Astrologer Sunil Vashisth

Astrologer Sunil Vashisth ☎️ Book your Telephonic Appointment: WhatsApp @+91-9001864410 He is the founder of International Academy of Astrology and Spirituality.

Astrologer Sunil Vashisth is a well known National & International Astrologer, Numerologist, Vastu expert. Astrologer Sunil Vashisth is an eminent Vaastu shastri and Astrologer of National & International Fame. Sunil Vashisth offers a range of astrological counseling services. He specializes in predicting on the major events of ones life like Career & Job, Health, Business & Finance, Child and Remedial Astrology. He has been helping people from all walks of life, which includes many individuals, Professionals, Housewives, industrialist, students and people with little or no success. He has given new meaning to thousands of life by showing them the appropriate directions. He has a consistent track record in helping people to understand their life purpose; providing reasons for the problems facing them; giving advice about skills and talents which may be lying dormant; setting out the propitious time for marriage, change of occupation, abroad opportunity etc.

28/06/2023
03/10/2020

#चौबीस_अक्षरों_का_शक्तिपुंज

गायत्री के नौ शब्द ही महाकाली की नौ प्रतिमाएँ हैं, जिन्हें आश्विन की नवदुर्गाओं में विभिन्न उपचारों के साथ पूजा जाता है । देवी भागवत् में गायत्री की तीन शक्तियों का - ब्राह्मी, वैष्णवी ,शाम्भवी के रूप में निरूपण किया गया है और नारी वर्ग की चौबीस की संख्या में निरूपित करते हुए, उनमें से प्रत्येक के सुविस्तृत माहात्म्यों का वर्णन किया है । गायत्री के चौबीस अक्षरों का आलंकारिक रूप से अन्य प्रसंगों में भी निरूपण किया गया है । भगवान के दस ही नहीं, चौबीस अवतारों का भी पुराणों में वर्णन है । ऋषियों में सप्त ऋषियों की तरह उनमें से चौबीस को प्रमुख माना गया है - ये गायत्री के अक्षर ही हैं। देवताओं में से त्रिदेवों की प्रमुखता, पर विस्तार में जाने पर पता चलता है कि वे इतने ही नहीं, वरन् चौबीस की संख्या में भी मूर्धन्य प्रतिष्ठा प्राप्त करते रहे हैं । महर्षि दत्तात्रेय ने ब्रह्माजी के परामर्श से चौबीस गुरुओं से अपनी ज्ञान- पिपासा को पूर्ण किया था । यह चौबीस गुरू प्रकारान्तर से गायत्री के चौबीस अक्षर ही हैं । सौर मंडल के नौ ग्रह हैं । सूक्ष्म शरीर के छः चक्र और तीन ग्रन्थि समुच्चय विख्यात हैं , इस प्रकार उनकी संख्या नौ हो जाती है । इन सबकी अलग- अलग अभ्यर्थनाओं की रूप- रेखा साधन शास्त्रों में वर्णित है । गायत्री के नौ शब्दों की व्याख्या में निरूपित किया गया है कि इनसे किस पक्ष की , किस प्रकार साधन की जाये , तो उसके फलस्वरूप किस प्रकार उनमें सन्निहित दिव्य शक्तियों की उपलब्धि होती रहे । अष्टसिद्धियों और नौ निधियों को इसी परिकर के विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिक्रिया समझा जा सकता है । अतीन्द्रिय क्षमताओं के रूप में परामनोविज्ञानी मानवी सत्ता में सन्निहित जिन विभूतियों का वर्णन- निरूपण करते हैं, उन सबकी संगति गायत्री मंत्र के खण्ड- उपखण्डों के साथ पूरी तरह बैठ जाती है । देवी भागवत् सुविस्तृत उपपुराण है । उसमें महाशक्ति के अनेक रूपों की विवेचना तथा शृंखला है । उसे गायत्री की रहस्यमय शक्तियों का उद्घाटन ही समझा जा सकता है । ऋषि युग के प्रायः सभी तपस्वी गायत्री का अवलम्बन लेकर ही आगे बढ़े हैं। मध्याह्नकाल में भी ऐसे सिद्ध पुरुषों के अनेक कथानक मिलते हैं , जिनमें यह रहस्य सन्निहित है कि उनकी सिद्धियाँ- विभूतियाँ गायत्री पर ही अवलम्बित है । भारतीय धर्म का भी एक ही उद्गम स्रोत है - गायत्री उसी के विस्तार रूप में पेड़ के तने, टहनी, पत्ते फल- फूल आदि के रूप में वेद, शास्त्र, पुराण, उपनिषद्, स्मृति, दर्शन , सूक्त आदि का विस्तार हुआ है । एक से अनेक और अनेक से एक होने की उक्ति गायत्री के ज्ञान और विज्ञान से सम्बन्धित अनेकानेक दिशा- धाराओं से सम्बन्धित साधनाओं की विवेचना करके विभिन्न पक्षों को देखते हुए विस्तार- रहस्य को भली प्रकार समझा जा सकता है ।

