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इंदिरा एकादशी व्रत कथासतयुग में इंद्रसेन नामक राजा महिष्मति नगर पर शासन करता था. वह भगवान विष्णु का भक्त था, उसके पास कि...
20/09/2022

इंदिरा एकादशी व्रत कथा
सतयुग में इंद्रसेन नामक राजा महिष्मति नगर पर शासन करता था. वह भगवान विष्णु का भक्त था, उसके पास किसी चीज की कमी नहीं थी. एक दिन उसके राजदरबार में नारद मुनि पधारे. राजा ने उनका आदर सत्कार किया और आने का प्रयोजन पूछा.तब नारद जी ने कहा कि वे एक दिन यमलोक गए थे. उन्होंने यमराज से मुलाकात की. उनकी प्रशंसा की. उस दौरान उन्होंने तुम्हारे पिता को देखा. वे यम लोक में थे. नारद जी ने राजा इंद्रसेन को उसके पिता का संदेशा बताया. उसके पिता ने कहा था कि किसी कारणवश उनसे एकादशी व्रत में कोई विघ्न बाधा हो गई थी, जिसके फलस्वरूप उनको यम लोक में यमराज के पास समय व्यतीत करना पड़ रहा है. यदि तुम से संभव हो सके तो अपने पिता के लिए इंदिरा एकादशी व्रत करो. इससे वे यमलोक से मुक्त होकर स्वर्ग लोक में स्थान पा सकेंगे.तब राजा इद्रसेन ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत की विधि बताने को कहा. नारद जी ने कहा कि इंदिरा एकादशी व्रत के दिन तुम स्नान आदि करके भगवान शालिग्राम के समक्ष अपने पितरों का श्राद्ध विधिपूर्वक करो. ब्राह्मणों को फलाहार और भोजन कराओ. फिर उनको दक्षिणा दो. इसके बाद बचे हुए भोजन को गाय को खिला दो.फिर धूप, दीप, गंध, पुष्प, नैवेद्य आदि से भगवान ऋषिकेष का पूजन करो. फिर रात्रि के समय में भगवत जागरण करो. अगले दिन सुबह स्नान आदि के बाद पूजन करों और ब्राह्मणों को भोजन कराओ. इसके बाद स्वयं भी भोजन करके व्रत को पूरा करो. नारद जी ने कहा कि हे राजन! तुम विधिपूर्वक इंदिरा एकादशी व्रत को करोगे तो निश्चय ही तुम्हारे पिता स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त करेंगे. इसके बाद नारद जी वहां से चले गए.जब आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी आई तो राजा इंद्रसेन ने विधिपूर्वक इंदिरा एकादशी व्रत किया. इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उसके पिता यमलोक से मुक्त होकर विष्णु लोक को चले गए. मृत्यु के बाद राजा इंद्रसेन को भी स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई.

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पुत्रदा एकादशी का महत्त्व:श्री युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्त...
08/08/2022

पुत्रदा एकादशी का महत्त्व:
श्री युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को पूजा के बाद श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा जरूर सुननी चाहिए, ऐसा करने से व्रत पूर्ण होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अब आप शांतिपूर्वक इसकी कथा सुनिए। इसके सुनने मात्र से ही वायपेयी यज्ञ का फल मिलता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा!
द्वापर युग के आरंभ में महिष्मति नाम की एक नगरी थी, जिसमें महीजित नाम का राजा राज्य करता था, लेकिन पुत्रहीन होने के कारण राजा को राज्य सुखदायक नहीं लगता था। उसका मानना था, कि जिसके संतान न हो, उसके लिए यह लोक और परलोक दोनों ही दु:खदायक होते हैं।

