Dr Suman chaudhary Piles specialist

Dr Suman chaudhary Piles specialist Dr Hoshiyar singh chaudhary piles hospital Neemkathana sikar rajasthan

18/04/2020

IBS
irritable bowel syndrome एक ऐसा विकार है जिसमे बड़ी आंत प्रभावित होती है। इस रोग में मरीजों की आंत की बनावट में कोई बदलाव नही होता है, इसलिय कई बार इसे सिर्फ रोगी का वहम ही मान लिया जाता है। लेकिन आँतों की बनावट में कोई चेंज ना आने के बावजूद भी रोगी को कब्ज या बार-बार दस्त लगना, पेट में दर्द, गैस जैसी समस्याएं होती हैं।

irritable bowel syndrome IBS

इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम रोगियों की शिकायतें
#अधिकतर रोगी डॉक्टर के पास निम्नलिखित शिकायतें लेकर जाते हैं !
#जब भी मैं नाश्ता या खाना खाता हूँ तो मुझे शौच के लिय जाना पड़ता है।
#जब भी मै बाहर जाने को तैयार होता हूँ तो मुझे शौच के लिय जाने की जरूरत महसूस हौती है।
#जब भी चाय, दूध जैसा drink लेता हूँ तो शौच के लिए जाने की जरुरत महसूस हौती है।
#एक बार में पेट साफ नहीं होता है जिससे बार बार टॉयलेट जाना पड़ता है।

IBS इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम के लक्षण
कब्ज या बार बार दस्त लगना – कई बार कुछ खाते ही शौच के लिए जाना पड़ता है। बहुत से रोगियों को दिन में 7 या 8 बार या ज्यादा बार भी शौच के लिय जाना पड़ता है। जबकि कई बार अपने आप ही कब्ज यानी Constipation हो जाता है।
#पेट में दर्द या एँठन।
#बहुत ज्यादा गैस बनना।
#पेट फूलना या अफारा होना।
#मल के साथ चिकना कफ जैसा पदार्थ या आंव आना।
#एक बार में पेट साफ ना हो पाना जिससे बार-बार #शौचालय जाने की जरूरत महसूस होना।

IBS ( Irritable Bowel Syndrome ) के कारण –
IBS का कोई एक कारण नही माना गया है। बल्कि कई कारण मिलकर इस रोग के होने का कारण बनते है –

1 .विशेष खाद्य पदार्थों के सेवन से लक्षणों का बढ़ जाना –

बहुत से लोगों को चोकलेट, एल्कोहल, गोभी, डेयरी उत्पाद, दूध, तले भुने मसालेदार पदार्थों एवं गेहूं से लक्षण बढ़ जाते हैं।

2 . तनाव –

IBS के होने में तनाव पूर्ण माहोल यानी stress का भी अहम रोल हौता है। जिससे IBS या
ग्रहणी रोग के लक्षण बढ़ जाते हैं।

3 .आनुवंशिकता ( Hereditary ) –

जिन लोगों के परिवार में माता-पिता आदि को यह तकलीफ होती है उनके बच्चों को यह समस्या होने की ज्यादा सम्भावना हो जाती है।
इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम का घरेलू उपचार / Home Remedies Irritable Bowel Syndrome

1. फाइबर लें – खान पान में धीरे-धीरे रेशे की मात्रा बढाने से लक्षणों में बहुत आराम मिलता है। फाइबर चोकर युक्त आटा, हरी सब्जियों एवं फलों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

2. अहितकर खान-पान से बचें – ऐसा खान पान जिसमे IBS के लक्षण बढ़ते हों उनसे बचें। यह हर व्यक्ति के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं। जैसे- दूध, चोकलेट, cold drinks, कॉफ़ी, शराब आदि। यदि तकलीफ ज्यादा हो तो गोभी आलू ,निम्बू , तले भुने खाद्य पदार्थो से बचें।

3. खान-पान में नियमितता रखें – नियमित समय पर खाना खाने की आदत डालें। एक बार में ज्यादा न खाकर थोड़ा थोड़ा कई बार में लें। खान पान में दही, छाछ आदि ज्यादा शामिल करें।

4. व्यायाम, योगाभ्यास, भ्रमण जरुर करें – नियमित रूप से भ्रमण, योगा, व्यायाम करें, इससे तनाव का स्तर घटता है। Mood सही रहता है। खाने का सही से पाचन होता है।

5. आयुर्वेदिक उपचार- आयुर्वेद में IBS को ग्रहणी या संग्रहणी रोग के नाम से जाना जाता है। आयुर्वेद में ग्रहणी के वातज, पितज, कफज, सन्निपातज जैसे प्रकार बताये गए हैं तथा ग्रहणी रोग के कारणों, लक्षणों और चिकित्सा के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है।

