Yog Bharati

Yog Bharati Yoga, meditation and holistic health guidance for inner growth, wellbeing and conscious living — by Acharya B. S. ‘Yogi’ Team.

11/01/2026

आकाश मुद्रा —
कान के रोग, बधिरता, हड्डियों की कमजोरी Osteoporosis के लिए
एक सरल व प्रभावी योगाभ्यास।

#आकाशमुद्रा #योग #स्वास्थ्य #योगाभ्यास

05/01/2026

वायु मुद्रा -- संधिवात, जोड़ों के दर्द, जकड़न, साइटिका व कम्पवात में लाभप्रद योगाभ्यास।

#वायुमुद्रा #वातदोष
#योगाभ्यास

01/01/2026

ज्ञान मुद्रा: स्मरण शक्ति एकाग्रता व आंतरिक स्पष्टता बढ़ाने का सरल और प्रभावी उपाय।

#ज्ञानमुद्रा
#स्मरणशक्ति
#एकाग्रता
#आंतरिक_स्पष्टता

#योग

24/12/2025

आंतरिक स्पष्टता की कुंजी: मौन

#आंतरिक_स्पष्टता #मौन #योगविचार

21/12/2025

#लिंगमुद्रा #योग #आयुर्वेदसेउपचार #नेचुरोपैथी

15/12/2025

अर्जुन तो श्रीकृष्ण की हर बात वैसे ही मानता था, फिर योगेश्वर कृष्ण को इतना विस्तृत और गहन गीता उपदेश क्यों देना पड़ा? इस छंद में इसका उत्तर देने का प्रयास किया गया है।

अंधकार दूर नहीं होता यदि चित्त का तो,
होता कैसे प्रकटीकरण पुरुषार्थ का।
संशय सुरा से उन्मत्त मोहग्रस्त चित्त,
करता प्रशस्त कैसे पथ परमार्थ का।
भेद कैसे मिलता सकाम - निष्काम कर्म,
और निज धर्म के अगम्य निहितार्थ का।
उपदेश गीता का न दिया होता हरि ने तो,
होता कैसे दूर द्वंद व विषाद पार्थ का।

🙏 आचार्य बी एस 'योगी'

#गीता #भगवद्गीता #गीतातत्व #कर्मयोग #हिन्दीकविता
#आध्यात्मिककविता

07/12/2025

#योग_एक_सामाजिक_अनिवार्यता

योग आज मानव चेतना के वैश्विक विज्ञान के रूप में प्रतिष्ठित और स्थापित हो चुका है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों द्वारा आत्मोपलब्धि अथवा भगवत्प्राप्ति के लिए आविष्कृत 'योग विद्या' को वर्तमान समय में चिकित्सा विज्ञान के श्रेष्ठ विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। यूँ तो योग शब्द का सामान्य अर्थ जोड़ या मिलन होता है लेकिन योग दर्शन में चित्त की वृत्तियों के निरोध अर्थात समाधि को 'योग' कहा गया है। इस प्रकार यम-नियमादि योगांगो पर आरुढ़ होकर समाधि को प्राप्त करना, और समाधि की उच्च अवस्था में स्थित होकर आत्मदर्शनपूर्वक स्वरूपावस्था की उपलब्धि ही योग है। आत्मज्ञान या भगवत्प्राप्ति की साधना हेतु शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य, निश्चयात्मक बुद्धि, दृढ़ संकल्प शक्ति, और अक्षय प्राण ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसके बिना कोई साधक साधना के मार्ग में एक कदम भी नहीं चल सकता। इन्ही आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सिद्ध संतो, योगियों व ऋषि-मुनियों ने विविध प्रकार के आसन-प्राणायाम, बन्ध-मुद्रा व यौगिक षट्कर्म आदि का आविष्कार किया था। आज कल इन्ही क्रियाओं का चिकित्सा के क्षेत्र में सफलता पूर्वक प्रयोग और उपयोग किया जा रहा है। इसके आश्चर्यजनक और चमत्कारिक परिणाम भी देखे जा रहे हैं। #योग भारत सरकार (आयुष) द्वारा एक मान्य चिकित्सा पद्धति है।

