Mittal Hospital & Research Centre

Mittal Hospital & Research Centre Mittal Hospital & Research Centre-300 bed multi-specialty private hospital in Ajmer, Rajasthan. Its a 1 stop destination for super-specialty tertiary care.

17/04/2026
09/04/2026

500 ग्राम के प्रीटर्म नवजात ने जीती जिंदगी की जंग, 100 दिन बाद मां की गोद में लौटा

अजमेर संभाग में अब तक का सबसे कम वजन और कम अवधि में जन्मे शिशु के सफल उपचार का मामला

मित्तल हॉस्पिटल के नियोनेटालॉजिस्ट, गायनेकोलॉजिस्ट, चाइल्ड स्पेशलिस्ट सहित एनआईसीयू नर्सिंग स्टाफ की टीम भावना और कड़ी मेहनत से मिली सफलता

अजमेर 8 अप्रैल()। मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में चिकित्सा क्षेत्र की एक उल्लेखनीय सफलता सामने आई है। यहां 8 जनवरी 2026 को मात्र 5 माह (प्रीटर्म) में जन्मे 500 ग्राम वजन के अत्यंत नाजुक नवजात शिशु को चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पित प्रयासों से 100 दिन बाद सुरक्षित उसकी मां की गोद में सौंपा गया। डिस्चार्ज के समय शिशु का वजन बढ़कर 1700 ग्राम हो गया।

यह अजमेर संभाग में अब तक का सबसे कम वजन और कम अवधि में जन्मे शिशु का सफल उपचार माना जा रहा है। जन्म के बाद से लेकर 100 दिनों तक शिशु का जीवन संघर्षपूर्ण रहा, जिसमें कई बार उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हुई, लेकिन चिकित्सकीय टीम के धैर्य, अनुभव और निरंतर देखभाल ने अंततः उसे सुरक्षित जीवन प्रदान किया।

इस जटिल उपचार में नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ रोमेश गौतम, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ प्रीतम कोठारी, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रशांत माथुर, डॉ प्रीति गर्ग तथा एनआईसीयू प्रभारी सिस्टर स्वर्णलता एंड्रयूज सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डॉ रोमेश गौतम ने बताया कि जन्म के समय शिशु के फेफड़े, मस्तिष्क और आंतें पूरी तरह विकसित नहीं थीं और उसका आकार हथेली से भी छोटा था। उसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (आरडीएस) से बचाने के लिए सर्फेक्टेंट थेरेपी दी गई, जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार हुआ। उपचार के शुरुआती 20 से 22 दिनों में उसका वजन घटकर 450 ग्राम तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में धीरे धीरे सुधार हुआ और एक माह में उसने दूध पचाना शुरू कर दिया।

उन्होंने बताया कि ऐसे शिशुओं के उपचार में केवल जीवित रखना ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि उनके सभी अंगों,आंख, मस्तिष्क, हृदय और फेफड़ों का समुचित विकास सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है। इसके लिए नियमित जांच और सतत निगरानी की जाती है।

विशेष बात यह रही कि इस पूरे उपचार का खर्च राजस्थान सरकार की ईएसआईसी योजना के तहत वहन किया गया, जिससे अभिभावकों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। उपचार के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए शिशु को नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में रखा गया तथा 24 घंटे एक चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ की विशेष निगरानी में रखा गया।
तो होते 25 लाख तक खर्च.....
ऐसे नवजात यदि देश के बड़े से बड़े चिकित्सा संस्थान में पैदा हों तो भी वहां की जीवन रक्षा दर 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। ऐसी स्थिति में जन्में बच्चे पर वहां आने वाला खर्च भी सामान्य रूप से देखा जाए तो कम से कम 25 लाख रुपए से ज्यादा ही आता है। नवजात को वैसा ही उपयुक्त वातावरण मित्तल हॉस्पिटल में उपलब्ध कराया गया।

