Bihar Yoga, Spiritual Healings, Naturopathy & Ayurveda

Bihar Yoga, Spiritual Healings, Naturopathy & Ayurveda Bihar Institute of Yoga, Spiritual Healings, Naturopathy & Ayurveda Research
SAMARPAN, Near ISBT, Bariya, Pahari, Patna - 800008 BIHAR

नमस्कार 🙏मैं डॉ. शिवाजी कुमार आप सभी को सादर आमंत्रित करता हूँ कि आप वार्षिक आम सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करें।📅 19 अप्...
17/04/2026

नमस्कार 🙏

मैं डॉ. शिवाजी कुमार आप सभी को सादर आमंत्रित करता हूँ कि आप वार्षिक आम सभा में अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

📅 19 अप्रैल 2026 (रविवार)
⏰ सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक
📍 राजमहल रिसॉर्ट, भागवत नगर, कुम्हरार, पटना

आपकी उपस्थिति हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कृपया समय पर अवश्य पधारें।

धन्यवाद 🙏
डॉ. शिवाजी कुमार

05/04/2026

👉सत्त्व, रज और तम: भारतीय दर्शन में व्यक्तित्व का मनोवैज्ञानिक आधार👇
✍️ गुणों के संतुलन से व्यक्तित्व, व्यवहार और आध्यात्मिक उन्नति की दिशा

लेखक: डॉ. शिवाजी कुमार

भारतीय दर्शन और साहित्य में मानव व्यक्तित्व को समझने के लिए एक अत्यंत गहन और वैज्ञानिक अवधारणा प्रस्तुत की गई है, जिसे सत्त्व, रज और तम तीन गुणों के रूप में जाना जाता है। ये गुण न केवल व्यक्ति के व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं, बल्कि उसके जीवन के उद्देश्य, निर्णय क्षमता और आध्यात्मिक विकास को भी दिशा प्रदान करते हैं। महाकाव्य महाभारत के अश्वमेध पर्व में विशेष रूप से इन गुणों का विस्तृत वर्णन मिलता है।

तमोगुणी व्यक्ति के लक्षणों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति में अज्ञान, मोह और विवेक का अभाव होता है। वह अपने कर्तव्यों का सही निर्णय नहीं कर पाता और जीवन में निराशा, भय, लोभ तथा शोक से ग्रसित रहता है। उसमें अच्छे और बुरे का भेद करने की क्षमता नहीं होती, जिसके कारण वह हिंसा, अनैतिकता और दुष्कर्मों की ओर प्रवृत्त होता है। आलस्य और अज्ञान के कारण उसका शरीर और मन दोनों जड़ता की ओर अग्रसर होते हैं। वह कार्य और अकर्म में अंतर नहीं समझ पाता तथा अज्ञान को ही ज्ञान मान बैठता है।

संस्कृत में तमोगुण का स्वरूप इस प्रकार वर्णित है—
तमोगुणी पुरुषः मोहग्रस्तः, अज्ञानयुक्तः, निर्णयहीनः च भवति। सः भय, लोभ, शोकादिभिः पीडितः भवति। तस्य विवेकशक्तिः नास्ति, अतः सः अधर्मे प्रवर्तते। आलस्येन शरीरं गुरुत्वं गच्छति, मनश्च जडतां प्राप्नोति।

तमोगुण के अंतर्गत अविद्या, मोह, महामोह, क्रोध और अंधकारमय प्रवृत्तियाँ प्रमुख मानी गई हैं। ये सभी व्यक्ति को अधोगति की ओर ले जाती हैं और उसके विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं।

इसके विपरीत रजोगुणी व्यक्ति अत्यंत सक्रिय, ऊर्जावान और कर्मशील होता है, किंतु उसकी प्रवृत्ति अधिकतर भौतिक सुखों और इच्छाओं की पूर्ति की ओर होती है। उसमें अहंकार, ईर्ष्या, प्रतिस्पर्धा और असंतोष की भावना प्रबल होती है। वह निरंतर क्रियाशील रहता है, परंतु उसके कार्यों के पीछे स्वार्थ और तृष्णा का प्रभाव रहता है। वह दूसरों में दोष देखने, विवाद करने और अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने में लगा रहता है।

