A SHAD HOMOEO CLINIC

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यह सिर्फ एक क्लिनिक नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवन शैली का समुदाय है। आइए, प्राकृतिक तरीके से एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन की यात्रा शुरू करें। Dr. Sheikh Abul Kalam Azad
Dr. Sheikh Mohammad Abushad Raja Azad

हैनिमन सर ने कहा था कि👉 “एक समय में एक ही सही चुनी हुई दवा देनी चाहिए।”लेकिन आजकल कई जगह: ❌ 3-4 दवाएं एक साथ❌ कॉम्बिनेशन...
26/05/2026

हैनिमन सर ने कहा था कि
👉 “एक समय में एक ही सही चुनी हुई दवा देनी चाहिए।”
लेकिन आजकल कई जगह: ❌ 3-4 दवाएं एक साथ
❌ कॉम्बिनेशन दवाएं
❌ पेटेंट मेडिसिन
❌ बिना सही केस समझे मिश्रण
दिए जा रहे हैं।
इससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि
असल में कौन-सी दवा असर कर रही है।
Classical Homeopathy का सिद्धांत कहता है: ✅ रोग को अच्छे से समझो
✅ सही दवा चुनो
✅ कम दवा दो
✅ दवा को काम करने का समय दो
“एक सही दवा कई दवाओं के मिश्रण से बेहतर काम कर सकती है।”

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04/05/2026

Documentary on Dr Samuel Hahnemann Sir




होम्योपैथिक दवा: अल्फाल्फा (Alfalfa) - वजन बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने वाला प्राकृतिक टॉनिकtext credit -dr.Amit Jainनमस्...
25/04/2026

होम्योपैथिक दवा: अल्फाल्फा (Alfalfa) - वजन बढ़ाने और शरीर को ऊर्जा देने वाला प्राकृतिक टॉनिक

text credit -dr.Amit Jain
नमस्ते दोस्तों! आज हम चर्चा करेंगे एक ऐसी होम्योपैथिक दवा के बारे में जिसे 'जीवन की शक्ति' (The Father of All Foods) कहा जाता है। अल्फाल्फा (Alfalfa) न केवल एक दवा है, बल्कि यह शरीर के लिए एक संपूर्ण पोषक तत्व है जो कमजोरी को जड़ से मिटाने की क्षमता रखता है।

1. परिचय
स्रोत: यह दवा 'मेडिकागो सैटिवा' (Medicago Sativa) नामक पौधे के ताजे पत्तों से तैयार की जाती है। अतः यह एक वनस्पति (Plant) स्रोत की औषधि है।

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मुख्य कार्यक्षेत्र (Sphere of Action): इसका सबसे प्रमुख प्रभाव पाचन तंत्र (Digestive System), मस्तिष्क (Brain) और मांसपेशियों पर होता है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधार कर पोषण के अवशोषण (Absorption) को बढ़ाती है।

2. प्रमुख लक्षण (Key Indications)
अल्फाल्फा को "वजन बढ़ाने (Weight Gain) और मानसिक व शारीरिक थकान" के लिए दुनिया की नंबर-1 होम्योपैथिक दवा माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति कुपोषण का शिकार है, उसे भूख नहीं लगती, या बीमारी के बाद आई कमजोरी दूर नहीं हो रही, तो अल्फाल्फा सबसे सटीक विकल्प है।

3. विस्तृत लक्षण सूची (Detailed Symptoms)
भूख की कमी: खाने की इच्छा बिल्कुल न होना (Loss of appetite)।

वजन का न बढ़ना: अच्छी डाइट लेने के बाद भी शरीर का दुबला बने रहना।

अत्यधिक थकावट: पूरे दिन शरीर में सुस्ती और ऊर्जा का अभाव महसूस होना।

मानसिक सुस्ती: काम में मन न लगना और मस्तिष्क में भारीपन।

अनिद्रा (Insomnia): रात में नींद न आना या नींद का बार-बार टूटना।

चिड़चिड़ापन: कमजोरी के कारण स्वभाव में गुस्सा और चिड़चिड़ापन आना।

पाचन में सुधार: खाया-पिया शरीर को न लगना और पेट का भारी रहना।

याददाश्त की कमी: एकाग्रता में कमी और चीजों को जल्दी भूल जाना।

स्तनपान कराने वाली माताएं: दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक।

मधुमेह की कमजोरी: शुगर के मरीजों में आने वाली शारीरिक गिरावट को रोकना।

पेशाब की अधिकता: बार-बार पेशाब जाना, खासकर रात के समय।

सिरदर्द: माथे के पिछले हिस्से और आंखों के ऊपर भारी दर्द।

जीभ का लक्षण: जीभ साफ होना लेकिन मुँह का स्वाद कड़वा रहना।

बच्चों का सूखा रोग: जिन बच्चों का विकास उम्र के हिसाब से बहुत कम हो।

घबराहट: कमजोरी के कारण अचानक दिल की धड़कन तेज हो जाना।

मांसपेशियों में दर्द: कंधों और पिंडलियों में लगातार मीठा-मीठा दर्द रहना।

खुशमिजाजी: दवा के असर से रोगी का आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ता है।