समय पर लिए चिकित्सकीय निर्णय...
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ प्रीतम कोठारी ने बताया कि प्रसूता की स्थिति भी प्रारंभ में अत्यंत गंभीर थीए जिसमें मां और शिशु दोनों के जीवन को खतरा था। समय पर लिए गए चिकित्सकीय निर्णय और सर्जरी से दोनों की जान बचाई जा सकी।
मां को पूरी तरह से कर दिया प्रशिक्षित....
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीति गर्ग ने कहा कि ऐसे मामलों में चिकित्सकीय टीम के साथ.साथ परिवार का धैर्य और सहयोग भी अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में परिजनों ने पूरा सहयोग दिया जिससे उपचार सफल हो सका। नवजात शिशु के आगे के जीवन के लिए उसकी मां को पूरी तरह से प्रशिक्षित कर दिया गया।
हॉस्पिटल प्रबंध मंडल के सुनील मित्तल, डॉ दिलीप मित्तल, मनोज मित्तल, डॉ चक्रपाणि मित्तल, सार्थक मित्तल, सीईओ एस के जैन, वाइस प्रेसिडेंट श्याम सोमानी, डीजीएम विजय रांका, वीपीओ ऑपरेशन डॉ विद्या दायमा, नर्सिंग अधीक्षक राजेन्द्र कुमार गुप्ता ने मित्तल हॉस्पिटल में प्रीटर्म और लो बर्थ वेट जन्मे शिशुओं के उपचार में नए आयाम स्थापित किए जाने का श्रेय चिकित्सकों और स्टाफ की टीम भावना, समर्पण और आधुनिक सुविधाओं को दिया है। उन्होंने कहा कि नवजात शिशुओं की उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के कारण जटिल से जटिल मामलों का भी सफल उपचार संभव हो पा रहा है।

07/04/2026

बदलते मौसम व बिगड़ती जीवनशैली से बढ़ रहीं बीमारियां, सतर्कता ही बचाव: विशेषज्ञ

अजमेर, 7 अप्रैल()। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयोजित जागरूकता संगोष्ठी में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बदलते मौसम और आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न स्वास्थ्य चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान में मौसम का स्वरूप अत्यंत अनिश्चित हो गया है। गर्मी में बारिश और वर्षा ऋतु में सूखे जैसी स्थितियां शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रही हैं। इसके चलते लोग बार-बार वायरल संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं, जिससे सर्दी, खांसी और बुखार जैसी समस्याएं लोगों में दीर्घकालिक होती देखी जा रही हैं।
वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गुप्ता और डॉ. विवेक माथुर ने कम उम्र में बढ़ते हार्ट अटैक के मामलों पर चिंता जताते हुए बताया कि तनाव, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को आवश्यक बताया। उनका कहना था कि हर रोग पहले संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। शरीर में किसी भी तरह के संकेत को तुरंत अपने चिकित्सक से साझा करें और उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक से ह्रदय रोगियों का उपचार अजमेर में संभव है।
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ चक्रपाणि मित्तल ने किडनी संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गलत खानपान, दवाइयों का अनियंत्रित उपयोग और पानी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने पर्याप्त जल सेवन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किडनी रोग लाइलाज नहीं रहा। किडनी रोगी का उपचार संभव है बशर्ते है कि रोगी को रोग शुरू होने के प्रारंभिक चरण में ही उपचार मिलना शुरू हो जाए। आमतौर पर बिना चिकत्सकीय परामर्श के दर्द निवारक गोलियों का सेवन करने, रोग के संकेतों को नजरअंदाज करने,अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित,खानपान में परहेज नहीं रखने वालों को किडनी रोग होने की संभावना ज्यादा होती है।
ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रजत चौधरी ने बच्चे, बूढे और जवान चाहे वह स्त्री हो अथवा पुरुष सभी में कैंसर रोग के मामलों में वृद्धि पर चिंता जाहिर की। उन्होंने धूम्रपान,तंबाकू और जर्दा के बढ़ते सेवन को कैंसर के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि धूम्रपान न केवल व्यक्ति बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी हानिकारक है।
न्यूरो सर्जन डॉ ए आर गौरी ने बताया कि वर्तमान समय में लोग सर्वाइकल और साइटिका जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, जो लंबे समय तक बैठकर काम करने, मोबाइल स्क्रीन टाइम बढ़ने और गलत शारीरिक मुद्रा का परिणाम हैं। उन्होंने बताया कि समस्या यहां आती है कि जब रोगी तुरंत ही ठीक तो होना चाहता है किन्तु इसके लिए पांच दिन बिस्तर पर लेटकर विश्राम करना नहीं चाहता। उसे चिकित्सक की यह सलाह गलत लगती है, जबकि इन रोगों से बचाव ही उपचार से ज्यादा कारगर हैं जो स्वयं को जांचनें, जीवनशैली में जहां जरूरत है बदलाव लाने और नियमित व्यायाम करने में है।
गेस्टोएंट्र्रोलॉजिस्ट डॉ एसपी जिंदल, यूरोलॉजिस्ट डॉ संतोष घाकड़, नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ रोमेश गौतम, चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ सुनील गोयल, डॉ प्रशांत माथुर एवं डॉ प्रीति गर्ग, जनरल फिजीशियन डॉ संदीप बघे, डॉ शिखा गुप्ता, डॉ प्रशांत शर्मा, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ मुकेश गोयल, डॉ प्रतीक कोठारी, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ ऋषभ कोठारी, आॅप्थोलॉजिस्ट डॉ गोपाल दमानी, गायनेकोलॉजिस्ट डॉ स्मिता चपलोत डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ डिम्पल राजपुरोहित आदि विशेषज्ञों ने भी मौसम में परिवर्तन के कारण होने वाली समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए खान—पान को नियंत्रित रखने, नियमित चिकित्सकीय परामर्श एवं शारीरिक जांच की सलाह दी।
संगोष्ठी के अंत में चिकित्सकों ने आमजन से अपील की कि वे स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, नियमित जांच कराएं और संतुलित जीवनशैली अपनाकर बीमारियों से बचाव करें। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ जनसम्पर्क प्रबंधक संतोष कुमार गुप्ता ने किया।