रजोगुण का संस्कृत में स्वरूप इस प्रकार है—
रजोगुणी पुरुषः क्रियाशीलः, स्पर्धालुः, तृष्णायुक्तः च भवति। तस्य मनः नित्यम् अशान्तं भवति। सः अहंकारेण, ईर्ष्यया, लोभेन च प्रभावितः भवति। सः कर्मसु प्रवृत्तः भवति, किन्तु तेषां फलम् क्षणिकसुखदं, अन्ते दुःखप्रदं भवति।

रजोगुण के अंतर्गत रोष, माया, दंभ, दर्प, राग, विषय-प्रेम, वाद-विवाद तथा भोग-विलास की प्रवृत्तियाँ सम्मिलित हैं। ऐसे व्यक्ति वर्तमान, भूत और भविष्य की चिंताओं में उलझा रहता है और धर्म, अर्थ तथा काम के चक्र में निरंतर गतिशील रहता है।

सत्त्वगुण को इन दोनों से श्रेष्ठ माना गया है। सत्त्वगुणी व्यक्ति शांत, संतुलित, प्रसन्नचित्त और विवेकशील होता है। उसमें सत्य, अहिंसा, क्षमा, धैर्य, संतोष और करुणा जैसे गुण होते हैं। वह न केवल स्वयं के विकास पर ध्यान देता है, बल्कि समाज के कल्याण के लिए भी कार्य करता है। उसकी दृष्टि निष्पक्ष होती है और वह किसी में दोष नहीं खोजता।

संस्कृत में सत्त्वगुण का वर्णन इस प्रकार किया गया है—
सत्त्वगुणी पुरुषः आनन्दितः, प्रसन्नचित्तः, धीरः, क्षमाशीलः च भवति। सः सत्यप्रियः, अहिंसकः, समदर्शी च भवति। तस्य कर्माणि निष्कामभावेन भवन्ति, ये भगवत्प्राप्तये सहायकाः भवन्ति।

सत्त्वगुण में निहित शुद्धता, प्रकाश और संतुलन व्यक्ति को उच्चतम स्तर की चेतना और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। ऐसे व्यक्ति के कार्यों में स्वार्थ या आसक्ति नहीं होती, बल्कि वे कर्तव्य और धर्म के आधार पर किए जाते हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि सत्त्व, रज और तम गुण किसी भी व्यक्ति में अलग-अलग रूप में नहीं पाए जाते, बल्कि ये तीनों गुण एक साथ मिश्रित रूप में उपस्थित होते हैं। जिस गुण की प्रधानता होती है, उसी के आधार पर व्यक्ति का व्यक्तित्व निर्धारित होता है। इस प्रकार गुणों की न्यूनता और अधिकता ही व्यक्ति के संपूर्ण व्यवहार और चरित्र का निर्माण करती है।

इन तीनों गुणों से परे जो अवस्था होती है, उसे गुणातीत अवस्था कहा जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में गुणातीत व्यक्ति के लक्षणों का वर्णन करते हुए कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति सुख-दुःख, मान-अपमान, प्रिय-अप्रिय में समान रहता है और उसकी चेतना स्थिर एवं संतुलित होती है—

समदुःखसुखः स्वस्थः समलोष्टाश्मकाञ्चनः।
तुल्यप्रियाप्रियो धीरस्तुल्यनिन्दात्मसंस्तुतिः।।

अतः यह स्पष्ट है कि भारतीय चिंतन में सत्त्व, रज और तम केवल दार्शनिक अवधारणाएँ नहीं हैं, बल्कि ये मानव व्यवहार, व्यक्तित्व विकास और आध्यात्मिक उन्नति के मूल आधार हैं। यदि व्यक्ति सत्त्वगुण की वृद्धि और रज-तम के संतुलन की दिशा में प्रयास करे, तो वह एक संतुलित, सफल और सार्थक जीवन प्राप्त कर सकता है।

