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नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन हैएक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख  से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर  रात को नजर न के ब...
14/08/2019

नाभी कुदरत की एक अद्भुत देन है
एक 62 वर्ष के बुजुर्ग को अचानक बांई आँख से कम दिखना शुरू हो गया। खासकर रात को नजर न के बराबर होने लगी।जाँच करने से यह निष्कर्ष निकला कि उनकी आँखे ठीक है परंतु बांई आँख की रक्त नलीयाँ सूख रही है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि अब वो जीवन भर देख नहीं पायेंगे।.... मित्रो यह सम्भव नहीं है..
मित्रों हमारा शरीर परमात्मा की अद्भुत देन है...गर्भ की उत्पत्ति नाभी के पीछे होती है और उसको माता के साथ जुडी हुई नाडी से पोषण मिलता है और इसलिए मृत्यु के तीन घंटे तक नाभी गर्म रहती है।
गर्भधारण के नौ महीनों अर्थात 270 दिन बाद एक सम्पूर्ण बाल स्वरूप बनता है। नाभी के द्वारा सभी नसों का जुडाव गर्भ के साथ होता है। इसलिए नाभी एक अद्भुत भाग है।
नाभी के पीछे की ओर पेचूटी या navel button होता है।जिसमें 72000 से भी अधिक रक्त धमनियां स्थित होती है
नाभी में देशी गाय का शुध्द घी या तेल लगाने से बहुत सारी शारीरिक दुर्बलता का उपाय हो सकता है।
1. आँखों का शुष्क हो जाना, नजर कमजोर हो जाना, चमकदार त्वचा और बालों के लिये उपाय...
सोने से पहले 3 से 7 बूँदें शुध्द देशी गाय का घी और नारियल के तेल नाभी में डालें और नाभी के आसपास डेढ ईंच गोलाई में फैला देवें।
2. घुटने के दर्द में उपाय
सोने से पहले तीन से सात बूंद अरंडी का तेल नाभी में डालें और उसके आसपास डेढ ईंच में फैला देवें।
3. शरीर में कमपन्न तथा जोड़ोँ में दर्द और शुष्क त्वचा के लिए उपाय :-
रात को सोने से पहले तीन से सात बूंद राई या सरसों कि तेल नाभी में डालें और उसके चारों ओर डेढ ईंच में फैला देवें।
4. मुँह और गाल पर होने वाले पिम्पल के लिए उपाय:-
नीम का तेल तीन से सात बूंद नाभी में उपरोक्त तरीके से डालें।
नाभी में तेल डालने का कारण
हमारी नाभी को मालूम रहता है कि हमारी कौनसी रक्तवाहिनी सूख रही है,इसलिए वो उसी धमनी में तेल का प्रवाह कर देती है।
जब बालक छोटा होता है और उसका पेट दुखता है तब हम हिंग और पानी या तैल का मिश्रण उसके पेट और नाभी के आसपास लगाते थे और उसका दर्द तुरंत गायब हो जाता था।बस यही काम है तेल का।
अपने स्नेहीजनों, मित्रों और परिजनों में इस नाभी में तेल और घी डालने के उपयोग और फायदों को शेयर करिये।
करने से होता है , केवल पढ़ने से नहीं
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07/04/2019
15/12/2018

