09/10/2025
जब भी भारत पर संकट आया है, इज़राइल ने हमेशा दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक, इज़राइल ने भारत को हथियार, तकनीक और खुफिया जानकारी देकर मदद की थी, जबकि कई देश भारत की मदद करने से हिचक रहे थे। कारगिल युद्ध के दौरान जब पाकिस्तान ने घुसपैठ की और भारत को तत्काल आधुनिक हथियारों की जरूरत थी, तब इज़राइल ने भारत को मोर्टार, गोला-बारूद, लेज़र-गाइडेड मिसाइलें और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक दी। इज़राइल ने अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत को जरूरी हथियार समय पर पहुँचाए, जिससे भारतीय सेना को ऊँचाई वाले दुर्गम इलाकों में पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाने में बड़ी मदद मिली।
कारगिल युद्ध के समय भारतीय वायुसेना को अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण जरूरी फ्यूज और उपकरण नहीं मिल पा रहे थे, तब इज़राइल के तकनीकी विशेषज्ञों ने भारतीय मिराज-2000 विमानों के लिए लाइटनिंग पॉड और लेज़र गाइडेड बमों का इंटीग्रेशन रिकॉर्ड समय में कर दिया। इससे भारतीय वायुसेना ने सटीक बमबारी कर पाकिस्तानी ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया और युद्ध का रुख बदल दिया। इज़राइल ने न सिर्फ हथियार दिए, बल्कि अपने अनुभव और तकनीक से भारत की सैन्य ताकत को मजबूत किया।
इज़राइल और भारत की दोस्ती सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी एक-दूसरे का साथ दिया है। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इज़राइल ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया और आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सराहना की। इज़राइल के प्रधानमंत्री और राजदूतों ने हमेशा भारत के साथ खड़े रहने का संदेश दिया है, चाहे पुलवामा हमला हो या कोई और आतंकी घटना।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी कई बार सार्वजनिक मंचों से इज़राइल की मदद का आभार जताया है। उनके नेतृत्व में भारत-इज़राइल संबंध और मजबूत हुए हैं। मोदी जी ने इज़राइल यात्रा के दौरान खुले मंच से कहा था कि जब भारत को जरूरत थी, तब इज़राइल ने बिना शर्त मदद दी थी, और भारत इस दोस्ती को कभी नहीं भूलेगा। यही वजह है कि आज जब इज़राइल पर संकट आता है, तो भारत के लोग भी उसके साथ खड़े दिखते हैं।
अगर आप भी मानते हैं कि इज़राइल ने भारत का हमेशा साथ दिया है, तो यह भावना स्वाभाविक है कि आप इज़राइल को जीतते देखना चाहते हैं। भारत और इज़राइल की दोस्ती सिर्फ रणनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच आपसी सम्मान और भरोसा है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग इज़राइल के समर्थन में अपनी राय रखते हैं, खासकर जब बात आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की हो।
आज जब दुनिया में कई देश अपने-अपने हितों के लिए दोस्ती निभाते हैं, तब भारत-इज़राइल की मित्रता एक मिसाल है। दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी गहरा सहयोग है। इज़राइल की तकनीक ने भारत के कृषि क्षेत्र को भी नई दिशा दी है। यही वजह है कि दोनों देशों के रिश्ते समय के साथ और मजबूत होते जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के समय 140 करोड़ भारतीय, सभी राजनीतिक दल और पूरा देश एकजुट होकर सरकार के साथ खड़ा था। यही एकता भारत-इज़राइल दोस्ती की भी ताकत है। जब भी भारत या इज़राइल पर संकट आता है, दोनों देश एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।
इसलिए अगर आप कॉमेंट में लिखते हैं कि आप भी इज़राइल को जीतते देखना चाहते हैं, तो यह सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि भारत-इज़राइल की ऐतिहासिक दोस्ती और साझा मूल्यों का सम्मान है। दोनों देशों ने हमेशा आतंकवाद और अन्याय के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी है, और आगे भी यह दोस्ती कायम रहेगी।