Dr.Bhuvan Kumar Yadav होम्योपैथिक चिकित्सक

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Dr.Bhuvan Kumar Yadav होम्योपैथिक चिकित्सक Dr.Bhuvan Kumar Yadav -M.D.(HOM.)Homoeopathic
Physician (RBTS GHMCH, MUZAFFARPUR, BIHAR)

10/02/2026
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01/01/2026

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15/09/2025

🌿🌿 भूख न लगना (Loss of Appetite)🌿🌿

भूख न लगना या **Loss of Appetite (Anorexia)** एक सामान्य लेकिन कई बार गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। इसमें व्यक्ति को खाने की इच्छा नहीं होती या भोजन की मात्रा बहुत कम हो जाती है। यह समस्या थोड़े समय के लिए भी हो सकती है और लंबे समय तक बनी रहे तो किसी बीमारी का लक्षण भी हो सकती है।

🌿🔹 भूख न लगने के कारण (Causes of Loss of Appetite)

1. **पाचन तंत्र से संबंधित कारण**

* गैस्ट्राइटिस (Gastritis)
* लिवर की बीमारियाँ (Hepatitis, Fatty liver)
* अल्सर या एसिडिटी
* कब्ज

2. **सामान्य कारण**

* वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
* बुखार
* शरीर में पानी की कमी

3. **मानसिक कारण**

* तनाव (Stress)
* डिप्रेशन
* चिंता (Anxiety)
* अधिक सोचने की आदत

4. **अन्य कारण**

* दवाइयों का साइड इफेक्ट
* कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ
* हार्मोनल असंतुलन
* बुजुर्गों में प्राकृतिक रूप से भूख कम हो जाती है 🔹

🌿डिफरेंशियल डायग्नोसिस (Differential Diagnosis)

भूख न लगना कई बीमारियों का लक्षण हो सकता है, इसलिए सही कारण की पहचान करना ज़रूरी है:

1. **डिप्रेशन** – उदासी, थकान और नींद की कमी के साथ भूख कम होना।
2. **हायपरथायरॉइडिज्म (Hyperthyroidism)** – भूख सामान्य या अधिक होने के बावजूद वजन कम होना।
3. **क्रॉनिक इंफेक्शन** – टी.बी., मलेरिया या एचआईवी जैसी बीमारियों में भी भूख कम हो सकती है।
4. **कैंसर** – लंबे समय तक लगातार भूख न लगना और वजन घटते रहना।
5. **गैस्ट्रिक रोग** – अपच, गैस, एसिडिटी, कब्ज के साथ भोजन से अरुचि।

🌿 🔹 होम्योपैथिक उपचार (Homeopathic Treatment for Loss of Appetite)

होम्योपैथी में दवाएँ रोगी के शारीरिक और मानसिक लक्षणों के अनुसार दी जाती हैं। कुछ प्रमुख औषधियाँ इस प्रकार हैं:

1. **China (Cinchona Officinalis)**

* लंबे समय तक बीमारी के बाद कमजोरी और भूख कम होना।
* थोड़ी सी खाने पर भी पेट भर जाने का अनुभव।

2. **Lycopodium**

* भूख कम लेकिन मीठा और गरम चीजें खाने की इच्छा।
* थोड़ी मात्रा में खाने पर पेट फूला हुआ लगना।

3. **Carbo Vegetabilis**

* गैस, डकार और पेट भारीपन के कारण भूख न लगना।
* ठंडी चीजें खाने की इच्छा।

4. **Ignatia Amara**

* मानसिक तनाव, चिंता या दुःख के कारण भूख कम होना।

5. **Sepia**

* महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म गड़बड़ी के साथ भूख न लगना।

6. **Pulsatilla**

* चटपटा और ठंडी चीजें खाने की इच्छा लेकिन नियमित भोजन से अरुचि।
* पेट में भारीपन और मानसिक रूप से संवेदनशील स्वभाव।

7. **Antimonium Crudum**

* पेट में अत्यधिक भारीपन, जीभ पर सफेद परत और भोजन से अरुचि।

🌿 🔹 निष्कर्ष (Conclusion)

भूख न लगना अपने आप में कोई रोग नहीं है बल्कि शरीर में किसी असंतुलन या बीमारी का संकेत है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, वजन घटने लगे या थकान अधिक हो तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। होम्योपैथिक उपचार में रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों को ध्यान में रखकर औषधि दी जाती है, जिससे भूख वापस आती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
Dr.Bhuvan Kumar Yadav होम्योपैथिक चिकित्सक

11/09/2025

# # # **लोकोमोटर अटैक्सिया (Locomotor Ataxia): कारण, लक्षण, बचाव और होम्योपैथिक उपचार**

# # # # **परिचय**

लोकोमोटर अटैक्सिया एक गंभीर **स्नायु संबंधी (Neurological)** विकार है जिसमें व्यक्ति के चलने-फिरने (Locomotion) और संतुलन बनाए रखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। यह मुख्यतः **रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord)** और **स्नायु तंत्र (Nervous System)** के विकार के कारण होता है। यह रोग प्रायः धीरे-धीरे विकसित होता है और समय रहते उचित उपचार न मिलने पर रोगी को स्थायी अपंगता का सामना करना पड़ सकता है।