मुझे नहीं जीना ऐसी दुनिया में
रात के लगभग 8 बजे थे । प्राइवेट नर्सिंग होम में एक महिला को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया और उसका अल्ट्रासाउंड हो रहा था । औरत लगातार दर्द से रो रही थी और बीच बीच में अंग्रेजी में डॉक्टर से कुछ-कुछ पूछ रही थी । डॉक्टर ने कान में आला लगा कर बच्चे की धड़कन सुनने की कोशिश की । तभी भ्रूण ने चिल्ला कर कहा ''डॉक्टर, मुझे मार डालो, मैं इस दुनिया में नहीं आना चाहती, मेरी ह्त्या कर दो ।'' डॉक्टर ने कहा ''ऐसा क्यों कह रही हो अब तो तुम 3 महीने की हो चुकी हो'', अब ये सब मुमकिन नहीं और ऐसा क्यों करूँ मैं?'' भ्रूण ने बेहद कातर स्वर में कहा ''डॉक्टर, आप नहीं जानती मेरी माँ की स्थिति, मुझे बचाने के लिए वो कितनी पीड़ा सह रही है, जबकि वो तो जानती भी नहीं थी कि मैं कन्या भ्रूण हूँ ।'' डॉक्टर भी हत्प्रभ! क्योंकि वो औरत न तो गरीब परिवार की दिख रही न अशिक्षित, धड़ाधड़ अंग्रेजी में मेडिकल टर्म के शब्द बोल रही थी और किसी तरह बच्चे को बचा लेने के लिए अनुरोध कर रही थी । डॉक्टर समझ नहीं पा रही थी कि एक शिक्षित संपन्न माँ की कन्या-भ्रूण क्यों दुनिया में आना नहीं चाहती है?
भ्रूण ने बताया कि जब उसकी माँ को पहली बार ये पता चला कि वो पेट से है तो खुश होकर अपने पति को बताने गई । दो झन्नाटेदार चांटा गाल पर । माँ सहम गई । उसका पति चिल्लाने लगा कि बच्चा पैदा करने किसने बोला, उसने बच्चा पैदा करने के लिए शादी नहीं की है । उसे रोज उसका बदन चाहिए न कि बच्चा । बहुत रोई माँ । दूसरे दिन जब ऑफिस गई तो सभी ने पूछा अरे फिर से ये क्या हो गया तुमको, गाल पर चोट के निशान । माँ ने बताया कि वो फिर से बाथरूम में फिसल गई, बहुत स्लीपरी है न बाथरूम । कई बार चोट के नीले निशान तथा हाथ और चेहरे पर खरोंच भी देखा था सभी ने, पर हर बार माँ यही कहती कि कभी सीढ़ी से गिर गई तो कभी रास्ते पर हड़बड़ी में चलते हुए गिर गई तो कभी पड़ोस के शिशु ने नाखून से नोच दिया । वो कैसे कहती कि उसका पति जिससे उसने प्रेम विवाह किया है हर रात उसमें शैतान उतर आता है ।
दूसरे दिन शाम को माँ के ऑफिस से लौटने के बाद उसका पति उसे डॉक्टर के पास ले गया और लिंग जाँच कराया तो पता चला कि कन्या है । रात को उसके पति ने जबरन शराब पिलाई और उसमें नींद की 8-10 गोलियाँ डाल दी । रात में तवियत बिगड़ने पर किसी डॉक्टर के पास ले गया और हमल गिरवा दिया । सुबह जब उसकी नींद खुली वो समझ गई कि उसका बच्चा नहीं रहा । फिर वही नियम, घर का काम काज फिर ऑफिस और फिर वही रात जिसमें उसे खरीदी हुई वेश्या बन जाना होता है, जिसका फ़र्ज़ ग्राहक जैसा चाहे उसे खुश करना है ।
इस बार जब गर्भ रह गया तो माँ ने किसी को नहीं बताया । किसी तरह 3 महीना गुजर गया । जिसमें से एक महीना वो अपने सास ससुर के पास रही क्योंकि सास अस्वस्थ थी, और अच्छी परिचारिका होने के कारण पति ने उसे वहाँ भेज दिया था । सास को पता चल गया कि वो पेट से है । खुशी में खूब लड्डू बांटे और पोता ही जनने की धमकी दे डाली । बेटे को बताया तो बेटा खुश हुआ और पत्नी को उलाहना दिया कि तुमने मुझे क्यों नहीं बताया । माँ सोची कि शायद इस बार सब ठीक हो गया है । सास भी वारिस का मुँह देखने साथ ही यहाँ आ गई थी । आज शाम को पति बोला कि चलो डॉक्टर को दिखा लो और जो भी सावधानी चाहिए वो पता कर लो । माँ चली गई डॉक्टर के पास । फिर उसके पति ने डॉक्टर से पता कर लिया कि गर्भ में इस बार भी कन्या है । घर आकर माँ को बहुत मारा और पेट के बल धक्का दे दिया । सास खड़ी होकर तमाशा देखती रही । तभी उसके पति का एक दोस्त घर आया, उसने देखा कि माँ नीचे पड़ी कराह रही है और रक्त बह रहा है । दोस्त को देखते ही उसका पति बोला कि माँ सीढ़ी से गिर गई है और फिर झट से माँ को उठाया और गाड़ी में लेकर यहाँ आया ।
भ्रूण ने कहा ''मैं कन्या हूँ न, तो इतने से मार से मैं खत्म नहीं हो पाई, दोस्त अंकल के कारण मैं बच गई । लेकिन दूसरे के भरोसे कितने दिन मैं बचूंगी, और बच भी गई तो माँ तो रोज ऐसे ही पिटेगी, नहीं सह पाती हूँ ये सब देख कर ।'' डॉक्टर ने भ्रूण को बहुत समझाया कि 3 महीने की तुम हो चुकी हो और ऐसा करना पाप है और अपराध भी । भ्रूण ने कहा कि आप नहीं कर सकती पर दूसरे डॉक्टर तो यह करते ही हैं । किसी डॉक्टर ने ही तो बताया था कि माँ के पेट में कन्या है और तभी तो माँ के साथ इतना क्रूर बर्ताव हुआ है । माँ को जब उसका पति मार रहा था तो बोला ''अगर पैदा ही करना है तो लड़का पैदा करो, मेरा वंश तो चलेगा । लड़की की रखवाली हर वक्त कौन करेगा, कहीं रेप वेप हो गया तो किसको मुँह दिखाएँगे, लड़की पैदा करके क्या दहेज में अपनी सब संपत्ति किसी गैर को दे दूँ?''
''डॉक्टर, आप ही बताइए क्या ऐसे घर में मेरा जन्म लेना मुनासिब है? अगर इन सब के बाद बच गई तो जन्म के बाद जाने क्या हो? जाने कब कौन हवस का शिकार बना ले । हर वक्त बदन के अंदर झांकती नज़रों से कहाँ बच पाऊँगी । इन सबसे गुजरते हुए बड़े होने पर अगर कोई मन को भा जाए तो क्या पता कि मुझे इसकी क्या सजा मिले, मुमकिन है हम दोनों को मौत के घाट उतार दिया जाए । ये भी संभव है कि किसी के इसरार पर इनकार करूँ तो तेज़ाब से जला कर मुझे सदा के लिए विकृत कर दे । अगर इन सब हादसों से बच जाऊँ और विवाह की बात हो तो दहेज की जुगाड़ में माँ बाप के अवसाद की वजह बनूँगी और फिर मेरा मन भी कुंठाग्रस्त हो जाएगा । अगर ये भी सही सलामत निपट जाए तो क्या मालूम और-और दहेज के लिए जला दी जाऊँ या फिर चरित्रहीन बताकर निष्काषित कर दी जाऊँ या फिर मुझे आत्महत्या करने के लिए विवश होना पड़े । ये भी मुमकिन है कि किसी की धूर्तता से मैं भी माँ-सी बन जाऊँ, जिसे इस आरोप में बार बार प्रताड़ित किया जाए कि पेट से क्यों हुई या फिर पेट में कन्या भ्रूण क्यों?''
''डॉक्टर, मुझे नहीं जीना ऐसी दुनिया में, मुझे नहीं बनाना अपनी माँ की तरह और न चाहती हूँ ऐसी खौफनाक जिंदगी जिसमें हर पल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए वार और आघात सहूँ ।

