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05/06/2023
১. "বই বিশ্বাসের অঙ্গ, বই মানব সমাজকে টিকিয়ে রাখবার জন্য জ্ঞান দান করে । অতএব, বই হল সভ্যতার রক্ষাকবচ ।" - ভিক্টর হুগো ...
10/10/2022

১. "বই বিশ্বাসের অঙ্গ, বই মানব সমাজকে টিকিয়ে রাখবার জন্য জ্ঞান দান করে । অতএব, বই হল সভ্যতার রক্ষাকবচ ।" - ভিক্টর হুগো (বিখ্যাত ফরাসি সাহিত্যিক, রাজনীতিবিদ এবং মানবাধিকারকর্মী)

২. "ভালো বইয়ের সাহচর্য আছে এমন কোন মানুষকে বন্ধুহীন বলা যায় না ।" - এলিজাবেথ ব্যারেট (ভিক্টোরিয় যুগের বিখ্যাত ইংরেজ কবি)

৩. "আপনি একবার পড়তে শিখলে, আপনি চিরতরে মুক্ত হবেন ।" - ফ্রেডরিক ডগলাস (আমেরিকার বিখ্যাত সমাজকর্মী, মানবাধিকারকর্মী ও লেখক)

৪. "যারা সাধারণের ঊর্ধ্বে উঠতে চায় তাদের জন্য পড়া অপরিহার্য ।" - জিম রোহন (আমেরিকান উদ্যোক্তা, লেখক ও প্রেরণাদায়ক বক্তা)

৫. "ভালো খাদ্য বস্তু পেট ভর্তি করে, কিন্ত ভালো বই মানুষের আত্মাকে পরিতৃপ্ত করে ।" – স্পিনোজা (সপ্তদশ শতকের বিখ্যাত ইউরোপীয় দার্শনিক)

৬. "ভালো বই পড়া মানে গত শতাব্দীর সেরা মানুষদের সাথে কথা বলা ।" - দেকার্তে (বিখ্যাত ফরাসি দার্শনিক গণিতবিদ ও বৈজ্ঞানিক)

৭. "পড়ার অভ্যাস অর্জন করা মানে জীবনের প্রায় সমস্ত দুঃখ-কষ্ট থেকে নিজের জন্য আশ্রয় তৈরি করা ।" - ডব্লিউ সমারসেট (বিখ্যাত ইংরেজ ঔপন্যাসিক, নাট্যকার এবং ছোটগল্প লেখক)

৮. "আপনি যতো বেশী পড়বেন, ততো বেশি জিনিস আপনি জানতে পারবেন । আপনি যতো বেশি শিখবেন, ততো বেশী জায়গায় যাবেন ।" - ডাঃ সেউস (আমেরিকার বিখ্যাত শিশুসাহিত্যিক)

৯. "আপনাকে মনে রাখতে হবে যে, একটি বই পড়ার সময় অপরাধ করা অসম্ভব ।" - জন ওয়াটার্স (আমেরিকার বিখ্যাত চলচ্চিত্রকার, লেখক ও শিল্পী)

১০. "শুধুমাত্র পাঠকদের একটি প্রজন্ম লেখকদের একটি প্রজন্মের জন্ম দেবে ।" - স্টিভেন স্পিলবার্গ (আমেরিকার বিখ্যাত চলচ্চিত্রকার)

১১. "পড়ুন । পড়ুন । পড়ুন । শুধু এক ধরনের বই পড়বেন না । বিভিন্ন লেখকের বিভিন্ন বই পড়ুন, যাতে আপনি বিভিন্ন শৈলীর বিকাশ করেন ।" – আর এল স্টাইন (আমেরিকার বিখ্যাত ঔপন্যাসিক এবং ছোটগল্পকার)

১২. "বই হল সবচেয়ে শান্ত এবং সবচেয়ে ধ্রুবক বন্ধু; তারা পরামর্শ দাতাদের মধ্যে সবচেয়ে সহজলভ্য এবং জ্ঞানী এবং শিক্ষকদের মধ্যে সবচেয়ে ধৈর্যশীল ।" - চার্লস ডব্লিউ এলিয়ট (বিখ্যাত আমেরিকান লেখক)

১৩. "পৃথিবী তাদেরই যারা পড়ে ।" - রিক হল্যান্ড (বিখ্যাত ইংরেজ কবি ও শিল্পী)