लेखक
डॉ. शिवाजी कुमार
(मनोवैज्ञानिक एवं विशेष शिक्षा विशेषज्ञ)

05/04/2026

"आयुर्वेद में प्रकृति का विज्ञान: स्वस्थ जीवन का आधार"
👉👇
पित्त और कफ के माध्यम से व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और व्यवहार की समझ
👇
लेखक: डॉ. शिवाजी कुमार
✍️
आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा परंपरा का एक अत्यंत प्राचीन और वैज्ञानिक आधार है, जिसमें मानव शरीर, मन और व्यवहार को एक समग्र दृष्टिकोण से समझा जाता है। इस पद्धति के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति की एक विशिष्ट प्रकृति होती है, जो उसके शारीरिक गठन, मानसिक प्रवृत्ति तथा रोगों की संवेदनशीलता को निर्धारित करती है। आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति को मुख्यतः तीन भागों में वर्गीकृत किया गया है—वात, पित्त तथा कफ। यही तीनों दोष शरीर के संतुलन और असंतुलन के मूल आधार माने जाते हैं।

वात प्रकृति वाले व्यक्तियों का शरीर सामान्यतः रूक्ष, पतला और हल्का होता है। इनका पाचन तंत्र अनियमित और कमजोर होता है, जिसके कारण कभी भूख अधिक लगती है तो कभी बिल्कुल नहीं। ऐसे व्यक्तियों को नींद कम आती है और वे स्वभाव से चंचल होते हैं। वे अधिक बोलने वाले, शीघ्र निर्णय लेने वाले तथा कई बार बिना गहन विचार के कार्य करने वाले होते हैं। उनके हाथ-पैर प्रायः ठंडे रहते हैं और वे शीत को सहन करने में असमर्थ होते हैं। इनके केश, नख और दांत अपेक्षाकृत कठोर होते हैं। स्वप्नों में उड़ना, ऊँचाइयों को पार करना या गति से संबंधित दृश्य देखना इनकी विशेषता होती है।

वातप्रकृतिः पुरुषाः रूक्षाः कृशाः अल्पबलाः भवन्ति। तेषां जठराग्निः मन्दः, निद्रा अल्पा च। ते चञ्चलाः बहुभाषिणः शीघ्रक्रियाशीलाः भवन्ति। हस्तपादौ शीतलौ भवन्ति, केशा नखा दन्ताश्च कठोराः भवन्ति। स्वप्ने आकाशगमनं उच्चलनं च पश्यन्ति।

पित्त प्रकृति वाले व्यक्तियों का शरीर कोमल, उष्ण तथा संवेदनशील होता है। उनका रंग प्रायः पीत या ताम्रवर्णी होता है और शरीर पर तिल या मस्से अधिक पाए जाते हैं। इन व्यक्तियों में भूख और प्यास अधिक लगती है तथा पाचन शक्ति तीव्र होती है। ये बुद्धिमान, तेजस्वी और पराक्रमी होते हैं, परंतु तनाव या कष्ट को सहन करने में कमजोर होते हैं। इनमें पसीना अधिक आता है और शरीर से दुर्गंध भी आ सकती है। इनके बाल जल्दी सफेद हो जाते हैं और दांतों में पीलापन दिखाई देता है। स्वप्नों में अग्नि, बिजली या चमकीली वस्तुओं का दर्शन होता है।

पित्तप्रकृतयः जनाः उष्णशरीराः कोमलाङ्गाः भवन्ति। तेषां वर्णः पीतः, तिलमसकाः अधिकाः भवन्ति। ते अतिभुक्तपिपासाः मेधाविनः पराक्रमिणः च सन्ति। ते क्लेशं न सहन्ते, स्वेदः अधिकः भवति। दन्ताः पीतवर्णाः भवन्ति, देहे दुर्गन्धः अपि भवति। स्वप्ने अग्नि विद्युत् दीप्तवस्तूनि पश्यन्ति।

