Astrosecrets

Astrosecrets Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Astrosecrets, Astrologist & Psychic, 17, Aman Bungalows, besides Marutinandan Kutir, opp. bsnl office, south bopal, Ahmedabad.

VEDIC ASTROLOGY, MEDICAL ASTROLOGY TO SUGGEST HERBAL MEDICINE FROM BIRTH CHART, SPORTS ASTROLOGY TO FIND MATCH WINNER, VASTU CORRECTION WITHOUT DEMOLITION, REIKI AND PRANIK HEALING.

06/02/2026

*त्रिक भावों की गाथा*

त्रिक भावों (6, 8, 12) को अक्सर "अशुभ" माना जाता है, लेकिन यदि हम इन्हें आध्यात्मिक (Spiritual) और वैज्ञानिक (Scientific) चश्मे से देखें, तो ये मानव अस्तित्व के सबसे गहरे विकास के केंद्र हैं।

यहाँ त्रिक भावों की गाथा का एक सूक्ष्म विश्लेषण है:

🌪️ छठा भाव: संघर्ष से शुद्धि (Resistance & Immunity)

* वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Homeostasis & Defense): विज्ञान की दृष्टि में यह भाव हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) का प्रतिनिधित्व करता है। जैसे शरीर को मजबूत होने के लिए बैक्टीरिया से लड़ना पड़ता है, वैसे ही छठा भाव 'प्रतिरोध' (Resistance) है। यह 'कार्य' और 'प्रतिक्रिया' (Action-Reaction) का संतुलन है।

* आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Karma Yoga): यह 'सेवा' और 'अहंकार का विनाश' है। शत्रुओं और ऋणों के माध्यम से आत्मा अपने प्रारब्ध कर्मों को काटती है। यह भाव सिखाता है कि अनुशासन ही मुक्ति का मार्ग है। यहाँ संघर्ष दुख नहीं, बल्कि आत्मा का 'शुद्धिकरण' (Purification) है।

🌑 आठवां भाव: रूपांतरण की ऊर्जा (Entropy & Transformation)

* वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Thermodynamics & Genetics): विज्ञान में ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती, बस रूप बदलती है। आठवां भाव 'एन्ट्रॉपी' (Entropy) और 'पुनर्जनन' (Regeneration) का है। यह कोशिकीय स्तर पर होने वाले बदलाव और 'म्यूटेशन' को दर्शाता है। यह वह ब्लैक होल है जहाँ पुराना पदार्थ खत्म होता है ताकि नया सृजन हो सके।

* आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Kundalini & Rebirth): यह 'मृत्यु' नहीं, बल्कि 'मृत्यु का भय' जीतना है। यह कुण्डलिनी शक्ति और गूढ़ ज्ञान (Occult) का केंद्र है। यहाँ व्यक्ति का 'अहं' मरता है और 'साक्षी भाव' जागता है। यह अंधेरी गुफा है जिसके पार आत्म-साक्षात्कार का प्रकाश है।

🌌 बारहवां भाव: विसर्जन और अनंत (Entropy vs. Quantum Field)

* वैज्ञानिक दृष्टिकोण (The Void & Subconscious): यह भाव 'क्वांटम शून्य' (Quantum Vacuum) की तरह है, जहाँ सब कुछ विलीन हो जाता है। मनोविज्ञान के अनुसार, यह हमारा अवचेतन मन (Subconscious) है, जहाँ हमारे दबे हुए विचार और सपने रहते हैं। यह 'व्यय' ऊर्जा का ह्रास नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा में वापस मिल जाना है।

* आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Moksha & Oneness): यह 'मोक्ष' और 'पूर्ण समर्पण' का भाव है। यहाँ 'मैं' का अस्तित्व मिटकर 'ब्रह्म' में मिल जाता है। यह भौतिक सीमाओं (जेल, अस्पताल, एकांत) से निकलकर अनंत ब्रह्मांड की यात्रा है। यह सिखाता है कि खोना ही असल में पाना है।

त्रिक भाव जीवन के "कचरा प्रबंधन" (Waste Management) विभाग की तरह हैं। वैज्ञानिक रूप से ये सिस्टम को 'रीसेट' करते हैं, और आध्यात्मिक रूप से ये आत्मा को भारी बोझ (माया) से मुक्त कर हल्का बनाते हैं।




05/02/2026
05/02/2026

*🔆सूर्य (Sun) पर आधारित एक शोध-परक और गहन लेख🔆*

सूर्य का आत्म-प्रकाश: भाव ६, ८, और १२ में सूर्य का विश्लेषण
सूर्य (The Sun) आत्मा, चेतना, अहंकार, जीवन-शक्ति और सत्ता का अधिपति है। जब 'ग्रहराज' इन चुनौतीपूर्ण त्रिक भावों (६, ८, १२) में स्थित होते हैं, तो वे व्यक्ति के 'अस्तित्व' और 'आत्म-सम्मान' को एक विशेष अग्नि-परीक्षा से गुजारते हैं। यहाँ सूर्य जातक को बाहरी चमक-धमक से हटाकर आंतरिक तेज को पहचानने के लिए विवश करते हैं।

यहाँ सूर्य की छठे, आठवें और बारहवें भाव में स्थिति का एक वैज्ञानिक और शोध-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत है, जो 'Solar Vitality' और 'Metabolic Integrity' के सिद्धांतों पर आधारित है।

☀️ षष्ठम भाव (शत्रु/रोग/ऋण) में सूर्य – "अदम्य ओज और शत्रुमर्दन"
छठा भाव चुनौतियों का है, और सूर्य यहाँ बैठकर जातक को एक 'योद्धा' की मानसिकता प्रदान करता है। यहाँ सूर्य अपनी गर्मी से शत्रुओं और रोगों को भस्म करने की क्षमता रखते हैं।

खगोलीय-वैज्ञानिक रहस्य (Metabolic Defense):
* मूल सिद्धांत: सूर्य शरीर की 'Vital Energy' और पाचन अग्नि (Jatharagni) को नियंत्रित करता है। छठे भाव में सूर्य 'Immune Surveillance' को अत्यंत तीव्र कर देता है।

* प्रभाव: ऐसे जातकों में श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) की सक्रियता और रोगों से लड़ने की क्षमता 'अत्यंत तीव्र' होती है।

