25/11/2022

आत्महत्या करने से पहले सब एक नोट लिखते हैं।

लेकिन एक सलाह उनके लिए जो ऐसा करते है....!!!

नोट मत लिखना पहले
एक लंबी सांस लेना और घर से बाहर निकलना
सीधे किसी अस्पताल में जाना
जननी वार्ड कहां है जरा यह पता करना..?
दूर खडे होकर एक मां को बच्चे को जन्म देते हुए देखना
उसकी प्रसव पीड़ा को खुद पर लेकर सहन करके देखना
कैसे वो असहनीय दर्द झेलकर तुम जैसे कल के नौजवान को जन्म देती है

शायद अगर दिल से देखा तो आंखें नम हुई होगी
कुछ आंसू पलकों तक कुछ जमीन पर भी आए होंगे

जाकर उस नन्हे फूल की मां से पूछना इतना दर्द सहन किया कितनी पीड़ा हुई
जवाब आएगा😊😊
मुझे दर्द महसूस हुआ ही नहीं जब मैंने सबसे पहले

उसके रोने की आवाज
उसके स्पर्श को महसूस किया
उस पर कुछ ऐसी मोहित हुई
जब उसे पहली बार दूध पिलाया
वो पीड़ा सारी भूल गई जब
उसको मेरे पास पाया

अभी रुकना नहीं यह देख यह सुनकर अस्पताल से बाहर आना
और उन गलियों की ओर मुड़ जाना जहां छोटे छोटे व्यापारी छोटे छोटे मजदूर दिन भर कमाई करते हैं फिर जरा उनसे वार्तालाप करके आना

पहले शांत मन से उनको देखना
देखना टपकता माथे से पसीना होगा
हाथ और पैरों से कहीं रक्त भी निकल रहा होगा
जो हाथ कल तक कोमल थे वह एक कठोर पत्थर से होंगे
एड़ियां भी उनकी फटी दरारों वाली मिलेगी

फिर उनसे पूछना बाबा इतनी दुर्लभ हालत हो रही है तो इतना काम क्यों यह मेहनत क्यों क्या आराम नहीं कर सकते
फिर बाबा का थकी थकी आवाज में उत्तर आएगा

बेटा मैं थका नहीं
खून बहे या पसीना पर थका नहीं
घर पर इंतजार करते होंगे मेरे बच्चे
जिनका पेट अभी भरा नहीं
मैं जाऊंगा तो खाना वो पकाएगी
हम बैठ कर आराम से उसको खायेंगे

मैं अपने बच्चों के लिए हर दिन काम करने आता हूं
हां थोडा थक जाता हूं शाम को देख कर उनके चेहरे मैं सारी थकान एक पल में भूल जाता हूं

यह सुनकर फिर कदम बढाना फिर घर की ओर जाना जो मां बाबा तुम देख कर आए बाहर उनकी छवि अपनी मां बाबा में देखना

और फिर शांत होकर अपने कमरे में जाना जो नोट लिख रहे थे उसे लिखने की कोशिश करना नोट के शब्द शायद पूरी तरह से बदल जायेंगे
और फिर लिखा जाएगा शायद कुछ ऐसा

मैं चाहता था मरना
पर अब हर पल जीना चाहता हूं
माँ बाबा आपके साथ खुशी खुशी रहना चाहता हूं

गलती हुई है मुझसे ऐसी
जो मैं एक अपराध करने की सोचा
अब मैं बदल गया हूं अब मैं जीना चाहता हूं


आत्महत्या कोई बहादुरी नहीं कायरता की निशानी है
गर्व करो स्वयं पर कि तुमने यह जिंदगी पाई है
जियो और जीने दो कि सीख दो
आत्महत्या नहीं कुछ ऐसा करो की
लोगो को जीने का जज्बा मिले...!