১৪. "বই পড়তে যে ভালোবাসে, তার শত্রু কম ।" - চার্লস ল্যাম্ব (অষ্টাদশ শতাব্দীর বিখ্যাত ইংরেজ সাহিত্যিক)

১৫. "আইনের মৃত্যু হয়, কিন্তু বইয়ের মৃত্যু হয় না ।" - এনড্রিউ ল্যাঙ (স্কটিস কবি, ঔপন্যাসিক ও সাহিত্য সমালোচক)

১৬. "যে বই পড়ে না, তার মধ্যে মর্যাদাবোধ জন্ম নেয় না ।" - পিয়ারসন স্মিথ (বিখ্যাত আমেরিকান কবি ও সঙ্গীতজ্ঞ)

১৭. "বইয়ের মত এত বিশ্বস্ত বন্ধু আর নেই ।" - আর্নেস্ট হেমিংওয়ে (আমেরিকান ঔপন্যাসিক, ছোটগল্পকার ও সাংবাদিক)

১৮. "বই হচ্ছে অতীত আর বর্তমানের মধ্যে বেঁধে দেয়া সাঁকো । - বিশ্বকবি রবীন্দ্রনাথ ঠাকুর (ভারত তথা বিশ্বের সর্বশ্রেষ্ঠ কবি-সাহিত্যিক)

১৯. "জীবনে তিনটি জিনিসের প্রয়োজন- বই, বই এবং বই ।" - ডক্টর মুহম্মদ শহীদুল্লাহ (বিখ্যাত বাঙালি সাহিত্যিক, দার্শনিক ও বহুভাষাবিদ)

২০. "পড়তে শেখা মানে আগুন জ্বালানো; বানান করা প্রতিটি শব্দাংশ একটি স্ফুলিঙ্গ ।" - ভিক্টর হুগো (বিখ্যাত ফরাসি সাহিত্যিক, রাজনীতিবিদ এবং মানবাধিকারকর্মী)

হেল্প ফুল টিপস
08/09/2022

হেল্প ফুল টিপস

Nature answers for your perfect healthGeneral health for  Phisical and mental fatigue  in joint Pain
24/08/2022

Nature answers for your perfect health
General health for
Phisical and mental fatigue
in joint Pain

শিশুকে হোম মেইড সেরেলাক কেনো খাওয়াবেনঃসেরেলাক স্টেজ ঃ২বয়সসীমাঃ১২ মাস থেকে যেকোনো বয়সের বাচ্চাদের       🔸এতে আছে কয়েক প্র...
24/08/2022

শিশুকে হোম মেইড সেরেলাক কেনো খাওয়াবেনঃ

সেরেলাক স্টেজ ঃ২
বয়সসীমাঃ১২ মাস থেকে যেকোনো বয়সের বাচ্চাদের

🔸এতে আছে কয়েক প্রকারের বাদাম যা আপনার শিশুর মস্তিষ্ক বিকাশ এবং ওজন ও উচ্চতা বৃদ্ধিতে সহায়তা করে।

🔸 এটি পরিচ্ছন্ন পরিবেশে তৈরি হয় এবং এতে বাড়তি কোনো ফ্লেভার দেওয়া হয় না তাই এটি শিশুদের জন্য নিরাপদ।

🔸 এটি শিশুদের স্ট্যমিনা বাড়িয়ে রোগ প্রতিরোধ ক্ষমতা বৃদ্ধি করে।

🔸 এতে আছে শরীরে প্রয়োজনীয় প্রায় সবধরনের পুষ্টি উপাদান। যেমন- খনিজ পদার্থ, আশ,ফাইবার, প্রোটিন,ক্যোরোটিন,ভিটামিন - এ,বি,সি,ডি,অ্যান্টি অক্সিডেন্ট,ক্যলসিয়াম,সোডিয়াম, পটাশিয়াম, ফ্যট এবং প্রচুর পরিমানে ক্যালরি যা একটি শিশুর শরীরের সব ধরনের পুষ্টি চাহিদা নিশ্চিত করে।

🍀 দোকান থেকে কিনা সেরেলাক এ স্বাদ ও ফ্লেভার বৃদ্ধির জন্য বিভিন্ন ধরনের কেমিক্যাল ব্যবহার করা হয়,যা শিশুর জন্য ক্ষতিকর।দোকানের কেনা সেরেলাকের মধ্যে দীর্ঘ দিন ভালো থাকার জন্য প্রিজারভেটিভ ও কেমিক্যাল ব্যবহার করা হয়। দ্রুত মোটা হওয়ার জন্য অ্যালকোহল ব্যবহার করা হয় যা শিশুর শরীরে উপকারের চেয়ে ক্ষতি করে বেশি।🍀

