Maharshi Mehi Healthy Life Clinic

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25/03/2026

Clinic
Dipak Kumar
Maharshi Mehi Healthy Life Clinic




07/03/2026

महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लिनिक के प्रचार हेतु एक छोटा सा प्रयास है आप लोग से जरूर सुने और सेवा का मौका दें धन्यवाद🙏🙏🙏🥀🥀🥀🌹🌹🌹🥀🥀🥀🥀
Dipak Kumar


Collinsonia Q और Nux Vomica 30 का संयोजन बवासीर (Piles) के लिए होम्योपैथी के सबसे सफल उपचारों में से एक माना जाता है। यह...
27/01/2026

Collinsonia Q और Nux Vomica 30 का संयोजन बवासीर (Piles) के लिए होम्योपैथी के सबसे सफल उपचारों में से एक माना जाता है। यह संयोजन विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जिन्हें पुरानी कब्ज और गुदा मार्ग में भारीपन महसूस होता है।

यहाँ इन दोनों दवाओं के उपयोग और खुराक की विस्तृत जानकारी दी गई है:

💊 Piles (बवासीर) के लिए प्रभावी समाधान
1. Collinsonia Canadensis Q (मदर टिंचर)
इसे 'बवासीर की विशिष्ट दवा' कहा जाता है, खासकर जब कब्ज बहुत गंभीर हो।
* मुख्य लक्षण:
* कब्ज: मल बहुत सख्त होता है और ऐसा महसूस होता है जैसे गुदा मार्ग में "तेज धार वाली लकड़ियां या कंकड़" भरे हुए हैं।
* भारीपन: पेल्विक एरिया और गुदा में हमेशा भारीपन या सूजन का अहसास।
* गर्भावस्था में पाइल्स: गर्भवती महिलाओं को होने वाली बवासीर में यह बहुत सुरक्षित और असरदार है।
* हृदय और पाइल्स: यदि बवासीर दब जाने पर दिल की धड़कन बढ़ने की समस्या हो।
* खुराक: 10-15 बूंदें आधे कप ताजे पानी में मिलाकर दिन में 3 बार लें।
2. Nux Vomica 30 (पाचन और कब्ज की दवा)
यह आधुनिक जीवनशैली के कारण होने वाली पाइल्स के लिए रामबाण है।
* मुख्य लक्षण:
* अधूरा पेट साफ होना: बार-बार शौच जाने की इच्छा होना लेकिन पेट पूरी तरह साफ न होना।
* जीवनशैली: जो लोग बहुत अधिक मसालेदार खाना, शराब, कॉफी पीते हैं या जिनका काम ज्यादा देर बैठने का है।
* चिड़चिड़ापन: पेट की खराबी के कारण रोगी का स्वभाव बहुत चिड़चिड़ा हो जाता है।
* खुराक: 2 बूंदें सीधे जीभ पर केवल रात को सोते समय लें। (यह रात भर पाचन तंत्र को सुचारू करती है)।

💡 इनका साथ में उपयोग कैसे करें?
* Collinsonia Q: दिन में तीन बार (सुबह, दोपहर, शाम) पानी के साथ लें।
* Nux Vomica 30: केवल रात में सोने से पहले 1 बार लें।

✅ बवासीर में राहत के लिए कुछ नियम
* सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath): गुनगुने पानी के टब में 10 मिनट बैठें, इससे सूजन और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।

* फाइबर: अपने खाने में पपीता, ईसबगोल की भूसी और हरी सब्जियां शामिल करें।
* पानी: दिन भर में कम से कम 10-12 गिलास पानी पिएं।

* परहेज: लाल मिर्च, अत्यधिक तेल-मसाले और बाहर के जंक फूड से बिल्कुल बचें।

⚠️ महत्वपूर्ण: यदि मल के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) हो रहा हो, तो तुरंत किसी अनुभवी होम्योपैथिक डॉक्टर से मिलें।
Maharshi Mehi Healthy Life Clinic
Dipak Kumar




Aegle folia Q (Bel Patra / Bael leaf tincture) होम्योपैथिक रूप से पाचन तंत्र, आंतों और कुछ त्वचा समस्याओं में उपयोगी मान...
01/01/2026

Aegle folia Q (Bel Patra / Bael leaf tincture) होम्योपैथिक रूप से पाचन तंत्र, आंतों और कुछ त्वचा समस्याओं में उपयोगी मानी जाती है।

☑️ मुख्य उपयोग (Uses)

👉 पाचन तंत्र

👉पुराना दस्त (Chronic Diarrhea)

👉IBS, आंतों की कमजोरी

👉अपच, गैस, पेट दर्द

👉पेचिश (Amoebic / Non-amoebic)

