07/02/2026
Pitta Dosha - पित्त दोष बढ़ने के 5 लक्षण और उसे शांत करने की 5 प्रभावी चिकित्सा
आपको कैसे पता चले कि आपके शरीर में पित्त दोष बढ़ा हुआ है , पित्त बढ़ने पर दिखाई देने वाले 5 प्रमुख लक्षण और पित्त को शांत करने के लिए 5 प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय
पित्त दोष क्या है?
आयुर्वेद में पित्त के गुण बताए गए हैं —
“पित्तं सस्नेहं लघु विश्रं सरं द्रवं”
पित्त शरीर में स्वाभाविक रूप से बहुत आवश्यक है, क्योंकि:
पाचन क्रिया
मेटाबॉलिज्म
सेलुलर लेवल पर ऊर्जा निर्माण
ये सभी क्रियाएं पित्त के कारण ही सही ढंग से होती हैं।
लेकिन जब यही पित्त अपनी सीमा से अधिक बढ़ जाता है, तब यह विकृत होकर शरीर में कई तरह की तकलीफें पैदा करता है।
पित्त दोष बढ़ने के 5 प्रमुख लक्षण
1. शरीर में अत्यधिक गर्मी और जलन
अंदर से बहुत ज्यादा गर्मी महसूस होना
शरीर का तापमान बढ़ा हुआ लगना
त्वचा, आंखों, हथेलियों और तलवों में जलन
अत्यधिक पसीना और पसीने की दुर्गंध
त्वचा और बालों से जुड़ी समस्याएं
मुंहासे, फोड़े-फुंसी
एलर्जी, अर्टिकेरिया
धूप में जाने पर त्वचा का लाल हो जाना
बालों का जल्दी सफेद होना
हेयर फॉल और बालों का पतला होना
2. पाचन से जुड़ी समस्याएं
पित्त प्रकृति वालों में तीक्ष्ण अग्नि होती है।
बहुत ज्यादा भूख लगना
मसालेदार या तली हुई चीज खाने पर:
सीने में जलन
खट्टा पानी
जी मिचलाना
बार-बार प्यास लगना
मुंह सूखना
पानी पीने के बाद भी प्यास न बुझना
रक्त और हार्मोनल समस्याएं
3. महिलाओं में:
बहुत अधिक मासिक स्राव
पीरियड्स लंबे चलना
जल्दी-जल्दी पीरियड आना
4. रक्त पित्त विकार:
बवासीर से खून
नाक से खून आना (एपिस्टैक्सिस)
आयुर्वेद में बताया गया है कि पित्त और रक्त का आश्रय–आश्रयी संबंध होता है, इसलिए पित्त बढ़ने पर रक्त भी दुष्ट होता है।
5. मानसिक लक्षण
बहुत जल्दी गुस्सा आना
चिड़चिड़ापन
छोटी-छोटी बातों पर इरिटेशन
बेचैनी और असहजता
पित्त दोष को शांत करने के 5 प्रभावी उपाय
1. निदान परिवर्तन (कारणों से दूरी)
इन चीजों से परहेज करें:
बहुत मसालेदार भोजन
तली हुई चीजें
फर्मेंटेड फूड (इडली, डोसा, ढोकला)
जंक फूड
कोल्ड ड्रिंक्स
चाय-कॉफी का अधिक सेवन
भोजन समय पर करें, न भूखे रहें, न जबरदस्ती खाएं।
उपवास और रात को देर तक जागना अवॉइड करें।
2. तनाव कम करें
स्ट्रेस और एंग्जायटी पित्त को बहुत बढ़ाते हैं
प्राणायाम
ओंकार जप
ध्यान (Meditation)
पूरी नींद
कई बार अच्छी डाइट के बावजूद सिर्फ तनाव की वजह से पित्त बढ़ता है।
3. पित्त शमन करने वाले आहार
शुद्ध देसी गाय का घी (2–3 चम्मच रोज़)
घर का बना सफेद मक्खन + मिश्री
काली मुनक्का (8–10 रात को भिगोकर सुबह चबाकर खाएं)
आंवला मुरब्बा या कैंडी
गुलकंद
4. पित्त शमन करने वाले स्वाद
आयुर्वेद के 6 रस में से:
मधुर (मीठा)
तिक्त (कड़वा)
कषाय (कसैला)
ये तीन स्वाद पित्त को कम करते हैं।
पित्त बढ़ाने वाले स्वाद:
तीखा
बहुत खट्टा
अधिक नमकीन
5. सुरक्षित आयुर्वेदिक औषधियां
(घर पर ली जा सकने वाली)
मुलेठी चूर्ण
½–1 चम्मच
दिन में 1–2 बार
भोजन से पहले
शतावरी चूर्ण / कल्प
½–1 चम्मच
दिन में 2 बार
दूध के साथ या बिना दूध
