Arogyam Ayurveda, Kamalabag, Porbandar

Arogyam Ayurveda, Kamalabag, Porbandar Welcome to the official Dr.BHARAT CHAUHAN page. Dr.chauhan is Ayurved consultant at AROGYAM Epilepsy in children & adults.

AT AROGYAM WE TREAT:-
Respiratory Disorders : Asthma, cough, chronic nasal congestions, sinusitis, etc. Digestive Disorders : Acute & chronic diarrhoea, impaired digestion, piles, acute & chronic stomach pain, hyper-acidity, dysentry, constipation, etc. Major Vata disorders : Joint pain, Back pain, Arthritis, SLE, Slip-Disc, Paralysis, Spondilitis, Neurological disorders etc. Gynaecology : Irregular/painful/absence of menstruation, Excessive bleeding, Fibroid, PCO, PMS & infertility. Heart diseases
Pregnancy care : Pregnancy care, Child-birth, Post Delivery care and Child care. Children's diseases: Common ailments of children and treatment for children with special needs. Urinary disorders : Urinary stones, prostate gland enlargement, urinary tract infection, diabetes, Obstruction of Urine. Skin diseases: Different kinds of Skin diseases including allergies, herpes etc. Common complaints : Fevers, Head-aches, anaemia, jaundice, diseases of eyes, problems associated with ENT, obesity, Hyper-tension etc. Note: Names of diseases are not from Ayurveda. Popular names are used for the convenience of the readers. Treatment

Diseases are curable and easier to treat if they are of recent onset. Simple ailments are usually treated with oral medication. For chronic disorders, medicines are administered along with the appropriate Pancha Karma therapy. For treatment of diseases and in maintenance of health, diet plays a vital role and it is an integral part of treatment.

જિલ્લા પંચાયત પોરબંદરઆયુર્વેદ શાખા દ્રારા જનહિત માટે કોરોના અને અન્ય સંક્રમક રોગ પ્રતિરોધક ઉકાળો બનાવવા ની સરળ વૈજ્ઞાનિક...
03/05/2020

જિલ્લા પંચાયત પોરબંદર
આયુર્વેદ શાખા દ્રારા જનહિત માટે કોરોના અને અન્ય સંક્રમક રોગ પ્રતિરોધક ઉકાળો બનાવવા ની સરળ વૈજ્ઞાનિક રીત

આયુષ મંત્રાલય દ્રારા નિર્દેશિત રોગ પ્રતિરોધક હર્બલ ટી (ઉકાળો) (1) સવાર સાંજ બંને નાકમાં ગાયના ઘીનાં, કોપરેલ તેલનાં અ...

21/04/2020
03/03/2017
10/11/2016

*।। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ।।*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹_सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।__शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी ...
01/10/2016

*।। नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ।।*
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

_सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।_
_शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।_

मां दुर्गा आपका, आपके परिवारजनों का, व आपके स्वजनों का मंगल करे!

*डाॅ.भरत चौहाण*
1.10.2016

आज फिर से उड़ गयी मेरी निंद ये सोचकर!सरहद पर बहा वो खुन मेरी निंद के लिये था!
19/09/2016

आज फिर से उड़ गयी मेरी निंद ये सोचकर!
सरहद पर बहा वो खुन मेरी निंद के लिये था!

Common posture mistakes and fixes.
14/09/2016

Common posture mistakes and fixes.

घरेलु नुस्खे Vs आयुर्वेदअप्रशिक्षित वैद्य से इलाज कराने से अच्छा है पुरुष पिघला हुआ ताम्बा पी ले या जहरीले काले नाग से ख...
17/07/2016