05/09/2018

सभी *वरिष्ठ नागरिक* 50-60 से ऊपर की उम्र के कृपया अवश्य पढे। हो सकता है आपके काम आए..

आप जानते है कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो, साठ की उम्र पार होने पर भी यदि आप अपने आप को फुर्तीला ओर मन से ताकतवर समझते हो, लेकिन वास्तव में ढलती उम्र के साथ तन उतना ताकतवर ओर फ़ुर्तीला नहीं रह जाता।

आपका शरीर ढलान पर होता है जिससे ‘हड्डियां व जोड़ कमज़ोर होते है पर कभी कभी मन भ्रम बनाए रखता है कि ‘ये काम तो चुटकी में कर लूँगा’। पर बहुत जल्दी सच्चाई सामने आ जाती है । मगर एक नुक़सान के साथ।

सीनियर सिटिज़न होने पर जिन बातों का ख़्याल रखा जाना चाहिए, ऐसी कुछ टिप्स देखिए--

-- धोखा तभी होता है जब मन सोचता है ‘कर लूंगा’ और शरीर करने से ‘चूक’ जाता है। परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति!
ये क्षति फ़्रैक्चर से लेकर ‘हेड इंज्यूरी’ तक हो सकती है। यानी कभी कभी जान लेवा भी हो जाती है।

-- इसलिए जिन्हें भी हमेशा हड़बड़ी में रहने और काम करने की आदत हो, बेहतर होगा कि वे अपनी आदतें बदल डालें।
भ्रम न पालें, सावधानी बरतें क्योंकि अब आप पहले की तरह फ़ुर्तीले नहीं रह जाते हैं।
छोटी सी चूक भी कभी बड़े नुक़सान का कारण बन जाती है।

-- सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों, क्योंकि आँखे तो खुल जाती है मगर शरीर व नसों का रक्त प्रवाह पूर्ण चेतन्य अवस्था मे नही हो पाता ।

अतः पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें। कोशिश करें कि बैठे बैठे ही स्लीपर / चप्पलें पैर में डाल लें या खड़े होने पर मेज़ या किसी सहारे को पकड़कर ही चप्पलें पहनें। अक्सर यही समय होता है डगमगा कर गिर जाने का।

-- गिरने की सबसे ज़्यादा घटनाएँ बॉथरूम/वॉशरूम या टॉयलेट में ही होतीं हैं।

आप चाहे अकेले, पति/पत्नी के साथ या संयुक्त परिवार में रहते हों, बॉथरूम में अकेले ही होते हैं।

-- यदि आप घर में अकेले रहते हों, तो अतिरिक्त सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाज़ा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी, वह भी तब, जब आप पड़ोसी तक समय से सूचना पहुँचाने में सफल हो सकेंगे।

— *याद रखें बाथरूम में भी मोबाइल साथ हो ताकि वक़्त ज़रूरत काम आ सके।*

-- देशी शौचालय के बजाय हमेशा ऊँचे कमोड वाले शौचालय का ही इस्तेमाल करें ! यदि न हो, तो समय रहते बदलवा लें, ज़रूरत पड़नी ही है, चाहे कुछ समय बाद।
संभव हो तो कमोड के पास एक हैंडिल लगवा लें !
कमज़ोरी की स्थिति में ये ज़रूरी हो जाता है।
बाजार में प्लास्टिक के वेक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं, जो टॉइल जैसी चिकनी सतह पर चिपक जाते हैं, पर इन्हें हर बार इस्तेमाल से पहले खींचकर ज़रूर परख लें।

-- हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहायें।

बॉथरूम के फ़र्श पर रबर की मैट ज़रूर बिछा रखें ताकि आप फिसलन से बच सकें।

-- गीले हाथों से टाइल्स लगी दीवार का सहारा कभी न लें, हाथ फिसलते ही आप ‘डिसबैलेंस’ होकर गिर सकते हैं।