✍🏻 पंडित श्री राम शर्मा आचार्य

12/06/2020

गायत्री के ये 24 मंत्र भी हैं पॉवरफुल

गायत्री मंत्र के अलावा गायत्री के ये 24 मंत्र भी हैं जिनमें हैं 24 देवताओं का वास, इन मंत्रों के जप से हो जाता हैं सभी कष्टों का नाश, आशंका, भय, अकाल मृत्यु, रोग और अनेक प्रकार की बाधाओं का निवारण करके मनुष्य को सदैव तेजश्वी बनाय रखता है । इन मंत्रों को प्रतिदिन जपने से सुख, सौभाग्य, समृद्धि और ऎश्वर्य की होती हैं प्राप्ति ।



1- गणेश गायत्री:- यह मंत्र समस्त प्रकार के विघ्नों का निवारण करने में सक्षम है ।
मंत्र-
।। ॐ एक दृष्टाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो बुद्धिः प्रचोदयात् ।।

2- नृसिंह गायत्री:- इस मंत्र से पुरषार्थ एवं पराक्रम की बृद्धि होती है ।
मंत्र-
।। ॐ उग्रनृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि। तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात् ।।

3- विष्णु गायत्री:- यह मंत्र पारिवारिक कलह को समाप्त करता है ।
मंत्र-
।। ॐ नारायण विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु: प्रचोदयात् ।।

4- शिव गायत्री:- यह मंत्र सभी प्रकार का कल्याण करने में अद्भूत कार्य कर्ता है ।
मंत्र-
।। ॐ पंचवक्त्राय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्र: प्रचोदयात् ।।

5- कृष्ण गायत्री:- यह मंत्र कर्म क्षेत्र की सफलता हेतु बड़ा ही लाभकारी है ।
मंत्र-
।। ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात् ।।

6- राधा गायत्री:- यह मंत्र प्रेम का अभाव दूर करके पूर्णता प्रदान करता है ।
मंत्र-
।। ॐ वृषभानुजायै विद्महे कृष्णप्रियायै धीमहि। तन्नो राधा प्रचोदयात् ।।

7- लक्ष्मी गायत्री:- यह मंत्र पद प्रतिष्ठा, यश ऐश्वर्य और धन सम्पति प्रदान करता हैं
मंत्र-
।। ॐ महालक्ष्म्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि । तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।।

8- अग्नि गायत्री:- यह मंत्र इंद्रियों की तेजस्विता को बढ़ाता है ।
मंत्र-
।। ॐ महाज्वालाय विद्महे अग्निदेवाय धीमहि। तन्नो अग्नि: प्रचोदयात् ।।