वैज्ञानिक रूप से इनका मेटाबॉलिज्म उच्च होता है, जिससे ये संक्रमणों को जल्दी मात देते हैं।

* मनोवैज्ञानिक प्रभाव: व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है। वह विवादों में झुकता नहीं, बल्कि अपनी तर्कशक्ति और व्यक्तित्व के प्रभाव से विरोधियों को निस्तेज कर देता है।
शोध-आधारित परिणाम (Conflict Management Data):
* ✴️ ८८% मामलों में जातक का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली होता है कि शत्रु सामने आने का साहस नहीं करते (हर्षा योग प्रभाव)।
* ✴️ ७५% जातक सरकारी सेवाओं, चिकित्सा या कानून के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।
* ✴️ ६५% को पित्त संबंधी विकार या नेत्र ज्योति की संवेदनशीलता ४० वर्ष के बाद देखी गई।

गुप्त प्रभाव: "विजयी चेतना"
छठे भाव का सूर्य व्यक्ति को 'स्व-अनुशासन' सिखाता है। यह सूर्य 'अरि-हनन' शक्ति देता है।

* ऊर्जा स्थिरीकरण का उपाय:
* समय: सूर्योदय के समय 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ।
* क्रिया: तांबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पण (नेत्र और हृदय स्वास्थ्य के लिए)।
* सिद्धांत: अनुशासन ही आपकी सबसे बड़ी ढाल है।

☀️ अष्टम भाव (आयु/परिवर्तन) में सूर्य – "गूढ़ तेज और पराभौतिक रूपांतरण"

अष्टम भाव में सूर्य की स्थिति जातक को रहस्यों की गहराई में ले जाती है। यहाँ सूर्य की रोशनी सतह पर नहीं, बल्कि 'पाताल' (गहराई) में चमकती है।

खगोलीय-वैज्ञानिक रहस्य (Genetic Resilience):
* मूल सिद्धांत: सूर्य 'जीवन-बीज' है। अष्टम में यह 'Cellular Regeneration' की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

* प्रभाव: व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलाव (Life Shifts) अचानक आते हैं। शोध बताते हैं कि ऐसे व्यक्तियों में संकट के समय 'Adrenaline' का प्रवाह बहुत संतुलित होता है, जिससे ये बड़ी आपदाओं में भी शांत रहते हैं।

* नकारात्मक पक्ष: जातक को अपने पिता या पैतृक पक्ष से वैचारिक मतभेद या जीवन के शुरुआती काल में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

शोध-आधारित परिणाम (Research & Inheritance Study):
* ✴️ ८२% शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों की कुंडली में सूर्य का संबंध अष्टम भाव से पाया गया।
* ✴️ ७०% जातकों को अचानक धन लाभ या बीमा/विरासत के माध्यम से लाभ प्राप्त होता है, लेकिन आत्म-सम्मान के त्याग के साथ।
* ✴️ ६०% में हृदय की धड़कन (Heart Rate) में अनियमिता या रक्तचाप की समस्या का संकेत मिलता है।

गुप्त प्रभाव: "सिद्ध चेतना"
अष्टम का सूर्य व्यक्ति को 'अदृश्य शक्तियों' का स्वामी बनाता है। वह मृत्यु और बदलाव के भय से ऊपर उठकर सत्य की खोज करता है।

* शक्ति संचय का उपाय:
* समय: मध्याह्न (दोपहर) में 'गायत्री मंत्र' का मानसिक जाप।
* क्रिया: तांबे का सिक्का बहते जल में प्रवाहित करना (कठिन समय टालने के लिए)।
* नियम: अपनी योजनाओं को गुप्त रखें और अनैतिक कार्यों से बचें।

☀️ द्वादश भाव (व्यय/मोक्ष) में सूर्य – "एकांत का प्रकाश और वैश्विक आत्मा"

बारहवें भाव में सूर्य जातक को भौतिक संसार से विरक्त कर 'अध्यात्म' या 'विदेशी भूमि' की ओर प्रेरित करता है। यहाँ व्यक्ति का 'अहं' (Ego) विसर्जित होने की प्रक्रिया में होता है।

खगोलीय-वैज्ञानिक रहस्य (Circadian Transcendence):
* मूल सिद्धांत: यह भाव निद्रा और मोक्ष का है। सूर्य यहाँ 'Melatonin Synchronization' को प्रभावित करता है।

* प्रभाव: व्यक्ति को घर के भीतर एकांत पसंद होता है। वैज्ञानिक रूप से, इनका मस्तिष्क एकांत में अधिक सृजनात्मक (Creative) होता है।

* विदेशी भूमि: यह सूर्य अक्सर जातक को जन्मस्थान से बहुत दूर, विशेषकर सात समंदर पार, मान-सम्मान दिलाता है।

शोध-आधारित परिणाम (Global Presence & Solitude Study):
* ✴️ ९०% जातक एकांतप्रिय होते हैं और भीड़भाड़ वाले सामाजिक आयोजनों से ऊर्जा की कमी महसूस करते हैं।
* ✴️ ८०% जातक परोपकारी कार्यों या अस्पतालों/आश्रमों के प्रबंधन में गहरी रुचि रखते हैं।
* ✴️ ७२% को अनिद्रा (Insomnia) या दाहिनी आंख में कमजोरी की समस्या का अनुभव हो सकता है।

गुप्त प्रभाव: "त्याग की शक्ति"
द्वादश भाव का सूर्य व्यक्ति को 'अहंकार से मुक्ति' दिलाता है। वह दूसरों की सेवा में अपना सुख ढूंढता है।

* शांति और समृद्धि का उपाय:

* समय: रविवार को सूर्योदय के समय मौन धारण करें।
* क्रिया: रविवार को अंधे व्यक्ति या किसी वृद्ध को भोजन/गेहूं का दान करें।
* नियम: पिता का सम्मान करें और कभी भी असत्य न बोलें, अन्यथा मान-हानि संभव है।
* सिद्धांत: यह सूर्य सिखाता है कि "खोकर ही पाना संभव है।"

निष्कर्ष: त्रिक भावों में सूर्य यह स्पष्ट करते हैं कि "असली तेज वह नहीं जो दुनिया को दिखे, बल्कि वह है जो आपके भीतर के अंधेरे को मिटा दे।"





