03/07/2025
गुड़ के गुण:-
गुड़ मल भेदक(पेट साफ रखने वाला), पचने में हल्का,पित्त और वात को कम करने वाला, मधुर(मीठा), पोषण करने वाला, रक्त संबंधित दोष को ठीक करने वाला होता है।
पुराना गुड़- वीर्य वर्धक, अग्नि जनक (पाचन शक्ति), पुष्टिकारक, पित्त नाशक, मधुर, रक्त शोधक होता है।
नवीन (नया) गुड़-कफ, दमा रोग, खाँसी, तथा शरीर/पेट मे कीड़े उत्पन्न करने वाला तथा पाचन शक्ति को बढ़ाने वाला होता है।
●यदि गुड़ को अदरक के साथ प्रयोग किया जाए कफ को शीघ्र ही नष्ट करता है।
●यदि गुड़ को हरीतकी(हरड़) के साथ प्रयोग में लिया जाय तो पित्त दोष की समस्या को दूर करता है।
●यदि गुड़ को सोंठ के साथ प्रयोग किया जाए तो सभी वात विकार नष्ट होते हैं।
रोगानुसार गुड़ का प्रयोग-
◆दमा होने पर 3 ग्राम से 12 ग्राम की मात्रा में गुड़ और इसी के बराबर मात्रा में सरसों का तेल लेकर 21 दिनों तक रोज खाएं
◆अग्निमांद्य(अपच) में गुड़ के साथ जीरा मिलाकर प्रयोग करने से पाचन ठीक होता है।
◆ठण्डी के मौसम में सर्दी लगने से बचने के लिए काले तिल और गुड़ का लड्डू खाना चाहिए।
◆कब्ज में 5-8 ग्राम गुड़ के साथ 4-5 ग्राम हरीतकी(हरड़) का प्रयोग सुबह और रात भोजन के पहले करें।
◆पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमे पिसी हुई सोंठ मिलाकर सूंघने से हिचकी आना बन्द हो जाती है।
◆पुराना सूखा गुड़ पीसकर इसमे पिसी हुई सोंठ मिलाकर गोली बना लें और इसी गोली को चूसते रहें तो भी हिचकी बन्द हो जाएगी।
◆पेशाब साफ न होने पर गरम दूध में गुड़ मिलाकर पीने से पेशाब सही से होने लगती है।
गुड़ खाने के नुकसान -
●गुड़ का अधिक मात्रा में सेवन करना पित्त प्रकृति के व्यक्तियों के लिए बहुत हानिकारक होता है।
●बसंत ऋतु में गुड़ नहीं खाना चाहिए।
●पित्त प्रकृति के व्यक्तियों को नया गुड़ नहीं खाना चाहिए।
ये सभी प्रयोग अनुभव और ग्रंथों के आधार पर बताये गए हैं, इनका प्रयोग करने से पहले वैद्यकीय सलाह अवश्य लें ।
वैद्य आनन्द पाण्डेय
गंगा आयुर्वेदिक चिकित्सालय व पंचकर्म चिकित्सा केंद्र
सारनाथ, वाराणसी, 221007
संपर्क सूत्र-9415687743
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