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता है, और यदि मन स्वस्थ न हो तो शरीर भी स्वस्थ नहीं रह सकता। योग चिकित्सा की दृष्टि में अधिकांश शारीरिक बीमारियां भी मन से ही आती हैं। अधिकर रोग मनोकाइक (साइकोसेमेटिक) होते हैं और इन पर औषधियों का कोई विशेष या स्थाई प्रभाव नहीं पड़ता। अब यह बात भी लोगों की समझ में आने लगी है कि केवल औषधियों के बल पर ही अच्छा स्वास्थ्य नहीं प्राप्त किया जा सकता। समग्र स्वास्थ्य संवर्धन हेतु सभी आयुवर्ग के लिए योगाभ्यास आवश्यक है। आसन प्राणायाम आदि का नियमित अभ्यास हमें अनेक शारीरिक मानसिक बीमारियों मुक्ति दिलाता है, व्यक्ति की कार्यक्षमता व कार्यकुशलता में वृद्धि करता है। चाहे विद्यार्थी हों या शिक्षक, नौकरी करने वाले लोग हों या व्यवसायी, किसान हों या बेरोजगार, नेता हों या अभिनेता, स्वास्थ्य और प्रसन्नता सभी को चाहिए, सुख और शांति सभी को चाहिए। इसलिए वर्तमान समय में योगाभ्यास सभी के लिए आवश्यक है, अनिवार्य है। योग साधना केवल रोगों से मुक्ति ही नहीं दिलाती बल्कि व्यक्ति में सकारात्मकता, समरस्वता, तेजस्विता, ओजस्विता, बुद्धिमत्ता, सरलता, व विवेकशीलता की भी वृद्धि कराती है। संभवतः इन्ही सब कारणों से हमारे पूज्य गुरुदेव परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती कहते थे कि योग वर्तमान की आवश्यकता और भविष्य की संस्कृति है।

सामान्य धारणा के विपरीत योगाभ्यास के लिए किसी खास समय, स्थान व खान-पान आदि की कोई खास बाध्यता नहीं होती। इसका निर्धारण अभ्यास करने वाले व्यक्ति की क्षमता, सुविधा, रुचि और आवश्यकता के अनुसार करना होता है। कोई एक नियम या दिनचर्या सभी के लिए अनुकूल नहीं हो सकती। योगाभ्यास हेतु बहुत समय की भी आवश्यकता नहीं, सामान्यतया आधा से एक घण्टा पर्याप्त होता। यदि आप के पास समय का अभाव है तो मात्र १५ मिनट में भी योगाभ्यास कर सकते हैं। बिल्कुल न करने की तुलना में कम करना भी श्रेस्यकर व लाभदायक है। हाँ एक बात का अवश्य ध्यान रखें कि अधूरा ज्ञान कभी-कभी अज्ञान से अधिक घातक सिद्ध होता है। इसलिए केवल किताबें पढ़कर या टी.बी. देखकर अभ्यास न करें। इसके लिए किसी योग संस्थान में जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करें, अथवा किसी प्रशिक्षित व अनुभवी योगाचार्य का सहयोग लें। उससे विधिवत सीखें और उसी के मार्गदर्शन में अभ्यास करें।

योगाभ्यास में की जाने वाली क्रियाओं का उद्देश्य होता है सभी प्रकार की मनोकाइक बीमारियों को दूर कर सुडौल और सुंदर शरीर का निर्माण करना। इसके लिये विभिन्न प्रकार के आसन, प्राणायाम, बंध, मुद्रा, यौगिक षट्कर्म, व ध्यान आदि का अभ्यास किया जाता है। दुनिया भर में अनेकों लोग योग साधना द्वारा विविध प्रकार से लाभान्वित हो रहे हैं। आप भी नियमित योगाभ्यास प्रारंभ करके स्वस्थ, प्रसन्न, प्रभावी, व तनाव मुक्त जीवन का आनन्द लें। हरि ॐ तत्सत्।

- आचार्य बी एस 'योगी' भाग्यनगर (हैदराबाद) तेलंगाना

आनेक लोगों की यह स्थापित मान्यता है कि जिन्होंने प्रर्याप्त पूर्व तैयारी द्वारा स्वयं को निपुण कर लिया है, केवल वे ही आं...
07/12/2025