👉आंतों की सूजन

👉आँतों में संक्रमण

👉भोजन न पचना

👉बार-बार शौच की इच्छा

🗣️अन्य उपयोग

👉बच्चों में बार-बार दस्त

👉कमजोरी के बाद पाचन सुधार

👉कुछ मामलों में डायबिटीज सपोर्ट (सहायक रूप में)

💊Dose (मात्रा)

⭐ सामान्य डोज़

10–15 बूंदें

आधा कप पानी में

दिन में 2–3 बार

🌟 बच्चों में

5–7 बूंदें, दिन में 2

⚠️ सावधानियाँ🔕

#️⃣कब्ज़ वाले मरीज सावधानी रखें

#️⃣लंबे समय तक लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लें

#️⃣बहुत अधिक मात्रा न लें

Diet Tips (साथ में)🍇🍒🍌🥦🥗

हल्का भोजन

दही, छाछ, चावल

तला-भुना, मसालेदार भोजन कम करें




Dipak Kumar


महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक के संस्थापक डॉ दीपक कुमार जी आप लोगों के बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं ,बच्च...
29/06/2021

महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक के संस्थापक डॉ दीपक कुमार जी आप लोगों के बीच एक और महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं ,

बच्चे का वैक्सिनेशन, जानें कब और कौन सा वैक्सीन है जरूरी?
बच्चों की बॉडी में किसी भी बीमारी के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक क्षमता (immunity) विकसित करने के लिए टीकाकरण किया जाता है। टीकाकरण (Vaccination) मौखिक और इंजेक्शन के रूप में किया जाता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे वैक्सीन कहते हैं। बच्चों में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए टीकाकरण सबसे ज्यादा प्रभावी एवं किफायती तरीका माना जाता है। इस आर्टिकल में हम टीकाकरण के बारे में आपको बताएंगे

बच्चों को दिए जाने वाले कुछ जरूरी वैक्सीन
टीका (वैक्सीन) क्या होता है?
टीके एंटीजेनिक (antigenic) पदार्थ होते हैं। टीके के रूप में दी जाने वाली दवा या तो बीमारी के कारक जीवित बैक्टीरिया को मार देती है या उन्हें अप्रभावी करती है। इसके अलावा, टीका किसी पदार्थ का शुद्ध रूप जैसे – प्रोटीन आदि हो सकता है। सबसे पहले चेचक का टीका आजमाया गया था।

वेरिसेला (चिकनपॉक्स) वैक्सीन
शिशुओं को चिकनपॉक्स से बचाने के लिए उन्हें वेरिसेला वैक्सीन (चिकनपॉक्स वैक्सीन) दिया जाता है। स्कूल और बाहरी माहौल में यह वैक्सीन शिशु के चिकनपॉक्स के संपर्क में आने से उसकी रक्षा करता है।

कब दिया जाता है चिकनपॉक्स वैक्सीन?
सेंटर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक, 12 महीने से लेकर 18 वर्ष की आयु तक बच्चों को चिकनपॉक्स वैक्सीन के दो डोज दिए जाते हैं। सीडीसी के मुताबिक, चिकनपॉक्स वैक्सीन का पहला डोज 12 और 15 महीने के बीच दिया जाना चाहिए। इसका दूसरा डोज चार और छह वर्ष के बीच में दिया जाना चाहिए।

चिकनपॉक्स वैक्सीन के संभावित साइड इफेक्ट्स
अध्ययनों में इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि ज्यादातर बच्चों के लिए वेरिसेला (चिकनपॉक्स) वैक्सीन सुरक्षित होता है लेकिन, इसके कुछ हल्के दुष्प्रभाव भी होते हैं। इनके बारे में नीचे बताया गया है।

सूजन और इंजेक्शन वाले हिस्से के आसपास लालिमा पड़ना
बुखार
रैशेज
रोटावायरस वैक्सीन (आरवी)
रोटावायरस सबसे ज्यादा संक्रामक वायरस होता है। इससे शिशुओं और बच्चों में गंभीर डायरिया होता है। इस वायरस के संपर्क में आने से उल्टी और बुखार हो सकता है। यदि इसका इलाज ना किया जाए तो इससे डीहाइड्रेशन और मृत्यु तक हो सकती है। पाथ नामक अंतरराष्ट्रीय और गैर लाभकारी संगठन के मुताबिक, हर वर्ष दुनियाभर में डायरियल डिजीज से पांच लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती है। इसमें से एक तिहाई मौतें रोटावायरस की वजह से होती हैं। रोटावायरस के संपर्क में आने से लाखों बच्चों को हर वर्ष अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।

कब दिया जाता है रोटावायरस वैक्सीन?
रोटावायरस वैक्सीन 6, 10, 14 हफ्ते में तीन बार जाता है। इसमें बेबी को 5 ड्रॉप ओरली दी जाती हैं। हालांकि, एलर्जी के कुछ मामलों में शिशुओं को रोटावायरस वैक्सीन नहीं मिल पाता है।