कफ प्रकृति वाले व्यक्तियों का शरीर स्थूल, स्निग्ध और सुडौल होता है। उनका स्वभाव शांत, गंभीर, सहनशील और धैर्ययुक्त होता है। इन व्यक्तियों में पसीना कम आता है और उन्हें प्यास या गर्मी का अनुभव कम होता है। उनकी वाणी मधुर और स्पष्ट होती है, जिससे वे समाज में प्रिय बनते हैं। वे दीर्घायु, स्थिर बुद्धि और ज्ञानवान होते हैं तथा जीवन में संतुलन बनाए रखने में सक्षम होते हैं।

कफप्रकृतयः पुरुषाः स्थूलाः स्निग्धाः सुगात्राः भवन्ति। तेषां स्वभावः शान्तः धीरः सहनशीलः च अस्ति। तेषां स्वेदः अल्पः, तृष्णा अल्पा, उष्णता अपि अल्पा भवति। वाणी मधुरा स्पष्टा च। एते दीर्घायु ज्ञानी स्थिरबुद्धयः भवन्ति।

आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति का व्यवहार, उसकी जीवनशैली तथा रोगों की प्रवृत्ति इन तीनों दोषों के संतुलन पर निर्भर करती है। इसी आधार पर चिकित्सा का निर्धारण किया जाता है। कुछ व्यक्तियों में दो दोषों का सम्मिश्रण भी पाया जाता है, जिसे द्विदोषज प्रकृति कहा जाता है। व्यक्ति की मूल प्रकृति जन्म से निर्धारित होती है और सामान्यतः जीवनभर स्थिर रहती है। यदि इसमें अचानक परिवर्तन होता है तो उसे अशुभ संकेत या अरिष्ट माना जाता है।

वात-पित्त-कफप्रकृतयः एव व्यवहारं निर्धारयन्ति। चिकित्सा अपि तेषां आधारेण कर्तव्या। केषुचित् जनासु द्विदोषजप्रकृतिः अपि दृश्यते। प्रकृतिः न परिवर्तते। यदि आकस्मिकः परिवर्तनः भवति तर्हि सः अरिष्टसूचकः इति उच्यते।

मानसिक स्तर पर सत्त्व, रज और तम तीन गुण होते हैं, जिनमें यज्ञ, ज्ञान और तप के माध्यम से परिवर्तन संभव है। किंतु शारीरिक दोष अर्थात् वात, पित्त और कफ स्थायी माने जाते हैं और इन्हीं के संतुलन में स्वास्थ्य निहित है।

अतः यह स्पष्ट होता है कि आयुर्वेद में प्रकृति का ज्ञान केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। यदि व्यक्ति अपनी प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार और जीवनशैली अपनाता है, तो वह दीर्घकाल तक स्वस्थ, संतुलित और ऊर्जावान जीवन जी सकता है।

लेखक
डॉ. शिवाजी कुमार
(मनोवैज्ञानिक एवं विशेष शिक्षा विशेषज्ञ)

Raksha Bandhan: A Sacred Bond Beyond Time✍️ Dr. Shivaji KumarThe very mention of Raksha Bandhan brings to mind the affec...
10/08/2025

Raksha Bandhan: A Sacred Bond Beyond Time

✍️ Dr. Shivaji Kumar

The very mention of Raksha Bandhan brings to mind the affection of brothers and sisters, the colorful threads of rakhi, sweets, and gifts. But if we go deeper, this festival is not merely a family celebration — it is a symbol of the unbreakable, eternal, and divine bond between the soul and the Supreme Soul.

"Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Niramayah,
Sarve Bhadrani Pashyantu, Ma Kashchid Dukh Bhagbhavet."

This festival reminds us that true protection is not external but internal — when we fill our minds with pure thoughts, truth, and spiritual strength.

History and Original Form

In ancient times, Raksha Bandhan was not confined only to brothers and sisters. Brahmins would visit homes to tie the raksha sutra, symbolizing the pledge to uphold dharma, truth, and righteous duties. This sacred thread was a vow to maintain morality and unity in society. Over time, the practice simplified into a celebration between siblings, but its spiritual meaning remains just as relevant.