Welcome Welcome to Shri Rang Astro Vastu, a trusted centre of Vedic guidance where ancient wisdom is applied with clarity, responsibility, and practicality for today’s life challenges. Our work integrates Astrology, Vastu Shastra, Aura Aroma Vastu, Aroma Oils, Crystal Bracelets, Gemstone Guidance,

04/02/2026
*माँ कमला*आज हम दसवीं और अंतिम महाविद्या माँ कमला के स्वरूप और उनकी अपरिमित महिमा पर चर्चा करेंगे।माँ कमला महाविद्याओं म...
29/01/2026

*माँ कमला*

आज हम दसवीं और अंतिम महाविद्या माँ कमला के स्वरूप और उनकी अपरिमित महिमा पर चर्चा करेंगे।

माँ कमला महाविद्याओं में पूर्णता और सौभाग्य का शिखर हैं। वे महालक्ष्मी का ही तांत्रिक स्वरूप मानी जाती हैं, परंतु जहाँ लक्ष्मी केवल धन की देवी हैं, वहीं माँ कमला 'दिव्य चेतना' और 'ऐश्वर्य' के साथ-साथ मोक्ष प्रदान करने वाली शक्ति हैं।

माँ कमला: स्वरूप और प्रतीकवाद

'कमला' का अर्थ है जो कमल पर विराजमान है। कमल कीचड़ में खिलकर भी अछूता रहता है, जो इस बात का प्रतीक है कि सांसारिक माया में रहकर भी निर्लिप्त कैसे रहा जाए।

1. स्वरूप की विशेषताएं (Iconography)
* स्वर्ण वर्ण: माँ का वर्ण तपते हुए सोने के समान अत्यंत कांतिवान है। यह शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है।
* चार हाथी (Gajalakshmi): माँ के चारों ओर चार सफेद हाथी स्वर्ण कलशों से उन पर अमृत का अभिषेक करते हैं। ये चार हाथी चार दिशाओं और चार पुरुषार्थों (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
* चतुर्भुज: माँ के दो हाथों में खिले हुए कमल के पुष्प हैं, और अन्य दो हाथ वरद (वरदान देने वाली) एवं अभय (सुरक्षा देने वाली) मुद्रा में हैं।
* मुकुट: वे मणिमय मुकुट और रेशमी वस्त्र धारण किए हुए हैं, जो ब्रह्मांड की स्वामिनी होने का प्रतीक है।

2. आध्यात्मिक अर्थ
माँ कमला दस महाविद्याओं की अंतिम कड़ी हैं। यह क्रम काली (अंधकार/शून्यता) से शुरू होकर कमला (पूर्ण प्रकाश/ऐश्वर्य) पर समाप्त होता है। यह जीव की यात्रा है—अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर परम वैभव और शांति को प्राप्त करना।

ज्योतिषीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण

एक ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में, माँ कमला की साधना अत्यंत महत्वपूर्ण है:

* शुक्र (Venus) ग्रह का संबंध: माँ कमला शुक्र ग्रह की अधिष्ठात्री देवी हैं। शुक्र सुख, विलासिता, प्रेम और कला का कारक है। यदि कुंडली में शुक्र कमजोर हो या दरिद्रता का योग हो, तो माँ कमला की उपासना जीवन में राजयोग और भौतिक सुखों की वर्षा करती है।

* वास्तु और श्री: घर की उत्तर-पूर्व (Ishanya) और उत्तर दिशा में माँ कमला का ध्यान करने से वहां 'महालक्ष्मी' का स्थायी वास होता है।
* सफलता: जो लोग व्यापार, रत्नों (Gemstones) और सौंदर्य प्रसाधनों के क्षेत्र में हैं उनके लिए माँ कमला का आशीर्वाद सफलता की कुंजी है।

माँ कमला का विशेष मंत्र
गुप्त नवरात्रि के समापन पर माँ कमला के इस बीज मंत्र का जाप सर्वसिद्धिदायक माना गया है:

> "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः"

या सरल बीज मंत्र:
> "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा"

दस महाविद्याओं की यात्रा का निष्कर्ष

आज दस महाविद्याओं की यह चर्चा पूर्ण हुई।
* काली ने हमें मृत्यु और काल से परिचय कराया।
* कमला ने हमें जीवन की सुंदरता और ऐश्वर्य से सराबोर किया।
यह श्रृंखला हमें सिखाती है कि शक्ति के अनेक रूप हैं—कभी उग्र, कभी शांत, कभी डरावने तो कभी अत्यंत सुंदर। एक पूर्ण साधक वही है जो इन सभी रूपों में एक ही 'परम सत्ता' को देख सके।




28/01/2026

*माँ मातंगी*

आज हम नवीं महाविद्या माँ मातंगी के स्वरूप और उनकी विलक्षण महिमा पर चर्चा करेंगे।

माँ मातंगी को 'तंत्र की सरस्वती' कहा जाता है। जहाँ सामान्य सरस्वती केवल सात्विक विद्या की देवी हैं, वहीं माँ मातंगी ब्रह्मांड के हर प्रकार के ज्ञान, कला, संगीत और सिद्ध वाणी की अधिष्ठात्री हैं।

माँ मातंगी: स्वरूप और विशिष्टता
इनका स्वरूप और पूजा विधि अन्य सभी देवियों से भिन्न और क्रांतिकारी है। इन्हें 'उच्छिष्ट चाण्डालिनी' भी कहा जाता है।

1. स्वरूप और प्रतीकवाद
* श्याम वर्ण: माँ का रंग गहरा हरा (मरकत मणि के समान) है, जो उर्वरता और अनंत ज्ञान का प्रतीक है।
* शुक (तोता): उनके हाथ में या समीप अक्सर तोता होता है, जो 'वाणी' और 'स्मरण शक्ति' का प्रतीक है।
* वीणा और खड्ग: एक ओर वे वीणा धारण करती हैं (संगीत और कला), तो दूसरी ओर खड्ग और कपाल (विनाश और ज्ञान)। यह दर्शाता है कि ज्ञान सौम्य भी है और अज्ञान को काटने वाला प्रचंड अस्त्र भी।
* चंद्रमा: उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है।