रोटावायरस के साइड इफेक्ट्स
अन्य वैक्सीन की तरह रोटावायरस वैक्सीन के कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स होते हैं।

टेम्प्रेरी डायरिया या उल्टी होना
बुखार
ऐप्टेटाइट का कम होना
चिड़चिड़ापन
हेपेटाइटिस ए वैक्सीन
हेपेटाइटिस ए लिवर की एक एक्यूट बीमारी है। यह हेपेटाइटिस ए वायरस से फैलती है। इसके लक्षण एक हफ्ते से लेकर कई महीनों तक रह सकते हैं। शिशुओं के लिए यह कई मामलों में खतरनाक होती है।

कब दिया जाता है हेपेटाइटिस ए का वैक्सीन?
सीडीसी के मुताबिक, हेपेटाइटिस का पहला डोज एक साल पूरा होने पर दिया जाना चाहिए। इसका दूसरा डोज इसके छह या एक वर्ष बाद दिया जाना चाहिए।

हेपेटाइटिस ए वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स
इंजेक्शन वाले हिस्से के आसपास सोरनेस।
सिर दर्द
थकान
मेनिंगोकोकल वैक्सीन (एमसीवी)
मेनिंगोकोकल एक खतरनाक बैक्टीरियल बीमारी है। मेनिंगोकोकल से मस्तिष्क और स्पाइनल कॉर्ड के चारों तरफ मौजूद सुरक्षा घेरे में इंफ्लमेशन और ब्लडस्ट्रीम में संक्रमण होता है।। इस बीमारी से बचाव करने के लिए मेनिंगोकोकल वैक्सीन दिया जाता है।

कब दिया जाता है मेनिंगोकोकल वैक्सीन?
11 से 12 और 16 वर्ष तक मेनिंगोकोकल वैक्सीन के दो डोज दिए जाते हैं। इस वैक्सीन को मेनाक्ट्रा भी कहा जाता है।

हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी में बच्चों का लिवर खराब हो जाता है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए हेपेटाइटिस बी वैक्सीन दिया जाता है। इसके तीन से चार डोज दिए जाते हें।

कब दिया जाता है हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन?
इसका पहला डोज शिशु के जन्म के बाद दिया जाता है। दूसरा डोज एक से दो महीना पूर्ण होने पर दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर इसका तीसरा डोज चौथे महीने में दिया जाता है और आखिरी छह से 18 महीनों पर दिया जाता है।

डिप्थीरिया, टेटनस और व्हूपिंग कफ (परटुससिस, डीटीएपी)
बच्चों को DTaP वैक्सीन के तीन डोज दिए जाते हैं। 6, 10 और 14वें हफ्ते में कम्रश: ये डोज दिए जाते हैं।

हेमोफिलस इनफ्लेंजा टाइप बी (Hib) वैक्सीन
Hib वैक्सीन 3-4 डोज में दिया जाता है। हालांकि, यह इसके ब्रांड पर भी निर्भर करता है कि बच्चे को कितने डोज दिए जाएं। इसका पहला डोज 2 महीने, दूसरा चार महीने पर और जरूरत पड़ने पर तीसरा डोज छह महीने पर दिया जाता है। इसका आखिरी डोज 12-15 महीनों के बीच दिया जाता है।

इन्फ्लूएंजा(Flu)
प्रत्येक बच्चे को इन्फ्लूएंजा वैक्सीन के छह महीने पर दिया जाता है। वहीं, नौ वर्ष से छोटे बच्चों को इन्फ्लूएंजा वैक्सीन के दो डोज की जरूरत होती है। यदि आपके बच्चे को भी एक से अधिक डोज की जरूरत हो तो एक बार डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

खसरे का टीका (mumps)
यह वैक्सीन बच्चों को खसरे की बीमारी से बचाता है। बच्चों को एमएमआर (खसरे) वैक्सीन के दो डोज दिए जाते हैं। पहला डोज 12-15 महीने पर और दूसरा डोज 4-6 वर्ष की उम्र के बीच दिया जाता है। हाल ही के कुछ वर्षों में खसरा एक वैश्विक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभरा है।

न्यूमोकोकल वैक्सीन
न्यूमोकोकल बीमारी एक प्रकार का संक्रमण होता है, जो स्टेरेप्टेकोकोकस न्यूमोनिया बैक्टीरिया से होता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे निमोनिया के नाम से जाना जाता है। इससे कान में संक्रमण और मेनिनगिटिस जैसी समस्या हो सकती है। इस बीमारी से बचाव के लिए बच्चों को प्रेनव्नार (पीसीवी) के चार डोज दिए जाते हैं। इसका पहला डोज दो महीने, दूसरा चार महीने और तीसरा डोज छह महीने पर दिया जाता है। इसका चौथा डोज 12-15 महीनों पर दिया जाता है।