"Dharmo Rakshati Raksh*tah" — One who protects dharma is, in turn, protected by dharma.

Divine Protection: The Strongest Bond

In today’s world, the internal enemies — lust, anger, greed, attachment, and ego — are far more dangerous than external challenges. At Samarpan Yoga, Naturopathy, Spiritual Healing, and Ayurveda Centres, Raksha Bandhan means taking a divine vow before the Supreme Soul to maintain purity in our thoughts, words, and actions.

This rakhi is tied not just on the wrist, but upon the soul — through remembrance and meditation. It is a pledge:
"I will not allow negativity, wastefulness, or weakness to come near me."

Raksha Bandhan at Samarpan Yoga, Naturopathy, Spiritual Healing, and Ayurveda Centres

Here, the rakhi signifies a sacred covenant between the soul and the Supreme:
"I, the soul, will walk the path of purity, truth, and self-awareness, under the canopy of God’s grace."

Main features of the celebration include:

Tilak: Applied at the centre of the forehead, signifying the awareness of the soul.

Rakhi: Symbol of God’s love and protection.

Silent Meditation: Moments of deep spiritual connection with the Supreme Father.

Sweet Offering: Not only for taste but to inspire sweet thoughts and behaviour.

Blessing Card: A personal message from the Supreme to keep as inspiration throughout the year.

"Shubham Karoti Kalyanam Arogyam Dhana Sampadah,
Shatru Buddhi Vinashay, Deepa Jyotir Namo’stute."

Purity: The Armour of the Soul

Raksha Bandhan reminds us that true protection lies in purity. This is not limited to celibacy, but extends to purity of thoughts, emotions, and relationships. When the soul stays connected to the Supreme Soul, its inner world becomes bright and powerful.

True Sweetness and the Greatest Gift

True sweetness is in gentle speech, humble conduct, and benevolent feelings. And the greatest gift is the practice of silence — taking a few moments daily to connect with the Supreme, filling the mind with love, peace, and power. This is the living raksha sutra.

A Universal Message

Across many parts of the world, Samarpan Yoga, Naturopathy, Spiritual Healing, and Ayurveda Centres celebrate this festival beyond the boundaries of caste, creed, and gender. The message for every soul is:

I am a soul, peace and purity are my nature.

I belong to that Supreme Soul, who is always with me.

I will walk the path of love, compassion, and truth.

"Vasudhaiva Kutumbakam" — The whole world is one family.

This Raksha Bandhan, let us move beyond external protection and take a vow to protect the soul — to tie that divine bond with the Supreme, which can never be broken.

🌞 ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप का सुनहरा अवसर!सीखें, जुड़ें और समाज को समझें – अपने ही ज़िले में!प्रिय अभिभावकों एवं विद्यार्थ...
31/05/2025

🌞 ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप का सुनहरा अवसर!

सीखें, जुड़ें और समाज को समझें – अपने ही ज़िले में!

प्रिय अभिभावकों एवं विद्यार्थियों,

गर्मी की छुट्टियाँ केवल विश्राम का नहीं, स्व-विकास, सामाजिक समझ और नेतृत्व निर्माण का भी समय है।
इसी उद्देश्य से समर्पण संस्थागत नेटवर्क आपके लिए लेकर आया है –
ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप एवं स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम – 2025

🎯 इंटर्नशिप विशेषतः उन विद्यार्थियों और युवाओं के लिए है जो—
• सीखना चाहते हैं सामाजिक कार्य का व्यावहारिक पक्ष
• बढ़ाना चाहते हैं संवाद कौशल, टीमवर्क, नेतृत्व और रिपोर्ट लेखन
• समझना चाहते हैं जमीनी स्तर की नीतियाँ, प्रशासन और समुदाय

🔶 मुख्य क्षेत्र

✅ सामाजिक कार्य | प्रशासन | जनसंपर्क | संप्रेषण | डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन
✅ मनोविज्ञान | दर्शन | नीति विश्लेषण | पंचायत सशक्तिकरण
✅ महिला एवं बाल सशक्तिकरण | दिव्यांगजन एवं वृद्ध सेवा | स्वास्थ्य और शिक्षा
✅ नशामुक्ति | पर्यावरण | बाल अधिकार | मानवाधिकार | ग्रामीण आजीविका

