Smile Multi Speciality Dental Clinic

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अकल दाड उन दाँतो का नाम है जो आख़िर में निकलते है। अधिकतर लोगों की चार अकल दाड होती है- मुँह के हर कोने में एक। यह ज़्या...
08/08/2021

अकल दाड उन दाँतो का नाम है जो आख़िर में निकलते है। अधिकतर लोगों की चार अकल दाड होती है- मुँह के हर कोने में एक। यह ज़्यादातर जवानी में निकलते है।

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15/02/2018

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रूट कैनाल ट्रीटमेंट:-दांत के संक्रमण के लिए रूट कैनाल सबसे सही इलाज है। दंत चिकित्सा विज्ञान का प्रयास होता है प्राकृतिक...
09/02/2018

रूट कैनाल ट्रीटमेंट:-

दांत के संक्रमण के लिए रूट कैनाल सबसे सही इलाज है। दंत चिकित्सा विज्ञान का प्रयास होता है प्राकृतिक दांतों को जहां तक संभव हो सुरक्षित रखा जाए। पहले दांतों में कीड़ा लगने पर धातुओं से उन्हें भरा जाता था या फिर बहुत खराब हो जाने पर दांत को ही निकाल दिया जाता था। लेकिन अब कीड़ा लगे दांतों को बचाने में रूट कैनाल ट्रीटमेंट बहुत कारगर इलाज के रूप सामने आया है।

रूट कैनाल एक ऐसा इलाज है जसमें क्षतिग्रस्त या संक्रमित दांत को निकालने के जगह उसकी मरम्मत की जाती है। शब्द रूट कैनाल दांत की जड़ के अंदर की कैनाल्स (canals) की सफाई से आता है। दशकों पहले, रूट कैनाल उपचार अक्सर दर्दनाक होता था। लेकिन अब नई तकनीक और लोकल एनेस्थेटिक्स की मदद से लोगों को दर्द कम ही होता है।

पल्प में सूजन के कारण व इसके लक्षण :-

दांतों में कीड़ा लगना (डीप केविटी), चोट लगना, दांत की सतह का बहुत अधिक घिस जाने आदि के कारण पल्प में सूजन या संक्रमण होता है। इसके लक्षणों में दांतों में असहनीय दर्द, ठंडा या गर्म खाने पर दर्द होना, सोते समय दांत में दर्द होना, दांत के कारण कान या सर में दर्द तथा मसूड़ों में सूजन एवं मवाद निकलना आदि शामिल होते हैं।

इलाज:-

शुरुआती अवस्था में इलाज कराने पर एक अथवा दो सिटिंग में ही इलाज पूरा किया जा सकता है। अमूमन पहली सिटिंग में ट्रीटमेंट का समय 30 से 40 मिनट तक लग सकता है। लेकिन यदि किसी लापरवाह के चलते वहां संक्रमण हो जाए तो 4 से 5 सिटिंग और लग सकती हैं।

रूट केनाल उपचार के बाद दांत कितने समय तक टिकेगा:-

यदि दांतों का उचित ख्याल रखा जाए तो रूट कैनाल उपचार के बाद दांत जीवन भर साथ दे सकता है। लेकिन रूट केनाल उपचार के बाद भी आपके दांत में सड़न हो सकती है या छेद भी हो सकता है। तो यदि आप अपने दांत की उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो उनकी उचित देखभाल और मौखिक स्वच्छता रखनी होगी। फ्लोराइड युक्त टूथ पेस्ट रोजाना दो बार ब्रश और फ्लोस अवश्य करें। साथ हीं साथ नियमित रूप से अपने दांतों का चेकअप एवं उसकी सफाई करवाएं।

इलाज के दौरान एवं बाद की सावधानियां:-

यदि रूट केनाल उपचार का सही लाभ लेना चाहते हैं तो सबसे जरूरी बात की उपचार अधूरा नहीं छोड़ें, चिकित्सक द्वारा दिए गए समय पर अवश्य जाएं (टलाएं नहीं), चिकित्सक की सलाह के अनुसार फिलिंग या कैप अवश्य लगवाएं और साफ साफाई का पूरा ध्यान रखें। यदि चिकित्सक द्वारा कोई एंटिबायोटिक दवा दी गई है तो बताए गये समय तक उसे लें।

क्या है पायरिया! दांतों की साफ सफाई में कमी होने से जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों ...
06/02/2018

क्या है पायरिया!