4. अन्य अंगों पर प्रभाव
गुर्दे (Kidneys): यह शरीर से यूरिया और टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करती है।

हृदय: रक्त संचार को सुधार कर हृदय की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है।

त्वचा: पोषण सुधारने से चेहरे पर प्राकृतिक चमक और लाली वापस आती है।

5. पोटेंसी और खुराक (Potency & Dosage)
Q (Mother Tincture): वजन बढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी। 10-15 बूंदें आधा कप पानी में दिन में 3 बार भोजन से आधा घंटा पहले।

30C: मानसिक तनाव और अनिद्रा के लिए। 2-2 बूंद सीधे जीभ पर दिन में 3 बार।

200C: जब समस्या बहुत पुरानी हो। हफ्ते में एक या दो बार।

1M: केवल विशेषज्ञ की सलाह पर बहुत गहरी नसों की कमजोरी के लिए।

6. दवाओं का कॉम्बिनेशन
शक्तिशाली वेट गेन टॉनिक: Alfalfa Q + Avena Sativa Q + Ashwagandha Q (बराबर मात्रा में)।

मानसिक थकान और याददाश्त: Alfalfa 30C + Kali Phos 6X + Lecithin 3X।

खून की कमी और कमजोरी: Alfalfa Q + Five Phos 6X + Ferrum Met 30C।

7. सावधानियां और एग्रेवेशन (Aggravation)
सावधानी: अल्फाल्फा भूख बढ़ाती है, इसलिए इसे लेने के साथ-साथ अच्छी और पौष्टिक डाइट लेना अनिवार्य है।

एग्रेवेशन: खाली पेट बहुत अधिक मात्रा में मदर टिंचर लेने से कभी-कभी हल्का सिरदर्द हो सकता है।

दवा का समय: इसे हमेशा खाना खाने से 20-30 मिनट पहले लेना सबसे उत्तम माना जाता है।

8. निष्कर्ष
अल्फाल्फा प्रकृति का एक अनमोल वरदान है जो शरीर की 'बैटरी' को दोबारा चार्ज कर देता है। यह न केवल शरीर को पुष्ट करती है बल्कि मानसिक शांति और गहरी नींद भी प्रदान करती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है। सटीक उपचार और खुराक के लिए वशषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।





Dr. Sheikh Abul Kalam Azad
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Dr. Sheikh Raja Azad

🌿 हाइड्रैस्टिस MT होम्योपैथिक दवा ☘️यह एक पौधे Goldenseal (जड़) से बनती हैखासकर यह म्यूकस मेम्ब्रेन (नाक, गला, पेट, आंत)...
24/04/2026

🌿 हाइड्रैस्टिस MT होम्योपैथिक दवा ☘️

यह एक पौधे Goldenseal (जड़) से बनती है
खासकर यह म्यूकस मेम्ब्रेन (नाक, गला, पेट, आंत) पर असर करती है।

हाइड्रैस्टिस (Hydrastis) एक महत्वपूर्ण होम्योपैथिक औषधि है, जो विशेष रूप से पाचन तंत्र की कमजोरी और श्लेष्मा झिल्ली संबंधी विकारों में उपयोगी मानी जाती है। यह औषधि उन व्यक्तियों के लिए लाभकारी है जिन्हें लंबे समय से अपच, कब्ज और पेट में भारीपन की समस्या रहती है।

पेट में खालीपन या गिरावट जैसा एहसास, भोजन के बाद भारीपन, गैस बनना और भूख कम लगना इसके प्रमुख संकेत हैं। जिन रोगियों को लंबे समय तक बीमारी के बाद पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, उनमें हाइड्रैस्टिस सहायक हो सकती है। यह यकृत की कार्यक्षमता को संतुलित करने में भी उपयोगी मानी जाती है।

कब्ज की स्थिति में जब मल त्याग कठिन हो और श्लेष्मा मिश्रित हो, तब भी इस औषधि पर विचार किया जाता है। वृद्ध या दुर्बल व्यक्तियों में, जहां पाचन शक्ति मंद हो और शरीर में सामान्य कमजोरी हो, वहां इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है।

🟢 किन-किन बीमारियों में use होती है?
Chronic gastritis (पुरानी पेट की सूजन)
Indigestion (अपच)
Sinusitis (साइनस)
Post-nasal drip (नाक से गले में कफ गिरना)
Mouth ulcers (मुंह के छाले)
Leucorrhoea (सफेद पानी – महिलाओं में)

Dose (सामान्य जानकारी)
👉 Mother Tincture (Q):
10–15 बूंद
आधा कप पानी में
दिन में 2–3 बार
यह दवा सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, लेकिन सही मात्रा और उपयोग के लिए चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहता है।