पुत्र सुख की प्राप्ति के लिए राजा ने अनेक उपाय किए परंतु राजा को पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई।
वृद्धावस्था आती देखकर राजा ने प्रजा के प्रतिनिधियों को बुलाया और कहा: हे प्रजाजनों! मेरे खजाने में अन्याय से उपार्जन किया हुआ धन नहीं है। न मैंने कभी देवताओं तथा ब्राह्मणों का धन छीना है। किसी दूसरे की धरोहर भी मैंने नहीं ‍ली, प्रजा को पुत्र के समान पालता रहा। मैं अपराधियों को पुत्र तथा बाँधवों की तरह दंड देता रहा। कभी किसी से घृणा नहीं की। सबको समान माना है। सज्जनों की सदा पूजा करता हूँ। इस प्रकार धर्मयुक्त राज्य करते हुए भी मेरे पु‍त्र नहीं है। सो मैं अत्यंत दु:ख पा रहा हूँ, इसका क्या कारण है?
राजा महीजित की इस बात को विचारने के लिए मं‍त्री तथा प्रजा के प्रतिनिधि वन को गए। वहाँ बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों के दर्शन किए। राजा की उत्तम कामना की पूर्ति के लिए किसी श्रेष्ठ तपस्वी मुनि को देखते-फिरते रहे।
एक आश्रम में उन्होंने एक अत्यंत वयोवृद्ध धर्म के ज्ञाता, बड़े तपस्वी, परमात्मा में मन लगाए हुए निराहार, जितेंद्रीय, जितात्मा, जितक्रोध, सनातन धर्म के गूढ़ तत्वों को जानने वाले, समस्त शास्त्रों के ज्ञाता महात्मा लोमश मुनि को देखा, जिनका कल्प के व्यतीत होने पर एक रोम गिरता था।
सबने जाकर ऋषि को प्रणाम किया। उन लोगों को देखकर मुनि ने पूछा कि आप लोग किस कारण से आए हैं? नि:संदेह मैं आप लोगों का हित करूँगा। मेरा जन्म केवल दूसरों के उपकार के लिए हुआ है, इसमें संदेह मत करो।
लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर सब लोग बोले: हे महर्षे! आप हमारी बात जानने में ब्रह्मा से भी अधिक समर्थ हैं। अत: आप हमारे इस संदेह को दूर कीजिए। महिष्मति पुरी का धर्मात्मा राजा महीजित प्रजा का पुत्र के समान पालन करता है। फिर भी वह पुत्रहीन होने के कारण दु:खी है।
उन लोगों ने आगे कहा कि हम लोग उसकी प्रजा हैं। अत: उसके दु:ख से हम भी दु:खी हैं। आपके दर्शन से हमें पूर्ण विश्वास है कि हमारा यह संकट अवश्य दूर हो जाएगा क्योंकि महान पुरुषों के दर्शन मात्र से अनेक कष्ट दूर हो जाते हैं। अब आप कृपा करके राजा के पुत्र होने का उपाय बतलाएँ।
यह वार्ता सुनकर ऋषि ने थोड़ी देर के लिए नेत्र बंद किए और राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत जानकर कहने लगे कि यह राजा पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य था। निर्धन होने के कारण इसने कई बुरे कर्म किए। यह एक गाँव से दूसरे गाँव व्यापार करने जाया करता था।
एक समय ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी के दिन मध्याह्न के समय वह जबकि वह दो दिन से भूखा-प्यासा था, एक जलाशय पर जल पीने गया। उसी स्थान पर एक तत्काल की ब्याही हुई प्यासी गौ जल पी रही थी।
राजा ने उस प्यासी गाय को जल पीते हुए हटा दिया और स्वयं जल पीने लगा, इसीलिए राजा को यह दु:ख सहना पड़ा। एकादशी के दिन भूखा रहने से वह राजा हुआ और प्यासी गौ को जल पीते हुए हटाने के कारण पुत्र वियोग का दु:ख सहना पड़ रहा है। ऐसा सुनकर सब लोग कहने लगे कि हे ऋषि! शास्त्रों में पापों का प्रायश्चित भी लिखा है। अत: जिस प्रकार राजा का यह पाप नष्ट हो जाए, आप ऐसा उपाय बताइए।
लोमश मुनि कहने लगे कि श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी को जिसे पुत्रदा एकादशी भी कहते हैं, तुम सब लोग व्रत करो और रात्रि को जागरण करो तो इससे राजा का यह पूर्व जन्म का पाप अवश्य नष्ट हो जाएगा, साथ ही राजा को पुत्र की अवश्य प्राप्ति होगी।
लोमश ऋषि के ऐसे वचन सुनकर मंत्रियों सहित सारी प्रजा नगर को वापस लौट आई और जब श्रावण शुक्ल एकादशी आई तो ऋषि की आज्ञानुसार सबने पुत्रदा एकादशी का व्रत और जागरण किया।
इसके पश्चात द्वादशी के दिन इसके पुण्य का फल राजा को दिया गया। उस पुण्य के प्रभाव से रानी ने गर्भ धारण किया और प्रसवकाल समाप्त होने पर उसके एक बड़ा तेजस्वी पुत्र उत्पन्न हुआ।
इसलिए हे राजन! इस श्रावण शुक्ल एकादशी का नाम पुत्रदा पड़ा। अत: संतान सुख की इच्छा हासिल करने वाले इस व्रत को अवश्य करें। इसके माहात्म्य को सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है और इस लोक में संतान सुख भोगकर परलोक में स्वर्ग को प्राप्त होता है। ॥ जय श्री हरि ॥

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हरी शरणम् हरी शरणम्हरी शरणम् श्री हरि शरणम्
25/07/2022

हरी शरणम् हरी शरणम्
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कामिका एकादशी व्रत कथाभगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि एक बार नारद मुनि ने अपने परम पिता ब्रह्मा जी ने कामिका एकाद...
24/07/2022

