14/01/2026
कब्ज मतलब जब पेट साफ़ ठीक से न हो
या शौच करते समय ज़ोर लगाना पड़े,
पेट भारी-सा रहे, गैस बने, या कई दिन तक motion ही न आए — यही कब्ज है।
आयुर्वेद के अनुसार 👇
कब्ज तब होता है जब शरीर में वात दोष बिगड़ जाता है ।
वात सूखापन बढ़ाता है, जिससे आँतें dry हो जाती हैं और मल सख़्त हो जाता है।
आयुर्वेद में कब्ज के main कारण
* कम पानी पीना 💧
* रूखा-सूखा, ज़्यादा junk food 🍟
* देर तक भूखा रहना या गलत टाइम पर खाना ⏰
* टेंशन लेना
* नींद पूरी न होना।
जब शरीर को सही पानी, तेलीय आहार और टाइम पर खाना नहीं मिलता,
तो वात बढ़ जाता है।
* आयुर्वेद के अनुसार कब्ज के दुष्प्रभाव -
आयुर्वेद में कब्ज को हल्का मत समझो, क्योंकि ये सिर्फ पेट की नहीं, पूरे शरीर की problem बना सकता है। जब वात दोष बिगड़ता है और मल शरीर में रुक जाता है, तो toxic vibes शुरू हो जाती हैं ।
🤢 1. अपच और गैस
कब्ज से खाना ठीक से नहीं पचता, जिससे गैस, एसिडिटी और पेट फूलना common हो जाता है।
😖 2. पेट दर्द और भारीपन
आँतों में जमा मल दर्द, ऐंठन और हमेशा भारीपन feel कराता है।
🤕 3. सिरदर्द और थकान
आयुर्वेद मानता है कि गंदगी अंदर रुकी रहे तो उसका असर दिमाग पर भी पड़ता है → headache + low energy।
😴 4. आलस और सुस्ती
शरीर हल्का feel ही नहीं करता, हर time lazy और sleepy mood रहता है।
😵💫 5. तनाव और चिड़चिड़ापन
कब्ज से वात और बढ़ता है, जिससे mood swings, anxiety और irritation होने लगती है।
😬 6. मुंह की बदबू
जब पेट साफ़ नहीं होता, तो toxins ऊपर की तरफ असर दिखाते हैं।
🌪️ 7. बवासीर और फिशर का खतरा
ज़ोर लगाकर motion करने से piles और fissure जैसी problems हो सकती हैं।
🧴 8. त्वचा की समस्याएँ
आयुर्वेद के अनुसार कब्ज से पिंपल्स, dull skin और रैशेज़ भी हो सकते हैं, क्योंकि body अंदर से clean नहीं रहती।
* आयुर्वेद के अनुसार वात-शामक आहार-
आयुर्वेद में वात दोष ठंडा, सूखा और हल्का होता है।
तो इसे शांत करने के लिए rule simple है 👉 गरम + नम + पौष्टिक खाना 😌
🥣 वात-शामक आहार क्या होता है?
जो खाना शरीर को गरमी, नमी और strength दे और digestion को smooth रखे — वही वात-शामक आहार है।
✅ क्या खाएं?
* गर्म और ताज़ा भोजन 🍲
* घी (थोड़ा-सा but daily) 🧈
* दूध (गरम करके) 🥛
* खिचड़ी, दलिया, सूप 🥣
* पकी हुई सब्ज़ियाँ – लौकी, तोरी,
* गाजर, कद्दू 🥕
* चावल, गेहूं 🍚
* खजूर, अंजीर, किशमिश (भिगोकर best) 🍯
❌ क्या avoid करें?
* बहुत सूखा और ठंडा खाना
* ज़्यादा कच्ची सब्ज़ियाँ
* जंक फूड, chips, cold drinks
* देर रात खाना 🌙
🧄 मसाले जो help करते
सोंठ, जीरा, अजवाइन, हींग 🌶️
ये digestion को boost करते हैं और गैस-कब्ज से बचाते हैं।
* आयुर्वेद के अनुसार वात दोष के लिए त्रिफला का सेवन-
त्रिफला = हरितकी + बिभीतकी + आँवला
ये तीनों मिलकर वात को शांत, पेट को smooth, और motion को easy बनाते हैं ।
🕰️ कब लें?
👉 रात को सोने से पहले सबसे best टाइम
क्योंकि रात में त्रिफला वात को settle करता है और सुबह पेट साफ़ कराने में help करता है ।
🥄 कैसे लें? (correct method 👇)
त्रिफला चूर्ण – ½ छोटा चम्मच
गुनगुना पानी या गुनगुना दूध – 1 कप
अच्छे से मिलाकर पी लो 🌙
अगर बहुत ज़्यादा वात है (dryness, gas, constipation),
तो गुनगुने दूध में थोड़ा सा घी डालना extra helpful होता है 🧈
⚠️ ध्यान रखने वाली बातें
रोज़ ज़्यादा मात्रा में मत लो
बहुत ज़्यादा कमजोरी, loose motion या पेट दर्द हो तो बंद कर दीजिए ।
खाली पेट दिन में लेने से बचो (वात वालों के लिए night best)
* अरंडी का तेल आयुर्वेद में वात-शामक माना जाता है। मतलब—वात शांत, पेट smooth,
🥄 1. कब्ज के लिए (most popular use)
👉 कैसे लें:
1 छोटा चम्मच अरंडी का तेल
1 कप गुनगुना दूध के साथ
👉 कब: रात को सोने से पहले 🌙
💡 इससे मल नरम होता है और सुबह पेट clean feel देता है।
* अगर बात आयुर्वेदिक ग्रंथों की करें जहाँ त्रिफला चूर्ण और अरंडी (Castor Oil / Eranda Taila) का ज़िक्र मिलता है, तो ये कुछ classical Ayurvedic texts हैं👇
📚 1. चरक संघीता (Charaka Samhita)
त्रिफला को त्रिदोष नाशक और रसायन (तीनों दोषों को संतुलित करने वाला) के रूप में बताया गया है।
यहाँ त्रिफला का पाचन, उर्जा और लम्बी आयु में लाभ के रूप में वर्णन मिलता है।
इसी ग्रंथ में अरंडी तेल (Eranda Taila) का भी उल्लेख है, खासकर विरेचन (cleansing/purgation) और वात दोष के इलाज में।
👉 असल में चरक संघीता आयुर्वेद का सबसे पुराना और authoritative ग्रंथ माना जाता है, जहाँ शरीर, दोष, औषधियाँ और उनकी क्रियाएँ detail में दी गयी हैं।
📚 2. सुश्रुत संघीता (Sushruta Samhita)
त्रिफला यहाँ भी वर्णित है और कई उपयोगों के साथ इसका therapeutic role बताया गया है।
अरंडी तेल का ज़िक्र भी सुश्रुत में मिलता है, विशेषकर वात-दोष से जुड़े रोगों की चिकित्सा में।
🪔 3. भावप्रकाश (Bhavaprakasha Nighantu)
यह एक बाद के काल का Ayurvedic text है जिसमें अरंडी तेल के गुण और उपयोग विस्तार से बताए गए हैं।
Eranda Taila को वात दोष, जोड़ों के दर्द, कब्ज आदि में उपयोगी बताया गया है।