🏫 किनके लिए उपयुक्त?
• कक्षा 9वीं–12वीं के विद्यार्थी
• स्नातक व परास्नातक छात्र (UG/PG)
• तकनीकी/व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्र
• बेरोजगार/युवजन जो सामाजिक क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं

📅 कार्यकाल:

🗓 2 जून 2025 – 31 जुलाई 2025
⏳ विकल्प: 4 सप्ताह या 8 सप्ताह

🌐 हमारा नेटवर्क:

📍 बिहार और झारखंड के 38 जिलों, 534 प्रखंडों, और 8400 पंचायतों में सक्रिय
👥 103+ संस्थाओं के साथ साझेदारी
🌍 7.11 लाख से अधिक लाभार्थी – जिनमें शामिल हैं दिव्यांगजन (PwDs), विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSNs), विधवाएँ, अनाथ, वंचित समुदाय



🎁 इंटर्नशिप से आपको मिलेगा –

✅ प्रमाणपत्र + लर्निंग पोर्टफोलियो + फील्ड एक्सपोज़र
✅ SDGs 4, 5, 8 आधारित सामाजिक अनुभव
✅ CHILD CONCERN और SAMARPAN जैसे प्रतिष्ठित संगठनों से मार्गदर्शन
✅ सामाजिक और डिजिटल नेटवर्किंग के अवसर



📲 रजिस्ट्रेशन हेतु लिंक:

👉 https://forms.gle/fUYd3D931B1Q9fTq5

👨‍👩‍👧‍👦 अभिभावकगण!
अपने बच्चों को इस ज्ञानवर्धक, उद्देश्यपरक और सशक्तिकरण से भरपूर अनुभव से अवश्य जोड़ें।
यह केवल एक इंटर्नशिप नहीं, एक बदलाव की शुरुआत है!

🙏🌺🌼🌸

सादर,
डॉ. शिवाजी कुमार
अध्यक्ष, समर्पण संस्थागत नेटवर्क
(एक सामाजिक उद्देश्य हेतु समर्पित समूह)
📧 Shivajee100@gmail.com

📢 Dr. Shivajee Sir’s Telegram Educational Channel – शिक्षा सबके लिए 📢Dr. Shivajee Kumar ने एक डिजिटल एजुकेशनल चैनल शुरू ...
26/02/2025

📢 Dr. Shivajee Sir’s Telegram Educational Channel – शिक्षा सबके लिए 📢

Dr. Shivajee Kumar ने एक डिजिटल एजुकेशनल चैनल शुरू किया है, जिसका उद्देश्य सभी छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करना है। यह प्लेटफॉर्म Bihar Board (Class 10, 11 & 12) और सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे दिव्यांग (PwD), गरीब, वंचित और सामाजिक रूप से पिछड़े छात्रों के लिए बनाया गया है।

📖 Exams & Courses Covered | परीक्षाएँ और कोर्स:

✅ JEE, NEET
✅ UGC NET, TRE Exams
✅ Banking, Railway
✅ SSC (CGL, CHSL, MTS, GD आदि | etc.)
✅ दरोगा (Sub-Inspector), पुलिस भर्ती | Police Recruitment
✅ सभी सरकारी एवं प्रतियोगी परीक्षाएँ | All Govt. & Competitive Exams
✅ D.Ed Special Education, B.Ed Special Education
✅ All RCI Approved Courses (Hearing, Visual, Intellectual & Multiple Disabilities)

🎯 Why Join? | क्यों जुड़ें?

📚 Quality education for all | हर छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
📚 Support for divyang & underprivileged students | दिव्यांग और वंचित छात्रों को मदद
📚 Guidance for academic & psychological empowerment | शैक्षणिक और मानसिक सशक्तिकरण

🔗 Join Now | अभी जुड़ें: https://t.me/drshivajee

🔄 Share this link on social media and be part of this educational revolution! | इस लिंक को सोशल मीडिया पर शेयर करें और शिक्षा क्रांति का हिस्सा बनें!