♦️ তাই শিশুর সুস্থ ভাবে বেড়ে ওঠা নিশ্চিত করতে হোম মেইড সেরেলাক খাওয়াতে পারেন। ♦️

25/05/2022

भ्रूण से मानव शिशु की उत्पत्ति

एक चमत्कारी औषधि दूधी:- 💚परिचय:-छोटी पहाड़ियों तथा मैदानी भागों में दूधी के अपने आप उत्पन्न हुए क्षुप (झाड़ीनुमा पौधे) प...
25/05/2022

एक चमत्कारी औषधि दूधी:-

💚परिचय:-
छोटी पहाड़ियों तथा मैदानी भागों में दूधी के अपने आप उत्पन्न हुए क्षुप (झाड़ीनुमा पौधे) पाये जाते हैं। दूधी का एक प्रकार और होता है जिसे सफेद दूधी कहते हैं। रंगों की दृष्टि से छोटी दूधी भी सफेद तथा लाल दो प्रकार की होती है। दूधी की कोमल शाखाओं को तोड़ने से सफेद दूध जैसा पदार्थ निकलता है।

💚स्वरूप:-
छोटी दूधी का क्षुप जमीन पर छत्ते की तरह फैला रहता है। इसकी जड़ से अनेक पतली शाखाएं निकलकर चारों तरफ फैल जाती हैं। लाल दूधी की शाखाएं लाल रंग की तथा सफेद दूधी की शाखाएं सफेद रंग की होती हैं। इसके फूल हरे या गुलाबी गुच्छों में लगते हैं तथा फल और बीज दोनों ही बहुत छोटे होते हैं। बड़ी दूधी का क्षुप 1-2 फुट ऊंचा होता है।

💚विभिन्न भाषाओं में नाम-
हिन्दी- दूधी, दूधिया घास
अंग्रेजी- मिल्क एडज
संस्कृत- दुग्धिका, नागार्जुनी
हिन्दी- दूधी, दूधिया घास
गुजराती- दुधेली, नानी
पंजाबी- दुधी, दोधक
अरबी- फाशरा
फारसी- शीरेगियाह, शीरक
मराठी- लाहन, नायटी

💜गुण:-
दूधी तीखी, मलरोधक, गर्म, भारी, रूक्ष, वातकारक, स्वादिष्ट, वीर्यवर्द्धक, मल व कीड़ों को खत्म करने वाली है।

💜वर्णन:-
इनके 3 प्रकार हैं। लेकिन छोटी व बड़ी कहकर इससे दो भागों में बांटा गया है। बड़ी लाल रंग की चौड़े पत्ते वाली होती है और इनके पत्ते तोड़ने पर दूध निकलता है। यह जमीन से डेढ़ हाथ तक ऊंचा होता है। इनके पत्ते का रंग हरा होता है। छोटी दूधी के पत्ते छोटे होते हैं। परन्तु जमीन पर छत्ते की तरह फैल जाते हैं। एक अन्य दुधी नुकीले पत्तों वाली होती है।

💜औषधीय गुण-
अधिकतर औषधीय गुण छोटी दूधी में पाए जाते है

💚2 ग्राम दूधी की जड़ को पान में रखकर चूसने से हकलेपन के रोग में लाभ मिलता है, यह लगातार 15 दिन करे, फिर 5 दिन छोड़कर 15 दिन ,कुल 2 माह तक

💚छाया में सुखाई हुई दूधी में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर खूब बारीक चूर्ण कर लेते हैं। इसे रोजाना सुबह और शाम 1 चम्मच दूध के साथ लेने से नकसीर तथा गर्मी दूर हो जाती है,इसे केवल 1 माह करें

💚चेहरे के कील-मुंहासे और दाद पर दूधी का दूध लगाने से लाभ होता है।

💚जब किसी माँ के स्तनों में दूध आना बंद हो जाए तो इसका दूध आधा ग्राम से 1 ग्राम की मात्रा में 10-20 दिन सुबह-शाम पिलाने से स्त्री के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