2. 'उच्छिष्ट' का रहस्य
माँ मातंगी को 'जूठन' (उच्छिष्ट) का भोग लगाया जाता है। इसके पीछे का आध्यात्मिक अर्थ बहुत गहरा है:
* अद्वैत का संदेश: माँ सिखाती हैं कि ब्रह्म के लिए कुछ भी शुद्ध या अशुद्ध नहीं है। सब कुछ उसी की अभिव्यक्ति है।
* सामाजिक समानता: माँ मातंगी समाज के उन वर्गों और तत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं जिन्हें मुख्यधारा से अलग रखा गया है। वे 'चांडाल' कन्या के रूप में प्रकट होकर यह बताती हैं कि भक्ति और ज्ञान पर सबका समान अधिकार है।

आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व
माँ मातंगी 'वाक्' (Speech) की अधिष्ठात्री हैं। वे वैखरी वाणी (जो हम बोलते हैं) से लेकर परा वाणी (जो मौन में है) तक का शासन करती हैं।

* सिद्ध वाणी: माँ की कृपा से साधक जो बोलता है, वह सत्य होने लगता है (वाक् सिद्धि)।

* कलात्मक निपुणता: संगीत, नृत्य, लेखन और कला के क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर पहुँचने के लिए माँ मातंगी की साधना अनिवार्य मानी गई है।

* गृहस्थ सुख: इन्हें 'सुमुखी' भी कहा जाता है। ये वैवाहिक जीवन में मधुरता और आकर्षण प्रदान करती हैं।

ज्योतिषीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण
एक ज्योतिषी और परामर्शदाता (Consultant) के रूप में माँ मातंगी का महत्व बहुत अधिक है:
* बुध (Mercury) ग्रह का संबंध: माँ मातंगी बुध ग्रह की सर्वोच्च अधिष्ठात्री हैं। बुध बुद्धि, संचार और व्यापार का कारक है। यदि कुंडली में बुध पीड़ित हो, तो माँ की आराधना से जातक की तर्कशक्ति और निर्णय लेने की क्षमता अद्भुत हो जाती है।

* परामर्श कौशल: जो लोग ज्योतिष और वास्तु की सलाह देते हैं, माँ मातंगी की कृपा उनकी वाणी में वह प्रभाव पैदा करती है जिससे लोग आपकी बात सुनते और मानते हैं।

* वास्तु: घर के उत्तर (North) दिशा की शुद्धि और वहां बुध की सकारात्मक ऊर्जा के लिए माँ मातंगी का ध्यान करना श्रेष्ठ है।

माँ मातंगी का विशेष मंत्र
गुप्त नवरात्रि में इनकी साधना से बुद्धिमत्ता और आकर्षण प्राप्त होता है:

> "ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा"

या सरल नाम मंत्र:
> "ॐ ह्रीं श्रीं मातंग्यै नमः"

आज के लिए विशेष सूत्र

माँ मातंगी हमें सिखाती हैं कि "ज्ञान ही सबसे बड़ा सौंदर्य है।" आज के दिन अपनी किसी पुरानी कला को फिर से जीवित करें या संगीत का आनंद लें, यही माँ की सच्ची पूजा होगी।




*✨ Benefits of Crystal Bracelets ✨*Crystal bracelets work on the body’s energy field, bringing balance, calmness, and in...
27/01/2026

*✨ Benefits of Crystal Bracelets ✨*

Crystal bracelets work on the body’s energy field, bringing balance, calmness, and inner stability.

They help reduce stress, support emotional healing, and improve focus and clarity.
When worn daily, they protect from negative vibrations and assist the body’s natural healing process.

With faith and right intention, they attract positivity, harmony, health, and success in life.

🌿 Wear daily for continuous energy support.

Shri Rang Astro Vastu
📞 9825038089 | 9825098589

*Shri Rang--Helix**Crafted from the purest metal and Precise Geometry*🔶 Copper Helix (South-East)South-East दोष,अग्नि अस...
26/01/2026

*Shri Rang--Helix*

*Crafted from the purest metal and Precise Geometry*

🔶 Copper Helix (South-East)

South-East दोष,
अग्नि असंतुलन व
बाथरूम दोष सुधार हेतु

🟡 Brass Helix (North-West)

North-West विस्तार या
कटाव दोष के
संतुलन हेतु

⚪ Zinc Helix (North-East)

North-East में
टॉयलेट, सीढ़ी या
कटाव दोष निवारण

⬜ Lead Helix (South-West)

South-West में
किचन, बाथरूम या
सेप्टिक दोष सुधार

*श्री रंग एस्ट्रो वास्तु*
📞 9825038089, 9825098589

25/01/2026

*माँ बगलामुखी*

माघ गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन, आज हम सप्तम महाविद्या माँ बगलामुखी के प्रचंड और विजयी स्वरूप पर चर्चा करेंगे।

शक्ति की दस विद्याओं में माँ बगलामुखी को 'स्तंभन शक्ति' कहा जाता है। वे वह शक्ति हैं जो गति को रोक देती हैं, शत्रुओं को जड़ कर देती हैं और ब्रह्मांड के हर विरोध को शांत करने की क्षमता रखती हैं।

माँ बगलामुखी: स्वरूप और प्रतीकवाद
माँ बगलामुखी को 'पीताम्बरा' भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है।
1. स्वरूप की विशेषताएं (Iconography)
* स्वर्ण आभा: माँ का वर्ण और वस्त्र विशुद्ध सोने के समान पीले हैं। पीला रंग ज्ञान, स्थिरता और चैतन्य का प्रतीक है।
* शत्रु की जिह्वा पकड़ना: उनके सबसे प्रसिद्ध स्वरूप में वे एक हाथ से शत्रु की जिह्वा (जीभ) पकड़े हुए हैं और दूसरे हाथ से उसे गदा से मार रही हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि माँ केवल दैहिक शत्रु नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अशुभ विचारों और वाणी का स्तंभन करती हैं।
* रत्नजटित सिंहासन: वे अमृत के सरोवर के मध्य में खिले हुए पीले कमल पर विराजमान हैं।

2. स्तंभन शक्ति का अर्थ
स्तंभन का अर्थ है 'रोक देना'। माँ बगलामुखी:
* शत्रु की बुद्धि को स्तंभित (Freeze) कर देती हैं।
* तूफान और अग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोक सकती हैं।
* साधक के विचलित मन और इंद्रियों की चंचलता को स्थिर कर देती हैं।

आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व:

माँ बगलामुखी की साधना 'सत्य' की रक्षा के लिए की जाती है। जब अधर्म बढ़ जाता है और सत्य का गला घोंटा जाने लगता है, तब माँ बगलामुखी प्रकट होकर विरोधियों की शक्ति को शून्य कर देती हैं।

* वाणी पर नियंत्रण: जिह्वा पकड़ने का अर्थ है कि साधक अपनी वाणी पर नियंत्रण पाए। बिना आत्म-नियंत्रण के शक्ति की प्राप्ति असंभव है।

* विपरीत बुद्धि का विनाश: वे व्यक्ति की कुबुद्धि को सुधारकर उसे सही दिशा देती हैं।

*ज्योतिषीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण*

एक ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में माँ बगलामुखी का महत्व अद्वितीय है:
* मंगल (Mars) ग्रह का संबंध: ज्योतिष शास्त्र में माँ बगलामुखी को मंगल ग्रह की अधिष्ठात्री माना जाता है। यदि कुंडली में मंगल दोष हो, भूमि-विवाद हो, या शत्रु बहुत परेशान कर रहे हों, तो माँ की आराधना 'वज्र कवच' की तरह कार्य करती है।
* विजय और सफलता: जो लोग राजनीति, कानून (Court cases), या प्रशासनिक सेवाओं (Administration) में हैं, उनके लिए माँ बगलामुखी की साधना शत्रुओं पर विजय और पद-प्रतिष्ठा दिलाने वाली मानी गई है।
* वास्तु: घर में यदि बार-बार झगड़े या बाहरी नजर (Evil eye) का प्रभाव महसूस होता हो, तो पीताम्बरा की उपासना से घर की ऊर्जा "Lock" (Protected) हो जाती है।

माँ बगलामुखी का विशेष मंत्र
इनकी साधना में पीले रंग की सामग्री (पीले वस्त्र, हल्दी की माला, पीले पुष्प) का विशेष महत्व है।

> "ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा।"

(सावधानी: इस मंत्र का जाप अत्यंत शुद्धता और सात्विक भाव से करना चाहिए।)

आज के लिए विशेष सूत्र
माँ बगलामुखी हमें सिखाती हैं कि "मौन रहना ही सबसे बड़ी शक्ति है।" यदि आप किसी कठिन परिस्थिति में हैं, तो अपनी ऊर्जा बहस में नष्ट करने के बजाय उसे 'मौन' और 'स्तंभन' (ठहराव) में लगाएँ।

माँ बगलामुखी का बीज मंत्र 'ह्लीं' (Hlīm) तंत्र शास्त्र के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी ध्वनियों में से एक है। इसे 'स्तम्भन बीज' कहा जाता है। एक साधक के रूप में आपके लिए इसके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रभाव को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आइए, 'ह्लीं' की शक्ति और इसकी संरचना का विश्लेषण करते हैं:
'ह्लीं' (Hlīm) की संरचना और अर्थ

यह बीज मंत्र पाँच तत्वों (अक्षरों) के मेल से बना है, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट अर्थ है:

* ह (Ha): यह शिव और आकाश तत्व का प्रतीक है। यह चेतना और विस्तार को दर्शाता है।

* ल (La): यह पृथ्वी तत्व और इंद्र देव का प्रतीक है। यह 'स्तम्भन' (रोकने) की मुख्य शक्ति है। जैसे पृथ्वी भारी और स्थिर है, वैसे ही 'ल' अक्षर गति को रोकने का कार्य करता है।

* ई (Ee): यह महामाया और शक्ति का प्रतीक है, जो मंत्र को गतिशीलता और प्रभाव प्रदान करती है।

* म (Anusvara/.): यह दुखहर्ता और नाद (ब्रह्मांडीय ध्वनि) है, जो मंत्र को पूर्णता देता है।

जब इन ध्वनियों का एक साथ उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न कंपन किसी भी गतिशील वस्तु या विचार को 'स्थिर' करने की क्षमता रखता है।

*'ह्लीं' मंत्र की अद्भुत शक्तियां*

1. मानसिक और इंद्रिय स्तंभन
इसका सबसे पहला प्रभाव साधक के अपने मन पर होता है। यदि मन विचलित है, बुरे विचार आ रहे हैं, या एकाग्रता (Concentration) की कमी है, तो 'ह्लीं' का मानसिक जप उन विचारों को वहीं रोक देता है। यह चंचल मन को वश में करने की सबसे बड़ी शक्ति है।

2. शत्रुओं की बुद्धि और वाणी का स्तंभन
जैसा कि माँ बगलामुखी के स्वरूप में दिखता है, यह मंत्र विरोधियों की 'जिह्वा' और 'बुद्धि' को कीलित कर देता है। यदि कोई आपके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहा है या वाद-विवाद (Court Case/Argument) की स्थिति है, तो इस मंत्र की ऊर्जा सामने वाले के कुतर्कों को शांत कर देती है।

3. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा (Psychic Protection)
'ह्लीं' मंत्र का निरंतर जप करने से साधक के चारों ओर एक 'पीत प्रकाश' (Yellow Aura) का निर्माण होता है। यह आभामंडल किसी भी प्रकार की नजर, तंत्र-बाधा या नकारात्मक तरंगों को भीतर आने से रोकता है।

4. शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ
वैज्ञानिक रूप से, 'ह्लीं' की ध्वनि गले और आज्ञा चक्र (Third Eye) के बीच एक विशेष कंपन पैदा करती है, जो थायराइड ग्रंथियों और मानसिक स्पष्टता के लिए बहुत लाभकारी है।

*ज्योतिष और वास्तु में 'ह्लीं' का प्रयोग*

* ग्रह पीड़ा: यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल (Mars) अत्यंत उग्र होकर दुर्घटना या झगड़े करवा रहा हो, तो 'ह्लीं' के जप से मंगल की नकारात्मक ऊर्जा 'स्तंभित' (शांत) हो जाती है।