16/11/2022

* #याद_रखने_योग्य_महत्वपूर्ण_बातें:*

1. बीपी: 120/80
2. पल्स: 70 - 100
3. तापमान: 36.8 - 37
4. सांस : 12-16
5. हीमोग्लोबिन: पुरुष - 13.50-18
स्त्री- 11.50 - 16
6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200
7. पोटेशियम: 3.50 - 5
8. सोडियम: 135 - 145
9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220
10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%
11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-120)
वयस्क: 80-130
12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम
13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC: 4000 - 11000
14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000
15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.
16. कैल्शियम: 8.6 - 10.3 मिलीग्राम/डीएल
17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल.
18. विटामिन B12: 200 - 900 पीजी/एमएल.

*वरिष्ठ यानि 40/50/60 वर्ष वालों के लिए विशेष टिप्स:*

*1-पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 3 लीटर न्यूनतम प्रति दिन.

*2-दूसरा सुझाव:* शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर को हिलना चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर, या तैराकी या किसी भी प्रकार के खेल से।

*3-तीसरा सुझाव:* खाना कम करो...अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें... क्योंकि यह कभी अच्छा नहीं लाता है। अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।

*4-चौथा सुझाव:* जितना हो सके वाहनका प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें। लिफ्ट, एस्केलेटर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।

*5-पांचवां सुझाव* क्रोध छोड़ो, चिंता छोड़ो,चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो. विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें, वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं। सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें।

*6-छठा सुझाव* सबसे पहले पैसे का मोह छोड़ दे
अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!पैसा जीने के लिए बनाया गया था, जीवन पैसे के लिए नहीं।

*7-सातवां सुझाव* अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते।
इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।

*8-आठवां सुझाव* पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव;
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं. विनम्रता वह है जो लोगों को प्यारसे आपके करीब लाती है।

*9-नौवां सुझाव* अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है। यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!

*10-दसवां सुझाव* अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें! चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें !
अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें!

*स्वस्थ रहो, मस्त रहो*
*खूब हँसें और हँसाये*
क्योंकि
*हँसी फ़्री का हेल्थ टॉनिक है , इसका भरपूर उपयोग कीजिये*
🤣😀😄😂😊

*करो योग, रहो निरोगः*

*वन्देमातरम*

07/11/2022

#ज़िंदगी_का_गणित

12/10/2022

*याद रखने योग्य महत्वपूर्ण बातें:*
1. बीपी: 120/80
2. पल्स: 70 - 100
3. तापमान: 36.8 - 37
4. सांस : 12-16
5. हीमोग्लोबिन: पुरुष -13.50-18
स्त्री- 11.50 - 16
6. कोलेस्ट्रॉल: 130 - 200
7. पोटेशियम: 3.50 - 5
8. सोडियम: 135 - 145
9. ट्राइग्लिसराइड्स: 220
10. शरीर में खून की मात्रा: पीसीवी 30-40%
11. शुगर लेवल: बच्चों के लिए (70-130)
वयस्क: 70 - 115
12. आयरन: 8-15 मिलीग्राम
13. श्वेत रक्त कोशिकाएं WBC: 4000 - 11000
14. प्लेटलेट्स: 1,50,000 - 4,00,000

15. लाल रक्त कोशिकाएं RBC: 4.50 - 6 मिलियन.
16. कैल्शियम: 8.6 -10.3 मिलीग्राम/डीएल
17. विटामिन D3: 20 - 50 एनजी/एमएल.
18. विटामिन B12: 200 - 900 पीजी/एमएल.

