01/10/2023
#मानसिक_रोग_और_ज्योतिष
वात पित्त और कफ के विकार से उत्पन्न अथवा इनमे से कोई दो के आपस मे मिलने से ..या ऊपर नीचे होने से बनने वाले रोगों को शारीरिक रोग कहा जाता है
(त्रिदोष imbalance)
जातक पारिजात के अनुसार ग्रहों की भी मानसिक स्तिथिया होती है
ये 10 तरह की होती है
1- दीप्त
2- प्रमुदित
3-स्वस्थ
4-शांत
5- शक्त
6-प्रपीडित
7-दीन
8-खल
9-विकल
10-भीत
महर्षि पतंजलि ने भी चित्त के क्लेशो के पांच कारण बताए है
1- अविधा - यथार्थ का उचित ज्ञान ना होना
2- अस्मिता- अहंकार के अनुचित प्रयोग को अस्मिता कहते है
3-राग- किसी चीज़ से अत्यधिक आसक्ति को राग कहते है
4- द्वेष - अपने को दैनिय स्तिथि में देखने से दूसरों के प्रति ईर्ष्या की भावना
5- अभिनिवेश- हमेशा म्रत्यु के भय का आभास होना ,
6-आलस- चित्त और शरीर मे भारीपन हो जाना आलस्य है
मानस दुःखज- इस तरह का उन्माद Enemies के डर से ,बहुत ज्यादा अभिलाषाओं के पूरा ना होने से पैदा होता है
आदि कारण मानसिक रोगों के या मानसिक कमजोरी के कारण बनते है
मानसिक रोगों के बारे में कहा गया है कि क्रोध, हर्ष, और शोक आदि आवेगों से उतपन्न रोग मानसिक रोग कहलाते है
जड़ता
चंद्रमा+शनि+गुलिक केंद्र में हो तो व्यक्ति जड़बुध्दि होता है
5वे भाव मे शनि+राहु हो तो भी व्यक्ति जड़ बुध्दि होता है
देखा ये भी गया है कि चर लग्न हो 6th लॉर्ड और राहु देखते हो मंगल 11वे भाव मे हो तो अभिचार यानी (मंत्रादि प्रयोग) से व्यक्ति के शत्रु उसे पागल करने की कोशिश करते है l
कम्जोर चंद्रमा शनि के साथ 12वे भाव मे हो.
कम्जोर चंद्रमा शनि के साथ हो और मंगल उसे देखता हो.
चन्द्र +शनि की युति हो और राहू उसे देखता हो.
मंगल चौथे भाव मे हो और शनि उसे देखता हो.
6ठे भाव का स्वामी व शनि दोनो एक साथ लगन मे हो.
मंगल+बुध 6ठे या 8वे भाव मे हो.
मंगल 3रे भाव मे हो और पापी ग्र्हो से प्रभावित हो.
कन्या लगन मे शनि और राहू एक साथ होने पर.
चंद्रमा और बुध एक साथ केंद्र मे हो और पाप ग्रहो से द्रस्त हो
इंसान स्वस्थ मन और बुध्दि से ही जीवन की यात्रा सम्पन्न कर सकता है और अगर ये ही डिस्टर्ब हो जाये तो जिंदगी अधूरी सी रह जाती है ।