28/02/2026
शिवपुरी, अक्कलकोट की पवित्र भूमि पर जब यज्ञ की अग्नि प्रज्वलित थी, मंत्रों की ध्वनि आकाश को स्पर्श कर रही थी, उसी दिव्य क्षण में श्री वॉल्टर जोसेफ जी ने वह अनुभव किया जिसे शब्दों में बाँध पाना आसान नहीं।
उन्होंने बताया — अग्नि की लपटों के मध्य उन्हें स्वयं भगवान शिव के दर्शन हुए। लगभग 3 मीटर ऊँचा दिव्य स्वरूप… स्वर्णिम जटाएँ, मानो सुनहरी जंजीरों और वलयों की तरह चमकती हुईं… तेजस्वी आभा से घिरा हुआ वह स्वरूप केवल दिखाई नहीं दे रहा था, बल्कि भीतर तक स्पंदित हो रहा था।
यह केवल एक दर्शन नहीं था, यह विश्वास की पराकाष्ठा थी।
जब साधना सच्ची हो, जब अग्नि में आहुति केवल समिधा की नहीं बल्कि अहंकार की भी हो — तब ईश्वर स्वयं साक्षात हो उठते हैं।
हर हर महादेव 🔱✨