🌺🌼🌸
🙏 Dr. Shivajee Kumar
📞 +91 9431015499
“Your future is secure, your dreams will come true! | आपका भविष्य सुरक्षित, आपका सपना साकार!”

05/02/2025

आठ प्रहर: समय, आध्यात्मिकता और जीवन पर प्रभाव

✍️ डॉ. शिवाजी कुमार

भारतीय संस्कृति में समय का अत्यधिक महत्व है। हमारे पूर्वजों ने दिन और रात को आठ प्रहरों में विभाजित किया है, जिससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि किस समय कौन-सा कार्य करना शुभ या अशुभ होता है। प्रत्येक प्रहर का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। आइए इन प्रहरों को विस्तार से समझें।

1. पहला प्रहर (शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक) - प्रदोष काल

यह समय संध्याकाल का होता है, जिसे प्रदोष काल भी कहते हैं। इस समय देवी-देवताओं की पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। भगवान शिव की आराधना और दीपदान करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।

शास्त्रों के अनुसार –
🔹 संध्या वंदन, मंत्र जाप और हवन करना अत्यंत फलदायी होता है।
🔹 इस समय का उपयोग आत्मचिंतन और सत्संग में करना चाहिए।

2. दूसरा प्रहर (रात 9 बजे से 12 बजे तक) - शांति और साधना का समय

यह समय ध्यान, साधना और मंत्र जप के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। हालाँकि, इस समय तामसिक प्रवृत्तियों से बचना चाहिए।

मान्यता –
🔹 इस समय खरीदारी और आर्थिक लेन-देन शुभ माना जाता है।
🔹 पेड़-पौधों को नहीं छूना चाहिए, क्योंकि इस समय वे अपनी ऊर्जा संचित करते हैं।

3. तीसरा प्रहर (रात 12 बजे से 3 बजे तक) - निशीथ काल

इस समय को गुप्त साधनाओं, तांत्रिक क्रियाओं और सिद्धियों की प्राप्ति के लिए उपयुक्त माना गया है।

शास्त्रों में वर्णन –
🔹 कुछ विशेष मंत्रों का जाप और साधना इस समय सिद्ध होती है।
🔹 इस समय शरीर और मन को आराम देना भी आवश्यक होता है।

4. चौथा प्रहर (रात 3 बजे से सुबह 6 बजे तक) - ब्रह्म मुहूर्त

यह प्रहर दिन का सबसे पवित्र समय होता है, जिसे ऊषा काल भी कहते हैं। इस दौरान की गई साधना और पूजा हजार गुना फलदायी होती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण –
🔹 इस समय वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है।
🔹 ध्यान, योग, प्राणायाम और वेदपाठ करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।

5. पाँचवां प्रहर (सुबह 6 बजे से 9 बजे तक) - दिन का शुभारंभ

इस समय सूर्य की किरणें पूरे वातावरण को ऊर्जावान बनाती हैं। पूजा-पाठ और सकारात्मक कार्यों के लिए यह समय उत्तम है।

महत्व –
🔹 सूर्योदय के समय गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी होता है।
🔹 इस समय नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और दिन की अच्छी शुरुआत होती है।

6. छठा प्रहर (सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक) - कर्म और कार्यक्षेत्र

यह समय कर्मयोग का होता है। शिक्षा, व्यापार और श्रम करने का यह सबसे उपयुक्त समय है।

धार्मिक मान्यता –
🔹 इस समय मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
🔹 विद्या-अध्ययन, सत्संग और सेवा कार्य करना लाभदायी होता है।

7. सातवां प्रहर (दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक) - शुभ कार्यों का समय

इस समय किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। इसे देवताओं का काल भी कहा जाता है।

महत्व –
🔹 इस समय यज्ञ, दान-पुण्य और शुभ कार्य करना श्रेष्ठ माना गया है।
🔹 इस दौरान हल्का भोजन करने की परंपरा है, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।

