10/08/2019
ना मंदिर जाते हैं, ना मदीना जाते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है ,अस्पताल के सिवा कही'ना जाते हैं।
ना पूजा करते हैं, ना अदा कोई नमाज़ करते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है, खुदा के बन्दों का इलाज़ करते है।
ना गाने सुना करते हैं, ना गज़ले सुना करते हैं।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, दिलों की धड़कने सुना करते हैं।
अनजान लोगों के दुःख-दर्द कुछ ऐसे पहचान लेते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, नब्ज़ टटोलकर सब हाल जान लेते हैं।
ना गीता, ना बाइबिल, ना क़ुरान के लिए लड़ते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है, विल्लियम्स नॉवाक, हैरिसन पढ़ते है।
ना डिस्को में जाते हैं हम, ना डेट पे जाते हैं,
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है, अक़सर घर देर से जाते है।
खुद ही कहानी लिखते है और खुद ही डायरेक्टर होते हैं।
हम डॉक्टर हैं, हमारे अपने परदे, अपने थिएटर होते है।
हसरतें हूबहू है, ख़ुदा नहीं, हम भी बनना इंसान भला चाहते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है चाहे कुछ भी हो अपने रोगी का भला चाहते हैं।
ना खाकी पे एतबार है , ना खद्दर पे इतना भरोसा करते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी है, लोग हमारे इलाज़ पे कितना भरोसा करते है।
इश्क़-महरूनी, सर्द-ग़ुलाबी और धानी हम पर सब रँग फ़ब लेते है।
हम स्वास्थ्य कर्मचारी हैं, सफ़ेद एप्रिन के नीचे, जीवन के सब रंग ढक लेते है।
हिन्दू भी खड़ा रहता है, मुस्लिम भी खड़ा रहता है।
ये स्वास्थ्य कर्मचारी का दिल है,
इंसानियत भीतर रहती है, मज़हब बाहर खड़ा रहता हैं।🙂