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Gnaphalium Polycephalum :--  होम्योपैथी में मुख्य रूप से साइटिका (Sciatica)और गठिया (Rheumatism) के लिए एक बहुत ही विशिष...
22/04/2026

Gnaphalium Polycephalum :--

होम्योपैथी में मुख्य रूप से साइटिका (Sciatica)और गठिया (Rheumatism) के लिए एक बहुत ही विशिष्ट औषधि मानी जाती है। इसका सबसे प्रमुख और अनोखा लक्षण यह है कि दर्द के साथ प्रभावित हिस्से में "सुन्नपन" (Numbness)महसूस होता है।

यहाँ इसके मुख्य उपयोग, विशिष्ट लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

Gnaphalium : मुख्य उपयोग और लक्षण

1. साइटिका (Sciatica)
* **विशेष लक्षण:** साइटिका का दर्द जो कमर से शुरू होकर पूरे पैर में नीचे तक जाता है।
* दर्द इतना तीव्र होता है कि उसके साथ रोगी को पैर में **भारीपन और सुन्नता (Numbness)** महसूस होती है।
आराम: रोगी को तब आराम मिलता है जब वह अपनी जांघों को पेट की तरफ सिकोड़कर बैठता है या कुर्सी पर आगे की ओर झुकता है।

2. गठिया और जोड़ों का दर्द (Rheumatism)**
* जोड़ों में होने वाला दर्द जो अक्सर एक जगह से दूसरी जगह बदलता रहता है।
* सुबह के समय जोड़ों में जकड़न और दर्द का बढ़ जाना।
* पैर के तलवों और पिंडलियों (Calf muscles) में ऐंठन या मरोड़ (Cramps) होना।

3. पाचन तंत्र (Diarrhoea)
* सुबह के समय होने वाले दस्त (Morning Diarrhoea) के साथ पेट में गड़गड़ाहट और भारीपन।
* बच्चों के पेट में होने वाले मरोड़ वाले दर्द में भी यह सहायक है।

विशिष्ट पहचान (Key Indicators)

Alternating Symptoms: दर्द और सुन्नपन का बारी-बारी से होना। जब दर्द कम होता है, तो सुन्नपन बढ़ जाता है।
Position:बैठने या पैरों को मोड़ने से दर्द में कमी महसूस होना।
Right-Sided: यह अक्सर दाहिने पैर के साइटिका में बहुत प्रभावी पाई जाती है।

खुराक (Dosage)
मात्रा: 2 से 3 बूंदें सीधे जीभ पर।
* **समय:** दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और रात)।

विशेष: साइटिका के पुराने मामलों में इसे लक्षणों के सुधार तक कुछ हफ्तों तक नियमित लिया जा सकता है।

सावधानियां (Precautions)
* साइटिका के रोगियों को बहुत अधिक वजन उठाने और जमीन पर सोने से बचना चाहिए।
* दवा और भोजन के बीच कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें।
* कच्चा प्याज, लहसुन और ठंडी चीजों (जैसे फ्रिज का पानी या आइसक्रीम) से परहेज करें।

⚠️बिना होम्योपैथिक चिकित्सकीय परामर्श होम्योपैथिक दवाई का सेवन न करें ।




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Gentiana Lutea Q (Yellow Gentian)** होम्योपैथी में एक उत्कृष्ट **"स्टोमकिक" (Stomachic)** यानी पाचन को दुरुस्त करने वाली...
22/04/2026

Gentiana Lutea Q (Yellow Gentian)** होम्योपैथी में एक उत्कृष्ट **"स्टोमकिक" (Stomachic)** यानी पाचन को दुरुस्त करने वाली और **भूख बढ़ाने वाली** औषधि मानी जाती है। यह उन मरीजों के लिए रामबाण है जिनका पाचन तंत्र अत्यंत सुस्त (Slow Digestion) हो गया है।
यहाँ इसके मुख्य उपयोग, विशिष्ट लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:
# # **Gentiana Lutea Q: मुख्य उपयोग और लाभ

# # # **1. भूख की कमी (Loss of Appetite)**
* यह औषधि पाचन ग्रंथियों को उत्तेजित करती है, जिससे भूख खुलकर लगती है।
* यह उन बच्चों या वयस्कों के लिए बहुत प्रभावी है जिन्हें खाने की बिल्कुल इच्छा नहीं होती और जिनका वजन गिर रहा होता है।

# # # **2. सुस्त पाचन (Slow Digestion)**
* **लक्षण:** खाना खाने के बाद पेट में भारीपन और पत्थर जैसा अहसास होना।
* भोजन पेट में काफी समय तक पड़ा रहता है, जिससे खट्टी डकारें और पेट फूलने (Acid Reflux) की समस्या होती है।