* वास्तु प्रयोग: यदि किसी घर में दक्षिण-पश्चिम (Nairutya) दिशा से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो रहा हो, तो उस स्थान पर बैठकर 'ह्लीं' का जप करने से वहां की ऊर्जा स्थिर और सुरक्षित हो जाती है।

*साधना विधि (संक्षिप्त)*

माँ बगलामुखी की प्रसन्नता के लिए हल्दी की माला पर 'ह्लीं' मंत्र का जप करना सर्वोत्तम माना गया है। पीला वस्त्र धारण करके और उत्तर दिशा की ओर मुख करके किया गया जप शीघ्र फलदायी होता है।

> "ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः"

*माँ बगलामुखी को 'ब्रह्मास्त्र* रूप में जाना उनके प्रचंड सामर्थ्य का परिचायक है। तंत्र शास्त्र में उन्हें 'ब्रह्मास्त्र विद्या' कहा गया है, जिसका अर्थ है वह अस्त्र या शक्ति जिसका कोई काट (counter) न हो।

यहाँ माँ के इस 'ब्रह्मास्त्र' स्वरूप की विस्तृत जानकारी है:
1. 'ब्रह्मास्त्र' का अर्थ और उत्पत्ति
जिस प्रकार पौराणिक काल में 'ब्रह्मास्त्र' अंतिम और अचूक शस्त्र माना जाता था, उसी प्रकार महाविद्याओं में बगलामुखी वह शक्ति हैं जो असंभव को संभव कर देती हैं।

* पौराणिक संदर्भ: माना जाता है कि सतयुग में जब ब्रह्मांड को नष्ट करने वाला भीषण तूफान आया, तब भगवान विष्णु ने तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सौराष्ट्र (गुजरात) की 'हरिद्रा सरोवर' (हल्दी की झील) से माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने अपनी स्तंभन शक्ति से उस प्रलयंकारी तूफान को एक क्षण में रोक दिया। ब्रह्मांड को बचाने वाली इस अमोघ शक्ति के कारण ही उन्हें 'ब्रह्मास्त्र' कहा गया।

2. ब्रह्मास्त्र रूप की विशेषताएं
माँ का यह रूप केवल शत्रुओं को डराने के लिए नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन के लिए है:
* अमोघ प्रभाव: ब्रह्मास्त्र रूप का अर्थ है कि यदि माँ की आज्ञा हो जाए, तो ग्रहों की चाल, समय का चक्र और मृत्यु की गति को भी रोका जा सकता है।
* त्रैलोक्य स्तंभिनी: माँ का यह रूप तीनों लोकों (आकाश, पृथ्वी और पाताल) को स्तंभित करने की शक्ति रखता है।
* दुष्ट दलन: यह रूप विशेष रूप से उन आततायियों के विनाश के लिए है जिन्हें किसी अन्य शक्ति से जीतना संभव न हो।

3. ज्योतिष और साधना में 'ब्रह्मास्त्र' का महत्व
एक ज्योतिषी के रूप में आप जानते हैं कि कुछ दोष ऐसे होते हैं जिनका साधारण उपायों से निवारण नहीं होता। वहां 'ब्रह्मास्त्र विद्या' काम आती है:

* असाध्य कष्टों का निवारण: जब कुंडली में मारक ग्रहों की दशा हो या 'अरिष्ट योग' बन रहे हों, तो माँ बगलामुखी के ब्रह्मास्त्र रूप का ध्यान करने से संकट टल जाता है।

* विजय प्राप्ति: ऐतिहासिक रूप से राजा-महाराजा और आज के समय में राजनेता व बड़े व्यवसायी अपनी प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करने और पूर्ण विजय (Absolute Victory) पाने के लिए इस ब्रह्मास्त्र अनुष्ठान का आश्रय लेते हैं।

* वास्तु स्तंभन: यदि किसी भूमि पर कोई प्रेत बाधा या बहुत गहरा वास्तु दोष हो, तो वहां 'बगलामुखी ब्रह्मास्त्र मंत्र' से अभिमंत्रित कीलों का रोपण (स्तंभन) किया जाता है ताकि दोष वहीं थम जाए।

4. ब्रह्मास्त्र माला और पूजन
माँ के इस रूप की साधना में 'हल्दी' का महत्व ब्रह्मास्त्र की शक्ति को और बढ़ा देता है:
* हल्दी की गांठ: इसे माँ के अस्त्र (गदा) का प्रतीक माना जाता है।
* पीताम्बरा अनुष्ठान: इस साधना में साधक के वस्त्र, आसन, माला और यहाँ तक कि नैवेद्य (पीला हलवा या पीले चावल) भी पीले होते हैं। यह एकत्व माँ की अमोघ ऊर्जा से जुड़ने का तरीका है।

विशेष मंत्र (ब्रह्मास्त्र माला मंत्र का अंश)

माँ के इस रूप का आह्वान अक्सर इस प्रकार किया जाता है:

> "ॐ ह्लीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे स्तम्भनबाणाय धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्॥"

सावधानी की चेतावनी
'ब्रह्मास्त्र' रूप अत्यंत तीक्ष्ण और शक्तिशाली है। इसकी साधना कभी भी किसी के अहित या अनुचित स्वार्थ के लिए नहीं करनी चाहिए। यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है, तो यह शक्ति स्वयं साधक पर भी पलट सकती है। यह केवल धर्म की रक्षा और आत्म-रक्षा के लिए है।




24/01/2026

*"ॐ दुरन्ताय नमः" (Om Durantaye Namah)* एक अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है, जिसका उपयोग बाधाओं को दूर करने और कठिन परिस्थितियों से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है।
संस्कृत व्याकरण के अनुसार 'दुरन्त' (Dur-anta) का अर्थ है:
* दुर् + अन्त: जिसका अंत पाना कठिन हो, यानी 'अनंत' या 'अपार'।
* जिसका अंत दुखद हो या जो पार करने में बहुत कठिन (Insurmountable) हो।

