25/01/2026
*माँ बगलामुखी*
माघ गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन, आज हम सप्तम महाविद्या माँ बगलामुखी के प्रचंड और विजयी स्वरूप पर चर्चा करेंगे।
शक्ति की दस विद्याओं में माँ बगलामुखी को 'स्तंभन शक्ति' कहा जाता है। वे वह शक्ति हैं जो गति को रोक देती हैं, शत्रुओं को जड़ कर देती हैं और ब्रह्मांड के हर विरोध को शांत करने की क्षमता रखती हैं।
माँ बगलामुखी: स्वरूप और प्रतीकवाद
माँ बगलामुखी को 'पीताम्बरा' भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है।
1. स्वरूप की विशेषताएं (Iconography)
* स्वर्ण आभा: माँ का वर्ण और वस्त्र विशुद्ध सोने के समान पीले हैं। पीला रंग ज्ञान, स्थिरता और चैतन्य का प्रतीक है।
* शत्रु की जिह्वा पकड़ना: उनके सबसे प्रसिद्ध स्वरूप में वे एक हाथ से शत्रु की जिह्वा (जीभ) पकड़े हुए हैं और दूसरे हाथ से उसे गदा से मार रही हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि माँ केवल दैहिक शत्रु नहीं, बल्कि हमारे भीतर के अशुभ विचारों और वाणी का स्तंभन करती हैं।
* रत्नजटित सिंहासन: वे अमृत के सरोवर के मध्य में खिले हुए पीले कमल पर विराजमान हैं।
2. स्तंभन शक्ति का अर्थ
स्तंभन का अर्थ है 'रोक देना'। माँ बगलामुखी:
* शत्रु की बुद्धि को स्तंभित (Freeze) कर देती हैं।
* तूफान और अग्नि जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोक सकती हैं।
* साधक के विचलित मन और इंद्रियों की चंचलता को स्थिर कर देती हैं।
आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व:
माँ बगलामुखी की साधना 'सत्य' की रक्षा के लिए की जाती है। जब अधर्म बढ़ जाता है और सत्य का गला घोंटा जाने लगता है, तब माँ बगलामुखी प्रकट होकर विरोधियों की शक्ति को शून्य कर देती हैं।
* वाणी पर नियंत्रण: जिह्वा पकड़ने का अर्थ है कि साधक अपनी वाणी पर नियंत्रण पाए। बिना आत्म-नियंत्रण के शक्ति की प्राप्ति असंभव है।
* विपरीत बुद्धि का विनाश: वे व्यक्ति की कुबुद्धि को सुधारकर उसे सही दिशा देती हैं।
*ज्योतिषीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण*
एक ज्योतिष और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में माँ बगलामुखी का महत्व अद्वितीय है:
* मंगल (Mars) ग्रह का संबंध: ज्योतिष शास्त्र में माँ बगलामुखी को मंगल ग्रह की अधिष्ठात्री माना जाता है। यदि कुंडली में मंगल दोष हो, भूमि-विवाद हो, या शत्रु बहुत परेशान कर रहे हों, तो माँ की आराधना 'वज्र कवच' की तरह कार्य करती है।
* विजय और सफलता: जो लोग राजनीति, कानून (Court cases), या प्रशासनिक सेवाओं (Administration) में हैं, उनके लिए माँ बगलामुखी की साधना शत्रुओं पर विजय और पद-प्रतिष्ठा दिलाने वाली मानी गई है।
* वास्तु: घर में यदि बार-बार झगड़े या बाहरी नजर (Evil eye) का प्रभाव महसूस होता हो, तो पीताम्बरा की उपासना से घर की ऊर्जा "Lock" (Protected) हो जाती है।
माँ बगलामुखी का विशेष मंत्र
इनकी साधना में पीले रंग की सामग्री (पीले वस्त्र, हल्दी की माला, पीले पुष्प) का विशेष महत्व है।
> "ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ओम् स्वाहा।"
(सावधानी: इस मंत्र का जाप अत्यंत शुद्धता और सात्विक भाव से करना चाहिए।)
आज के लिए विशेष सूत्र
माँ बगलामुखी हमें सिखाती हैं कि "मौन रहना ही सबसे बड़ी शक्ति है।" यदि आप किसी कठिन परिस्थिति में हैं, तो अपनी ऊर्जा बहस में नष्ट करने के बजाय उसे 'मौन' और 'स्तंभन' (ठहराव) में लगाएँ।