-- बॉथरूम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले।
कुछ सेकेण्ड उस पर खड़े होकर फिर फ़र्श पर पैर रखें वो भी सावधानी से।

-- अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम में ही पहनें।
अंडरवियर, पजामा या पैंट खडे़ खडे़ कभी नहीं पहनें।

हमेशा दीवाल का सहारा लेकर या बैठकर ही उनके पायचों मे पैर डालें, फिर खड़े होकर पहनें, वर्ना दुर्घटना घट सकती है।
*कभी कभी स्मार्टनेस की बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ जाती है।*

-- अपनी दैनिक ज़रूरत की चीज़ों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें, जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके।

भूलने की ज़्यादा आदत हो, तो आवश्यक चीज़ों की लिस्ट मेज़ या दीवार पर लगा लें, घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी।

-- जो दवाएँ रोज़ाना लेनी हों, उनको प्लास्टिक के प्लॉनर में रखें जिससे जुड़ी हुई डिब्बियों में हफ़्ते भर की दवाएँ दिनवार रखी जाती हैं।

अकसर भ्रम हो जाता है कि दवाएँ ले ली हैं या भूल गये।प्लॉनर में से दवा खाने मे चूक नहीं होगी।

-- सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय, सक्षम होने पर भी, हमेशा रेलिंग का सहारा लें, ख़ासकर ऑटोमैटिक सीढ़ियों पर। ध्यान रहे आपका शरीर आपके मन का अब *ओबीडियेंट सर्वेंट* नहीं रहा।

— बढ़ती आयु में कोई भी ऐसा कार्य जो आप सदैव करते रहे हैं, उसको बन्द नहीं करना चाहिए।
कम से कम अपने से सम्बन्धित अपने कार्य स्वयं ही करें।

— नित्य प्रातःकाल घर से बाहर निकलने, पार्क में जाने की आदत न छोड़ें, छोटी मोटी एक्सरसाइज भी करते रहे। नहीं तो आप योग व व्यायाम से दूर होते जाएंगे और शरीर के अंगों की सक्रियता ओर लचीला पन कम होती जाएगी। हर मौसम में कुछ योग-प्राणायाम अवश्य करते रहें।

— घर में या बाहर हुक्म चलाने की आदत छोड़ दें। अपना पानी, भोजन, दवाई इत्यादि स्वयं लें जिससे सक्रियता बनी रहे।

बहुत आवश्यक होने पर ही दूसरों की सहायता लेनी चाहिए।

— घर में छोटे बच्चे हों तो उनके साथ अधिक समय बिताएं, लेकिन उनको अधिक टोका-टोकी न करें। उनको प्यार से सिखायें।

-- *ध्यान रखें कि आपको सबसे एडजस्ट करना है न कि सबको आपसे।*

-- इस एडजस्ट होने के लिए चाहे, बड़ा परिवार हो, छोटा परिवार हो, या कि पत्नी/पति हो, मित्र हो, पड़ोसी या समाज, *एक मूल मंत्र सदैव उपयोग करें।*

1. *नोन* अर्थात स्वाद पर नियंत्रण रखें।
2. *मौन* कम से कम एवं आवश्यकता पर ही बोलें।

3. *कौन* अपनी दखलंदाजी कम कर दें।

*नोन, मौन, कौन* के मूल मंत्र को जीवन में उतारते ही *वृद्धावस्था* प्रभु का वरदान बन जाएगी जिसको बहुत कम लोग उपभोग कर पाते हैं। कितने भाग्यशाली हैं आप, इसको समझें।
धन्यवाद! 🤔

सोशल मीडिया से साभार

27/08/2018

मनुष्य का लगभग आधा जीवन सोने में व्यतीत होता है। हर मनुष्य का सोने का तरीका एक-दूसरे से भिन्न होता है।

आपके सोने का तरीका आपके मन की बातों, आदतों एवं आपके विषय में बहुत कुछ सच-सच बता सकता है।

सामुद्रिक शास्त्र या शरीर लक्षण विज्ञान के अंतर्गत इस संबंध में विस्तृत जानकारी मिलती है।

पांवों को कसकर सोना- अगर आप सोते समय पांवों को जकड़ लेते हैं और सारे शरीर को ढककर सोने की आदत है तब निश्चय ही आपका जीवन संघर्षपूर्ण रहेगा।

शरीर सिकोड़कर सोना- ऐसे लोग डरपोक होते हैं। उन्हें हमेशा एक अंजाना सा भय अनुभव होता है पर यह किसी को यह बात नहीं बताते।

चित्त सोना- अगर आपको केवल सीधे लेटकर नींद आती है तो यह शुभ लक्षण हैं। आप केवल आत्मविश्वासी ही नहीं आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी भी होते हैं। ऐसे लोग समस्याओं का समाधान तुरंत कर देते हैं।

पेट के बल सोना- ऐसे लोग किसी भी प्रकार का खतरा उठाने के लिए तैयार नहीं होते। यह अपनी गलती को अच्छी तरह जानते हैं पर बतलाते हुए डरते हैं।