# # # **3. पेट के रोग (Gastric Symptoms)**
* पेट के ऊपरी हिस्से में खिंचाव और गैस का दबाव महसूस होना।
* पेट के मरोड़ और दर्द में राहत देती है, खासकर जब दर्द भोजन के कुछ घंटों बाद शुरू हो।
# # # **4. कमजोरी और सुस्ती**
* पाचन खराब होने के कारण होने वाली शारीरिक कमजोरी और मानसिक सुस्ती को दूर कर शरीर में ऊर्जा का संचार करती है।

# # **विशिष्ट पहचान (Key Indicators)**
* **पेट का भारीपन:** पेट इतना भरा हुआ महसूस होता है जैसे वहां कोई वजन रखा हो।
* **मुँह का स्वाद:** मुँह का स्वाद अक्सर फीका या थोड़ा कड़वा रहता है।
* **समय:** लक्षण अक्सर दोपहर के भोजन के बाद अधिक तीव्र होते हैं।

# # **खुराक (Dosage)**
* **मात्रा:** 10 से 15 बूंदें।
* **तरीका:** आधे कप ताजे पानी में मिलाकर।
* **समय:** दिन में 3 बार, **भोजन से लगभग 20-30 मिनट पहले** (भूख बढ़ाने के लिए इसे भोजन से पहले लेना अनिवार्य है)।

# # **सावधानियां (Precautions)**
* बेहतर पाचन के लिए भोजन को खूब चबाकर खाएं और खाने के तुरंत बाद अधिक पानी न पिएं।
* दवा और भोजन के बीच कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें।
* कच्चा प्याज, लहसुन और अत्यधिक मिर्च-मसाले से परहेज करें।









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O***m 30 होम्योपैथी में एक अत्यंत गहरी और विशेष क्रिया वाली औषधि है। यह उन स्थितियों में दी जाती है जहाँ शरीर की संवेदना...
21/04/2026

O***m 30 होम्योपैथी में एक अत्यंत गहरी और विशेष क्रिया वाली औषधि है। यह उन स्थितियों में दी जाती है जहाँ शरीर की संवेदनाएं (Sensations) पूरी तरह से खत्म या सुस्त हो गई हों। इसे अक्सर उन बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनमें "दर्द का अभाव" (Painless) एक प्रमुख लक्षण होता है।

यहाँ इसके मुख्य उपयोग, विशिष्ट लक्षण और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

# # **O***m 30: मुख्य उपयोग और लक्षण**
# # # **1. पुराना और जिद्दी कब्ज (Chronic Constipation)**
* **विशेष लक्षण:** मलाशय (Re**um) की क्रिया पूरी तरह बंद हो जाती है। रोगी को कई दिनों तक मल त्याग की इच्छा ही नहीं होती।
* **मल का स्वरूप:** मल बहुत कड़ा, काला और गोल गोलियों (Hard black balls) जैसा होता है।
* इसे "आंतों की सुस्ती" के लिए सबसे बड़ी दवा माना जाता है।

# # # **2. अत्यधिक नींद और सुस्ती (Deep Sleep/Stupor)**
* रोगी ऐसी गहरी नींद में होता है जिससे उसे जगाना मुश्किल होता है।
* **लक्षण:** चेहरे का रंग गहरा लाल या नीला पड़ जाना, सांसों से घरघराहट की आवाज आना और पुतलियों का सिकुड़ जाना।
* यह स्थिति अक्सर सिर की चोट या भारी नशें के बाद देखी जाती है।

# # # **3. डर का बुरा प्रभाव (Bad Effects of Fear)**
* अचानक लगे सदमे या डर के कारण होने वाली बीमारियां।
* यदि किसी डर के कारण रोगी को दस्त लग जाएं, नींद आना बंद हो जाए या उसे दौरे (Fits) पड़ने लगें, तो O***m उसे सामान्य करने में मदद करती है।

# # # **4. दर्द का महसूस न होना (Lack of Pain)**
* रोगी बहुत बीमार होता है, फिर भी वह कहता है कि उसे कोई तकलीफ नहीं है ("I am well" feeling)। शरीर की प्रतिक्रिया शक्ति (Reaction) खत्म हो जाती है।

# # # **5. मूत्र का रुकना (Retention of Urine)**
* मूत्राशय (Bladder) में पेशाब भरा होता है लेकिन उसे बाहर निकालने की संवेदना खत्म हो जाती है, अक्सर प्रसव (Childbirth) या ऑपरेशन के बाद।

# # **विशिष्ट पहचान (Key Indicators)**
* **Heavy Sleep:** नींद इतनी गहरी कि रोगी होश खो देता है।
* **Hot Sweat:** शरीर से निकलने वाला पसीना बहुत गर्म होता है।
* **Complaints without Pain:** गंभीर बीमारी में भी दर्द का अनुभव न होना।

# # **खुराक (Dosage)**
* **O***m 30:** 2 बूंदें सीधे जीभ पर, दिन में केवल एक या दो बार।
* **नोट:** चूंकि यह एक बहुत गहरी और नशीली प्रवृत्ति की दवा है, इसे बार-बार दोहराने (Frequent repetition) से बचना चाहिए। डॉक्टर के परामर्श के बिना इसका लंबे समय तक सेवन न करें।