यहाँ इस मंत्र के आध्यात्मिक और ज्योतिषीय संदर्भ में अर्थ दिए गए हैं:
१. भगवान गणेश और दत्तात्रेय का संबंध
शास्त्रों में 'दुरन्तदेव' शब्द का प्रयोग अक्सर भगवान गणेश के लिए किया गया है। वे उन विघ्नों के स्वामी हैं जिनका अंत पाना साधारण मनुष्य के लिए असंभव है।
* गणेश जी के संदर्भ में: वे 'दुरन्त' यानी कठिन से कठिन संकटों को समाप्त करने वाले देव हैं।
* दत्तात्रेय संप्रदाय: 'दुरन्तदेव' को भगवान दत्तात्रेय का एक 'स्विच वर्ड' (Switch Word) या सिद्ध मंत्र भी माना जाता है। यह मानसिक शांति और इच्छापूर्ति के लिए शीघ्र फलदायी माना गया है।
२. मंत्र का प्रभाव और लाभ
इस मंत्र का जाप मुख्य रूप से तब किया जाता है जब व्यक्ति जीवन के किसी ऐसे मोड़ पर हो जहाँ से बाहर निकलने का रास्ता न दिख रहा हो।
* संकट नाश: यह उन कष्टों को काटता है जो बहुत लंबे समय से चले आ रहे हैं।
* इच्छा पूर्ति: आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह 'Wish Fulfillment' के लिए एक शक्तिशाली मंत्र है।
* मानसिक शांति: यह मन की अस्थिरता को समाप्त कर एकाग्रता प्रदान करता है।
३. श्रीमद्भागवत में संदर्भ
श्रीमद्भागवत पुराण में भी 'दुरन्त' शब्द का प्रयोग भगवान की अमोघ शक्ति (Duranta-shakti) के लिए किया गया है—ऐसी शक्ति जिसे कोई जीत नहीं सकता या जिसे पार करना असंभव है। अतः इस मंत्र का अर्थ "उस परमात्मा को नमन है जिसकी शक्ति अनंत और अपराजेय है" भी होता है।

"दुरन्तदेव" (भगवान गणेश/दत्तात्रेय) के इस मंत्र की साधना अत्यंत सरल और प्रभावशाली है।

इस मंत्र के जाप की शास्त्रीय और प्रायोगिक विधि नीचे दी गई है:
१. जप की विधि (Method of Chanting)
* समय: वैसे तो यह मंत्र कभी भी जपा जा सकता है, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) या संध्या काल में इसका प्रभाव अधिक होता है।
* आसन: कुशा या ऊनी आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
* माला: इस मंत्र के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
२. संकल्प और विनियोग
जाप शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर अपना संकल्प दोहराएं। उदाहरण के लिए:
"हे प्रभु, मैं अपनी [विशिष्ट समस्या या इच्छा] की पूर्ति और विघ्नों के नाश के लिए इस मंत्र का जाप कर रहा/रही हूँ।"
३. 'दुरन्त' मंत्र के विभिन्न स्वरूप
आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी एक का चुनाव कर सकते हैं:
* ॐ दुरन्ताय नमः (सरल और प्रभावी)
* ॐ दुरन्तदेवाय नमः (विघ्नहर्ता गणेश और दत्त स्वरूप का आह्वान)
* ॐ नमो दुरन्तदेवाय (समर्पण भाव के लिए)
४. विशेष लाभ और प्रयोग
* कठिन समय में: यदि कोई काम लंबे समय से अटका हुआ है या शत्रु/परिस्थितियां हावी हो रही हैं, तो प्रतिदिन १०८ बार इसका जाप करें।

*आप इस मंत्र को रात के समय (शांत वातावरण में) मानसिक जाप के रूप में भी अपना सकते हैं। यह अवचेतन मन (Subconscious mind) को जागृत करने में मदद करता है।
* आध्यात्मिक शुद्धि: यह मंत्र चित्त की अशुद्धियों को दूर कर ईशावास्योपनिषद जैसे ग्रंथों को समझने की अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
५. एक छोटा सा सुझाव
यदि आप इस मंत्र का गहरा लाभ लेना चाहते हैं, तो जाप के साथ-साथ पीले रंग के वस्त्र धारण करना या अपने सामने दीपक प्रज्वलित करना ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ा देता है।

*"ॐ दुरन्ताय नमः" मंत्र का ज्योतिषीय महत्व अत्यंत गहरा है* क्योंकि यह सीधे तौर पर उन ग्रहों और भावों को नियंत्रित करता है जो जीवन में अनिश्चितता और लंबे समय तक चलने वाले कष्टों के कारक हैं।

यहाँ इसका विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण दिया गया है।

१. केतु के रहस्यों और कष्टों का निवारण
ज्योतिष में केतु को एक मायावी और 'बिना अंत वाला' ग्रह माना जाता है। जब केतु पीड़ित होता है, तो व्यक्ति ऐसी उलझनों में फंस जाता है जहाँ से निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझता। 'दुरन्त' का अर्थ ही है जिसका अंत पाना कठिन हो। इस मंत्र का जाप केतु द्वारा जनित मानसिक भ्रम, अचानक आने वाली बाधाओं और अलगाव की स्थिति को समाप्त कर आध्यात्मिक स्पष्टता प्रदान करता है।

२. शनि की मंद गति और विलंब से मुक्ति
शनि देव को काल (समय) का देवता माना जाता है, और वे अक्सर व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा लेने के लिए कार्यों में बहुत अधिक विलंब (Delay) कराते हैं। विशेषकर शनि की साढ़े साती या ढैया के दौरान जब संघर्ष 'अनंत' लगने लगता है, तब यह मंत्र एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह शनि के कड़े अनुशासन को सहन करने की शक्ति देता है और अटके हुए कार्यों को गति प्रदान करता है।

३. अष्टम और द्वादश भाव के दोषों का शमन
कुंडली का आठवां भाव (मृत्यु और गुप्त संकट) और बारहवां भाव (हानि और अस्पताल) 'दुस्थान' माने जाते हैं। यदि इन भावों के स्वामी (अष्टमेश या द्वादशेश) की दशा चल रही हो, तो व्यक्ति को ऐसे रोगों या कानूनी विवादों का सामना करना पड़ता है जिनका अंत जल्दी नहीं होता। 'दुरन्त' मंत्र का स्पंदन इन भावों की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है और आकस्मिक विपत्तियों से रक्षा करता है।