पैर पर पैर रखकर सोना- ऐसे लोग संतुष्ट व सहनशील होते हैं। इनके मन में हमेशा यह इच्छा होती है कि दूसरे प्रसन्न रहें और हम भी सुखी रहें। निश्चय ही इनका जीवन सुखी होता है।

करवट लेकर सोना- ऐसे लोग समझौतावादी होते हैं। साफ-सुथरे रहना, अच्छा भोजन करना इन्हें प्रिय होता है। ये आदर्श जीवन जीना पसंद करते हैं। यह इनकी उन्नति का सूचक भी होता है।

सोने से पहले टांग हिलाना- जो लोग सोते समय टांग हिलाते हैं वे चिंताग्रस्त होते हैं तथा स्वयं से ज्यादा परिजनों के बारे में सोचते हैं।

24/08/2018

एक लड़का था. बहुत ब्रिलियंट था. सारी जिंदगी फर्स्ट आया. साइंस में हमेशा 100% स्कोर किया. अब ऐसे लड़के आम तौर पर इंजिनियर बनने चले जाते हैं, सो उसका भी सिलेक्शन हो गया IIT चेन्नई में. वहां से B Tech किया और वहां से आगे पढने अमेरिका चला गया. वहां से आगे की पढ़ाई पूरी की. M.Tech वगैरा कुछ किया होगा फिर उसने यूनिवर्सिटी ऑफ़ केलिफ़ोर्निआ से MBA किया.
अब इतना पढने के बाद तो वहां अच्छी नौकरी मिल ही जाती है. सुनते हैं कि वहां भी हमेशा टॉप ही किया. वहीं नौकरी करने लगा. बताया जाता है कि 5 बेडरूम का घर था उसके पास. शादी यहाँ चेन्नई की ही एक बेहद खूबसूरत लड़की से हुई थी. बताते हैं कि ससुर साहब भी कोई बड़े आदमी ही थे, कई किलो सोना दिया उन्होंने अपनी लड़की को दहेज़ में.
अब हमारे यहाँ आजकल के हिन्दुस्तान में इस से आदर्श जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. एक आदमी और क्या मांग सकता है अपने जीवन में? पढ़ लिख के इंजिनियर बन गए, अमेरिका में सेटल हो गए, मोटी तनख्वाह की नौकरी, बीवी बच्चे, सुख ही सुख, इसके बाद हीरो हेरोइने सुखपूर्वक वहां की साफ़ सुथरी सड़कों पर भ्रष्टाचार मुक्त माहौल में सुखपूर्वक विचरने लगे, The End.
अब एक दोस्त हैं हमारे, भाई नितिन शर्मा जी. एक नंबर के घुमक्कड़ हैं, घर कम रहते हैं सफ़र में ज्यादा रहते हैं. ऐसी ऐसी जगह घूमने चल पड़ते हैं पैदल ही, 4 -6 दिन पहाड़ों पर घूमना, trekking करना उनके लिए आम बात है. ऐसे ऐसे दुर्गम स्थानों पर जाते है, फिर आ के किस्से सुनाते हैं,ब्लॉग लिखते हैं. उनका ब्लॉग पढ़ के मुझे थकावट हो जाती है, न रहने का ठिकाना न खाने का ठिकाना (सफ़र में), फिर भी कोई टेंशन नहीं, चल पड़े घूमने, बैग कंधे पर लाद के. मेरी बीवी कहती है अक्सर, कि एक तो तुम पहले ही आवारा थे ऊपर से ऐसे दोस्त पाल लिए, नीरज जाट जैसे, जो न खुद घर रहता है, न दूसरों को रहने देता है, बहला फुसला के ले जाता है अपने साथ. पर मुझे उनकी घुमक्कड़ी देख सुन के रश्क होता है, कितना रफ एंड टफ है यार ये आदमी, कितना जीवट है इसमें, बड़ी सख्त जान है.
आइये अब जरा कहानी के पहले पात्र पर दुबारा आ जाते हैं. तो आप उस इंजिनियर लड़के का क्या फ्यूचर देखते हैं लाइफ में? सब बढ़िया ही दीखता है? पर नहीं, आज से तीन साल पहले उसने वहीं अमेरिका में, सपरिवार आत्महत्या कर ली. अपनी पत्नी और बच्चों को गोली मार कर खुद को भी गोली मार ली. What went wrong? आखिर ऐसा क्या हुआ, गड़बड़ कहाँ हुई.
ये कदम उठाने से पहले उसने बाकायदा अपनी wife से discuss किया, फिर एक लम्बा su***de नोट लिखा और उसमें बाकायदा justify किया अपने इस कदम को और यहाँ तक लिखा कि यही सबसे श्रेष्ठ रास्ता था इन परिस्थितयों में. उनके इस केस को और उस su***de नोट को California Institute of Clinical Psychology ने study किया है. What went wrong?