वहीं, कुछ बच्चों को न्यूमोवेक्स (पीपीएसवी) के एक डोज की जरूरत होती है। न्यूमोकोकल बीमारी से अतिरिक्त सुरक्षा के लिए यदि आपके बच्चे को एक्सट्रा डोज की जरूरत पड़ती है तो अपने डॉक्टर से बात करें।

पोलिया (IPV) वैक्सीन
पोलिया एक ऐसी घातक बीमारी है, जिससे शिशुओं की बॉडी में लकवा मार जाता है। इससे बचाव के लिए बच्चों को पोलियो वैक्सीन (IPV) के चार डोज की जरूरत होती है। इसका पहला डोज दो महीने और दूसरा डोज चार महीने पर दिया जाता है। पोलियो वैक्सीन का तीसरा डोज 6-18 महीने और चौथा डोज 4-6 वर्ष की उम्र में दिया जाता है।

अंत में हम यही कहेंगे बच्चे का टीकाकरण (वैक्सिनेशन) सबसे ज्यादा जरूरी है। जानलेवा संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए अपने बच्‍चों को सही समय पर टीके अवश्‍य लगवाएं। हर मां को अपने बच्चे का टीकाकरण कराना चाहिए। टीकाकरण बच्चों को जीवन भर हेल्दी रखने में मददगार साबित होता है।

अंत में आप लोगों से सादर अनुरोध है कि इस पेज को( महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक) फॉलो करें कमेंट करें और शेयर करें जिससे हमारा भी हौसला बना रहे |धन्यवाद

महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लिनिक  डॉ दीपक कुमार     होम्योपैथिक फिजीशियन Mob:-7549301384,9113756401सभी लोग अच्छा जीवन व्...
28/06/2021

महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लिनिक
डॉ दीपक कुमार
होम्योपैथिक फिजीशियन

Mob:-7549301384,9113756401
सभी लोग अच्छा जीवन व्यतीत करना चाहते है और चाहते है की उनकी जिन्दगी में खुशिया बनी रहे उनमे से आपका स्वास्थ्य एक बहुत बड़ा रोल है जो आपकी लाइफ में खुशिया लायेगा| इसीलिए महर्षि मेंही हल्दी लाइफ क्लिनिक की ओर से डॉक्टर दीपक कुमार जी के द्वारा स्वस्थ रहने के उपाय बताया गया है आशा करता हूं कि यह आर्टिकल आपको स्वस्थ रहने में मदद करेगा


अगर आपके पास बहुत सारी दोलत है, आपके पास दुनिया भर की सारी खुशी है पर आपका शरीर अच्छा नही है तो वो सारी दोलत और खुसिया बेकार है,क्योंकि अगर स्वास्थ्य ही अच्छा न हो तो आपको कोई भी काम करने में मजा नही आयेगा| आलस और बीमारी बनी रहेगी|

उसी सब मुसीबत को भगाने के लिए मैंने स्वस्थ रहने के सरल उपाय बताये है जिनको आप फॉलो करके अपना शरीर अच्छा बना सकते हो| तो आईये पढना शुरू करते है,

स्वस्थ रहने के 24 नियम
जीवन में स्वस्थ रहने के उपाय जो इस प्रकार है:-

1. स्वच्छता:-
स्वास्थ्य रक्षा के लिए स्वच्छ रहना परमावश्यक है|सारे दिन काम से शरीर पसीने से भर जाता है; कपड़े मैले हो जाते है| इनसे शरीर में रोग उत्पनं हो जाता है|


इसके साथ ही अपने घर की और आसपास की सफाई भी आवश्यक है|पानी भी स्वच्छ पीना चाहिए तथा शुद्ध वायु का सेवन करना चाहिए|

2. व्यायाम:-
शरीर रक्षा का एक साधन व्यायाम भी है|व्यायाम से शरीर में रक्त का संचार ठीक रहता है, माँसपेशियों में बल आता है और इन्द्रियाँ भी शक्ति सम्पनं बनती है|दण्ड-बैठक, दोड़, खेल, प्रातः भ्रमण आदि से शरीर का अच्छा व्यायाम हो जाता है|

3. संतुलित भोजन:-
स्वस्थ रहने के लिए भोजन का महत्व है|भोजन से शरीर में रक्त का निर्माण होता है तथा शरीर को शक्ति मिलती है|अत: भोजन भी पोष्टिक, संतुलित तथा स्वास्थ्यकर होना चाहिए|भोजन को हमेशा चबा-चबाकर अच्छे से खाये और जब खाना खाये तो अपना सारा ध्यान भोजन पर ही केन्द्रित करे|