💚दूधी के पंचांग (फल, फूल, जड़, तना और पत्ते) का रस निकालकर 10 से 20 बूंदों को लेकर या पंचांग के बारीक चूर्ण को लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लेकर लगभग आधा ग्राम की मात्रा में पीने से स्त्री के स्तनों में दूध की वृद्धि होती हैं।

💚5 से 10 ग्राम दूधी के पंचांग के काढ़े या रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से दमा का रोग ठीक हो जाता है।

💚2 ग्राम दूधी के पत्तों का चूर्ण या बीजों की फंकी देने से बच्चों के अतिसार (दस्त) में लाभ होता है तथा पेट के कीड़े भी मर जाते हैं।

💚जड सहित 11 पौधे दुध्धी और 11 काली मिर्च पीस कर प्रातः निहार मुख पिलाने से खूनी पेचिस में तुरन्त लाभ होता है ।

💚5 ग्राम दूधी का रस शहद में मिलाकर सांस और दमा रोगों में लाभ होता है

इलाज से बेहतर बचाव है
स्वदेशी बने प्रकृति से जुड़े
धन्यवाद
🙏

यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान स...
23/05/2022

यह पौधा पेट की लटकती चर्बी, सड़े हुए दाँत, गठिया, आस्थमा, बवासीर, मोटापा, गंजापन, किडनी आदि 20 रोगों के लिए किसी वरदान से कम नही

आज हम आपको ऐसे पौधे के बारे में बताएँगे जिसका तना, पत्ती, बीज, फूल, और जड़ पौधे का हर हिस्सा औषधि है, इस पौधे को अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree), लटजीरा कहते है। अपामार्ग या चिरचिटा (Chaff Tree) का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा (Chaff Tree) भी कहते हैं-अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं-सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग (RedChaff Tree) का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं।

इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है- पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है।

अपामार्ग तीखा, कडुवा तथा प्रकृति में गर्म होता है। यह पाचनशक्तिवर्द्धक, दस्तावर (दस्त लाने वाला), रुचिकारक, दर्द-निवारक, विष, कृमि व पथरी नाशक, रक्तशोधक (खून को साफ करने वाला), बुखारनाशक, श्वास रोग नाशक, भूख को नियंत्रित करने वाला होता है तथा सुखपूर्वक प्रसव हेतु एवं गर्भधारण में उपयोगी है।
चिरचिटा या अपामार्ग (Chaff Tree) के 20 अद्भुत फ़ायदे :
1. गठिया रोग :

अपामार्ग (चिचड़ा) के पत्ते को पीसकर, गर्म करके गठिया में बांधने से दर्द व सूजन दूर होती है।

2. पित्त की पथरी :

पित्त की पथरी में चिरचिटा की जड़ आधा से 10 ग्राम कालीमिर्च के साथ या जड़ का काढ़ा कालीमिर्च के साथ 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से पूरा लाभ होता है। काढ़ा अगर गर्म-गर्म ही खायें तो लाभ होगा।

3. यकृत का बढ़ना :

अपामार्ग का क्षार मठ्ठे के साथ एक चुटकी की मात्रा से बच्चे को देने से बच्चे की यकृत रोग के मिट जाते हैं।

4. लकवा :

एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है।

5. पेट का बढ़ा होना या लटकना :

चिरचिटा (अपामार्ग) की जड़ 5 ग्राम से लेकर 10 ग्राम या जड़ का काढ़ा 15 ग्राम से 50 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम कालीमिर्च के साथ खाना खाने से पहले पीने से आमाशय का ढीलापन में कमी आकर पेट का आकार कम हो जाता है।

6. बवासीर :

अपामार्ग की 6 पत्तियां, कालीमिर्च 5 पीस को जल के साथ पीस छानकर सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ हो जाता है और उसमें बहने वाला रक्त रुक जाता है।
खूनी बवासीर पर अपामार्ग की 10 से 20 ग्राम जड़ को चावल के पानी के साथ पीस-छानकर 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाना गुणकारी हैं।

7. मोटापा :

अधिक भोजन करने के कारण जिनका वजन बढ़ रहा हो, उन्हें भूख कम करने के लिए अपामार्ग के बीजों को चावलों के समान भात या खीर बनाकर नियमित सेवन करना चाहिए। इसके प्रयोग से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे घटने भी लगेगी।

8. कमजोरी :