आयुर्वेद की कई जड़ी बूटियाँ जैसे-

बिल्व
कुटज
चित्रक
हरीतकी
आंवला
दाड़िम
पिप्पली
पंचकोल
शुण्ठी एवं पंचामृत पर्पटी
रस पर्पटी
स्वर्ण पर्पटी
गंगाधर चूर्ण
शंख भष्म
जैसी औषधियां IBS रोग में बहुत ही फायदेमंद हैं। पर्पटी कल्प ग्रहणी रोग में आयुर्वेद की विशेष चिकित्सा बताई गई है। इन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से ही लिया जाता है।

6. छाछ ( Buttermilk) – एक गिलास ताज़ी छाछ में आधी चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर एवं इतना ही सूखा पिसा हुआ पुदीना पाउडर मिलाकर पीना बहुत ही लाभकारी है। ग्रहणी यानी IBS रोग में छाछ को अमृत समान गुणकारी माना गया है। इसका नियमित रूप से सेवन करें।

7. ईसबगोल– दस्त लगने पर दही के साथ एवं कब्ज होने पर गरम दूध के साथ ईसबगोल की भूसी 1-2 चम्मच मात्रा में लेना irritable bowel syndrome के लक्षणों में बहुत ही फायदेमंद साबित होता है।

8. बिल्व एवं त्रिफला पाउडर – दस्त ज्यादा लगने पर बिल्व एवं कब्ज की स्तिथि में त्रिफला उपयोगी साबित होते हैं।
डा सुमन चौधरी
BAMS
7689029287

13/04/2020

कब्ज :
दुनिया में तरह तरह के लोग देखने को मिलते हैं जो ऊपर से तो बहुत फ्रेश और चमकते हुए नजर हैं पर उनके शरीर के अन्दर का हाल बस उन्हें ही पता होता है। एक पुरानी कहावत है की जिस व्यक्ति का पेट साफ़ हो और जिस पर कोई कर्ज ना हो तो उससे बड़ा सुखी कोई नही। पाउडर, क्रीम, लिपिस्टिक आदि से चेहरे को निखारा जा सकता है पर अन्दर की ताजगी नहीं बनाई जा सकती। शरीर के अन्दर की ताजगी को महसूस कर पाना एक बहुत ही आनंद भरा अनुभव होता है। शरीर के अंदर होने वाली तमाम समस्याओं में एक समस्या है जो सबसे ज्यादा सुमार है जिसे हम कब्ज के नाम से जानते हैं। तो चलिये हम बात करते हैं कब्ज की जो हमें हमारे शरीर के अंदर की ताजगी का अनुभव करने से रोकती है।
कब्ज यानि कॉन्स्टिपेशन पाचन तंत्र से जुड़ी एक गम्भीर समस्या है जो की किसी भी आयु वर्ग के लोगो को प्रभावित कर सकती है। पर कब्ज रोग की खासियत यह है की इसके मरीज दिनचर्या में सुधार करके और कुछ घरलू उपायों को अपनाकर इसे कंट्रोल कर सकते हैं।

क्या है कॉन्स्टिपेशन
कॉन्स्टिपेशन होने की वजह से पीड़ित व्यक्ति का पेट ठीक से साफ नहीं हो पाता, कॉन्स्टिपेशन के कारण अवरोही आंतों में तरल पदार्थो के अवशोशण में अधिक समय लगने के कारण उनमे शुष्क व कठोर मल अधिक एकत्रित होने लगता है, जिसकी वजह से उस व्यक्ति को मल त्याग करने में काफी परेशानी होती है। रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है। शौच कुंथन करने या घण्टों तक बैठे रहने पर निकलता है। जहाँ आम तौर पर लोग दिन में कम से कम एक बार शौच करते हैं वहीँ कांस्टीपेशन का मरीज कई दिनों तक मल त्याग नहीं कर पाता। आसान शब्दों में कॉन्स्टिपेशन होने का अर्थ है, पेट ठीक तरह से साफ नहीं हुआ है या शरीर में तरल पदार्थ की कम है।

कब्ज होने की वजह

वक्त-बेवक्त भोजन करने की आदत,
तले हुए मैदे के व्यंजन, तेज मिर्च-मसालेदार चटपटे भोजन करना
लगातार पेनकिलर्स या नॉरकोटिस या दर्द निवारक दवाएं खाना
कई बार हॉरमोंस की गडबडी, थाइरॉयड या शुगर की बीमारी होना
पहले का भोजन हजम हुए बिना फिर से भोजन खाना
पानी कम पीना तथा खाने को ठीक से चबा-चबा कर ना खाना
मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध या शोक की अवस्था में भोजन करना,
भोजन में रेशेदार आहार की कमी होना
ज्यादा चाय, कॉफी, तंबाकू, सिगरेट शराब आदि का सेवन करना
व्यायाम बिल्कुल न करना आराम पसंद लाइफ स्टाइल रखना
खाना खाने के तुरंत बाद में फ्रिज का ठंडा पानी पीना
रात में देर से खाना, खाना खाते ही बिस्तर पकड़ना
करणों के बाद आइए अब जानते हैं कॉन्स्टिपेशन के लक्षण और इलाज के आसान नुस्खे।