4. पानी:-
जब भी आप भोजन करो तो उससे 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद ही पानी पिए. जो पानी फ्रीज मै पड़ा हो और बर्फ में डला हुआ पानी को न पिये हमेशा पानी को थोडा गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये| जितना ज्यादा हो सके उतना पानी पिये|


5. शरीर:-
अपने शरीर को हमेशा सीधा ही रखे| हमेशा तनकर ही बैठे, तनकर ही चलें और जब खड़े रहे तब भी तनकर ही खड़े रहे| इससे आपके शरीर में चुस्ती बनी रहेगी|

6. नींद:-
गहरी और शान्त से शरीर नींद से शरीर की थकावट दूर होती है तथा स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क भी बना रहता है|अच्छी नींद से भी स्वास्थ्य बढ़ता है|

7. स्वस्थ आहार:-
टाइम के अनुसार ही भोजन करें, जितना हो उतना ही भोजन करे (जबरदस्ती अपना पेट न भरे)|भोजन को कम-से कम 32 बार चबाकर खाये और जब भोजन करने लगो तो अपने हाथो को अच्छे से धोये और भोजन को बैठ करके खाये|

8. ब्रेकफास्ट:-
ब्रेकफास्ट में चाये न पिए, सिर्फ दूंध ही पिए और अगर हो सके तो 2 उबले हुए अंडे खाये|

9. सुबह:-
रोज सुबह 5 बजे उठकर 2 से 3 किलोमीटर पैदल घुमने के लिए जाए| पार्क में जो घास होती है वहा पर नंगे पैर चले| इसको करने से आपके शरीर को अच्छा लगेगा और शरीर में ताजगी बनी रहेगी|

10. मोटापा:-
मोटापा आपके स्वास्थ्य के लिये बिलकुल भी अच्छा नही है| मोटापा दूर करने के लिए आप जितना हो सके कम-सेकम तैलीय व मीठे पदार्थ खाये| ज्यादा तैलीय व मीठे पदार्थ खाने से मोटापा आता है और शरीर में आलस व सुस्ती बनी रहती है|

11. उपवास:-
अगर हो सके तो कभी-कभी एक टाइम का भोजन ग्रहण न करे|

12. फल और जूस:-
जितना ज्यादा हो फल को खाये और उनका जूस बनाकर पिये (एप्पल, केला, सेब, अंकुर इत्यादि)

13. वाहन:-
जितना ज्यादा हो वाहन जैसे बाइक, कार का इस्तेमाल कम करे|अगर आपको आस-पास ही जाना है तो पैदल चलकर जाये. इससे आपके मांसपेशियों का व्यायाम होगा और आपका शरीर फिट रहेगा|

14. मैडिटेशन:-
रोज 10 से 15 मिनट अकेले किसी शान्त जगह पर जाकर मैडिटेशन जरुर करे| यह आपके दिमाग और शरीर को चुस्त करने मैं बहुत हेल्प करेगी|

15. मोटिवेशनल:-
कभी भी रोने वाले गाने न सुने हमेशा मोटिवेशनल वाले गाने सुने जिससे आपका दिमाग हमेशा पॉजिटिव रहे और आपको काम करने की हिम्मत मिले|

16. घर:-
घर के छोटे-मोटे काम आप स्वयं करे जैसे की बजार जाकर सामान लाना, घर की सफाई इत्यादि|

17. नींद:-
रोज सुभह और रात को सोने से पहले भ्रश जरुर करे और जब सोने जाओ तो हल्के कपड़े पहनकर सोये, टाईट कपड़े पहनकर न सोये|

18. बाल:-
अपने बालों को हमेशा साफ़ रखे. बालो में हमेशा तेल लगाए| हफ्ते मैं 1 बार अपने बालों की चम्पी (मालिश) जरुर करवाये|

19. नहाना:-
रोज सुबह उठकर नहाये और अच्छे कपड़े पहने| इससे आप खुबसूरत दीखते है और शरीर में भी थोड़ी बहुत उर्जा आती है|

20. क्रोध:-
क्रोध न करे यह आपके शरीर, मन और विचारों की सुन्दरता समाप्त कर देती है| हमेशा खुश और मुस्कुराते रहिये और खुशिया बाटते रहिये|

21. फोकस:-
जो भी आप काम कर रहे है उसपर अपना पूरा फोकस रखे और अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करे|

22. ध्रूमपान, शराब:-
अगर आपको अपना स्वास्थ्य अच्छा रखना है तो कभी भी अपनी जिन्दगी में सिगरेट, शराब, तम्बाकू इत्यादि का सेवन न करे| यह आपके शरीर के लिए जानलेवा है|