9- इन्द्र गायत्री:- यह मंत्र दुश्मनों के हमले से बचाता है ।
मंत्र-
।। ॐ सहस्त्रनेत्राय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि। तन्नो इन्द्र: प्रचोदयात् ।।

10- सरस्वती गायत्री:- इस मंत्र से ज्ञान बुद्धि की वृद्धि होती है एवं स्मरण शक्ति बढ़ती है ।
मंत्र-
।। ॐ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ।।

11- दुर्गा गायत्री:- यह मंत्र दुखः, पीड़ा ही नहीं शत्रुओं का नाश, विघ्नों पर विजय दिलाता हैं ।
मंत्र-
।। ॐ गिरिजायै विद्महे शिवप्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ।।

12- हनुमान गायत्री:- यह मंत्र कर्म के प्रति निष्ठा की भावना जागृत करता हैं ।
मंत्र-
।। ॐ अंजनी सुताय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुति: प्रचोदयात् ।।

13- पृथ्वी गायत्री:- यह मंत्र दृढ़ता, धैर्य और सहिष्णुता की वृद्धि करता है ।
मंत्र-
।। ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे सहस्त्रमूत्यै धीमहि। तन्नो पृथ्वी प्रचोदयात् ।।

14- सूर्य गायत्री:- इस मंत्र से शरीर के सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है ।
मंत्र-
।। ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धीमहि । तन्नो सूर्य: प्रचोदयात् ।।


15- राम गायत्री:- इस मंत्र से मान प्रतिष्ठा बढती है ।
मंत्र-
।। ॐ दशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो राम: प्रचोदयात् ।।

16- सीता गायत्री:- यह मंत्र तप की शक्ति में वृद्धि करता है ।
मंत्र-
।। ॐ जनकनन्दिन्यै विद्महे भूमिजायै धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात् ।।

17- चन्द्र गायत्री:- यह मंत्र निराशा से मुक्ति दिलाता है और मानसिकता भी प्रबल होती है ।
मंत्र-
।। ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृतत्त्वाय धीमहि। तन्नो चन्द्र: प्रचोदयात् ।।

18- यम गायत्री:- इस मंत्र से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है ।
मंत्र-
।। ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकालाय धीमहि । तन्नो यम: प्रचोदयात् ।।

19- ब्रह्मा गायत्री:- इस मंत्र से व्यापारिक संकट दूर हो जात है ।
मंत्र-
।।ॐ चतुर्मुखाय विद्महे हंसारुढ़ाय धीमहि। तन्नो ब्रह्मा प्रचोदयात् ।।

20- वरुण गायत्री:- यह मंत्र व्यक्ति के भीतर प्रेम भावना जागृत करता है, जिससे भावनाओं का उदय होता हैं ।
मंत्र-
।। ॐ जलबिम्वाय विद्महे नीलपुरुषाय धीमहि। तन्नो वरुण: प्रचोदयात् ।।

20- नारायण गायत्री:- यह मंत्र प्रशासनिक प्रभाव बढ़ता है ।
मंत्र-
।। ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो नारायण: प्रचोदयात् ।।

22- हयग्रीव गायत्री:- यह मंत्र समस्त भयो का नाश करता है ।
।। ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि । तन्नो हयग्रीव: प्रचोदयात् ।।

23- हंस गायत्री:- इस मंत्र से विवेक शक्ति का विकाश होता है, बुद्धि भी प्रखर होती है ।
मंत्र-
।। ॐ परमहंसाय विद्महे महाहंसाय धीमहि। तन्नो हंस: प्रचोदयात् ।।

24- तुलसी गायत्री:- इस मंत्र से परमार्थ की भावना जाग्रत होती हैं ।
।। ॐ श्रीतुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि । तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।

●राहु एक रहस्यमयी ग्रह है ।● जेल में बंद कैदी भी राहू है ।● राहू सफाई कर्मचारी है ।● स्टील के बर्तन राहू के अधिकार में आ...
13/04/2020

●राहु एक रहस्यमयी ग्रह है ।
● जेल में बंद कैदी भी राहू है ।
● राहू सफाई कर्मचारी है ।
● स्टील के बर्तन राहू के अधिकार में आते हैं
● हाथी दान्त की बनी सभी वस्तुए राहू रूप हैं ।
● राहू वह मित्र है जो पीठ पीछे आपकी निंदा करता है !
● दत्तक पुत्र भी राहू की देन होता है ।
● नशे की वस्तुएं राहू हैं ।
● दर्द का टीका राहू है ।
● राहू मन का वह क्रोध है जो कई साल के बाद भी शांत नहीं हुआ है, न लिया हुआ बदला भी राहू है ।
● शेयर मार्केट की गिरावट राहू है, उछाल केतु है ।
● बहुत समय से ताला लगा हुआ मकान राहू है ।
● बदनाम वकील भी राहू है ।
● मिलावटी शराब राहू है ।

● राहू वह धन है जिस पर आपका कोई हक़ नहीं है या जिसे अभी तक लौटाया नहीं गया है ।
ना लौटाया गया उधार भी राहू है ! उधार ली गयी सभी वस्तुएं राहू खराब करती हैं !

● यदि आपकी कुंडली में राहू अच्छा नहीं है तो किसी से कोई चीज़ मुफ्त में न लें क्योंकि हर मुफ्त की चीज़ पर राहू का अधिकार होता है ।

● राहू ग्रह का कुछ पता नहीं कि कब बदल जाए जैसे कि आप कल कुछ काम करने वाले हैं लेकिन समय आने पर आपका मन बदल जाए और आप कुछ और करने लगें तो इस दुविधा में राहू का हाथ होता है | किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित घटना का दावेदार राहू ही होता है । आप खुद नहीं जानते की आप आने वाले कुछ घंटों में क्या करने वाले हैं या कहाँ जाने वाले हैं तो इसमें निस्संदेह राहू का आपसे कुछ नाता है । या तो राहू लग्नेश के साथ है या लग्न में ही राहू है । यदि आप जानते हैं की आप झूठ की राह पर हैं परन्तु आपको लगता है की आप सही कर रहे हैं तो यह धारणा आपको देने वाला राहू ही है !

● किसी को धोखा देने की प्रवृत्ति राहू पैदा करता है यदि आप पकडे जाएँ तो इसमें भी आपके राहू का दोष है और यह स्थिति बार बार होगी इसलिए राहू का अनुसरण करना बंद करें क्योंकि यह जब बोलता है तो कुछ और सुनाई नहीं देता ।

● जिस तरह कर्ण पिशाचिनी आपको गुप्त बातों की जानकारी देती है उसी तरह यदि राहू आपकी कुंडली में बलवान होगा तो आपको सभी तरह की गुप्त बातें बैठे बिठाए ही पता चल जायेंगी । यदि आपको लगता है की सब कुछ गुप्त है और आपसे कुछ छुपाया जा रहा है या आपके पीठ पीछे बोलने वाले लोग बहुत अधिक हैं तो यह भी राहू की ही
करामात है ।

● राहू रहस्य का कारक ग्रह है और तमाम रहस्य की परतें राहू की ही देन होती हैं । राहू वह झूठ है जो बहुत लुभावना लगता है । राहू झूठ का वह रूप है जो झूठ होते हुए भी सच जैसे प्रतीत होता है । राहू कम से कम सत्य तो कभी नहीं है ।

● जो सम्बन्ध असत्य की डोर से बंधे होते हैं या जो सम्बन्ध दिखावे के लिए होते हैं वे राहू के ही बनावटी सत्य हैं ।

● राहू व्यक्ति को झूठ बोलना सिखाता है बातें छिपाना, बात बदलना, किसी के विशवास को सफलता पूर्वक जीतने की कला राहू के अलावा कोई और ग्रह नहीं दे सकता ।

● राहू वह लालच है जिसमे व्यक्ति को कुछ अच्छा बुरा दिखाई नहीं देता केवल अपना स्वार्थ ही दिखाई देता है ।

● क्यों न हों ताकतवर राहू के लोग सफल? क्यों बुरे लोग तरक्की जल्दी कर लेते हैं । क्यों झूठ का बोलबाला अधिक होता है और क्यों दिखावे में इतनी जान होती है ? क्योंकि इन सबके पीछे राहू की ताकत रहती है ।

● मांस मदिरा का सेवन, बुरी लत, चालाकी और क्रूरता, अचानक आने वाला गुस्सा, पीठ पीछे की वो बुराई, जो ये काम करे ये सब राहू की विशेषताएं हैं । असलियत को सामने न आने देना ही राहू की खासियत है।

आप सभी को श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।‬
08/04/2020

आप सभी को श्री हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ।‬

07/04/2020

हनुमान जी से सम्बंधित उपाय शीघ्र फल देते है।

1. सरसों के तेल के दीपक में लौंग डालें और ये दीपक हनुमानजी के सामने जलाएं और आरती करें। इस उपाय से सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

2. किसी मंदिर जाएं और वहां एक नारियल पर स्वस्तिक बनाएं। इसके बाद ये नारियल हनुमान जी को अर्पित करें। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे बुरा समय दूर होता हैं।

3.हनुमान जयंती पर सूर्यास्त के बाद हनुमानजी के सामने चौमुखा दीपक जलाएं। चौमुखा दीपक यानी दीपक में चार बतियां रखकर चारों और जलाना है। इस उपाय से घर-परिवार की सभी परेशानियां खत्म हो जाएंगी।

4. यदि आप विधिवत पूजा नहीं कर पा रहे हैं तो हनुमानजी को लाल, पीले फूल जैसे कमल, गुलाब, गेंदा या सूर्यमुखी चढ़ा दें। इस उपाय से भी सभी सुख प्राप्त होते हैं।

5. हनुमान जयंती पर पारे से बनी हनुमान जी की प्रतिमा की पूजा करें। साथ ही, ॐ रामदूताय नमः मन्त्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपाय करें। इस उपाय से सभी कष्ट दूर होते हैं।

6. हनुमानजी को गाय के शुद्ध घी से बना प्रसाद चढ़ाएं। ये प्रसाद भक्तों में बाटें और खुद भी ग्रहण करें। इस उपाय से हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और दुःख दूर करते हैं।

7. हनुमानजी को लाल लंगोट चढ़ाएं। साथ ही, सिंदूर भी चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाएं। इस उपाय से हर काम में सफलता मिलेगी।

8. हनुमानजी की तस्वीर घर में पवित्र स्थान पर इस तरह लगाएं कि हनुमानजी का मुंह दक्षिण दिशा की और हो। इस उपाय से शत्रुओं पर विजय मिलेगी और धन लाभ होगा।

9. हनुमान जी का विशेष श्रृंगार करें। सिंदूर और चमेली के तेल से चोला चढ़ाएं। इस उपाय से सभी मनोकामना पूरी हो जाती है।

10. दुखों से मुक्ति के लिए पीपल के 11 पत्तें लें और साफ़ पानी से धो लें। इन पत्तों पर चंदन से या कुमकुम से श्रीराम नाम लिखें। पत्तों की माला बनाकर हनुमनजी को चढ़ाएं।

11. एक नारियल पर सिंदूर, लाल धागा, चावल चढ़ाएं और नारियल की पूजा करें। इसके बाद ये नारियल हनुमान जी को चढ़ा दें। इससे धन लाभ के योग बन सकते हैं।

12. हनुमान मंदिर में ध्वजा यानी झंडे का दान करें बंदरों को चने खिलाएं। इससे हनुमानजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं ।

श्री रामनवमी के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।भारत की आस्था और अटूट श्रद्धा के सबल प्रतीक प्रभु श्री राम सब पर अपनी कृपा...
02/04/2020

श्री रामनवमी के महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

भारत की आस्था और अटूट श्रद्धा के सबल प्रतीक प्रभु श्री राम सब पर अपनी कृपा बनायें और सभी के जीवन में उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य लायें।

चैत्र नवरात्र अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
01/04/2020

चैत्र नवरात्र अष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

11/01/2020

ऋणमुक्ति के नारीयल से चमत्कारिक उपाय

एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वस्तिक का चिह्न बनाएं। कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़-चना) के साथ हनुमानजी के मंदिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। तत्काल लाभ प्राप्त होगा।

04/01/2020

दैनिक जीवन की समस्या में छाया दान का उपाय

अक्सर ऐसा होता है कि व्यक्ति का बिता हुआ काल अर्थात भुत काल अगर दर्दनाक रहा हो या निम्नतर रहा हो तो वह व्यक्ति के आने वाले भविष्य को भी ख़राब करता है और भविष्य बिगाड़ देता है। यदि आपका बीता हुआ कल आपका आज भी बिगाड़ रहा हो और बीता हुआ कल यदि ठीक न हो तो निश्चित तोर पर यह आपके आनेवाले कल को भी बिगाड़ देगा। इससे बचने के लिए छाया दान करना चाहिये। जीवन में जब तरह तरह कि समस्या आपका भुतकाल बन गया हो तो छाया दान से मुक्ति मिलता है और आराम मिलता है।

नीचे हम सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन की विभिन्न समस्या अनुसार छाया दान के विषय मे बता रहे है।

1 . बीते हुए समय में पति पत्नी में भयंकर अनबन चल रही हो

अगर बीते समय में पति पत्नी के सम्बन्ध मधुर न रहा हो और उसके चलते आज वर्त्तमान समय में भी वो परछाई कि तरह आप का पीछा कर रहा हो तो ऐसे समय में आप छाया दान करे और छाया दान आप बृहस्पत्ति वार के दिन कांसे कि कटोरी में घी भर कर पति पत्नी अपना मुख देख कर कटोरी समेत मंदिर में दान दे आये इससे आप कि खटास भरे भुत काल से मुक्ति मिलेगा। और भविष्य मृदु और सुखमय रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 3 बार (हफ्ते) दोहराए।

2 . बीते हुए समय में भयावह दुर्घटना या एक्सीडेंट हुआ हो

अगर बीते समय में कोई भयंकर दुर्घटना हुई हो और उस खौफ से आप समय बीतने के बाद भी नहीं उबार पाये है। मन में हमेशा एक डर बना रहता है। आप कही भी जाते है तो आप के मन में उस दुर्घटना का भय बना रहता है तो आप छाया दान करे। आप एक मिटी के बर्तन में सरसो का तेल भर कर शनिवार के दिन अपनी छाया देख कर दान करे। इससे आप को लाभ होगा बीती हुई दर्दनाक स्मृति से छुटकारा मिलेगा। और भविष्य सुरक्षित रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 2 बार (हफ्ते) दोहराए।

3 . बीते समय में व्यापर में हुए घाटे से आज भी डर लगता हो

कई बार ऐसा होता है कि बीते समय में व्यापारिक घाटा या बहुत बड़े नुकसान से आप बहुत मुश्किल से उबरे हो और आज स्थिति ठीक होने के बावजूद भी आप को यह डर सता रहा है कि दुबारा वैसा ही न हो जाये ,तो इससे बचने के लिए आप बुधवार के दिन एक पीतल कि कटोरी में घी भर कर उसमे अपनी छाया देख कर छाया पात्र समेत आप किसी ब्राह्मण को दान दे। इससे दुबारा कभी भी आप को व्यापार में घाटा नहीं होगा। और भविष्य में व्यापर भी फलता फूलता रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 3 बार (हफ्ते) दोहराए।

4 . भुत काल कि कोई बड़ी बीमारी आज भी परछाई बन कर डरा रही हो

बीते समय में कई बार कोई लम्बी बीमारी के कारण व्यक्ति मानसिक तौर पर कमजोर हो जाता है। और व्यक्ति ठीक होने के बावजूद भी मानसिक तौर पर अपने भूत काल में ही घिरा रहता है और उससे उबर नहीं पाता। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शनिवार के दिन एक लोहे के पात्र में तिल का तेल भर कर अपनी मुख छाया देखकर उसका दान करे। इससे आप को इस स्मृति से मुक्ति मिलेगा और भविष्य में बीमार नहीं होंगे और स्वस्थ्य रहेंगे। यह प्रक्रिया कम से कम 5 बार (हफ्ते) दोहराए।

5 लम्बे समय के बाद नौकरी मिली है लेकिन भुतकाल का डर कि फिर बेरोजगार न हो जाये

बहुत लम्बे समय की बेरोजगारी के बाद नौकरी मिलती है लेकिन मन में सदैव एक भय सताता है कि दोबारा नौकरी न चली जाये और ये सोच एक प्रेत कि तरह आपका पीछा करती है तो ऐसे स्थिति में आप सोमवार के दिन ताम्बे की एक कटोरी में शहद भर कर अपनी छाया देख कर दान करें ,इससे आप को लाभ मिलेगा। इस छाया दान से उन्नति बनी रहती है रोजगार बना रहता है। यह प्रक्रिया कम से कम 7 बार (हफ्ते) दोहराए।

6 .कुछ ऐसा काम कर चुके है जो गोपनीय है लेकिन उसके पश्चाताप से उबार नहीं पाये है

कई बार जीवन में ऐसी गलती आदमी कर देता है कि जो किसी को बता नहीं पता लेकिन मन ही मन हर पल घुटता रहता है और भविष्य में भी इस गलती से उबर नहीं पाता है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पीतल कि कटोरी में बादाम का तेल भरकर उसमे अपना मुख देख कर शुक्रवार के दिन छाया दान करना चाहिएय। इससे पश्चाताप कि अग्नि से मुक्ति मिलती है ,और कि हुई गलती के दोष से मुक्ति मिलती है। यह प्रक्रिया कम से कम 11 बार (हफ्ते) दोहराए।

7 . पहली शादी टूट गयी दूसरी शादी करने जा रहे है लेकिन मन में इसके भी टूटने का डर है

संयोग वश या किसी दुर्घटनावश व्यक्ति कि पहली शादी टूट गयी है और दूसरी शादी करने जा रहे है और मन में भय है कि जैसे पहले हुआ था वैसे दुबारा न हो जाये तो इसके लिए व्यक्ति को स्त्री हो या पुरुष उसको रविवार के दिन ताम्बे के पात्र में घी भरकर उसमे अपना मुख देख कर छाया दान करे। इससे भुत काल में हुई घटना या दुर्घटना का भय नहीं रहेगा। और भविष्य सुखमय रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 5 बार (हफ्ते) दोहराए।

28/12/2019

१.सूर्य:- जूठे हाथ सिर पर लगाने से सूर्य खराब
२.चंद्र:- पानी व्यर्थ फैलाने से चंद्र खराब
३.मंगल:- क्रोध करने से मंगल खराब
४.बुध:- झूठ बोलने से बुध खराब
५.गुरु:- बड़ो का सम्मान न करने से गुरु खराब
६.शुक्र:- पत्नी या स्त्री का सम्मान न करने से शुक्र खराब
७.शनि:- आलस्य करने से शनि खराब
८.राहु:- चुगली करने से राहु खराब
९.केतु:- किसी भिखारी या गरीब/मुसाफिर का मजाक उड़ाने से केतु खराब

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Brisbane, QLD

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