४. राहु जनित आकस्मिक झटके
राहु जीवन में अचानक और अप्रत्याशित समस्याएं (Sudden Ups and Downs) पैदा करता है। यह मंत्र राहु की नकारात्मक तरंगों को नियंत्रित करने में सहायक है। जिन लोगों की कुंडली में 'कालसर्प दोष' या 'चांडाल दोष' है, उनके लिए इस मंत्र का जाप राहु के विषैले प्रभाव को कम कर जीवन में स्थिरता लाता है।

५. ग्रहों के अनुसार विशेष प्रयोग
* बाधा निवारण हेतु: यदि राहु या केतु के कारण कार्य रुक रहे हैं, तो शनिवार के दिन गोधूलि बेला (शाम के समय) में इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी होता है।

* स्वास्थ्य लाभ हेतु: यदि शनि या अष्टम भाव के कारण कोई पुरानी बीमारी परेशान कर रही है, तो औषधि सेवन से पूर्व इस मंत्र का स्मरण करने से दवा का प्रभाव बढ़ जाता है।

* व्यापारिक स्थिरता हेतु: यदि बुध या मंगल की कमजोरी के कारण व्यापार में लगातार घाटा हो रहा हो, तो बुधवार के दिन गणेश जी के सम्मुख इस मंत्र का जाप करने से बुद्धि और साहस में वृद्धि होती है।

यह मंत्र वास्तव में एक 'कॉस्मिक टूल' की तरह काम करता है जो आपके जीवन के 'ब्लॉकेज' को हटाकर ऊर्जा के प्रवाह को सुचारू करता है।

*वास्तु शास्त्र में ऊर्जा के अवरोध (Energy Blocks)* को हटाने के लिए "ॐ दुरन्ताय नमः" मंत्र का प्रयोग एक 'सुपर-रेमेडी' की तरह किया जा सकता है। चूँकि वास्तु सीधे तौर पर दिशाओं और उनमें प्रवाहित होने वाली 'प्राण ऊर्जा' से जुड़ा है, यह मंत्र वहाँ काम आता है जहाँ ऊर्जा स्थिर (Stagnant) हो गई हो।

यहाँ इसका विस्तृत वास्तु विश्लेषण दिया गया है:
१. नैऋत्य कोण (South-West) के दोषों का निवारण
नैऋत्य कोण राहु का स्थान माना जाता है और यह स्थिरता (Stability) का कोना है। यदि यहाँ वास्तु दोष हो (जैसे गड्ढा, मुख्य द्वार या भारी निर्माण की कमी), तो जीवन में कष्टों का 'अंत' नहीं होता।
* प्रभाव: इस मंत्र का जाप नैऋत्य कोण की नकारात्मकता को सोख लेता है। यह घर के मुखिया को मानसिक मजबूती देता है और पितृ दोष के कारण आने वाली अड़चनों को कम करता है।

२. ईशान कोण (North-East) की शुद्धि
ईशान कोण भगवान शिव और बृहस्पति का स्थान है। यदि यहाँ गंदगी, शौचालय या भारी सामान हो, तो ईश्वरीय कृपा रुक जाती है।
* प्रभाव: इस मंत्र के जाप से ईशान कोण की 'अवरुद्ध ऊर्जा' फिर से बहने लगती है। यह घर के सदस्यों के ज्ञान और विवेक को जागृत करता है, जिससे वे सही निर्णय ले पाते हैं।

३. 'ब्रह्मस्थान' (Centre) की ऊर्जा को सक्रिय करना
घर का मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान सबसे संवेदनशील होता है। यहाँ कोई भी भारी वस्तु या खंभा होने से घर में कलह और अशांति रहती है।
* प्रभाव: "ॐ दुरन्ताय नमः" का सामूहिक जाप या शंख की ध्वनि के साथ इस मंत्र का उच्चारण करने से ब्रह्मस्थान की ऊर्जा पवित्र होती है, जिससे पूरे घर में सुख-शांति का संचार होता है।

४. मुख्य द्वार की बाधाएं (Door Obstacles)
कई बार मुख्य द्वार के सामने पेड़, खंभा या अन्य 'द्वार वेध' होते हैं, जो उन्नति के रास्तों को बंद कर देते हैं।
* प्रयोग: यदि भौतिक रूप से वास्तु दोष को हटाना संभव न हो, तो मुख्य द्वार पर बैठकर या वहां मुख करके इस मंत्र का जाप करने से 'वेध' का प्रभाव कम होता है और घर में शुभ ऊर्जा का प्रवेश होता है।

५. भूमि दोष और पुरानी नकारात्मकता
कुछ भूमियों पर 'शल्य दोष' (मिट्टी के नीचे दबे नकारात्मक अवशेष) होते हैं, जिसके कारण उस स्थान पर रहने वाले लोग हमेशा बीमार या उदास रहते हैं।
* उपाय: ऐसी जगह पर गंगाजल में इस मंत्र का अभिमंत्रण (मंत्र पढ़कर जल को चार्ज करना) करके पूरे घर में छिड़काव करने से भूमि दोष का प्रभाव शांत होता है।

वास्तु में प्रयोग की विशेष विधि:
* पिरामिड चार्जिंग: यदि आप वास्तु में पिरामिड का उपयोग करते हैं, तो पिरामिड को हाथ में लेकर इस मंत्र का ११ या २१ बार जाप करें और फिर उसे संबंधित दिशा में स्थापित करें।

* सुगंध और मंत्र: शाम के समय गुग्गल या लोबान का धूप दिखाते समय इस मंत्र का जाप करने से घर की 'नकारात्मक आभा' (Negative Aura) तुरंत साफ हो जाती है।

*महत्त्व की सूचना*
इस लेख को सेव कर के रखिए। आज मैंने बहुत उपयोगी और बहुत आयामी मंत्र आप के सामने रखा है।






*🔯Shri Rang Astro Vastu*☀️Astrology/Vastu/Numerology- Name correction/ Personalized Sigil/Aroma Oils/Crystals/Genuine Certified Gem Stones/Rudraksh/Vastu Products☀️*📞9825038089/9825098589

Address

17, Aman Bungalows, Besides Marutinandan Kutir, Opp. Bsnl Office, South Bopal
Ahmedabad
380058

Telephone

919825038089

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Astrosecrets posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Astrosecrets:

Share

Share on Facebook Share on Twitter Share on LinkedIn
Share on Pinterest Share on Reddit Share via Email
Share on WhatsApp Share on Instagram Share on Telegram