23. वाणी:-
हमेशा अपने मुह से अच्छे स्वर निकाले, किसी से भी गाली देकर बात न करे|

24. ब्रहाचर्य:-
मन, वचन और कर्म पर सयम रखना; सदाचारी रहना ब्रहाचर्य के लक्षण है|ब्रहाचर्य भी स्वास्थ्य रक्षा का बहुत बड़ा साधन है|

इनके साथ कभी-कभी उपवास करने से और सदा हँसमुख रहने से भी स्वास्थ्य बढ़ता है|


नोट: – दोस्तों इस आर्टिकल में मैंने स्वस्थ रहने के उपाय बताये है|अगर आपको ओर स्वस्थ रहने के तरीके पता है तो प्लीज उन तरीको को आप मेरे पेज महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक पर कमेंट करके हमारे साथ शेयर जरुर करे और इन सारे पॉइंट को अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर भी शेयर जरुर करें| धन्यवाद

हेलो दोस्तों आज मैं आप लोगों को इंसान का शरीर अद्भुत है इसके बारे में विशेष जानकारी लेकर आया हूं और आशा करता हूं यह महत्...
28/06/2021

हेलो दोस्तों आज मैं आप लोगों को इंसान का शरीर अद्भुत है इसके बारे में विशेष जानकारी लेकर आया हूं और आशा करता हूं यह महत्वपूर्ण जानकारी आप लोगों के लिए लाभप्रद होगा धन्यवाद!

मानव शरीर के ये सच जानकर आप हो जाएंगे हैरान, जानें क्या है खास:-
By:- महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक
डॉ दीपक कुमार
( होम्योपैथिक फिजीशियन)
Gmail:-drdipak403@gmail.com

Contact:-7549301384,9113756401

वैज्ञानिकों को क्यों हैरान करता है इंसान का शरीर, अद्भुत है इंसान का शरीर; मानव का शरीर देखने में तो सामान्य नजर आता हैं, लेकिन अगर इसके उपयोग और कार्य को जाना जाए तो हर कोई हैरान रह जाएगा। वैज्ञानिक आज भी मानव शरीर को लेकर हैरान हैं, कि आखिर ऐसे कैसे इतना सब मानव शरीर में हैं। मानव शरीर की संरचना ईश्वर ने की है, यह माना जाता है। इस संबंध में महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक के डॉक्टर दीपक कुमार जी का कहना है कि मानव शरीर निश्चित की कल्पनीय है। इसके बारे में जो भी यह सच सामने आए है वह सच है। शरीर के इन अंगों का मुकाबला या विकल्प भी बना पाना मुश्किल है। आज हम आपको बताने जा रहे है मानव शरीर की वह खास और रोचक बातें, जो आप महसूस तो कर सकते हैं, लेकिन जानते नहीं हैं।

*जबरदस्त फेफड़े:-

हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं| हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती| फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे|





*ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं:-
हमारा शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है| साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है| हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं| एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं|



*लाखों किलोमीटर की यात्रा:-
इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है|





*धड़कन:-
एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है| साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है| दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है|



*सारे कैमरे और दूरबीनें फेल:-
इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है| फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके|





*नाक में एंयर कंडीशनर:-
हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है|यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है|





*400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार:-
तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है| इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं|



*जबरदस्त मिश्रण:-
शरीर में 70 फीसदी पानी होता है|इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है|





*बेजोड़ झींक:-
झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है| आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है|





*बैक्टीरिया का गोदाम:-
इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है|एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं|


*ENT की विचित्र दुनिया:-
आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं|बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता| वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं|कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं| कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं|





*दांत संभाल के:-
इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं|लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते|





*मुंह में नमी:-
इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है|लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है|



*झपकती पलकें:-
वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है| महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं|



*नाखून भी कमाल के:-
अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है|वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है|





*तेज रफ्तार दाढ़ी:-
पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं|अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है|



*खाने का अंबार:-
एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है| हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं|

*बाल गिरने से परेशान:-
एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं|

*सपनों की दुनिया:-
इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है| बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है|


*नींद का महत्व:-
नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है| शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है|नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैंl

Homeopathy: रोग को दबाती नहीं, करती है जड़ से खत्मBy: महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लिनिक           डॉ दीपक कुमार          ...
27/06/2021

Homeopathy: रोग को दबाती नहीं, करती है जड़ से खत्म
By: महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लिनिक
डॉ दीपक कुमार
( होम्योपैथिक फिजीशियन)