हुआ यूँ था कि अमेरिका की आर्थिक मंदी में उसकी नौकरी चली गयी. बहुत दिन खाली बैठे रहे. नौकरियां ढूंढते रहे. फिर अपनी तनख्वाह कम करते गए और फिर भी जब नौकरी न मिली, मकान की किश्त जब टूट गयी, तो सड़क पे आने की नौबत आ गयी. कुछ दिन किसी पेट्रोल पम्प पे तेल भरा बताते हैं. साल भर ये सब बर्दाश्त किया और फिर अंत में ख़ुदकुशी कर ली... ख़ुशी ख़ुशी और उसकी बीवी भी इसके लिए राज़ी हो गयी, ख़ुशी ख़ुशी. जी हाँ लिखा है उन्होंने कि हम सब लोग बहुत खुश हैं, कि अब सब कुछ ठीक हो जायेगा, सब कष्ट ख़तम हो जायेंगे.
इस case study को ऐसे conclude किया है experts ने : This man was programmed for success but he was not trained,how to handle failure. यह व्यक्ति सफलता के लिए तो तैयार था, पर इसे जीवन में ये नहीं सिखाया गया कि असफलता का सामना कैसे किया जाए.
आइये ज़रा उसके जीवन पर शुरू से नज़र डालते हैं. बहुत तेज़ था पढने में, हमेशा फर्स्ट ही आया. ऐसे बहुत से Parents को मैं जानता हूँ जो यही चाहते हैं कि बस उनका बच्चा हमेशा फर्स्ट ही आये, कोई गलती न हो उस से. गलती करना तो यूँ मानो कोई बहुत बड़ा पाप कर दिया और इसके लिए वो सब कुछ करते हैं, हमेशा फर्स्ट आने के लिए. फिर ऐसे बच्चे चूंकि पढ़ाकू कुछ ज्यादा होते हैं सो खेल कूद, घूमना फिरना, लड़ाई झगडा, मार पीट, ऐसे पंगों का मौका कम मिलता है बेचारों को,12 th कर के निकले तो इंजीनियरिंग कॉलेज का बोझ लद गया बेचारे पर, वहां से निकले तो MBA और अभी पढ़ ही रहे थे की मोटी तनख्वाह की नौकरी. अब मोटी तनख्वाह तो बड़ी जिम्मेवारी, यानी बड़े बड़े targets.
कमबख्त ये दुनिया साली, बड़ी कठोर है और ये ज़िदगी, अलग से इम्तहान लेती है. आपकी कॉलेज की डिग्री और मार्कशीट से कोई मतलब नहीं उसे. वहां कितने नंबर लिए कोई फर्क नहीं पड़ता. ये ज़िदगी अपना अलग question paper सेट करती है. और सवाल साले,सब out ऑफ़ syllabus होते हैं, टेढ़े मेढ़े, ऊट पटाँग और रोज़ इम्तहान लेती है. कोई डेट sheet नहीं.
एक बार एक बहुत बड़े स्कूल में हम लोग summer camp ले रहे थे दिल्ली में. Mercedeze और BMW में आते थे बच्चे वहां. तभी एक लड़की, रही होगी यही कोई 7-8 साल की, अचानक जोर जोर से रोने लगी. हम लोग दौड़े, क्या हुआ भैया, देखा तो वो लड़की गिर गयी थी. वहां ज़मीन कुछ गीली थी सो उसके हाथ में ज़रा सी गीली मिटटी लग गयी थी और थोड़ी उसकी frock में भी. सो वो जार जार रो रही थी. खैर हमने उसके हाथ धोये और ये बताया कि कुछ नहीं हुआ बेटा, ये देखो, धुल गयी मिटटी. खैर साहब थोड़ी देर में उसकी माँ आ गयी, high heels पहन के और उसने हमारी बड़ी क्लास लगाई कि आप लोग ठीक से काम नहीं करते हो, लापरवाही करते हो, कैसे गिर गया बच्चा, अगर कुछ हो जाता तो? सचमुच इतना बड़ा हादसा, भगवान् न करे किसी के साथ हो जीवन में.
एक और आँखों देखी घटना है मेरी. कैसे माँ बाप अपने बच्चों को spoil करते हैं. हम लोग एक स्कूल में एक और कैंप लगा रहे थे, बच्चे स्कूल बस से आते थे. ड्राईवर ने जोर से ब्रेक मारी तो एक बच्चा गिर गया और उसके माथे पे हलकी सी चोट लग गयी, यही कोई एक सेन्टीमीटर का हल्का सा कट. अब वो बच्चा जोर जोर से रोने लगा, बस यूँ समझ लीजे, चिंघाड़ चिंघाड़ के, क्योंकि उसने वो खून देख लिया अपने हाथ पे. खैर मामूली सी बात थी, हमने उसे फर्स्ट ऐड दे के बैठा दिया. तभी भैया, यही कोई 10 मिनट बीते होंगे, उस बच्चे के माँ बाप पहुँच गए स्कूल और फिर वहां जो रोआ राट मची. वो बच्चा जितनी जोर से रोता, उसकी माँ उस से ज्यादा जोर से चिंघाड़ती और उसका बाप जोर जोर से चिल्ला रहा था, पागलों की तरह. मेरे बच्चे को सर में चोट लगी है, आप लोग अभी तक हॉस्पिटल ले के नहीं गए? अरे ये तो न्यूरो का केस है सर में चोट लगी है.