*वरिष्ठ यानि 40/ 50/ 60 वर्ष वालों के लिए विशेष टिप्स:*
*1- पहला सुझाव:* प्यास न लगे या जरूरत न हो तो भी हमेशा पानी पिएं, सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याएं और उनमें से ज्यादातर शरीर में पानी की कमी से होती हैं। 2 लीटर न्यूनतम प्रति दिन.
*2- दूसरा सुझाव:* शरीर से अधिक से अधिक काम ले, शरीर को हिलना चाहिए, भले ही केवल पैदल चलकर, या तैराकी या किसी भी प्रकार के खेल से।
*3-तीसरा सुझाव:* खाना कम करो...अधिक भोजन की लालसा को छोड़ दें... क्योंकि यह कभी अच्छा नहीं लाता है। अपने आप को वंचित न करें, लेकिन मात्रा कम करें। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आधारित खाद्य पदार्थों का अधिक प्रयोग करें।
*4- चौथा सुझाव:* जितना हो सके वाहनका प्रयोग तब तक न करें जब तक कि अत्यंत आवश्यक न हो. आप कहीं जाते हैं किराना लेने, किसी से मिलने या किसी काम के लिए अपने पैरों पर चलने की कोशिश करें। लिफ्ट, एस्केलेटर का उपयोग करने के बजाय सीढ़ियां चढ़ें।
*5- पांचवां सुझाव* क्रोध छोड़ो, चिंता छोड़ो,चीजों को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश करो. विक्षोभ की स्थितियों में स्वयं को शामिल न करें, वे सभी स्वास्थ्य को कम करते हैं और आत्मा के वैभव को छीन लेते हैं। सकारात्मक लोगों से बात करें और उनकी बात सुनें।
*6- छठा सुझाव* सबसे पहले पैसे का मोह छोड़ दे
अपने आस-पास के लोगो से खूब मिलें जुलें हंसें बोलें!पैसा जीने के लिए बनाया गया था, जीवन पैसे के लिए नहीं।
*7-सातवां सुझाव* अपने आप के लिए किसी तरह का अफ़सोस महसूस न करें, न ही किसी ऐसी चीज़ पर जिसे आप हासिल नहीं कर सके, और न ही ऐसी किसी चीज़ पर जिसे आप अपना नहीं सकते।
इसे अनदेखा करें और इसे भूल जाएं।
*8- आठवां सुझाव* पैसा, पद, प्रतिष्ठा, शक्ति, सुन्दरता, जाति की ठसक और प्रभाव;
ये सभी चीजें हैं जो अहंकार से भर देती हैं. विनम्रता वह है जो लोगों को प्यारसे आपके करीब लाती है।
*9- नौवां सुझाव* अगर आपके बाल सफेद हो गए हैं, तो इसका मतलब जीवन का अंत नहीं है। यह एक बेहतर जीवन की शुरुआत हो चुकी है। आशावादी बनो, याद के साथ जियो, यात्रा करो, आनंद लो। यादें बनाओ!
*10- दसवां सुझाव* अपने से छोटों से भी प्रेम, सहानुभूति ओर अपनेपन से मिलें! कोई व्यंग्यात्मक बात न कहें! चेहरे पर मुस्कुराहट बनाकर रखें !
अतीत में आप चाहे कितने ही बड़े पद पर रहे हों वर्तमान में उसे भूल जाये और सबसे मिलजुलकर रहें!
स्वस्थ रहें, व्यस्त रहें और मस्त रहें।

09/10/2022
08/10/2022

2022 का मेडिसिन/फिजियोलॉजी का नोबेल पुरस्कार डॉ. स्वांते पेबो को मिला है।
और इन्होंने खोजा क्या है?
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आज के समय विज्ञान मानता है कि आधुनिक मानव यानि होमो सेपियंस यानि हम लोग इस धरती पर सबसे पहले अफ्रीका में 300000 साल पहले दिखाई दिए थे। लेकिन हमसे पहले एक अन्य मानव प्रजाति अफ्रीका से बाहर विचरण कर रही थी। यह प्रजाति थी नियंडरथल मानवों की। नियंडरथल मानव 400000 लाख साल पहले धरती पर आये थे और यूरोप व एशिया के अधिकतर भूभाग में फैले हुए थे।

लगभग 70000 साल पहले आधुनिक मानवों ने अफ्रीका से एशिया की धरती पर कदम रखा था। आज से 30000 हजार साल पहले नियंडरथल मानव विलुप्त हो गए। तो इसका मतलब यह हुआ कि लगभग 40000 साल तक होमो सेपियंस और नियंडरथल मानव एक साथ यूरोप और एशिया में विचरण कर रहे थे।