07/04/2026

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बार बार कंधा उतर जाने से पीड़ित की मित्तल हॉस्पिटल में हुई सफल सर्जरीआॅर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ. अरुण राजपुरोहित ने की बैंका...
17/03/2026

बार बार कंधा उतर जाने से पीड़ित की मित्तल हॉस्पिटल में हुई सफल सर्जरी

आॅर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ. अरुण राजपुरोहित ने की बैंकार्ट रिपेयर सर्जरी

अजमेर, 16 मार्च()। बार बार कंधा उतर जाने की समस्या से पीड़ित अजमेर के कुचील क्षेत्र स्थित ग्राम चीता खेड़ा निवासी एक युवक का मित्तल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, अजमेर में आॅर्थोस्कोपिक सर्जन डॉ अरुण राजपुरोहित ने न्यूनतम इनवेसिव आॅर्थोपेडिक प्रक्रिया से दूरबीन द्वारा ऑपरेशन किया । युवक को उपचार के तीसरे दिन हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई।
डॉ अरुण राजपुरोहित ने बताया कि युवक बार बार कंधे के डिस्लोकेशन की समस्या से लंबे समय से पीड़ित था। रोगी ने रूढ़िवादी उपचार किए किन्तु कोई महत्वपूर्ण सुधार नहीं हुआ। स्थाई उपचार के लिए हॉस्पिटल आने पर उसे बैंकार्ट सर्जरी के बारे में बताया गया। युवक को दूरबीन के जरिए की जाने वाली इस न्यूनतम इनवेसिव आॅर्थोपेडिक प्रक्रिया के बारे में सभी जानकारी दी गई एवं आवश्यक जांचें कराई गई। बताया गया कि इस सर्जरी में उसके कंधे पर किसी तरह का चीरा अथवा घाव नहीं होगा। दूरबीन के जरिए बिना रक्त बहाए यह सर्जरी की जा सकेगी। रोगी द्वारा सर्जरी के लिए सहमति देने पर उसका उपचार किया गया।

डॉ अरुण राजपुरोहित ने बताया कि बैंकार्ट रिपेयर सर्जरी अजमेर के मित्तल हॉस्पिटल में पहली बार की गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह के उपचार के लिए लोग अब तक अजमेर से बाहर जाया करते हैं। अब मित्तल हॉस्पिटल में ही कंधे व घुटने की दूरबीन से सर्जरी सफलता से की जा रही है। राज्य एवं केंद्र सरकार की योजना में इस तरह की सर्जरी का लाभ लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पीड़ित युवक को इस सर्जरी की सलाह देने का मुख्य उद्देश्य कंधे के जोड़ में स्थिरता बहाल करना था। जिससे मरीज पूरी तरह से गति कर सकें और अव्यवस्था के डर के बिना अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस आ सकें। उन्होंने बताया कि आमतौर पर यह सर्जरी ओपन बैंकार्ट एवं आर्थोस्कोपिक दोनों ही रूप से की जाती है यह मरीज की चोट और उसकी स्थिति देखने के बाद सुनिश्चित किया जाता है। किन्तु दूरबीन के जरिए की जाने वाली सर्जरी से ऊतक क्षति कम होती है और मरीज को तेज़ी से रिकवरी होती है।
डॉ राजपुरोहित ने छुट्टी देने से पहले मरीज को सभी आवश्यक सलाह प्रदान की जिससे मरीज के हाथ का मूवमेंट भी बना रहे और उसे दैनिक जीवन में बाधा नहीं आए।रोगी ने मित्तल हॉस्पिटल में मिली सेवाओं को श्रेष्ठ बताया उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के चिकित्सक एवं नर्सिंग कर्मचारियों का मरीज के प्रति बहुत संवेदनशील व्यवहार रहता है। हॉस्पिटल में उपचार के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई।

12/03/2026

मित्तल हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. चक्रपाणि मित्तल की सेवाएं शुरू।baat aaj ki ajmer news ajmer,ajmer news,ajmer news...

13/12/2025

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