मेरा एक दोस्त जो वहां PTI था उसके साथ हम एक स्थानीय neurology के हॉस्पिटल में गए. अब अस्पताल वालों को तो बकरा चाहिए काटने के लिए. वहां पर भी उस लड़के का बाप CT Scan, Plastic surgery न जाने क्या क्या बक रहा था. पर finally उस अस्पताल के doctors ने एक BANDAID लगा के भेज दिया.
एक और किस्सा उसी स्कूल का, एक श्रीमान जी सुबह सुबह आ के लड़ रहे थे, क्या हुआ भैया, स्कूल बस नहीं आयी, हमें आना पड़ा छोड़ने. बाद में पता चला श्रीमान जी का घर स्कूल से बमुश्किल 200 मीटर दूर, उसी कालोनी में तीन सड़क छोड़ के था और लड़का उनका 10 साल का था.
क्या बनाना चाहते हैं आज कल के माँ बाप अपने बच्चों को? ये spoon fed बच्चे जीवन के संघर्षों को कैसे या कितना झेल पाएंगे?
आज से लगभग 15 साल पहले, मेरा बड़ा बेटा 4-5 साल का था, अपने खेत पे जा रहे थे हम. बरसात का season था, धान के खेतों में पानी भरा था. मेरे बेटे ने मुझे कहा, पापा, मुझे गोदी उठा लो. मैंने कहा कुछ नहीं होता बेटा, पैदल चलो और वो चलने लगा और थोड़ी ही देर बाद पानी में गिर गया. कपडे सब कीचड में सन गए. अब वो रोने लगा, मैंने फिर कहा कुछ नहीं हुआ बेटा, उठो, वो वहीं बैठा बैठा रो रहा था. उसने मेरी तरफ हाथ बढाए, मैंने कहा अरे पहले उठो तो और वो उठ खड़ा हुआ. मैंने उसे सिर्फ अपनी ऊँगली थमाई और वो उसे पकड़ के ऊपर आ गया. हम फिर चल पड़े. थोड़ी देर बाद वो फिर गिर गया, पर अबकी बार उसकी प्रतिक्रिया बिलकुल अलग थी. उसने सिर्फ इतना ही कहा, अर्रे... और हम सब हंस दिए. वो भी हंसने लगा और फिर अपने आप उठा और ऊपर आ गया. मुझे याद है उस साल हम दोनों बाप बेटा बीसों बार उस खेत पे गए होंगे, वो उसके बाद वहां से आते जाते कभी नहीं गिरा.
कल मैं नितिन शर्मा जी की गरूणचट्टी झील की trekking वाली पोस्ट पढ़ रहा था. 4 दिन उस सुनसान बियाबान में, जिसका रास्ता तक नहीं पता, इतनी बारिश और ओला वृष्टि में, ऊपर से ले कर नीचे तक भीगे, भूखे प्यासे, न रहने का ठिकाना न सोने का. उस कीचड भरे मंदिर के कमरे में, उस बिना chain वाले स्लीपिंग बैग में रात बिता के भी, कितने खुश थे. इतना संघर्ष शील आदमी, क्या जीवन में कभी हार मानेगा?
काश कार्तिक राजाराम, जी हाँ यही नाम था उस लड़के का. उसे भी बचपन में गिरने की, गिर गिर के उठने की, बार बार हारने की और हार के बार बार जीतने की ट्रेनिंग मिली होती.
कठोपनिषद में एक मंत्र है, उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत. उठो जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक आगे बढ़ते रहो. शुरू से ही अपने बच्चों को इतना कोमल, इतना सुकुमार मत बनाइये कि वो इस ज़ालिम दुनिया के झटके बर्दाश्त न कर सके.
एक अंग्रेजी उपन्यास में एक किस्सा पढ़ा था. एक मेमना अपनी माँ से दूर निकल गया. आगे जा कर पहले तो भैंसों के झुण्ड से घिर गया. उनके पैरों तले कुचले जाने से बचा किसी तरह. अभी थोडा ही आगे बढ़ा था कि एक सियार उसकी तरफ झपटा. किसी तरह झाड़ियों में घुस के जान बचाई तो सामने से भेड़िये आते दिखे. बहुत देर वहीं झाड़ियों में दुबका रहा, किसी तरह माँ के पास वापस पहुंचा तो बोला, माँ, वहां तो बहुत खतरनाक जंगल है. Mom, there is a jungle out there.
इस खतरनाक जंगल में जिंदा बचे रहने की ट्रेनिंग अभी से अपने बच्चों को दीजिये.