यदि पित्त बहुत अधिक बढ़ा हो, तो नजदीकी आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
पंचकर्म चिकित्सा (गंभीर अवस्था में)
पित्त के लिए विरेचन चिकित्सा सर्वोत्तम मानी गई है
विशेष रूप से शरद ऋतु (सितंबर–अक्टूबर) में
घर पर माइल्ड विरेचन:
20–30 ml एरण्ड तेल
सुबह खाली पेट
महीने में 1 बार (डॉक्टर की सलाह से)
पूर्ण पंचकर्म केवल चिकित्सक की देखरेख में ही करें।
बढ़े हुए पित्त दोष को शांत करने के 3 सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपाय
उपाय 1: सफेद पेठे का रस (Ash Gourd Juice)
संस्कृत में सफेद पेठे को कुष्मांड कहा जाता है।
वाग्भट ऋषि कहते हैं:
“वल्ली फलानां प्रवरः कुष्माण्डः वात-पित्तजित्”
अर्थात बेल पर उगने वाले फलों में कुष्मांड वात और पित्त को शांत करने में श्रेष्ठ है।
गुणधर्म:
हल्का (लघु)
स्निग्ध
शीतल तासीर
मधुर रस
मेध्य (बुद्धि और मन को शांत करने वाला)
यह:
पित्त और वात दोनों को संतुलित करता है
दिमाग, नींद, हृदय, किडनी और ब्रेन के लिए लाभकारी है
सेवन विधि:
छिलका हटाकर छोटे टुकड़े करें
कद्दूकस या मिक्सर में पीसें
सूती कपड़े से छानकर रस निकालें
मात्रा:
60–120 ml (प्रकृति और समस्या के अनुसार)
विशेष रूप से ग्रीष्म और शरद ऋतु में अत्यंत लाभकारी
8–10 दिन लें, फिर थोड़ा गैप देकर दोबारा लिया जा सकता है
उपाय 2: सब्जा सीड्स (Sweet Basil Seeds)
संस्कृत नाम: खरपुष्पा / वन तुलसी
लैटिन नाम: Ocimum basilicum
ध्यान दें:
सब्जा सीड्स और चिया सीड्स अलग-अलग हैं
सब्जा सीड्स भारतीय मूल के हैं और हमारे शरीर के लिए अधिक अनुकूल हैं।
गुणधर्म:
स्निग्ध
शीतल तासीर
मधुर रस
वात-पित्त शमन
लाभ:
शरीर को ठंडक
एसिडिटी और जलन में राहत
एनर्जी बढ़ाता है
डाइजेशन, स्किन और हेयर हेल्थ में सुधार
स्ट्रेस कम करता है
सेवन विधि:
1–1.5 चम्मच सब्जा सीड्स
अच्छे से धोकर पानी में भिगो दें
20–30 मिनट में फूल जाते हैं
मिट्टी के बर्तन में भिगोना और भी लाभकारी
कैसे लें:
नींबू शरबत
कोकम शरबत
आंवला शरबत
नींबू शरबत में:
पानी
धागे वाली मिश्री
नींबू रस
सेंधा नमक
भुना जीरा
1 चम्मच फूले हुए सब्जा सीड्स
चाहें तो पुदीना
आपने सब्जा सीड्स किस रूप में लिए हैं?
कमेंट में जरूर बताइए।
उपाय 3: गोंद कतीरा
गोंद और गोंद कतीरा अलग होते हैं
गोंद: Acacia arabica (बबूल का गोंद)
गोंद कतीरा: Astragalus gummifer
गोंद कतीरा पानी में भिगोने पर कई गुना फूल जाता है और जेली जैसा बनता है।
भावप्रकाश निघंटु में गुण:
शीतल
दाह शमन
रक्त स्तंभक
मृदु सारक (माइल्ड लैक्सेटिव)
लाभ:
आंख, त्वचा, यूरिन की जलन कम करता है
अत्यधिक ब्लीडिंग में सहायक
पाइल्स, नाक से खून
पेट साफ करता है
लू, सनस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाव
सेवन विधि:
1 छोटा चम्मच गोंद कतीरा
4–5 घंटे या रात भर पानी में भिगो दें
½–1 चम्मच किसी शरबत में मिलाकर लें
Bottom Lineयदि आपके शरीर में पित्त दोष बढ़ा हुआ है, तो:
गर्मी और जलन के लक्षण दिखेंगे
पाचन और त्वचा की समस्याएं होंगी
गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ेगा
सही आहार, जीवनशैली और आयुर्वेदिक चिकित्सा से पित्त को संतुलित किया जा सकता है।