# # **सावधानियां (Precautions)**
* इसे बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
* दवा और भोजन के बीच कम से कम 30 मिनट का अंतर रखें।
* कच्चा प्याज, लहसुन और तेज गंध वाली चीजों से परहेज करें।


***m30






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होम्योपैथिक दवा: सायटिसस लेबर्नम (Cytisus Laburnum) - नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कंपन की विशेष औषधिनमस्ते दोस्तों! आ...
20/04/2026

होम्योपैथिक दवा: सायटिसस लेबर्नम (Cytisus Laburnum) - नर्वस सिस्टम और मांसपेशियों के कंपन की विशेष औषधि
नमस्ते दोस्तों! आज हम चर्चा करेंगे होम्योपैथी की एक कम प्रसिद्ध लेकिन बहुत ही प्रभावशाली दवा सायटिसस लेबर्नम (Cytisus Laburnum) के बारे में। इसे 'गोल्डन रेन' (Golden Rain) के नाम से भी जाना जाता है। यह दवा विशेष रूप से तंत्रिका तंत्र (Nervous System) और मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव डालती है।

1. परिचय
स्रोत: यह दवा 'लेबर्नम एनजाइरोइड्स' (Laburnum anagyroides) नामक पौधे के बीजों और छाल से तैयार की जाती है। अतः यह एक वनस्पति (Plant) स्रोत की औषधि है।

मुख्य कार्यक्षेत्र (Sphere of Action): इसका मुख्य प्रभाव मस्तिष्क (Brain), रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord), आंखों की नसों और मांसपेशियों पर होता है। यह शरीर में होने वाले झटकों और कंपन को नियंत्रित करने में सहायक है।

2. प्रमुख लक्षण (Key Indications)
सायटिसस लेबर्नम को "मस्तिष्क की उत्तेजना और मांसपेशियों के अनियंत्रित कंपन (Twitching & Trembling)" के लिए एक प्रमुख दवा माना जाता है। यदि किसी को शरीर में बिजली के झटके जैसा अहसास हो या हाथ-पैरों में लगातार कंपन बना रहे, तो यह दवा बहुत प्रभावी सिद्ध होती है।

3. विस्तृत लक्षण सूची (Detailed Symptoms)
मस्तिष्क में भारीपन: ऐसा महसूस होना जैसे सिर में खून का दबाव बहुत बढ़ गया हो।

चक्कर आना: अचानक उठने या चलने पर सिर घूमना।

मांसपेशियों का फड़कना: शरीर के विभिन्न हिस्सों में मांसपेशियों का अपने आप फड़कना।

नींद में झटके: सोते समय अचानक शरीर में जोर का झटका लगना।

पुतलियों का फैलना: आंखों की पुतलियों (Pupils) का असामान्य रूप से फैल जाना।

देखने में कठिनाई: आंखों के सामने अंधेरा छाना या चीजें दो-दो दिखाई देना।

याददाश्त में कमी: चीजों को याद रखने में कठिनाई और मानसिक सुस्ती।

घबराहट: दिल की धड़कन का अचानक तेज होना और बेचैनी महसूस करना।

चेहरे का रंग: चेहरा कभी लाल तो कभी पीला पड़ जाना।

निगलने में दिक्कत: गले की मांसपेशियों में जकड़न के कारण कुछ भी निगलने में परेशानी।

ठंडा पसीना: माथे पर अचानक ठंडा पसीना आना।

हाथ-पैरों में कमजोरी: पैरों में भारीपन महसूस होना जिससे चलने में लड़खड़ाहट आए।

मानसिक चिड़चिड़ापन: छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी गुस्सा आना।

भ्रम की स्थिति: रोगी को अपने आसपास की चीजों का सही अंदाजा न होना।

सांस लेने में भारीपन: छाती में जकड़न महसूस होना।

जीभ का लक्षण: जीभ का सूखा होना और मुँह का स्वाद कड़वा रहना।

गर्मी का अहसास: सिर और छाती में अचानक गर्मी की लहरें महसूस होना।

4. अन्य अंगों पर प्रभाव
पाचन तंत्र: पेट में ऐंठन और गैस के कारण होने वाला दर्द।

जोड़: उंगलियों और कलाई के जोड़ों में हल्का कंपन और दर्द।

त्वचा: त्वचा पर झुनझुनी या चींटियां चलने जैसा अहसास (Formication)।

5. पोटेंसी और खुराक (Potency & Dosage)
30C: शुरुआती नर्वस कमजोरी और मांसपेशियों के फड़कने के लिए। 2-2 बूंद सीधे जीभ पर दिन में 3 बार।