दांतों की साफ सफाई में कमी होने से जो बीमारी सबसे जल्दी होती है वो है पायरिया। सांसों की बदबू, मसूड़ों में खून और दूसरी तरह की कई परेशानियां। जाड़े के मौसम में पायरिया की वजह से ठंडा पानी पीना मुहाल हो जाता है। पानी ही क्यों कभी-कभी तो हवा भी दांतों को सिहरा देता है।

असल में मुंह में 700 किस्म के बैक्टीरिया होते हैं। इनकी संख्या करोड़ों में होती है। अगर समय पर मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई नहीं की जाए तो ये बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। पायरिया होने पर दांतों को सपोर्ट करने वाले जॉ बोन को नुकसान पहुंचता है।

पायरिया का इलाज मुमकिन

पायरिया के बारे में एक गलत धारणा ये है कि इसका इलाज मुमकिन नहीं जबकि हकीकत ये है कि इसका इलाज मुमकिन है। पायरिया की वजह से हिलते दांतों को भी पक्का किया जा सकता है। अच्छी तरह से मुंह, दांत और जीभ की साफ-सफाई से ये बीमारी दूर हो सकती है। मसूड़ों को अगर ज्यादा नुकसान पहुंचा हो तो सर्जरी के जरिए उसे भी ठीक किया जा सकता है। अगर मसूड़ों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच गया हो और दांत मसूड़ों से निकलने के करीब हों तो डेंटल इम्प्लांट के जरिए फिर से दांत लगाए जा सकते हैं।

अच्छे दांत सेहत और सुंदरता की निशानी होती है। इसलिए अपने दांतों का ख्याल जरूर रखें।।।।।

हमारे दाँतों की बाहरी परत बहुत ही सख़्त होती है  ।  परन्तु पीछे के दांतों की इस सतह में बहुत से जोड़ होते हैं  ।  जहाँ खा...
05/02/2018

हमारे दाँतों की बाहरी परत बहुत ही सख़्त होती है । परन्तु पीछे के दांतों की इस सतह में बहुत से जोड़ होते हैं । जहाँ खाने के फंस जाने से वहां कीटाणुओं का जमाव हो जाता है । ये कीटाणु एक अम्ल का स्राव कर इस सतह को नरम बना देते हैं । जिससे दांतों में खड्डे हो जाते हैं । जिन्हे दन्त चिकत्सक दांत में भरे जा सकने वाले मसाले से भर कर पुन : ठीक कर देता है । जैसे चांदी भरना, दांत के रंग का पदार्थ भरना ।

गुटका खाने से उनसे होने वाली बीमारियां:-अक्सर आपने देखा होगा कि लोगतंबाकू-गुटका खाते रहते हैं इन्हें एक तरह से एडिक्शन ह...
03/02/2018

गुटका खाने से उनसे होने वाली बीमारियां:-अक्सर आपने देखा होगा कि लोगतंबाकू-गुटका खाते रहते हैं इन्हें एक तरह से एडिक्शन हो जाता है और ये इसके बिना नहीं रह सकते.तंबाकू-गुटका खाने से बॉडी में कई तरह की बीमारियां होती हैं यहां तक कि कैंसर जैसी भयंकर बीमारी भी इससे हो सकती है.तंबाकू-गुटका में न सिर्फ तंबाकू के पत्ते होते हैं इसमें कुछ केमिकल्स भी मिलाए जाते हैं जो बीमारियां होने में एक तरह से सहयोग देते हैं.तंबाकू-गुटका खाने का एक असर जो हर किसी को दिखाई देता है वो है दांतों का सड़ना, जो भी रोज तंबाकू-गुटका खाता है उसके दांतों पर धीरे-धीरे दाग आने लगते हैं और धीरे-धीरे ये काले भी होने लगते हैं, ये दाग आपको बदसूरत तो बनाते ही हैं साथ में ये रोग भी फैलाते हैं और जल्द ही दांतों की बीमारियां भी होने लगती हैं. तंबाकू-गुटका खाने वालों के दांत जाते हैं और इन पर काले दाग पड़ जाते हैं, ये दाग निकालने मुश्किल होता है ऐसा कुछ होने पर अपने नजदीकी दंत विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करें।

डेंटल ब्रिजेज में किसी व्‍यक्ति के मिसिंग दांत की जगह एक नया नकली दांत लगा दिया जाता है। यह दांत बिलकुल असली सरीखा ही का...
02/02/2018