कामिका एकादशी व्रत कथा
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि एक बार नारद मुनि ने अपने परम पिता ब्रह्मा जी ने कामिका एकादशी व्रत की महिमा, विधि और कथा जानने की इच्छा प्रकट की. जब ब्रह्मा जी ने उनको इस व्रत के बारे में विस्तार से बताया था. वह बातें आज मैं तुम्हें बताने जा रहा हूंं.
सावन कृष्ण एकादशी कामिका एकादशी के नाम से प्रसिद्ध है. इस दिन श्रीहरि विष्णु की पूजा करते हैं. उनकी पूजा करने से गंगा, पुष्कर, काशी आदि में स्नान करने के समान ही पुण्य प्राप्त होता है. जो लोग पाप से डरते हैं, उनको अवश्य ही कामिका एकादशी व्रत करना चाहिए. इस व्रत की कथा इस प्रकार है—
एक गांव में ठाकुर जी रहते थे. वह काफी क्रोधी स्वभाव के थे. एक दिन उनका एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया. क्रोधवश उस ठाकुर ने ब्राह्मण की हत्या कर दी. अपराध और पाप से मुक्ति के लिए उसने ब्राह्मण की ​अंतिम क्रिया करनी चाही, लेकिन ब्राह्मणों ने उसे आज्ञा न दी और उस पर ब्रह्म हत्या का दोष लग गया. तब एक दिन उस ठाकुर ने एक मुनि से ब्रह्म हत्या से मुक्ति का उपाय पूछा. तब उस मुनि ने कहा कि ब्रह्म हत्या से मुक्ति कामिका एकादशी व्रत रखने से ही मिलेगी. इस व्रत को विधिपूर्वक करने से तुम्हारा पाप दूर हो जाएगा. उस मुनि के बताए अनुसार ठाकुर ने कामिका एकादशी व्रत रखा और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा अर्चना की. रात्रि के समय वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास ही सो गया. स्वप्न में भगवान श्रीहरि ने दर्शन दिए और उसे ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति प्रदान की.जो लोग कामिका एकादशी की रात विष्णु मंदिर में दीपक जलाते हैं, उनके पितरों को स्वर्ग में अमृत पान का अवसर मिलता है. जो दीपक जलाते हैं, उनको मृत्यु के बाद सूर्य लोक में स्थान प्राप्त होता है. जो व्यक्ति कामिका एकादशी व्रत कथा सुनता है, उसे पापों से मुक्ति मिलती है और वह विष्णु लोक में स्थान पाता है. ॥ जय श्री कृष्णा ||

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॥ जय श्री कृष्णा ॥
22/07/2022

॥ जय श्री कृष्णा ॥

||श्री कृष्ण शरणं ममः||
17/07/2022

||श्री कृष्ण शरणं ममः||

12/07/2022

हिंदू धर्म में गुरुओं को भगवान से भी ऊपर का दर्जा प्राप्त है. गुरु के जरिए ही मनुष्य ईश्वर तक पहुंच सकता है. ऐसे में गुरुओं की पूजा भी भगवान रूपी की जानी चाहिए

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वर:
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः

गुरु ब्रह्म मंत्र का अर्थ
गुरु ब्रह्मा - गुरु ब्रह्मा हैं, जो सृष्टि के भगवान हैं, जिन्हें जनक भी कहा जाता है, गुरु विष्णु का अर्थ है गुरु विष्णु (विष्णु भगवान हैं जिन्हें आयोजक कहा जाता है), गुरु देवो महेश्वर का अर्थ है गुरु महेश्वरा (शिव या संहारक) , गुरु साक्षात परब्रह्म का अर्थ है परब्रह्म अर्थात। सर्वोच्च देवता या सर्वशक्तिमान।क्योंकि गुरु हमें प्रकाश की मार्ग की ओर ले जाता है इसलिए गुरु ब्रह्मा के समान है और तस्मै श्री गुरुवे नमः का अर्थ हम उस गुरु को नमन करते हैं जो हमें प्रकाश की मार्ग की ओर ले जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं गुरु परम ब्रह्मा और परम देवता का अवतार है।

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Shree yamunaji joytish Pandit Vyasji MaharajThree generation permanent workersEveryone knows, nothing happens without TH...
12/07/2022

Shree yamunaji joytish
Pandit Vyasji Maharaj
Three generation permanent workers

Everyone knows, nothing happens without THAKURJI'S desire, on top of which Thakur ji is obliged, there is joy in his life. I am the only intermiadte person. God every thing.

By the grace of Thakur ji, all the works are pure worship - by text, photo, by birthmark, interruption in marriage, why is the marriage not happening, when will the marriage ? Why loss in business, factory? When will you get success? Recalling lost person, sorrow, husband and in-laws are suffering, why are not children, what is the reason? Family turmoil, is there any problem for your children ? Trouble with neighbors, tired, people who ask for money, they get rid of debt, house, land is not sold, when will it be sold? , Shop, factory, the servants do not stand, trouble in participation, they are very worried, someone has sent a magic hand, then to withdraw, why the body is weak, lean, despite taking medicine, no matter what the reasons are The Vastu Dosha, Love Problem, Divorce, Mental Peace in the house, if someone has fed or fed, or has done the old witchcraft forever.

My request to all Vaishnavas is to consider it as your home. JAI SHREE KRISHNA TO ALL OF YOU

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11/07/2022

Saas bahu ke jagde Durr karne ke upaye

11/07/2022

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