200C: पुराने कंपन या गंभीर झटकों की समस्या में। सप्ताह में केवल 2 बार।

Q (Mother Tincture): बहुत ही कम मामलों में बाहरी प्रयोग या डॉक्टर की विशेष सलाह पर।

1M: बहुत पुरानी मानसिक और नर्वस बीमारियों के लिए (केवल विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में)।

6. दवाओं का कॉम्बिनेशन
हाथ-पैरों के कंपन के लिए: Laburnum 30C + Gelsemium 30C + Agaricus 30C।

नींद में झटकों के लिए: Laburnum 30C + Cuprum Met 30C।

मानसिक थकावट और कमजोरी: Laburnum 30C + Kali Phos 6X + Ashwagandha Q।

7. सावधानियां और एग्रेवेशन (Aggravation)
तकलीफ कब बढ़ती है: मानसिक तनाव लेने से, रात के समय और शोर-शराबे वाले वातावरण में।

सुधार (Amelioration): शांत जगह पर आराम करने और अंधेरे कमरे में लेटने से राहत मिलती है।

सावधानी: यह दवा बहुत शक्तिशाली है, इसलिए इसे बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के लंबे समय तक न दोहराएं। विशेषकर हृदय रोगियों को सावधानी बरतनी चाहिए।

8. निष्कर्ष
सायटिसस लेबर्नम हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करने और शरीर की अनियंत्रित गतिविधियों को रोकने वाली एक विशिष्ट औषधि है। यह मस्तिष्क की थकान को दूर कर तंत्रिकाओं को नई शक्ति प्रदान करती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के सटीक उपचार के लिए परामर्श अवश्य लें।






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आज हम होम्योपैथी की एक सुप्रसिद्ध और अत्यंत प्रभावशाली औषधि चेलिडोनियम मेजस (Chelidonium Majus) के बारे में विस्तार से च...
20/04/2026

आज हम होम्योपैथी की एक सुप्रसिद्ध और अत्यंत प्रभावशाली औषधि चेलिडोनियम मेजस (Chelidonium Majus) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। इसे 'लिवर की सबसे बड़ी दोस्त' माना जाता है।

1. परिचय
स्रोत: यह दवा सैलैंडाइन (Celandine) नामक पौधे के ताजे रस से तैयार की जाती है, इसलिए यह एक वनस्पति (Plant) स्रोत की दवा है।

मुख्य कार्यक्षेत्र (Sphere of Action): इसका सबसे गहरा असर लिवर (Liver), पित्ताशय (Gallbladder) और पाचन तंत्र पर होता है। इसके अलावा यह दाहिने फेफड़े और दाहिने कंधे पर भी विशेष प्रभाव डालती है।

2. प्रमुख लक्षण (Key Indications)
चेलिडोनियम को "लिवर और पित्त की बीमारियों (Liver & Gallbladder Disorders)" के लिए नंबर-1 दवा माना जाता है। इसका सबसे बड़ा ट्रेडमार्क लक्षण है—दाहिने कंधे की हड्डी के निचले कोने (Lower angle of right scapula) में लगातार होने वाला दर्द। यदि लिवर की तकलीफ के साथ यह दर्द मौजूद है, तो चेलिडोनियम सबसे सटीक दवा है।

3. विस्तृत लक्षण सूची (Detailed Symptoms)
पीलिया (Jaundice): त्वचा, आंखों और नाखूनों का पीला पड़ना।

दाहिने कंधे में दर्द: पीठ के पीछे दाहिनी तरफ कंधे की हड्डी के नीचे फंसा हुआ दर्द।

जीभ का रंग: जीभ पीली और उस पर दांतों के निशान (Indented tongue) होना।

गर्म खाने की इच्छा: रोगी को बहुत तेज इच्छा होती है कि वह बिल्कुल गर्म खाना खाए या गर्म दूध पिए।

कब्ज: मल मिट्टी के रंग का (Clay-colored) या छोटी-छोटी कठोर गोलियों जैसा होता है।

मुँह का स्वाद: मुँह का स्वाद कड़वा बना रहता है।

पित्त की पथरी (Gallstones): पित्त की थैली में पथरी के कारण होने वाला तेज दर्द।

दाहिनी तरफ की तकलीफ: शरीर के दाहिने हिस्से में सिरदर्द, आंखों में दर्द या पसलियों में दर्द।

सिरदर्द: सिर के पिछले हिस्से (Occiput) में भारीपन और दर्द।

पेशाब का रंग: पेशाब गहरा पीला या भूरा (Dark yellow/brown) होता है।

मानसिक सुस्ती: रोगी बहुत सुस्त, आलसी और उदास महसूस करता है।

नींद: दिन में बहुत अधिक नींद आना, विशेषकर खाना खाने के बाद।

जी मिचलाना: लिवर की गड़बड़ी के कारण लगातार उल्टी जैसा महसूस होना।

बढ़ा हुआ लिवर (Hepatomegaly): पसलियों के नीचे दाहिनी तरफ भारीपन और सूजन।

सांस लेने में दिक्कत: दाहिने फेफड़े में भारीपन के कारण सांस लेने में तकलीफ।

त्वचा में खुजली: पीलिया के कारण पूरे शरीर में खुजली होना।

चेहरे का रंग: चेहरा पीला-सा या मटमैला दिखाई देना।

4. अन्य अंगों पर प्रभाव
श्वसन तंत्र: दाहिने तरफ का निमोनिया (Right-sided pneumonia) जिसमें खांसी के साथ बलगम निकालना मुश्किल हो।