डेंटल ब्रिजेज में किसी व्‍यक्ति के मिसिंग दांत की जगह एक नया नकली दांत लगा दिया जाता है। यह दांत बिलकुल असली सरीखा ही काम करता है। यह दांत खाने, बोलने आदि सब काम करता है। इसके लिए खाली जगह के करीब के दांतों को ग्राइंड कर नए दांत के लिए सपोर्ट तैयार किया जाता है। पहले लोग सोने के दांत लगवाते थे, लेकिन अब नयी तकनीक के दांत आ गए हैं। अगर दांत न हों तो आसपास के दांत भी खराब हो सकते हैं।

01/02/2018

जिन्जेवाईटिस मसूड़े की सूजन के लिए प्रयोग की जाने वाली मेडिकल टर्म है। Gingivitis is inflammation of the gums। यह एक पेरिओडोंटल periodontal रोग है। पेरिओडोंटल रोग में उन ऊतकों / टिशु, में सूजन और संक्रमण हो जाता है जो की दांत को सपोर्ट करते हैं। यह ऊतक पेरिओडेंटल लिगामेंट, टूथ सोकेट या गम हो सकते है। जिन्जेवाईटिस के लक्षणों में शामिल है मसूड़ों से खून आना, मसूड़ों का सूज जाना-फूल जाना, दर्द होना, मुंह में छाले हो जाना आदि।

पर्याय: Gum disease, Periodontal disease

जिंजीवाइटिस किन कारणों से हो सकता है?

जिंजीवाइटिस मसूड़ों की समस्या है और मसूड़ों में कोई भी इन्फेक्शन इसका कारण हो सकता है।

दांतों में जमने वाला प्लाक इसका मुख्य कारण है। प्लाक एक चिपचिपा सा पदार्थ है जो की दांतों में जम जाता है। यह बैक्टीरिया, म्यूकस, और खाने से बना हुआ होता है। प्लाक यदि साफ़ नहीं होता तो यह टार्टर बन जाता है और दांतों में जम जाता है। दांतों में नीचे जमा हुआ टार्टर मसूड़ों में सूजन पैदा करता है। यही मसूड़ों में होने वाली सूजन मेडिकल भाषा में जिंजीवाइटिस कहलाती है।

जिंजीवाइटिस खतरे को बढ़ाने वाली कुछ अन्य स्थितियां है:

दांतों का टेढ़ा मेढ़ा होना
दांतों में डेन्चर, ब्रेसेस लगा होना, क्राउन ठीक से लगा होना
दांतों की सफाई ठीक से न करना
शरीर में कुछ तरह के इन्फेक्शन
गर्भावस्था
अनियंत्रित डायबिटीज
कुछ दवाओं का सेवन जैसे गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन आदि।
जिंजीवाइटिस के क्या लक्षण हैं?

मसूड़ों से खून आना
मसूड़ों का रेड – परपल हो जाना
मसूड़ों को छूने पर उनमें दर्द होना
महू में छाले हो जाना
मसूड़ों का चमकना
जिंजीवाइटिस की जांच कैसे होती है?

जिंजीवाइटिस की जांच के लिए डेंटिस्ट मुंह की जांच करते हैं। देख कर और मसूड़ों के लाल-फूले-सूजन वाले होने से जिंजीवाइटिस होने की सम्भावना होती है। दांतों के नीचे प्लाक देखा जा सकता है।

डेंटल एक्स रे द्वारा दांतों में किसी भी दिक्कत न होने को कंफ़र्म करते हैं।

जिंजीवाइटिस का इलाज़

जिंजीवाइटिस में मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए पेस्ट का प्रयोग कर सकते हैं।
डेंटिस्ट दांतों की सफाई की भी सलाह भी देते है।
गर्म पानी में नमक घुला कर मुंह में कुछ देर रखकर फिर कुल्ला करते हैं।
जिंजीवाइटिस के लिए लाभप्रद पेस्ट/लिक्विड

GUM-TONE Charak
HIORA TOOTHPASTE Himalaya
GELORA Reckitt Benckiser
KAMILLOSAN LIQD Zydus (G Rem)
जिंजीवाइटिस को कैसे रोकें?

मुंह को अच्छे से साफ़ करें।
दिन में दो बार ब्रश करें।
फ्लोसिंग करें।
प्लाक न जमने दें।
एंटीप्लाक और एंटीटार्टर टूथपेस्ट का प्रयोग करें।
साल में दो बार डेंटिस्ट से टीथ क्लीनिंग कराएं।

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Biswan

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