मल का हार्ड और सुखा होना
हफ्ते में 3 बार से कम मल त्याग करना
मल त्याग करते समय दर्द होता है
मल त्याग में बहुत ज़ोर लगाने की जरूरत पड़ना
मल त्याग के बाद भी ऐसा लगना की अभी कुछ बाकी है
पेट में मरोड़ उठना
पेट में दर्द रहना
सरदर्द रहना
पेट में गैस रहना
बदहजमी
पाइल्स की समस्या होना जो की मल त्याग के समय ज्यादा ज़ोर लगाने से अक्सर हो जाती है
जी मिचलाना और भूख कम लगना
पैरों में दर्द रहना
उल्टी जैसा होना
चक्कर आना
मूँह से बदबू आने लगना
कमर दर्द होना
बहुत कमजोरी का अहसास होना
पेट में भारीपन लगना
ब्लड प्रेशर का बढ़ना
त्वचा पर फोड़े फुंसी होना
एसिडिटी होना
मूँह में छाले होना
डिप्रेशन रहना
अब हम जानते हैं कब्ज से छुटकारा पाने के नुस्खे।

1. खूब पिएं पानी
कम पानी पीने से कब्ज़ की समस्या हो सकती है। इस समस्या में मल आंतों में सूख जाता है, और मल त्याग करने के लिए ज़ोर लगाना पड़ता है। कब्ज़ के रोगियों को चाहिए कि वो अधिक से अधिक पानी पिएं। 4 लीटर पानी एक दिन में पीने की आदत डालें। खाना खाते समय पानी न पिएं और इसकी बजाय आप खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पी सकते हैं।
2. पपीता अमरूद खाएं
कॉन्स्टिपेशन की शिक़ायत हो तो आपको पपीते और अमरुद का सेवन ज़रूर करना चाहिए । दोनों के गुण हमारे पेट को लाभ पहुंचाते हैं।
3. तांबा
तांबे की बर्तन में पानी भरकर उसमें 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर रातभर रखें। सुबह बिना कुछ खाए पिए इस पानी को छानकर पीना चाहिए। इस प्रयोग को नियमित करने से पुरानी से पुरानी कब्ज में राहत मिलती है।
4. बादाम
बादाम का तेल भी कब्ज़ की समस्या में लाभ पहुंचाता है। इससे आंतों की कार्य क्षमता बढ़ती है। रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में 1 चम्मच बादाम का तेल डालकर पीना चाहिए। 15 दिन लगातार इस उपाय को करने से पुरानी कब्ज़ भी ठीक हो जाती है।
5. नींबू पानी
एक कप हल्के गरम पानी में 1 नींबू निचोड़कर पीने से आंतों में जमा हुआ मल बाहर निकालने में मदद करता है।
6. गरम दूध
रात को गरम दूध पीकर सोना चाहिए। अगर मल आंतों में चिपक गया है तो दूध में अरंडी का तेल मिलाकर पिएं।
7. रेशेदार आहार
रेशेदार भोजन करना चाहिए। हरे पत्तेदार सब्ज़ियों, फलों और सलाद में फाइबर अधिक होता है। कब्ज़ से छुटकारा पाने के लिए पालक का जूस भी लाभदायक है।
8. मुनक्का
बीज निकले हुए 12 मुन्नके दूध में उबालकर खाएं और दूध पी जाएं। सुबह होने तक आपकी कब्ज़ खुल जाएगी।
9. ऑरेंज
8-10 दिन तक सुबह ख़ाली पेट संतरे का जूस पीने से पुरानी कॉन्स्टिपेशन ख़त्म हो जाएगी। लेकिन हां संतरे के जूस में कुछ भी न मिलाएं।

10. ईसबगोल की भूसी
10 ग्राम ईसबगोल की भूसी 125 ग्राम दही में घोलकर सुबह शाम में खाने से कब्ज़ ख़त्म हो जाता है।
11. व्यायाम
पेट से संबंधित नियमित व्यायाम करें इससे आपके कब्ज की समस्या के साथ ही पेट और शरीर की अन्य समस्याओं में भी राहत मिलेगी।
डा आशिष चौधरी

19/09/2019
25/06/2019
22/05/2019
29/04/2019

Mob 9636069127 9549063030 01574230578

23/04/2019

Piles patient from pali Rajasthan Treated before 12 Years.
He is good Till now.
9636069127

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Indra Colony Near PNB BANK
Nim Ka Thana
332713

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