जोड़: उंगलियों के जोड़ों में दर्द और यूरिक एसिड का बढ़ना।

पेट: पेट फूलना और गैस बनना, जो गर्म पेय पीने से कम हो जाए।

5. पोटेंसी और खुराक (Potency & Dosage)
Q (Mother Tincture): लिवर फंक्शन और पीलिया के लिए सबसे प्रभावी। 10-15 बूंदें आधा कप गुनगुने पानी में दिन में 3 बार।

30C: सिरदर्द और पित्त की पथरी के दर्द के लिए। 2-2 बूंद दिन में 3 बार।

200C: पुरानी लिवर की समस्याओं के लिए। हफ्ते में 1 या 2 बार।

1M: बहुत गहरी मानसिक सुस्ती और गंभीर स्थितियों में (डॉक्टर की सलाह पर)।

6. दवाओं का कॉम्बिनेशन
लिवर टॉनिक कॉम्बिनेशन: Chelidonium Q + Carduus Marianus Q + Hydrastis Q (बराबर मात्रा में मिलाकर 10-10 बूंदें दिन में 3 बार)।

पित्त की पथरी के लिए: Chelidonium 30C + Berberis Vulgaris Q + Lycopodium 30C।

गैस और अफारा के लिए: Chelidonium 30C + Carbo Veg 30C + China 30C।

7. सावधानियां और एग्रेवेशन (Aggravation)
तकलीफ कब बढ़ती है: सुबह के समय (4 बजे), दाहिनी करवट लेटने पर और ठंडी हवा से।

सुधार (Amelioration): बहुत गर्म खाना खाने या गर्म दूध पीने से और रात के खाने के बाद।

सावधानी: मदर टिंचर का उपयोग करते समय पानी की मात्रा पर्याप्त रखें।

8. निष्कर्ष
चेलिडोनियम मेजस लिवर को डिटॉक्स करने और पाचन तंत्र को सुचारू बनाने की सर्वश्रेष्ठ औषधि है। चाहे वह फैटी लिवर हो, पीलिया हो या पित्त की पथरी, यह दवा अपने विशिष्ट लक्षणों के आधार पर अद्भुत काम करती है।





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आयुष और होम्योपैथी के क्षेत्र में भी आगरा बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां पर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुष मेडिकल साइंसेज एंड हॉस...
20/04/2026

आयुष और होम्योपैथी के क्षेत्र में भी आगरा बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां पर इंस्टीट्यूट ऑफ आयुष मेडिकल साइंसेज एंड हॉस्पिटल खोला जाएगा। ये प्रदेश में पहला आयुष इंस्टीट्यूट होगा। ये 400 बेड का होगा और ये करीब 14 एकड़ जमीन में बनेगा। इसमें कैंसर, किडनी, लिवर, हृदय रोग का बिना सर्जरी के उपचार होगा।
केंद्र सरकार आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आगरा में इंस्टीट्यूट के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया है। इसके निर्माण के लिए रुनकता के अकबरा गांव में 13.5 एकड़ जमीन भी अधिकृत हो गई है। इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसमें 400 बेड होंगे। आईसीयू भी होगा। चिकित्सकों के लिए चैंबर भी होंगे। ओपीडी, दवा काउंटर, लैब भी होगी। आयुष, यूनानी, होम्योपैथिक, प्राकृतिक चिकित्सा और योग केंद्र होगा। इसमें आयुष चिकित्सा की पढ़ाई होगी। कैंसर, किडनी, लिवर, हृदय रोग, पेट रोग समेत अन्य जटिल बीमारियों का उपचार किया जाएगा। ऐसे में मरीजों के सर्जरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खास बात इसमें बीमारियों के लिए शोध कार्य भी किए जाएंगे। ऐसे में देश भर से मरीज इलाज कराने पहुंचेंगे।







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नमस्ते दोस्तों! आज हम होम्योपैथी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'बायोकेमिक' और 'डीप एक्टिंग' दवा कैलकेरिया फॉस्फोरिका (Calcarea...
19/04/2026

नमस्ते दोस्तों! आज हम होम्योपैथी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण 'बायोकेमिक' और 'डीप एक्टिंग' दवा कैलकेरिया फॉस्फोरिका (Calcarea Phosphorica) के बारे में जानेंगे। इसे अक्सर 'Calcium Phosphate' भी कहा जाता है और यह हमारे शरीर की संरचना को मजबूती देने का काम करती है।