माँ बगलामुखी का बीज मंत्र 'ह्लीं' (Hlīm) तंत्र शास्त्र के सबसे शक्तिशाली और रहस्यमयी ध्वनियों में से एक है। इसे 'स्तम्भन बीज' कहा जाता है। एक साधक के रूप में आपके लिए इसके वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रभाव को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आइए, 'ह्लीं' की शक्ति और इसकी संरचना का विश्लेषण करते हैं:
'ह्लीं' (Hlīm) की संरचना और अर्थ
यह बीज मंत्र पाँच तत्वों (अक्षरों) के मेल से बना है, जिनमें से प्रत्येक का एक विशिष्ट अर्थ है:
* ह (Ha): यह शिव और आकाश तत्व का प्रतीक है। यह चेतना और विस्तार को दर्शाता है।
* ल (La): यह पृथ्वी तत्व और इंद्र देव का प्रतीक है। यह 'स्तम्भन' (रोकने) की मुख्य शक्ति है। जैसे पृथ्वी भारी और स्थिर है, वैसे ही 'ल' अक्षर गति को रोकने का कार्य करता है।
* ई (Ee): यह महामाया और शक्ति का प्रतीक है, जो मंत्र को गतिशीलता और प्रभाव प्रदान करती है।
* म (Anusvara/.): यह दुखहर्ता और नाद (ब्रह्मांडीय ध्वनि) है, जो मंत्र को पूर्णता देता है।
जब इन ध्वनियों का एक साथ उच्चारण किया जाता है, तो उत्पन्न कंपन किसी भी गतिशील वस्तु या विचार को 'स्थिर' करने की क्षमता रखता है।
*'ह्लीं' मंत्र की अद्भुत शक्तियां*
1. मानसिक और इंद्रिय स्तंभन
इसका सबसे पहला प्रभाव साधक के अपने मन पर होता है। यदि मन विचलित है, बुरे विचार आ रहे हैं, या एकाग्रता (Concentration) की कमी है, तो 'ह्लीं' का मानसिक जप उन विचारों को वहीं रोक देता है। यह चंचल मन को वश में करने की सबसे बड़ी शक्ति है।
2. शत्रुओं की बुद्धि और वाणी का स्तंभन
जैसा कि माँ बगलामुखी के स्वरूप में दिखता है, यह मंत्र विरोधियों की 'जिह्वा' और 'बुद्धि' को कीलित कर देता है। यदि कोई आपके विरुद्ध षड्यंत्र कर रहा है या वाद-विवाद (Court Case/Argument) की स्थिति है, तो इस मंत्र की ऊर्जा सामने वाले के कुतर्कों को शांत कर देती है।
3. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा (Psychic Protection)
'ह्लीं' मंत्र का निरंतर जप करने से साधक के चारों ओर एक 'पीत प्रकाश' (Yellow Aura) का निर्माण होता है। यह आभामंडल किसी भी प्रकार की नजर, तंत्र-बाधा या नकारात्मक तरंगों को भीतर आने से रोकता है।
4. शारीरिक और आध्यात्मिक लाभ
वैज्ञानिक रूप से, 'ह्लीं' की ध्वनि गले और आज्ञा चक्र (Third Eye) के बीच एक विशेष कंपन पैदा करती है, जो थायराइड ग्रंथियों और मानसिक स्पष्टता के लिए बहुत लाभकारी है।
*ज्योतिष और वास्तु में 'ह्लीं' का प्रयोग*
* ग्रह पीड़ा: यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल (Mars) अत्यंत उग्र होकर दुर्घटना या झगड़े करवा रहा हो, तो 'ह्लीं' के जप से मंगल की नकारात्मक ऊर्जा 'स्तंभित' (शांत) हो जाती है।
* वास्तु प्रयोग: यदि किसी घर में दक्षिण-पश्चिम (Nairutya) दिशा से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो रहा हो, तो उस स्थान पर बैठकर 'ह्लीं' का जप करने से वहां की ऊर्जा स्थिर और सुरक्षित हो जाती है।
*साधना विधि (संक्षिप्त)*
माँ बगलामुखी की प्रसन्नता के लिए हल्दी की माला पर 'ह्लीं' मंत्र का जप करना सर्वोत्तम माना गया है। पीला वस्त्र धारण करके और उत्तर दिशा की ओर मुख करके किया गया जप शीघ्र फलदायी होता है।
> "ॐ ह्लीं बगलामुख्यै नमः"