1990 के दशक में वैज्ञानिकों ने मानव के जेनेटिक कोड को देखना शुरू किया। इसके लिए नए नए औजार और नई तकनीकें विकसित हो रही थी। डॉ स्वांते पेबो ने इन्हीं औजारों और तकनीकों की मदद से नियंडरथल मानव के जेनेटिक कोड का अध्ययन करने करने लगे। लेकिन ये तकनीकें नियंडरथल मानव के डीएनए को समझने के लिए कारगर सिद्ध नहीं हो रही थीं क्योंकि नियंडरथल का डीएनए पूर्ण अवस्था में मिलता ही नहीं था।

म्युनिख विश्वविद्यालय में काम करते हुए डॉ पेबो ने माईटोकॉन्डरिया (हमारी कोशिकाओं में मौजूद एक विशेष संरचना जिसे कोशिका का पावर हाउस भी कहा जाता है) में मौजूद डीएनए का अध्ययन करने पर ध्यान केंद्रित किया। हालांकि माईटोकॉन्डरिया के डीएनए में कोशिका के डीएनए से कम जानकारी होती है लेकिन नियंडरथल के केस में यह कोशिका के डीएनए से ज्यादा अच्छी हालत में मिल रहा था इसलिए सफलता की संभावना ज्यादा हो गई थी।
अपनी नई तकनीक के द्वारा पेबो ने नियंडरथल मानव की एक 40000 हजार साल पुरानी हड्डी के माईटोकॉन्डरिया के डीएनए का सीक्वेन्स बनाने में सफलता हासिल कर ली। और यह पहला सबूत था जो यह बताता है कि आधुनिक मानव नियंडरथल से जेनेटिक तौर पर भिन्न है। यानि यह एक भिन्न प्रजाति है।
2010 में पेबो और उनकी टीम ने नियंडरथल का पहला जेनेटिक सीक्वेन्स छापा। पेबो की इस खोज ने हमें यह बताया कि आज से आठ लाख साल पहले हमारा यानि होमो सेपियंस और नियंडरथल मानव का एक कॉमन पूर्वज इस धरती पर था।

पेबो और उनकी टीम को आधुनिक मानव के डीएनए में नियंडरथल के डीएनए के अंश भी मिले जिससे यह पता चलता है आधुनिक मानव और नियंडरथल मानव के बीच में इंटरब्रीडिंग होती रही है।

लेकिन सिर्फ यही काफ़ी नहीं था। पेबो को दक्षिणी साइबेरिया की एक गुफा में 40000 साल पुरानी इंसानी ऊँगली की हड्डी मिली थी। जब पेबो ने इसकी डीएनए सीक्वेन्सिंग की तो उन्हें कुछ ऐसा मिला जोकि आज तक किसी को नहीं मिला था। इस हड्डी का डीएनए न तो नियंडरथल के डीएनए से मिलता था और न ही आधुनिक मानव के डीएनए से। यह मानव की एक सर्वथा नई प्रजाति थी। इस नई प्रजाति को डेनिसोवा नाम दिया गया क्योंकि जिस जगह यह हड्डी मिली थी उस जगह को डेनिसोवा ही कहा जाता है। डेनिसोवा और नियंडरथल लगभग 600000 साल पहले एक दूसरे से अलग हुए थे।
लेकिन अभी एक महत्वपूर्ण खोज और बाक़ी थी। दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों में से 6% में डेनिसोवा मानव के डीएनए के अंश भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इन दोनों समूहों के बीच भी सम्पर्क रहा होगा।

बहरहाल इन खोजों ने हमारे पूर्वजों के बारे में हमारी जानकारी को विकसित किया है। साथ ही इनसे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास को समझने में भी मदद मिली है।

