Kamal Vyas Vaidya

Kamal Vyas Vaidya Jay Dhanvantari Jay Ayurved जय धन्वन्तरि--जय आयुर्वेद

"स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं।" आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है, जिसका अर्थ है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्...
23/09/2025

"स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं।" आयुर्वेद का मूल सिद्धांत है, जिसका अर्थ है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के विकार को दूर करना। एक अन्य श्लोक बताता है कि "हिताहितं सुखं दुःखं आयुः तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तं आयुर्वेदः स उच्यते।।", जो आयुर्वेद के वैज्ञानिक स्वरूप को बताता है, कि यह वह विज्ञान है जो जीवन के लिए हितकारी और अहितकारी तत्वों का वर्णन करता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर सभी के स्वस्थ रहनें की कामना ...जय धन्वन्तरि जय आयुर्वेद

18/09/2025

💧 आयुर्वेद के अनुसार पानी पीने के 10 नियम
1. प्यास लगे तभी पानी पिएँ – जबरदस्ती अधिक पानी न पिएँ।
2. शांत मुद्रा में बैठकर पिएँ – खड़े होकर या चलते-फिरते पानी न पिएँ।
3. धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पिएँ – तेज़ी से एक साथ न गटकें।
4. गुनगुना या सामान्य तापमान का पानी पिएँ – बहुत ठंडा पानी हानिकारक है।
5. भोजन के साथ सीमित मात्रा में पिएँ – अधिक पानी पाचन अग्नि को कमजोर करता है।
6. भोजन के तुरंत बाद पानी न पिएँ – थोड़ी देर बाद ही लें।
7. स्वच्छ व सुरक्षित बर्तन में संग्रह करें – तांबे/मिट्टी/काँच के बर्तन उत्तम हैं।
8. मौसम के अनुसार पानी की मात्रा बदलें – गर्मियों में अधिक, सर्दियों में कम।
9. सुबह-शाम हल्का गुनगुना पानी लाभकारी है – शरीर को शुद्ध करता है।
10. तनाव, गुस्से या भावावेश में पानी न पिएँ – यह पाचन व मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है।

17/09/2025

अनियमित खानपान और भागमभाग भरी जिंदगी की आम समस्या --**नाभि टलना या नाभि खिसकना** ..
हमारे शरीर में नाभि (नाभि चक्र) केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का भी केंद्र माना जाता है। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा में इसे “जीवन शक्ति का द्वार” कहा गया है। जब नाभि अपनी प्राकृतिक स्थिति से हल्की सी इधर-उधर खिसक जाती है, तो इसे आम बोलचाल में नाभि खिसकना कहा जाता है। यह समस्या देखने में साधारण लग सकती है, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह पाचन, ऊर्जा और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है।
** नाभि खिसकना क्या है?
नाभि के चारों ओर मांसपेशियाँ, स्नायु और पाचन तंत्र से जुड़े कई बिंदु होते हैं।
जब किसी कारणवश नाभि अपनी मध्य स्थिति (सेंटर पोज़िशन) से हट जाती है, तो पेट में खिंचाव, दर्द और गैस की समस्या महसूस होती है।
इसे वैज्ञानिक भाषा में Umbilical Shift Syndrome कहा जाता है।
-- नाभि खिसकने के कारण
भारी सामान उठाना
अचानक तेज़ व्यायाम या कूदना
कब्ज़ या गैस की समस्या
भोजन के तुरंत बाद भारी काम करना
कमज़ोर पेट की मांसपेशियाँ
अचानक गिरना या फिसलना
-- नाभि खिसकने के लक्षण
पेट के बीचों-बीच खिंचाव या दर्द
भूख कम लगना या अचानक ज़्यादा लगना
दस्त या कब्ज़
गैस और अफारा
कमर और निचले हिस्से में भारीपन
कभी-कभी चक्कर आना और थकान
👉 नाभि खिसकने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय
सरसों के तेल की विधि
– नाभि के चारों ओर और अंदर 2–3 बूंद सरसों का तेल डालें।
– इससे स्नायु शिथिल होकर नाभि अपनी जगह पर आने लगती है।
गरम पानी की थैली (Hot Water Bag)
– पेट पर हल्का गरम पानी की थैली रखने से मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और नाभि सेंटर में आ जाती है।
नाभि सीधा करने का योगासन
– पवनमुक्तासन और मकरासन का अभ्यास करें।
– ये आसन नाभि को संतुलित करने में सहायक होते हैं।
नींबू और अजवाइन का नुस्खा
– नाभि खिसकने पर पाचन गड़बड़ हो जाती है।
– गुनगुने पानी में नींबू का रस और चुटकी भर अजवाइन डालकर पीने से तुरंत राहत मिलती है।
गर्म दूध और हींग
– दूध में चुटकी भर हींग डालकर पीने से गैस और ऐंठन कम होती है।
– नाभि को सही स्थिति में लाने में यह सहायक है।
तौलिये से खींचाव विधि
– पीठ के बल लेटकर पैरों को सीधा रखें।
– कोई विश्वसनीय व्यक्ति नाभि के पास पेट पर तौलिये से हल्का दबाव देकर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे खींचे।
– यह लोक चिकित्सा में प्रचलित असरदार तरीका है।
👉आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में नाभि को “सम्बंधिनी मर्म” कहा गया है।
यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों के संतुलन का केंद्र है।
नाभि खिसकने को मुख्यतः वात विकार माना जाता है।
इसे ठीक करने के लिए अभ्यंग (तेल मालिश), स्नेहपान और योगासन प्रमुख उपाय बताए गए हैं।
---बचाव के उपाय
भारी सामान उठाने से बचें।
कब्ज़ की समस्या न होने दें, फाइबरयुक्त भोजन करें।
योग और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करें।
भोजन के तुरंत बाद झुकने या भागने से बचें।
पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित व्यायाम करें।
निष्कर्ष : नाभि खिसकना एक आम लेकिन महत्वपूर्ण समस्या है। समय रहते यदि घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय अपनाए जाएँ तो यह आसानी से ठीक हो सकती है। सबसे जरूरी है जीवनशैली में संतुलन और शरीर को सुनना। क्योंकि जब नाभि संतुलित होती है, तो स्वास्थ्य भी संतुलित रहता है।
from Ayurveda group ..

01/07/2025
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06/04/2025

श्री राम रामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं, श्री राम-नाम वरानने ।।

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