होम्योपैथी में किसी भी रोग के उपचार के बाद भी यदि मरीज ठीक नहीं होता है तो इसकी वजह रोग का मुख्य कारण सामने न आना भी हो सकता है। इसके अलावा मरीज द्वारा रोग के बारे में सही जानकारी न देना उचित दवा के चयन में बाधा पैदा करती है जिससे समस्या का समाधान पूर्ण रूप से नहीं हो पाता। ऐसे में मरीज को उस दवा से कुछ समय तक के लिए तो राहत मिल जाती है लेकिन बाद में यह दवा शरीर पर दुष्प्रभाव छोडऩे लगती है। इस लापरवाही से आमतौर पर होने वाले रोगों का इलाज शुरुआती अवस्था में नहीं हो पाता और वे क्रॉनिक रूप ले लेते हैं व असाध्य रोग बन जाते हैं। मरीज को चाहिए कि वह डॉक्टर को रोग की हिस्ट्री, अपना स्वभाव और आदतों के बारे में पूर्ण रूप से बताए ताकि एक्यूट (अचानक होने वाले रोग जैसे खांसी, बुखार) रोग क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाले रोग जैसे अस्थमा, टीबी) न बने। चिकित्सकों के अनुसार, अधिकतर मामलों में एलोपैथी रोगों को दबाकर तुरंत राहत देती है लेकिन होम्योपैथी मर्ज को समझ कर उसकी जड़ को खत्म करती है। आमतौर पर होने वाली परेशानियों को छोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि एक रोग दूसरी बीमारी का कारण बन सकता है।
महर्षि मेंही हिंदी लाइफ क्लिनिक की ओर से जानते हैं इसके बारे में और विशेष जानकारीः-

बुखार
यह शरीर का नेचुरल प्यूरिफायर है जिससे शरीर में मौजूद विषैले तत्त्व बाहर निकलते हैं। 102 डिग्री तक के बुखार को ठंडी पट्टी रखकर, आराम करके या खाने में परहेज कर ठीक कर सकते हैं लेकिन उचित दवा न लेने से परेशानी बढ़कर असाध्य रोगों को जन्म देती हैं। जैसे बच्चों में इसके लिए सही दवा न दी जाए तो निमोनिया, सांस संबंधी परेशानियों हो सकती हैं। इसके अलावा कई बार दिमाग में बुखार के पहुंचने से बच्चे को दौरे भी आ सकते हैं।


इलाज
डॉक्टर को सभी लक्षण पूर्ण रूप से बताएं ताकि वे उसी आधार पर सही दवा का चयन कर रोग को शुरुआती स्टेज में ही दूर कर सके। आर्सेनिक (हल्के बुखार के साथ पानी की प्यास ज्यादा व पसीना आने पर), एकोनाइट (तेज बुखार के साथ पानी की प्यास, शरीर में सूखापन), बेलाडोना (तेज बुखार के कारण चेहरा लाल व सिरदर्द), चाइना (गैस बनने व पेट खराब होकर बुखार) आदि दवा से इलाज करते हैं।



एसिडिटी
समस्या के लंबे समय तक बने रहने से शरीर में एसिड इकट्ठा होता जाता है जो पेट या किडनी में पथरी, हृदयाघात, हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज, कोलेस्ट्रॉल, कमरदर्द, पाइल्स व फिशर जैसी परेशानियों को जन्म देता है। जोड़ों के गैप में एसिड के जाने से अर्थराइटिस भी हो सकता है। दिमाग में एसिड के जाने से बढऩे वाला बीपी पैरालिसिस की वजह बनता है।

इलाज : शुरुआती स्टेज में मरीज को कार्बोवेज (खट्टी डकारें आना), कालीकार्ब, फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), अर्सेनिक (पेट में जलन के बाद बार-बार पानी पीने की इच्छा) आदि दवाएं देते हैं।



सिरदर्द
यह आम रोग है जिसमें मरीज कई बार मनमर्जी से दवा ले लेता है। ऐसे में दवा लंबे समय तक राहत नहीं देती और पेट की परेशानी व माइग्रेन की आशंका को बढ़ाती है। यदि इसका इलाज उचित दवा से न हो तो दिमाग की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है जिससे हार्मोन्स के स्त्रावण में गड़बड़ी आती है जिससे थायरॉइड, महिला संबंधी समस्याएं जन्म लेती हैं।
इलाज : बेलाडोना, सेंग्युनेरिया (माइग्रेन), नेट्रम म्यूर (विशेषकर महिलाओं में सिरदर्द), ग्लोनाइन (धूप के कारण सिरदर्द) आदि इस बीमारी को ठीक करते हैं।



जुकाम
अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस, एलोपेसिया (बाल झडऩा), कम उम्र में बाल सफेद होना, आंखें कमजोर होना, मानसिक विकार जैसे तनाव, डिप्रेशन, स्वभाव में बदलाव, गुस्सा आना, क्रोनिक ब्रॉन्काइटिस के अलावा कार्डियक अस्थमा की मूल वजह जुकाम हो सकता है। सर्वाइकल स्पोंडिलाइसिस भी जुकाम से होता है क्योंकि इस दौरान बलगम दिमाग की नसों में जमता रहता है जिससे गर्दन व दिमाग के आसपास के भाग पर दबाव बढ़ता जाता है।