तीस साल पहले शुरू हुई विज्ञान की इस नई शाखा ने अब फल देने शुरू किये हैं, उम्मीद है कि आगे भी मानव अपने ज्ञान का दायरा बढ़ाता रहेगा।

इसके अलावा एक और बात। डॉ स्वांते पेबो 1982 के फिजियोलॉजी/मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार विजेता सुनये बेर्गस्त्रोम के पुत्र हैं। सुनये बेर्गस्त्रोम को नोबेल पुरस्कार प्रोस्टाग्लैंडिन नामक एक बायोकेमिकल के ऊपर उनके काम के लिए मिला था।

#नोबेलपुरस्कार

05/10/2022

प्राचीन समय भारत मे कभी छुआछुत रहा ही नहीं, और ना ही कभी जातियाँ भेदभाव का कारण होती थी।
चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।

सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे, पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।

विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे, हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।

भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।

श्री कृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,

उनके भाई बलराम खेती करते थे, हमेशा हल साथ रखते थे।

यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्री कृष्ण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।

राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे।

उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे

तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।

वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे, जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।

प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे ।

नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये।

उसके बाद मौर्य वंश का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे और एक ब्राह्मण चाणक्य ने उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।

फिर गुप्त वंश का राज हुआ, जो कि घोड़े का अस्तबल चलाते थे और घोड़ों का व्यापार करते थे।140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।

केवल पुष्यमित्र शुंग के 36 साल के राज को छोड़ कर 92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया? यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।

फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम आक्रमणकारियो का समय रहा और कुछ स्थानों पर उनका शासन भी चला।

अंत में मराठों का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने गाय चराने वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया, चरवाहा जाति के होलकर को मालवा का राजा बनाया।

अहिल्या बाई होलकर खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थी। ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये।

मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे और रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद थे|।

यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।

मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई और यहां से पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह जैसी चीजें शुरू होती हैं।

1800 -1947 तक अंग्रेजो के शासन रहा और यहीं से जातिवाद शुरू हुआ । जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया।

अंग्रेज अधिकारी निकोलस डार्क की किताब "कास्ट ऑफ़ माइंड" में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।

इन हजारों सालों के इतिहास में देश में कई विदेशी आये जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि मेगास्थनीज ने इंडिका लिखी, फाहियान, ह्यू सांग और अलबरूनी जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था।

योगी आदित्यनाथ जो ब्राह्मण नहीं हैं, गोरखपुर मंदिर के महंत हैं, पिछड़ी जाति की उमा भारती महा मंडलेश्वर रही हैं। जन्म आधारित जाति को छुआछुत व्यवस्था हिन्दुओ को कमजोर करने के लिए लाई गई थी।

इसलिए भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्रों से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं।

पहले तसला, भगौना, पतीला (खुला बर्तन) में दाल-भात बनता था, अदहन जब अनाज के साथ उबलता था तो बार-बार एक मोटे झाग की परत जमा...
07/06/2022

पहले तसला, भगौना, पतीला (खुला बर्तन) में दाल-भात बनता था, अदहन जब अनाज के साथ उबलता था तो बार-बार एक मोटे झाग की परत जमा करती थी, जिसे अम्मा रह-रह के निकाल के फेक दिया करती थी। पूछने पर कहती कि "ई से तबियत खराब होत है'....
बाद में बड़े होने पर पता चला वो झाग शरीर मे यूरिक_एसिड बढ़ाता है और अम्मा इसीलिए वो झाग फेंक दिया करती थी। अम्मा ज्यादा पढ़ी लिखी तो नही थी पर ये चीज़े उन्होंने नानी से और नानी ने अपनी माँ से सीखा था।
अब कूकर में दाल-भात बनता है, पता नही झाग कहा जाता होगा, ज्यादा दाल खाने से पेट भी खराब हो जाते हैं
डॉक्टर कहते हैं एसिडिटी है
पुराने ज्ञान को याद करिये विज्ञान छुपा है उसमे 😔

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