1. परिचय
स्रोत: यह एक खनिज (Mineral) स्रोत की दवा है। यह शरीर की हड्डियों, दांतों और रक्त में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले कैल्शियम का एक रूप है।

मुख्य कार्यक्षेत्र (Sphere of Action): इसका सबसे गहरा प्रभाव हड्डियों (Bones), दांतों, रक्त (Blood formation), और ग्रंथियों (Glands) पर होता है। यह शारीरिक विकास और पोषण की कमी को पूरा करने के लिए जानी जाती है।

2. प्रमुख लक्षण (Key Indications)
कैलकेरिया फॉस को "बच्चों के धीमी विकास (Delayed Development in children)" और "हड्डियों के न जुड़ने (Non-union of fractures)" के लिए नंबर-1 दवा माना जाता है। यदि बच्चा समय पर चलना या बोलना न सीख पा रहा हो, या दांत देर से निकल रहे हों, तो यह दवा अचूक है।

3. विस्तृत लक्षण सूची (Detailed Symptoms)
देर से विकास: बच्चों में दांत देर से निकलना या बच्चा देर से चलना सीखना।

हड्डियों की कमजोरी: हड्डियां पतली और कमजोर होना, जिससे उनमें आसानी से फ्रैक्चर हो जाना।

फ्रैक्चर का न जुड़ना: हड्डी टूटने के बाद उसे जल्दी जोड़ने में मदद करना।

सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस: गर्दन और पीठ में जकड़न और दर्द।

खून की कमी (Anemia): एनीमिया के कारण होने वाला सिरदर्द और कमजोरी।

दांतों की समस्या: दांत निकलते समय होने वाली दस्त (Diarrhea) और चिड़चिड़ापन।

मानसिक थकान: छात्रों में पढ़ाई के कारण होने वाली मानसिक थकान और याददाश्त की कमजोरी।

अकेलापन: रोगी को उदासी महसूस होना और एकांत की इच्छा होना।

पीठ दर्द: कमर के निचले हिस्से और पीठ में भारीपन व दर्द।

संसार से असंतोष: छोटी-छोटी बातों पर असंतुष्ट रहना और शिकायत करना।

जोड़ों का दर्द: जोड़ों में दर्द जो मौसम बदलने (खासकर ठंड और नमी) के साथ बढ़ जाए।

ग्रंथियों की सूजन: गर्दन के आसपास की लसीका ग्रंथियों (Lymph nodes) में सूजन।

जी मिचलाना: खाने के बाद पेट में गैस और खट्टी डकारें आना।

ठंड के प्रति संवेदनशीलता: रोगी को बहुत जल्दी ठंड लग जाती है।

सिर का आकार: बड़े सिर वाले बच्चों की हड्डियों में कमजोरी।

मासिक धर्म: महिलाओं में अत्यधिक और दर्दनाक रक्तस्राव।

कमजोरी: छोटी सी शारीरिक मेहनत से ही शरीर का जवाब दे जाना।

4. अन्य अंगों पर प्रभाव
श्वसन: गले में लगातार बलगम का अहसास और खांसी।

पाचन: दूध न पच पाना और पेट के विकारों के साथ कमजोरी।

हृदय: धड़कन का तेज होना, विशेषकर सीढ़ियां चढ़ते समय।

5. पोटेंसी और खुराक (Potency & Dosage)
6X / 12X (Biochemic): यह सबसे लोकप्रिय है। 4-4 गोलियां दिन में 3 बार (विशेषकर बच्चों के विकास के लिए)।

30C: हड्डियों के दर्द और मानसिक थकान के लिए। 2-2 बूंद दिन में 3 बार।

200C: पुराने फ्रैक्चर या हड्डियों की कमजोरी के लिए। हफ्ते में 2 बार।

1M: बहुत गहरी विकास संबंधी बाधाओं के लिए (डॉक्टर की सलाह पर)।

6. दवाओं का कॉम्बिनेशन
हड्डियों की मजबूती के लिए: Calcarea Phos 6X + Calcarea Fluor 6X + Silicea 12X।

एनीमिया और कमजोरी: Calcarea Phos 30C + Ferrum Met 30C + China 30C।

दांत निकलते समय (Teething): Calcarea Phos 6X + Chamomilla 30C।

7. सावधानियां और एग्रेवेशन (Aggravation)
तकलीफ कब बढ़ती है: नमी (Damp weather), ठंड में, और मानसिक मेहनत से।

सुधार (Amelioration): गर्म और शुष्क मौसम में लक्षणों में सुधार महसूस होता है।

सावधानी: इसे नियमित और लंबे समय तक लेना पड़ सकता है, लेकिन किसी अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में।

8. निष्कर्ष
कैलकेरिया फॉस्फोरिका शरीर को आंतरिक मजबूती देने वाली दवा है। यह न केवल हड्डियों को जोड़ती है बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को भी गति प्रदान करती है।





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