आनेक लोगों की यह स्थापित मान्यता है कि जिन्होंने प्रर्याप्त पूर्व तैयारी द्वारा स्वयं को निपुण कर लिया है, केवल वे ही आंतरिक अनुभव का लाभ प्राप्त कर सकते हैं; परंतु, योग का मत है कि आंतरिक अनुभव की उपलब्धि प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, भले ही वह पूर्ण, अपूर्ण, आस्तिक, नास्तिक अथवा निम्न कुल में ही क्यों न उत्पन्न हुआ हो। इसीलिए योग की अनेक युक्तियों का आविष्कार हुआ था।
-परमहंस स्वामी सत्यानंद सरस्वती

06/12/2025

गीता में वेद, उपनिषद, आगम–निगम और पुराण—सभी ज्ञाननिधियों का सार तत्त्व समाहित है। दुनिया के सारे धर्मग्रंथ ईश्वर के चर्चा करते हैं, ईश्वर के बारे में बात करते हैं लेकिन साक्षात परमात्मा की ही वाणी है, जो अविद्या को हरकर चेतना की ज्योति प्रज्वलित करती है। स्वविवेक, सद्ज्ञान, समत्व और धर्म का पथ दिखाने वाला यह दिव्य उपदेश, सभी साधकों के लिए सरल, सुगम और कल्याणकारी है।

सुप्रसिद्ध योग विशेषज्ञ, लेखक व कवि आचार्य बी एस ‘योगी’
द्वारा रचित इस छंद में गीता के तत्त्व, महत्व और आध्यात्मिक गरिमा को काव्य मय रूप में व्यक्त किया गया है।

#गीता
#भगवद्गीता






29/10/2025

Yoga Outreach Programme ARK Homes Machabolaram Secunderabad Telangana

एक नवंबर से ऑनलाइन योग सत्र का नया बैच प्रारंभ हो रहा है। पिछले सत्रों की तरह इसमें भी आसन, प्राणायाम, योगनिद्रा, मंत्र ...
27/10/2025

एक नवंबर से ऑनलाइन योग सत्र का नया बैच प्रारंभ हो रहा है। पिछले सत्रों की तरह इसमें भी आसन, प्राणायाम, योगनिद्रा, मंत्र साधना और ध्यान — सभी का संतुलित अभ्यास रहेगा।

हमारे आनलाइन क्लास में 25 से अधिक सदस्य नहीं रखे जाते ताकि सभी पर ध्यान दिया जा सके और क्लास टीवी प्रोग्राम की तरह एकतरफा न हो।

हम संख्यात्मक नहीं गुणात्मक वृद्धि में विश्वास रखते हैं इसलिए हमारे आनलाइन क्लास भी आफलाइन जैसे ही उपयोगी होते हैं

जो लोग स्वास्थ्य, ऊर्जा और नियमितता के साथ अपनी सुबह शुरू करना चाहते हैं,
वे इस बैच में जुड़ सकते हैं।

विवरण नीचे पोस्टर में दिया गया है।
हार्दिक स्वागत रहेगा।
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdvngw1a5KBsw_axNAV8wzKycSdV441ju0HRNcm_CVcyQUZsQ/viewform?usp=dialog

06/08/2025

वर्ष 2023 में विश्व योग बाज़ार की अनुमानित कीमत 107 अरब डॉलर रही, जो 2030 तक 200 अरब डॉलर को पार कर सकती है। अकेले भारत में यह उद्योग 5,600 करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच चुका है, और लाखों योग प्रशिक्षकों को इससे आजीविका मिल रही है। करोड़ों लोग योग के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह विस्तार योग की शक्ति और उपयोगिता को प्रमाणित करता है, परंतु इसके साथ यह चिंता भी बढ़ाती है कि व्यवसायिकता, प्रचार और प्रदर्शन की दौड़ में इस जीवन दर्शन की आत्मा कहीं खो तो नहीं जायेगी ?

योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य हेतु की जाने वाली कसरत या अट्रेक्टिव फिगर बनाने का माध्यम नहीं बल्कि आंतरिक ऊर्जा को नियंत्रित व समायोजित कर, मानव चेतना के ऊर्ध्वगमन का विज्ञान है। योग शरीर, मन, प्राण, विचार और भावना के समन्वय तथा जीवन के हर पक्ष में संतुलन स्थापित करने की कला है। पर यह दुखद सच है कि आज योग अपना मूल स्वरूप खोता जा रहा है।

आज कल योग को साधना के बजाय “ब्रांड” बनाने का दौर चल रहा है। बहुत से योग प्रशिक्षक और योग गुरु इस विद्या को सिर्फ कैरियर, व्यवसाय या प्रसिद्धि का जरिया मानते हैं। ये केवल पैसा कमाने के उद्देश्य से इस क्षेत्र में आ रहे हैं और अपने निजी लाभ को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

इस समय योग के क्षेत्र में आध्यात्मिकता की जगह सेल्फ-प्रमोशन, और ग्लैमर की प्रधानता दिखाई दे रही है। स्वयं को "अंतरराष्ट्रीय योग गुरु" या "योग सम्राट" कहने वाले कई लोग दिखावे और प्रचार में इतने उलझ गए हैं, कि उनके जीवन में योग के मूल गुण—सदाचार, संयम और साधना के लिए कोई स्थान ही नहीं बचा है। अनेक योग शिक्षक बाजारू व्यापारी जैसा व्यवहार करते हैं। उनके जीवन में कोई आध्यात्मिक गरिमा या ऊंचाई नहीं दिखाई देती। उनके व्यक्तित्व में प्रेम, उदारता, करुणा और सहृदयता की जगह लालच, स्वार्थ, अहंकार, तथा आडंबर की प्रधानता दिखती है।

🤔 योग या व्यापार?

बहुत से लोग संगठन बनाकर योग शिक्षकों के उत्थान व रोजगार के नाम पर गोलबंदी, राजनीतिक प्रभाव, और वित्तीय लाभ के प्रयास में लगे हैं। चाहे किसी विभाग में योग प्रशिक्षकों की भर्ती निकले या किसी सरकारी संस्थान में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाय उसका श्रेय यह लोग अपनी संस्था को ही देते हैं। इस बात को फैलाने का पूरा प्रयास करते हैं कि हमारे संगठन के संघर्षों और प्रयासों के कारण ही यह कार्य हुआ है। वह योग जो आत्म-नियंत्रण का मार्ग था, आज बाहरी दिखावे का माध्यम बनता जा रहा है।

😔 कहां गया योग का आध्यात्मिक सौंदर्य?

जैसे जैसे योग पर बाजार का शिकंजा कसता जा रहा है वैसे वैसे उसका आत्मिक सौन्दर्य भी क्षीण होता जा रहा है। योग स्टूडियो में शांति नहीं, केवल "कोर्स पैकेज" की बातें हो रही हैं। "शिक्षक और छात्र" का स्थान "कोच और क्लाइंट" लेने लगे हैं। योग में दर्शन से अधिक महत्व प्रदर्शन को तथा साधना से अधिक महत्व सेल्फी व सर्टिफिकेट को दिया जाने लगा है।

🔍 जरूरी है आत्मनिरीक्षण

हर योग साधक और शिक्षक को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए:

क्या मैं योग को जी रहा हूँ या सिर्फ दिखा रहा हूँ?

क्या मैं साधक हूँ या सेल्समैन?

क्या मेरा जीवन योग की गवाही देता है?

✨ समाधान क्या है?

✅ योग को पुनः आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में स्वीकार करना होगा।
✅ योगाचार्य को केवल शिक्षक नहीं, मार्गदर्शक और साधक बनना होगा।
✅ संगठन बनें—सेवा, साधना और मानवता के उत्थान के लिए, न कि सत्ता या लाभ के लिए।

🙏 योग की आत्मा को बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

योग केवल शरीर को मोड़ने की कला नहीं, आत्मा को जोड़ने की यात्रा है।
चलो, इस यात्रा को फिर से पवित्र बनाएं।

- आचार्य बी एस 'योगी'

Address

Yapral

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm

Telephone

+916394163581

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yog Bharati posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Yog Bharati:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram