10/01/2026
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…लीना ने सबसे छोटे बच्चे को सीने से लगाया। उसकी खाँसी सूखी थी, खतरनाक।
एड्रियन ने बिना सोचे अपनी जैकेट उतारी और बच्चे के चारों ओर लपेट दी।
“ये बच्चे…” उसकी आवाज़ काँप रही थी,
“क्या ये—”
लीना ने सिर झुका लिया।
काफी देर तक कुछ नहीं बोली।
फिर बहुत धीमे से कहा—
“हाँ।
तीनों तुम्हारे हैं।”
शहर की आवाज़ें जैसे अचानक म्यूट हो गईं।
ट्रैफिक, लोग, हॉर्न—सब गायब।
एड्रियन के कानों में बस एक ही शब्द गूँज रहा था—
तीनों।
“पर… तुमने बताया क्यों नहीं?”
उसकी आँखें भर आईं।
लीना की हँसी कड़वी थी।
“बताया था, एड्रियन।
तीन ईमेल।
दो कॉल।
एक वॉइस मैसेज…
जिसका जवाब कभी नहीं आया।”
एड्रियन को याद आया—
वो अनरीड इनबॉक्स,
वो ‘बाद में देखूँगा’ वाले नोटिफिकेशन,
वो मीटिंग्स जो ‘ज़्यादा ज़रूरी’ थीं।
“जब पहला बच्चा हुआ,
मैंने सोचा तुम आ जाओगे।
जब दूसरा हुआ,
मैंने सोचा शायद अब।
तीसरे के बाद…
मैंने उम्मीद छोड़ दी।”
उसकी आवाज़ नहीं टूटी।
वो टूट चुकी थी—बहुत पहले।
“फिर सब कुछ गलत होने लगा,”
लीना बोली।
“माँ बीमार पड़ी।
मेडिकल बिल।
काम छूट गया।
घर चला गया।”
उसने बच्चों की ओर देखा।
“और ये…
इन्होंने कभी शिकायत नहीं की।”
एड्रियन घुटनों के बल फुटपाथ पर बैठ गया।
एक मिलियनेयर,
जिसके पास सब कुछ था—
और फिर भी कुछ भी नहीं।
उसने काँपते हाथों से लीना का चेहरा उठाया।
“मुझे माफ़ कर दो।
मैं नहीं जानता था कि मैं इतना अंधा हो सकता हूँ।”
लीना की आँखों से आँसू गिरे।
“माफी से पेट नहीं भरता, एड्रियन।”
उस वाक्य ने उसे चीर दिया।
उसी पल
एड्रियन ने फैसला किया—
न कोई PR स्टंट,
न कोई चेक फोटो के साथ।
उसने टैक्सी रोकी।
“चलो,” बस इतना कहा।
उस दिन
वो उन्हें होटल नहीं,
अपने घर ले गया।
अगले हफ्ते
शिकागो की एक हेडलाइन वायरल हुई—
“टेक मिलियनेयर ने कंपनी की 60% हिस्सेदारी ट्रस्ट में दी—अपने बच्चों और सिंगल मदर्स के लिए”
लीना ने कोई पैसा नहीं माँगा।
उसने बस बच्चों के लिए
एक स्कूल,
एक हीटर वाला कमरा,
और
एक ऐसा पिता माँगा
जो अब भागे नहीं।
आज
एड्रियन मीटिंग्स कम करता है।
डिनर टाइम कभी मिस नहीं करता।
और हर रात
तीनों बच्चों को खुद सुलाता है।
क्योंकि उसने सीख लिया—
सबसे महँगी चीज़
जो कोई आदमी खो सकता है,
वो पैसा नहीं…
वक़्त होता है।
कमेंट में पार्ट 3