26/03/2025
एक फोटो वायरल हो रही है जिसमें योग की निंदा की जा रही है यह चर्चा नहीं हो रही क्या जो बूटी लगाई गई बीमारी के समय जबरदस्ती सब लोगों को उसे बूटी बूटी का या सुई का कोई दुष्प्रभाव हो सकता है। चलिए यह तो योग करने वाले थे लेकिन जिनको स्टेज के ऊपर न्यूज़ पढ़ते पढ़ते चलते-चलते फिरते फिरते और बहुत से लोग युवाओं को जो हार्ट अटैक हो रहे हैं वह किस कारण से हो रहे हैं षड्यंत्र पूर्व किसी खबर को योग से जोड़कर फैलाया जा रहा है इससे सावधान रहें योग लाभदायक पहले भी था आज भी है और आगे भी रहेगा इसके ऊपर हजारों रिसर्च पूरी दुनिया में हो चुकी हैं लेकिन जो बीमारी के लिए जबरदस्ती सर्टिफिकेट के साथ बूटी लगाई गई उसके क्या-क्या नुकसान है इसके ऊपर कोई चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है
योग के सकारात्मक प्रभावों को बदनाम करने वालो से बचे
आयु प्रारब्ध से भी होती है।
योग आयुर्वेद में तो व्यायाम के बारे में जो महर्षि चरक ने हजारों साल पहले कह दिया वह आज भी प्रासंगिक और प्रामाणिक है
चरक संहिता – सूत्रस्थान अध्याय 7 (व्यायाम संबंधित सभी सूत्र)
चरक संहिता के सूत्रस्थान, अध्याय 7 में व्यायाम (Exercise) और उसके प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह अध्याय मुख्य रूप से व्यायाम के लाभ, सीमाएँ, नियम और सावधानियों को दर्शाता है।
---
📜 सभी महत्वपूर्ण सूत्र (श्लोक) व्यायाम पर
1️⃣ व्यायाम का महत्व और प्रभाव
✅ "व्यायामात् बलं वृद्धिं सुखं दीर्घायुश्च मानवः।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.31)
🔹 अर्थ: व्यायाम करने से बल, शक्ति, सुख और दीर्घायु प्राप्त होती है।
✅ "युक्तस्य व्यायामस्य फलमाहुः स्थिरत्वं बलवर्णकृत्।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.36)
🔹 अर्थ: उचित मात्रा में किया गया व्यायाम शरीर को स्थिरता, बल और सुंदर रंग प्रदान करता है।
✅ "व्यायामं बलवतां कुर्वीत मृदु पुनः।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.27)
🔹 अर्थ: बलशाली व्यक्ति को व्यायाम करना चाहिए, लेकिन जो कमजोर हैं, उन्हें हल्का व्यायाम करना चाहिए।
---
2️⃣ व्यायाम कितना और कब करें?
✅ "आर्द्रस्वेदगात्रस्यार्द्रं सत्त्वस्य विवर्तनम्। तदर्धव्यायमशक्तस्य बलार्थं हि चिकीर्षितम्॥"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.32)
🔹 अर्थ: व्यायाम तब तक करें जब तक शरीर हल्का पसीना न छोड़ने लगे। जो व्यक्ति कमजोर हो, उसे अपनी क्षमता के आधे तक ही व्यायाम करना चाहिए।
✅ "ह्रस्वकालं भवेद्भुक्त्वा व्यायामस्तु यथाबलम्।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.29)
🔹 अर्थ: भोजन करने के तुरंत बाद व्यायाम नहीं करना चाहिए, बल्कि सीमित समय के लिए और अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए।
✅ "यत् स्याद् गुरु चात्यर्थं शीघ्रं वा यदि वा बलात्। तद् व्यायामस्य सन्धानं बलार्हस्य प्रचक्षते॥"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.30)
🔹 अर्थ: बहुत भारी, बहुत तेज़ या अत्यधिक बल लगाने वाला व्यायाम केवल बलशाली व्यक्ति के लिए उपयुक्त माना गया है।
---
3️⃣ अत्यधिक व्यायाम के दुष्प्रभाव (नुकसान)
✅ "अत्यर्थं व्यायमानस्य गात्राण्यायासमृच्छति।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.33)
🔹 अर्थ: जो व्यक्ति अत्यधिक व्यायाम करता है, उसके अंगों में थकान और कमजोरी उत्पन्न होती है।
✅ "ह्रदयस्य दौर्बल्यं क्षयः श्वासप्रश्वासयोः। अंगदौर्बल्यसंदर्भः सव्यायामे दोषजा हि ते॥"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.34)
🔹 अर्थ: अधिक व्यायाम करने से हृदय कमजोर हो जाता है, शरीर का क्षय (कमजोरी) होता है, श्वसन संबंधी समस्याएँ होती हैं और अंग दुर्बल हो जाते हैं।
✅ "अत्यधिक व्यायामात् क्षयः, ह्रदयदौर्बल्यं, श्वासप्रश्वास, अंगदौर्बल्यं च जायते।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.35)
🔹 अर्थ: अत्यधिक व्यायाम करने से शरीर क्षीण हो जाता है, हृदय कमजोर हो जाता है, श्वास लेने में कठिनाई होती है और अंग शक्तिहीन हो जाते हैं।
---
4️⃣ ऋतु के अनुसार व्यायाम के नियम
✅ "ग्रीष्मे वर्षासु नात्यर्थं, हेमन्ते च विशेषतः।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.37)
🔹 अर्थ: ग्रीष्म (गर्मियों) और वर्षा ऋतु में अत्यधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए, लेकिन हेमंत (सर्दी) ऋतु में अधिक व्यायाम करना लाभकारी होता है।
✅ "ऋतुविपर्यये व्यायामाज्जायते व्याधिसंभवः।"
(चरक संहिता, सूत्रस्थान 7.38)
🔹 अर्थ: ऋतु के विपरीत (गर्मियों में अधिक, सर्दियों में कम) व्यायाम करने से विभिन्न रोग उत्पन्न हो सकते हैं।
---
📌 संपूर्ण निष्कर्ष:
✔ व्यायाम से बल, दीर्घायु, और सुख की प्राप्ति होती है।
✔ व्यायाम उतना ही करें, जिससे हल्का पसीना आए और मन प्रसन्न रहे।
✔ अत्यधिक व्यायाम करने से शरीर कमजोर हो सकता है और बीमारियाँ हो सकती हैं।
✔ ऋतु के अनुसार व्यायाम की मात्रा तय करें – सर्दियों में अधिक, गर्मियों में कम।
✔ भोजन के तुरंत बाद व्यायाम न करें और अपनी क्षमता के अनुसार ही करें।
"संयमित व्यायाम ही उत्तम स्वास्थ्य का आधार है।"
(चरक संहिता के अनुसार, सही मात्रा में और उचित समय पर किया गया व्यायाम ही शरीर को स्वस्थ, शक्तिशाली और दीर्घायु बनाता है।)