29/03/2026
*राजस्थान में डिजिटल नवाचारों से उपचार हो रहा सुगम*
*एबीडीएम एवं आईएचएमएस साॅफ्टवेयर के सफल क्रियान्वयन से मजबूत हुई स्वास्थ्य सेवाएं*
*19 हजार से अधिक सरकारी और 24 हजार से अधिक निजी चिकित्सा संस्थानों का पंजीकरण*
जयपुर, 29 मार्च। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश के अस्पतालों में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एवं इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम जैसे तकनीकी नवाचारों का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह न केवल मरीजों को अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन से लेकर इलाज, फार्मेसी और लैब रिपोर्ट तक की सभी प्रक्रियाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ रहा है। साथ ही उनका डेटा एक यूनिक हेल्थ आभा आईडी के माध्यम से संधारित भी हो रहा है। इससे प्रदेश के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करना आसान हुआ है। लोगों को अपना हेल्थ रिकॉर्ड मोबाइल पर उपलब्ध हो रहा है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन में स्वास्थ्य संस्थानों और स्वास्थ्य कार्मिकों का बड़े पैमाने पर डिजिटल पंजीकरण किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के 19 हजार से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों व 24 हजार सें अधिक निजी स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीकरण हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में किया जा चुका है। साथ ही 85 हजार से अधिक सरकारी क्षेत्र के डॉक्टर, नर्स एवं फार्मासिस्ट का व निजी क्षेत्र के 16 हजार से अधिक स्वास्थ्य कार्मिकों का पंजीकरण हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में कराया जा चुका है। उन्होंने बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में 24 हजार 546 से अधिक सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थान इस मिशन में कम्प्लायंट हो चुके हैं।
*6 हजार से अधिक सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का इंसेंटिव स्कीम में पंजीकरण*
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम में पंजीकृत स्वास्थ्य संस्थानों को हेल्थ रिकॉर्ड लिंक करने पर इंसेंटिव दिया जा रहा है। अब तक 5948 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों व 188 निजी अस्पताल, लैब, फार्मेसी का इस इनसेंटिव स्कीम में पंजीकरण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए अब तक पंजीकृत सरकारी व निजी चिकित्सा संस्थानों द्वारा रुपये 19.5 करोड़ रूपए से अधिक का प्रोत्साहन अर्जित किया जा चुका है।
*5 हजार से अधिक अस्पतालों में आईएचएमएस सॉफ्टवेयर*
श्रीमती राठौड़ ने बताया कि प्रदेश के 5 हजार से अधिक राजकीय चिकित्सा संस्थानों में इंटिग्रेटेड हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम सॉफ्टवेयर संचालित किया जा रहा है, जिससे मरीजों को पंजीकरण करने एवं दवा स्टॉक संधारण और वितरण में सुविधा मिल रही है। इन अस्पतालों में एडमिशन-डिस्चार्ज मॉड्यूल प्रारंभ भी किया जा रहा है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की भर्ती एवं डिस्चार्ज की जानकारी डिजिटल रूप से उपलब्ध हो रही है। आईएचएमएम लैब मॉड्यूल के माध्यम से मरीजों को उनकी जांच रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही है। इसके माध्यम से राजकीय अस्पतालों में दी जा रही सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर मरीजों को अधिक पारदर्शी, त्वरित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
*रोगी का पूरा डेटा सुरक्षित, मेडिकल हिस्ट्री जानने में आसानी*
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डाॅ. अमित यादव ने बताया कि एबीडीएम एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां मरीज, डॉक्टर और अस्पताल एक-दूसरे से डिजिटल रूप से जुड़े होते हैं। योजना के तहत पंजीकृत नागरिक की एक 14 अंकों की यूनिक आभा हेल्थ आईडी बनती है, जो रोगी की पहचान और मेडिकल रिकॉर्ड का आधार होती है। सभी लैब रिपोर्ट्, दवाइयों के पर्चे और पुरानी बीमारियों का डेटा इस आईडी में सुरक्षित रहता है, जिससे कागजों को साथ रखने की जरूरत खत्म हो जाती है। रोगी का पूरा डेटा सुरक्षित होता है और उसकी अनुमति के बिना कोई भी डॉक्टर या अस्पताल इसे नहीं देख सकता। इससे डॉक्टरों को मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री समझने में आसानी होती है, जिससे सही समय पर सही इलाज मिल पाता है।
*स्वास्थ्य नीतियां बनाने में मिल रही मदद*
डाॅ. यादव ने बताया कि आईएचएमएस एक एबीडीएएम कम्प्लायंट सॉफ्टवेर है, जिसके द्वारा मरीज की आभा आईडी के साथ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए जाते हैं, जिससे कागजी कार्रवाई कम होती है। डैशबोर्ड और एनालिटिक्स की मदद से सरकार को बेहतर स्वास्थ्य नीतियां बनाने और संसाधनों का सही प्रबंधन करने में मदद मिलती है। यह सिस्टम पूरे राज्य में एक मजबूत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम स्थापित कर रहा है।
*एबीडीएम कंप्लायंट सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने की अन्तिम तिथि 30 अप्रैल तक बढ़ाई*
डॉ. यादव ने बताया कि राजस्थान द्वारा पूर्व में मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना एवं आरजीएचएस से संबद्ध सभी अस्पतालों, प्रयोगशालाओं एवं फार्मेसियों के लिए एबीडीएम अनुपालन HMIS/LMIS/फार्मेसी सॉफ्टवेयर का उपयोग 31 मार्च 2026 तक अनिवार्य किया गया था। विभिन्न हितधारकों से प्राप्त अनुरोधों एवं सॉफ्टवेयर के सुचारू क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार द्वारा उक्त समय-सीमा को बढ़ाकर अब 30 अप्रैल 2026 तक कर दिया गया है।
*अब तक 6 करोड़ 82 लाख से अधिक की आभा आईडी बनाई*
राज्य में अब तक 6 करोड़ 82 लाख से अधिक नागरिकों की आभा (ABHA) आईडी बनाई जा चुकी है, जिससे राज्य देशभर में तीसरे स्थान पर है। इसी प्रकार राज्य में अब तक 5 करोड़ 43 लाख से अधिक आभा से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) तैयार किए जा चुके हैं, इसमें राज्य देशभर में चौथे स्थान पर है। इनमें से 3 करोड़ 54 लाख से अधिक रिकॉर्ड HMIS सॉफ्टवेयर के माध्यम से बनाए गए हैं, जो डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।
*पीसीटीएस सॉफ्टवेयर को भी शीघ्र ही एबीडीएम कम्पलायंट किया जा रहा*
पीसीटीएस सॉफ्टवेयर को भी शीघ्र ही एबीडीएम कम्पलायंट किया जा रहा है, जिसके पश्चात आभा (ABHA) युक्त स्वास्थ्य रिकॉर्ड की लिंकिंग प्रारंभ हो जाएगी। इससे गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड सीधे उनके मोबाइल फोन पर उपलब्ध हो सकेंगे। यह पहल राजस्थान के स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन को और सशक्त बनाएगी। वर्तमान में PCTS के माध्यम से 28 हजार से अधिक महिलाओं की नई आभा आईडी भी बनाई जा चुकी है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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