इलाज
जुकाम शरीर से गंदगी बाहर निकालता है और यह कुछ समय में खुद ही सही हो जाता है। लेकिन आराम न हो या समस्या कुछ समय के अंतराल में बार-बार प्रभावित करे तो आर्सेनिक (पानी की प्यास के साथ जुकाम), एकोनाइट, बेलाडोना, यूफे्रशिया (जुकाम के साथ आंखें लाल रहना), एलियम सेपा (जुकाम में जलन के साथ नाक बहना), ट्यूबरकुलिनम (जुकाम के साथ गर्मी लगना या भूख ज्यादा) दवाएं देते हैं।



कब्ज : आमतौर पर इस समस्या में हम घरेलू उपाय अपनाते हैं जो लिवर व पेन्क्रियाज की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं। यह डायबिटीज और आंतों, लिवर व पेट के कैंसर का कारण बनता है। लंबे समय तक कब्ज से पेन्क्रियाज व लिवर पर दबाव बढऩे से इंसुलिन बनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
इलाज : फॉस्फोरस (कुछ भी खाते ही उल्टी), चिलिडोनियम (लिवर के पीछे के भाग में दर्द) देते हैं।

महिला रोगोंं का इलाज
पुरुषों की तुलना में महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं ज्यादा होती हैं। जिसके चलते उन्हें कई परेशानियों का सामना बार-बार करना पड़ता है। इनमें होम्योपैथी इलाज मददगार है। जानते हैं ऐसी ही कुछ समस्याओं व इलाज के बारे में-



मेनोरेजिया : इम्युनिटी कमजोर होने से यदि किसी तरह का संक्रमण सेहत को प्रभावित करे तो माहवारी के दौरान अत्यधिक रक्तस्त्राव होना महिलाओं में आम है। इसकी वजह पेल्विक इंफ्लामेट्री डिसऑर्डर (पीआईडी) भी हो सकता है। फेरीनोसा, बोरैक्स, कॉलोफाइलम आदि दवा लेने की सलाह देते हैं।

स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन : क्रॉनिक रोग जैसे टाइफॉयड, टीबी की वजह से खून की कमी से कुछ महिलाओं में माहवारी के दौरान सामान्य से कम व ज्यादा रक्तस्त्राव होता है जो आगे चलकर विभिन्न रोगों को जन्म देता है। यह स्केंटी मेन्स्ट्रूएशन स्थिति होती है। इसके लिए फैरममैट, सीपिया, नैट्रम म्यूर दवाओं से इलाज होता है।

डिसमेनोरिया : कुछेक महिलाओं को माहवारी के दौरान विशेषकर पेट के निचले हिस्से में ज्यादा दर्द रहता है। यह तनाव लेने, मानसिक व शारीरिक कमजोरी व खानपान में असंतुलित भोजन की वजह से भी हो सकता है। ऐसे में एकोनाइट, बेलाडोना, अब्रोमा, एपिस, पल्सेटिल दवा देते हैं।

अनियमितता : जिन्हें माहवारी के दौरान रक्तस्त्राव कम या ज्यादा और अनियमित हो तो कैल्केरिया फॉस, कैल्केरिया कार्ब, फैरम फॉस, एलुमिना दवाएं दी जाती हैं।

इन्फैन्टाइल ल्यूकेरिया : विशेषकर 6 से 12 वर्ष की लड़कियों में पेट में कीड़ों की वजह से वाइट डिस्चार्ज की समस्या होती है जो शरीर में कमजोरी का भी कारण बनती है। ऐसे में कैल्केरिया कार्ब, आयोडम, सिपिया दवा से इलाज होता है।

ल्यूकेरिया : शरीर में पोषक तत्त्वों की कमी, पीआईडी आदि से वाइट डिस्चार्ज की समस्या में आर्सेनिक, कैल्केरिया कार्ब, एलेट्रिस जैसी दवाएं कारगर हैं।

मेनोपॉज : 40-45 वर्ष की उम्र के बाद महिलाओं में माहवारी बंद होने की अवस्था मेनोपॉज होती है। इस दौरान महिलाओं में मानसिक व शारीरिक बदलाव होने पर ग्लोनाइल, कैक्टस, सल्फर, नैट्रम म्यूर आदि दी जाती हैं।

महर्षि मेंही हेल्दी लाइफ क्लीनिक
डॉ दीपक कुमार
( होम्योपैथिक फिजीशियन)
मो.-7549301384,9113756401

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Pothia
854204

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