06/02/2026
थायरॉयड की बीमारी: छोटे लक्षण, बड़ा असर — समय रहते पहचानें!
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थायरॉयड असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है। यह एक ऐसी स्थिति है जो शरीर की ऊर्जा, वजन, पाचन, हॉर्मोन संतुलन और मानसिक स्थिति तक को प्रभावित करती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह समस्या शरीर की अग्नि (Metabolism) और दोष संतुलन बिगड़ने से जुड़ी होती है।
🦋 थायरॉयड क्या है?
गले के सामने तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि—थायरॉयड—दो प्रमुख हॉर्मोन बनाती है: T3 (ट्रायआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरॉक्सिन)। ये हॉर्मोन शरीर की ऊर्जा, पाचन, वृद्धि और मानसिक स्वास्थ्य को नियंत्रित करते हैं।
हॉर्मोन ज्यादा बने → हाइपरथायरॉयड
हॉर्मोन कम बने → हाइपोथायरॉयड
⚠️ थायरॉयड क्यों होता है?
आनुवंशिक कारण (परिवार में इतिहास)
लगातार तनाव, अनियमित दिनचर्या, कम नींद
आयोडीन की कमी या अधिकता
ऑटोइम्यून स्थितियाँ (जैसे ग्रेव्स, हाशिमोटो)
हॉर्मोनल बदलाव, विशेषकर महिलाओं में (गर्भावस्था/मेनोपॉज)
🔍 लक्षण पहचानें
हाइपोथायरॉयड (हॉर्मोन की कमी)
अचानक वजन बढ़ना
थकान, कमजोरी
ठंड ज्यादा लगना
त्वचा का रूखापन
बालों का झड़ना
उदासी, अवसाद
हाइपरथायरॉयड (हॉर्मोन की अधिकता)
वजन कम होना
दिल की धड़कन तेज
नींद की कमी
चिड़चिड़ापन, चिंता
अधिक पसीना
हाथों में कंपकंपी
🛡️ बचाव के उपाय...
1.Indusviva के advance aayurved product का इस्तेमाल करें...
2.संतुलित आहार लें, आयोडीनयुक्त नमक का उचित उपयोग करें
3.नियमित और पर्याप्त नींद लें
4.प्रदूषण/रेडिएशन से दूरी रखें
5.समय-समय पर थायरॉयड टेस्ट कराते रहें
✨ निष्कर्ष
थायरॉयड कोई छोटी समस्या नहीं—यह शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करती है। सही जानकारी, समय पर जांच, संतुलित आहार, योग और आयुर्वेदिक दिनचर्या अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सचेत रहें, नियमित जांच कराएं, और शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें।
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