🙏🏼आपका दिन उन्नति कारक हो

22/08/2018

पिता :- कन्यादान नहीं करूंगा जाओ ,
मैं नहीं मानता इसे ,
क्योंकि मेरी बेटी कोई चीज़ नहीं ,जिसको दान में दे दूँ ;
मैं बांधता हूँ बेटी तुम्हें एक पवित्र बंधन में ,
पति के साथ मिलकर निभाना तुम ,
मैं तुम्हें अलविदा नहीं कह रहा ,
आज से तुम्हारे दो घर ,जब जी चाहे आना तुम ,
जहाँ जा रही हो ,खूब प्यार बरसाना तुम ,
सब को अपना बनाना तुम ,पर कभी भी
न मर मर के जीना ,न जी जी के मरना तुम ,
तुम अन्नपूर्णा , शक्ति , रति सब तुम ,
ज़िंदगी को भरपूर जीना तुम ,
न तुम बेचारी , न अबला ,
खुद को असहाय कभी न समझना तुम ,
मैं दान नहीं कर रहा तुम्हें ,
मोहब्बत के एक और बंधन में बाँध रहा हूँ ,
उसे बखूबी निभाना तुम .................
*एक नयी सोच एक नयी पहल*सभी बेटियां के लिए

🔰🚥🚥🔰

🌿➖बोये जाते हैं बेटे..
🌿➖पर उग जाती हैं
बेटियाँ..

🌿➖खाद पानी बेटों को..
🌿➖पर लहराती हैं बेटियां.

🌿➖स्कूल जाते हैं बेटे..
🌿➖पर पढ़ जाती हैं
बेटियां..

🌿➖मेहनत करते हैं बेटे..
🌿➖पर अव्वल आती हैं
बेटियां..

🌿➖रुलाते हैं जब खूब बेटे.
🌿➖तब हंसाती हैं बेटियां.

🌿➖नाम करें न करें बेटे..
🌿➖पर नाम कमाती हैं
बेटियां..

🌿➖जब दर्द देते हैं बेटे...
🌿➖तब मरहम लगाती
हैं बेटियां..

🌿➖छोड़ जाते हैं जब बेटे..
🌿➖तो काम आती हैं
बेटियां..

🌿➖आशा रहती है बेटों से.
🌿➖पर पूर्ण करती हैं
बेटियां..

🌿➖हजारों फरमाइश से
भरे हैं बेटे....
🌿➖पर समय की नज़ाकत
को समझती बेटियां..
🌿➖बेटी को चांद जैसा
मत बनाओ कि हर
कोई घूर घूर कर देखे..

📍लेकिन📍
-----------------------
🌿➖बेटी को सूरज जैसा
बनाओ ताकि घूरने से
पहले सब की नजर झुक
जाये..🌞🌞

🏮Happy••
🏮Daughters••
🏮Week••

✔==Send it to Your
➖Sister•
➖Friends•
➖Daughter•
➖Wife•
-&
➖ Mother•
🚥दोस्तो इस खूबसूरत मैसेज
को अपने सभी मित्रो से
शेयर जरुर किजीये..

for all beautiful daughters 😘😘😘

18/07/2018

🔔🔔🔔
दादी मां, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!

सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
बरगद पूजो,
पीपल पूजो,
आँवला पूजो,
महुआ पूजो।

मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं? हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।

अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।

सत्यानाश... ये हरे छिलके कूड़े में किसने डाले, नरक में भी जगह नहीं मिलेगी........

माफ़ करना दादी माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।
😩😩😩😩

17/07/2018

जितना तुम लोग Facebook चलाते हो उतनी यदि बस चलाते तो...आज हीरा ठाकुर जैसै 'ट्रेवल कंपनी' के मालिक बन गए होते😄😀😂😂😐

सूर्यवंसम😝😝😝

16/07/2018

यू०पी० में हर परीक्षा में आठ चरण हो गयें हैं –
1 - प्री
2 - मेन
3 - इंटरव्यू
4 - धरना
5 - लाठीचार्ज
6 - हाईकोर्ट
7 - सुप्रीमकोर्ट
8 - फिर CBI जांच
के बाद ही नियुक्तियाँ की जायेंगी
पढ़ेगा युवा/लड़ेगा युवा
फिर ...
बचेगा तो/नौकरी करेगा युवा

28/06/2018
28/06/2018

*ये हमारे तन रूपी गाड़ी के पुर्जे हैं जिनको भी डर लगता है।*

*किडनी* को डर लगता है जब आप रात रात भर जागते हो।

*पेट* को अति ठंडे भोजन से डर लगता है।

*फेफड़ों* को धुंवे से डर लगता है।

*लिवर* को गरिष्ठ भोजन से डर लगता है।

*हॄदय* को अधिक नमक वाले भोजन से डर लगता है।

*पेनक्रियाज* को अधिक भोजन खाने पर डर लगता है।

*आंतों को* मांसाहारी भोजन से डर लगता है।

*आंखों* को मोबाइल और कंप्यूटर के स्क्रीन की लाइट से डर लगता है।

*गाल ब्लेडर* को सुबह का नाश्ता नहीं करने पर डर लगता है।

*इसलिए आप अपना और अपने तन रूपी इन कलपुर्जों का पूरा पूरा ख्याल रखें क्योंकि इन कलपुर्जों के कुछ वैकल्पिक पुर्जे बाजार में उपलब्ध नहीं हैं और जो मुश्किल से उपलब्ध हैं वे बहुत महंगे हैं और शायद आपके शरीर में फिट ना हो सकें। उसके बाद आपकी शरीर रूपी गाड़ी कैसे चलेगी, इसके बारे में खुद ही विचार करें।*

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