# # # # **कारण (Causes)**

लोकोमोटर अटैक्सिया का सबसे प्रमुख कारण **सिफलिस (Syphilis)** रोग का देर से होने वाला प्रभाव है। इसके अतिरिक्त अन्य कारण इस प्रकार हैं:

1. **स्नायु तंत्र की क्षति (Damage to Nervous System)**
2. **विटामिन B12 की कमी**
3. **मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple Sclerosis)**
4. **स्पाइनल कॉर्ड की बीमारियां**
5. **मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में चोट**
6. **मधुमेह (Diabetes)** के कारण तंत्रिकाओं की कमजोरी

# # # # **लक्षण (Symptoms)**

लोकोमोटर अटैक्सिया के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

* **चलने में कठिनाई** – रोगी का संतुलन बिगड़ जाता है।
* **सुई चुभने जैसा दर्द (Stabbing Pain)** – खासकर पैरों और टांगों में।
* **स्पर्श संवेदना में कमी** – व्यक्ति को वस्तुओं का सही अहसास नहीं होता।
* **आंख बंद करने पर असंतुलन** – रोगी आंख बंद करते ही गिर सकता है।
* **मूत्र नियंत्रण में कमी (Bladder Control Loss)**
* **दृष्टि संबंधी समस्या** – डबल विजन (Double Vision) या धुंधला दिखना।
* **रिफ्लेक्सेस का कम होना**

# # # # **बचाव (Prevention)**

1. **सिफलिस (Syphilis) से बचाव** – सुरक्षित यौन संबंध बनाना।
2. **समय पर उपचार** – यदि न्यूरोलॉजिकल या स्पाइनल समस्याएं हों तो तुरंत जांच और उपचार कराना।
3. **विटामिन B12 का पर्याप्त सेवन** – आहार में B12 युक्त भोजन (दूध, अंडा, मांस) शामिल करें।
4. **शुगर कंट्रोल में रखना** – मधुमेह रोगियों को विशेष ध्यान रखना चाहिए।
5. **संतुलित जीवनशैली** – नियमित व्यायाम, योग और ध्यान।

# # # # **होम्योपैथिक उपचार (Homeopathic Treatment)**

होम्योपैथी में लोकोमोटर अटैक्सिया के लिए कई प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं, जो रोगी की अवस्था, लक्षण और कारण के अनुसार दी जाती हैं। मुख्य दवाएं इस प्रकार हैं:

1. **Argentum Nitricum**

* **उपयोग:** समन्वय की कमी, असंतुलन, आंखों की समस्या, कमजोरी।
* **पोटेंसी:** 30C, 200C (चिकित्सक की सलाह अनुसार)।

2. **Gelsemium**

* **उपयोग:** तंत्रिका कमजोरी, चलने में डर, कांपना।

3. **Phosphorus**

* **उपयोग:** पैरों में कमजोरी, थकान, संवेदना में कमी।

4. **Alumina**

* **उपयोग:** चलने में कठिनाई, पैरों में सुन्नपन।

5. **Plumbum Met**

* **उपयोग:** स्नायु तंत्र की गहरी कमजोरी, धीरे-धीरे लकवा।

6. **Syphilinum**

* **उपयोग:** यदि सिफलिस के कारण लोकोमोटर अटैक्सिया हुआ हो।

**नोट:** होम्योपैथिक दवाओं का सेवन हमेशा **अनुभवी चिकित्सक** की सलाह से ही करें।

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# # # # **निष्कर्ष**

लोकोमोटर अटैक्सिया एक गंभीर रोग है जो व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है। समय पर जांच, सही उपचार और जीवनशैली में सुधार से इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है। होम्योपैथी में ऐसे कई सुरक्षित और प्रभावी विकल्प मौजूद हैं जो रोग की प्रगति को धीमा कर सकते हैं और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं।

Dr.Bhuvan Kumar Yadav होम्योपैथिक चिकित्सक

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21/08/2025

refer to acute increases in blood pressure (generally defined as ≥ 180/120 mm Hg) that cause or increase the risk of end-organ damage, i.e., damage to the brain (e.g., encephalopathy, stroke), eyes (e.g., retinopathy), cardiovascular system (e.g., ACS, pulmonary edema, aortic dissection), and/or kidneys (e.g., acute kidney injury). They can be due to primary hypertension or precipitated by underlying conditions (e.g., pheochromocytoma, pre-eclampsia, drug toxicity). Management consists of rapidly identifying end-organ damage with patient history, physical examination, and focused testing, and determining whether the rapid lowering of the blood pressure with IV antihypertensives is required. The ideal IV antihypertensive agent is determined by the underlying disorder, end-organ systems affected, and other patient factors. In the absence of end-organ damage, hypertensive crises should be managed with rapid follow-up and oral antihypertensives, as the prognosis is poor if they are left untreated
Dr.Bhuvan Kumar Yadav होम्योपैथिक चिकित्सक

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