01/11/2026
किस रोग में कौन सा रस लें.!
सेहत भी, निरोगी भी
■ भूख लगने के हेतुः
प्रातःकाल खाली पेट नींबू का पानी पियें। खाने से पहले अदरक का कचूमर सेंधा नमक के साथ लें।
■ रक्तशुद्धिः
नींबू, गाजर, गोभी, चुकन्दर, पालक, सेव, तुलसी, नीम और बेल के पत्तों का रस।
■ दमाः
लहसुन, अदरक, तुलसी, चुकन्दर, गोभी, गाजर, मीठी द्राक्ष का रस, भाजी का सूप अथवा मूँग का सूप और बकरी का शुद्ध दूध लाभदायक है।
घी, तेल, मक्खन वर्जित है।
■ उच्च रक्तचापः
गाजर, अंगूर, मोसम्मी और ज्वारों का रस। मानसिक तथा शारीरिक आराम आवश्यक है।
■ निम्न रक्तचापः
मीठे फलों का रस लें, किन्तु खट्टे फलों का उपयोग न करें। अंगूर और मोसम्मी का रस अथवा दूध भी लाभदायक है।
■ पीलियाः
अंगूर, सेव, रसभरी, मोसम्मी। अंगूर की अनुपलब्धि पर लाल मुनक्के तथा किसमिस का पानी। गन्ने को चूसकर उसका रस पियें। केले में 1.5 ग्राम चूना लगाकर कुछ समय रखकर फिर खायें।
■ मुहाँसों के दागः
गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस।
■ संधिवातः
लहसुन, अदरक, गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी, हरा धनिया, नारियल का पानी तथा सेव और गेहूँ के ज्वारे।
■ एसीडिटीः
गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।
■ कैंसरः
गेहूँ के ज्वारे, गाजर और अंगूर का रस।
■ सुन्दर बनने के लिएः
सुबह व दोपहर नारियल का पानी या बबूल का रस लें। नारियल के पानी से चेहरा साफ करें।
■ फोड़े-फुन्सियाँ-
गाजर, पालक, ककड़ी, गोभी और नारियल का रस।
■ कोलाइटिसः
गाजर, पालक और पाइनेपल का रस। 70℅ गाजर के रस के साथ अन्य रस समप्राण।
चुकन्दर, नारियल, ककड़ी, गोभी के रस का मिश्रण भी उपयोगी है।
■ अल्सरः
अंगूर, गाजर, गोभी का रस।
केवल दुग्धाहार पर रहना आवश्यक है।
■ सर्दी-कफः
मूली, अदरक, लहसुन, तुलसी, गाजर का रस, मूँग अथवा भाजी का सूप।
■ ब्रोन्काइटिसः
पपीता, गाजर, अदरक, तुलसी, पाइनेपल का रस, मूँग का पानी लें।