अपामार्ग के बीजों को भूनकर इसमें बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर पीस लें। 1 कप दूध के साथ 2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित सेवन करने से शरीर में पुष्टता आती है।

9. सिर में दर्द :

अपामार्ग की जड़ को पानी में घिसकर बनाए लेप को मस्तक पर लगाने से सिर दर्द दूर होता है।

10. संतान प्राप्ति :

अपामार्ग की जड़ के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित रूप से 21 दिन तक सेवन करने से गर्मधारण होता है। दूसरे प्रयोग के रूप में ताजे पत्तों के 2 चम्मच रस को 1 कप दूध के साथ मासिक-स्राव के बाद नियमित सेवन से भी गर्भ स्थिति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

11. मलेरिया :

अपामार्ग के पत्ते और कालीमिर्च बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें, फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ मिलाकर मटर के दानों के बराबर की गोलियां तैयार कर लें। जब मलेरिया फैल रहा हो, उन दिनों एक-एक गोली सुबह-शाम भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से इस ज्वर का शरीर पर आक्रमण नहीं होगा। इन गोलियों का दो-चार दिन सेवन पर्याप्त होता है।

12. गंजापन :

सरसों के तेल में अपामार्ग के पत्तों को जलाकर मसल लें और मलहम बना लें। इसे गंजे स्थानों पर नियमित रूप से लेप करते रहने से पुन: बाल उगने की संभावना होगी।

13. दांतों का दर्द और गुहा या खाँच (cavity) :

इसके 2-3 पत्तों के रस में रूई का फोया बनाकर दांतों में लगाने से दांतों के दर्द में लाभ पहुंचता है तथा पुरानी से पुरानी गुहा या खाँच को भरने में मदद करता है।

14. खुजली :

अपामार्ग के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल और फल) को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार करें और इससे स्नान करें। नियमित रूप से स्नान करते रहने से कुछ ही दिनों cavity में खुजली दूर जाएगी।

15. आधाशीशी या आधे सिर में दर्द :

इसके बीजों के चूर्ण को सूंघने मात्र से ही आधाशीशी, मस्तक की जड़ता में आराम मिलता है। इस चूर्ण को सुंघाने से मस्तक के अंदर जमा हुआ कफ पतला होकर नाक के द्वारा निकल जाता है और वहां पर पैदा हुए कीड़े भी झड़ जाते हैं।

16. ब्रोंकाइटिस :

जीर्ण कफ विकारों और वायु प्रणाली दोषों में अपामार्ग (चिरचिटा) की क्षार, पिप्पली, अतीस, कुपील, घी और शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से वायु प्रणाली शोथ (ब्रोंकाइटिस) में पूर्ण लाभ मिलता है।

17. खांसी :

खांसी बार-बार परेशान करती हो, कफ निकलने में कष्ट हो, कफ गाढ़ा व लेसदार हो गया हो, इस अवस्था में या न्यूमोनिया की अवस्था में आधा ग्राम अपामार्ग क्षार व आधा ग्राम शर्करा दोनों को 30 मिलीलीटर गर्म पानी में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 7 दिन में बहुत ही लाभ होता है।

18. गुर्दे का दर्द :

अपामार्ग (चिरचिटा) की 5-10 ग्राम ताजी जड़ को पानी में घोलकर पिलाने से बड़ा लाभ होता है। यह औषधि मूत्राशय की पथरी को टुकड़े-टुकड़े करके निकाल देती है। गुर्दे के दर्द के लिए यह प्रधान औषधि है।

19. गुर्दे के रोग :

5 ग्राम से 10 ग्राम चिरचिटा की जड़ का काढ़ा 1 से 50 ग्राम सुबह-शाम मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है । या 2 ग्राम अपामार्ग (चिरचिटा) की जड़ को पानी के साथ पीस लें। इसे प्रतिदिन पानी के साथ सुबह-शाम पीने से पथरी रोग ठीक होता है।

20. दमा या अस्थमा :

चिरचिटा की जड़ को किसी लकड़ी की सहायता से खोद लेना चाहिए। ध्यान रहे कि जड़ में लोहा नहीं छूना चाहिए। इसे सुखाकर पीस लेते हैं। यह चूर्ण लगभग एक ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ खाएं इससे श्वास रोग दूर हो जाता है।
अपामार्ग (चिरचिटा) का क्षार 0.24 ग्राम की मात्रा में पान में रखकर खाने अथवा 1 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से छाती पर जमा कफ छूटकर श्वास रोग नष्ट हो जाता है।

হাতীশূড়:-পুরনো দালান ঘেঁষে কিংবা রাস্তার ধারে অন্য আগাছার মাঝে এ গাছটি দেখা যায়। এ গাছের বাঁকানো পুষ্পদণ্ডে ফুটে থাকে স...
19/05/2022

হাতীশূড়:-

পুরনো দালান ঘেঁষে কিংবা রাস্তার ধারে অন্য আগাছার মাঝে এ গাছটি দেখা যায়। এ গাছের বাঁকানো পুষ্পদণ্ডে ফুটে থাকে সাদা সাদা ফুল। গজদন্ত অর্থাৎ হাতির দাঁতের মতো শুভ্র এই ফুল।গাছটি আগাছার সঙ্গে এখানে সেখানে জন্মায় তাই সাধারণের দৃষ্টি এড়িয়ে যায়। মোটামুটি এক দেড় ফুট লম্বা হয়। গাছের কাণ্ড ফাঁপা, নরম। সারা দেহে ছোট ছোট রোম আছে। গাছের ওপরের দিকের কাণ্ড চৌকো, নিচের দিকে অপেক্ষাকৃত গোলাকার। সংস্কৃত নাম শ্রীহস্তিনী।
বৈজ্ঞানিক নামঃ Heliotropium indicum (হেলিওট্রোপিয়াম ইনডিকাম) এবং ইংরেজি নাম 'Indian heliotrope।

হাতিশুর গাছের উপকারিতাঃ

(১)দেহে ছত্রাকজনিত সংক্রমণে লাল চাকা চাকা দাগ নিরাময়ে এর পাতার রস ব্যবহার করা হয়।

(২)ফোলায় পাতা বেঁটে অল্প গরম করে ফোলায় লাগালে, ফোলা কমে যায়।

(৩) জ্বর ও কাশিতে এই গাছের মূল জলের সঙ্গে ফুটিয়ে ক্বাথও তৈরি করে ব্যবহার করা হয়।

(৪) বিষাক্ত পোকার কামড়ে – পাতার রস লাগালে জ্বালা এবং ফোলা কমে যায়।

(৫) আঘাতজনিত ফোলায় – পাতা বেঁটে অল্প গরম করে লাগালে, ফোলা এবং ব্যাথা কমে যায়।

(৬)যাদের সর্দি লাগবে তারা এই হাতিশুড়ের পাতা সেচে দুই চামচ পরিমাণ রস খেতে পারেন এতে করে আপনার সর্দি ভাল হবে।

(৭)টাইফয়েড জ্বরে: টাইফয়েড রোগে এই উদ্ভিদটির পাতা হতে পারে কার্যকরী সমাধান। এর পাতার রস হালকা গরম করে পানিতে মিশিয়ে খেলে টাইফয়েড ভাল হয়।

(৮) একজিমা:একজিমা থেকে মুক্তি পেতে হাতিশুড় গাছের পাতা থেতলে আক্রান্ত স্থানে দিন।এভাবে কিছুদিন ব্যবহারে একজিমা সেরে যাবে।

(৯)রিউম্যাটিক বাতে: রেড়ির তেলের সঙ্গে পাতার রস মিশিয়ে পাক করে গাঁটে লাগাতে হয়।

(১০) দাঁতের মাড়ি ফোলায়:দাঁতের মাড়ি ফোলা রোগে আক্রান্ত ব্যক্তি হাতিশুরের মূল চিবালে মাড়ি ফোলা কমে যায়।

১১)কাটা ছেঁড়া: কাটা ছেঁড়া স্থানে হাতিশুরের পাতা থেতলে রস দিতে হবে এতে কাটা ছেঁড়া ঘুচে যাবে।

(১২)ব্রন: ব্রন হলে বা এর দাগ হয়ে গেলে হাতিশুঁড় গাছের পাতা ও তার কচি ডাল থেঁতো করে দুপুরে গোসল করতে যাবার ১ঘন্টা আগে ব্রণের ওপর প্রলেপ দিলে ব্রণ সারে এবং নতুন করে আর ব্রণ হয় না।

(১৪)ফ্যারিঞ্জাইটিস রোগে – পাতার রস অল্প গরম জলে মিশিয়ে গার্গল করা।

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09/05/2022

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09/02/2022

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