*माँ बगलामुखी को 'ब्रह्मास्त्र* रूप में जाना उनके प्रचंड सामर्थ्य का परिचायक है। तंत्र शास्त्र में उन्हें 'ब्रह्मास्त्र विद्या' कहा गया है, जिसका अर्थ है वह अस्त्र या शक्ति जिसका कोई काट (counter) न हो।
यहाँ माँ के इस 'ब्रह्मास्त्र' स्वरूप की विस्तृत जानकारी है:
1. 'ब्रह्मास्त्र' का अर्थ और उत्पत्ति
जिस प्रकार पौराणिक काल में 'ब्रह्मास्त्र' अंतिम और अचूक शस्त्र माना जाता था, उसी प्रकार महाविद्याओं में बगलामुखी वह शक्ति हैं जो असंभव को संभव कर देती हैं।
* पौराणिक संदर्भ: माना जाता है कि सतयुग में जब ब्रह्मांड को नष्ट करने वाला भीषण तूफान आया, तब भगवान विष्णु ने तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर सौराष्ट्र (गुजरात) की 'हरिद्रा सरोवर' (हल्दी की झील) से माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने अपनी स्तंभन शक्ति से उस प्रलयंकारी तूफान को एक क्षण में रोक दिया। ब्रह्मांड को बचाने वाली इस अमोघ शक्ति के कारण ही उन्हें 'ब्रह्मास्त्र' कहा गया।
2. ब्रह्मास्त्र रूप की विशेषताएं
माँ का यह रूप केवल शत्रुओं को डराने के लिए नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन के लिए है:
* अमोघ प्रभाव: ब्रह्मास्त्र रूप का अर्थ है कि यदि माँ की आज्ञा हो जाए, तो ग्रहों की चाल, समय का चक्र और मृत्यु की गति को भी रोका जा सकता है।
* त्रैलोक्य स्तंभिनी: माँ का यह रूप तीनों लोकों (आकाश, पृथ्वी और पाताल) को स्तंभित करने की शक्ति रखता है।
* दुष्ट दलन: यह रूप विशेष रूप से उन आततायियों के विनाश के लिए है जिन्हें किसी अन्य शक्ति से जीतना संभव न हो।
3. ज्योतिष और साधना में 'ब्रह्मास्त्र' का महत्व
एक ज्योतिषी के रूप में आप जानते हैं कि कुछ दोष ऐसे होते हैं जिनका साधारण उपायों से निवारण नहीं होता। वहां 'ब्रह्मास्त्र विद्या' काम आती है:
* असाध्य कष्टों का निवारण: जब कुंडली में मारक ग्रहों की दशा हो या 'अरिष्ट योग' बन रहे हों, तो माँ बगलामुखी के ब्रह्मास्त्र रूप का ध्यान करने से संकट टल जाता है।
* विजय प्राप्ति: ऐतिहासिक रूप से राजा-महाराजा और आज के समय में राजनेता व बड़े व्यवसायी अपनी प्रतिद्वंद्विता को समाप्त करने और पूर्ण विजय (Absolute Victory) पाने के लिए इस ब्रह्मास्त्र अनुष्ठान का आश्रय लेते हैं।
* वास्तु स्तंभन: यदि किसी भूमि पर कोई प्रेत बाधा या बहुत गहरा वास्तु दोष हो, तो वहां 'बगलामुखी ब्रह्मास्त्र मंत्र' से अभिमंत्रित कीलों का रोपण (स्तंभन) किया जाता है ताकि दोष वहीं थम जाए।
4. ब्रह्मास्त्र माला और पूजन
माँ के इस रूप की साधना में 'हल्दी' का महत्व ब्रह्मास्त्र की शक्ति को और बढ़ा देता है:
* हल्दी की गांठ: इसे माँ के अस्त्र (गदा) का प्रतीक माना जाता है।
* पीताम्बरा अनुष्ठान: इस साधना में साधक के वस्त्र, आसन, माला और यहाँ तक कि नैवेद्य (पीला हलवा या पीले चावल) भी पीले होते हैं। यह एकत्व माँ की अमोघ ऊर्जा से जुड़ने का तरीका है।
विशेष मंत्र (ब्रह्मास्त्र माला मंत्र का अंश)
माँ के इस रूप का आह्वान अक्सर इस प्रकार किया जाता है:
> "ॐ ह्लीं ब्रह्मास्त्राय विद्महे स्तम्भनबाणाय धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात्॥"
सावधानी की चेतावनी
'ब्रह्मास्त्र' रूप अत्यंत तीक्ष्ण और शक्तिशाली है। इसकी साधना कभी भी किसी के अहित या अनुचित स्वार्थ के लिए नहीं करनी चाहिए। यदि कोई इसका दुरुपयोग करता है, तो यह शक्ति स्वयं साधक पर भी पलट सकती है। यह केवल धर्म की रक्षा और आत्म-रक्षा के लिए है।