घरेलु नुस्खे Vs आयुर्वेद
अप्रशिक्षित वैद्य से इलाज कराने से अच्छा है पुरुष पिघला हुआ ताम्बा पी ले या जहरीले काले नाग से खुद को कटवा ले।
ये लाइन आयुर्वेद महर्षि आचार्य चरक ने कही थी । लेकिन उनके कहने के 3000 साल बाद भी हम समझ नहीं पाये की हमे चिकित्सा किससे करानी चाहिए।
आज हम घरेलू नुस्खों की बात करेंगे, क्या है घरेलू नुस्खों का मतलब ,किसी छोटी मोटी बीमारी में शुरुवाती तौर पर घर पर उपयोग होने वाली चीजें से उपचार कर लेना या किसी बीमारी में मुख्य इलाज के साथ कोई आसान सा फार्मूला जो इलाज में मदद करे, करते रहना लेकिन ध्यान रहे ये भी आपके चिकित्सक की जानकारी में होना चाहिए, ये होता है घरेलू नुस्खा। इसकी शुरुवात कहाँ से हुई होगी तो ऐसा विचार आता है की पहले के ज़माने में वैद्यों ने मरीजों को असुविधा से बचाने कुछ फॉर्मूले जैसे हल्दी वाला दूध , तैल की मालिश , अजवाइन का पानी आदि लोगों को घर पर ही करने कह दिया होगा ताकि बात बात पर उन्हें वैद्य के पास न आना पड़े ,लेकिन कालान्तर में इन घरेलू नुस्खों ने घातक रूप लिया और बाद में विकृत हो गया, हुआ कुछ यूँ कि लोग वैद्यों को ध्यान से देखते है और उनके द्वारा किये जाने वाली प्रक्रियाओं एवं औषधि योगों को अपनी अप्रशिक्षित बुध्दि से समझते हुए उपयोग करने लग गए ,बिना यह समझे,यह जाने कि किसी भी प्रक्रिया या योग को किस मरीज़ को देना है, किसे नहीं यह सीखने में उस वैद्य ने अपने जीवन के कई वर्ष खर्च किये है । उसका पहला परिणाम तो ये हुआ कि पूरे आयुर्वेद को केवल घरेलु नुस्खा ही मान लिया गया और दूसरा ये कि आयुर्वेद के जटिल इलाज और प्रक्रियाएं जो प्रशिक्षित वैद्यों द्वारा की जानी थी, वे अप्रशिक्षित लोगों द्वारा की जाने लगी जिससे उसके दुष्परिणाम आये जो स्वाभाविक था, जैसे अगर हम खाना बनवाने वाले से बाल कटवायेंगे तो जो होगा वही हुआ और यहाँ तो बात लोगों के स्वास्थ्य से जुडी थी तो परिणाम ज़्यादा खतरनाक हुए। और ऐसे ही लोगों के कारण इतनी वैज्ञानिक और व्यवस्थित चिकित्सा पद्धति अवैज्ञानिक और अन्धविश्वास जैसी लगने लगी।
इसके कुछ उदाहरण देता हूँ जैसे आयुर्वेद में एक कर्म होता है अग्निकर्म जो कई व्याधियों की ज़बरदस्त चिकित्सा है लेकिन इसे करने का एक विशेष तरीका होता है, उसके प्रोटोकॉल है किसे करना है, किसे नहीं, कितना करना है आदि आदि ।सब कुछ लिखित में उपलब्ध है , यह भी कहा गया है कि इसे केवल प्रशिक्षित वैद्य से ही कराएं, लेकिन हुआ वही वैद्यों को देख लोगों को लगा इसमें क्या विशेष है और उसे देखकर लोग मरीजों को दागने लग गए और इतनी प्रभावी चिकित्सा अन्धविश्वास के नाम पर बदनाम हो गयी।
इसके और भी उदाहरण है लेकिन एक ताज़ा उदाहरण देता हूँ अभी मैंने कहीं पढ़ा की सरसों का तैल नाक में डालने से अस्थमा ठीक हो जाता है, ये एक आयुर्वेद प्रक्रिया है जिसे नस्य कहते है इसमें कई तरह के तेलों एवं अन्य दवा को अलग अलग व्याधियों में नासाछिद्रों से डाला जाता है बेशक नाक में तैल डालने से अस्थमा में लाभ होता है लेकिन इसे करने का तरीका इसकी मात्रा, किसे करना, किसे नहीं करना आदि आदि का पूरा प्रोटोकॉल आयुर्वेद संहिताओं में दिया है और अगर उसे फॉलो नहीं किया गया तो इसके गंभीर दुःपरिणाम भी हो सकते है लेकिन बहुत से लोगों ने इसे अस्थमा का घरेलू नुस्खा बना दिया और अगर इसके दुष्परिणाम आते है तो आयुर्वेद एक अवैज्ञानिक और अन्धविश्वास वाली चिकित्सा कहलाने लगती है। अब इसमें आयुर्वेद कहाँ गलत हुआ ये तो वही बात हुई की एक आदमी दर्द निवारक दवा बिना किसी चिकित्सक की सलाह के खाये और उसकी किडनी ख़राब हो तो हम कहें कि एलॉपथी बहुत अवैज्ञानिक पद्धति है।
किसी आयुर्वेद दवा को बिना विशेषज्ञ की सलाह के लेना उतना ही घातक हो सकता है जितना एलॉपथी दवा लेने से होगा। उसी तरह बिना विशेषज्ञ की सलाह के ली गयी एलॉपथी दवा भी उतनी ही अवैज्ञानिक और अन्धविश्वास भरी है जितनी आयुर्वेद।
अतः आप सभी से अनुरोध है कि कोई भी पैथी चाहे वो एलॉपथी हो, आयुर्वेद हो, होमियोपैथी हो, या यूनानी हो इसके किसी भी प्रयोग से पहले उसके विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें। कभी कभी एक ही बीमारी में रोगी बदल जाने से चिकित्सा में अंतर आ जाता है और कई बार एक जैसे लक्षण की कई बीमारियां भी हो सकती है जिनकी जानकारी सिर्फ चिकित्सक को होती जिसने ये समझने अपने जीवन के 10 -12 साल खर्च किये। अतः एक बार सलाह अवश्य लें।
एक कहानी सुनकर अपनी बात खत्म करता हूँ।
एक बार महर्षि चरक ने अपने शिष्यों को जंगल भेजा कि जाओ और ऐसी वनस्पति ढूंढ कर लाओ जो औषधि न हो
जब सारे शिष्य लौट कर आये तो सब कुछ न कुछ लाये कोई कम कोई ज़्यादा बस एक शिष्य कुछ नहीं लाया तो महर्षि ने उससे पूछा कि तुम क्यों नहीं लाये कुछ तो वो बोला आचार्य मुझे कुछ मिला ही नहीं जो औषधि न हो तो आचार्य बड़े प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि तुमने बिलकुल ठीक कहा ऐसे कोई चीज़ नहीं जो औषधि न हो बस उसे प्रयोग करने का सही तरीका आना चाहिए यही वैद्य की कुशलता होती है।
तो आप समझ गए होंगे की घरेलू नुस्खे और आयुर्वेद में कितना अंतर है और एक वैद्य की सलाह कितनी आवशयक।
इतना पढ़ने के लिए हृदय से आभार||| www.facebook.com/drbharatchauhan

21/06/2016

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