8. आठवां प्रहर (शाम 3 बजे से 6 बजे तक) - विश्राम और संयम

यह दिन का अंतिम प्रहर होता है। इस दौरान अधिक परिश्रम और नींद से बचना चाहिए।

विशेष मान्यता –
🔹 इस समय सोने से आलस्य बढ़ता है और स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
🔹 देवी-देवताओं की आराधना और ध्यान करने से आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

🌺🌼🌸

आठ प्रहरों का ज्ञान हमें यह सिखाता है कि समय का सही उपयोग कैसे किया जाए। यदि हम इन प्रहरों के अनुसार अपने जीवन को ढाल लें, तो आध्यात्मिक और भौतिक रूप से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में समय को केवल घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रकृति के चक्र के रूप में देखा गया है।

“समय का सम्मान करें, यह आपका जीवन बदल सकता है!” ⏳✨

✍️ डॉ. शिवाजी कुमार
Bihar Yoga, Spiritual Healings, Naturopathy & Ayurveda

02/02/2025

🌞 सुप्रभात! 🙏

🌟 आज का विचार (02-02-2025) 🌟

💡 “मन की शुद्धि से ही जीवन का उत्थान संभव है।”
✍️ डॉ. शिवाजी कुमार

जो अंतर्मन को नियंत्रित करता है, वही सच्ची शांति प्राप्त करता है।
स्वयं को पहचानना ही आत्मज्ञान की ओर पहला कदम है।
जो विकारों से मुक्त होकर सत्य के मार्ग पर चलता है,
वही जीवन में परम आनंद को प्राप्त करता है।

📖

“चित्तस्य शुद्धये कर्म न तु वस्तुपलाभये।
वासना क्षयमायाति ह्यतो ज्ञानं प्रकाशते॥”
(योग वशिष्ठ)


कर्म का उद्देश्य मन की शुद्धि है, न कि केवल भौतिक लाभ। जब वासनाओं का क्षय होता है, तब आत्मज्ञान का प्रकाश फैलता है।

📜

“बड़े भाग मानुष तन पावा।
सुर दुर्लभ सब ग्रंथन्हि गावा॥”
(तुलसीदास जी)


मनुष्य का शरीर बहुत सौभाग्य से मिलता है, जो देवताओं को भी दुर्लभ है। इस जीवन को व्यर्थ न जाने दें और सत्कर्म करें।

🕉️
🌿 स्वयं को जानो, मन को शुद्ध रखो, और सत्य के पथ पर बढ़ते रहो।
✨ आध्यात्मिक शुद्धता ही परम सफलता की कुंजी है।

🙏 ईश्वर आपके मन को शुद्ध, बुद्धि को उज्ज्वल और जीवन को मंगलमय बनाए। 🙏
🌸 सुप्रभात! आपका दिन शुभ हो! 🌸

01/02/2025

🌞 सुप्रभात! 🙏

🌟 आज का विचार (01-02-2025) 🌟

💡 “सकारात्मक सोच, सफल जीवन की नींव है।”
✍️ डॉ. शिवाजी कुमार

📚
“उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।
आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः॥”
(भगवद गीता 6.5)

👇🌼🌸🌺
मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, न कि स्वयं को नीचे गिराना चाहिए, क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है और आत्मा ही आत्मा की शत्रु भी बन सकती है।

🔹 महर्षि वाल्मीकि ने डाकू से महाकवि बनने तक का सफर किया, क्योंकि उन्होंने अपनी सोच बदली।
🔹 महर्षि व्यास ने महाभारत की रचना कर पूरे मानव समाज को धर्म, नीति और जीवन के सत्य से परिचित कराया।
🔹 महर्षि पतंजलि ने योगदर्शन द्वारा आत्म-साक्षात्कार का मार्ग दिखाया।

🌿 सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से ही जीवन में सफलता संभव है।
✨ धैर्य और सतत प्रयास ही हमें महानता की ओर ले जाते हैं।

🙏 आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो! 🙏
🌸 सुप्रभात! 🌸

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